ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

जानता



      हमारे पुत्र और बहु के सामने एक विकट स्थिति थी; हमारा पोता निमोनिया और ब्रोंकाइटिस से ग्रस्त था और उन्हें उसे अस्पताल लेकर जाना था। उन्होंने हम से पूछ कि क्या हम उनके पाँच वर्षीय बेटे, नेथन, को स्कूल से घर ले कर आ सकते हैं? मैं और मेरी पत्नि इसके लिए सहर्ष तैयार हो गए।

      जब नेथन कार में चढ़ा, तो मेरी पत्नि ने उससे पूछा, “तुम्हें अचरज नहीं हुआ कि आज हम तुम्हें लेने आए हैं?” उसने उत्तर दिया, “नहीं!” जब हमने उससे पूछा कि ऐसा क्यों, तो उसने कहा, “क्योंकि मैं सब जानता हूँ!”

      पाँच वर्ष का एक बालक सब कुछ जानने का दावा कर सकता है, परंतु हम में सो व्यस्क हैं वे इससे बेहतर जानते हैं। हमारे पास अकसर प्रश्न अधिक और उत्तर कम होते हैं। हम बहुधा जीवन के क्यों, कब, और कैसे की चिन्ता करते रहते हैं – बिना इस बात का ध्यान करे कि हम चाहे सब कुछ नहीं जानते हैं परन्तु हम उस परमेश्वर को जानते हैं जो सब कुछ जानता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 139:1, 3 में हमारे सर्वज्ञानी परमेश्वर के विषय बताया गया है जो हमारे बारे में सब कुछ बहुत गहराई से जानता है। दाऊद लिखता है, “हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है... मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है” यह कितना सांत्वना प्रदान करने वाला है कि परमेश्वर हम से सिद्ध प्रेम करता है, उसे वह सब कुछ पता है जो आज हम अनुभव करने वाले हैं, और वह जानता है कि जीवन की परिस्थितियों में  हमारी सहायता करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है।

      हमारा ज्ञान तो सदा ही सीमित रहेगा, परन्तु परमेश्वर को जानना ही सबसे महत्वपूर्ण बात है। जो हमारे बारे में और हमारे जीवन की प्रत्येक परिस्थिति के बारे में भली-भांति जानता है, उसपर हम पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - बिल क्राउडर


परमेश्वर को जानना ही सबसे महत्वपूर्ण बात है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12

बाइबल पाठ: भजन 139:1-18
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-12
  • मत्ती 26:1-25



रविवार, 10 फ़रवरी 2019

सहारा



      कभी-कभी जब मैं रात को सोने के लिए अपना सिर तकिए पर रखता हूँ तो कल्पना करता हूँ के मैं यीशु पर सिर रखकर उसका सहारा ले रहा हूँ। ऐसा करते समय मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना का स्मरण हो आता है। स्वयँ यूहन्ना ने अपने विषय में लिखा कि कैसे वह उस रात्रि, प्रभु यीशु के पकड़वाए जाने के पहले के अंतिम भोज के समय, प्रभु के बहुत निकट बैठा था: “उसके चेलों में से एक जिस से यीशु प्रेम रखता था, यीशु की छाती की ओर झुका हुआ बैठा था” (यूहन्ना 13:23)।

      यूहन्ना ने अपने लिए “[चेला] जिस से यीशु प्रेम करता था” शब्दों का प्रयोग किया। वह उस समय के इस्राएल के भोज की विधि को भी बताता है, जब भोज की मेज़ हमारी आज की मेज़ से बहुत नीची होती थी, लगभग घुटनों तक की ऊँचाई की। उस मेज़ के चारों ओर लोग चट्टाइयों अथवा गद्दियों पर बैठते थे। यूहन्ना प्रभु यीशु के इतने समीप बैठा था कि उसके लिए कहा गया है कि “तब उसने उसी तरह यीशु की छाती की ओर झुक कर पूछा” (यूहन्ना 13:25)।

      यूहन्ना की उस समय की प्रभु यीशु के साथ की निकटता आज हमारे जीवनों में सहायता के लिए एक उदाहरण प्रदान करती है। आज चाहे हम प्रभु यीशु को सशरीर स्पर्श नहीं कर सकते हैं, परन्तु हम निःसंकोच उस पर अपने जीवन की सबसे भारी समस्या भी रख सकते हैं, हर बात के लिए उसकी सहायता और उसका सहारा ले सकते हैं। प्रभु यीशु ने कहा, “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” (मत्ती 11:28)।

      हम मसीही विश्वासी कितने धन्य हैं कि हमारा ऐसा मुक्तिदाता है जो हमारे जीवनों की प्रत्येक परिस्थिति में हमारे प्रति भरोसेमंद बना रहता है! क्या आपने प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन का सहारा बना लिया है? – जेम्स बैंक्स


हमारी प्रत्येक आवश्यकता और शान्ति के लिए प्रभु यीशु पर्याप्त है।

क्योंकि मैं ने थके हुए लोगों का प्राण तृप्त किया, और उदास लोगों के प्राण को भर दिया है। - यिर्मयाह 31:25

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:12-26
John 13:12 जब वह उन के पांव धो चुका और अपने कपड़े पहनकर फिर बैठ गया तो उन से कहने लगा, क्या तुम समझे कि मैं ने तुम्हारे साथ क्या किया?
John 13:13 तुम मुझे गुरू, और प्रभु, कहते हो, और भला कहते हो, क्योंकि मैं वही हूं।
John 13:14 यदि मैं ने प्रभु और गुरू हो कर तुम्हारे पांव धोए; तो तुम्हें भी एक दुसरे के पांव धोना चाहिए।
John 13:15 क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।
John 13:16 मैं तुम से सच सच कहता हूं, दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं; और न भेजा हुआ अपने भेजने वाले से।
John 13:17 तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्य हो।
John 13:18 मैं तुम सब के विषय में नहीं कहता: जिन्हें मैं ने चुन लिया है, उन्हें मैं जानता हूं: परन्तु यह इसलिये है, कि पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हो, कि जो मेरी रोटी खाता है, उसने मुझ पर लात उठाई।
John 13:19 अब मैं उसके होने से पहिले तुम्हें जताए देता हूं कि जब हो जाए तो तुम विश्वास करो कि मैं वहीं हूं।
John 13:20 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मेरे भेजे हुए को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है।
John 13:21 ये बातें कहकर यीशु आत्मा में व्याकुल हुआ और यह गवाही दी, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।
John 13:22 चेले यह संदेह करते हुए, कि वह किस के विषय में कहता है, एक दूसरे की ओर देखने लगे।
John 13:23 उसके चेलों में से एक जिस से यीशु प्रेम रखता था, यीशु की छाती की ओर झुका हुआ बैठा था।
John 13:24 तब शमौन पतरस ने उस की ओर सैन कर के पूछा, कि बता तो, वह किस के विषय में कहता है
John 13:25 तब उसने उसी तरह यीशु की छाती की ओर झुक कर पूछा, हे प्रभु, वह कौन है? यीशु ने उत्तर दिया, जिसे मैं यह रोटी का टुकड़ा डुबोकर दूंगा, वही है।
John 13:26 और उसने टुकड़ा डुबोकर शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती को दिया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46



शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

सहायक



      जून 1962 में फ्लोरिडा की एक जेल की कोठरी से, क्लैरेंस अर्ल गिडियन ने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय को दरख्वास्त लिखी कि उसके दण्ड पर पुनःविचार किया जाए क्योंकि उसने अपराध किया ही नहीं था। उसने यह भी लिखा कि उसके पास उसका मुकद्दमा लड़ने के लिए वकील करने के लिए पैसे नहीं हैं।

      एक वर्ष पश्चात, ऐतिहासिक गिडियन बनाम वेनराईट मुकद्दमे में, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि जो लोग अपने बचाव के लिए वकील कर सकने की आर्थिक स्थिति में नहीं हैं उन्हें सरकार द्वारा वकील दिया जाना चाहिए। इस निर्णय के साथ, और सरकार द्वारा प्रदान किए गए वकील की सहायता से, क्लैरेंस अर्ल गिडियन के मुकद्दमे को पुनः लड़ा गया और वह बरी हो गया।

      परन्तु यदि हम निर्दोष नहीं हों तो क्या? परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा कि सभी मनुष्य पाप के दोषी हैं; पाप से निर्दोष कोई भी नहीं है। परन्तु स्वर्ग का न्यायालय हमारे लिए एक सहायक प्रदान करता है, जो परमेश्वर द्वारा चुकाई गई कीमत पर हमारी आत्मा को बचाने के लिए कार्य करता है (1 यूहन्ना 2:2)। हमारे स्वर्गीय पिता परमेश्वर की ओर से प्रभु यीशु हमारी सहायता के लिए आता है और एक ऐसी अद्भुत स्वतंत्रता का प्रस्ताव देता है जो पृथ्वी पर कहीं उपलब्ध नहीं है – हृदय और मन की स्वतंत्रता।

      चाहे हम हमारे प्रति, या, हमारे द्वारा किए गए अन्यायों के कारण दुःख उठा रहे हों, प्रभु यीशु मसीह हम सभी की सहायता करने को तैयार है। सर्वोच्च अधिकार के अन्तर्गत वह दया, क्षमा और शान्ति के प्रत्येक निवेदन का उत्तर देता है।

      हमारा सहायक प्रभु यीशु खोई हुई आशा, भय, या पछतावे की कैद को अपनी उपस्थिति तथा आनन्द का स्थान बना सकता है। - मार्ट डीहान


जो हमारे स्थान पर बलिदान हुआ था, वही अब हमारा सहायक बनकर जीवित है।

फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। - रोमियों 8:34

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:5-2:2
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं।
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते।
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं।
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।
1 John 2:1 हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह।
1 John 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30



शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

मित्र



      मेरी एक प्रिय सहेली ने मुझे एक सन्देश भेजा और कहा, “मैं बहुत आनन्दित हूँ कि हम एक-दूसरे के साथ अपने जीवन की भली, बुरी, और कटु बातें बाँट सकते हैं।” हम दोनों कई वर्षों से सहेलियाँ रहे हैं, और हमने परस्पर अपने आनन्द और असफलताओं को साझा किया है। हम जानते हैं कि हम सिद्ध नहीं हैं, इसलिए हम अपने संघर्षों को भी बाँटते हैं और एक दूसरे की सफलताओं में आनन्दित भी होते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र, दाऊद और योनातान भी बहुत अच्छे मित्र थे; उनकी मित्रता का आरंभ गोलियत पर दाऊद की विजय के साथ हुआ (1 शमूएल 18:1-4)। उन दोनों ने योनातान के पिता, राजा शाउल, के दाऊद के प्रति द्वेष रखने (18:6-11; 20:1-2) और दाऊद को मार डालने के शाउल के षड़यंत्रों और प्रयासों के बुरे और भयावह दिनों के अनुभव भी साझा किए (20:42)।

      परिस्थितियों के बदल जाने पर अच्छे मित्र एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ देते हैं। वे एक-दूसरे साथ भले और बुरे दोनों समयों में बने रहते हैं। अच्छे मित्र, उन बुरे दिनों में जब हम प्रभु से दूर चले जाने के प्रलोभनों या परिक्षा में पड़ रहे हों, तब हमें फिर से परमेश्वर की ओर मोड़ने में भी सहायक होते हैं।

      सच्ची मित्रता परमेश्वर का उपहार है क्योंकि वह सदा हमारे साथ बने रहने वाले हमारे उस सिद्ध मित्र – प्रभु यीशु, के जैसे व्यवहार का उदाहरण होते हैं; उस प्रभु का जिसने हम से प्रतिज्ञा की है कि वह न तो हमें कभी छोड़ेगा और न ही कभी त्यागेगा (इब्रानियों 13:5)। - कीला ओकोआ


सच्चा मित्र वह पहला व्यक्ति होता है 
जो तब हमारे पास आता है 
जब अन्य सभी छोड़ के चले जाते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 20:35-42
1 Samuel 20:35 बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिये हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया।
1 Samuel 20:36 तब उसने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ ले आ। छोकरा दौड़ता ही था, कि उसने एक तीर उसके परे चलाया।
1 Samuel 20:37 जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है।
1 Samuel 20:38 फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकारकर कहा, “बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत!” और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ले आया।
1 Samuel 20:39 इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था; केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे।
1 Samuel 20:40 और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा।
1 Samuel 20:41 ज्योंही छोकरा चला गया, त्योंही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिरके तीन बार दण्डवत की; तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद को रोना अधिक था।
1 Samuel 20:42 तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठ कर चला गया; और योनातन नगर में गया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51



गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

आनन्द



      एक युवा जापानी महिला द्वारा व्यवस्थित एवँ सुनियोजित होने पर लिखी गई पुस्तक की सँसार भर में बीस लाख से भी अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। उस महिला का मुख्य सन्देश लोगों को अपने घरों और अलमारियों में से अनावश्यक वस्तुओं – वे वस्तुएँ जो उनके लिए बोझ हैं, को निकाल बाहर करने में सहायक हो रहा है। उसका कहना है कि “उस वस्तु को उठाओ, और अपने आप से पूछो कि ‘क्या इससे मुझे आनन्द मिलता है?’ यदि उत्तर हाँ है तो उसे रखे रहो अन्यथा उसे किसी और को दे दो।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को उभारा कि प्रभु यीशु मसीह के साथ अपने संबंधों में वे आनन्द के खोजी रहें, “प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो” (फिलिप्पियों 4:4)। उसने उन से कहा कि चिंता से अव्यवस्थित जीवन जीने के स्थान पर, वे प्रत्येक बात को धन्यवाद के साथ प्रार्थना में प्रभु के हाथों में समर्पित कर दें, और परमेश्वर की शान्ति उनके हृदय एवँ विचारों को संभाले रहेगी (पद 6-7)।

      जब हम अपनी दिनचर्या के कार्यों तथा दायित्वों को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि उनमें से सभी हमारे लिए आनन्दायक नहीं होते हैं। परन्तु हम अपने आप से प्रश्न कर सकते हैं, “इसके द्वारा कैसे मेरे तथा परमेश्वर के हृदय में आनंद लाया जा सकता है?” उस कार्य को करने के कारण को लेकर हमारे दृष्टिकोण में लाए गए परिवर्तन के द्वारा हम उसके प्रति अपनी भावनाओं को भी परिवर्तित कर सकते हैं। इसीलिए पौलुस आगे कहता है कि “निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो” (पद 8)।

      पौलुस के ये शब्द हमारे विचार करने के लिए महत्वपूर्ण, और हमें आनन्द देने के लिए उपयुक्त हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु पर केंद्रित रहना आनन्दित रहने का आरंभ है।

...क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-9
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो।
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28



बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

चरित्र और भरोसा



      एक साक्षात्कार में, गायिका और गीत लेखिका मेरिडिथ एन्ड्रयूस ने बताया कि कभी-कभी वह परमेश्वर के प्रचार कार्यों, अपनी रचनात्मक गतिविधियों, पारिवारिक परिस्थितियों और समस्याओं, और मातृत्व की जिम्मेदारियों में तालमेल बैठाने के प्रयासों में अभिभूतित अनुभव करती हैं। अपनी इस कठिनाई पर विचार करके बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि परमेश्वर मुझे एक स्वच्छ और शुद्ध करने वाली प्रक्रिया से होकर ले चल रहा है, जिसमें अन्दर से व्यर्थ को बाहर निकालने के लिए कुचल दिया जाना भी सम्मिलित है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, अय्यूब, अचानक ही अपने सम्पूर्ण परिवार, स्वास्थ्य और संपदा की हानि उठने के बाद अभुभूतित था। इससे भी बुरी बात यह थी कि यद्यपि अय्यूब परमेश्वर की नियमित उपासना और आराधना करने वाला व्यक्ति था, उसे लगा कि इस कठिन समय में परमेश्वर उसकी सहायता की पुकार को अनसुनी कर रहा है। उसके जीवन के परिदृश्य से उसे परमेश्वर अनुपस्थित दिखाई दे रहा था। अय्यूब ने दावा किया कि वह चाहे किसी भी दिशा में देखे, उसे परमेश्वर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था (अय्यूब 23:2-9)।

      इस घोर निराशा में, अय्यूब को स्पष्टता का एक पल भी मिला। एक अँधेरे कमरे में जलती मोमबत्ती के समान, उसका विश्वास टिमटिमाया; उसने कहा, “परन्तु वह [परमेश्वर]जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा” (पद 10)। परमेश्वर हम मसीहियों को परखने के द्वारा शुद्ध और निर्मल करता है; कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के द्वारा परमेश्वर हमारे आत्मनिर्भर होने, घमण्ड, और सांसारिक बुद्धिमत्ता को निकाल बाहर करता है। यदि ऐसा लगे कि इस प्रक्रिया से निकलते समय वह सहायता के लिए हमारी पुकार का कोई उत्तर नहीं दे रहा है, तो वह इसलिए हो सकता है कि वह हमें विश्वास में दृढ़ और परिपक्व होने का अवसर प्रदान कर रहा है, हमें हमारी अपनी क्षमता और सामर्थ्य पर निर्भर होने की व्यर्थता का आभास करवा रहा है।

      दुखों और समस्याओं से रगड़े जा कर हम एक ऐसे चमकते हुए चरित्र के साथ विकसित होते है जो परमेश्वर पर हर परिस्थिति में हर बात के लिए भरोसा बनाए रखता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


विश्वास को परखने वाले समय विश्वास को दृढ़ करने के माध्यम भी हो सकते हैं।

क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा; तू ने हमें चान्दी के समान ताया था। - भजन 66:10

बाइबल पाठ: अय्यूब 23:1-12
Job 23:1 तब अय्यूब ने कहा,
Job 23:2 मेरी कुड़कुड़ाहट अब भी नहीं रुक सकती, मेरी मार मेरे कराहने से भारी है।
Job 23:3 भला होता, कि मैं जानता कि वह कहां मिल सकता है, तब मैं उसके विराजने के स्थान तक जा सकता!
Job 23:4 मैं उसके साम्हने अपना मुक़द्दमा पेश करता, और बहुत से प्रमाण देता।
Job 23:5 मैं जान लेता कि वह मुझ से उत्तर में क्या कह सकता है, और जो कुछ वह मुझ से कहता वह मैं समझ लेता।
Job 23:6 क्या वह अपना बड़ा बल दिखा कर मुझ से मुक़द्दमा लड़ता? नहीं, वह मुझ पर ध्यान देता।
Job 23:7 सज्जन उस से विवाद कर सकते, और इस रीति मैं अपने न्यायी के हाथ से सदा के लिये छूट जाता।
Job 23:8 देखो, मैं आगे जाता हूँ परन्तु वह नहीं मिलता; मैं पीछे हटता हूँ, परन्तु वह दिखाई नहीं पड़ता;
Job 23:9 जब वह बाईं ओर काम करता है तब वह मुझे दिखाई नहीं देता; वह तो दाहिनी ओर ऐसा छिप जाता है, कि मुझे वह दिखाई ही नहीं पड़ता।
Job 23:10 परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा।
Job 23:11 मेरे पैर उसके मार्गों में स्थिर रहे; और मैं उसी का मार्ग बिना मुड़े थामे रहा।
Job 23:12 उसकी आज्ञा का पालन करने से मैं न हटा, और मैं ने उसके वचन अपनी इच्छा से कहीं अधिक काम के जान कर सुरक्षित रखे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 39-40
  • मत्ती 23:23-39



मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

धन्यवादी



      मैंने आज मैदान में एक फूल को खिले हुए देखा, एक अकेला छोटा सा बैंगनी फूल, कवि थॉमस ग्रे की अद्भुत पंक्ति के अनुसार, “अपनी मनोहरता को रेगिस्तान में व्यर्थ करते हुए।” मैं निश्चित हूँ कि मुझ से पहले किसी ने भी इस फूल को नहीं देखा होगा, और संभवतः कोई और देखेगा भी नहीं। मैं सोचने लगा, इस एकांत स्थान में, ऐसी भव्य सुन्दरता भला क्यों?

      प्रकृति कभी व्यर्थ नहीं जाती है। प्रतिदिन प्रकृति अपने रचनाकार की सच्चाई, भलाई, और सुंदरता को प्रदर्शित करती है, जैसे परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने व्यक्त किया है: “आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है” (भजन 19:1)। प्रतिदिन प्रकृति परमेश्वर की महिमा का नया बखान करती है। क्या मैं प्रकृति की उस गवाही में परमेश्वर की वह महिमा देखने पाता हूँ, या मैं उसकी गवाही को एक सरसरी नज़र के साथ नज़रंदाज़ कर देता हूँ?

      समस्त प्रकृति अपनी रचना करने वाले की सुन्दरता को दिखाती है। ऐसे में हमारा प्रत्युत्तर आराधना, प्रशंसा, और धन्यवाद हो सकता है – सूरजमुखी के फूल की चमक के लिए, सूर्योदय की भव्यता के लिए, और किसी भी वृक्ष या अन्य किसी के भी स्वरूप के लिए।

      लेखक सी. एस. ल्यूइस ने अपने एक मित्र के साथ गर्मी के एक दिन टहलने जाने के बारे में लिखा। उसने अपने मित्र से पूछा कि परमेश्वर के प्रति एक धन्यवादी हृदय कैसे विक्सित किया जाए। उनका मित्र पास बह रहे एक नाले पर गया, वहाँ एक छोटे से झरने से पानी लेकर अपने चहरे और हाथों पर डाला, और कहा, “क्यों न इससे ही आरंभ करो?” ल्यूइस ने कहा कि उस पल में उन्होंने एक महान सिद्धान्त सीखा: “जहाँ और जैसे भी हैं, वहीं और उसी के लिए परमेश्वर का धन्यवादी बनें।”

      एक छोटा सा झरना, पेड़ों में बहती हवा की मधुर ध्वनि, एक छोटा पक्षी, आपके आस-पास की कोई भी बात – क्यों न परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होने की यात्रा का आरंभ इन्हीं से किया जाए! – डेविड रोपर


समस्त सुन्दरता की पृष्ठभूमी में परमेश्वर ही है। - स्टीव डिविट

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: भजन 136:1-9
Psalms 136:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:2 जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:3 जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:4 उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:5 उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:6 उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:7 उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:8 दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:9 और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 36-38
  • मत्ती 23:1-22