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मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

सामर्थ्य


   अफ्रीका का चीता थोड़े से समय के लिए 112 किलोमीटर (70 मील) प्रति घंटा की गति से दौड़ सकता है, परन्तु लंबी दूरी की दौड़ में वह उतना अच्छा नहीं है। बी.बी.सी. में प्रासारित एक समाचार के अनुसार केनिया के एक गाँव के चार लोगों ने 4 मील की दौड़ में दो चीतों को पराजित कर दिया। बात यह थी कि दो चीते गाँव की बकरियों को शिकार बना रहे थे। इसलिए उन चार लोगों ने मिलकर उन चीतों को रोकने की योजना बनाई। उन्होंने दिन के सबसे गर्म समय की प्रतीक्षा की, और फिर उन चीतों के पीछे भागे, और उन्हें इतना दौड़ाया कि वे थक कर निढाल हो गए। फिर वे दोनों थके हुए चीते सरलता से पकड़े जा सके, और उन्हें केनिया वन्यजीव अधिकारियों को उनके पुनःस्थापन के लिए सौंप दिया गया।

   क्या उन चीतों में हम अपने आप को देखने पाते हैं? हमारी अपनी शारीरिक सामर्थ्य प्रभावशाली प्रतीत हो सकती है, परन्तु वह कुछ समय के लिए ही होती है। जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता हमें चिताता है, हम उन जंगली फूलों के समान हैं जो सूर्य की गर्मी में शीघ्र ही मुर्झा जाते हैं (यशायाह 40:6-8)।

   परन्तु जहाँ हमारी अपनी सामर्थ्य समाप्त होती है, वहाँ हमारे लिए परमेश्वर का कार्य आरंभ होता है। बाइबल हमें बताती है कि जो परमेश्वर की बाट जोहते हैं, उनके लिए परमेश्वर की ओर से एक अप्रत्याशित आशीष प्रतीक्षा कर रही होती है। परमेश्वर अपने समय और विधि अनुसार हमारी सामर्थ्य को नया कर सकता है। वह अपनी आत्मा के द्वारा अपने ऊपर विश्वास करने वालों को वह सामर्थ्य दे सकता है जिसके द्वारा "वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे" (पद 31)। - मार्ट डीहॉन


जब हम परमेश्वर के निकट आते हैं तो 
हमारे मन तरोताज़ा और हमारी सामर्थ्य नई हो जाती है।

यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा। - भजन 37:34

बाइबल पाठ: यशायाह 40:6-11, 28-31
Isaiah 40:6 बोलने वाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है। 
Isaiah 40:7 जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है। 
Isaiah 40:8 घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।
Isaiah 40:9 हे सिय्योन को शुभ समचार सुनाने वाली, ऊंचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनाने वाली, बहुत ऊंचे शब्द से सुना, ऊंचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, अपने परमेश्वर को देखो! 
Isaiah 40:10 देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा; देखो, जो मजदूरी देने की है वह उसके पास है और जो बदला देने का है वह उसके हाथ में है। 
Isaiah 40:11 वह चरवाहे की नाईं अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिये रहेगा और दूध पिलानेवालियों को धीरे धीरे ले चलेगा।
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ्य देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 3-5
  • लूका 14:25-35


सोमवार, 17 अप्रैल 2017

परिवार


   एक पास्टर की पत्नि को पार्किन्सन रोग से, जिस के कारण हाथ-पैरों के कार्य करने में बाधा आती है, पीड़ित पाया गया। पास्टर को चिंता हुई कि कैसे वह अपने परिवार और पत्नि की देखभाल करेगा, जबकि उसे अपने चर्च परिवार की भी भलि-भांति देखभाल करनी थी। परन्तु उसकी चिन्ता व्यर्थ थी क्योंकि उसके चर्च परिवार के सदस्यों ने स्वतः ही आगे बढ़कर उसके परिवार के लिए भोजन व्यवस्था और उस की पत्नि की देखभाल में सहायता की।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखी दो पत्रियाँ हैं। अपनी पहली पत्री में पौलुस ने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली के सदस्यों उन आत्मिक वरदानों के उद्देश्य के बारे में समझाया, जो परमेश्वर ने उन्हें दिए थे। उन विभिन्न वरदानों की सूचि बनाने से पहले पौलुस ने उन्हें स्मरण करवाया कि, "किन्‍तु सब के लाभ पहुंचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है" (पद 7)। परमेश्वर हमें आत्मिक वरदान इसलिए नहीं देता है कि हम उन्हें अपने ही स्वार्थ तथा लाभ के लिए प्रयोग करें; वरन इसलिए देता है जिससे कि हम उनके द्वारा औरों की सेवा करें, और ऐसा करके हम उसकी सेवा करते हैं।

   हम सब मसीही विश्वासियों को परमेश्वर की ओर से भिन्न आत्मिक वरदान मिले हैं, जिन्हें हमें समय तथा आवश्यकता के अनुसार योग्य रीति से मसीही मण्डली तथा विश्वासियों के लाभ के लिए प्रयोग करना है। परन्तु उनका प्रयोग करते समय इस बात का भी ध्यान रखना है कि हम उन्हें प्रेम के साथ प्रयुक्त करें, "जिस से पवित्र लोग सिध्द हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए" (इफिसियों 4:12)। परमेश्वर ने हमें जहाँ कहीं भी रखा है, हम वहीं पर उसके द्वारा हमें दी गई विभिन्न योग्यताओं, क्षमताओं, और वरदानों का उपयोग वहाँ की आवश्यकताओं के अनुसार कर सकते हैं, इस बात का ध्यान रखते हुए कि हम सभी मसीही विश्वासी परमेश्वर के परिवार, उसकी मण्डली, अर्थात प्रभु की देह के अंग हैं, एक दूसरे के पूरक तथा सहायक हैं। - सी. पी. हिया


अपने वरदानों को दूसरों के देखभाल के लिए प्रयोग करें।

इसलिये तुम भी जब आत्मिक वरदानों की धुन में हो, तो ऐसा प्रयत्न करो, कि तुम्हारे वरदानों की उन्नति से कलीसिया की उन्नति हो। - 1 कुरिन्थियों 14:12 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:1-12
1 Corinthians 12:1 हे भाइयों, मैं नहीं चाहता कि तुम आत्मिक वरदानों के विषय में अज्ञात रहो। 
1 Corinthians 12:2 तुम जानते हो, कि जब तुम अन्यजाति थे, तो गूंगी मूरतों के पीछे जैसे चलाए जाते थे वैसे चलते थे। 
1 Corinthians 12:3 इसलिये मैं तुम्हें चितौनी देता हूं कि जो कोई परमेश्वर की आत्मा की अगुआई से बोलता है, वह नहीं कहता कि यीशु श्रापित है; और न कोई पवित्र आत्मा के बिना कह सकता है कि यीशु प्रभु है।
1 Corinthians 12:4 वरदान तो कई प्रकार के हैं, परन्तु आत्मा एक ही है। 
1 Corinthians 12:5 और सेवा भी कई प्रकार की है, परन्तु प्रभु एक ही है। 
1 Corinthians 12:6 और प्रभावशाली कार्य कई प्रकार के हैं, परन्तु परमेश्वर एक ही है, जो सब में हर प्रकार का प्रभाव उत्पन्न करता है। 
1 Corinthians 12:7 किन्‍तु सब के लाभ पहुंचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है। 
1 Corinthians 12:8 क्योंकि एक को आत्मा के द्वारा बुध्दि की बातें दी जाती हैं; और दूसरे को उसी आत्मा के अनुसार ज्ञान की बातें। 
1 Corinthians 12:9 और किसी को उसी आत्मा से विश्वास; और किसी को उसी एक आत्मा से चंगा करने का वरदान दिया जाता है। 
1 Corinthians 12:10 फिर किसी को सामर्थ के काम करने की शक्ति; और किसी को भविष्यद्वाणी की; और किसी को आत्माओं की परख, और किसी को अनेक प्रकार की भाषा; और किसी को भाषाओं का अर्थ बताना। 
1 Corinthians 12:11 परन्तु ये सब प्रभावशाली कार्य वही एक आत्मा करवाता है, और जिसे जो चाहता है वह बांट देता है।
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-2
  • लूका 14:1-24


रविवार, 16 अप्रैल 2017

जैसे भी


   सुप्रसिध्द मसीही भजन Just As I Am (जैसा मैं हूँ) सन 1834 में शारलेट ईलिय्ट के द्वारा लिखा गया था। शारलेट कई वर्षों से विकलांग थीं, और यद्यपि वे लड़कियों के एक स्कूल के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने में योगदान करना चाहती थीं, परन्तु उनकी बीमारी ने उन्हें अन्य लोगों के साथ जाकर स्वयं सेवा करने नहीं दी। इससे वे अपने आप को व्यर्थ अनुभव करने लगीं और उनके इसी भीतरी द्वंद ने उन के मन में मसीह पर उनके विश्वास के प्रति शंकाएं उत्पन्न कीं। अपने मन में उठ रही उन शंकाओं के प्रत्युत्तर में उन्होंने यह भजन लिखा। उनकी वेदना संभवतः इस भजन की इन पंकतियों सबसे अच्छी तरह दिखाई देती है:
जैसी मैं हूँ मन शंकामय, और बाहर भीतर हर समय,
है दुविधा, झगड़ा, जलन, भय, मसीह मैं आती हूँ।

   अपने क्रूस पर दिए गए बलिदान और दफनाए जाने के तीन दिन पश्चात, प्रभु यीशु मृतकों में से जी उठे और जा कर अपने चेलों से मिले। जब प्रभु यीशु पहली बार चेलों से मिलने आए, तब एक चेला थोमा, जिसे इतिहास ने "शंका करने वाला थोमा" का उपनाम दिया है शेष चेलों के साथ नहीं था। जब अन्य चेलों ने थोमा को प्रभु यीशु के जी उठने और मिलने आने के बारे में बताया तो उसने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया और कहा कि जब तक वह प्रभु के हाथों में कीलों के, तथा पंजर में भाले के छेद मे अपनी ऊँगली नहीं डाल लेता, तब तक वह विश्वास नहीं करेगा। बाद में प्रभु यीशु फिर से चेलों से मिलने आए और उन्होंने थोमा को उन्हें क्रूस पर चढ़ाए जाने के चिन्हों द्वारा पुष्टि करने को कहा (यूहन्ना 20:27)। थोमा प्रभु के सामने नतमस्तक हो गया और उसने प्रभु के मृतकों में से पुनरुत्थान पर विश्वास किया। तब, "यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया" (पद 29)।

   आज के हम मसीही विश्वासी वे हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को, उन चेलों के समान सदेह, प्रत्यक्ष नहीं देखा है परन्तु फिर भी प्रभु पर विश्वास किया है। साथ ही, समय-समय पर आने वाली सांसारिक परिस्थितियों के कारण, हम भी कभी-कभी अपने मसीही विश्वास या फिर प्रभु यीशु पर ही सन्देह करने लग जाते हैं। इस कमज़ोर विश्वास की स्थिति में भी यदि हम प्रभु को पुकार कर कहें, "...हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूं, मेरे अविश्वास का उपाय कर" (मरकुस 9:24) तो थोमा और शारलेट के समान ही प्रभु हमें भी अपनी शान्ति से परिपूर्ण करेगा, अपने निकट ले लेगा। प्रभु यीशु हमें, जैसे भी हम हैं, उसी अवस्था में अपने पास आने का निमंत्रण देता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


पुनर्जीवित हो उठा मसीह यीशु आपको 
जीवन की भरपूरी प्राप्त करने के लिए आमंत्रित करता है।

उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। - 1 पतरस 1:8

बाइबल पाठ: यूहन्ना 20:19-31
John 20:19 उसी दिन जो सप्‍ताह का पहिला दिन था, सन्‍ध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्‍द थे, तब यीशु आया और बीच में खड़ा हो कर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
John 20:20 और यह कहकर उसने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए: तब चेले प्रभु को देखकर आनन्‍दित हुए। 
John 20:21 यीशु ने फिर उन से कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं। 
John 20:22 यह कहकर उसने उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्र आत्मा लो। 
John 20:23 जिन के पाप तुम क्षमा करो वे उन के लिये क्षमा किए गए हैं जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं।
John 20:24 परन्तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब यीशु आया तो उन के साथ न था। 
John 20:25 जब और चेले उस से कहने लगे कि हम ने प्रभु को देखा है: तब उसने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा।
John 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा हो कर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले। 
John 20:27 तब उसने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो। 
John 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! 
John 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया।
John 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए। 
John 20:31 परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31
  • लूका 13:23-35


शनिवार, 15 अप्रैल 2017

जीवन वृक्ष


   हमारे घर के पीछे के आँगन में एक वृक्ष 20 वर्ष से भी अधिक तक लगा रहा। उसकी छाँव में खेलते हुए हमारे चारों बच्चों का बचपन बीता, और उससे आस-पास की गिलहरियों को आश्रय स्थल मिला। परन्तु एक शरद ऋतु के बाद जब बसन्त आने पर उसमें पत्ते नहीं आए, तो हम जान गए कि अब उसके काटे जाने का समय आ गया है। उस वृक्ष को काटने के लिए मैं एक सपताह तक प्रतिदिन मेहनत करता रहा - पहले उसे गिराने के लिए, और फिर उसे ऐसे टुकड़ों में काटने के लिए जिन्हें संभाला जा सके। यह सब करते हुए मुझे बहुत समय मिला कि मैं वृक्षों के बारे में सोच-विचार कर सकूँ।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में वृक्षों के बारे में जो लिखा गया है, उस पर भी मैंने विचार किया। पहला वृक्ष वह था जिस पर वह वर्जित फल लगा था, जिसे खाने के लिए परमेश्वर ने आदम और हव्वा को मना किया था, परन्तु वे उसे खाने के प्रलोभन से अपने आप को रोक नहीं सके (उत्पत्ति 3:6), और उनकी इस अनाज्ञाकारिता ने पाप को संसार में प्रवेश दिया। परमेश्वर ने उस वृक्ष का प्रयोग उनकी वफादारी तथा विश्वासयोग्यता को परखने के लिए किया। फिर भजन 1 में भी वृक्ष का उल्लेख है, जो परमेश्वर के साथ भक्ति का जीवन बिताने से होने वाले फलदायी जीवन को दिखाता है। नीतिवचन 3:18 में बुध्दि को जीवन का वृक्ष कहा गया है।

   परन्तु बाइबल का सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष वह है जिससे कलवरी का वह क्रूस बनाया गया जिस पर प्रभु यीशु को टाँगा गया, जहाँ उन्होंने अपना बलिदान दिया। उस वृक्ष पर हमारा तथा समस्त जगत का उध्दारकर्ता पृथ्वी और आकाश के मध्य टाँगा गया; सारे संसार की सभी पीढ़ीयों, भूत, वर्तमान तथा भविष्य, के सभी लोगों के सभी पापों को लिए हुए वह बलिदान हो गया। वह वृक्ष अनन्तकाल के लिए, सारे संसार के लिए प्रभु परमेश्वर के प्रेम, बलिदान, और उध्दार का चिन्ह बन गया। प्रभु यीशु की उस अत्यंत पीड़ादायक तथा वीभ्तस मृत्यु का स्थान, वह वृक्ष, आज सारे संसार के सभी लोगों के लिए जीवन का वृक्ष है; क्योंकि वहाँ दिए गए प्रभु यीशु के बलिदान से सारे संसार के सभी लोगों के लिए अनन्त जीवन का मार्ग खुल गया। - डेव ब्रैनन


मसीह का क्रूस मनुष्य के पाप की निकृष्टतम स्थिति का, 
तथा परमेश्वर के प्रेम की पराकाष्ठा का प्रतीक है।

वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। - 1 पतरस 2:24

बाइबल पाठ: मत्ती 27:27-35
Matthew 27:27 तब हाकिम के सिपाहियों ने यीशु को किले में ले जा कर सारी पलटन उसके चहुं ओर इकट्ठी की। 
Matthew 27:28 और उसके कपड़े उतारकर उसे किरिमजी बागा पहिनाया। 
Matthew 27:29 और काटों को मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा; और उसके दाहिने हाथ में सरकण्‍डा दिया और उसके आगे घुटने टेककर उसे ठट्ठे में उड़ाने लगे, कि हे यहूदियों के राजा नमस्‍कार। 
Matthew 27:30 और उस पर थूका; और वही सरकण्‍डा ले कर उसके सिर पर मारने लगे। 
Matthew 27:31 जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो वह बागा उस पर से उतारकर फिर उसी के कपड़े उसे पहिनाए, और क्रूस पर चढ़ाने के लिये ले चले।
Matthew 27:32 बाहर जाते हुए उन्हें शमौन नाम एक कुरेनी मनुष्य मिला, उन्होंने उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले। 
Matthew 27:33 और उस स्थान पर जो गुलगुता नाम की जगह अर्थात खोपड़ी का स्थान कहलाता है पहुंचकर। 
Matthew 27:34 उन्होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्तु उसने चखकर पीना न चाहा। 
Matthew 27:35 तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया; और चिट्ठियां डाल कर उसके कपड़े बांट लिए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22


शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

उन्मुक्त तथा आनन्दित


   कैनडा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस हैडफील्ड ने अंतरिक्ष में अपने प्रक्षेपण के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा, जब उन्हें ले जाने वाला रॉकेट अन्तराष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन की ओर तेज़ गति से चला तो उन पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव का बल इतना बढ़ गया कि उनके लिए साँस लेना कठिन हो गया। इस बल के कारण साँस ठीक से ना ले पाने के कारण जैसे ही क्रिस को लगने लगा कि अब वे बेसुध हो जाएंगे, रॉकेट पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के बल से बाहर निकल कर अन्तरिक्ष की भारहीन स्थिति में पहुँच गया। ऐसा होते ही, बल से मुक्त उस स्थिति आते ही, बेहोश होने की बजाए क्रिस ने हँसना आरंभ कर दिया।

   उनके इस विवरण ने मुझे अपनी माता की मृत्यु तक आने के दिनों के बारे में याद दिलाया। उनका जीवन और बोझिल होता चला जा रहा था, यहाँ तक कि उनके लिए साँस लेना भी दूभर हो रहा था। फिर वे अपनी पीड़ा से मुक्त होकर स्वर्ग की "भारहीनता" में पहुँच गईं। मैं सोचता हूँ कि पृथ्वी की पीड़ा से निकलकर जैसे ही वे प्रभु यीशु के सम्मुख पहुँची होंगी, वहाँ अपनी पहली उन्मुक्त साँस को लेते ही वे भी आनदित होकर हँसने लगी होंगी।

   इस शुक्रवार को, जिसे शुभ शुक्रवार कहा जाता है, कुछ ऐसा ही प्रभु यीशु के साथ भी हुआ था। परमेश्वर ने सारे संसार के सभी पापों - पूर्व, वर्तमान और भविष्य को, क्रूस पर टंगे हुए प्रभु यीशु पर लाद दिया, और पाप के इस बोझ के नीचे उनके लिए साँस लेना कठिन हो गया। परमेश्वर के वचन बाइबल में अपने विषय में लिखी गई सभी बातों को पूरा करने के पश्चात, "यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा; हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं: और यह कहकर प्राण छोड़ दिए" (लूका 23:46)। हमारे पापों के लिए अपना जीवन त्यागने के बाद प्रभु ने परमेश्वर पिता से अपना जीवन वापस प्राप्त किया और मृतकों में से जी उठा; और अब उन पर पाप और मृत्यु का कोई अधिकार या प्रभाव नहीं है। ना केवल प्रभु पर, वरन जो साधारण विश्वास के साथ क्रूस पर दिए गए उनके बलिदान को स्वीकार करके, पापों से पश्चाताप करके अपना जीवन उन्हें समर्पित कर देते हैं, क्रूस पर उनके द्वारा पापों के लिए चुकाए गए दाम को स्वीकार कर लेते हैं, अर्थात प्रभु यीशु के चेले होना स्वीकार कर लेते हैं, उन पर भी अब पाप और म्रुत्यु का कोई अधिकार नहीं रह जाता है।

   जितनों ने स्वेच्छा से प्रभु यीशु को अपना उध्दारकर्ता स्वीकार किया है, उसके अनुयायी, उसके चेले हो गए हैं, एक दिन वे भी इस संसार की पीड़ा और परिस्थितियों के बोझ से मुक्त होकर प्रभु के साथ होंगे, और उन्मुक्त तथा आनन्दित होकर प्रभु के साथ अनन्तकाल तक रहेंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु का बलिदान स्वर्ग के आनन्द की ओर संकेत करता है।

और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। - इब्रानियों 12:2-3

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:1-8
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59


गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

प्रभु-भोज


   मेज़ के आकार से, चाहे वह गोल हो या चौकोर, इसका कोई संबंध नहीं है। कुर्सियाँ, चाहे वे लकड़ी की हों या प्लास्टिक की, उनसे भी उसका कोई संबंध नहीं है। भोजन की मात्रा से भी उसका कोई संबंध नहीं है, परन्तु यदि भोजन सप्रेम बनाकर परोसा गया हो तो सहायक होता है। भोजन का आनन्द तो तब ही आता है जब हम अपने टी.वी. तथा फोन को बन्द कर के, उन की ओर ध्यान दें जिनके साथ हम बैठें हैं। मुझे मेज़ पर लोगों के साथ बैठकर, मित्रों और परिवार जनों के साथ भिन्न विषयों पर वार्तालाप करना बहुत अच्छा लगता है। परन्तु आज की त्वरित तकनीकी ने इसे कठिन बना दिया है; क्योंकि आज भोजन के समय पर भी हम बहुधा उसके प्रति अधिक आकर्षित और चिंतित होते हैं जो हमसे अनेकों मील दूर हो रहा है, ना कि उनके प्रति जो हमारे साथ भोजन करने मेज़ पर बैठे हैं, और हम से कुछ कहना चाह रहे हैं।

   हमारे प्रभु परमेश्वर ने हम मसीही विश्वासियों को एक अन्य भोज के लिए भी आमंत्रित किया है; उसकी लालसा है कि उसके जन प्रेम में एक साथ एकत्रित होकर, उसके प्रभु-भोज में सम्मिलित हों। इस भोज में सम्मिलित होने के लिए चर्च के बड़ा या छोटा होने से कोई संबंध नहीं है; और ना ही वहाँ रखी गई रोटी के प्रकार से है। प्रभु भोज में सरोकार है प्रभु और उसके लोगों के साथ संगति करने से; हम संसार की अन्य प्रत्येक बात से अपना ध्यान हटाकर, केवल प्रभु और उसके लोगों के साथ अपने संबंध के बारे में विचार करें और उन संबंधों में आई खामियों का निवारण करें।

   क्या प्रभु भोज में सम्मिलित होते समय हम प्रभु की उपस्थिति का आनन्द लेते हैं, या फिर उसके बारे में सोचते रहते, या चिंता करते रहते हैं जो कहीं और हो रहा है? वह अन्तिम अवसर कब था जब आपने प्रभु भोज में भाग लेते समय वास्तव में प्रभु के साथ संगति की थी; दिल खोल कर उससे बात की थी, उसकी संगति का आनन्द लिया था और परिणामस्वरूप एक प्रसन्न चित तथा हलके मन के साथ उस भोज से आए थे? यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि, "जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते" (1 कुरिन्थियों 11:29-32)। - कीला ओकोआ


मसीह यीशु की मृत्यु को स्मरण करने से 
हम आज के लिए सामर्थ तथा आने वाले समय के लिए आशा प्राप्त करते हैं।

जीवन की रोटी मैं हूं। तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे। जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है। - यूहन्ना 6:48-51

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 11:23-34
1 Corinthians 11:23 क्योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी; कि प्रभु यीशु ने जिस रात वह पकड़वाया गया रोटी ली। 
1 Corinthians 11:24 और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:25 इसी रीति से उसने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। 
1 Corinthians 11:26 क्योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो। 
1 Corinthians 11:27 इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा। 
1 Corinthians 11:28 इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए। 
1 Corinthians 11:29 क्योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है। 
1 Corinthians 11:30 इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए। 
1 Corinthians 11:31 यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। 
1 Corinthians 11:32 परन्तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें। 
1 Corinthians 11:33 इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो। 
1 Corinthians 11:34 यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हार इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31


बुधवार, 12 अप्रैल 2017

पीड़ा और आनन्द


   मैंने अपने कई मित्रों से पूछा कि उनके जीवन में सबसे कठिन और पीड़ादायक अनुभव क्या था। उनके उत्तरों में युध्द, तलाक, ऑपरेशन, किसी निकट जन का निधन आदि से संबंधित अनुभव सम्मिलित थे। मेरी पत्नि का उत्तर था, "हमारी पहली सन्तान का जन्म।" जन्म की यह प्रक्रिया एक एकाकी सैनिक अस्पताल में हुई थी तथा लंबी और कठिन रही थी। परन्तु अब जब पीछे मुड़कर हम उसके बारे में सोचते हैं तो मेरी पत्नि उसे आनन्द का कारण मानती है, "क्योंकि उस पीड़ा का एक बड़ा उद्देश्य था।"

   अपने क्रूस पर बलिदान होने से पहले, प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा कि वे बड़ी पीड़ा और दुःख से निकलने वाले हैं। प्रभु ने उनके ऊपर आने वाले इस अनुभव की तुलना जच्चा की पीड़ा से की, जब बच्चे के पैदा होते ही वह पीड़ा आनन्द में परिवर्तित हो जाती है (यूहन्ना 16:20-21)। प्रभु ने अपने मारे जाने और फिर मृतकों में से जी उठने और उनसे पुनः मिलने के संदर्भ में कहा, "तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा" (यूहन्ना 16:22)।

   जीवन के मार्ग पर दुःख हम सब पर आता ही है। परन्तु प्रभु यीशु ने "...उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों 12:2)। अपने एक बलिदान के द्वारा प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा, उद्धार और शैतान के चँगुल से स्वतंत्रता को खरीद लिया है, और जो कोई स्वेच्छा से अपना हृदय उसके लिए खोलता है, उसे स्वीकार करता है, वह प्रभु से इन बातों को भेंट स्वरूप प्राप्त कर लेता है। प्रभु यीशु के पीड़ा से भरे बलिदान ने मानव जाति के लिए परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा किया और परमेश्वर के साथ हमारी मित्रता तथा संगति का मार्ग उपलब्ध करवा दिया।

   हमारे उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर का आनन्द उसके बलिदान की पीड़ा से कहीं बढ़कर था; उसमें लाए गए विश्वास और उससे मिलने वाली मुक्ति का आनन्द भी हमारे जीवन के सभी दुःखों तथा उसके पीछे चलने के कारण आने वाले सताव की पीड़ा से कहीं बढ़कर होता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


दुःख एक चुंबक के समान हो सकते हैं, 
जिनसे एक मसीही विश्वासी प्रभु के और निकट आ जाता है।

इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया; तौभी उसने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है। - यशायाह 53:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:17-24
John 16:17 तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, यह क्या है, जो वह हम से कहता है, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे? और यह इसलिये कि मैं कि मैं पिता के पास जाता हूं? 
John 16:18 तब उन्होंने कहा, यह थोड़ी देर जो वह कहता है, क्या बात है? हम नहीं जानते, कि क्या कहता है। 
John 16:19 यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उन से कहा, क्या तुम आपस में मेरी इस बाते के विषय में पूछ पाछ करते हो, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे। 
John 16:20 मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्तु संसार आनन्द करेगा: तुम्हें शोक होगा, परन्तु तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा। 
John 16:21 जब स्त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्योंकि उस की दु:ख की घड़ी आ पहुंची, परन्तु जब वह बालक जन्म चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती। 
John 16:22 और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा। 
John 16:23 उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूं, यदि पिता से कुछ मांगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा। 
John 16:24 अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54