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सोमवार, 4 जुलाई 2016

निर्भर किंतु स्वतंत्र


   आज का दिन अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है। आज ही के दिन, सन 1776 में, 13 अमेरिकी उपनिवेशों ने अपने आप को स्वतंत्र घोषित किया था। इस दिन की खुशी में लोग घूमने निकलते हैं, शहरों और नगरों में परेड और जलूस निकाले जाते हैं, आतिशबाज़ी करी जाती है और पार्टियाँ आयोजित होती हैं।

   स्वतंत्र होना सभी को भाता है; स्वतंत्र होने का तात्पर्य है नियंत्रण, प्रभाव, सहायता और सहारे से मुक्त हो जाना। इसीलिए किशोर अभिभावकों से स्वतंत्र होने के, तो व्यस्क आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर जीवन व्यतीत करने के सपने देखते हैं; और प्रौढ़ नागरिक अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन क्या कोई कभी वास्तव में बिलकुल स्वतंत्र हो सकता है - यह चर्चा का ऐसा विषय है जिसपर हम फिर कभी विचार करेंगे; लेकिन स्वतंत्र होने का विचार अच्छा लगता है।

   राजनीतिक एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की लालसा रखना एक बात है; लेकिन आत्मिक स्वतंत्रता का पीछा करने का साहस रखना कठिनाईयों से भरा हुआ है। एक मसीही विश्वासी ही इस बात को समझ सकता है कि सच्ची आत्मिक स्वतंत्रता प्रभु परमेश्वर पर पूर्ण रूप से निर्भर होने में ही है, जैसा कि प्रभु यीशु मसीह ने कहा है: "मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते" (यूहन्ना 15:5)।

   पापों के लिए पश्चाताप करके उनकी क्षमा पाने तथा प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाने के द्वारा प्रभु परमेश्वर के साथ बने हमारे संबंध के कारण हमें यह विशेषाधिकार मिला है कि हम अपनी हर बात, हर आवश्यकता के लिए प्रभु पर पूर्णतः भरोसा रखकर जीवन की सभी आवश्यकताओं के लिए उसपर निर्भर किंतु उन से संबंधित सभी चिंताओं से स्वतंत्र होकर रह सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारी सबसे महान सामर्थ हमारे सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर पूर्ण निर्भरता रखने से आती है।

मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया। - गलतियों 2:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-13
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है। 
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले। 
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। 
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। 
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। 
John 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं। 
John 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा। 
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे। 
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 28-29
  • प्रेरितों 13:1-25


रविवार, 3 जुलाई 2016

स्नेहिल देखभाल


   मैक्स ने अपने लिए एक छोटा सा फार्म ले रखा है और रुचि के तौर पर उसे चलाता है। हाल ही में जब वह अपने मवेशियों की जाँच करने गया तो पाया कि वहाँ एक नवजात बछड़ा भी है। जब उसने वे मवेशी खरीदे थे तो उसे नहीं पता था कि उन में से एक गर्भवती है। लेकिन दुर्भाग्यवश प्रसव में होने वाली कुछ कठिनाईयों के कारण वह मादा बछड़े के जन्म के कुछ समय बाद मर गई। मैक्स ने तुरंत दूध का पाउडर खरीदा और उस बछड़े को पाउडर से बना दूध बोतल से पिलाने लग गया। मैक्स कहता है कि वह बछड़ा अब उसे ही अपनी माँ समझने लगा है।

   उस बछड़े के प्रति मैक्स के स्नेहिल बर्ताव की इस घटना ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा थिस्सुलुनीके के मसीही विश्वासियों के प्रति रखे स्नेहिल बर्ताव की याद दिलाई। पौलुस ने उन मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पहली पत्री में उन्हें स्मरण करवाया कि कैसे वह उनके बीच एक माँ के समान उनकी देखभाल करता हुआ रहा करता था: "परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है" (1 थिस्सुलुनीकियों 2:7)।

   प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री में परमेश्वर के वचन को निर्मल आत्मिक दूध के समान बताया है: "नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ" (1 पतरस 2:2); और पौलुस भी वचन रूपी इस दूध को लोगों में उनकी उन्नति और विकास के लिए बाँटता रहता था। लेकिन साथ ही पौलुस उन लोगों की आवश्यकताओं का भी विशेष ध्यान रखता था, एक पिता के समान उन्हें प्रेरणा देता रहता था: "जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे। कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है" (1 थिस्सुलुनीकियों 2:11-12)

   जब हम एक दुसरे की सेवा में लगे हैं, तो चाहिए कि हम भी आत्मिक यात्रा में एक दुसरे को प्रोत्साहित करते रहें (इब्रानियों 10:24) तथा उसी स्नेहिल देखभाल को लोगों के प्रति दिखाएं जो हमारे प्रभु और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने हमारे प्रति दिखाई है और संसार के समस्त लोगों के प्रति दिखाना चाहता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर अपने प्रेम को हमारे जीवनों में उसे दूसरों के जीवनों में प्रवाहित करने के लिए उण्डेलता है।

और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। - इब्रानियों 10:24

बाइबल पाठ: 1 थिस्सुलुनीकियों 2:1-7
1 Thessalonians 2:1 हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ। 
1 Thessalonians 2:2 वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहिल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं। 
1 Thessalonians 2:3 क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है। 
1 Thessalonians 2:4 पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं। 
1 Thessalonians 2:5 क्योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है। 
1 Thessalonians 2:6 और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से। 
1 Thessalonians 2:7 परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27
  • प्रेरितों 12


शनिवार, 2 जुलाई 2016

चिंता


   मेरी सहेली ने मुझे पानी से भरा एक ग्लास पकड़ाया और कहा कि मैं उसे पकड़ कर रखूँ। जितनी अधिक देर तक मैं उस ग्लास को पकड़े रही वह मुझे और अधिक भारी होता हुआ प्रतीत होता रहा। अन्ततः मेरा हाथ थक गया और मैंने वह ग्लास नीचे रख दिया। मेरी सहेली बोली, "मैंने सीखा है कि चिंता करना इस ग्लास को पकड़े रहने के समान है; मैं जितना अधिक किसी बात के लिए चिंता करती हूँ, उतना ही अधिक मेरे भय मुझ पर भारी होते चले जाते हैं।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक नायक, राजा दाऊद, भी भय के बारे में जानता था। दाऊद का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। उसके बेटे अबशालोम ने उसकी प्रजा इस्त्राएल की राजभक्ति को बदल कर अपनी ओर कर लिया था और अब राजगद्दी को भी छीन लेने के प्रयास कर रहा था। दाऊद समझ नहीं पा रहा था कि कौन उसके साथ है और कौन उसके विरुद्ध है। उसे बस एक ही विकल्प सूझ पड़ रहा था कि वह वहाँ से बच कर भाग निकले: "तब दाऊद ने अपने सब कर्मचारियों से जो यरूशलेम में उसके संग थे कहा, आओ, हम भाग चलें; नहीं तो हम में से कोई भी अबशालोम से न बचेगा; इसलिये फुतीं करते चले चलो, ऐसा न हो कि वह फुतीं कर के हमें आ घेरे, और हमारी हानि करे, और इस नगर को तलवार से मार ले" (2 शमूएल 15:14)।

   अपने एक भजन में, जो संभवतः उसने तब लिखा जब वह अपने प्राण बचाने के लिए भाग रहा था, दाऊद ने लिखा: "मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है" (भजन 3:4)। अपने भय के समय में दाऊद ने प्रभु परमेश्वर की ओर देखा, और परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में होकर उसे उसके सिंहासन पर पुनः स्थापित कर दिया।

   हमारे जीवनों में भी अनेकों चिंताएं आकर हमें अभिभूत कर सकती हैं। लेकिन जब हम उन चिंताओं को स्वयं थामे रहने की बजाए उन्हें प्रभु के हाथों में सौंपकर उन्हें वहीं छोड़ देते हैं, प्रभु से उनके समाधान को खोजते हैं तब प्रभु परमेश्वर हमें हमारी परीक्षाओं और प्रत्येक चिंता से सुरक्षित निकाल कर ले आता है। - ऐनी सेटास


चिंता ऐसा बोझ है जिसे परमेश्वर नहीं चाहता कि हम उठाए रखें।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: भजन 3
Psalms 3:1 हे यहोवा मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए हैं! वह जो मेरे विरुद्ध उठते हैं बहुत हैं। 
Psalms 3:2 बहुत से मेरे प्राण के विषय में कहते हैं, कि उसका बचाव परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकता। 
Psalms 3:3 परन्तु हे यहोवा, तू तो मेरे चारों ओर मेरी ढ़ाल है, तू मेरी महिमा और मेरे मस्तिष्क का ऊंचा करने वाला है। 
Psalms 3:4 मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है। 
Psalms 3:5 मैं लेटकर सो गया; फिर जाग उठा, क्योंकि यहोवा मुझे सम्हालता है। 
Psalms 3:6 मैं उन दस हजार मनुष्यों से नहीं डरता, जो मेरे विरुद्ध चारों ओर पांति बान्धे खड़े हैं।
Psalms 3:7 उठ, हे यहोवा! हे मेरे परमेश्वर मुझे बचा ले! क्योंकि तू ने मेरे सब शत्रुओं के जबड़ों पर मारा है और तू ने दुष्टों के दांत तोड़ डाले हैं।
Psalms 3:8 उद्धार यहोवा ही की ओर से होता है; हे यहोवा तेरी आशीष तेरी प्रजा पर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 22-24
  • प्रेरितों 11


शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

उद्धारकर्ता


   कैली स्टीन्हॉस ने हार्वर्ड स्क्वैयर जाकर छात्रों से जानना चाहा कि वे प्रभु यीशु मसीह के बारे में क्या सोचते हैं; और जो उत्तर उसे मिले वे प्रभु के प्रति आदरणीय तो थे परन्तु बहुत ही कम लोगों ने उसके जगत का उद्धारकर्ता होने को स्वीकार किया। एक ने उत्तर दिया कि प्रभु लोगों की देखभाल करने वाला व्यक्ति था, तो एक अन्य ने कहा वह एक अच्छा व्यक्ति था। कुछ ने उसके उद्धारकर्ता होने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि वह बस एक मनुष्य था, कोई उद्धारकर्ता नहीं तो एक अन्य ने कहा कि वह ऐसे किसी विश्वास को नहीं मान सकता जो परमेश्वर तक पहुँचने के एकमात्र मार्ग का दावा करता है। कुछ लोग ध्यानपूर्वक प्रभु यीशु पर विचार करना चाहते हैं तो कुछ उसको पूर्णतया अस्वीकार करते हैं।

   लगभग 2000 वर्ष पूर्व जब प्रभु यीशु मौत का सामना कर रहे थे, तो बहुत से लोग उसका उपहास कर रहे थे और इस दावे का तिरिस्कार कर रहे थे कि प्रभु यीशु कोई विशेष व्यक्ति है। मृत्यु में भी उसके उपहास के लिए उसके क्रूस के ऊपर एक तखती पर लिख कर लगा दिया गया: "उसका दोषपत्र, उसके सिर के ऊपर लगाया, कि ’यह यहूदियों का राजा यीशु है’" (मत्ती 27:37)। जो उसकी सामर्थ पर विश्वास नहीं करते थे उन्होंने उसका मज़ाक उड़ाते हुए उससे कहा "...हे मन्दिर के ढाने वाले और तीन दिन में बनाने वाले, अपने आप को तो बचा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो क्रूस पर से उतर आ" (मत्ती 27:40)। धर्म के अगुवों ने तो ठट्ठे में यहाँ तक कह दिया: "यह तो “इस्राएल का राजा है”। अब क्रूस पर से उतर आए, तो हम उस पर विश्वास करें" (मत्ती 27:42)।

   क्रूस पर अपने बलिदान के समय में प्रभु यीशु लोगों को निर्बल और असहाय लग रहे थे, किंतु जब हम उनकी संपूर्ण गाथा को पढ़ते हैं तो हम पाते हैं कि उन्हें ज़बर्दस्ती क्रूस पर नहीं चढ़ाया गया था वरन उन्होंने अपने स्वेच्छा से क्रूश पर चढ़ना स्वीकार किया और अपने प्राण बलिदान किए थे। अपने पुनरुत्थान और कब्र में से बाहर आ जाने के द्वारा उन्होंने अपने आप को परमेश्वर का पुत्र और असीम सामर्थी प्रमाणित कर दिया। प्रभु यीशु का मृतकों में से पुनरुत्थान एक ऐसा ऐतिहासिक सत्य है जो आज तक झुठलाया नहीं जा सका है, और जो मसीही विश्वास की अडिग, अटल, सदा स्थिर नींव है।

   प्रभु यीशु के जीवन, शिक्षाओं, कार्यों, आश्चर्यकर्मों, मृत्यु और पुनरुत्थान पर गंभीरता से विचार तथा विशलेषण कीजिए। उस सामर्थ पर ध्यान कीजिए जिसके द्वारा प्रभु पुनः जीवित होकर कब्र से बाहर निकल आए और अनेक अकाट्य प्रमाणों द्वारा अपने पुनरुत्थान को संसार के सामने प्रत्यक्ष दिखाया। प्रभु यीशु का बलिदान और पुनरुत्थान इस बात का प्रमाण है कि वही जगत के एकमात्र उद्धारकर्ता हैं। - डेव ब्रैनन


प्रभु यीशु का पुनरुत्थान मृत्यु का अन्त है।

इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है। - प्रेरितों 17:30-31

बाइबल पाठ: मत्ती 27:26-44
Matthew 27:26 इस पर उसने बरअब्‍बा को उन के लिये छोड़ दिया, और यीशु को कोड़े लगवाकर सौंप दिया, कि क्रूस पर चढ़ाया जाए।
Matthew 27:27 तब हाकिम के सिपाहियों ने यीशु को किले में ले जा कर सारी पलटन उसके चहुं ओर इकट्ठी की। 
Matthew 27:28 और उसके कपड़े उतारकर उसे किरिमजी बागा पहिनाया। 
Matthew 27:29 और काटों को मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा; और उसके दाहिने हाथ में सरकण्‍डा दिया और उसके आगे घुटने टेककर उसे ठट्ठे में उड़ाने लगे, कि हे यहूदियों के राजा नमस्‍कार। 
Matthew 27:30 और उस पर थूका; और वही सरकण्‍डा ले कर उसके सिर पर मारने लगे। 
Matthew 27:31 जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो वह बागा उस पर से उतारकर फिर उसी के कपड़े उसे पहिनाए, और क्रूस पर चढ़ाने के लिये ले चले।
Matthew 27:32 बाहर जाते हुए उन्हें शमौन नाम एक कुरेनी मनुष्य मिला, उन्होंने उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले। 
Matthew 27:33 और उस स्थान पर जो गुलगुता नाम की जगह अर्थात खोपड़ी का स्थान कहलाता है पहुंचकर। 
Matthew 27:34 उन्होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्तु उसने चखकर पीना न चाहा। 
Matthew 27:35 तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया; और चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए। 
Matthew 27:36 और वहां बैठकर उसका पहरा देने लगे। 
Matthew 27:37 और उसका दोषपत्र, उसके सिर के ऊपर लगाया, कि “यह यहूदियों का राजा यीशु है”। 
Matthew 27:38 तब उसके साथ दो डाकू एक दाहिने और एक बाएं क्रूसों पर चढ़ाए गए। 
Matthew 27:39 और आने जाने वाले सिर हिला हिलाकर उस की निन्‍दा करते थे। 
Matthew 27:40 और यह कहते थे, कि हे मन्दिर के ढाने वाले और तीन दिन में बनाने वाले, अपने आप को तो बचा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो क्रूस पर से उतर आ। 
Matthew 27:41 इसी रीति से महायाजक भी शास्‍त्रियों और पुरनियों समेत ठट्ठा कर कर के कहते थे, इस ने औरों को बचाया, और अपने को नहीं बचा सकता। 
Matthew 27:42 यह तो “इस्राएल का राजा है”। अब क्रूस पर से उतर आए, तो हम उस पर विश्वास करें। 
Matthew 27:43 उसने परमेश्वर का भरोसा रखा है, यदि वह इस को चाहता है, तो अब इसे छुड़ा ले, क्योंकि इस ने कहा था, कि “मैं परमेश्वर का पुत्र हूं”। 
Matthew 27:44 इसी प्रकार डाकू भी जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे उस की निन्‍दा करते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48


गुरुवार, 30 जून 2016

वापसी


   कैड पेनिंगटन अमेरिकन फुटबॉल के भूतपूर्व खिलाड़ी हैं जिन्हें बारंबार ऐसी चोटें आई हैं जिनसे उनका पेशेवर फुटबॉल खेलना खतरे में पड़ा। दो बार अपनी चोटों के कारण उन्हें ऑपरेशन, फिर महीनों तक फिज़ियोथैरपी और उसके बाद वापस खेल के मैदान पर लौटने के प्रशिक्षण से होकर निकलना पड़ा। लेकिन दोनों ही बार ना केवल वे पेशेवर खेल में वापस आए वरन खेल का इतना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया कि राष्ट्रीय फुटबॉल लीग ने उन्हें वर्ष का पुनःवापसी खिलाड़ी घोषित किया। पेनिंगटन के लिए उनके प्रयास फुटबॉल में उनकी पुनःवापसी के संकल्प की दृढ़ता का प्रगटिकरण थे।

   आत्मिक जीवन में जब पाप परमेश्वर से हमारे संबंध को बाधित करते हैं और उसके लिए हमारी सेवकाई को दरकिनार कर देते हैं, तो केवल हमारा दृढ़ निश्चय ही हमें परमेश्वर के साथ सही संबंध में और उसकी सेवकाई में लौटा कर नहीं लाता। जब पाप हमारे अयोग्य हो जाने का कारण होता है, तो परमेश्वर के पास हमारी पुनःवापसी का मार्ग पाप के अंगीकार और पश्चताप के द्वारा बनता है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)।

   हमारे लिए आत्मिक पराजय से लौट पाना भी उसी प्रभु के अनुग्रह से संभव हो पाता है जिसने हमारे तथा समस्त संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया; और इसी से हमें आशा बंधती है। प्रभु यीशु मसीह जो हमारे लिए बलिदान हुआ, हमसे अनन्त प्रेम रखता है, और जैसे ही हम अपने पापों और कमियों को उसके सामने मान लेते हैं वह अपने अनुग्रह से हमें क्षमा कर देता है।

   अंगीकार के द्वारा ही हम प्रभु परमेश्वर के साथ संगति और संबंधों के पुनःस्थापन की वापसी को अनुभव कर पाते हैं; और यही किसी के भी जीवन में होने वाली सबसे महान वापसी है। - बिल क्राऊडर


पश्चाताप और अंगीकार ही पुनःस्थापन का मार्ग है।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:1-10
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए। 
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23


बुधवार, 29 जून 2016

प्रक्रिया


   विलियम ज़िनसर ने अपनी पुस्तक On Writing Well में लिखा है कि बहुत से लेखक अपने लेखन के अन्तिम परिणाम की चिंता से घिरे रहते हैं। वे अपने लेखन को बेच पाने की चिंता से इतने अभिभूत रहते हैं कि वे लिखते समय ध्यान से सोचने, योजना बनाने और प्रबंधन करने की प्रक्रिया को सीखने की उपेक्षा कर बैठते हैं। परिणाम होता है एक अस्त-व्यस्त पाण्डुलिपि, क्योंकि लेखक ने समाप्ति रेखा पर अपनी नज़र तो लगाए रखी किंतु उस रेखा तक की दौड़ को ध्यान देकर नहीं दौड़ा।

   मसीही विश्वासी एवं प्रचारक तथा लेखक ए. डबल्यु, टोज़र ने अपनी पुस्तक The Root of the Righteous में इसी सिद्धांत को हमारे आत्मिक जीवनों में लागू करने की बात कही है। टोज़र ने बताया है कि कैसे हम केवल फल लाने पर ध्यान देने की चिंता में उस जड़ के बारे में सोचना छोड़ देते हैं जिसके कारण वृक्ष और फल हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने प्रथम शताबदी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी दूसरी पत्री में चिताया कि मसीह के समान जीवन जी पाने और परमेश्वर के लिए प्रभावी सेवकाई तक पहुँच पाने के लिए एक प्रक्रिया से होकर निकलना पड़ता है। पतरस ने आत्मिक जीवन में बढोतरी के लिए एक के ऊपर दूसरे आधारित रहने वाले आठ क्षेत्रों को बताया: विश्वास, सदगुण, समझ, संयम, धीरज, भक्ति, भाईचारे की प्रीति और प्रेम (2 पतरस 1:5-7)। फिर निष्कर्ष में पतरस ने बताया कि यदि मसीही विश्वासी इन सदगुणों में बढ़ते रहेंगे "...तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी" (2 पतरस 1:8)।

   परमेश्वर ने हम मसीही विश्वासियों को अपनी निकटता में बढ़ने और उसे और भली-भाँति जानने की अद्भुत प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए बुलाया है; साथ ही परमेश्वर ने हमें यह आश्वासन भी दिया है कि यदि हम इस प्रक्रिया के भागी होंगे तो हम उसके नाम के लिए आदर का, तथा उसकी प्रभावी सेवकाई करने वाले ठहरेंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही जीवन एक प्रक्रिया है जिसमें विश्वासी जीवन की हर बात में
 परमेश्वर पर पूर्ण निर्भरता रखना सीखते हैं।

सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - 1 कुरिन्थियों 15:58

बाइबल पाठ: 2 Peter 1:2-11
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। 
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। 
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ। 
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ। 
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। 
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। 
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी। 
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है। 
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे। 
2 Peter 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


मंगलवार, 28 जून 2016

आकर्षक


   पुराने दिनों की कहानी है, एक युवक जीविका कमाने के लिए ट्रेन में सेब बेचने का प्रयास कर रहा था। वह युवक सेबों से भरा हुआ थैला लिए हुए, ट्रेन के डब्बे के एक छोर से दुसरे तक कहता हुआ निकला, "सेब! क्या आप सेब खरिदना चाहेंगे?" डब्बे के दूसरे छोर तक पहुँचने पर उसका थैला सेबों से भरा हुआ था और जेब पैसों से खाली थी। एक व्यक्ति ने उसकी निराश हालत देखकर, उसे एक तरफ बुलाया और उससे एक सेब माँगा; उस सेब को लेकर वह डब्बे के अगले छोर पर गया, सेब को रुमाल से अच्छी तरह पोंछकर चमकता हुआ साफ किया और फिर उसे खाता हुआ डब्बे की दूसरे छोर की ओर चल निकला, साथ ही बोलता गया कि वह सेब कितना ताज़ा और अच्छे स्वाद का था। अब उसने उस युवक से कहा कि अब वह उन सेबों को बेचने का दोबारा प्रयास करे; इस बार उस युवक के सारे सेब बिक गए। अन्तर? एक व्यक्ति के व्यावाहरिक उदाहरण ने सेबों को खरीददारों के लिए आकर्षक कर दिया था।

   यह कहानी प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास से मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को लोगों तक पहुँचाने का एक मार्ग सिखाती है - इस अद्भुत सुसमाचार को लोगों के लिए आकर्षक बनाएं; लोगों को दिखाएं कि इस सुसमाचार पर लाए गए विश्वास ने कैसे आपके जीवन में परिवर्तन किया है। परमेश्वर के वचन बाइबल की भी यही शिक्षा है; प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखा: "अवसर को बहुमूल्य समझ कर बाहर वालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो" (कुलुस्सियों 4:5)। जब हम अपने जीवनों में हमारे मसीही विश्वास में आने से आए परिवर्तन और सदगुणों जैसे, दया, प्रेम और अनुकंपा को दूसरों को प्रदर्शित करते हैं, तो हमारा जीवन औरों के लिए आकर्षक हो जाता है, उन्हें सोचने पर बाध्य करता है कि ऐसा परिवर्तन कैसे आया; और यही हमें उनसे समस्त संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु के प्रेम, क्षमा, बलिदान और अनुग्रह का बयान करने का अवसर प्रदान करता है।

   व्यावाहरिक जीवन में प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार को जी कर दिखाएं; इससे ना केवल आपका जीवन भला तथा आकर्षक बनेगा, वरन सुसमाचार के प्रसार का कारण भी बनेगा। - डेव ब्रैनन


बदले हुए जीवन की सुन्दरता, लोगों को अन्दर से बदलने वाले की ओर आकर्षित करती है।

और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की, जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। - 1 थिस्सुलुनीकियों 1:6-8

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 4:2-6
Colossians 4:2 प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो। 
Colossians 4:3 और इस के साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो, कि परमेश्वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिस के कारण मैं कैद में हूं। 
Colossians 4:4 और उसे ऐसा प्रगट करूं, जैसा मुझे करना उचित है। 
Colossians 4:5 अवसर को बहुमूल्य समझ कर बाहर वालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो। 
Colossians 4:6 तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13
  • प्रेरितों 9:1-21