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सोमवार, 30 जुलाई 2018

विश्वास



      हमारे लिए विश्वास को एक ऐसा जादूई मन्त्र मान लेना, जिसके द्वारा सब कुछ किया जा सकता है, बड़ा प्रलोभनकारी होता है। हम सोचते हैं, या हमें सिखाया जाता है कि यदि हम पर्याप्त विश्वास रखें तो हम धनी हो सकते हैं, स्वस्थ रह सकते हैं, जीवन में संतुष्टि आ सकती है, और सभी प्रार्थनाओं के उत्तर स्वतः ही प्राप्त किए जा सकते हैं। परन्तु जीवन ऐसे मन्त्रों के द्वारा नहीं चलाया जाता है। प्रमाण के रूप में, परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों का लेखक, बाइबल के पुराने नियम खण्ड के विश्वास के महान लोगों में से कुछ के जीवनों की समीक्षा करता है (इब्रानियों 11), और “सच्चे विश्वास” को समझाने का प्रयास करता है।

      लेखक स्पष्ट कहता है कि “और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है” (इब्रानियों 11:6)। विश्वास को परिभाषित करते समय वह “दृढ़ बने रहने” के उदाहरण देता है (पद 27)। परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण, विश्वास के उन नायकों में से कुछ जयवंत हुए: कुछ ने सेनाओं को मार भगाया, और कोई सिंहों से बच निकला। परन्तु ऐसे विश्वासी भी थे जिनके अन्त सुखद नहीं हुए: कितनों को कोड़े पड़े, पत्थरवाह किए गए, आरे से चीरे गए, परन्तु विश्वास में बने रहे। अध्याय का अन्त होता है “संसार उन के योगय न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली” (पद 39)।

      इस अध्याय से परमेश्वर में विश्वास रखने का जो चित्र उभर का आता है वह किसी सरल सूत्र में नहीं समाता है। कभी विश्वास विजय और यश को ले जाता है; तो कभी किसी भी कीमत पर विश्वास में बने रहने के लिए बहुत धैर्य और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है – और ऐसों के लिए लिखा गया है “...इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है” (पद 16)।

      हमारे विश्वास का आधार है, कि अन्ततः परमेश्वर ही हर बात पर नियंत्रण बनाए रखता है, और वह अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा भी करेगा – यह चाहे इस जीवन में हो या आने वाले जीवन में। - फिलिप यैन्सी


दुःख में हमारी सबसे महान सांत्वना है हमारा विश्वास, कि परमेश्वर नियंत्रण रखे हुए है।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। - याकूब 1:2-3

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:32-11:6
Hebrews 10:32 परन्तु उन पहिले दिनों को स्मरण करो, जिन में तुम ज्योति पाकर दुखों के बड़े झमेले में स्थिर रहे।
Hebrews 10:33 कुछ तो यों, कि तुम निन्‍दा, और क्‍लेश सहते हुए तमाशा बने, और कुछ यों, कि तुम उन के साझी हुए जिन की र्दुदशा की जाती थी।
Hebrews 10:34 क्योंकि तुम कैदियों के दुख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्द से लुटने दी; यह जान कर, कि तुम्हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरने वाली संपत्ति है।
Hebrews 10:35 सो अपना हियाव न छोड़ो क्योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है।
Hebrews 10:36 क्योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्छा को पूरी कर के तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।
Hebrews 10:37 क्योंकि अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जब कि आने वाला आएगा, और देर न करेगा।
Hebrews 10:38 और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा।
Hebrews 10:39 पर हम हटने वाले नहीं, कि नाश हो जाएं पर विश्वास करने वाले हैं, कि प्राणों को बचाएं।
Hebrews 11:1 अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है।
Hebrews 11:2 क्योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्छी गवाही दी गई।
Hebrews 11:3 विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो।
Hebrews 11:4 विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।
Hebrews 11:5 विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।
Hebrews 11:6 और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 51-53
  • रोमियों 2



रविवार, 29 जुलाई 2018

प्रेम


      एक कहानी बताई जाती है कि एक मानवविज्ञानी, एक छोटे गाँव में महीनों के अपने शोध कार्य को समाप्त करके वापस घर जाने की तैयारी कर रहा था। घर लौटने के लिए अपनी सवारी गाड़ी की प्रतीक्षा करते समय, समय बिताने के लिए, उसने अपने साथ खड़े बच्चों के साथ एक खेल खेलना चाहा। उसने कुछ दूरी पर एक पेड़ के नीचे एक टोकरी में कुछ फल और मिठाईयां रखीं और बच्चों से कहा कि जो कोई भागकर पहले उस टोकरी तक पहुँचेगा, वे सभी फल और मिठाईयां उसी की हो जाएँगी। लेकिन जब उसने बच्चों को भागकर टोकरी तक जाने के लिए कहा, तो कोई नहीं भागा, सभी ने एक दूसरे के हाथ पकड़े और सभी एक साथ टोकरी के पास गए।

      जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया; क्यों वे सभी एक साथ गए, और भाग कर किसी एक ने टोकरी क्यों नहीं ले ली, तो एक छोटी लड़की ने उत्तर दिया “जब बाकी सभी दुःखी होते, तो हम में से एक कैसे प्रसन्न हो सकता था?” क्योंकि ये बच्चे एक-दूसरे की परवाह करते थे, इसलिए वे सभी उन फलों और मिठाईयों को एक दूसरे के साथ बाँट कर खाना चाहते थे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि वर्षों तक मूसा की व्यवस्था का अध्ययन करने के पश्चात, प्रेरित पौलुस ने पाया कि परमेश्वर के सारे नियम एक ही नियम में संक्षिप्त किए जा सकते हैं, “क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख” (गलतियों 5:14; रोमियों 13:9 भी देखें)। पौलुस ने मसीह यीशु में न केवल एक दूसरे के लिए प्रोत्साहन, सहानुभूति, और देखभाल रखने के कारण को पाया, वरन यह सब कर पाने की आत्मिक सामर्थ्य भी पाई।

      क्योंकि मसीह यीशु हमारी देखभाल करता है, इसलिए हम भी एक दूसरे की देखभाल करें। - मार्ट डीहॉन


जब हम एक दूसरे के प्रति प्रेम दिखाते हैं, 
हम परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को प्रदर्शित करते हैं।

तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। - गलतियों 6:2

बाइबल पाठ: रोमियों 13:8-11
Romans 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है।
Romans 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
Romans 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।
Romans 13:11 और समय को पहिचान कर ऐसा ही करो, इसलिये कि अब तुम्हारे लिये नींद से जाग उठने की घड़ी आ पहुंची है, क्योंकि जिस समय हम ने विश्वास किया था, उस समय के विचार से अब हमारा उद्धार निकट है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-50
  • रोमियों 1


शनिवार, 28 जुलाई 2018

मित्र



      बुद्धिमता की एक अति-सराहनीय बात, जो मेरे पिता मुझसे बारंबार कहते रहे हैं, है – “अच्छे मित्र जीवन के सबसे मूल्यवान खजानों में से एक हैं।” कितना सत्य है उनका यह कहना; अच्छे मित्रों के साथ हम कभी अकेले नहीं होते हैं। वे हमारी आवश्यकताओं के प्रति सचेत रहते हैं और जीवन के आनन्द तथा बोझ, दोनों को बाँट लेते हैं।

      प्रभु यीशु मसीह के सँसार में आने से पहले, परमेश्वर के वचन बाइबल में केवल दो ही व्यक्तियों को परमेश्वर का मित्र कहा गया था: “और यहोवा मूसा से इस प्रकार आम्हने-साम्हने बातें करता था, जिस प्रकार कोई अपने भाई से बातें करे...” (निर्गमन 33:11), और अब्राहम “...वह परमेश्वर का मित्र कहलाया” (याकूब 2:23; 2 इतिहास 20:7; यशायाह 41:8)।

      मैं चकित हूँ कि आज प्रभु यीशु हम मसीही विश्वासिय्हों को, अपने लोगों को, अपना मित्र कहता है (यूहन्ना 15:15), और उसकी यह मित्रता इतनी गहरी है कि उसने अपने कहे, “इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे” (यूहन्ना 15:13) के अनुसार अपने मित्रों, हमारे, लिए अपने प्राण दे दिए।

      हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कैसा सौभाग्य और आशीष है कि मसीह यीशु हमारा मित्र है। वह ऐसा मित्र है जो हमें कभी नहीं छोड़ता है, कभी नहीं त्यागता है। वह परमेश्वर पिता के सामने हमारे लिए विनती, निवेदन करता है; हमारी आवश्यकताओं के लिए प्रावधान करता है। वह हमारे दुःखों को समझता है, और परेशानी के समयों में आवश्यक अनुग्रह प्रदान करता है।

      निःसंदेह, प्रभु यीशु हमारा सबसे अच्छा मित्र है। - जो स्टोवैल


यीशु कैसा मित्र है प्यारा!

और पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हुआ, कि इब्राहीम ने परमेश्वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया, और वह परमेश्वर का मित्र कहलाया। - याकूब 2:23

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:8-17
John 15:8 मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48
  • प्रेरितों 28



शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

संघर्ष



      कंधे पर हुए ऑपरेशन के कुछ सप्ताह बाद जब मैं घर से बाहर निकला, तो मैंने अपने आप को असुरक्षित अनुभव किया। मुझे अपनी बाँह को स्लिंग में टांग कर रखने की आदत हो गई थी, परन्तु मेरा ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर, और मुझे व्यायाम करवाने वाले फिजियोथेरेपिस्ट, दोनों ही का कहना था कि अब मुझे स्लिंग को छोड़ देना चाहिए। तभी मेरी नज़रों के सामने यह वाक्य आया, “इस चरण पर आकर, स्लिंग को पहनने के लिए मना किया जाता; उसे केवल किसी ऐसी स्थिति में ही पहनना चाहिए जहाँ का माहौल अनियंत्रित या हानिकारक हो सकता हो।” 

      बस, मुझे स्लिंग पहनने का बहाना मिल गया! मुझे उस उत्साहित मित्र का भय था जो मुझे आलिंगन में लेकर भींच लेगा, उस व्यक्ति का भी भय था जो कहीं अनजाने में ही मुझे से टकरा सकता था। मैं अपने उस स्लिंग की आड़ में, चोट लगने के अपने भय को छुपा रहा था।

      अपने आप को किसी प्रकार से चोटिल होने की स्थिति में असुरक्षित छोड़ना भयावह हो सकता है। हम चाहते हैं कि लोग हम से जो और जैसे हम हैं, वैसे ही प्रेम करें, हमें स्वीकार करें; परन्तु हमें भय रहता है कि यदि लोगों को हमारे बारे में गहराई से पता चलेगा तो वे हमें अस्वीकार करेंगे, या हमें किसी प्रकार से दुःख पहुँचा सकेंगे। क्या होगा यदि उन्हें पता चलेगा कि हम उतने चतुर, या दयालु, या भले, आदि नहीं हैं जितना वे हमें समझते हैं?

      परन्तु परमेश्वर के परिवार के सदस्य होने के कारण, हमारा यह दायित्व है कि हम एक दूसरे को विश्वास में बढ़ने में सहायता करें। हमें निर्देश हैं कि “इस कारण एक दूसरे को शान्‍ति दो, और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो...” (1 थिस्सलुनीकियों 5:11), और “सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो” (इफिसियों 4:2)।

      जब हम अन्य विश्वासियों के साथ ईमानदार और खुले रहेंगे, तो हम हमारे जीवनों में हुए परमेश्वर के अनुग्रह के बारे में उन्हें बता सकेंगे, और यह भी हो सकता है कि हमें पता चले कि उन्हें भी हमारे ही समान संघर्ष करने पड़ रहे हैं, प्रलोभनों और परमेश्वर के आज्ञाकारी बने रहने के लिए। और इस अनुग्रह तथा संघर्ष के जीवन में हम एक-दूसरे को संभालने वाले, प्रोत्साहित करने वाले बन जाएँ। - सिंडी हैस कैस्पर


अपने संघर्षों के विषय ईमानदारी, हमें दूसरों की सहायता करने में सहायक होती है।

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलतियों 6:1

बाइबल पाठ: इफिसियों 4: 1-6
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो।
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो।
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है।
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा।
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 43-45
  • प्रेरितों 27:27-44



गुरुवार, 26 जुलाई 2018

रेगमाल



      मेरी सहेली के शब्दों से मुझे पीड़ा हुई। मेरे दृढ़ विचारों के प्रति उसकी तीक्षण टिप्पणियाँ मेरे मन में गूंज रही थी, और मुझे सोने नहीं दे रही थीं। बिस्तर पर लेटे लेटे मैंनें परमेश्वर से परिस्थिति पर जयवंत होने के लिए बुद्धिमता और शान्ति माँगी। इसके कई सप्ताह पश्चात, अभी भी इस विषय पर चिन्तित, मैंने परमेश्वर से प्रार्थना की, “प्रभु मुझे अभी भी तकलीफ है; मुझे दिखाईये कि मुझे अपने जीवन में क्या परिवर्तन लाने हैं। मुझे दिखाईये कि कहाँ कहाँ वह सही है।”

      मेरी सहेली ने मेरे जीवन में परमेश्वर के रेगमाल होने का कार्य किया। मेरी भावनाएँ और विचार उस रगड़ से छिल कर पीड़ा दायक हो गए, परन्तु मैंने एहसास किया कि मेरी प्रतिक्रिया, मेरे चरित्र का निर्माण करेगी – अथवा नहीं, क्योंकि मुझे समतल किए जाने की इस प्रक्रिया को समर्पित होना अथवा नहीं होना मेरा चुनाव था। अपने घमण्ड और ढिटाई को स्वीकार करते हुए मैंने क्षमा माँगी, क्योंकि मुझे एहसास था कि मेरे जीवन के ये ऊबड़-खाबड़ भाग परमेश्वर को महिमा नहीं देते थे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, राजा सुलेमान को पता था कि समाज में जीवन बिताना कठिन हो सकता है, उसने इस विषय में अपनी नीतिवचनों में लिखा। बाइबल की नीतिवचन नामक पुस्तक के 27 अध्याय में हम उसकी बुद्धिमता को संबंधों पर लागू किया गया देखते हैं। उसने मित्रों के बीच तीखी नोंक-झोंक को लोहे के द्वारा लोहे को पैना किए जाने के रूप में देखा, “जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसे ही मनुष्य का मुख अपने मित्र की संगति से चमकदार हो जाता है” (पद 17), संगति में एक दूसरे के व्यवहार के खुरदरेपन को हटाकर समतल और मृदु करना। इस प्रक्रिया में घाव हो सकते हैं, जैसे कि मैंनें अपनी सहेली के शब्दों से अनुभव किए थे (देखें पद 6), परन्तु प्रभु इन शब्दों का प्रयोग हमें संवारने, निखारने हमें और प्रोत्साहित करने के लिए कर सकता है, जिससे हमारे आचरण तथा व्यवहार में आवश्यक परिवर्तन आ सकें।

      आज परमेश्वर अपने किस रेगमाल के द्वारा आपके खुरदरे भागों को समतल और मृदु कर रहा है? – एमी बाउचर पाई


जीवन के रेगमाल के द्वारा परमेश्वर आपके खुरदरेपन को समतल और मृदु करता है।

और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। - इब्रानियों 10:24

बाइबल पाठ: नीतिवचन 27:5-17
Proverbs 27:5 खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है।
Proverbs 27:6 जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है।
Proverbs 27:7 सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं।
Proverbs 27:8 स्थान छोड़ कर घूमने वाला मनुष्य उस चिडिय़ा के समान है, जो घोंसला छोड़ कर उड़ती फिरती है।
Proverbs 27:9 जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।
Proverbs 27:10 जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है।
Proverbs 27:11 हे मेरे पुत्र, बुद्धिमान हो कर मेरा मन आनन्दित कर, तब मैं अपने निन्दा करने वाले को उत्तर दे सकूंगा।
Proverbs 27:12 बुद्धिमान मनुष्य विपत्ति को आती देख कर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़े चले जाते और हानि उठाते हैं।
Proverbs 27:13 जो पराए का उत्तरदायी हो उसका कपड़ा, और जो अनजान का उत्तरदायी हो उस से बन्धक की वस्तु ले ले।
Proverbs 27:14 जो भोर को उठ कर अपने पड़ोसी को ऊंचे शब्द से आशीर्वाद देता है, उसके लिये यह शाप गिना जाता है।
Proverbs 27:15 झड़ी के दिन पानी का लगातार टपकना, और झगडालू पत्नी दोनों एक से हैं;
Proverbs 27:16 जो उसको रोक रखे, वह वायु को भी रोक रखेगा और दाहिने हाथ से वह तेल पकड़ेगा।
Proverbs 27:17 जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसे ही मनुष्य का मुख अपने मित्र की संगति से चमकदार हो जाता है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 40-42
  • प्रेरितों 27:1-26



बुधवार, 25 जुलाई 2018

परीक्षा



      क्रिकेट के खेल में टेस्ट-मैच खेलना बहुत थका देने वाला हो सकता है। खिलाड़ी प्रातः 11 बजे से लेकर संध्या 6 बजे तक खेलते हैं, इसके बीच में चाय और दोपहर के भोजन के अवकाश भी होते हैं। एक टेस्ट-मैच पाँच दिन तक चल सकता है। यह धीरज और कौशल की परख होता है।

      इसी प्रकार से जीवन में हम जिन परिस्थितियों का सामना करते हैं, वे कभी-कभी इसलिए और भी विकट लगने लगती हैं क्योंकि उनका अन्त होता हुआ दिखाई ही नहीं देता है। नौकरी मिलने की लंबी तलाश, अकेलेपन के लंबे समय, कैंसर के साथ चल रहा लंबा द्वंद, यह सब और भी कठिन लगने लगता है क्योंकि हम सोचने लग जाते हैं कि क्या यह कभी समाप्त भी होगा?

      शायद इसीलिए भजनकार ने पुकारा, “हे प्रभु तू कब तक देखता रहेगा? इस विपत्ति से, जिस में उन्होंने मुझे डाला है मुझ को छुड़ा! जवान सिंहों से मेरे प्राण को बचा ले” (भजन 35:17)। बाइबल के व्य्ख्याकर्ताओं का मानना है कि यह उस समय की बात है जब राजा शाऊल लंबे समय तक दाऊद का पीछा करता रहा था, और राजा के सलाहकार दाऊद  पर दोष मढ़ते रहते थे – दाऊद  के लिए यह परिक्षा का ऐसा समय था जो वर्षों तक चला था।

      परन्तु फिर भी अन्त में दाऊद ने गाया कि, “...यहोवा की बड़ाई हो, जो अपने दास के कुशल से प्रसन्न होता है” (पद 27)। उसकी परिक्षा उसे परमेश्वर पर और भी अधिक भरोसा रखने की गहराईयों में ले गई। दाऊद के समान, हमारी लंबी परीक्षाएं, कठिनाईयां, या हानि भी हमें परमेश्वर पर और गहरा भरोसा करने के अनुभवों से होकर निकाल सकती हैं; परमेश्वर पर भरोसे को बनाए रखें, अन्ततः आपका भला ही होगा। - बिल क्राउडर


जब आपके बोझ आप पर हावी होने लगें, 
तो स्मरण रखें कि परमेश्वर की सामर्थी भुजाएँ आपको संभाले हुए हैं।

अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएं हैं। वह शत्रुओं को तेरे साम्हने से निकाल देता, और कहता है, उन को सत्यानाश कर दे। - व्यवस्थाविवरण 33:27

बाइबल पाठ: भजन 35:17-28
Psalms 35:17 हे प्रभु तू कब तक देखता रहेगा? इस विपत्ति से, जिस में उन्होंने मुझे डाला है मुझ को छुड़ा! जवान सिंहों से मेरे प्राण को बचा ले!
Psalms 35:18 मैं बड़ी सभा में तेरा धन्यवाद करूंगा; बहुतेरे लोगों के बीच में तेरी स्तुति करूंगा।
Psalms 35:19 मेरे झूठ बोलने वाले शत्रु मेरे विरुद्ध आनन्द न करने पाएं, जो अकारण मेरे बैरी हैं, वे आपस में नैन से सैन न करने पांए।
Psalms 35:20 क्योंकि वे मेल की बातें नहीं बोलते, परन्तु देश में जो चुपचाप रहते हैं, उनके विरुद्ध छल की कल्पनाएं करते हैं।
Psalms 35:21 और उन्होंने मेरे विरुद्ध मुंह पसार के कहा; आहा, आहा, हम ने अपनी आंखों से देखा है!
Psalms 35:22 हे यहोवा, तू ने तो देखा है; चुप न रह! हे प्रभु, मुझ से दूर न रह!
Psalms 35:23 उठ, मेरे न्याय के लिये जाग, हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे प्रभु, मेरे मुकद्दमा निपटाने के लिये आ!
Psalms 35:24 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू अपने धर्म के अनुसार मेरा न्याय चुका; और उन्हें मेरे विरुद्ध आनन्द करने न दे!
Psalms 35:25 वे मन में न कहने पाएं, कि आहा! हमारी तो इच्छा पूरी हुई! वह यह न कहें कि हम उसे निगल गए हैं।
Psalms 35:26 जो मेरी हानि से आनन्दित होते हैं उनके मुंह लज्जा के मारे एक साथ काले हों! जो मेरे विरुद्ध बड़ाई मारते हैं वह लज्जा और अनादर से ढ़ंप जाएं!
Psalms 35:27 जो मेरे धर्म से प्रसन्न रहते हैं, वह जयजयकार और आनन्द करें, और निरन्तर कहते रहें, यहोवा की बड़ाई हो, जो अपने दास के कुशल से प्रसन्न होता है!
Psalms 35:28 तब मेरे मुंह से तेरे धर्म की चर्चा होगी, और दिन भर तेरी स्तुति निकलेगी।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 37-39
  • प्रेरितों 26



मंगलवार, 24 जुलाई 2018

भूल



      लगभग 200 वर्ष पहले, रूस में नेपोलियन की हार का कारण, रूस की भीषण सर्दी को माना जाता है। उसकी सेना में एक विशेष समस्या यह थी कि उनके घोड़ों के खुरों में जो नाल लगी थी वह गर्मियों में ही कारगर थी, रूस की उस भीषण सर्दी और बर्फ में नहीं। बर्फ से ढके मार्गों पर रसद की गाडियां खींचते हुए, घोड़े फिसल कर गिर जाते थे और मर जाते थे। नेपोलियन की सेना को समय से पूरी रसद न मिल पाने के कारण वे 400,000 से केवल 10,000 रह गए। एक छोटी सी भूल, अति विनाशकारी परिणाम का कारण हो गई।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब वर्णन करता है कि जीभ की छोटी सी भूल लोगों की नियति और अजीविकाएं बदल देती है। याकूब ने लिखा कि जीभ इतनी विनाशकारी है कि “जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है” (याकूब 3:8)। हमारे वर्तमान सँसार में यह समस्या बढ़कर और गंभीर हो गई है क्योंकि अब हमें सब कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं है; एक गलत ईमेल, या सोशल मीडिया पर डाला गया गलत सन्देश, शीघ्र ही फैल जाता है और बहुत हानि कर डालता है, उसे रद्द करना, या हटा देना बहुत कठिन हो जाता है।

      राजा दाऊद ने परमेश्वर के प्रति हमारे आदर को, हमारे द्वारा अपनी जीभ के प्रयोग के साथ जोड़ा। दाऊद ने लिखा, “...मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा...अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले” (भजन 34:11, 13)। उसने निर्णय लिया “मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा”, ( भजन 39:1)। परमेश्वर हमारी सहायता करे कि हम भी ऐसा ही करें और छोटी लगने वाली किन्तु अति विनाशकारी भूल से सावधान रहें। - सी. पी. हिया


हमारे शब्दों में बनाने या बिगाड़ने की शक्ति होती है।

वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है। जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। - याकूब 3:5-6

बाइबल पाठ: भजन 34:11-18
Psalms 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psalms 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psalms 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psalms 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psalms 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psalms 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psalms 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psalms 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 35-36
  • प्रेरितों 25