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शनिवार, 28 नवंबर 2015

आशीष


   अपनी पुस्तक Daring to Draw Near में लेखक डॉ. जौन व्हाईट लिखते हैं कि बहुत साल पहले परमेश्वर ने उनके लिए संभव किया कि वे अनेक सुविधाओं से युक्त एक सुन्दर और आलीशान घर ले सकें। उस घर को लेकर उनके भावनाएं नाट्कीय रूप से बदलती रहीं।

   जब वे अपने आप को स्मरण दिलाते कि वह घर उन्हें परमेश्वर ने भेंट किया है तो वे आनन्द और धन्यवाद से भर जाते। किंतु जब वे अपने घर की तुलना अन्य मित्रों के घर से करते तो उन्हें गर्व होता कि उनका घर कितना आलीशान है परन्तु साथ ही उनका आनन्द भी जाता रहता। घर की भव्यता पर ध्यान देने से उन्हें वह एक बोझ लगने लगता क्योंकि तब उन्हें वह बड़ा आलीशान स्थान घर नहीं वरन ढेर सारी दीवारें, बगीचे, पेड़-पौधे और बाड़े दिखाई देना लगता जिसकी देख-रेख तथा रख-रखाव में उन्हें निरंतर लगे रहना पड़ता था। अपने इन अनुभवों को लेकर व्हाईट ने कहा, "जब भी घमण्ड मेरी नज़रों को धुंधला और मेरे मन को बोझिल कर देता, कृतज्ञता मेरे बोझ को हलका कर देती और मेरी दृष्टि को स्पष्ट कर देती।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक की पुस्तक के लेखक ने भी जीवन में प्रत्येक भौतिक वस्तु का आनन्द ले पाने में परमेश्वर की उपस्थिति को अनुभव किया। लेखक ने पहिचाना कि अपने परिश्रम के फल को आनन्द के साथ भोग पाना, यहाँ तक कि उसे उन फलों का प्राप्त होना और उनसे आनन्दित हो सकना, सब परमेश्वर ही से था (सभोपदेशक 5:18-19)।

   हमारे जीवन के आरंभ से लेकर अन्त तक, समस्त जीवन परमेश्वर के अनुग्रह से हमें मिलती रहने वाली अविरल भेंट है। यदि हम हर बात के लिए और सदा यह स्मरण रखें कि अपने आप में हम किसी भी चीज़ को पाने के योग्य नहीं हैं और परमेश्वर किसी बात को हमें देने के लिए कभी भी बाध्य या हमारा ऋणी नहीं है, लेकिन फिर भी वह अनुग्रह और अनुकंपा में होकर हम पर अपनी आशीषें और भेंटें न्योछावर करता है तो फिर हम कभी ना तो अपनी आशीषों को लेकर स्वार्थी होंगे और ना ही उनका आनन्द लेने में दोषी अनुभव करेंगे।

   हमारी सभी आशीषें, वे चाहे आत्मिक हों या पार्थिव, सब हमारे अनुग्रहकारी दयालु परमेश्वर पिता से हैं, उनका सदुपयोग उसकी महिमा और हमारी उन्नति करेगा। - डेनिस जे. डीहॉन


परमेश्वर जो हमें इतना कुछ देता है, एक और बात भी देता है - एक कृतज्ञ मन। - हर्बर्ट

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:13-20
Ecclesiastes 5:13 मैं ने धरती पर एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो, 
Ecclesiastes 5:14 और वह किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ मे कुछ नहीं रहता। 
Ecclesiastes 5:15 जैसा वह मां के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके। 
Ecclesiastes 5:16 यह भी एक बड़ी बला है कि जैसा वह आया, ठीक वैसा ही वह जाएगा; उसे उस व्यर्थ परिश्रम से और क्या लाभ है? 
Ecclesiastes 5:17 केवल इसके कि उसने जीवन भर बेचैनी से भोजन किया, और बहुत ही दु:खित और रोगी रहा और क्रोध भी करता रहा? 
Ecclesiastes 5:18 सुन, जो भली बात मैं ने देखी है, वरन जो उचित है, वह यह कि मनुष्य खाए और पीए और अपने परिश्रम से जो वह धरती पर करता है, अपनी सारी आयु भर जो परमेश्वर ने उसे दी है, सुखी रहे: क्योंकि उसका भाग यही है। 
Ecclesiastes 5:19 वरन हर एक मनुष्य जिसे परमेश्वर ने धन सम्पत्ति दी हो, और उन से आनन्द भोगने और उस में से अपना भाग लेने और परिश्रम करते हुए आनन्द करने को शक्ति भी दी हो- यह परमेश्वर का वरदान है। 
Ecclesiastes 5:20 इस जीवन के दिन उसे बहुत स्मरण न रहेंगे, क्योंकि परमेश्वर उसकी सुन सुनकर उसके मन को आनन्दमय रखता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34
  • 1पतरस 5


शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

जीवन जल


   पृथ्वी के सबसे निर्जल स्थानों में से एक है पूर्वी अफ्रीका; इसीलिए उस इलाके के एक शहर का नाम "नैरिबी" होना बहुत रोचक बात है। यह नाम उस इलाके के एक कबीले, मसाई, की भाषा के एक वाक्यंश, जिसका अर्थ होता है "ठंडा पानी" से लिया गया है और नैरोबी का अर्थ है "जल का स्थान"।

   संसार के इतिहास में जल की उपस्थिति सदैव ही जीवन-दायक और सामरिक रही है। चाहे कोई निर्जल रेगिस्तान में रहे या फिर वर्षा-वन में, जीवन के लिए पानी का कोई विकल्प नहीं है; बिना जल के जीवन संभव नहीं है। किसी सूखे पर्यावरण वाले उजाड़ स्थान पर पानी के स्त्रोत का पता होना जीवन और मृत्यु को निर्धारित करता है।

   हमारे आत्मिक जीवन में भी कुछ बातें हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए जब एक कुएं पर प्रभु यीशु का साक्षात्कार एक आत्मिक रीति से प्यासी स्त्री से हुआ तो उन्होंने उससे कहा कि जिस जीवन जल की उसे आवश्यकता है वह जल उसे केवल वे ही दे सकते हैं। प्रभु ने उस स्त्री से कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   हमारे मन परमेश्वर के लिए वैसे ही प्यासे होने चाहिएं जैसे जल के लिए हाँफने वाली प्यासी हिरणी की उपमा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई है (भजन 42:1-2)। हमारी आत्मा केवल उस पोषण से ही तृप्त हो सकती है जो हमें प्रभु यीशु से मिलता है; क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही जीवन जल का वह स्त्रोत है जो सबके मनों को तरोताज़ा कर सकता है, नया जीवन प्रदान कर सकता है, अनन्तकाल के लिए सन्तुष्ट कर सकता है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध जीवन जल का सोता है।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन 63:1

बाइबल पाठ: भजन 42:1-5
Psalms 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psalms 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psalms 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psalms 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1पतरस 4


गुरुवार, 26 नवंबर 2015

वास्तविक प्रेम


   कुछ वर्ष पहले मेरी सहेली बेथ की माँ को दिमाग़ के एल्ज़ाईमर्स रोग का रोगी पाया गया, इस रोग का कोई इलाज नहीं है और इसका पीड़ित अपनी स्मरणशक्ति गंवाता तथा दूसरों पर निर्भर होता चला जाता है। तब से बेथ के लिए अपनी माँ की देखभाल करना अनेक कठिन और कष्टदायक निर्णयों का लेना बन गया है। अपनी ज़िन्दादिल और आनन्दप्रीय स्वभाव की माँ को धीरे धीरे कमज़ोर पड़ते तथा अपनी देखभाल के लिए दूसरों पर निर्भर होते देखना बेथ के लिए बहुत हृदयविदारक रहा है। इस प्रक्रिया के अनिभव से बेथ ने जाना है कि वास्तविक प्रेम सदा ही सरल या सुविधाजनक नहीं होता।

   पिछले वर्ष जब उसकी माँ को कुछ समय के लिए अस्पताल में भरती करना पड़ा था, बेथ ने अपने कुछ मित्रों को यह लिखा: "चाहे यह उल्टे रुख ही क्यों ना प्रतीत हो, अपनी माँ के साथ मैं जिस जीवन यात्रा पर हूँ, उसके लिए मैं बहुत धन्यवादी हूँ। उनकी स्मरणशक्ति क्षीण हो जाने, उलझनों में रहने और निःसहाय होने के पीछे एक अति सुन्दर व्यक्तित्व है जो जीवन से प्रेम करता है और अपने अन्दर पूर्णतः शान्ति से है। इस अनुभव से मैं सीख रही हूँ कि वास्तविक प्रेम क्या होता है। संभवतः स्वेच्छा से मैं कभी इस यात्रा और इसके साथ मिले दुखों तथा आँसुओं को पाने की चेष्टा कभी नहीं करती, लेकिन आज मैं इस अनुभव का सौदा किसी अन्य अनुभव से भी नहीं करूँगी।"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्मरण दिलाती है कि प्रेम धीरजवन्त और कृपालु होता है। प्रेम स्वार्थ नहीं चाहता और ना ही शीघ्र क्रोधित होता है; जैसा बाइबल बताती है, "प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है" (1 कुरिन्थियों 13:4-7)।

   वास्तविक प्रेम का उद्गम परमेश्वर पिता से है, जिसने अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह को हमारे लिए बलिदान कर दिया। हम मसीही विश्वासी जब परमेश्वर के इस प्रेम की गवाही लोगों के समक्ष रखने का प्रयास करते हैं तो हमें प्रभु यीशु मसीह के उदाहरण का अनुसरण करना उचित है, जिसने समस्त संसार के उद्धार और पापों से मुक्ति के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया (1 यूहन्ना 3:16-18)। - सिंडी हैस कैसपर


वास्तविक प्रेम प्रभु यीशु के नाम से दूसरों की सहायता करना है, चाहे वे कभी इस भलाई को हमें वापस लौटा ना सकें।

हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। - 1 यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-8
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1पतरस 3


बुधवार, 25 नवंबर 2015

वचन


   जब मैं अंग्रेज़ी भाषा में लिखना सिखाती हूँ तो विद्यार्थियों को मेरा निर्देश होता है कि वे कक्षा में बैठकर ही लिखें। ऐसा इसलिए क्योंकि कक्षा में लिखा गया उनकी अपनी मौलिक कृति होता है, इस प्रकार मैं प्रत्येक विद्यार्थी की लेखन शैली से परिचित हो जाती हूँ, और यह भी जानने पाती हुँ कि कहीं उन्होंने किसी अन्य के लेख से अत्याधिक सामग्री नकल तो नहीं कर ली। विद्यार्थियों को यह जानकर अचरज होता है कि उन में से प्रत्येक की लेखन शैली, जिसमें उनके विचार और उन्हें प्रगट करने का तरीका सम्मिलित हैं, अन्य सभी से वैसे ही भिन्न होती है जैसे उनकी वाणी और बोलने की शैली। जैसे हमारा बोलना हमारे मन से होता है, वैसे ही हमारा लिखना भी; दोनों ही हमारे व्यक्तित्व को प्रकट करते हैं।

   हम परमेश्वर की वाणी से भी इसी प्रकार परिचित होते हैं - जो उसने अपने बारे में हमें बताया है उसे पढ़ने से हम जानने पाते हैं कि वह कौन है और अपने आप को कैसे प्रकट तथा व्यक्त करता है। हमें बरगलाने तथा परमेश्वर से भटकाने के लिए शैतान भी हमारे सामने परमेश्वर की समानता लेकर आता है (2कुरिन्थियों 11:14)। वह परमेश्वर के शब्दों को थोड़ा सा फेर-बदल करके प्रयोग करता है और उन बदली हुई बातों द्वारा लोगों को असत्य पर विश्वास करने के लिए युक्तिसंगत परन्तु झूठी दलीलें देता है। उदाहरणस्वरुप, उद्धार पाने के लिए प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने, उससे पापों की क्षमा माँगने और उसे जीवन समर्पित करके उसकी आज्ञाकरिता में रहने की बजाए भक्तिपूर्ण प्रतीत होने वाले कार्यों, जैसे कि आत्मानुशासन, बाहरी क्रीया-कलापों और रिति-रिवाज़ों का पालन और उन्हें प्राथमिकता देना (कुलुस्सियों 2:23), आदि के द्वारा, अर्थात अपने कर्मों से परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के प्रयास का मार्ग दिखाकर शैतान ने संसार के बहुतेरे लोगों को परमेश्वर के मार्ग और राज्य से भटका रखा है।

   यह सुनिश्चित करने के लिए कि मनुष्य उसकी वाणी को सुन और समझ सकें परमेश्वर ने जो कुछ हो सकता था वह किया। उसने ना केवल अपना वचन हमें बाइबल के रूप में लिखित दिया, वरन वचन को देहधारी करके (यूहन्ना 1:14) प्रभु यीशु के रूप में भी हमें दे दिया जिससे हम सरलता से बहकाए ना जाएं, उसके मार्ग से भटक ना जाएं। परमेश्वर का लिखित तथा जीवित वचन हमारे साथ, हमारे पास है - उसका भरपूर प्रयोग कीजिए, अधिकतम लाभ उठाईए; उसे आप ही के लिए उपलब्ध करवाया गया है। - जूले ऐकिअरमैन लिंक


तेरा वचन पूरी रीति से ताया हुआ है, इसलिये तेरा दास उस में प्रीति रखता है। - भजन 119:140

और यह कुछ अचंभे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। - 2 कुरिन्थियों 11:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-18
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। 
John 1:15 यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था। 
John 1:16 क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। 
John 1:17 इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची। 
John 1:18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26
  • 1पतरस 2


मंगलवार, 24 नवंबर 2015

सिद्ध समय


   वह पुरानी कहावत, "सही समय ही सब कुछ है" बिल्कुल सटीक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस का गल्तिया के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री कहा गया कथन, "परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा...." (गल्तियों 4:4) मेरे अन्दर बहुत कौतहूल जगाता है।

   संसार के इतिहास पर एक झलक डालने से समझ आता है कि प्रभु यीशु का जन्म वास्तव में बिल्कुल सही वक्त पर हुआ था। उनके जन्म से सदियों पहले सिकन्दर ने ग्रीस (यूनान) से निकलकर ज्ञात संसार के अधिकांश भाग को जीत लीया था और इससे उन सब स्थानों पर यूनानी भाषा और सभ्यता का एकीकृत करने वाला प्रभाव आ गया था। सिकन्दर की मृत्योप्रांत रोमी साम्राज्य ने अपना दबदबा कायम करना आरंभ किया और यूनानी सभ्यता तथा भाषा के एक जुट कर देने वाले प्रभाव को और आगे बढ़ाया। रोमी साम्राज्य में कैदियों को क्रूस द्वारा मृत्यु दण्ड देने की प्रथा आरंभ हुई, जो रोमी साम्राज्य के आरंभ होने के सैंकड़ों वर्ष पहले बाइबल में प्रभु यीशु से संबंधित भविष्यवाणियों में प्रभु की मृत्यु के लिए लिखी गई थी, और उसी के अनुसार क्रूस पर मसीह यीशु का बलिदान हुआ और फिर वह मृतकों में से जी उठा, जिसका उल्लेख उस समय के इतिहसकारों ने भी किया है। रोमी साम्राज्य के समय में ही प्रभु यीशु के सन्देश को सारे संसार में पहुँचाने के लिए उपयुक्त संसाधन - अच्छी सड़कें, सभी जगहों पर अधिकांशतः एक ही भाषा का प्रयोग और एक ही साम्राज्य होने के कारण देश तथा इलाके के सीमाओं को बिना प्रतिबंध पार करने की सुविधा, तैयार और लागू हुए। परमेश्वर के इंतिज़ाम ने अपने पुत्र को संसार के उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता के रूप में भेजने के लिए सारी तैयारी करवा कर ही उसे संसार में अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए भेजा।

   हर बात, हर कार्य के लिए परमेश्वर का समय सिद्ध है। हो सकता है कि आज आप किसी बात को लेकर चिंतित हों, विचार कर रहे हों कि क्यों परमेश्वर आपके हित में कार्यवाही नहीं कर रहा है; लेकिन यह कभी ना भूलें कि चाहे दिखाई ना दे, प्रतीत ना हो, किंतु परमेश्वर पृष्ठभूमि में सदा कार्यरत रहता है जिससे सही समय पर अपने कार्य को आपके सामने प्रकट करे। उस पर विश्वास रखें, उसे पता है कि कब क्या और कैसे करना है; उसका समय सिद्ध है। - जो स्टोवैल


हे प्रभु हमें धैर्य रखने का अनुशासन सिखा, क्योंकि धैर्य के साथ प्रतीक्षा करना कार्य करने से अधिक कठिन होता है। - मार्शल

और कहा, समय पूरा हुआ है, और परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो। - मर्कुस 1:15

बाइबल पाठ: गल्तियों 3:26-4:7
Galatians 3:26 क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो। 
Galatians 3:27 और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। 
Galatians 3:28 अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। 
Galatians 3:29 और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।
Galatians 4:1 मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। 
Galatians 4:2 परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है। 
Galatians 4:3 वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में हो कर दास बने हुए थे। 
Galatians 4:4 परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के आधीन उत्पन्न हुआ। 
Galatians 4:5 ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल ले कर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। 
Galatians 4:6 और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा को, जो हे अब्‍बा, हे पिता कह कर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है। 
Galatians 4:7 इसलिये तू अब दास नहीं, परन्तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्वर के द्वारा वारिस भी हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 22-23
  • 1पतरस 1


सोमवार, 23 नवंबर 2015

जीवित पत्रियाँ


   सन 1963 के नवम्बर माह में जिस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ़. कैनेडी की हत्या हुई, एक और प्रमुख अगुवे - क्लाईव स्टेप्ल्स ल्युईस की भी मृत्यु हुई। ऑक्सफॉर्ड के इस विद्वान ने, जिसे सामान्यतः सी. एस. ल्युईस के नाम से जाना जाता है, नास्तिकवाद को छोड़कर मसीही विश्वास को अपनाया था, और वह बहुतायत से लिखने वाला एक सफल लेखक था। उनकी कलम से बुद्धिमता से परिपूर्ण पुस्तकें, विज्ञान पर आधारित कहानियाँ, बच्चों के लिए काल्पनिक कहानियाँ बहुतायत से निकलती रहती थीं और प्रत्येक में एक बलवन्त मसीही सन्देश होता था। उनकी लेखनी को परमेश्वर ने बहुत से लोगों को मसीही विश्वास में लाने के लिए प्रयोग किया, जिनमें एक राजनितिक नेता और एक नोबल पुरुस्कार विजेता वैज्ञानिक भी हैं।

   परमेश्वर कुछ को अपनी लेखनी के द्वारा अन्य लोगों को मसीह यीशु के बारे में बताने के लिए प्रयोग करता है, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने जीवन के द्वारा मसीह यीशु के लिए एक जीवित पत्री है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा: "यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है" (2 कुरिन्थियों 3:3)। ऐसा लिखने में निश्चय ही पौलुस का यह तात्पर्य नहीं था कि मसीही विश्वासी कागज़ के समान उपयोग होने के लिए हैं जिन पर स्याही से मसीह का सन्देश लिखा जाए। वरन उसका तात्पर्य था कि जैसे पत्रियों को पढ़कर सन्देश का अर्थ जाना जाता है वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के जीवन भी हमारे प्रभु यीशु के सन्देश को संसार लोगों के सामने रखते हैं, और अपने व्यवहार तथा ईमानदारी के द्वारा हम ’जीवित पत्रियाँ’ होने का कार्य करते हैं।

   समाज पर जो प्रभाव सी. एस. ल्युईस ने डाला, वैसा प्रभाव बहुत कम लोग ही डाल सकते हैं, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन और व्यवहार अपने तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता प्रभु यीशु के नाम गौरव और महिमा देने का कार्य कर सकता है। - डेनिस फिशर


जितने हमारे जीवनों को पढ़ते हैं उनके लिए हम मसीह यीशु के प्रेम की पत्री हैं।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:1-11
2 Corinthians 3:1 क्या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों कि नाईं सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं? 
2 Corinthians 3:2 हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है। 
2 Corinthians 3:3 यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है। 
2 Corinthians 3:4 हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं। 
2 Corinthians 3:5 यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है। 
2 Corinthians 3:6 जिसने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है। 
2 Corinthians 3:7 और यदि मृत्यु की यह वाचा जिस के अक्षर पत्थरों पर खोदे गए थे, यहां तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुंह पर के तेज के कराण जो घटता भी जाता था, इस्त्राएल उसके मुंह पर दृष्टि नहीं कर सकते थे। 
2 Corinthians 3:8 तो आत्मा की वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:9 क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:10 और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उस से बढ़कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा। 
2 Corinthians 3:11 क्योंकि जब वह जो घटता जाता था तेजोमय था, तो वह जो स्थिर रहेगा, और भी तेजोमय क्यों न होगा?

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


रविवार, 22 नवंबर 2015

छाया


   पचास से भी अधिक वर्ष पूर्व हुई अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ. केनेडी की हत्या ने सारे विश्व के लोगों को स्तब्ध कर दिया था। हत्या के अगले दिन लंडन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ’द टाइम्स’ ने इस घटना के कारण सारे विश्व के आर्थिक बाज़ारों पर आए प्रभाव के बारे में लिखा। उस अखबार का मुख्य शीर्षक था, "अमेरीकी त्रासदी के छाया अन्य सभी बातों पर।"

   हमारे जीवनों में ऐसे समय आते हैं जब कोई मृत्यु, कोई त्रासदी या घटनाओं का अचानक मोड़े ले लेना अन्य हर एक बात से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, प्रत्येक बात पर पर छा जाता है। कुछ ऐसा ही लगभग दो हज़ार वर्ष से कुछ पूर्व एक कुँवारी युवती मरियम के साथ इस्त्राएल में हुआ - परमेश्वर के एक स्वर्गदूत जिब्राईल ने आकर उसे बताया कि वह परमेश्वर के पुत्र और संसार के उद्धारकर्ता की माँ बनेगी (लूका 1:26-33)। जब उस युवती ने स्वर्गदूत से पूछा कि ऐसा कैसे होगा, तो उस स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, "...पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा" (लूका 1:35), और स्वर्गदूत को उसका प्रत्युत्तर आज भी हमें आश्चर्य में डाल देता है: "...देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो..." (लूका 1:38)। इतिहास गवाह है कि असंभव प्रतीत होने वाली इस घटना से मरियम के जीवन पर अन्धकार की नहीं वरन परमेश्वर की सामर्थ और महिमा की छाया आई।

   आते सप्ताहों में जब हम क्रिसमस की घटना और संसार में प्रभु यीशु के जन्म के बारे में और पढ़ेंगे तथा विचार करेंगे, तो इस शब्द ’छाया’ पर चिंतन करना लाभदायक रहेगा। यदि प्रभु यीशु की उपस्थिति हमारे जीवनों पर छाया करे तो वह हमारे जीवन के सबसे अन्धकारपूर्ण पलों को भी अपनी ज्योति से रौशन कर देगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


हर परिस्थिति में परमेश्वर का सर्वसामर्थी प्रेम हम पर छाया किए रहता है।

परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ। - यूहन्ना 20:31 

बाइबल पाठ: लूका 1:26-38
Luke 1:26 छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया। 
Luke 1:27 जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। 
Luke 1:28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है। 
Luke 1:29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? 
Luke 1:30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। 
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
 Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4