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सोमवार, 19 अक्टूबर 2015

आश्वासन


   राजा शाऊल 9 वर्ष तक दाऊद के पीछे ऐसे पड़ा रहा "...जैसा कि कोई पहाड़ों पर तीतर का अहेर करे" (1 शमूएल 26:20) और दाऊद ने अपनी परेशानी में परमेश्वर को पुकारा, "हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?" (भजन 13:1-2)

   लंबे समय तक चलती रहने वाली परेशानी हमें घबरा सकती है; हमें उसका समाधान चाहिए होता है, तुरंत समाधान। लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनका समाधान नहीं वरन उन्हें सहना होता है। हम अपने कष्टों में परमेश्वर की दोहाई दे सकते हैं, उसे पुकार सकते हैं। हमारा परमेश्वर पिता चाहता है कि हम अपने संघर्षों में उसे सम्मिलित करें, अपनी परिस्थितियों को उसके साथ बाँटें। जैसा वह हमें समझता और जानता है, वैसा और कोई नहीं।

   जब हम अपनी शिकायतें लेकर उसकी ओर फिरते हैं तब हम अपने बारे में सचेत होते हैं। दाऊद ने अपनी विकट परिस्थिति में जीवन की निश्चयता को पहिचाना - उसके प्रति परमेश्वर का अडिग और सदा बने रहने वाला प्रेम! दाऊद ने अपने आप को स्मरण कराया, "परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है" (भजन 13:5-6)। चाहे परेशानियाँ बनी रहीं लेकिन दाऊद उन सभी परिस्थित्यों में भजन गा सका, क्योंकि उसे स्मरण रहा कि वह परमेश्वर की प्रीय संतान है; बस यही हम मसीही विश्वासियों को भी स्मरण रखना है।

    ऐ. डबल्यू थोरोल्ड ने लिखा, "आत्मिक जीवन की सबसे ऊँची चोटी खिली हुई धूप में हर्षित आनन्द नहीं है, वरन परमेश्वर के प्रेम में पूर्ण और निःसन्देह भरोसा है।" हमें परमेश्वर की ओर से दृढ़ और अपरिवर्तनीय आश्वासन है कि हमारी सभी परेशानियों और समस्त कष्टों के समयों में भी परमेश्वर का प्रेम हमारे साथ होगा; इसके लिए उसपर संपूर्ण विश्वास किया जा सकता है।


जब सब कुछ असफल भी हो जाए तब भी परमेश्वर का प्रेम स्थिर बना रहता है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा? 
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा? 
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी; 
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा। 
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2


रविवार, 18 अक्टूबर 2015

समाप्त?


   इस संसार की हर चीज़ का आखिरकर अन्त हो ही जाता है, जो कई बार निराशाजनक हो सकता है। ऐसा एहसास तब होता है जब हम कोई बहुत अच्छी पुस्तक पढ़ रहे हों, और नहीं चाहते कि वह कभी समाप्त हो, परन्तु उसका अन्त आता ही है; या फिर कोई बहुत अच्छा चलचित्र देख रहे हों और मन करता रहे कि कुछ और, थोड़ा सा और किंतु फिर भी वह स्माप्त हो ही जाता है। हर चीज़ का, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, अन्त अनिवार्य है। हमारे जीवन का भी अन्त अवश्यंभावी है, चाहे वह अनेपक्षित और अनायास ही हो। किसी प्रीय जन की अर्थी के पास खड़े होने पर मन के दुखद खालीपन के एहसास से हम अनभिज्ञ नहीं हैं, बार बार मन में चाह उठती है कि काश ऐसा अभी नहीं हुआ होता, थोड़ा समय और मिल जाता।

   लेकिन हम मसीही विश्वासियों के पास वह आशा है जो संसार में किसी और के पास कदापि नहीं है, प्रभु यीशु में मिलने वाला अनन्त जीवन और प्रभु में सोए हुए अपने प्रीय जनों के साथ पुनः अनन्तकाल तक रहने की आशा! प्रभु यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान ने हम मनुष्यों के लिए इस अभूतपूर्व आशा को जन्म दिया है। प्रभु यीशु में सांसारिक जीवन का अन्त, स्वर्ग में अनन्तकाल के सुखों का आरंभ है। क्योंकि हमारे शरीर अनन्तकाल तक रहने वाली सच्चाई नहीं हैं, इसीलिए प्रेरित पौलुस ने इस संदर्भ में कुरिन्थुस के विश्वासियों को लिखा "देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे" (1 कुरिन्थियों 15:51) और उन्हें आश्वस्त किया कि प्रभु यीशु के जयवंत कार्य के कारण हम निसंकोच कह सकते हैं कि "हे मृत्यु तेरी जय कहां रही?" (1 कुरिन्थियों 15:55)

   इसलिए इस जीवन की समाप्ति को लेकर अपने हृदयों को व्याकुल ना होने दें। शारीरिक विछोह दुखदायी तो होता है लेकिन हमें परमेश्वर के द्वारा प्रभु यीशु में अनन्त विजय का मार्ग उपलब्ध कराया गया है। अब जो मसीह यीशु में हैं उनके लिए "समाप्त" अनन्तकाल के समारोह का आरंभ है। क्या आप इस समारोह में सम्मिलित होंगे? - जो स्टोवैल


मसीह यीशु में सांसारिक अन्त स्वर्गीय आरंभ है।

और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:3 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:50-58
1 Corinthians 15:50 हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है। 
1 Corinthians 15:51 देखे, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। 
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तक वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया। 
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? 
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। 
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। 
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 53-55
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1


शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

बाधा


   कुछ समय पहले की बात है मैंने अपने पड़ौसी के घर की ओर से एक चिड़िया की परेशान चहचहाने की आवाज़ सुनी। मैंने देखा कि चिड़िया का घोंसला और उसमें उसके बच्चे एक ऐसे स्थान पर थे जिसके आगे परदा आ गया था और वह चिड़िया अपने बच्चों को भोजन करा पाने में असमर्थ, परेशान चहचहाती हुई इधर-उधर उड़ रही थी, बच्चों तक पहुँचने का मार्ग खोज रही थी। मैंने अपने पड़ौसियों को स्थिति से अवगत कराया और उन्होंने वह घोंसला और उन बच्चों को एक अन्य खुले किंतु सुरक्षित स्थान पर रख दिया।

   प्रेम के बीच में बाधा डालने वाली बात से बढ़कर हृदयविदारक शायद ही कोई बात होगी। इस्त्राएल हज़ारों साल से अपने मुक्तिदाता मसीहा की बाट जोह रहा था, परन्तु जब वह वाचा किया हुआ मुक्तिदाता प्रभु यीशु अपने लोगों के पास आया, तो उन्होंने उसका और उसके प्रेम का तिरिस्कार कर दिया। प्रभु यीशु ने उनके उसे तिरिस्कृत करने, उसे ग्रहण ना करने को दर्शाने के लिए मुर्गी और उसके बच्चों का उदाहरण लिया: "हे यरूशलेम, हे यरूशलेम; तू जो भविष्यद्वक्ताओं को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए, उन्हें पत्थरवाह करता है, कितनी ही बार मैं ने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्‍चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे कर लूं, परन्तु तुम ने न चाहा" (मत्ती 23:37)।

   हमारे पाप हमारे और परमेश्वर के बीच में आनी वाली बाधा हैं: "परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उस का मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता" (यशायाह 59:2)। परमेश्वर हम सब से प्रेम करता है और चाहता है कि प्रभु यीशु में सेंत-मेंत उपलब्ध पापों से मुक्ति पाकर सब उसके पास आ जाएं: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में हमारे पाप बाधा बनते हैं, परन्तु कलवरी के क्रूस पर अपने बलिदान और पुनरुत्थान के द्वारा प्रभु यीशु ने उस बाधा को हटाने का कार्य पूरा कर दिया है (रोमियों 5:8-17; 8:11)।

   अब परमेश्वर हमारे साथ संगति रखने और हमें आशीषित करने को लालायित रहता है, हमारी प्रतीक्षा में रहता है। वह चाहता है कि हम उसके इस उपहार को स्वीकार करें और उसके साथ अनन्त जीवन में प्रवेश कर लें। - डेनिस फिशर


अपने क्रूस के द्वारा प्रभु यीशु पाप के दण्ड से बचाता है, शैतान के हाथों से छुड़ाता है, परमेश्वर के साथ मेल-मिलाप कराता है।

वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:11-13

बाइबल पाठ: मत्ती 23:37-39
Matthew 23:37 हे यरूशलेम, हे यरूशलेम; तू जो भविष्यद्वक्ताओं को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए, उन्हें पत्थरवाह करता है, कितनी ही बार मैं ने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्‍चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे कर लूं, परन्तु तुम ने न चाहा। 
Matthew 23:38 देखो, तुम्हारा घर तुम्हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है। 
Matthew 23:39 क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि अब से जब तक तुम न कहोगे, कि धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है, तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 50-52
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5


शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

चट्टान


   लंदन में जगह जगह कोड पत्थर से बनी विलक्षण मूर्तियाँ और अन्य वस्तुएँ हैं। कोड पत्थर सन 1700 के अन्तिम दशकों में एलिनौर कोड द्वारा अपने पारिवारिक व्यवसाय के लिए बनाया गया एक कृत्रिम पत्थर है जिस पर समय, ऋतु और प्रदूषण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यद्यपि यह पत्थर औद्योगिक क्रांति के समय में एक चमत्कार की तरह था, लेकिन 1840 के दशक में एलिनौर की मृत्योप्रांत इसे बनाना क्रमशः बन्द कर दिया गया और उसका स्थान पोर्टलैंड सिमेंट ने ले लिया। इसके बावजूद, आज भी कोड पत्थर से बनी दर्जनों वस्तुएं 150 वर्षों से भी अधिक समय से लंदन के कठोर वातावरण को झेलती हुई सलामत खड़ी हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने प्रभु यीशु को "जीवित पत्थर" कहा है। पतरस ने लिखा, "उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है। तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों" (1 पतरस 2:4-5)। हमारे उद्धार की चट्टान प्रभु यीशु का बलिदान परमेश्वर पिता की नज़रों में बहुमूल्य है। मसीह यीशु वह चिरस्थायी चट्टान है जिसपर परमेश्वर पिता ने हमारे उद्धार को स्थापित किया है; केवल वही हमारे लिए सार्थक जीवन की नींव है: "क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता" (1 कुरिन्थियों 3:11)।

   इस पतित संसार में जीवन के कठोर थपेड़ों का सामना हम केवल प्रभु यीशु की सामर्थ के साथ कर सकते हैं। जो जीवन अबदी चट्टान प्रभु यीशु पर खड़े हैं वे संसार के हर प्रहार को सरलता से सह लेंगे, उनमें स्थिर बने रहेंगे। - बिल क्राउडर


यदि हम अबदी चट्टान यीशु पर बने रहें तो हमें किसी से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी। परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया। - मत्ती 7:24-27

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:1-10
1 Peter 2:1 इसलिये सब प्रकार का बैर भाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके। 
1 Peter 2:2 नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। 
1 Peter 2:3 यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है। 
1 Peter 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है। 
1 Peter 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों। 
1 Peter 2:6 इस कारण पवित्र शास्त्र में भी आया है, कि देखो, मैं सिय्योन में कोने के सिरे का चुना हुआ और बहुमूल्य पत्थर धरता हूं: और जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह किसी रीति से लज्ज़ित नहीं होगा। 
1 Peter 2:7 सो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है, पर जो विश्वास नहीं करते उन के लिये जिस पत्थर को राजमिस्त्रीयों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया। 
1 Peter 2:8 और ठेस लगने का पत्थर और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है: क्योंकि वे तो वचन को न मान कर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे। 
1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की ) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर की प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4


गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

भरोसेमन्द


   कुछ वर्ष पहले मैंने पाँचवीं कक्षा के बच्चों से कहा कि वे उन प्रशनों की सुची तैयार करें जो, यदि प्रभु यीशु अगले सप्ताह उनसे मिलने आ जाए तो वे प्रभु यीशु से पूछेंगे। साथ ही मैंने कुछ व्यसकों से भी यही करने को कहा। परिणाम आशचर्यजनक रीति से भिन्न थे; दोनों के द्वारा तैयार करी गई सूचियों में अनेक प्रकार के प्रश्न थे, किंतु बच्चों के प्रश्नों में स्वर्ग या परमेश्वर को लेकर कोई संशय नहीं था, वे मासूमियत से भरे हुए थे, और कुछ प्रश्न तो विचारात्मक थे। बच्चों द्वारा दिए गए कुछ प्रश्न थे: "क्या स्वर्ग में हमें पोशाक पहने हुए भजन गाते रहना पड़ेगा?"; "क्या मेरा पिल्ला भी स्वर्ग में होगा?"; "व्हेल मछलियाँ नूह के जहाज़ के भीतर थीं या बाहर?"; "आपके साथ वहाँ ऊपर मेरे दादाजी कैसे हैं?"

   लेकिन व्यसकों के प्रश्नों में परमेश्वर और उसके कार्यों को लेकर भरोसे की कमी थी: "मैं कैसे जानूँ कि आप मेरी प्रार्थना सुनते हैं?"; "अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है?"; "प्रेम करने वाला परमेश्वर ने मेरे साथ ऐसी त्रासदी क्यों होने दी?" आदि।

   बच्चे सामान्यतः व्यसकों को परेशान करने वाली चिंताओं और परेशानियों से मुक्त जीवन जीते हैं; उनका साधारण सा विश्वास उन्हें परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखने में सहायक होता है। लेकिन व्यसक जीवन की परीक्षाओं और परेशानियों में उलझकर परमेश्वर के प्रति बच्चों के समान साधारण विश्वास बनाए नहीं रख पाते; जबकि बच्चे परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा दिए गए दृष्टिकोण को बनाए रखते हैं जो परमेश्वर को उसकी महानता में देखने पाता है (भजन 8:1-2)।

   परमेश्वर भरोसेमन्द है, और वह चाहता है कि हर परिस्थिति, परेशानी, आवश्यकता और तकलीफ में भी हम बच्चों के समान उसपर अपना भरोसा बनाए रखें (मत्ती 18:1-3)। - रैंडी किलगोर


परमेश्वर के साथ हमारी निकटता हमारी आँखों को आज की परीक्षाओं से हटाकर अनन्तकाल के विजयोत्सव पर केंद्रित रखती है।

उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, कि स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है? इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया। और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे। - मत्ती18:1-3

बाइबल पाठ: भजन 8
Psalms 8:1 हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है। 
Psalms 8:2 तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नेव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेने वालों को रोक रखे। 
Psalms 8:3 जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; 
Psalms 8:4 तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? 
Psalms 8:5 क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है। 
Psalms 8:6 तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है; तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है। 
Psalms 8:7 सब भेड़- बकरी और गाय- बैल और जितने वनपशु हैं, 
Psalms 8:8 आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियां, और जितने जीव-जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं। 
Psalms 8:9 हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 45-46
  • 1 थिस्सलुनीकियों 3


बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

बीज और भूमि


   यदि आपको कद्दू उगाने का शौक है तो संभवतः आपने विशाल डिल्स एटलांटिक प्रजाति के कद्दुओं के बारे में सुना होगा। कैनाडा के एक फार्म में विकसित किए गए इन कद्दुओं ने सारे विश्व में अपने आकार द्वारा कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सन 2011 में क्यूबेक, कैनाडा में उगाए गए इस प्रजाति के एक कद्दू का वज़न 850 किलो था। जब समाचार पत्रों के संवादाताओं ने पूछा कि इतने बड़े कद्दू उगाना कैसे संभव हुआ तो किसान ने कहा कि यह उस भूमि के कारण है जिसमें बीज बोए गए थे। बीज तो विशाल कद्दू प्रजाति के थे लेकिन यदि भूमि सही प्रकार की ना हो तो कद्दू ठीक से बढ़ेंगे नहीं।

   प्रभु यीशु ने विभिन्न प्रकार की भूमियों के एक दृष्टांत द्वारा परमेश्वर के वचन के प्रति लोगों के प्रत्युत्तर के बारे में समझाया (मत्ती 13)। कुछ बीज मार्ग के किनारे पड़ा और चिडियों ने उसे चुग लिया, कुछ उगा तो लेकिन जड़ नहीं पकड़ पाया, कुछ उगा लेकिन झाड़ियों ने उसे दबाकर निष्फल कर दिया, लेकिन वह बीज जो अच्छी भूमि पर गिरा उग कर तीस, साठ, सौ गुणा फल लाया (मत्ती 13:8)।

   परमेश्वर चाहता है कि वह अपने वचन का बीज हम में बोए जिससे कि हम उसके अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाएं; लेकिन फल वहीं आएगा जहाँ भूमि तैयार होगी, अच्छी होगी। हम में से प्रत्येक को अपने आप से यह पूछने की आवश्यकता है कि परमेश्वर के वचन रूपी बीज के लिए हम किस प्रकार की भूमि हैं? - ब्रेंट हैकेट


आत्मा का फल आज्ञाकारिता की भूमि में उगता और बढ़ता है।

पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ। उसी की महिमा अब भी हो, और युगानुयुग होती रहे। आमीन। - 2 पतरस 3:18

बाइबल पाठ: मत्ती 13:1-9
Matthew 13:1 उसी दिन यीशु घर से निकलकर झील के किनारे जा बैठा। 
Matthew 13:2 और उसके पास ऐसी बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई कि वह नाव पर चढ़ गया, और सारी भीड़ किनारे पर खड़ी रही। 
Matthew 13:3 और उसने उन से दृष्‍टान्‍तों में बहुत सी बातें कही, कि देखो, एक बोने वाला बीज बोने निकला। 
Matthew 13:4 बोते समय कुछ बीज मार्ग के किनारे गिरे और पक्षियों ने आकर उन्हें चुग लिया। 
Matthew 13:5 कुछ पत्थरीली भूमि पर गिरे, जहां उन्हें बहुत मिट्टी न मिली और गहरी मिट्टी न मिलने के कारण वे जल्द उग आए। 
Matthew 13:6 पर सूरज निकलने पर वे जल गए, और जड़ न पकड़ने से सूख गए। 
Matthew 13:7 कुछ झाड़ियों में गिरे, और झाड़ियों ने बढ़कर उन्हें दबा डाला। 
Matthew 13:8 पर कुछ अच्छी भूमि पर गिरे, और फल लाए, कोई सौ गुना, कोई साठ गुना, कोई तीस गुना। 
Matthew 13:9 जिस के कान हों वह सुन ले।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2


मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015

अतीत


   प्रिज़न फ़ेलोशिप (कारावास सेवकाई) के संस्थापक, चक कोल्सन ने जीवन के 40 वर्ष लोगों तक प्रभु यीशु का सुसमाचार पहुँचाने और सुनाने का कार्य किया। जब अप्रैल 2012 में उनका देहान्त हुआ तो एक समाचार पत्र ने मुखपृष्ठ पर इसे मुख्यसमाचार बनाकर इस शीर्षक के साथ छापा: "राष्ट्रपति निक्सन के लिए कुकृत्य करने वाले चार्ल्स कोल्सन का 80 वर्ष की आयु में देहान्त।" यह अचंभित करने वाली बात थी कि प्रभु यीशु को जीवन समर्पण करने से दशकों पहले और केवल कुछ समय तक अपने राजनैतिक स्वामियों के लिए अनैतिक और अन्यायसंगत कार्य करने के कारण कोल्सन की प्रभु यीशु के लिए करी गई सेवा और समर्पण का जीवन नज़रन्दाज़ कर दिया गया; प्रभु यीशु को जानने और मानने से उनके जीवन में आए आमूलचूल परिवर्तन को कोई महत्व नहीं दिया गया, उन्हें उनके अतीत के कुकर्मों के साथ ही स्मरण किया गया।

   प्रेरित पौलुस के मसीही विश्वास में आने और प्रभु यीशु द्वारा परिवर्तित होने को भी आरंभ में लोगों ने सन्देह और भय के साथ देखा क्योंकि वह पहले मसीही विश्वासियों को सतानेवाला व्यक्ति था। जब पौलुस ने प्रभु यीशु का प्रचार करना और यह बताना आरंभ किया कि वह ही परमेश्वर का पुत्र है तो लोगों ने कहा, "...क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए?" (प्रेरितों 9:21)। जब पौलुस ने यरुशालेम जाकर प्रभु यीशु के चेलों के साथ जुड़ना चाहा, तो उन्होंने उसका विश्वास नहीं किया, वरन वे उससे डरते रहे। बाद के समयों में पौलुस ने कभी अपने अतीत को भुलाया नहीं, लेकिन अपने बीते समयों के कुकृत्यों से मिली बदनामी के वर्णन को परमेश्वर के अनुग्रह के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया (1 तिमुथियुस 1:13-14)।

   पौलुस के समान हमें अपने अतीत की असफलताओं का प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं है, और ना ही यह जताने का प्रयास करना चाहिए कि मानो वे गलत कार्य हमसे हुए ही नहीं। लेकिन हम परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं कि उसके प्रेम, अनुग्रह और सामर्थ से प्रभु यीशु में होकर हमारे पाप क्षमा किए गए, हमारे अतीत के दुषपरिणाम मिटा दिए गए, हमारा वर्तमान बदल दिया गया, हमारे भविष्य को आशा और अनन्त आशीष के साथ ज्योतिर्मय कर दिया गया है और स्वर्ग में हमारे लिए एक अजर, अमर और अनन्त मीरास तैयार रखी गई है। - डेविड मैक्कैसलैंड


केवल प्रभु यीशु ही जीवन परिवर्तित कर सकता है।

क्योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं, वरन प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था। परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। - 1 कुरिन्थियों 15:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:20-30
Acts 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है। 
Acts 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए? 
Acts 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्‍द करता रहा।
Acts 9:23 जब बहुत दिन बीत गए, तो यहूदियों ने मिलकर उसके मार डालने की युक्ति निकाली। 
Acts 9:24 परन्तु उन की युक्ति शाऊल को मालूम हो गई: वे तो उसके मार डालने के लिये रात दिन फाटकों पर लगे रहे थे। 
Acts 9:25 परन्तु रात को उसके चेलों ने उसे ले कर टोकरे में बैठाया, और शहरपनाह पर से लटका कर उतार दिया।
Acts 9:26 यरूशलेम में पहुंचकर उसने चेलों के साथ मिल जाने का उपाय किया: परन्तु सब उस से डरते थे, क्योंकि उन को प्रतीति न होता था, कि वह भी चेला है। 
Acts 9:27 परन्तु बरनबास उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले जा कर उन से कहा, कि इस ने किस रीति से मार्ग में प्रभु को देखा, और इस ने इस से बातें कीं; फिर दमिश्क में इस ने कैसे हियाव से यीशु के नाम का प्रचार किया। 
Acts 9:28 वह उन के साथ यरूशलेम में आता जाता रहा। 
Acts 9:29 और निधड़क हो कर प्रभु के नाम से प्रचार करता था: और यूनानी भाषा बोलने वाले यहूदियों के साथ बातचीत और वाद-विवाद करता था; परन्तु वे उसके मार डालने का यत्‍न करने लगे। 
Acts 9:30 यह जानकर भाई उसे कैसरिया में ले आए, और तरसुस को भेज दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1