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रविवार, 9 अक्टूबर 2016

उम्मीद


   अपनी पुस्तक God in the Dock (कटघरे में परमेश्वर) में सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्युईस ने लिखा: "कलपना कीजिए कि एक इमारत में, जिसमें कई लोग साथ रहते हैं, आधे यह मानते हैं कि वह इमारत के होटल है, और शेष आधे यह मानते हैं कि वह इमारत एक कैदखाना है। जो उसे होटल मानते हैं, उन्हें वह इमारत काफी कष्टदायक और असहनीय लगेगी; और जो उसे कैदखाना मानते हैं उनके लिए वही इमारत आश्चर्यजनक रूप से आरामदेह होगी।" ल्युईस ने बड़ी चतुराई से इस तुलनात्मक स्थिति के द्वारा इस बात को दिखाया है कि कैसे हम अपनी उम्मीद के आधार पर जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बनाते हैं। ल्युईस आगे लिखते हैं, "यदि आप इस संसार को एक होटल के रूप में देखते हैं जो आप के सुख-सुविधा और आनन्द उठाने के लिए है, तो आपको यह संसार कष्टदायक एवं असहनीय लगेगा। परन्तु यदि आप इसी संसार को अपने प्रशिक्षण और सुधार का स्थान मान लेते हैं तो यही संसार आपको फिर उतना बुरा भी नहीं लगेगा।"

   अधिकांशतः उम्मीद करी जाती है कि जीवन को आरामदेह, आनन्दपूर्ण और कष्ट-विहीन होना चाहिए। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें ऐसा नहीं सिखाती है। एक मसीही विश्वासी के लिए संसार आत्मिक विकास एवं उन्नति का स्थान है, अच्छे और बुरे, दोनों ही प्रकार के अनुभवों के द्वारा। प्रभु यीशु मसीह जीवन के प्रति उम्मीद रखने के विषय में यथार्तवादी थे; उन्होंने अपने चेलों से कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है" (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु में होकर हमको जीवन की आशीषों और कष्टों को झेलने के समय एक भीतरी शान्ति भी रहती है, क्योंकि हम यह जानते हैं कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और जो भी परमेश्वर हमारे साथ होने दे रहा है वह उसकी सार्वभौमिक योजना के अन्तर्गत, अन्ततः हमारी भलाई और उसकी महिमा के लिए ही हो रहा है।

   हमारे जीवनों में प्रभु यीशु की उपस्थिति, कष्ट के समयों में भी हमें प्रसन्नचित बने रहने की सहायता एवं सामर्थ प्रदान करती है। - डेनिस फिशर


कष्ट के समयों में भी प्रभु यीशु में शान्ति प्राप्त होती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

प्रतीक्षा


   चा सा-सून नामक एक 69 वर्षीय कोरियाई महिला ने, 3 वर्ष के सतत प्रयास के पश्चात, ड्राईविंग लाईसेंस पाने की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करके वह लाईसेंस प्राप्त कर ही लिया। वह अपने नाती-पोतों को चिड़ियाघर घुमाने लेजाना चाहती थी इसीलिए उसे उस लाईसेंस की आवश्यकता थी। सामन्यतः तुरंत परिणाम प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले इस संसार में ऐसा धैर्य और सतत प्रयास कम ही देखने को मिलता है। जब हम किसी चीज़ को पाना चाहते हैं, और वह हमें नहीं मिलती, तो हम अकसर कुड़ाकुड़ाते हैं, तथा और भी अधिक अधीरता से उसकी माँग करते हैं; या फिर, यदि वह चीज़ हमें शीघ्रता से उपलब्ध नहीं होती, तो उसे छोड़कर हम आगे बढ़ जाते हैं। "प्रतीक्षा" एक ऐसा शब्द है जिसे हम सुनना कदापि पसन्द नहीं करते हैं।

   लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताता है कि परमेश्वर ने अनेकों स्थानों पर, कई बातों के लिए अपने लोगों से चाहा है कि वे उसके सही समय और सही तरीके की प्रतीक्षा करें। परमेश्वर की प्रतीक्षा करने से तात्पर्य है कि अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए धैर्य के साथ परमेश्वर की ओर देखना। दाऊद ने यह समझ लिया था कि उसे प्रभु परमेश्वर की प्रतीक्षा करना क्यों ज़रूरी है: क्योंकि उसका उद्धार परमेश्वर से था (भजन 62:1); उसे कोई और छुड़ा नहीं सकता था। उसकी सारी आशा केवल परमेश्वर से ही थी (पद 5), क्योंकि केवल परमेश्वर ही है जो प्रार्थनाओं को सुनता है (पद 8)।

   हमारी प्रार्थनाओं में अकसर यह मांग रहती है कि परमेश्वर शीघ्रता से हमारी प्रार्थना सुने, तुरंत ही वैसा कर दे और जो भी हम चाह रहे हैं उस पर आशीष दे। दाऊद के समान ही हम भी प्रार्थना कर सकते हैं: "हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा" (भजन 5:3)। लेकिन क्या हमने रुक कर कभी यह सोचा है कि यदि परमेश्वर की ओर से हमारी प्रार्थना का उत्तर हो, "धैर्य रखो; मेरी प्रतीक्षा करो" तो हम क्या कहेंगे या करेंगे?

   हम मसीही विश्वासियों को चाहिए कि प्रत्येक बात के लिए हम परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा करने वाले बनें, चाहे वह उत्तर हमारे समयानुसार ना भी आए; क्योंकि परमेश्वर के समय और तरीके से मिलने वाला प्रत्येक उत्तर हमारे लिए सर्वोत्तम ही होगा। - सी० पी० हिया


परमेश्वर से करी गई हमारी प्रत्येक प्रार्थना का 
अन्तिम वाक्य होना चाहिए, "आपकी इच्छा ही पूरी हो"।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 62:1-12
Psalms 62:1 सचमुच मैं चुपचाप हो कर परमेरश्वर की ओर मन लगाए हूं; मेरा उद्धार उसी से होता है। 
Psalms 62:2 सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; मैं बहुत न डिगूंगा।
Psalms 62:3 तुम कब तक एक पुरूष पर धावा करते रहोगे, कि सब मिलकर उसका घात करो? वह तो झुकी हुई भीत वा गिरते हुए बाड़े के समान है। 
Psalms 62:4 सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं; वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं।
Psalms 62:5 हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है। 
Psalms 62:6 सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; इसलिये मैं न डिगूंगा। 
Psalms 62:7 मेरा उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर है; मेरी दृढ़ चट्टान, और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है। 
Psalms 62:8 हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो; उस से अपने अपने मन की बातें खोल कर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है। 
Psalms 62:9 सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तौल में वे हलके निकलते हैं; वे सब के सब सांस से भी हलके हैं। 
Psalms 62:10 अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।
Psalms 62:11 परमेश्वर ने एक बार कहा है; और दो बार मैं ने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्वर का है। 
Psalms 62:12 और हे प्रभु, करूणा भी तेरी है। क्योंकि तू एक एक जन को उसके काम के अनुसार फल देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4


शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

प्रमाण


   महारानी एलिज़बेथ द्वितीय ब्रिटिश सामराज्य पर 60 वर्ष से भी अधिक समय से राज्य कर रही हैं। उनके शासन का यह समय शालीनता और उच्च कोटि के राजकीय व्यवहार का समय रहा है। उन्होंने अपने जीवन को अपने लोगों की अच्छी सेवा करते रहने के लिए समर्पित किया है, और परिणामस्वरूप उनकी प्रजा उन से बहुत प्रेम करती है, उनका बहुत आदर करती है। इसलिए आप उनके राजमहल, बकिंघम पैलेस के ऊपर फैहराने वाले झण्डे के महत्व को समझ सकते हैं। जब वह झण्डा फहरा रहा होता है तो यह संकेत है कि वे लंदन के मध्य में स्थित अपने महल में हैं; महारानी अपने लोगों के साथ मौजूद हैं।

   जब मैं इसके बारे में सोच रहा था, तो मुझे ध्यान आया कि मसीह यीशु भी हम मसीही विश्वासियों के हृदयों में निवास करता है, और उसका वायदा है कि वह हमें छोड़कर कभी नहीं जाएगा, सदा हमारे साथ बना रहेगा (इब्रानियों 13:5)। यह बात हम सब के लिए व्यक्तिगत रीति से महत्वपूर्ण और अद्भुत तो है, परन्तु क्या हमारे आस-पास के लोग हमारे चाल-चलन और व्यवहार से कभी यह जानने पाते हैं कि मसीह यीशु हमारे साथ, हमारे अन्दर निवास करता है? यदि वह हमारे अन्दर है तो फिर उसकी यह उपस्थिति हमारे जीवन द्वारा बाहर भी प्रकट होनी चाहिए।

   इसके लिए जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा है, हमें परमेश्वर का अनुकरण करने वाला, और जैसे मसीह यीशु ने हम से प्रेम किया है वैसे ही हमें भी औरों के साथ प्रेम करने वाला होना चाहिए (इफिसियों 5:1-2)। जब हम ऐसा करेंगे तो हम उन आत्मा के फलों को भी प्रकट करेंगे जो परमेश्वर पवित्र आत्मा की हमारे अन्दर उपस्थिति से हम में उत्पन्न होते हैं (गलतियों 5:22-23)। इसलिए आईए हम प्रभु परमेश्वर की हमारे अन्दर रहने वाली उपस्थिति के झण्डे - उसके अनुग्रह, धार्मिकता और प्रेम के प्रदर्शन, को बुलन्द करें जिससे औरों के सामने हमारे अन्दर उसकी उपस्थिति का प्रमाण स्पष्ट प्रकट हो। - जो स्टोवैल


मसीह यीशु की उपस्थिति के झण्डे को अपने जीवनों में फहराएं,
 ताकि लोग जान सकें कि महाराजा अपने सिंहासन पर विराजमान है।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:1-13
Ephesians 5:1 इसलिये प्रिय, बालकों की नाईं परमेश्वर के सदृश बनो। 
Ephesians 5:2 और प्रेम में चलो; जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया; और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्‍ध के लिये परमेश्वर के आगे भेंट कर के बलिदान कर दिया। 
Ephesians 5:3 और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। 
Ephesians 5:4 और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाएं। 
Ephesians 5:5 क्योंकि तुम यह जानते हो, कि किसी व्यभिचारी, या अशुद्ध जन, या लोभी मनुष्य की, जो मूरत पूजने वाले के बराबर है, मसीह और परमेश्वर के राज्य में मीरास नहीं। 
Ephesians 5:6 कोई तुम्हें व्यर्थ बातों से धोखा न दे; क्योंकि इन ही कामों के कारण परमेश्वर का क्रोध आज्ञा ना मानने वालों पर भड़कता है। 
Ephesians 5:7 इसलिये तुम उन के सहभागी न हो। 
Ephesians 5:8 क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो। 
Ephesians 5:9 (क्योंकि ज्योति का फल सब प्रकार की भलाई, और धामिर्कता, और सत्य है)। 
Ephesians 5:10 और यह परखो, कि प्रभु को क्या भाता है 
Ephesians 5:11 और अन्धकार के निष्‍फल कामों में सहभागी न हो, वरन उन पर उलाहना दो। 
Ephesians 5:12 क्योंकि उन के गुप्‍त कामों की चर्चा भी लाज की बात है। 
Ephesians 5:13 पर जितने कामों पर उलाहना दिया जाता है वे सब ज्योति से प्रगट होते हैं, क्योंकि जो सब कुछ को प्रगट करता है, वह ज्योति है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29
  • फिलिप्पियों 3


गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

सहायक


   मेरे पिता का बचपन एक फार्म पर बीता, जहाँ उन्हें सौंपा गया कार्य था एकत्रित करे गए बचे हुए भोजन और झूठन को सूअरों को डालना। उन्हें यह कार्य बहुत नापसन्द था क्योंकि उनके बाड़े में झूठन लिए हुए घुसते ही सारे सूअर वह खाना खाने के लिए उनकी ओर आते और धक्का-मुक्की करने लगते जिससे मेरे पिता के उनके बीच में गिर जाने का खतरा रहता था। उनके लिए यह कार्य असंभव हो जाता यदि उनके साथ सूअरों के बाड़े में जाने के लिए एक वफादार सहायक ना होता; उनकी सहायक जर्मन शेपर्ड जाति की एक बड़ी सी कुतिया थी जो उनके साथ जाया करती थी और अपने आप को सूअरों और पिताजी के बीच में बनाए रखती थी, जब तक की पिताजी अपना कार्य पूरा करके बाड़े और खतरे से बाहर नहीं आ जाते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के एक भविश्यद्वक्ता, यिर्मयाह को भी इस्त्राएलियों को परमेश्वर का वचन पहुंचाने का कठिन कार्य सौंपा गया था। इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए यिर्मयाह को शारीरिक यात्नाएं, निन्दा और बुराई, कैद होना और सबसे अलग किए जा के ’कालापनी’ की सज़ा सहना पड़ा। यिर्मयाह को गहरी निराशा के साथ संघर्ष भी करना पड़ा (यिर्मयाह 20:7), लेकिन यिर्मयाह ने यह भी माना कि इस सारे संघर्ष में परमेश्वर उसका सहायक बनकर सदा साथ बना रहा (यिर्मयाह 20:11), जैसा कि परमेश्वर ने यह ज़िम्मेदारी देते समय उससे वायदा किया था: "वे तुझ से लड़ेंगे तो सही, परन्तु तुझ पर प्रबल न होंगे, क्योंकि बचाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ, यहोवा की यही वाणी है" (यिर्मयाह 1:19)।

   परमेश्वर अपने वायदे पर अडिग रहा और यिर्मयाह को कभी अकेला या निःसहाय नहीं होने दिया। परमेश्वर का हम मसीही विश्वासियों से भी ऐसा ही वायदा है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा (इब्रनियों 13:5)। हमारी सहायता के लिए परमेश्वर ने अपने पवित्र आत्मा को हमें दिया है जो प्रत्येक मसीही विश्वासी के अन्दर निवास करता है: "और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा" (यूहन्ना 14:16-17)। हमारा यह सहायक हमें आशा देता है (रोमियों 15:13); हमें आत्मिक सत्यों की ओर ले जाता है (यूहन्ना 16:13) और हमारे हृदयों में परमेश्वर का प्रेम उंडेलता है (रोमियों 5:5)।

   हम विश्वास रख सकते हैं कि परमेश्वर हर कठिनाई में हमारी सहायता करता है जिससे कि हम उस परिस्थिति को झेल सकें और यिर्मयाह के समान ही हम भी कह सकें, "परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा" (यिर्मयाह 20:11)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यहां नीचे इस धरती पर हमारी सबसे बड़ी आशा ऊपर हमारे परमेश्वर पिता से है।

परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 20:7-13
Jeremiah 20:7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं ने धोखा खाया; तू मुझ से बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हंसी होती है; सब कोई मुझ से ठट्ठा करते हैं। 
Jeremiah 20:8 क्योंकि जब मैं बातें करता हूँ, तब मैं जोर से पुकार पुकारकर ललकारता हूँ कि उपद्रव और उत्पात हुआ, हां उत्पात! क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है। 
Jeremiah 20:9 यदि मैं कहूं, मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा, तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता। 
Jeremiah 20:10 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल हो कर, उस से बदला लेंगे। 
Jeremiah 20:11 परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा। 
Jeremiah 20:12 हे सेनाओं के यहोवा, हे धर्मियों के परखने वाले और हृदय और मन के ज्ञाता, जो बदला तू उन से लेगा, उसे मैं देखूं, क्योंकि मैं ने अपना मुक़द्दमा तेरे ऊपर छोड़ दिया है। 
Jeremiah 20:13 यहोवा के लिये गाओ; यहोवा की स्तुति करो! क्योंकि वह दरिद्र जन के प्राण को कुकमिर्यों के हाथ से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2


बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

चिन्ह


   मैं स्कॉटलैंड में ग्लासगो से एडिनबरा की ओर सड़क से यात्रा कर रहा था, और उस इलाके में सड़क के दोनों ओर चारागाहों के सुन्दर दृश्य का आनन्द ले रहा था कि तभी एक हास्यास्पद दृश्य ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। कुछ दूरी पर, एक टीले के ऊपर गुलाबी रंग दी गई भेड़ों का एक झुण्ड चर रहा था!

   मैं जानता हूँ कि अपने झुण्ड की पहचान करने के लिए चरवाहे अपने जानवरों पर एक विशेष रंग से कुछ चिन्ह बना देते हैं - लेकिन यहाँ तो चरवाहे ने प्रत्येक भेड़ को पूरा का पूरा ही गुलाबी रंग से रंग दिया था, और वे भेड़ें बिलकुल अलग ही दिखाई दे रही थीं। उस इलाके में सभी जानते होंगे कि उन भेड़ों का चरवाहा कौन है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को भी अपने भेड़ें कहा है, और उनकी पहचान के लिए एक विशेष चिन्ह भी दिया है। मसीह यीशु के अनुयायी का यह विशेष चिन्ह क्या है? कैसे पहचान करी जा सकती है कि कौन प्रभु यीशु का जन है?

   यूहन्ना रचित सुसमाचार में, उस अच्छे चरवाहे - प्रभु यीशु ने यह पहचान चिन्ह बताया है - प्रेम: "मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" (यूहन्ना 13:34-35)। अपने व्यवहार और वचन, दोनों ही से एक मसीही विश्वासी को अपने आस-पास के सभी लोगों से प्रेम दिखाना चाहिए, जैसा कि प्रेरित युहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा है (1 यूहन्ना 4:11)।

   औरों के प्रति एक मसीही विश्वासी का प्रेम वैसा ही प्रत्यक्ष और सर्वविदित पहचान चिन्ह होना चाहिए जैसा स्कॉटलैंड की उन भेड़ों का गुलाबी रंग उनके चरवाहे का था। - डेव ब्रैनन


मसीही विशवासी होने के नाते, हमारा प्रेम भरा आचरण 
हमें भीड़ में अलग ही प्रकट करने वाला होना चाहिए।

हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:11 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:7-18
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। 
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। 
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। 
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। 
John 10:11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। 
John 10:12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है। 
John 10:13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उसको भेड़ों की चिन्‍ता नहीं। 
John 10:14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं। 
John 10:15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं। 
John 10:16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा। 
John 10:17 पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं। 
John 10:18 कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25
  • फिलिप्पियों 1


मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

स्थाई


   हम आज एक ऐसी संस्कृति में रह रहे हैं जिसमें ’प्रयोग करो और फेंक दो’ का चलन अधिकाधिक होता जा रहा है। थोड़ा थम कर दैनिक उपयोग की उन वस्तुओं के बारे में सोचें जो उपयोग हो चुकने के बाद फेंके जाने के लिए ही बनाई जाती हैं - उस्तरे, पानी की बोतलें, लाईटर, कागज़ की प्लेटें, भोजन करने के लिए प्लास्टिक के बर्तन इत्यादि, सभी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका प्रयोग करके उन्हें फेंक दिया जाता है और उनके स्थान पर ऐसा ही करने के लिए नई वस्तुएं ले ली जाती हैं।

   यह ’प्रयोग करो और फेंक दो’ का चलन हमारे परस्पर व्यवहार एवं संबंधों में भी दिखने और बढ़ने लगा है। कई बार रिश्तों में परस्पर सच्चा समर्पण एच्छिक प्रतीत होता है; विवाह संबंध स्थाई बने रहने के लिए संघर्षों से निकलते रहते हैं। लंबे समय से कार्य करने वाले कर्मचारी मालिकों या अधिकारियों द्वारा सेवानिवृति से पहले बर्खास्त कर दिए जाते हैं ताकि उनका स्थान सस्ते विकल्प ले सकें। उच्च कोटि के खिलाड़ी अधिक कमाई के लिए अपनी टीम छोड़ कर दूसरी टीम में चले जाते हैं। ऐसा लगता है कि कुछ भी स्थाई नहीं है।

   लेकिन हमारे कभी ना बदलने वाले प्रभु परमेश्वर का यह वायदा है कि उसका प्रेम भरा अनुग्रह उसके बच्चों के साथ सदा स्थाई बना रहेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल के भजन 136 में भजनकार परमेश्वर के इसी स्थाई होने के वायदे का जश्न उसके कार्य, चरित्र और हैसियत के अचरज से संबंधित कथनों के द्वारा मनाता है। परमेश्वर से संबंधित अपने हर कथन के बाद भजनकार दोहराता है, "उसकी करुणा सदा की है"; चाहे वह कथन परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि पर हो (पद 4-9), या अपने लोगों को बचाने के लिए किए गए उसके कार्य पर हो (पद 10-22) या फिर अपने लोगों के प्रति उसकी करुणापूर्ण देखभाल से संबंधित हो (पद 23-26)। हम परमेश्वर में सदा अपना भरोसा बनाए रख सकते हैं क्योंकि उसकी करुणा कभी कम नहीं होती; परमेश्वर की करुणा का स्थाई होना हमें हर परिस्थिति में आशा प्रदान करता रहता है।

   इसीलिए हम भी भजनकार के साथ यह कह सकते हैं: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है" (पद 1)।


परमेश्वर का अनुग्रह अथाह; उसकी करुणा अनन्त और उसकी शांति अवर्णनीय है।

क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए। - मलाकी 3:6

बाइबल पाठ: भजन 136:1-11; 23-26
Psalms 136:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:2 जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:3 जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:4 उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:5 उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:6 उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:7 उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:8 दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:9 और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:10 उसने मिस्त्रियों के पहिलौठों को मारा, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:11 और उनके बीच से इस्राएलियों को निकाला, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:23 उसने हमारी दुर्दशा में हमारी सुधि ली, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:24 और हम को द्रोहियों से छुड़ाया है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:25 वह सब प्राणियों को आहार देता है, उसकी करूणा सदा की है। 
Psalms 136:26 स्वर्ग के परमेश्वर का धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 20-22
  • इफिसियों 6


सोमवार, 3 अक्टूबर 2016

प्रकाश


   कोलेराडो स्प्रिंग्स के चित्रकार बॉब सिमपिच के एक चित्र, A Trail of Light में एस्पन पेड़ों के एक झुरमुट को दिखाया गया है जिस पर सूर्य चमक रहा है। पतझड़ ऋतु में पेड़ों के सबसे ऊपर के पत्ते सुनहले होकर सूर्य के प्रकाश में चमक रहे हैं, परन्तु पेड़ों के नीचे की ज़मीन पर कहीं परछाईं तो कहीं प्रकाश का मिश्रण है। इस तुलना के बारे में चित्रकार ने कहा, "मैं वन के पेड़ों में से छनकर आने वाले प्रकाश द्वारा धरती पर किए गए इस जादूई प्रभाव से बहुत प्रभावित हुआ।"

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों को लिखा, "इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो" (2 कुरिन्थियों 4:6)। फिर आगे पौलुस अपने जीवन के अनुभव के यथार्त को लिखता है, "हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते" (पद 8-9)।

   जीवन में ऐसे समय भी आते हैं जब कठिनाईयों, दुःख और हानि आदि के कारण प्रतीत होता है कि परमेश्वर की हमारे साथ सहभागिता तथा उपस्थिति का प्रकाश धूमिल पड़ गया है। परन्तु यदि ध्यान से देखें तो इन गहरी परछाईंयों के समयों में भी उसके प्रकाश की किरणें यहाँ-वहाँ हमारे जीवनों को प्रकाशित करती हुई दिखाई देती हैं। यदि आप आज इस परछाईं और प्रकाश के मिश्रण के समय से होकर निकल रहे हैं, तो विश्वास रखें कि परमेश्वर का प्रकाश - प्रभु यीशु मसीह, सदा हमारे साथ बना रहेगा, हमारे जीवनों को प्रकाशमान करता रहेगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परिस्थितियों के अन्धकार में, परमेश्वर का प्रकाश 
सदैव हमारा मार्गदर्शन करता रहता है।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:1-12
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते। 
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं। 
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। 
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। 
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं। 
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।। 
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। 
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 17-19
  • इफिसियों 5:17-33