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शनिवार, 10 नवंबर 2018

उद्देश्य



      जेकब डेविस एक दर्जी थे, जो एक समस्या का सामना कर रहे थे। वह अमेरिका के पश्चिमी क्षेत्र में 1800 के वर्षों का समय था, ऐसा समय जब सोने के लिए खदानों में काम करने के लिए बहुत लोग जुटे हुए थे। खानों में काम करते-करते उन खदान कर्मियों की पैंटे बहुत शीघ्र घिस कर फट जाया करती थीं; यही डेविस की समस्या थी। डेविस को एक उपाय सूझा; वे एक स्थानीय कंपनी में, जिसके मालिक लेवे स्ट्रॉस थे, गए और उनसे तम्बू बनाने वाले कपड़े को खरीद लाए, और उससे पैंट बनाना आरंभ कर दिया। उस मज़बूत कपड़े से बनी पैंट बहुत टिकाउ रहीं और इस प्रकार नीली जींस की पैंट का आरंभ हुआ। आज डेनिम कपड़े से बनी जींस, लेवी मार्का सहित, सँसार के सबसे लोकप्रिय वस्त्रों में से हैं, क्योंकि तम्बू बनाने के कपड़े को एक नया उद्देश्य देकर प्रयोग किया गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि शमौन और उसके मित्र गलील की झील में मछली पकड़ने वाले मछुआरे थे। प्रभु यीशु उनके पास आए और उन्हें अपने साथ चलने को बुलाया जिससे वे उन्हें मनुष्यों के मछुए बनाएं: “और यीशु ने उन से कहा; मेरे पीछे चले आओ; मैं तुम को मनुष्यों के मछुवे बनाऊंगा” (मरकुस 1:17)। प्रभु यीशु ने इन्हें इस नए उद्देश्य के साथ प्रशिक्षित करना आरंभ किया जिससे कि उनके स्वर्गारोहण के पश्चात फिर ये ही लोग परमेश्वर के प्रेम और प्रभु यीशु के बलिदान तथा पुनरुत्थान के द्वारा सँसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध करवाए गए उद्धार के सुसमाचार को सँसार के सभी लोगों तक लेकर जा सकें।

      आज हम मसीह यीशु के प्रेम और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार में उन्हीं के उदाहरण का अनुसरण करते हैं। हम मसीही विश्वासियों के जीवनों से आज इस सुसमाचार का प्रचार भी होना है और प्रदर्शन भी, जिससे लोग इस जीवन तथा उद्देश्य को अनन्त काल के लिए बदल देने वाले परमेश्वर के प्रेम को जान सकें और समझ सकें, उसकी सामर्थ्य को प्रत्यक्ष देख सकें। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु में मिले नए जीवन के द्वारा हमें एक नया उद्देश्य भी प्राप्त हुआ है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। - 2 कुरिन्थियों 5:15

बाइबल पाठ: मरकुस 1:16-22
Mark 1:16 गलील की झील के किनारे किनारे जाते हुए, उसने शमौन और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछुवे थे।
Mark 1:17 और यीशु ने उन से कहा; मेरे पीछे चले आओ; मैं तुम को मनुष्यों के मछुवे बनाऊंगा।
Mark 1:18 वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mark 1:19 और कुछ आगे बढ़कर, उसने जब्‍दी के पुत्र याकूब, और उसके भाई यहून्ना को, नाव पर जालों को सुधारते देखा।
Mark 1:20 उसने तुरन्त उन्हें बुलाया; और वे अपने पिता जब्‍दी को मजदूरों के साथ नाव पर छोड़कर, उसके पीछे चले गए।
Mark 1:21 और वे कफरनहूम में आए, और वह तुरन्त सब्त के दिन सभा के घर में जा कर उपदेश करने लगा।
Mark 1:22 और लोग उसके उपदेश से चकित हुए; क्योंकि वह उन्हें शास्‍त्रियों के समान नहीं, परन्तु अधिकारी के समान उपदेश देता था।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7



शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

मार्गदर्शन



      मैं एक युवक को जानता हूँ जो प्रार्थनाओं में परमेश्वर से चिन्ह माँगता है। आवश्यक नहीं कि यह गलत हो, परन्तु उसकी प्रार्थनाएं बहुधा उसकी भावनाओं की पुष्टि के लिए होती हैं। उदाहरण के लिए, वह प्रार्थना करेगा, “परमेश्वर यदि आप चाहते हैं कि मैं ‘यह’ करूँ, तो आप ‘ऐसा’ कर दीजिए, और मैं समझ जाऊँगा कि यह आपकी इच्छानुसार है।”

      इससे दुविधा उत्पन्न होती है। जैसी वह प्रार्थनाएं करता है, और जैसा उसे लगता है कि परमेश्वर ने उसे उत्तर दिया है, उससे उसकी धारणा बनी है कि उस अपने भूतपूर्व प्रेमिका के पास लौट जाना चाहिए; परन्तु उसकी भूतपूर्व प्रेमिका उतनी ही दृढ़ता से यह मानती है कि ऐसा करना परमेश्वर की इच्छानुसार नहीं है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु के समय के धार्मिक अगुवों ने प्रभु से माँग की, कि वह किसी चिन्ह देने के द्वारा अपने दावों को प्रमाणित करें “फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिये उस से कहा, कि हमें आकाश का कोई चिन्ह दिखा” (मत्ती 16:1)। वे परमेश्वर से मार्गदर्शन नहीं चाह रहे थे, वे प्रभु के ईश्वरीय अधिकार को चुनौती दे रहे थे। प्रभु ने उन लोगों को उत्तर दिया, “इस युग के बुरे और व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूंढ़ते हैं पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा, और वह उन्हें छोड़कर चला गया” (मत्ती 16:4)। प्रभु यीशु का उन्हें दिया गया यह कड़ा प्रत्युत्तर, सामान्य रीति से लागू किए जाने के लिए परमेश्वर से चिन्ह माँगने की निषेधाज्ञा नहीं थी। वरन प्रभु उन्हें अपने वचन में उनके मसीहा होने के विषय दी गई स्पष्ट भविष्यवाणियों की अवहेलना करने का दोषी ठहरा रहे थे।

      परमेश्वर चाहता है कि हम प्रार्थनाओं के द्वारा उससे मार्गदर्शन प्राप्त करें (याकूब 1:5)। उसने हमारे मार्गदर्शन के लिए हम मसीही विश्वासियों को अपना पवित्र आत्मा भी प्रदान किया है (यूहन्ना 14:26); और उसका वचन भी हमें सही मार्ग दिखाता है (भजन 119:105)। हमारे मार्गदर्शन के लिए प्रभु यीशु का जीवन भी उदाहरण है, और प्रभु अपने भक्त बुद्धिमान परामार्श्दाताओं तथा अगुवों के द्वारा भी हमारा मार्गदर्शन करता है।

      हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा परमेश्वर के साथ और निकट संबंध बना सकते हैं, उसे और उसकी इच्छाओं को निकटता से जान सकते हैं। परमेश्वर से स्पष्ट मार्गदर्शन माँगना बुद्दिमता है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि हम जिस रीति से या जिस रूप में उस मार्गदर्शन की अपेक्षा करें परमेश्वर वैसे ही हमें मार्गदर्शन प्रदान करे। परन्तु वह हमें असहाय कभी नहीं छोड़ता है, किसी-न-किसी रीति से सही मार्गदर्शन अवश्य प्रदान करता है। - टिम गुस्ताफ्सन


परमेश्वर की इच्छा जानने का सर्वोत्तम तरीका है परमेश्वर के आज्ञाकारी बने रहना।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों  12:2

बाइबल पाठ: मत्ती 16:1-4
Matthew 16:1 और फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिये उस से कहा, कि हमें आकाश का कोई चिन्ह दिखा।
Matthew 16:2 उसने उन को उत्तर दिया, कि सांझ को तुम कहते हो कि खुला रहेगा क्योंकि आकाश लाल है।
Matthew 16:3 और भोर को कहते हो, कि आज आन्‍धी आएगी क्योंकि आकाश लाल और धुमला है; तुम आकाश का लक्षण देखकर भेद बता सकते हो पर समयों के चिन्‍हों का भेद नहीं बता सकते?
Matthew 16:4 इस युग के बुरे और व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूंढ़ते हैं पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा, और वह उन्हें छोड़कर चला गया।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6



गुरुवार, 8 नवंबर 2018

सहायक



      एक स्थानीय चर्च के स्वयं-सेवियों ने कम आमदनी वाले लोगों के रहने के क्षेत्र में जाकर भोजन का वितरण किया। जिन लोगों को भोजन मिला उनमें से एक वृद्ध महिला भोजन पा कर बहुत खुश हुई; उसने उन स्वयं-सेवियों को भोजन सामग्री रखने वाली अपनी अलमारी दिखाई जो उस समय बिलकुल खाली थी, और उनसे कहा कि वे उसके लिए प्रार्थनाओं का उत्तर बन कर आए हैं।

      चर्च वापस लौट कर आने और अपने अनुभवों के बारे में बताने के समय उन स्वयं-सेवियों में से एक महिला रोने लग गई। उसने बताया, “जब मैं छोटी बच्ची थी, तब वह वृद्ध महिला मेरी सन्डे स्कूल की अध्यापिका हुआ करती थी। अभी भी वह प्रति इतवार नियमित चर्च आती है। किन्तु हम में से किसी को भी यह आभास भी नहीं था कि वह लगभग भूखों मरने की कगार पर जी रही है।”

      स्पष्टतः ये स्वयं-सेवी दूसरों का ध्यान रखने वाले लोग थे जो दूसरों के बोझों को बाँटने का प्रयास कर रहे थे, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने गलातिया के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा था (गलतियों 6:2)। परन्तु फिर भी वे उस वृद्ध महिला की आवश्यकता को देख पाने में असफल रहे थे, यद्यपि वे उसे प्रति इतवार चर्च में देखते थे; और उस महिला ने भी अपनी आवश्यकता किसी को नहीं बताई थी। यह हम सब के लिए एक ध्यान देने की बात हो सकती है कि हम अपने आसा-पास के लोगों की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहें, जैसा कि पौलुस ने लिखा है, “इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ” (गलतियों 6:10)।

      जो लोग साथ आराधना करते हैं, उन्हें यह आदर भी है कि एक-दूसरे की सहायता भी करें जिससे मसीह यीशु की देह का कोई भी भाग बिना देखभाल और सहायता के न रहे। जब हम एक दूसरे को जानेंगे, और एक दूसरे की देखभाल करेंगे, तो हम एक दूसरे के सहायक भी बनेंगे, और मसीह की देह उन्नति पाएगी। - डेव ब्रैनन


दूसरों की देखभाल करना सबसे अधिक कीमत माँगता है, सिवाए देखभाल न करने के।

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। - नीतिवचन 3:27

बाइबल पाठ: गलतियों 6: 1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे।
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45
  • इब्रानियों 5



बुधवार, 7 नवंबर 2018

कठिन पहाड़



      इडाहो में हमारे घर के उत्तर दिशा में पहाड़ हैं, और उनकी एक चोटी, जगहैंडल पीक के पास एक हिम झील है। उस झील तक का मार्ग एक बहुत कठिन मार्ग है, जो खड़ी चढ़ाइयों और चट्टानों तथा पहाड़ के किनारे के संकरे रास्तों से होकर जाता है। यह बहुत कठिन चढ़ाई का मार्ग है।

      परन्तु इस कठिन चढ़ाई के आरंभ होने से ठीक पहले एक निर्मल पानी का नाला है जो मुलायम और छोटी वनस्पति से भरी धरती में से निकलता है, और हरे-भरे मैदान से होकर बहता है। यह एक शान्त एवं मनोरम स्थान है जहाँ पर चढ़ाई चढ़ने से पहले विश्राम किया जा सकता है, ठंडा पानी पीया जा सकता है और यात्री आने वाली कठिनाई के लिए तैयार हो सकते हैं।

      मसीही जीवन पर लिखी गई जौन बनयन की विख्यात कृति, The Pilgrims Progress में “मसीही विश्वासी” “कठिनाई पर्वत” की जड़ पर पहुंचता है, जिसकी कठिन चढ़ाई को चढ़कर उसे जाना है। उसके लिए वह चढ़ाई जहाँ से आरंभ होती है वहाँ, “निर्मल जल का एक सोता है...मसीही विश्वासी उसपर जाकर वहाँ से जल पीता है, अपने आप को तरोताज़ा करता है, और फिर उस कठिन चढ़ाई पर चढ़ना आरंभ करता है।” यह मसीही जीवन में आने वाली कठिनाईयों को पार करने के लिए मिलने वाली परमेश्वर की सामर्थ्य एवं सहायता का रूपक है।

      हो सकता है कि आज आपके जीवन में भी कोई कठिनाई, कोई पहाड़ हो, और आपको यह चुनौती आपके सहने की सीमा से बाहर लग रही हो। उस चुनौती का सामना करने से पहले, सामर्थ्य तथा तरोताज़गी के सोते, प्रभु परमेश्वर के साथ कुछ समय बिताएं। अपनी समस्त कमजोरी, थकान, असहायता, भय और शंका के साथ उसके पास आएँ, उन्हें उसे सौंप दें, और उसकी सामर्थ्य, बल, और बुद्धिमता – उसके वचन बाइबल के निर्मल जल में से पीकर तृप्त और तरोताज़ा हों। जब आप उसे समर्पित होकर, उसे अपने जीवन का आधार और मार्गदर्शक बना लेंगे, तब प्रभु परमेश्वर, जो आपकी सभी परिस्थितियों को भली-भांति जानता है, वह आपको शान्ति, सांत्वना, आत्मिक बल को भरपूरी से उपलब्ध करवाएगा। वह आपको आपके कठिन पहाड़ पर चढ़ने और पार होने के लिए सामर्थ्य और मार्गदर्शन देगा, आपकी सहायता करेगा। - डेविड रोपर


वह जो सब पर शासन करता है...
उसने मसीही विश्वासी को अपने मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए 
बलवंत और सामर्थी किया। - जौन बनयन, The Pilgrims Progress

और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ। अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है – इफिसियों 3:19-20

बाइबल पाठ: भजन 110
Psalms 110:1 मेरे प्रभु से यहोवा की वाणी यह है, कि तू मेरे दाहिने हाथ बैठ, जब तक मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न कर दूं।
Psalms 110:2 तेरे पराक्रम का राजदण्ड यहोवा सिय्योन से बढ़ाएगा। तू अपने शत्रुओं के बीच में शासन कर।
Psalms 110:3 तेरी प्रजा के लोग तेरे पराक्रम के दिन स्वेच्छाबलि बनते हैं; तेरे जवान लोग पवित्रता से शोभायमान, और भोर के गर्भ से जन्मी हुई ओस के समान तेरे पास हैं।
Psalms 110:4 यहोवा ने शपथ खाई और न पछताएगा, कि तू मेल्कीसेदेक की रीति पर सर्वदा का याजक है।
Psalms 110:5 प्रभु तेरी दाहिनी ओर हो कर अपने क्रोध के दिन राजाओं को चूर कर देगा।
Psalms 110:6 वह जाति जाति में न्याय चुकाएगा, रणभूमि लोथों से भर जाएगी; वह लम्बे चौड़े देश के प्रधान को चूर चूर कर देगा।
Psalms 110:7 वह मार्ग में चलता हुआ नदी का जल पीएगा इस कारण वह सिर को ऊंचा करेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 40-42
  • इब्रानियों 4



मंगलवार, 6 नवंबर 2018

सुरक्षित स्थान



      एक युवा जापानी व्यक्ति को समस्या थी – उसे अपना घर छोड़ने में घबराहट होती थी। अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचने के लिए वह दिन में सोता रहता था, और रात भर जागकर टेलिविज़न देखता रहता था। वह एक हिकिकोमोरी अर्थात आधुनिक सन्यासी बन गया था। उसकी समस्या का आरंभ स्कूल के समय में कक्षा में उसके कम अंक आने से हुई; लगातार कम अंक लाते रहने के कारण उसने स्कूल जाना छोड़ दिया, और सबसे अलग होकर रहने लगा। जितना अधिक वह समाज से दूर रहता गया, अपने आप को उतना ही अधिक समाज में अनुपयुक्त समझता चला गया। अन्ततः उसने परिवार और मित्र जनों से अभी संपर्क तोड़ लिए। उसे फिर से समाज से जुड़ने में सहायता करने के लिए टोक्यो शहर के एक युवकों के क्लब में, जिसे इबाशो कहते हैं, जाना पड़ा, जो कि एक ऐसा सुरक्षित स्थान है जहाँ अन्दर से टूटे हुए लोगों को फिर से समाज के साथ जोड़ने और स्थापित करने के लिए उनकी सहायता की जाती है।

      कैसा रहे यदि हम भी चर्च को एक इबाशो, या उससे भी बढ़कर समझें; एक ऐसा सुरक्षित स्थान जहाँ पाप और सँसार से आहात एवं टूटे हुए लोगों को पुनःस्थापित करने के लिए सहायता उपलब्ध रहती है। क्योंकि, निःसंदेह हम अन्दर से टूटे हुए लोगों का समाज हैं। जब परमेश्वर के वचन बाइबल में हम कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी पौलुस की पहली पत्री को पढ़ते हैं, तो उसमें पाते हैं कि वह मसीही विश्वास में आने से पहले के उनके जीवन और व्यवहार के बारे में उन्हें स्मरण करवाता है, कि कैसे वे समाज-विरोधी, स्वयँ तथा औरों के लिए हानिकारक तथा खतरनाक जीवन जी रहे थे (1 कुरिन्थियों 6:9-10)। परन्तु प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने के द्वारा उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया, और उनके जीवन बिलकुल बदल गए। पौलुस ने इन परिवर्तित लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे एक दूसरे से प्रेम रखें, एक दूसरे के प्रति धीराजवंत और सहनशील रहें, ईर्षालु, अहंकारी और अशिष्ट न हों (1 कुरिन्थियों 13:4-7)।

      चर्च को भी सँसार के सभी लोगों के लिए एक ऐसा ही इबाशो अर्थात सुरक्षित स्थान होना है, जहाँ आने से कोई भी व्यक्ति, वह चाहे कैसी भी समस्या से जूझ रहा हो, किसी भी बात से टूट गया हो, परमेश्वर के प्रेम और करुणा का अनुभव कर सकता है। जहाँ प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों से सँसार के दुखी लोग्शान्ति और सांत्वना पा सकें। - पो फैंग चिया


केवल परमेश्वर ही पाप से बिगड़ी हुई आत्मा को 
अनुग्रह से सुधरी हुई उत्कृष्ठ कलाकृति बना सकता है।

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। - रोमियों 5:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 6:9-11; 13:4-7
1 Corinthians 6:9 क्या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे? धोखा न खाओ, न वेश्यागामी, न मूर्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न लुच्‍चे, न पुरूषगामी।
1 Corinthians 6:10 न चोर, न लोभी, न पियक्कड़, न गाली देने वाले, न अन्‍धेर करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस होंगे।
1 Corinthians 6:11 और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3



सोमवार, 5 नवंबर 2018

सेवा



      हमारे घर में कुछ मेहमान आकर रुके हुए थे। एक दिन मैंने उनमें से एक से पूछा, “क्या आप अपने कुछ गंदे कपड़े धुलवाना चाहेंगे?” यह सुनते ही उनका चेहरा खिल उठा और उन्होंने पास से निकलती हुई अपनी पुत्री से कहा, “जितने भी कपड़े धुलवाने हों, सब ले आओ; एमी हमारे कपड़े धोना चाह रही है!” यह जानकर कि मेरी “कुछ कपड़े” धोने की बात को बढ़ा कर “जितने भी” बना दिया गया है, मैं मुस्कुराई।

      बाद में सूखने के लिए रस्सी पर कपड़ों को डालते समय, उस प्रातः के परमेश्वर के वचन बाइबल से पढ़ा गया एक पद मुझे स्मरण हो आया, “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो” (फिलिप्पियों 2:3)। मैं फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पौलुस प्रेरित की पत्री को पढ़ रही थी, जिसमें पौलुस उन लोगों को एक दूसरे की सेवा और परस्पर एक मनता की जीवन शैली के द्वारा मसीह यीशु की बुलाहट के अनुरूप जीवन जीने के लिए उभार रहा था। वे मसीही विश्वासी सताव से होकर निकल रहे थे, परन्तु पौलुस चाहता था कि वे एक मन होकर रहें। पौलुस जानता थी कि मसीह यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा जो परस्पर एक मनता उन्हें मिली है वह परस्पर सेवा के द्वारा ही व्यक्त हो सकती है, और यही उन्हें अपने मसीही विश्वास में भी दृढ़ बनाकर रखेगी।

      हम बिना किसी स्वार्थ या व्यर्थ अभिमान के, दूसरों के प्रति प्रेम रखने का दावा तो कर सकते हैं, परन्तु हमारे मनों की सही दशा तब तक प्रकट नहीं होती है जब तक हम परस्पर प्रेम के व्यवहार द्वारा उसे दर्शाते नहीं हैं। कपड़े धोने की मेरी बात का अनुचित लाभ लेते देख मेरा मन कुड़कड़ाने को तो हुआ, परन्तु साथ ही मुझे यह एहसास हुआ कि मसीह यीशु की अनुयायी होने के नाते मेरी बुलाहट अपने मित्रों के प्रति, सच्चे मन से अपने प्रेम को दिखाने की है, कुड़कड़ाने की नहीं।

      हम जब भी, परिवार, मित्रों, या पड़ौसियों के कारण, ऐसी किसी परिस्थिति में पड़ें, तब कुड़कड़ाने की बजाए हम उनकी सेवा के द्वारा अपने मसीही विश्वास को सार्थक बनाएँ। - एमी बाउचर पाई



एक दूसरे की सेवा के द्वारा एक मनता बढ़ती है।

भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। - रोमियों 12:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:27-2:4
Philippians 1:27 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त हो कर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो।
Philippians 1:28 और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है।
Philippians 1:29 क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ।
Philippians 1:30 और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



रविवार, 4 नवंबर 2018

विजेता



      हम में से लगभग सभी लोग एक अच्छे प्रशासन की अपेक्षा करते हैं। हम वोट देते हैं, हम कार्य करते हैं, हम उन कारणों के लिए आवाज़ उठाते हैं जिन्हें हम उचित और सही मानते हैं। परन्तु राजनैतिक समाधान लोगों के मनों की दशा को बदलने में असमर्थ रहते हैं।

      प्रभु यीशु के अनुयायियों में से बहुतेरे ऐसे मसीहा की प्रतीक्षा में थे जो रोमी शोषण और दमन का ज़ोरदार राजनैतिक प्रत्युत्तर दे सके। प्रभु यीशु का शिष्य पतरस भी भिन्न नहीं था। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रभु यीशु को पकड़ने के लिए लोग आए, तो पतरस ने अपनी तलवार निकाली और महापुरोहित के सेवक पर वार किया, जिससे उस सेवक का कान कट गया।

      प्रभु यीशु ने तुरंत उसे रोका और उससे कहा “तब यीशु ने पतरस से कहा, अपनी तलवार काठी में रख: जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे न पीऊं?” (यूहन्ना 18:11)। इसके कुछ ही घंटों के बाद प्रभु यीशु ने उसका न्याय कर रहे रोमी राज्यपाल से कहा, “...मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं” (पद 36)।

      उस पल में जब प्रभु का जीवन अधर में लटका था, उनके द्वारा दिखाया गया संयम, चकित कर देने वाला है, विशेषकर तब जब हम उनके कार्य के द्वारा होने वाले विश्वव्यापी प्रभाव पर विचार करते हैं। भविष्य में एक दिन आएगा जब प्रभु अपनी स्वर्गीय सेनाओं को लेकर युद्ध में उतरेगा; यूहन्ना उसके विषय लिखता है, “फिर मैं ने स्वर्ग को खुला हुआ देखा; और देखता हूं कि एक श्वेत घोड़ा है; और उस पर एक सवार है, जो विश्वास योग्य, और सत्य कहलाता है; और वह धर्म के साथ न्याय और लड़ाई करता है” (प्रकाशितवाक्य 19:11)।

      परन्तु अपने पकड़वाए जाने, दिखावे के मुकद्दमों में इधर से उधर घसीटे जाने, यातनाएं दिए जाने और क्रूस पर चढ़ा कर मारे जाने की घटनाओं में प्रभु यीशु ने अपने स्वर्गीय पिता परमेश्वर की ही इच्छा को पूरा किया। क्रूस की मृत्यु को स्वीकार करने के द्वारा उन्होंने सारे सँसार के सभी लोगों के लिए एक ऐसे घटनाक्रम को आरंभ किया और दिशा दी जो वास्तव में लोगों के हृदयों को बदलता देता है। ऐसा करने में हमारे इस महान विजेता ने मृत्यु तक को पराजित कर दिया। - टिम गुस्ताफ्सन


वास्तविक संयम कमजोरी नहीं है, क्योंकि यह वास्तविक सामर्थ्य से ही संभव है।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। - इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 18:10-14, 33-37
John 18:10 शमौन पतरस ने तलवार, जो उसके पास थी, खींची और महायाजक के दास पर चला कर, उसका दाहिना कान उड़ा दिया, उस दास का नाम मलखुस था।
John 18:11 तब यीशु ने पतरस से कहा, अपनी तलवार काठी में रख: जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे न पीऊं?
John 18:12 तब सिपाहियों और उन के सूबेदार और यहूदियों के प्यादों ने यीशु को पकड़कर बान्‍ध लिया।
John 18:13 और पहिले उसे हन्ना के पास ले गए क्योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था।
John 18:14 यह वही काइफा था, जिसने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिये एक पुरूष का मरना अच्छा है।
John 18:33 तब पीलातुस फिर किले के भीतर गया और यीशु को बुलाकर, उस से पूछा, क्या तू यहूदियों का राजा है?
John 18:34 यीशु ने उत्तर दिया, क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझ से कही?
John 18:35 पीलातुस ने उत्तर दिया, क्या मैं यहूदी हूं? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा, तू ने क्या किया है?
John 18:36 यीशु ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं।
John 18:37 पीलातुस ने उस से कहा, तो क्या तू राजा है? यीशु ने उत्तर दिया, कि तू कहता है, क्योंकि मैं राजा हूं; मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्द सुनता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1