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बुधवार, 25 जुलाई 2018

परीक्षा



      क्रिकेट के खेल में टेस्ट-मैच खेलना बहुत थका देने वाला हो सकता है। खिलाड़ी प्रातः 11 बजे से लेकर संध्या 6 बजे तक खेलते हैं, इसके बीच में चाय और दोपहर के भोजन के अवकाश भी होते हैं। एक टेस्ट-मैच पाँच दिन तक चल सकता है। यह धीरज और कौशल की परख होता है।

      इसी प्रकार से जीवन में हम जिन परिस्थितियों का सामना करते हैं, वे कभी-कभी इसलिए और भी विकट लगने लगती हैं क्योंकि उनका अन्त होता हुआ दिखाई ही नहीं देता है। नौकरी मिलने की लंबी तलाश, अकेलेपन के लंबे समय, कैंसर के साथ चल रहा लंबा द्वंद, यह सब और भी कठिन लगने लगता है क्योंकि हम सोचने लग जाते हैं कि क्या यह कभी समाप्त भी होगा?

      शायद इसीलिए भजनकार ने पुकारा, “हे प्रभु तू कब तक देखता रहेगा? इस विपत्ति से, जिस में उन्होंने मुझे डाला है मुझ को छुड़ा! जवान सिंहों से मेरे प्राण को बचा ले” (भजन 35:17)। बाइबल के व्य्ख्याकर्ताओं का मानना है कि यह उस समय की बात है जब राजा शाऊल लंबे समय तक दाऊद का पीछा करता रहा था, और राजा के सलाहकार दाऊद  पर दोष मढ़ते रहते थे – दाऊद  के लिए यह परिक्षा का ऐसा समय था जो वर्षों तक चला था।

      परन्तु फिर भी अन्त में दाऊद ने गाया कि, “...यहोवा की बड़ाई हो, जो अपने दास के कुशल से प्रसन्न होता है” (पद 27)। उसकी परिक्षा उसे परमेश्वर पर और भी अधिक भरोसा रखने की गहराईयों में ले गई। दाऊद के समान, हमारी लंबी परीक्षाएं, कठिनाईयां, या हानि भी हमें परमेश्वर पर और गहरा भरोसा करने के अनुभवों से होकर निकाल सकती हैं; परमेश्वर पर भरोसे को बनाए रखें, अन्ततः आपका भला ही होगा। - बिल क्राउडर


जब आपके बोझ आप पर हावी होने लगें, 
तो स्मरण रखें कि परमेश्वर की सामर्थी भुजाएँ आपको संभाले हुए हैं।

अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएं हैं। वह शत्रुओं को तेरे साम्हने से निकाल देता, और कहता है, उन को सत्यानाश कर दे। - व्यवस्थाविवरण 33:27

बाइबल पाठ: भजन 35:17-28
Psalms 35:17 हे प्रभु तू कब तक देखता रहेगा? इस विपत्ति से, जिस में उन्होंने मुझे डाला है मुझ को छुड़ा! जवान सिंहों से मेरे प्राण को बचा ले!
Psalms 35:18 मैं बड़ी सभा में तेरा धन्यवाद करूंगा; बहुतेरे लोगों के बीच में तेरी स्तुति करूंगा।
Psalms 35:19 मेरे झूठ बोलने वाले शत्रु मेरे विरुद्ध आनन्द न करने पाएं, जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे आपस में नैन से सैन न करने पांए।
Psalms 35:20 क्योंकि वे मेल की बातें नहीं बोलते, परन्तु देश में जो चुपचाप रहते हैं, उनके विरुद्ध छल की कल्पनाएं करते हैं।
Psalms 35:21 और उन्होंने मेरे विरुद्ध मुंह पसार के कहा; आहा, आहा, हम ने अपनी आंखों से देखा है!
Psalms 35:22 हे यहोवा, तू ने तो देखा है; चुप न रह! हे प्रभु, मुझ से दूर न रह!
Psalms 35:23 उठ, मेरे न्याय के लिये जाग, हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे प्रभु, मेरे मुकद्दमा निपटाने के लिये आ!
Psalms 35:24 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू अपने धर्म के अनुसार मेरा न्याय चुका; और उन्हें मेरे विरुद्ध आनन्द करने न दे!
Psalms 35:25 वे मन में न कहने पाएं, कि आहा! हमारी तो इच्छा पूरी हुई! वह यह न कहें कि हम उसे निगल गए हैं।
Psalms 35:26 जो मेरी हानि से आनन्दित होते हैं उनके मुंह लज्जा के मारे एक साथ काले हों! जो मेरे विरुद्ध बड़ाई मारते हैं वह लज्जा और अनादर से ढ़ंप जाएं!
Psalms 35:27 जो मेरे धर्म से प्रसन्न रहते हैं, वह जयजयकार और आनन्द करें, और निरन्तर कहते रहें, यहोवा की बड़ाई हो, जो अपने दास के कुशल से प्रसन्न होता है!
Psalms 35:28 तब मेरे मुंह से तेरे धर्म की चर्चा होगी, और दिन भर तेरी स्तुति निकलेगी।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 37-39
  • प्रेरितों 26



मंगलवार, 24 जुलाई 2018

भूल



      लगभग 200 वर्ष पहले, रूस में नेपोलियन की हार का कारण, रूस की भीषण सर्दी को माना जाता है। उसकी सेना में एक विशेष समस्या यह थी कि उनके घोड़ों के खुरों में जो नाल लगी थी वह गर्मियों में ही कारगर थी, रूस की उस भीषण सर्दी और बर्फ में नहीं। बर्फ से ढके मार्गों पर रसद की गाडियां खींचते हुए, घोड़े फिसल कर गिर जाते थे और मर जाते थे। नेपोलियन की सेना को समय से पूरी रसद न मिल पाने के कारण वे 400,000 से केवल 10,000 रह गए। एक छोटी सी भूल, अति विनाशकारी परिणाम का कारण हो गई।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब वर्णन करता है कि जीभ की छोटी सी भूल लोगों की नियति और अजीविकाएं बदल देती है। याकूब ने लिखा कि जीभ इतनी विनाशकारी है कि “जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है” (याकूब 3:8)। हमारे वर्तमान सँसार में यह समस्या बढ़कर और गंभीर हो गई है क्योंकि अब हमें सब कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है; एक गलत ईमेल, या सोशल मीडिया पर डाला गया गलत सन्देश, शीघ्र ही फैल जाता है और बहुत हानि कर डालता है, उसे रद्द करना, या हटा देना बहुत कठिन हो जाता है।

      राजा दाऊद ने परमेश्वर के प्रति हमारे आदर को, हमारे द्वारा अपनी जीभ के प्रयोग के साथ जोड़ा। दाऊद ने लिखा, “...मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा...अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले” (भजन 34:11, 13)। उसने निर्णय लिया “मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा”, ( भजन 39:1)। परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम भी ऐसा ही करें और छोटी लगने वाली किन्तु अति विनाशकारी भूल से सावधान रहें। - सी. पी. हिया


हमारे शब्दों में बनाने या बिगाड़ने की शक्ति होती है।

वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है। जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। - याकूब 3:5-6

बाइबल पाठ: भजन 34:11-18
Psalms 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psalms 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psalms 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psalms 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psalms 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psalms 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psalms 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psalms 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 35-36
  • प्रेरितों 25



सोमवार, 23 जुलाई 2018

भय



      भय मेरे हृदय में बिना कोई अनुमति लिए, चुपके से आ जाता है। वह मेरे अन्दर निःसहाय, बेबस, और आशा विहीन होने के भाव जगाता है। वह मेरी शान्ति और एकाग्रता को चुरा लेता है। मैं क्यों, और किस बात को लेकर भयभीत हो जाती हूँ? मैं अपने परिवार की सुरक्षा तथा अपने प्रिय जनों के स्वास्थ्य के लिए चिन्तित होती हूँ। मैं नौकरी के चले जाने या किसी संबंध के टूट जाने को लेकर घबराती हूँ। भय मुझे अपने ही अन्दर देखने, अपनी ही सामर्थ्य, अपने ही मन पर केंद्रित करता है; और मुझ में एक ऐसा मन प्रकट करता है जिसे किसी पर भरोसा करना कठिन लगता है।

      जब ये भय और चिंताएं हमला करती हैं तब परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद का प्रार्थना का भजन, भजन 34, को पढ़कर उसपर मनन करना बहुत अच्छा होता है: “मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया” (पद 4)। परमेश्वर हमें हमारे भय से कैसे छुड़ाता है? जब हम “उसकी ओर दृष्टि” करते हैं (पद 5), उसपर ध्यान लगाते हैं, जब हम भरोसा रखते हैं कि प्रत्येक परिस्थिति परमेश्वर के नितंत्रण में है, तब हमारे भय मिटने लग जाते हैं ।

      इसके बाद दाऊद एक भिन्न प्रकार के भय की बात करता है – ऐसा भय नहीं जो पंगु कर दे, वरन ऐसा भय जो उसके प्रति है जो हमें चारों ओर से घेर कर सुरक्षित रखता है; यह भय उस परमेश्वर पिता के प्रति गहरी श्रद्धा, और महान आदर जगाता है (पद 7)। हम उसमें शरण लेते हैं क्योंकि वह भला है (पद 8)।

      उसकी भलाई का यह श्रद्धापूर्ण भय हमारे अपने भय को सही परिप्रेक्ष्य में लाता है। जब हम स्मरण करते हैं कि परमेश्वर कौन है और वह हमसे कितना प्रेम करता है, तब हम उसकी शान्ति में निश्चिन्त होकर विश्राम कर सकते हैं, क्योंकि दाऊद का निष्कर्ष था, “हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती” (पद 9)।

      कितना अद्भुत है यह जानना कि परमेश्वर के भय में रहने से हम अपने सभी भय से मुक्ति पा सकते हैं। - कीला ओकोआ


परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह आपको आपके भय से मुक्ति दे।

यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं? – भजन 27:1

बाइबल पाठ: भजन 34:1-10
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।
Psalms 34:8 परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।
Psalms 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!
Psalms 34:10 जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 33-34
  • प्रेरितों 24



रविवार, 22 जुलाई 2018

विश्राम



      प्रातः अलार्म बजता है; हमें लगता है कि अभी बहुत जल्दी है, कुछ देर और सो लें, परन्तु दिन भर के लिए कार्य आगे रखा है, लोगों से निर्धारित समय पर मिलना है, लोगों की देखभाल करनी है, और भी बहुत कुछ दिन भर के समय में करने के लिए है। ऐसे में आप अकेले नहीं हैं; प्रतिदिन, हम में से बहुतेरों को एक बात से दूसरी की ओर भागते रहना होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित अपनी सेवकाई के पहले दौरे से लौटे तो प्रभु को बताने के लिए उनके पास बहुत कुछ था। परन्तु जैसे मरकुस रचित सुसमाचार में लिखा है, प्रभु तुरंत ही उनके कार्य का आंकलन करने नहीं बैठ गया; वरन प्रभु की पहली प्राथमिकता थी कि वे पहले थोड़ा विश्राम कर लें। प्रभु यीशु ने उनसे कहा, “उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो” (मरकुस 6:31)।

      अन्ततः हमें वास्तविक विश्राम अपने साथ परमेश्वर की लगातार बनी रहने वाली उपस्थित का एहसास करने और उस पर भरोसा बनाए रखने से ही मिलता है। चाहे हम अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें, परन्तु हमें यह पहचान भी रखनी है कि हम अपने कार्यों, कार्य में उन्नति, परिवार, सेवकाई, आदि की चिंताएं परमेश्वर के हाथों में सौंप कर उनके विषय उस पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। हमें प्रतिदिन कुछ समय हमारा ध्यान बंटाने वाली बातों से हटाकर, तनाव और बेचैनी को अपने से दूर कर के, अपने प्रति परमेश्वर के लगातार बने रहने वाले अद्भुत प्रेम और विश्वासयोग्यता पर मनन करना चाहिए, उसमें और उसके साथ थोड़ा विश्राम करना चाहिए।

      इसलिए निश्चिन्त होकर आराम की साँस लीजिए; परमेश्वर के हाथों में अपनी सारी चिंताओं को छोड़ दीजिए, और वास्तविक विश्राम का आनन्द लीजिए। - पो फैंग चिया


हम इसलिए विश्राम नहीं करते हैं क्योंकि हमारा कार्य पूरा हो गया है; 
हम इसलिए विश्राम करते हैं क्योंकि यह परमेश्वर की आज्ञा है, 
और उसने हमें ऐसा बनाया है कि हमें विश्राम की आवश्यकता होती है। - गौर्डन मैकडोनाल्ड

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-13, 30-32
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया।
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे।
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो।
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो।
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ।
Mark 6:13 और बहुतेरे दुष्टात्माओं को निकाला, और बहुत बीमारों पर तेल मलकर उन्हें चंगा किया।
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



शनिवार, 21 जुलाई 2018

आज्ञाकारिता



      पहले बार जब मैंने अपनी पत्नि के साथ मिलकर एक लेख लिखने की परियोजना पर कार्य करना आरंभ किया, तो शीघ्र ही यह प्रगट हो गया कि इस परियोजना में मुख्य बाधा मेरे द्वारा काम को टालना होगी। इस परियोजना में उसका काम था मेरे लिखे हुए को संपादित करना और नियुक्त समय के अनुसार मुझसे काम को पूरा करवाना; और मेरा काम था यह करने में उसे खिसियाना! अधिकांशतः उसका धैर्य और योजनाबद्ध तरीके से काम करवाना, नियत समय एवं निर्देशानुसार के अनुसार मेरे काम न करने की प्रवृत्ति पर भारी पड़ते थे।

      मैं प्रतिज्ञा करता था कि दिन भर में लिखने का इतना कार्य कर लूँगा। पहले घंटे तो मैं बड़ी मेहनत के साथ काम करता रहता। फिर अपने काम करने की क्षमता से निश्चिन्त होकर, मैं काम से थोड़ा विश्राम लेने की सोचता। थोड़ी ही देर में, मेरा विश्राम का समय समाप्त हो जाता। यह जानते हुए कि अब मुझे अपनी पत्नि से इसके लिए कुछ सुनना पड़ेगा, मैं बच निकलने के लिए कुछ और करने की सोचता। मैं कुछ ऐसे घरेलू कार्य करने लगता जो मेरी पत्नि को बिलकुल पसन्द नहीं हैं, और सामान्यतः यदि मैं उन्हें कर देता तो मुझे उस से शाबाशी मिलती थी।

      परन्तु इस परियोजना के लिए, उसे प्रसन्न करने की मेरी यह योजना व्यर्थ चली जाती।

      कभी-कभी मैं ऐसे ही खेल परमेश्वर के साथ भी खेलता हूँ। वह मेरे जीवन में कुछ लोगों को किसी विशेष सेवकाई के लिए लेकर आता है, या मुझसे कुछ विशेष कार्य करवाना चाहता है। जैसे योना परमेश्वर द्वारा उसके लिए निर्धारित कार्य से विमुख होकर विपरीत दिशा में चला गया था (योना 4:2), वैसे ही मैं भी अपना ही मार्ग चुन लेता हूँ। फिर मैं परमेश्वर को कुछ अच्छे कार्यों या आत्मिक गतिविधियों द्वारा प्रसन्न करने का प्रयास करता हूँ। जबकि परमेश्वर मुझ से केवल अपनी आज्ञाकारिता, और उसकी प्राथमिकताओं के अनुसार कार्य करवाना चाहता है। निश्चय ही परमेश्वर को प्रभावित करने के मेरे ये सभी प्रयास व्यर्थ ठहरते हैं।

      क्या आप भी उन कार्यों को करने से मन चुरा रहे हैं, जिन्हें आप जानते हैं कि परमेश्वर आपके द्वारा करवाना चाहता है? मेरा विश्वास कीजिए; सच्ची संतुष्टि उसके द्वारा सौंपे गए कार्य को, उसके मार्गदर्शन और उसकी सामर्थ्य के द्वारा करने से ही आती है।

      परमेश्वर केवल अपनी आज्ञाकारिता ही के द्वारा प्रसन्न होता है। - रैंडी किल्गोर


केवल परमेश्वर आज्ञाकारिता ही उसको प्रसन्न करती है।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22

बाइबल पाठ: योना 4
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का।
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया।
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाया है।
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15



शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

समझता



      कुछ छोटे बच्चों को रात में सोने में दिक्कत होती है। इसके अनेकों कारण हो सकते हैं; मुझे अपनी बेटी से एक कारण पता चला। जब मैं एक संध्या उसे बिस्तर में लेटाने के बाद, उसके कमरे से बाहर जाने लगी तो उसने मुझ से कहा, “मुझे अँधेरे से डर लगता है।” मैंने उसके भय का निवारण करना चाहा, और उसे आश्वस्त रखने के लिए कि उसके कमरे में कोई दैत्य नहीं हैं, मैंने एक छोटी बत्ती जली छोड़ दी।

      अपनी बेटी के उस भय के बारे में मैंने और अधिक कुछ नहीं सोचा, परन्तु कुछ सप्ताह बाद जब मेरे पति व्यवसाय के सिलसिले में बाहर गए, और मुझे रात भर अकेले रहना पड़ा, तब मुझे उसका ध्यान आया। बिस्तर में लेट जाने के पश्चात मुझे लगा जैसे अन्धेरा मुझे दबा रहा है। मुझे एक हलकी सी आवाज़ सुनाई दी और मैं उसकी पड़ताल करने के लिए चौंक कर उठी, लेकिन कोई कारण सामने नहीं आया। परन्तु उस अनुभव ने मुझे अपनी बेटी के भय को समझा दिया।

      प्रभु यीशु हमारे प्रत्येक भय को समझता है, क्योंकि वह मनुष्य बनकर पृथ्वी पर रहा और उसने वैसी ही समस्याओं का सामना किया जैसी हमें अपने जीवनों में करनी पड़ती हैं। उसके विषय परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, “वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना” (यशायाह 53:3)। जब हम उससे अपने संघर्षों का विवरण बाँटते हैं, तो वह उसे एक ओर झटक नहीं देता है, न ही हमारी भावनाओं को तुच्छ समझता है, और न ही हमें झिड़क कर कहता है कि हम ऐसे व्यर्थ विचारों से बाहर आ जाएँ। वह हमारी भावनाओं को समझता है, हमारे साथ बना रहता है।

      इस बात का एहसास कि प्रभु यीशु हमारे साथ है, हमारी हर एक बात और परिस्थिति को समझता है, हमारे दुःख के एकाकीपन को दूर कर देती है। हमारे सबसे अंधकारपूर्ण समय में वह हमारी ज्योति  और हमारा उद्धार है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


सबसे अंधकारमय रात में भी, प्रभु यीशु हमारी ज्योति है।


तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: भजन 27:1-8
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं?
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।
Psalms 27:5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा।
Psalms 27:6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा होगा; और मैं यहोवा के तम्बू में जयजयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगा; और उसका भजन गाऊंगा।
Psalms 27:7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूं, तू मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे।
Psalms 27:8 तू ने कहा है, कि मेरे दर्शन के खोजी हो। इसलिये मेरा मन तुझ से कहता है, कि हे यहोवा, तेरे दर्शन का मैं खोजी रहूंगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22



गुरुवार, 19 जुलाई 2018

प्रतीक्षा



      सैन्य आज्ञा, “अंकन समय; कदम ताल” का अर्थ होता है अपने स्थान पर खड़े-खड़े कदम चलाना। यह आगे बढ़ने की चाल में एक सक्रीय विराम है, जिसमें सचेत मन के साथ अगली आज्ञा की प्रतीक्षा की जाती है। प्रतिदिन के जीवन में “अंकन करने” का अर्थ होता है “बिना आगे बढ़े गतिवान होना, सचल होते हुए भी कहीं पहुंचना नहीं, और प्रतीक्षा करते हुए कुछ महत्वपूर्ण नहीं करना।” इससे एक निरुपयोगी, अर्थहीन प्रतीक्षा का अभिप्राय सामने आता है।

      इसकी तुलना में, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रतीक्षा करने का अधिकाँशतः अर्थ होता है, “उत्सुकता से देखना, आशा रखना, और अपेक्षा से देखना।” भजनकार ने बहुत कठिनाईयों का सामना करते हुए लिखा: “हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं। वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे” (भजन 25:2-3)।

      अकसर हमारे पास जिन बातों के लिए हम प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनके लिए कोई विकल्प अथवा चुनाव करने के कुछ नहीं होता है – रोग के निदान के लिए की गई चिकित्सीय जाँच की रिपोर्ट, नौकरी के लिए दिए गए साक्षात्कार का परिणाम, किसी प्रिय जन के लौट कर आने की प्रतीक्षा, इत्यादि; परन्तु हम यह निर्णय अवश्य कर सकते हैं कि यह प्रतीक्षा हम किस प्रकार से करेंगे। किसी भय या उदासीनता में समय बिताने के स्थान पर, हम परमेश्वर की उपस्थिति में “कदम ताल” करते रह सकते हैं, प्रतिदिन परमेश्वर से मार्गदर्शन और सामर्थ्य की प्रार्थना करते हुए, जैसा कि भजनकार ने किया: “हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं” (पद 4-5)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर की बात जोहना उसमें सक्रीय भरोसा बनाए रखना है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 25:1-15
Psalms 25:1 हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं।
Psalms 25:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं।
Psalms 25:3 वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।।
Psalms 25:4 हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे।
Psalms 25:5 मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं।
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं।
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।
Psalms 25:12 वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा।
Psalms 25:13 वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा।
Psalms 25:14 यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उस से डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा।
Psalms 25:15 मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40