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सोमवार, 11 जनवरी 2016

परिस्थिति


   प्रथम विश्व-युद्ध के समय, मॉरने की प्रथम लड़ाई में, फ्रांस के लेफ्टिनेंट जनरल फर्डिनेन्ड फॉक ने एक सूचना भेजी: "आक्रमण कर रही मेरी सेना का मध्य भाग कमज़ोर पड़ रहा है और दाहिने भाग को पीछे हटना पड़ रहा है। स्थिति उत्कृष्ट है; मैं आक्रमण में लगा हूँ!" कठिन परिस्थितियों में भी आशा बनाए रखने की उनकी प्रवृति के कारण ही उनकी सेना विजयी हो सकी।

   कभी-कभी जीवन की लड़ाईयों में हमें लगता है मानो जीवन के हर मोर्चे पर हम हार रहे हैं - पारिवारिक कलह, व्यवसाय में हानि, स्वास्थ्य में गड़बड़ी इत्यादि जीवन के प्रति हमारे नज़रिए में निराशाएं ला सकती हैं। लेकिन हर मसीही विश्वासी, अपने अन्त-फल के कारण, सदा ही इस निषकर्ष पर बना रह सकता है कि "स्थिति उत्कृष्ट है"।

   प्रेरित पौलुस को ही देखिए; जब उसे सुसमाचार प्रचार के लिए कैदखाने में डाल दिया गया, तौ भी उसका रवैया आशावादी ही रहा। कैदखाने से फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री के आरंभ ही में पौलुस ने लिखा: "हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है" (फिलिप्पियों 1:12)।

   पौलुस ने अपनी कैद और कैदखाने को सुसमाचार प्रचार करने का एक नया मंच बना लिया जहाँ से वह रोमी सेना के उन लोगों को सुसमाचार दे सका जो वहाँ तैनात थे, और उनमें से कई मसीही विश्वासी हो गए। साथ ही उसकी इस परिस्थिति और इस परिस्थिति के प्रति उसकी प्रतिक्रीया से अन्य मसीही विश्वासी भी साहस प्राप्त कर सके और सुसमाचार प्रचार में और निर्भीक होकर लग सके (पद 13-14)।

   हमारी परिस्थितियों, परेशानियों और परीक्षाओं को, वे चाहे कष्टदायक ही क्यों ना हों, परमेश्वर हमारी भलाई के लिए (रोमियों 8:28) और अपने राज्य की बढ़ोतरी के लिए प्रयोग कर सकता है। हमारी हर परिस्थिति उसे आदर और महिमा देने का एक और कारण है। - डेनिस फिशर


क्लेष, विजयी होने के लिए परमेश्वर का दिया एक मार्ग हो सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:3-14
Philippians 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं। 
Philippians 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं। 
Philippians 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। 
Philippians 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। 
Philippians 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो। 
Philippians 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं। 
Philippians 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। 
Philippians 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ। 
Philippians 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे। 
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-12
  • मत्ती 4


रविवार, 10 जनवरी 2016

धैर्य


   सन 2006 में 1000 व्यसक लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि कतार में खड़े रहने पर एक व्यक्ति औसतन 17 मिनिट में धैर्य खो देता है। यह भी पाया गया कि यदि फोन पर उन्हें प्रतीक्षा करने के लिए कहा जाए तो वे औसतन 9 मिनिट में अधीर हो जाते हैं। अधीर हो जाना सभी मनुष्यों का एक सामान्य गुण है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब की लिखी पत्री उन मसीही विश्वासियों को लिखी गई थी जो प्रभु यीशु में अपने विश्वास के कारण संघर्षों का सामना कर रहे थे और इन संघर्षों के कारण प्रभु के पुनःआगमन को लेकर अधीर हो चले थे (याकूब 5:7)। वे शोषण और दुःखों से होकर निकल रहे थे, और याकूब ने उन्हें समझाया कि वे अधीर ना हों परन्तु अपने धैर्य को बनाए रखें। उन्हें कष्टों का सामना करने में धीरज दिखाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए याकूब ने उन से कहा कि वे अपने मसीही विश्वास में दृढ़ बने रहें और प्रभु के लिए त्याग करने से ना घबराएं क्योंकि प्रभु का आना निकट है और वह आकर सभी अन्याय और अनुचित को सही कर देगा: "तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है" (याकूब 5:8)।

   याकूब ने उन्हें उस किसान के समान धैर्य रखने को कहा जो वर्षा और फसल के लिए धैर्य के साथ प्रतीक्षा करता है (पद 7)। साथ ही उसने उन विश्वासियों को पुराने समय के भविष्यद्वक्ताओं का और कुलप्ति अय्युब का भी उदाहरण स्मरण करवाया जो हर परिस्थिति में परमेश्वर पर अपने विश्वास में दृढ़ डटा रहा (पद 10-11)। याकूब ने उन्हें उभारा, क्योंकि उनके मसीही विश्वास की दौड़ की समापन रेखा निकट ही है इसलिए अब वे अपना धैर्य ना खोएं।

   आज जब हम अपने मसीही विश्वास के कारण दुःखों की कुठाली में परखे जाते हैं, तो परमेश्वर चाहता है कि हम अपने मसीही विश्वास को थामे रहें और उसके प्रेम, और करुणा पर भरोसा बनाए रखें, उसके समय की प्रतीक्षा करें (पद 11)। - मार्विन विलियम्स


महान धीरज का मार्ग महान परीक्षाओं से होकर निकलता है।

धन्य हो तुम, जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुम से बैर करेंगे, और तुम्हें निकाल देंगे, और तुम्हारी निन्‍दा करेंगे, और तुम्हारा नाम बुरा जानकर काट देंगे। उस दिन आनन्‍दित हो कर उछलना, क्योंकि देखो, तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है: उन के बाप-दादे भविष्यद्वक्ताओं के साथ भी वैसा ही किया करते थे। - लूका 6:22-23

बाइबल पाठ: याकूब 5:7-11
James 5:7 सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्‍तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है। 
James 5:8 तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है। 
James 5:9 हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। 
James 5:10 हे भाइयो, जिन भविष्यद्वक्ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो। 
James 5:11 देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17


शनिवार, 9 जनवरी 2016

ऊपर और नीचे


   प्रभु यीशु के पृथ्वी के जीवन के समय में रोमी साम्राज्य था और रोमियों की धार्मिक आस्थाएं प्रचलित थीं। उन आस्थाओं में से एक थी कि जो ऊपर स्वर्ग में हो रहा होता है, उसका प्रभाव नीचे पृथ्वी पर पड़ता है। यदि युनानी देवराज ज़्यूस क्रोधित हैं तो पृथ्वी पर वज्रपात होगा। उन दिनों माना जाने वाला सिद्धांत था, "जैसा ऊपर, वैसा नीचे"।

   लेकिन प्रभु यीशु इस सिद्धांत का उलट दिखाते और सिखाते थे: "जैसा नीचे, वैसा ऊपर"। नीचे पृथ्वी पर एक मसीही विश्वासी प्रार्थना करता है और ऊपर स्वर्ग से उत्तर आता है; नीचे एक पापी पश्चाताप करता है, ऊपर स्वर्ग में आनन्द मनाया जाता है; नीचे परमेश्वर का कार्य पूरा किया जाता है, ऊपर परमेश्वर महिमान्वित होता है; नीचे एक मसीही विश्वासी अनाज्ञाकारी होता है, ऊपर परमेश्वर शोकित होता है।

   मैं इन सब बातों को जानता और मानता हूँ, लेकिन फिर भी उन्हें बार बार भूल जाता हूँ। मैं भूल जाता हूँ कि परमेश्वर के सामने मेरी प्रार्थनाओं का महत्व है। मैं भूल जाता हूँ कि जो चुनाव मैं करता हूं वे सृष्टि के प्रभु परमेश्वर को प्रसन्न अथवा शोकित करती हैं। मैं भूल जाता हूँ कि मुझे अपने पड़ौसियों और साथियों को उनके अनन्त गन्तव्य के विषय बताना और सचेत करना है।

   परमेश्वर की क्षमा और प्रेम का जो सुसमाचार प्रभु यीशु संसार में लेकर आए थे, हमें उसे संसार के सभी लोगों तक पहुँचाना है। यही जिम्मेदारी प्रभु ने अपने स्वर्गारोहण के समय अपने चेलों को सौंपी थी (मत्ती 28:18-20)। हम जो मसीह यीशु के अनुयायी हैं, उसके  पृथ्वी पर आने और देहधारी होने का कारण और उसकी सेवा को आगे बढ़ाने वाले लोग हैं, उसके गवाह हैं (लूका 24:48)। पृथ्वी पर के अपने समय के अन्तिम दिनों में प्रभु ने अपने चेलों से वायदा किया था कि वह उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा, वह ऊपर से अपनी पवित्र आत्मा नीचे उनके साथ रहने के लिए भेजेगा (यूहन्ना 14:16-18)। ऊपर से मिली पवित्र आत्मा की यह सामर्थ और सहायता आज नीचे हमें पार्थिव जीवनों को प्रभावित करने, और उन जीवनों को अनन्तकाल के लिए ऊपर परमेश्वर के साथ रहना समझाने वाला बनाती है। - फिलिप यैन्सी


आप हमारे सामने स्वर्ग पर उठा लिए गए, हम शोकित होकर पीछे मुड़े और पाया कि आप हमारे हृदयों में बस गए हैं। - ऑगस्टीन

और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। - यूहन्ना 14:16-18

बाइबल पाठ: लूका 24:44-53
Luke 24:44 फिर उसने उन से कहा, ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्‍तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों। 
Luke 24:45 तब उसने पवित्र शास्त्र बूझने के लिये उन की समझ खोल दी। 
Luke 24:46 और उन से कहा, यों लिखा है; कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। 
Luke 24:47 और यरूशलेम से ले कर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। 
Luke 24:48 तुम इन सब बातें के गवाह हो। 
Luke 24:49 और देखो, जिस की प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है, मैं उसको तुम पर उतारूंगा और जब तक स्वर्ग से सामर्थ न पाओ, तब तक तुम इसी नगर में ठहरे रहो।
Luke 24:50 तब वह उन्हें बैतनिय्याह तक बाहर ले गया, और अपने हाथ उठा कर उन्हें आशीष दी। 
Luke 24:51 और उन्हें आशीष देते हुए वह उन से अलग हो गया और स्वर्ग से उठा लिया गया। 
Luke 24:52 और वे उसको दण्‍डवत कर के बड़े आनन्द से यरूशलेम को लौट गए। 
Luke 24:53 और लगातार मन्दिर में उपस्थित हो कर परमेश्वर की स्‍तुति किया करते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 23-24
  • मत्ती 7


शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

सेवा


   कुछ साल पहले मैंने जॉर्ज मैकडॉनल्ड द्वारा लिखी एक कविता पढ़ी जिसका शीर्षक था, "The Hidden Life"। यह कविता एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बयान करती है जो बहुत प्रतिभासंपन्न और बुद्धिजीवी था, किंतु वह एक गौरवपूर्ण तथा उच्च संभावनाओं से भरे भविष्य को छोड़कर अपने वृद्ध पिता के पास गाँव लौट आया था ताकि उनकी देखभाल करे और खेती-किसानी की पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ निभा सके। वहाँ वह साधारण से काम करने और छोटे छोटे कार्यों में लोगों की सहायता करने में व्यस्त रहता था। उसके मित्र इस बात को लेकर उसके लिए शोकित होते थे कि उसने अपनी प्रतिभा को व्यर्थ हो जाने दिया।

   हो सकता है कि आज आप भी किसी ऐसे स्थान पर कार्य कर रहे हों जिसके बारे में लोगों को कोई विशेष जानकारी नहीं है; ऐसे कार्य कर रहे हों जो साधारण से माने जाते हों। अन्य लोगों को यह व्यर्थ प्रतीत हो सकता है, लेकिन परमेश्वर के लिए कुछ भी व्यर्थ नहीं है। परमेश्वर के नाम में किया गया प्रत्येक प्रेम पूर्ण कार्य का ध्यान किया जाता है और उसके अनन्त्कालीन प्रतिफल हैं (मरकुस 9:41)। हर स्थान, वह चाहे जितना भी छोटा क्यों ना हो, परमेश्वर की सेवकाई के लिए पवित्र भूमि है। परमेश्वर के लिए प्रभावी होने के लिए महान कार्य करना या बड़े-बड़े शब्द प्रयोग करना आवश्यक नहीं है। यह साधारण से प्रतीत होने वाले सहायता के छोटे छोटे कार्यों से हो सकता है, जैसे सहायता के लिए, सुनने के लिए, बात समझने के लिए, प्रेम जताने के लिए, प्रार्थना करने के लिए, आवश्यकता के समय में, लोगों के लिए उपलब्ध रहना। यही रोज़मर्रा के कार्यों को सेवकाई और आराधना बना देता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को कहा: "जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो" (कुलुस्सियों 3:23-24)। परमेश्वर हम पर अपना ध्यान भी लगाए रखता है और हमें अपनी महिमा के लिए उपयोग करने में आनन्दित भी होता है। - डेविड रोपर


मसीह यीशु के लिए बहुतायत से करने के लिए उसकी सेवकाई में जो कुछ भी बन पड़े वह करते रहें।

जो कोई एक कटोरा पानी तुम्हें इसलिये पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूं कि वह अपना प्रतिफल किसी रीति से न खोएगा। - मरकुस 9:41

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-25
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। 
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो। 
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ। 
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।
Colossians 3:18 हे पत्‍नियों, जेसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने अपने पति के आधीन रहो। 
Colossians 3:19 हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, और उन से कठोरता न करो। 
Colossians 3:20 हे बालको, सब बातों में अपने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करो, क्योंकि प्रभु इस से प्रसन्न होता है। 
Colossians 3:21 हे बच्‍चे वालो, अपने बालकों को तंग न करो, न हो कि उन का साहस टूट जाए। 
Colossians 3:22 हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। 
Colossians 3:23 और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। 
Colossians 3:24 क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। 
Colossians 3:25 क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 20-22
  • मत्ती 6:19-34


गुरुवार, 7 जनवरी 2016

शब्द



   नवंबर 19, 1863 को दो सुप्रसिद्ध लोगों ने पेन्सिल्वेनिया के गेट्सिबर्ग में स्थित राष्ट्रीय सैनिक कब्रिस्तान के समर्पण समारोह में भाषण दिया। प्रधान वक्ता थे एड्वर्ड एवरेट जो सांसद, राज्यपाल और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रह चुके थे। वे अपने समय के सबसे अच्छे वक्ता माने जाते थे और उन्होंने अपने औपचारिक संबोधन के लिए 2 घण्टे का समय लिया। उनके बाद राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन संबोधन के लिए खड़े हुए और उनका भाषण 2 मिनिट ही का था।

   लिंकन का वह भाषण, जो गेट्सिबर्ग भाषण के नाम से विख्यात है, आज भी व्यापक रीति से जाना जाता है और उद्धत किया जाता है, जबकि एवरेट का भाषण लगभग भुला दिया गया है। इसका कारण केवल लिंकन की वाकपटुता एवं संक्षिप्त रहना ही नहीं है। उस दिन के उन के शब्दों ने गृह युद्ध से आहत राष्ट्र के हृदय को छू लिया, और लोगों में आते दिनों के लिए आशा की एक किरण जागृत करी।

   अर्थपूर्ण होने के लिए शब्दों को अधिक होने की आवश्यकता नहीं है। उदाहरण के लिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु द्वारा चेलों को सिखाई गई प्रार्थना को ही लें (मत्ती 6:9-13); यह प्रार्थना प्रभु य़ीशु की सबसे संक्षिप्त किंतु सबसे यादगार शिक्षाओं में से एक है। इस प्रार्थना के शब्दों से लोगों को सहायता और सामर्थ मिलती है क्योंकि यह हमें स्मरण दिलाती है कि परमेश्वर हमारा पिता है जिसकी सामर्थ जैसे स्वर्ग में वैसे ही पृथ्वी पर भी कार्यकारी है। वह हमें प्रतिदिन भोजन, क्षमा और साहस प्रदान करता है, और सारा आदर तथा महिमा सदैव उसी के हैं।

   हमारे भूत, वर्तमान और भविष्य में ऐसा कुछ नहीं है जो सहायता और सामर्थ देने वाले प्रभु यीशु की इन संक्षिप्त शब्दों की प्रार्थना में सम्मिलित ना हों। - डेविड मैक्कैसलैंड


विनम्र शब्द सुनने वालों आराम, तसल्ली और हौंसला देते हैं। - ब्लेज़ पास्कल

क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यों कहता है, मैं ऊंचे पर और पवित्र स्थान में निवास करता हूं, और उसके संग भी रहता हूं, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हषिर्त करूं। - यशायाह 57:15

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-15
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Matthew 6:8 सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। 
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन। 
Matthew 6:14 इसलिये यदि तुम मनुष्य के अपराध क्षमा करोगे, तो तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता भी तुम्हें क्षमा करेगा। 
Matthew 6:15 और यदि तुम मनुष्यों के अपराध क्षमा न करोगे, तो तुम्हारा पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा न करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 18-19
  • मत्ती 6:1-18


बुधवार, 6 जनवरी 2016

दर्शक, पाठक, श्रोता


   शरद ऋतु की एक रात, संगीतज्ञ योहान सेबस्टियन बॉक अपनी एक नई रचना चर्च में प्रस्तुत करने जा रहे थे। वे चर्च इस आशा के साथ पहुँचे कि चर्च श्रोताओं से भरा हुआ होगा; लेकिन वहाँ उन्हें मालुम पड़ा कि चर्च खाली था, कोई भी उस कार्यक्रम के लिए नहीं आया था। बिना किसी हिचकिचाहट के बॉक ने अपने साथी संगीतवादकों से कहा कि जैसा निर्धारित था वे वैसे ही संगीत प्रस्तुत करेंगे। सब ने अपने अपने स्थान लिए और बॉक संचालक के मंच पर आए, और शीघ्र ही चर्च शानदार संगीत से भर गया।

   इस घटना को जानने के बाद मैंने कुछ आत्मविष्लेषण किया - क्या मैं लिखती यदि परमेश्वर अकेला ही मेरा पाठक होता? यदि ऐसा होता तो क्या में मेरी रचना में कोई फर्क होता?

   नए लेखकों को अकसर सलाह दी जाती है कि वे अपने विचार केंद्रित करने के लिए किसी एक व्यक्ति को ध्यान में रख कर लिखें। मैं अपने इन सन्देशों को लिखते समय यही करती हूँ, मैं अपने पाठकों को ध्यान में रखती हूँ, कि वे अपने आत्मिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए क्या पढ़ना चाहेंगे?

   लेकिन आत्मिक सन्देशों के लेखक भजनकार दाऊद, परमेश्वर के वचन बाइबल में जिसके लिखे भजनों के संकलन की ओर हम बारंबार तसल्ली और प्रोत्साहन के लिए मुड़ते हैं, किन पाठकों को ध्यान में रखकर लिखता था? उसकी सभी रचनाएं केवल एक ही दर्शक, एक ही पाठक, एक ही श्रोता को ध्यान में रखकर, केवल उसी के लिए रची गई थीं - परमेश्वर!

   आज के बाइबल पाठ में उल्लेखित हमारे "कार्य", चाहे वे कलात्मक कृतियाँ हों अथवा सेवा के कार्य हों, हम यह ना भूलें कि वे सभी केवल हमारे और परमेश्वर के बीच ही हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई अन्य उन्हें जानता, देखता, पढ़ता, सुनता है या नहीं। बस यही ध्यान रहे कि परमेश्वर ही हमारा दर्शक, पाठक, श्रोता है; सब उसी के लिए है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


एक ही दर्शक है, उसी की सेवा के लिए करें।

उसने उन से कहा; तुम तो मनुष्यों के साम्हने अपने आप को धर्मी ठहराते हो: परन्तु परमेश्वर तुम्हारे मन को जानता है, क्योंकि जो वस्तु मनुष्यों की दृष्टि में महान है, वह परमेश्वर के निकट घृणित है। - लूका 16:15

बाइबल पाठ: मत्ती 6:1-7
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। 
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके। 
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए। 
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 16-17
  • मत्ती 5:27-48


मंगलवार, 5 जनवरी 2016

रिश्ता


   मेरी पत्नि मारलीन और मैं 35 वर्ष से अधिक समय से विवाहित हैं। विवाह से पहले जब हमारी बात-चीत और मित्रता चल रही थी तो उसने अपने बारे में एक बात मुझे बताई, जिसे मैं आज तक नहीं भूला हूँ। मारलीन ने बताया कि जब वह 6 माह की थी तो उसे गोद लिया गया था। जब मैंने उससे पूछा कि क्या उसे अपने वास्तविक माता-पिता के बारे में जानने की उत्सुकता कभी हुई, तो उसने उत्तर दिया, "मेरे माता-पिता ने मुझे चुना; उस दिन उनके सामने कई और बच्चे थे, परन्तु उन्होंने मुझे चुना, मुझे अपना नाम दिया, मेरी परवरिश करी। अब वही मेरे वास्तविक माता-पिता हैं।"

   अपने दत्तक अभिभावकों के प्रति जो एक सशक्त लगाव और कृतज्ञता का भाव मारलीन का है, वही हम मसीही विश्वासियों का अपने परमेश्वर पिता के प्रति भी होना चाहिए। मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण हम उस पर लाए गए विश्वास द्वारा परमेश्वर से नया जन्म पाकर परमेश्वर के परिवार का भाग हो गए हैं। प्रेरित पौलुस ने लिखा, "जैसा उसने हमें जगत की उत्‍पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। और अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों" (इफिसीयों 1:4-5)।

   पौलुस द्वारा बताए गए इस आदान-प्रदान के बारे में विचार करें। हमें परमेश्वर ने चुना, गोद लिया और अपने पुत्र और पुत्री बनाया। इस गोद लिए जाने के कारण परमेश्वर से हमारा एक बिलकुल नया रिश्ता बन गया है; अब वह हमारा प्रेमी पिता है!

   परमेश्वर से हमारा यह विशेष रिश्ता हमें अपने प्रेमी पिता की आराधना और उपासना सच्चे दिल से निकले धन्यवाद और कृतज्ञता के साथ करते रहने, और उसकी आज्ञाकारिता में बने रहने को उभारता रहे और हम यह करते रहें। - बिल क्राउडर 


परमेश्वर हम में से प्रत्येक से ऐसा प्रेम करता है मानो हम एकलौते ही हैं। - ऑगस्टीन

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: इफिसीयों 1:3-12
Ephesians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, कि उसने हमें मसीह में स्‍वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आशीष दी है। 
Ephesians 1:4 जैसा उसने हमें जगत की उत्‍पति से पहिले उस में चुन लिया, कि हम उसके निकट प्रेम में पवित्र और निर्दोष हों। 
Ephesians 1:5 और अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों, 
Ephesians 1:6 कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्‍तुति हो, जिसे उसने हमें उस प्यारे में सेंत मेंत दिया। 
Ephesians 1:7 हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है। 
Ephesians 1:8 जिसे उसने सारे ज्ञान और समझ सहित हम पर बहुतायत से किया। 
Ephesians 1:9 कि उसने अपनी इच्छा का भेद उस सुमति के अनुसार हमें बताया जिसे उसने अपने आप में ठान लिया था। 
Ephesians 1:10 कि समयों के पूरे होने का ऐसा प्रबन्‍ध हो कि जो कुछ स्वर्ग में है, और जो कुछ पृथ्वी पर है, सब कुछ वह मसीह में एकत्र करे। 
Ephesians 1:11 उसी में जिस में हम भी उसी की मनसा से जो अपनी इच्छा के मत के अनुसार सब कुछ करता है, पहिले से ठहराए जा कर मीरास बने। 
Ephesians 1:12 कि हम जिन्हों ने पहिले से मसीह पर आशा रखी थी, उस की महिमा की स्‍तुति के कारण हों।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 13-15
  • मत्ती 5:1-26