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गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

समाचार



      इंटरनैट, टेलिविज़न, रेडियो और मोबाइल उपकरणों से होकर सँसार के समाचारों की बौछार हम तक पहुँचती रहती है। उसमें से अधिकांश समाचार यही बताते हैं कि सँसार में क्या गलत या बुरा हो रहा है – अपराध, आतंकवाद, युद्ध, और आर्थिक समस्याएं। फिर भी ऐसे भी समय होते हैं जब उदासी और निराशा के गहन अन्धकार को चीरते हुए कुछ अच्छे समाचार भी आते हैं – निःस्वार्थ किए गए कार्यों के विवरण, चिकित्सा पद्धति में होनेवाली कोई नई खोज, या युद्ध से बर्बाद स्थानों में शान्ति बहाली की कोई आशा।

      परमेश्वर के पुराने नियम खण्ड में दो लोगों के शब्दों से संघर्ष से व्यथित लोगों को बड़ी राहत मिली।

      एक क्रूर और बलवान देश पर आने वाले परमेश्वर के न्याय का वर्णन करते हुए नहूम ने कहा, “देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है!” (नहूम 1:15)। इस समाचार से उस क्रूरता से त्रस्त सभी लोगों में आशा का संचार हुआ।

      ऐसे ही शब्द यशायाह की पुस्तक में भी मिलते हैं: “पहाड़ों पर उसके पांव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है, जो शान्ति की बातें सुनाता है और कल्याण का शुभ समाचार और उद्धार का सन्देश देता है” (यशायाह 52:7)।

      नहूम और यशायाह द्वारा की गई आशा की भविष्यवाणियों की परिपूर्णता अन्ततः उस पहले क्रिसमस के समय हुई जब, “तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है” (लूका 2:10-11)।

      प्रतिदिन हमारे जीवनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण समाचार वही सर्वोत्तम सुसमाचार है – प्रभु यीशु ही सारे जगत का उद्धारकर्ता है! – डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु के जन्म का समाचार ही वह सर्वोत्तम समाचार है जो सँसार ने कभी भी सुना है।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: नहूम 1:7-15
Nahum 1:7 यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है।
Nahum 1:8 परन्तु वह उमड़ती हुई धारा से उसके स्थान का अन्त कर देगा, और अपने शत्रुओं को खदेड़ कर अन्धकार में भगा देगा।
Nahum 1:9 तुम यहोवा के विरुद्ध क्या कल्पना कर रहे हो? वह तुम्हारा अन्त कर देगा; विपत्ति दूसरी बार पड़ने न पाएगी।
Nahum 1:10 क्योंकि चाहे वे कांटों से उलझे हुए हों, और मदिरा के नशे में चूर भी हों, तौभी वे सूखी खूंटी के समान भस्म किए जाएंगे।
Nahum 1:11 तुझ में से एक निकला है, जो यहोवा के विरुद्ध कल्पना करता और नीचता की युक्ति बान्धता है।
Nahum 1:12 यहोवा यों कहता है, चाहे वे सब प्रकार के सामर्थी हों, और बहुत भी हों, तौभी पूरी रीति से काटे जाएंगे और शून्य हो जाएंगे। मैं ने तुझे दु:ख दिया है, परन्तु फिर न दूंगा।
Nahum 1:13 क्योंकि अब मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से उतार कर तोड़ डालूंगा, और तेरा बन्धन फाड़ डालूंगा।
Nahum 1:14 यहोवा ने तेरे विषय में यह आज्ञा दी है कि आगे को तेरा वंश न चले; मैं तेरे देवालयों में से ढली और गढ़ी हुई मूरतों को काट डालूंगा, मैं तेरे लिये कबर खोदूंगा, क्योंकि तू नीच है।
Nahum 1:15 देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है! अब हे यहूदा, अपने पर्व मान, और अपनी मन्नतें पूरी कर, क्योंकि वह ओछा फिर कभी तेरे बीच में हो कर न चलेगा, और पूरी रीति से नाश हुआ है।


एक साल में बाइबल: 
  • होशे 12-14
  • प्रकाशितवाक्य 4



बुधवार, 12 दिसंबर 2018

धन



      अपने जीविका अर्जित करने के आरंभिक वर्षों में, मैं एक ऐसा कार्य कर रहा था जिसे मैं पेशे से अधिक मिशन सेवकाई समझता था, और मुझे एक दूसरी कंपनी ने एक ऐसे पद की पेशकश की जहाँ मुझे वेतन में खासी बढ़ोतरी मिलने पाएगी। उस पद को स्वीकार करके वहाँ से जाने के द्वारा मेरे परिवार को अवश्य ही आर्थिक लाभ तो होता। परन्तु एक समस्या थी, मैं किसी भी नई नौकरी की तलाश में नहीं था क्योंकि मुझे अपना तत्कालीन कार्य बहुत पसन्द था, और वह एक बुलाहट में विक्सित होता जा रहा था। परन्तु नई नौकरी में मिलने वाला धन मेरे लिए एक प्रबल प्रलोभन था।

      मैंने अपने पिता से, जो तब सत्तर वर्ष के थे, इस विषय में बात की, और उन्हें सारी परिस्थिति समझाई। यद्यपि कभी मेरे पिता का मस्तिष्क तीक्षण हुआ करता था, परन्तु अब वर्षों के दबाव और पक्षाघात के कारण वह दुर्बल हो गया था। फिर भी, उनका उत्तर स्पष्ट और सटीक था: “पैसे के बारे में सोचना भी मत। यह सोचो कि तुम वहाँ करोगे क्या?”

      पल भर में मैनें निर्णय ले लिया। जिस नौकरी से मैं प्रेम करता था उसे बदलने का मेरा एकमात्र कारण पैसा ही होता! मैंने इस मार्गदर्शन के लिए अपने पिता का धन्यवाद किया।

      प्रभु यीशु ने अपने पहाड़ी उपदेश का महत्वपूर्ण भाग पैसे और उससे हमारे लगाव पर केंद्रित किया। प्रभु ने हमें सिखाया कि हम धन एकत्रित करने पर नहीं परन्तु अपनी “रोज़ की रोटी” के लिए प्रार्थना करें (मत्ती 6:11)। उन्होंने सचेत किया कि पृथ्वी पर धन एकत्रित न करें, और पक्षियों तथा फूलों का उदाहरण दिया कि परमेश्वर अपनी सृष्टि की बड़े लगाव से देखभाल करता है (पद 19-31)। प्रभु यीशु ने कहा, “इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी” (पद 33)।

      अवश्य, धन महत्वपूर्ण है; परन्तु हमारे निर्णय लेने की प्रक्रिया का नियंत्रण धन के आधार पर नहीं होना चाहिए। कठिन समय और बड़े निर्णय हमारे विश्वास में बढ़ने के लिए नए अवसर होते हैं। हमारा स्वर्गीय पिता हमारी चिन्ता करता है। - टिम गुस्ताफ्सन


कभी भी प्रलोभन को अवसर समझने की गलती न करें।

अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। क्योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा। - मत्ती 6:19-21

बाइबल पाठ: मत्ती 6:24-34
Matthew 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, या एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे?
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।


एक साल में बाइबल: 
  • होशे 9-11
  • प्रकाशितवाक्य 3



मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

प्रार्थना



      परमेश्वर बहुधा हमारी प्रार्थनाओं के द्वारा अपने कार्य करता है। हम इसका एक उदाहरण परमेश्वर के वचन बाइबल में एलिय्याह भविष्यद्वक्ता के साथ हुई एक घटना में देखते हैं, जब परमेश्वर ने एलिय्याह से कहा कि वह देश में साढ़े-तीन वर्ष से चले आ रहे अकाल का अन्त करके वर्षा को भेजेगा (याकूब 5:17)। यद्यपि परमेश्वर ने वर्षा भेजने की प्रतिज्ञा की थी, हम देखते हैं कि इसके थोड़े ही समय के पश्चात ही “...एलिय्याह कर्म्मेल की चोटी पर चढ़ गया, और भूमि पर गिर कर अपना मुंह घुटनों के बीच किया” – वह बड़ी अभिलाषा के साथ वर्षा के लिए प्रार्थना करने लगा (1 राजा 18:42); और प्रार्थना करते हुए एलिय्याह ने अपने सेवक को सात बार भेजा कि वह जाकर समुद्र की ओर देखकर बताए कि वर्षा के आने के कोई आसार दिखाई दे रहे हैं कि नहीं (पद 43)।

      एलिय्याह समझता था कि परमेश्वर चाहता है कि हम दीनता से की गई निरन्तर प्रार्थना द्वारा उसके कार्य में सम्मिलित हों। हमारी मानवीय सीमाओं के होते हुए भी, परमेश्वर हमारी प्रार्थनाओं के अद्भुत उत्तर दे सकता है। इसीलिए बाइबल में याकूब अपनी पत्री में लिखा, “इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है। एलिय्याह भी तो हमारे समान दुख-सुख भोगी मनुष्य था; और उसने गिड़िगड़ा कर प्रार्थना की; कि मेंह न बरसे; और साढ़े तीन वर्ष तक भूमि पर मेंह नहीं बरसा” हमें यह स्मरण करवाते हुए कि एलिय्याह हमारे समान ही दुःख-सुख भोगी मनुष्य था (याकूब 5:16-17)।

      जब हम अपनी विश्वासयोग्य प्रार्थनाओं के द्वारा परमेश्वर की सेवा करने की ठान लेते हैं, जैसे कि एलिय्याह ने किया, हम एक अनुपम विशेषाधिकार का प्रयोग करते हैं – और तब हमें कभी भी परमेश्वर द्वारा किए जाने वाले किसी अद्भुत आश्चर्यकर्म को प्रत्यक्ष देख पाने का अवसर होता है। - जेम्स बैंक्स


हमारे द्वारा की गई महान अपेक्षाएं परमेश्वर को आदर देती हैं।

पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा। - याकूब 1:6-7

बाइबल पाठ: 1 राजा 18:41-45
1 Kings 18:41 फिर एलिय्याह ने अहाब से कहा, उठ कर खा पी, क्योंकि भारी वर्षा की सनसनाहट सुन पड़ती है।
1 Kings 18:42 तब अहाब खाने पीने चला गया, और एलिय्याह कर्म्मेल की चोटी पर चढ़ गया, और भूमि पर गिर कर अपना मुंह घुटनों के बीच किया।
1 Kings 18:43 और उसने अपने सेवक से कहा, चढ़कर समुद्र की ओर दृष्टि कर देख, तब उसने चढ़ कर देखा और लौट कर कहा, कुछ नहीं दीखता। एलिय्याह ने कहा, फिर सात बार जा।
1 Kings 18:44 सातवीं बार उसने कहा, देख समुद्र में से मनुष्य का हाथ सा एक छोटा बादल उठ रहा है। एलिय्याह ने कहा, अहाब के पास जा कर कह, कि रथ जुतवा कर नीचे जा, कहीं ऐसा न हो कि तू वर्षा के कारण रुक जाए।
1 Kings 18:45 थोड़ी ही देर में आकाश वायु से उड़ाई हुई घटाओं, और आन्धी से काला हो गया और भारी वर्षा होने लगी; और अहाब सवार हो कर यिज्रेल को चला।


एक साल में बाइबल: 
  • होशे 5-8
  • प्रकाशितवाक्य 2



सोमवार, 10 दिसंबर 2018

मित्रता



      चार्ल्स लोएरी ने अपने मित्र से अपनी पीठ के निचले भाग में हो रहे दर्द के विषय शिकायत की। उसे अपने मित्र से सहानुभूतिपूर्ण प्रत्युत्तर की अपेक्षा था, परन्तु उसके मित्र ने उसे एक ईमानदार आंकलन दिया। उसके मित्र ने कहा, “मुझे नहीं लगता है कि तुम्हारे पीठ में कोई समस्या है; समस्या है तुम्हारा पेट। तुम्हारा पेट इतना बड़ा है कि वह पीठ को असंतुलित कर रहा है।”

      REV! पत्रिका में लिखे गए अपने लेख में चार्ल्स ने इस बात को बताते हुए कहा कि उसने अपने मित्र की बात का बुरा मान लेने के प्रलोभन का डट कर सामना किया। उसने वज़न कम करना आरंभ किया, और वज़न कम हो जाने के साथ उसके कमर दर्द की समस्या भी चली गई। चार्ल्स ने परमेश्वर के वचन बाइबल की बात को पहचाना कि, “खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है। जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है” (नीतिवचन 27:5-6)।

      समस्या यह है कि हम बहुधा आलोचना द्वारा बचाए जाने की अपेक्षा, प्रशंसा के द्वारा बर्बाद हो जाना अधिक पसन्द करते हैं, क्योंकि आलोचना से पीड़ा होती है। आलोचना हमारे अहम को ठेस पहुंचाती है, हमें विचलित करती है और हमें बदलने के लिए कहती है।

      सच्चे मित्र हमें आहत करने से सुखी नहीं होते हैं; वे हमसे इतना प्रेम करते हैं कि हमें धोखे में रखना नहीं चाहते हैं। वे ही लोग हैं जो साहस करके हमें सप्रेम वह बताते हैं जिसे हम जानते तो हैं परन्तु उसे स्वीकार करके उसके अनुसार चलने और जीवन जीने में आनाकानी करते हैं। मित्र हमें न केवल वह बताते हैं जो हम सुनना चाहते हैं, वरन वह भी जिसे वास्तव में सुनने की हमें आवश्यकता है।

      बाइबल के एक प्रमुख पात्र, राजा सुलेमान ने ऐसी मित्रता को अपने द्वारा लिखे नीतिवचनों में आदर दिया। प्रभु यीशु मसीह ने तो इससे भी बढ़कर हमारे लिए किया, उसने हमारे विषय सत्य को हमें बताने के लिए हमारे द्वारा उसे तिरिस्कार करने के घाव भी सहे, और हमारे पापों की क्षमा और उद्धार के लिए अपने आप को बलिदान भी कर दिया तथा तीसरे दिन मृतकों में से जी उठा, और दिखा दिया कि वह हम से कितना प्रेम करता है। - पो फंग चिया


मित्र वही है जो आपको प्रेम के साथ सत्य बता सकता है।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। - यूहन्ना 15:13-14

बाइबल पाठ: नीतिवचन 27:5-10
Proverbs 27:5 खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है।
Proverbs 27:6 जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है।
Proverbs 27:7 सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं।
Proverbs 27:8 स्थान छोड़ कर घूमने वाला मनुष्य उस चिडिय़ा के समान है, जो घोंसला छोड़ कर उड़ती फिरती है।
Proverbs 27:9 जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।
Proverbs 27:10 जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है।


एक साल में बाइबल: 
  • होशे 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 1



रविवार, 9 दिसंबर 2018

प्रोत्साहन



      एक पुराना गाना है, “If We Make it Through December” जो एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताता है जिसे फैक्ट्री के कार्य से निकाल दिया जाता है और उसके पास अपने बेटी के लिए क्रिसमस के उपहार खरीदने के लिए कोई पैसा नहीं होता है। यद्यपि दिसंबर वर्ष का आनन्द मनाने का समय होता है, उसका जीवन अन्धेरा और ठंडा था।

      निराशा दिसंबर के लिए अनूठी तो नहीं है, परन्तु उस समय बढ़ सकती है। हमारी अपेक्षाएं बड़ी हो सकती हैं, हमारी उदासी और गहरी हो सकती है। ऐसे में थोड़ा सा प्रोत्साहन बहुत सहायक हो सकता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में नए नियम खण्ड का एक पात्र है यूसुफ, जो साइप्रस का निवासी था, प्रभु यीशु के आरंभिक अनुयायियों में से था, और प्रेरित उसे बरनाबास अर्थात “शान्ति का पुत्र” भी कहते थे। उससे हमारी मुलाकात प्रेरितों 4:36-37 में होती है, जब उसने अपनी भूमि बेचकर अन्य विश्वासियों की आवश्यकता में उनकी सहायता के लिए वह पैसा दान कर दिया। बाद में हम देखते हैं कि जब अन्य शिष्य पौलुस से भयभीत थे, क्योंकि पहले शाउल (पौलुस का पहला नाम) यीशु के शिष्यों का शत्रु हुआ करता था, तो बरनाबास ही था जो मसीह द्वारा उसके परिवर्तन पर विश्वास करके,पौलुस को खोजकर अन्य शिष्यों के पास लेकर लाया और उसका समर्थन किया, उसे अन्य शिष्यों से मिलवाया  (प्रेरितों 9:26-27)।

      हमारे चारों ओर ऐसे लोग हैं जिन्हें प्रोत्साहन की आवश्यकता है। समय से कहा गया एक शब्द, एक फोन, या एक प्रार्थना, मसीह में उनके विश्वास को सहारा दे सकती है, उन्हें संभाल सकती है।

      बरनाबास की उदारता और सहायता दिखाते हैं कि शान्ति या प्रोत्साहन का पुत्र होने का अभिप्राय क्या होता है। हो सकता है कि यह प्रोत्साहन ही वह सबसे अच्छा उपहार है जिसे आप इस क्रिसमस काल में किसी को दे सकें। - डेविड मैक्कोस्लैंड


प्रोत्साहन किसे को दिया गया सर्वोत्तम उपहार हो सकता है।

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलातियों 6:1

बाइबल पाठ: प्रेरितों 4:32-37; 9:26-27
Acts 4:32 और विश्वास करने वालों की मण्‍डली एक चित्त और एक मन के थे यहां तक कि कोई भी अपनी सम्पति अपनी नहीं कहता था, परन्तु सब कुछ साझे का था।
Acts 4:33 और प्रेरित बड़ी सामर्थ से प्रभु यीशु के जी उठने की गवाही देते रहे और उन सब पर बड़ा अनुग्रह था।
Acts 4:34 और उन में कोई भी दरिद्र न था, क्योंकि जिन के पास भूमि या घर थे, वे उन को बेच बेचकर, बिकी हुई वस्‍तुओं का दाम लाते, और उसे प्रेरितों के पांवों पर रखते थे।
Acts 4:35 और जैसी जिसे आवश्यकता होती थी, उसके अनुसार हर एक को बांट दिया करते थे।
Acts 4:36 और यूसुफ नाम, कुप्रुस का एक लेवी था जिसका नाम प्रेरितों ने बरनबास (अर्थात शान्‍ति का पुत्र) रखा था।
Acts 4:37 उस की कुछ भूमि थी, जिसे उसने बेचा, और दाम के रूपये लाकर प्रेरितों के पांवों पर रख दिए।

Acts 9:26 यरूशलेम में पहुंचकर उसने चेलों के साथ मिल जाने का उपाय किया: परन्तु सब उस से डरते थे, क्योंकि उन को प्रतीति न होता था, कि वह भी चेला है।
Acts 9:27 परन्तु बरनबास ने उसे अपने साथ प्रेरितों के पास ले जा कर उन से कहा, कि इस ने किस रीति से मार्ग में प्रभु को देखा, और इस ने इस से बातें कीं; फिर दमिश्क में इस ने कैसे हियाव से यीशु के नाम का प्रचार किया।


एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 11-12
  • यहूदा



शनिवार, 8 दिसंबर 2018

स्तुति-आराधना



      फिल्मों में धवनी को सुनने का एक नया प्रकार, “स्टीरियोफोनिक साउंड” या सराउंड साउंड को सबसे पहले वॉल्ट डिज़्नी स्टूडियोज लाए थे, क्योंकि फिल्म निर्माता चाहते थे कि फ़िल्में देखने जाने वाले दर्शक संगीत को एक नई रीति से सुनें।

      परन्तु सराउंड साउंड के सिद्धांत का यह सर्वप्रथम उपयोग नहीं था। हज़ारों वर्ष पहले नहेम्याह ने यरूशलेम की पुनःनिर्मित दीवार के समर्पण के समय इस विचार को कार्यान्वित किया था। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि नहेम्याह बता रहा है: “तब मैं ने यहूदी हाकिमों को शहरपनाह पर चढ़ाकर दो बड़े दल ठहराए, जो धन्यवाद करते हुए धूमधाम के साथ चलते थे। इनमें से एक दल तो दक्खिन ओर, अर्थात कूड़ाफाटक की ओर शहरपनाह के ऊपर ऊपर से चला” (नहेम्याह 12:31)। वे दोनों संगीत मंडलियां दीवार के दक्षिणी भाग से आरंभ हुईं, और एक दाहिनी ओर गई, तथा दूसरी बाईं ओर, और उन्होंने यरूशलेम शहर को स्तुति-आराधना गाते हुए घेर लिया (पद 31, 37-40)। उन मंडलियों ने स्तुति-आराधना करने में लोगों की अगुवाई की क्योंकि “परमेश्वर ने उन्हें बहुत ही आनन्दित किया था”; और उनके आनन्द की यह ध्वनी दूर-दूर तक फैल गई (पद 43)।

      उनकी यह आराधना परमेश्वर की सहायता के कारण थी क्योंकि लोग संबल्लत जैसे शत्रुओं द्वारा किए गए विरोध पर विजयी हुए थे और दीवार के निर्माण को पूरा करने पाए थे। क्या परमेश्वर ने हमें कुछ दिया है जिससे हमारा आनन्द स्तुति-आराधना में होकर प्रवाहित हो – परमेश्वर का स्पष्ट मार्गदर्शन? परेशानियों के समय में उससे मिलने वाली सांत्वना और चैन? या हमें मिला सबसे उत्तम उपहार  – हमारे पापों की क्षमा और उद्धार?

      हो सकता है कि हम अपनी स्तुति-आराधना के द्वारा सराउंड साउंड उत्पन्न न कर सकें, परन्तु हम परमेश्वर द्वारा दिए गए आनन्द में मगन हो सकते हैं। फिर अन्य लोग हमें परमेश्वर की स्तुति-आराधाना करते हुए सुन सकते हैं और जान सकते हैं कि वह कैसे कार्य करता है। - डेव ब्रैनन


हम कभी भी यीशु की अत्याधिक स्तुति-आराधाना नहीं कर सकते है!

यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उसने आश्चर्यकर्म किए है! उसके दाहिने हाथ और पवित्र भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है! – भजन 98:1

बाइबल पाठ: नहेम्याह 12:27-43
Nehemiah 12:27 और यरूशलेम की शहरपनाह की प्रतिष्ठा के समय लेवीय अपने सब स्थानों में ढूंढ़े गए, कि यरूशलेम को पहुंचाए जाएं, जिस से आनन्द और धन्यवाद कर के और झांझ, सारंगी और वीणा बजाकर, और गाकर उसकी प्रतिष्ठा करें।
Nehemiah 12:28 तो गवैयों के सन्तान यरूशलेम के चारों ओर के देश से और नतोपातियों के गांवों से,
Nehemiah 12:29 और बेतगिलगाल से, और गेबा और अज्माबेत के खेतों से इकट्ठे हुए; क्योंकि गवैयों ने यरूशलेम के आस-पास गांव बसा लिये थे।
Nehemiah 12:30 तब याजकों और लेवियों ने अपने अपने को शुद्ध किया; और उन्होंने प्रजा को, और फाटकों और शहरपनाह को भी शुद्ध किया।
Nehemiah 12:31 तब मैं ने यहूदी हाकिमों को शहरपनाह पर चढ़ाकर दो बड़े दल ठहराए, जो धन्यवाद करते हुए धूमधाम के साथ चलते थे। इनमें से एक दल तो दक्खिन ओर, अर्थात कूड़ाफाटक की ओर शहरपनाह के ऊपर ऊपर से चला;
Nehemiah 12:32 और उसके पीछे पीछे ये चले, अर्थात होशयाह और यहूदा के आधे हाकिम,
Nehemiah 12:33 और अजर्याह, एज्रा, मशुल्लाम,
Nehemiah 12:34 यहूदा, बिन्यामीन, शमायाह, और यिर्मयाह,
Nehemiah 12:35 और याजकों के कितने पुत्र तुरहियां लिये हुए: अर्थात जकर्याह जो योहानान का पुत्र था, यह शमायाह का पुत्र, यह मत्तन्याह का पुत्र, यह मीकायाह का पुत्र, यह जक्कूर का पुत्र, यह आसाप का पुत्र था।
Nehemiah 12:36 और उसके भाई शमायाह, अजरेल, मिललै, गिललै, माऐ, नतनेल, यहूदा और हनानी परमेश्वर के भक्त दाऊद के बाजे लिये हुए थे; और उनके आगे आगे एज्रा शास्त्री चला।
Nehemiah 12:37 ये सोताफाटक से हो सीधे दाऊदपुर की सीढ़ी पर चढ़, शहरपनाह की ऊंचाई पर से चलकर, दाऊद के भवन के ऊपर से हो कर, पूरब की ओर जलफाटक तक पहुंचे।
Nehemiah 12:38 और धन्यवाद करने और धूमधाम से चलने वालों का दूसरा दल, और उनके पीछे पीछे मैं, और आधे लोग उन से मिलने को शहरपनाह के ऊपर ऊपर से भट्ठों के गुम्मट के पास से चौड़ी शहरपनाह तक।
Nehemiah 12:39 और एप्रैम के फाटक और पुराने फाटक, और मछलीफाटक, और हननेल के गुम्मट, और हम्मेआ नाम गुम्मट के पास से हो कर भेड़ फाटक तक चले, और पहरुओं के फाटक के पास खड़े हो गए।
Nehemiah 12:40 तब धन्यवाद करने वालों के दोनों दल और मैं और मेरे साथ आधे हाकिम परमेश्वर के भवन में खड़े हो गए।
Nehemiah 12:41 और एल्याकीम, मासेयाह, मिन्यामीन, मीकायाह, एल्योएनै, जकर्याह और हनन्याह नाम याजक तुरहियां लिये हुए थे।
Nehemiah 12:42 और मासेयाह, शमायाह, एलीआजर, उज्जी, यहोहानान, मल्किय्याह, एलाम, ओर एजेर (खड़े हुए थे) और गवैये जिनका मुखिया यिज्रह्याह था, वह ऊंचे स्वर से गाते बजाते रहे।
Nehemiah 12:43 उसी दिन लोगों ने बड़े बड़े मेलबलि चढ़ाए, और आनन्द लिया; क्योंकि परमेश्वर ने उन को बहुत ही आनन्दित किया था; स्त्रियों ने और बाल-बच्चों ने भी आनन्द किया। और यरूशलेम के आनन्द की ध्वनि दूर दूर तक फैल गई।


एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 8-10
  • 3 यूहन्ना



शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

एकता



      तीन बड़े और हिंसक जानवरों को एक साथ खेलते और आपस में लिपटते देखना बहुत ही असामान्य है। परन्तु यह जोर्जिया प्रांत के एक पशु शरणस्थान में प्रतिदिन होता रहता है। सन 2001 में, महीनों से उपेक्षा और दुर्व्यवहार झेल रहे एक शेर, एक बाघ और एक भालू को संरक्षकों ने बचाया। उस शरणस्थान के उप्निर्देश्क ने कहा, “हम इन्हें अलग-अलग रख सकते थे, परन्तु क्योंकि ये एक परिवार के समान साथ ही आए थे इसलिए हमने उन्हें साथ ही रहने देने का निर्णय लिया। उन तीनों जनावारों को, उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार के समय में, एक दूसरे के साथ से सुख मिलता था, और अपनी भिन्नताओं के बावजूद वे अभी भी एक-दूसरे के साथ शान्ति से रहते हैं।

      एकता बहुत सुन्दर बात है। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में जिस एकता के विषय पौलुस ने इफिसियों की मण्डली को अपने द्वारा लिखी गई पत्री में लिखा था वह अनुपम है। पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे मसीह में एक देह होकर रहने की अपनी बुलाहट के अनुसार रहें (इफिसियों 4:4-5)। पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से वे एकमनता के साथ रहने पाते, और उनमें नम्रता, कोमलता, और धैर्य बढ़ता जाता। यही गुण हमें, मसीह यीशु में होकर हमें मिले सामान्य आधार के द्वारा, “एक दूसरे की सहने” में भी सहायता करते हैं (4:2)।

      हमारी परस्पर भिन्नताओं के बावजूद, परमेश्वर के परिवार के सदस्य होने के नाते, उसके साथ हमारा मेल-मिलाप हमारे उद्धारकर्ता की मृत्यु के द्वारा हुआ है, और एक दूसरे के साथ हमारा मेल-मिलाप हमारे जीवन में चल रहे पवित्र आत्मा के कार्य के द्वारा होता है। - मारविन विलियम्स


आत्मा में एक होने के द्वारा ही हम एकता को बनाए रख सकते हैं।

सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। - फिलिप्पियों 2:1-2

बाइबल पाठ:इफिसियों 4:1-6
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो।
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो।
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है।
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा।
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।


एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 5-7
  • 2 यूहन्ना