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शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

उदाहरण


   कहते हैं कि सन 1800 के अन्त की ओर, यूरोप से कुछ पास्टर मैसाच्यूसेट्स में आयोजित डी० एल० मूडी के बाइबल सम्मेलन में भाग लेने आए। अपने स्थान की प्रथानुसार, रात को सोते समय उन्होंने अपने जूते उतार कर कमरे के बाहर रख दिए, इस आश्य से कि होटल के कर्मचारी उन्हें साफ कर देंगे। जब मूडी ने वे जूते देखे, तो वे उनके वहाँ रखे होने के आश्य को समझ गए क्योंकि मूडी उन पास्टरों के स्थान की प्रथा से परिचित थे। मूडी ने यह बात अपने साथी कार्यकर्ताओं को बताई, लेकिन सभी चुप रहे और किसी ने भी कुछ भी करने के लिए कोई रुचि नहीं दिखाई। बाद में मूडी ने सारी जूतियाँ एकत्रित करीं और स्वयं ही उन्हें साफ करके वापस रख दिया। उनका एक मित्र जो अनायास ही उनके कमरे में मिलने आ गया था, उस ने यह देखा और बाकी लोगों को यह बात बताई। इसके बाद स्वतः ही मूडी के शेष साथी अगले कुछ दिनों तक बारी-बारी जूतियों को साफ करने का कार्य करते रहे।

   मूडी की नम्र नेतृत्व-शैली का उदाहरण अन्य लोगों के लिए उनका अनुसरण करने की प्रेरणा बन गया। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपने सह-कर्मी तिमुथियुस को स्मरण करवाया: "इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों" (2 तिमुथियुस 2:1-2)। जब हम यह स्मरण रखते हैं कि हमारी सामर्थ परमेश्वर से है, और हम जो कुछ भी हैं परमेश्वर के अनुग्रह ही से हैं, तो यह हमें दीन और नम्र बने रहने की प्रेरणा और सहायता करता है। हमारी यही दीनता और नम्रता का उदाहरण परमेश्वर के सत्य और सुसमाचार को दूसरों तक पहुँचाने, और उनके द्वारा अनुसरण करने के लिए सहायक होता है।

   हमारा प्रभु यीशु स्वयं ही संसार के सभी लोगों के लिए दीनता, नम्रता और सेवकाई का उदाहरण है; वह जिसने दूसरों के पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्ति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। इस उदाहरण और उसके अनुसरण का प्रचार करना हमारे लिए अनिवार्य है। - एलबर्ट ली


नम्रता और दीनता परमेश्वर को जानने और उसके समक्ष अपने आप को पहचानने से आती है।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:3-5

बाइबल पाठ:  2 तिमुथियुस 2:1-7
2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। 
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों। 
2 Timothy 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा। 
2 Timothy 2:4 जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता 
2 Timothy 2:5 फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता। 
2 Timothy 2:6 जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए। 
2 Timothy 2:7 जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 84-86
  • रोमियों 12


गुरुवार, 11 अगस्त 2016

सहज


   बहुत ही कम लोग हैं जो अमेरिका के आन्तरिक राजस्व सेवा आयकर विनियम को पढ़ने में समय लगाते हैं; और इसका एक उचित कारण भी है। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, सन 2013 में राजस्व कर संबंधित ये नियम 40लाख शब्दों से अधिक के हो गए थे। वास्तविकता यह है कि ये नियम अब इतने जटिल हो चुके हैं कि विशेषज्ञों के लिए भी इन सब नियमों को उनकी जटिलता में समझ पाना कठिन हो गया है।

   प्रभु यीशु के जीवनकाल के समय के धर्म गुरुओं ने ऐसी ही जटिलता परमेश्वर के नियमों में पैदा कर दी थी जिससे परमेश्वर के साथ संबंध बनाना और संबंध में बने रहना बहुत कठिन हो गया था और मूसा द्वारा मिली व्यवस्था के मूल सिद्धांत को समझना उन धरमगुरुओं के लिए भी कठिन हो गया था। जब उन में से एक धर्म-गुरू ने प्रभु यीशु से इसके बारे में प्रश्न किया और जानना चाहा कि सबसे महत्वपूर्ण आज्ञा कौन सी है, तो प्रभु यीशु का उत्तर था: "तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं" (मरकुस 12:30-31)।

   मूसा से मिली व्यवस्था का पालन करना बोझिल था, किंतु प्रभु यीशु पर विश्वास करना सहज है और उसका बोझ हलका है (मत्ती 11:30); यह हलका इस लिए है क्योंकि परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया है और हमारे पापों को प्रभु यीशु में होकर क्षमा किया है। अब परमेश्वर ही प्रभु यीशु में होकर हमें सामर्थ प्रदान करता है कि हम उससे तथा अपने पड़ौसी से प्रेम रखें। - बिल क्राउडर


यदि हमारे हृदयों में परमेश्वर का प्रेम है तो वह हमें परमेश्वर से 
तथा दुसरों से प्रेम करने वाला हृदय भी देगा।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है। - मत्ती 11:28-30

बाइबल पाठ: मरकुस 12:28-34
Mark 12:28 और शास्‍त्रियों में से एक ने आकर उन्हें विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उसने उन्हें अच्छी रीति से उत्तर दिया; उस से पूछा, सब से मुख्य आज्ञा कौन सी है? 
Mark 12:29 यीशु ने उसे उत्तर दिया, सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। 
Mark 12:30 और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। 
Mark 12:31 और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं। 
Mark 12:32 शास्त्री ने उस से कहा; हे गुरू, बहुत ठीक! तू ने सच कहा, कि वह एक ही है, और उसे छोड़ और कोई नहीं। 
Mark 12:33 और उस से सारे मन और सारी बुद्धि और सारे प्राण और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना और पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, सारे होमों और बलिदानों से बढ़कर है। 
Mark 12:34 जब यीशु ने देखा कि उसने समझ से उत्तर दिया, तो उस से कहा; तू परमेश्वर के राज्य से दूर नहीं: और किसी को फिर उस से कुछ पूछने का साहस न हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 81-83
  • रोमियों 11:19-36


बुधवार, 10 अगस्त 2016

उद्देश्य


   कहते हैं कि जब आप आनन्द में हों तो समय बड़ी जलदी गुज़र जाता है। इस कथन का कोई तर्कपूर्ण आधार तो नहीं है, परन्तु अनुभव यही दिखाता है कि यह कथन सही है। जब जीवन सुखद होता है, तब समय बड़ी जल्दी बीतता हुआ लगता है। यदि हमारे पास कोई ऐसा कार्य हो जिसे करना हमें अच्छा लगता है, या हम किसी ऐसे जन के साथ हैं जिसकी संगति में हमें आनन्द मिलता है, तो समय कब और कैसे बीत गया पता ही नहीं चल पाता।

   समय के बीतने से संबंधित इस धारणा के अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रकाशितवाक्य 4 अध्याय में वर्णित दृश्य की एक नई समझ प्रदान करी है। पहले जब मैं उस खण्ड को पढ़ता था, जहाँ परमेश्वर के सिंहासन के चारों ओर बैठे चारों प्राणी बारंबार वही शब्द, "पवित्र, पवित्र, पवित्र",  दोहराते हुए दिखाए गए हैं, तब मैं सोचती थी कि इनका अस्तित्व कितना उबाऊ होगा।

   लेकिन अब मैं ऐसा नहीं सोचती। अब मैं साथ में यह भी सोचती हूँ कि उन प्राणियों ने अपनी अनेक आंखों से कैसे कैसे अलौकिक दृश्य देखे होंगे (पद 8); परमेश्वर के सिंहासन के समीप से उन्हें सृष्टि और उसमें हो रहे कार्यों का कैसा विहंगम दृश्य देखने को मिलता रहता है (पद 6) और परमेश्वर की बुद्धिमता तथा पृथ्वी के निवासियों के प्रति उसके असीम प्रेम के कैसे कैसे उदाहरण उनके समक्ष आए होंगे। यह सब देखते, जानते और समझते हुए वे प्राणी इससे बेहतर क्या प्रत्युत्तर दे सकते हैं, कि बस परमेश्वर की पवित्रता और महानता के लिए उसकी आराधना करें, उसे पवित्र, पवित्र, पवित्र कहते रहें।

   क्या एक समान शब्द कहते रहना उबाऊ हो सकता है? यदि आप उसके साथ हैं जिससे आप प्रेम करते हैं, तो नहीं; और ना ही तब उबाऊ होगा जब आप वह उद्देश्य पूरा कर रहे हों जिसके लिए आप को रचा गया है। उन चार प्राणियों के समान ही, हमें भी परमेश्वर की महिमा के लिए रचा गया है। उस प्रेमी परमेश्वर पिता की लगातार हमारे साथ बनी रहने वाली उपस्थिति का ध्यान करके यदि हम अपने जीवनों को उसकी महिमा करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए संचालित करें तो हमारे जीवन कभी भी उबाऊ नहीं रहेंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि हमारे मन परमेश्वर के साथ लयबद्ध हैं, 
तो उसकी आराधना करने से रुक नहीं सकते।

हर एक को जो मेरा कहलाता है, जिस को मैं ने अपनी महिमा के लिये सृजा, जिस को मैं ने रचा और बनाया है। - यशायाह 43:7 

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 4
Revelation 4:1 इन बातों के बाद जो मैं ने दृष्टि की, तो क्या देखता हूं कि स्वर्ग में एक द्वार खुला हुआ है; और जिस को मैं ने पहिले तुरही के से शब्द से अपने साथ बातें करते सुना था, वही कहता है, कि यहां ऊपर आ जा: और मैं वे बातें तुझे दिखाऊंगा, जिन का इन बातों के बाद पूरा होना अवश्य है। 
Revelation 4:2 और तुरन्त मैं आत्मा में आ गया; और क्या देखता हूं, कि एक सिंहासन स्वर्ग में धरा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है। 
Revelation 4:3 और जो उस पर बैठा है, वह यशब और मानिक सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत सा एक मेघधनुष दिखाई देता है। 
Revelation 4:4 और उस सिंहासन के चारों ओर चौबीस सिंहासन है; और इन सिंहासनों पर चौबीस प्राचीन श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए बैठें हैं, और उन के सिरों पर सोने के मुकुट हैं। 
Revelation 4:5 और उस सिंहासन में से बिजलियां और गर्जन निकलते हैं और सिंहासन के साम्हने आग के सात दीपक जल रहे हैं, ये परमेश्वर की सात आत्माएं हैं। 
Revelation 4:6 और उस सिंहासन के साम्हने मानो बिल्लौर के समान कांच का सा समुद्र है, और सिंहासन के बीच में और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी हैं, जिन के आगे पीछे आंखे ही आंखे हैं। 
Revelation 4:7 पहिला प्राणी सिंह के समान है, और दूसरा प्राणी का मुंह बछड़े के समान है, तीसरे प्राणी का मुंह मनुष्य का सा है, और चौथा प्राणी उड़ते हुए उकाब के समान है। 
Revelation 4:8 और चारों प्राणियों के छ: छ: पंख हैं, और चारों ओर, और भीतर आंखे ही आंखे हैं; और वे रात दिन बिना विश्राम लिये यह कहते रहते हैं, कि पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आने वाला है। 
Revelation 4:9 और जब वे प्राणी उस की जो सिंहासन पर बैठा है, और जो युगानुयुग जीवता है, महिमा और आदर और धन्यवाद करेंगे। 
Revelation 4:10 तब चौबीसों प्राचीन सिंहासन पर बैठने वाले के साम्हने गिर पड़ेंगे, और उसे जो युगानुयुग जीवता है प्रणाम करेंगे; और अपने अपने मुकुट सिंहासन के साम्हने यह कहते हुए डाल देंगे। 
Revelation 4:11 कि हे हमारे प्रभु, और परमेश्वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएं सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं, और सृजी गईं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 79-80
  • रोमियों 11:1-18



मंगलवार, 9 अगस्त 2016

मार्ग


   इंगलैंड और फ्रांस के बीच बनी चैनल सुरंग "The Channel Tunnel" को 6 मई 1994 को, फ्रांस के राजा नैपोलियन के इंजीनियर एलबर्ट मैथ्यु द्वारा इसका सर्वप्रथम प्रस्ताव देने के लगभग दो शताब्दी बाद, जनता के लिए खोल दिया गया। आज 31 मील लम्बी यह सुरंग इंगलैंड और फ्रांस के बीच के समुद्र के तल के नीचे प्रतिदिन हज़ारों लोगों, कारों, ट्रकों तथा ट्रेन को आवाजाही का मार्ग देती है। इससे पूर्व, सदियों से यह यात्रा केवल समुद्र की सतह पर जहाज़ द्वारा ही करी जाती रही, जब तक कि लोगों के लिए यह अद्भुत नया मार्ग बनकर तैयार तथा उपलब्ध नहीं हो गया।

   परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए भी एक अद्भुत अनेपक्षित मार्ग तैयार कर के दिया, जिसके बारे में हम परमेश्वर के वचन बाइबल में निर्गमन 14:10-22 में पढ़ते हैं। मिस्त्र की ग़ुलामी से निकल कर कनान देश जा रहे इस्त्राएलियों के सामने विकट समस्या थी - उनके आगे लाल-समुद्र था और पीछे फिरौन की सेना उनका पीछा करती हुई उन्हें पकड़ ले जाने के लिए आ धमकी थी। उन इस्त्राएलियों को सिवाए मृत्यु के, चाहे समुद्र में डूबने से, या फिरौन के सैनिकों के हाथों, और कुछ सूझ नहीं पड़ रहा था। लेकिन परमेश्वर ने उनके लिए सर्वथा अनेपक्षित कर दिया - उसने लाल-समुद्र को दो भाग करके उनके लिए पार निकल जाने का मार्ग बना कर दे दिया, और समस्त इस्त्राएली ऐसे पार हो गए मानों सूखी भूमि पर से पार गए हों। जब फिरौन की सेना ने उसी मार्ग से उनके पीछे जाने का प्रयास किया तो लाल-समुद्र वापस अपने स्थान पर आ गया और फिरौन के सारे रथ और सैनिक डूब कर मर गए। वर्षों बाद भजनकार आसाप ने इस घटना को परमेश्वर की महान शक्ति के प्रमाण में दर्शाते हुए लिखा, "तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ; और तेरे पांवों के चिन्ह मालूम नहीं होते। तू ने मूसा और हारून के द्वारा, अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की" (भजन 77:19-20)।

   हमारा परमेश्वर हमारे लिए वहाँ मार्ग बना कर दे सकता है जहाँ हमें केवल बाधाएं दिखाई देती हैं। जब भी हमें अपने जीवन में किसी बात को लेकर अनिश्चितता लगे, आगे बढ़ने का मार्ग सूझ ना पड़े, तो बीते समय में परमेश्वर द्वारा किए गए कार्यों को स्मरण करना, उनके लिए उसका धन्यवाद करना, उसकी आराधना करना अच्छा होता है। परमेश्वर हर परिस्थिति और हर परेशानी का हल तथा मार्ग बनाकर देने का विशेषज्ञ है; उसका हर मार्ग हमारी भलाई तथा उसके प्रेम और सामर्थ के प्रगटीकरण के लिए है। जो सर्वोत्तम मार्ग उसने हमार लिए बनाकर दिया है, वह है स्वेच्छा से प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिलने वाला पापों की क्षमा तथा उद्धार का मार्ग; जो आज समस्त मानव जाति के लिए खुला और सेंत-मेंत उपलब्ध है। - डेविड मैक्ककैसलैंड


जिस परमेश्वर ने हमारे उद्धार के लिए मार्ग बनाकर दे दिया, 
वह हमारी प्रतिदिन की आवश्यकताओं और संघर्षों के लिए भी मार्ग दे सकता है

मैं तो यहोवा नाम का प्रचार करूंगा। तुम अपने परमेश्वर की महिमा को मानो! वह चट्टान है, उसका काम खरा है; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा ईश्वर है, उस में कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है। - व्यवस्थाविवरण 32:3-4

बाइबल पाठ: भजन 77:10-20
Psalms 77:10 मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।
Psalms 77:11 मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा। 
Psalms 77:12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा। 
Psalms 77:13 हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है? 
Psalms 77:14 अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है। 
Psalms 77:15 तू ने अपने भुजबल से अपनी प्रजा, याकूब और यूसुफ के वंश को छुड़ा लिया है। (सेला) 
Psalms 77:16 हे परमेश्वर समुद्र ने तुझे देखा, समुद्र तुझे देख कर ड़र गया, गहिरा सागर भी कांप उठा। 
Psalms 77:17 मेघों से बड़ी वर्षा हुई; आकाश से शब्द हुआ; फिर तेरे तीर इधर उधर चले। 
Psalms 77:18 बवण्डर में तेरे गरजने का शब्द सुन पड़ा था; जगत बिजली से प्रकाशित हुआ; पृथ्वी कांपी और हिल गई। 
Psalms 77:19 तेरे मार्ग समुद्र में है, और तेरा रास्ता गहिरे जल में हुआ; और तेरे पांवों के चिन्ह मालूम नहीं होते। 
Psalms 77:20 तू ने मूसा और हारून के द्वारा, अपनी प्रजा की अगुवाई भेड़ों की सी की।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 77-78
  • रोमियों 10



सोमवार, 8 अगस्त 2016

अकेले


   अफ्रीका की एक दंत-कथा के अनुसार, चार उँगलियाँ और अंगूठा हाथ पर साथ-साथ रहा करते थे, बड़े घनिष्ठ अविभाज्य मित्र थे। एक दिन उन्होंने देखा कि उनके पास ही सोने की एक अंगूठी पड़ी है और उँगलियों ने उसे अपना लेने की योजना बनाई। लेकिन अंगूठे ने एतराज़ किया और कहा कि उनके लिए उस अंगूठी को चोरी करना सही नहीं है। चारों उँगलियों ने अंगूठे को स्वधर्मी और कायर बताते हुए उसे अपने से अलग कर दिया। क्योंकि अंगूठा भी उनकी बुराई में उनका साथ देना नहीं चाहता था, इसलिए वह भी अलग हो गया। और तब से अंगूठा हाथ पर बाकी उँगलियों से अलग ही रहता है।

   इस दंत-कथा से मुझे ऐसे समय स्मरण हो आते हैं जब हमें लगता है कि हमारे चारों ओर बुराई पनप रही है और हम बुराई से अलग होने के प्रयासों में अकेले ही खड़े हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में नूह के दिनों के समय के वर्णन में हम पाते हैं कि पृथ्वी बुराई और उपद्रव से भर गई थी, और मनुष्यों के मनों में बुरा ही उत्पन्न होता था (उत्पत्ति 6:5, 11); "परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रही" (उत्पत्ति 6:8)। उस बुराई और उपद्रव से भरे समय में भी नूह परमेश्वर को संपूर्णतः समर्पित और परमेश्वर का आज्ञाकारी बना रहा, परमेश्वर के कहने पर और उसके निर्देशों के अनुसार नूह ने जहाज़ बनाया, जिसमें होकर परमेश्वर ने नूह और उसके परिवार को अपने अनुग्रह द्वारा बचा लिया।

   प्रभु यीशु के जीवन, बलिदान और पुनरुत्थान में होकर परमेश्वर ने हम पर भी अपना अनुग्रह किया है। नूह के समान ही अपने जीवनों में परमेश्वर के लिए दृढ़ होकर खड़े रहना और अपने जीवनों से उसे आदर देने के पर्याप्त कारण हमारे पास भी हैं। परमेश्वर सदा हमारे साथ बना रहता है, पवित्र-आत्मा के रूप में हमारे अन्दर विद्यमान रहता है; इसलिए हम कभी अकेले नहीं है। उसके कान हमारी पुकार के लिए सदा खुले रहते हैं (भजन 34:15-17)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


भीड़ के साथ खड़े होना आसान है; 
भीड़ से अलग अकेले खड़े होने के लिए साहस चाहिए।

यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं। यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले। धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है। - भजन 34:15-17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 6:11-22
Genesis 6:11 उस समय पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी, और उपद्रव से भर गई थी। 
Genesis 6:12 और परमेश्वर ने पृथ्वी पर जो दृष्टि की तो क्या देखा, कि वह बिगड़ी हुई है; क्योंकि सब प्राणियों ने पृथ्वी पर अपनी अपनी चाल चलन बिगाड़ ली थी। 
Genesis 6:13 तब परमेश्वर ने नूह से कहा, सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे साम्हने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है, इसलिये मैं उन को पृथ्वी समेत नाश कर डालूंगा। 
Genesis 6:14 इसलिये तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले, उस में कोठरियां बनाना, और भीतर बाहर उस पर राल लगाना। 
Genesis 6:15 और इस ढंग से उसको बनाना: जहाज की लम्बाई तीन सौ हाथ, चौड़ाई पचास हाथ, और ऊंचाई तीस हाथ की हो। 
Genesis 6:16 जहाज में एक खिड़की बनाना, और इसके एक हाथ ऊपर से उसकी छत बनाना, और जहाज की एक अलंग में एक द्वार रखना, और जहाज में पहिला, दूसरा, तीसरा खण्ड बनाना। 
Genesis 6:17 और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जलप्रलय कर के सब प्राणियों को, जिन में जीवन की आत्मा है, आकाश के नीचे से नाश करने पर हूं: और सब जो पृथ्वी पर हैं मर जाएंगे। 
Genesis 6:18 परन्तु तेरे संग मैं वाचा बान्धता हूं: इसलिये तू अपने पुत्रों, स्त्री, और बहुओं समेत जहाज में प्रवेश करना। 
Genesis 6:19 और सब जीवित प्राणियों में से, तू एक एक जाति के दो दो, अर्थात एक नर और एक मादा जहाज में ले जा कर, अपने साथ जीवित रखना। 
Genesis 6:20 एक एक जाति के पक्षी, और एक एक जाति के पशु, और एक एक जाति के भूमि पर रेंगने वाले, सब में से दो दो तेरे पास आएंगे, कि तू उन को जीवित रखे। 
Genesis 6:21 और भांति भांति का भोज्य पदार्थ जो खाया जाता है, उन को तू ले कर अपने पास इकट्ठा कर रखना सो तेरे और उनके भोजन के लिये होगा। 
Genesis 6:22 परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 74-76
  • रोमियों 9:16-33



रविवार, 7 अगस्त 2016

कठिन लोग


   अपनी पुस्तक, "God in the Dock" में लेखक सी० एस० ल्यूईस ऐसे लोगों का वर्णन करते हैं जिनके साथ कार्य करना या निभाना कठिन होता है। ऐसे लोगों का स्वार्थीपन, क्रोध, ईर्ष्या आदि जैसे दुर्गुण उनके साथ हमारे संबंधों को अकसर बिगाड़ देते हैं, संबंध निभाना कठिन कर देते हैं। ऐसे लोगों को लेकर हम यह सोचने लगते हैं कि, "यदि यह व्यक्ति ना होता तो जीवन कितना सहज हो जाता; काश कि हम ऐसे लोगों के साथ कार्य करने या निभाने से बच सकते!"

   फिर ल्यूईस हम पर पासा पलट देते हैं और हमारे सामने एक कटु सत्य लेकर आते हैं; उन कठिन लोगों के कारण जैसी कुँठाओं और निराशाओं का सामना हमें करना पड़ता है, वैसी ही बातों का सामना हमारे कारण परमेश्वर को भी प्रतिदिन करना पड़ता है। ल्यूईस लिखते हैं, "आप भी वैसे ही कठिन व्यक्ति हैं। आपके चरित्र में भी कुछ गंभीर दोष हैं। जैसे आपकी योजनाएं और आशाएं किसी अन्य के चरित्र के कारण धाराशायी हो गई हैं, वैसे ही औरों की योजनाएं और आशाएं आपके चरित्र के कारण भी धाराशाई हुई हैं।" जैसे परमेश्वर प्रतिदिन हमारे प्रति धैर्य तथा सहनशीलता दिखाते हुए हमें स्वीकार करे रहता है, इस तथ्य का बोध होने के पश्चात हमें भी उन कठिन लोगों के प्रति वैसे ही धैर्य तथा सहनशीलता दिखाते रहना चाहिए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इफसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो" (इफिसियों 4:2)। जो कोई धैर्यवान है, वह बिना क्रोधित हुए या बिना बदला लेने की भावना के, किसी भी कठिन जन के साथ अधिक अच्छे से व्यवहार कर सकता है; बिना उत्तेजित एवं विचलित हुए, उसे सहनशीलता के साथ अनुग्रह दिखा सकता है।

   क्या आपके जीवन में कठिन लोग हैं? परमेश्वर से प्रार्थना में मांगें कि वह आप में होकर उन तक अपना प्रेम और अनुग्रह पहुँचाए। - डेनिस फिशर


जैसा परमेश्वर आपको देखता है, आपके साथ व्यवहार करता है, 
आप भी औरों के साथ वैसा ही करें।

क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। - यूहन्ना 13:15

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:1-12
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। 
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। 
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो। 
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। 
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। 
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।
Ephesians 4:7 पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है। 
Ephesians 4:8 इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्‍धुवाई को बान्‍ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए। 
Ephesians 4:9 (उसके चढ़ने से, और क्या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था। 
Ephesians 4:10 और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश से ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)। 
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। 
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 72-73
  • रोमियों 9:1-15



शनिवार, 6 अगस्त 2016

नया तथा सुन्दर


   हाल ही में मेरी बेटी ने मुझे अपना समुद्री काँच, जिसे समुद्र-तटीय काँच भी कहते हैं, का संग्रह दिखाया। ये उन काँच के टुकड़ों का संग्रह है जो कभी काँच के बर्तन या बोतलें थे, किसी कारणवश टूट कर बिखर गए, और फिर क्योंकि उनकी कोई उपयोगिता नहीं रही इसलिए उन्हें फेंक दिया गया। व्यर्थ समझ कर फेंके गए वे टुकड़े बहते हुए समुद्र में पहुँच जाते हैं, जहाँ लहरों के थपेड़ों और रेत से रगड़-रगड़ कर उनके तीखे किनारे घिस कर गोल हो जाते हैं। अन्त-परिणाम एक अलग ही सुन्दरता लिए हुए काँच होता है जिसकी बहुत कीमत है, जिसे संग्रहकर्ता और कलाकार बड़ी मेहनत से ढूँढ़ते हैं और संजो-सजा कर रखते हैं। कभी व्यर्थ जानकर फेंका गया वह काँच अब नया और सुन्दर आकार लेकर बहुमूल्य और उपयोगी हो जाता है।

   यही कार्य परमेश्वर अपने अनुग्रह और प्रेम द्वारा उन टूटे हुए जीवनों के साथ भी करता है, जो अपने आप को उसके हाथों में समर्पित कर देते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने यिर्मयाह नबी को एक कुम्हार को कार्य करते हुए देखने को कहा। यिर्मयाह ने देखा कि कुम्हार चाक पर बर्तन बना रहा था और बर्तन बिगड़ गया; लेकिन कुम्हार ने उस बिगड़े हुए बर्तन को फेंक नहीं दिया, वरन तुरंत ही उसे सुधार कर एक नया तथा सुन्दर बर्तन बना दिया (यिर्मयाह 18:1-6)। परमेश्वर ने समझाया कि इस्त्राएल के लोग, उसकी प्रजा, उसके हाथ में वैसे ही है जैसे वह बर्तन कुम्हार के हाथों में था; परमेश्वर भी अपने लोगों को आवश्यकतानुसार सुधार तथा संवार सकता है, उन्हें नया और सुन्दर बना सकता है।

   हम सभी उसी एकमात्र परमेश्वर ही की सृष्टि हैं; वह हमारी रचना को हमसे अधिक गहराई और बारीकी से जानता है। जीवन या संसार की कोई परिस्थिति, हमारा कोई भी पाप, हमें ऐसा कभी नहीं बिगाड़ अथवा तोड़ सकता है कि परमेश्वर हमें पुनः सुधार तथा संवार के नया तथा सुन्दर ना बना सके। वह तो ऐसा करना चाहता है; वह आपकी प्रतीक्षा में है, कि आप उसके हाथों में अपने आप को समर्पित करें, उसे अपना कार्य करने की अनुमति तथा स्वतंत्रता दें और वह आपको सुधार तथा संवार कर, अपने कार्य के लिए उपयोगी, नया तथा सुन्दर बना दे। - सिंडी हैस कैसपर


जब हम परिस्थितियों द्वारा पिघला दिए जाते हैं, 
तब उस ’कुम्हार’ के लिए हमें नए आकार में ढालने का सर्वोत्तम अवसर होता है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 18:1-6
Jeremiah 18:1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, उठ कर कुम्हार के घर जा, 
Jeremiah 18:2 और वहां मैं तुझे अपने वचन सुनवाऊंगा। 
Jeremiah 18:3 सो मैं कुम्हार के घर गया और क्या देखा कि वह चाक पर कुछ बना रहा है! 
Jeremiah 18:4 और जो मिट्टी का बासन वह बना रहा था वह बिगड़ गया, तब उसने उसी का दूसरा बासन अपनी समझ के अनुसार बना दिया। 
Jeremiah 18:5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, हे इस्राएल के घराने, 
Jeremiah 18:6 यहोवा की यह वाणी है कि इस कुम्हार की नाईं तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता? देख, जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, वैसा ही हे इस्राएल के घराने, तुम भी मेरे हाथ में हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 70-71
  • रोमियों 8:22-39