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गुरुवार, 4 अप्रैल 2019

वचन



      मध्य-बीसवीं सदी के एक कर्मठ और सक्रीय मसीही अगुवे तथा द नेविगेटर्स के संस्थापक, डॉसन ट्रोटमैन, ने प्रत्येक मसीही के जीवन में बाइबल अध्ययन के महत्व पर ज़ोर दिया। ट्रोटमैन अपने दिन की समाप्ति नियमित रीति से एक अभ्यास – जिसे वे “उसका वचन अंतिम बात” कहते थे, के साथ करते थे। सोने से पहले वे किसी एक कंठस्थ पद या परिच्छेद पर मनन करते थे, और फिर अपने जीवन में उसके स्थान तथा उपयोगिता के विषय प्रार्थना करते थे। उनका उद्देश्य था कि परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग सोते समय उनका अंतिम विचार बने।

      भजनकार दाऊद ने लिखा, “जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा; क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा” (भजन 63:6-7)। हम चाहे किसी कठिन परिस्थिति में हों या शान्ति के समय का आनन्द ले रहे हों, सोते समय हमारे अंतिम विचार, उस आराम और सुख के साथ जो परमेश्वर हमें देता है, हमारे मनों को शान्त कर सकते हैं, और आने वाली प्रातः के लिए हमारे प्रथम विचार का विषय भी निर्धारित कर सकते हैं।

      मेरे एक मित्र और उनकी पत्नि अपने दिन की समाप्ति अपने चार बच्चों के साथ बाइबल का एक खण्ड और दैनिक मनन का पाठ पढ़ने के साथ करते हैं। वे अपने प्रत्येक बच्चे द्वारा उस खण्ड और मनन पाठ से संबंधित उठाए गए प्रश्नों और विचारों का स्वागत करते हैं, और स्कूल में तथा घर में प्रभु यीशु की पीछे चलने के अभिप्राय पर चर्चा करते हैं। वे इस अभ्यास को उनका “उसका वचन अंतिम बात” कहते हैं।

      परमेश्वर के वचन पर मनन के साथ दिन का आरंभ और अन्त करने से उत्तम और कोई बात नहीं है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जब हम परमेश्वर के वचन को पढ़ते हैं तब परमेश्वर का आत्मा हमारे मनों को स्वच्छ बनाता है।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: भजन 63:1-11
Psalms 63:1 हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है।
Psalms 63:2 इस प्रकार से मैं ने पवित्रास्थान में तुझ पर दृष्टि की, कि तेरी सामर्थ्य और महिमा को देखूं।
Psalms 63:3 क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा।
Psalms 63:4 इसी प्रकार मैं जीवन भर तुझे धन्य कहता रहूंगा; और तेरा नाम ले कर अपने हाथ उठाऊंगा।
Psalms 63:5 मेरा जीव मानो चर्बी और चिकने भोजन से तृप्त होगा, और मैं जयजयकार कर के तेरी स्तुति करूंगा।
Psalms 63:6 जब मैं बिछौने पर पड़ा तेरा स्मरण करूंगा, तब रात के एक एक पहर में तुझ पर ध्यान करूंगा;
Psalms 63:7 क्योंकि तू मेरा सहायक बना है, इसलिये मैं तेरे पंखों की छाया में जयजयकार करूंगा।
Psalms 63:8 मेरा मन तेरे पीछे पीछे लगा चलता है; और मुझे तो तू अपने दाहिने हाथ से थाम रखता है।
Psalms 63:9 परन्तु जो मेरे प्राण के खोजी हैं, वे पृथ्वी के नीचे स्थानों में जा पड़ेंगे;
Psalms 63:10 वे तलवार से मारे जाएंगे, और गीदड़ों का आहार हो जाएंगे।
Psalms 63:11 परन्तु राजा परमेश्वर के कारण आनन्दित होगा; जो कोई ईश्वर की शपथ खाए, वह बड़ाई करने पाएगा; परन्तु झूठ बोलने वालों का मुंह बन्द किया जाएगा।

एक साल में बाइबल:  
  • रूत 1-4
  • लूका 8:1-25



बुधवार, 3 अप्रैल 2019

साथ



      अपोलो 15 के अंतरिक्षयात्री एल वॉर्डन को चन्द्रमा की पिछली ओर रहकर अकेले होने का अनुभव था। जब 1971 में उनके दो साथी, हज़ारों मील दूर, चन्द्रमा की सतह पर कार्य कर रहे थे तो एल अकेले ही तीन दिन तक उनके अंतरिक्ष यान को चला रहे थे। उस समय में उनका साथ केवल अंतरिक्ष में स्थित सितारे ही दे रहे थे, और एल को वे इतने घने लगे मानों उन सितारों ने उन्हें रौशनी की एक चादर में लपेट लिया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल का एक प्रमुख पात्र, याकूब, भी बिलकुल अकेले रात बिता रहा था, परन्तु एक भिन्न कारण से। वह अपने बड़े भाई एसव से जान बचा कर भाग रहा था, क्योंकि पहलौठे के लिए निर्धारित आशीषों को याकूब ने अपने लगभग अंधे हो चुके पिता से, धोखे से चुरा लिया था और एसव के स्थान पर स्वयं के लिए ले लिया था। लेकिन सो जाने के पश्चात, याकूब ने पृथ्वी से स्वर्ग तक जाने वाली सीढ़ी का दर्शन देखा। उसने उस सीढ़ी पर स्वर्गदूतों को चढ़ते-उतारते देखा और उससे परमेश्वर ने बात की। परमेश्वर ने याकूब को आश्वस्त किया कि वह सदा उसके साथ रहेगा और उसके वंशजों के द्वारा समस्त पृथ्वी को आशीषित करेगा। जब याकूब नींद से उठा तो उसने कहा, “निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था” (उत्पत्ति 28:16)।

      याकूब ने अपने आप को अपने धोखे के कारण अकेला कर लिया था। किन्तु उसके अकेलेपन की उस अंधेरी रात में भी परमेश्वर उसके साथ था, और परमेश्वर की मनुष्यों की योजनाओं से बहुत अधिक बेहतर और भलाई की दूरगामी योजनाएं उसके साथ थीं। प्रभु यीशु मसीह में होकर आज स्वर्ग हमारे लिए बहुत निकट है, और “याकूब का परमेश्वर” हमारे साथ रहता है। - मार्ट डीहॉन


परमेश्वर हमारे सोचने से अधिक निकट है।

यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है। - भजन 34:18

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 28:10-17
Genesis 28:10 सो याकूब बेर्शेबा से निकल कर हारान की ओर चला।
Genesis 28:11 और उसने किसी स्थान में पहुंच कर रात वहीं बिताने का विचार किया, क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था; सो उसने उस स्थान के पत्थरों में से एक पत्थर ले अपना तकिया बना कर रखा, और उसी स्थान में सो गया।
Genesis 28:12 तब उसने स्वप्न में क्या देखा, कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुंचा है: और परमेश्वर के दूत उस पर से चढ़ते उतरते हैं।
Genesis 28:13 और यहोवा उसके ऊपर खड़ा हो कर कहता है, कि मैं यहोवा, तेरे दादा इब्राहीम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूं: जिस भूमि पर तू पड़ा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूंगा।
Genesis 28:14 और तेरा वंश भूमि की धूल के किनकों के समान बहुत होगा, और पच्छिम, पूरब, उत्तर, दक्खिन, चारों ओर फैलता जाएगा: और तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएंगे।
Genesis 28:15 और सुन, मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊंगा: मैं अपने कहे हुए को जब तक पूरा न कर लूं तब तक तुझ को न छोडूंगा।
Genesis 28:16 तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था।
Genesis 28:17 और भय खा कर उसने कहा, यह स्थान क्या ही भयानक है! यह तो परमेश्वर के भवन को छोड़ और कुछ नहीं हो सकता; वरन यह स्वर्ग का फाटक ही होगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 14-15
  • लूका 22:21-46



सहानुभूति



      हम सात लोग एक स्थान पर संगीत उत्सव देखने गए जिसके लिए बहुत से लोगों की भीड़ आई हुई थी। हम सभी एक साथ बैठना चाह रहे थे, इसलिए हम बैठने के स्थान की एक ही पंक्ति की ओर जाने लगे, कि इतने में एक महिला अपने दो साथियों को लिए हुए हम लोगों के बीच में से घुसकर उस स्थान पर आगे को आ गई और जहाँ हम बैठने जा रहे थे वहाँ बैठ गई। मेरी पत्नी ने उससे कहा कि हम सब एक साथ हैं और साथ बैठना चाह रहे हैं परन्तु उसने वह स्थान नहीं छोड़ा और हम लोगों को तीन और चार के गुट में होकर आगे पीछे की पंक्तियों में होकर बैठना पड़ा।

      हम तीन जन पीछे वाली पंक्ति में बैठे हुए थे कि मेरी पत्नि सू ने ध्यान किया कि उस महिला के एक साथी के साथ कुछ दिक्कत थी और उसे विशेष ध्यान की आवश्यकता थी। तब हमें आभास हुआ कि उस महिला का भी प्रयास था कि वह अपने साथियों के साथ इकट्ठे बैठ सके जिससे उसके साथी की देखभाल होती रहे। यह आभास होते ही उस महिला के प्रति हमारी चिढ़चिढ़ाहट शान्त हो गई। सू ने कहा, “ज़रा सोचो, ऐसी भीड़ भरे स्थानों में उसे कितनी कठिनाई होती होगी।” अवश्य ही उस महिला ने रूखेपन से व्यवहार किया था परन्तु हम उसके प्रति क्रोधित होने के स्थान पर, सहानुभूति से प्रत्युत्तर दे सकते थे।

      हम जहाँ भी जाएँगे, हमें ऐसे लोग मिलेंगे जिन्हें सहानुभूति की आवश्यकता है। हो सकता है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित द्वारा लिखे गए ये वचन हमें अपने चारों ओर के लोगों के प्रति एक भिन्न दृष्टिकोण – सहानुभूति का दृष्टिकोण रखने में सहायता करें: “इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो” (कुलुस्सियों 3:12-13)।

      जब हम सहानुभूति दिखाते हैं, तब हम लोगों को प्रभु यीशु की ओर देखने का संकेत देते हैं जिसने अपना अनुग्रह और सहानुभूति भरा हृदय हमारे लिए उंडेल दिया। - डेव ब्रैनन


औरों की परेशानियों को समझकर उनके सहायक होना ही सहानुभूति है।

पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? - 1 यूहन्ना 3:17

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 19-21
  • लूका 7:31-50



मंगलवार, 2 अप्रैल 2019

स्पर्ष



      काएली ने पूर्वी अफ्रीका के एक भीतरी इलाके में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए जा रहे अभियान में सम्मिलित होने के अवसर को तुरंत सहर्ष स्वीकार तो कर लिया, किन्तु उसे कुछ बेचैनी भी थी। उसे कोई भी चिकित्सा संबंधित अनुभव नहीं था; वह केवल बुनियादी देखभाल ही प्रदान कर सकती थी।

      उस अभियान के समय वह एक महिला के संपर्क में आई जिसे भयंकर किन्तु साध्य रोग था। उस रोग के कारण उस महिला की ख़राब टांग को देखकर काएली को घृणा तो हुई, परन्तु उसे इस बात का भी एहसास था कि उसके लिए कुछ करना तो पड़ेगा। जब वह उस महिला की टांग की मरहम-पट्टी करने लगी, तो वह महिला रोने लगी। चिन्तित होकर काएली ने पूछा कि क्या उसके कार्य से पीड़ा हो रही है, तो महिला ने उत्तर दिया, “नहीं; लेकिन यह पहली बार हुआ है कि नौ वर्ष में किसी ने मुझे छुआ है।”

      कोढ़ एक ऐसी बीमारी है जिसके रोगियों को देखकर लोगों को घृणा आती है, और प्राचीन यहूदी संस्कृति में कोढ़ को फैलने से रोकने के लिए कोढियों से संबंधित कुछ कठोर नियम लागू किए गए थे। उन्हें छावनी या निवास-स्थलों के बाहर अकेले रहना होता था (लैव्यवस्था 13:46)।

      इसीलिए यह इतना असाधारण है कि एक कोढ़ी ने प्रभु यीशु के पास आकर उससे कहा, “हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है” (मत्ती 8:2)। और प्रत्युत्तर में प्रभु यीशु ने उससे कहा “मैं चाहता हूं, तू शुद्ध हो जा और वह तुरन्त कोढ़ से शुद्ध हो गया” (मत्ती 8:3)।

      एक कोढ़ी महिला की रोग-ग्रस्त टांग को छूने के द्वारा काएली ने प्रभु यीशु के उस साहसी, साथ लेकर चलने वाले प्रेम का व्यावहारिक प्रगटीकरण किया। एक स्पर्ष अन्तर ला सकता है। - टिम गुस्ताफ्सन


यदि हम परमेश्वर पर भरोसा रखकर उसे अनुमति दें कि वह हमें प्रयोग करे, 
तो हम कितना अन्तर ला सकते हैं।

और चलते चलते प्रचार कर कहो कि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है। बीमारों को चंगा करो: मरे हुओं को जिलाओ: कोढिय़ों को शुद्ध करो: दुष्टात्माओं को निकालो: तुम ने सेंतमेंत पाया है, सेंतमेंत दो। - मत्ती 10:7-8

बाइबल पाठ: मत्ती 8:1-4
Matthew 8:1 जब वह उस पहाड़ से उतरा, तो एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली।
Matthew 8:2 और देखो, एक कोढ़ी ने पास आकर उसे प्रणाम किया और कहा; कि हे प्रभु यदि तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।
Matthew 8:3 यीशु ने हाथ बढ़ाकर उसे छूआ, और कहा, मैं चाहता हूं, तू शुद्ध हो जा और वह तुरन्त कोढ़ से शुद्ध हो गया।
Matthew 8:4 यीशु ने उस से कहा; देख, किसी से न कहना परन्तु जा कर अपने आप को याजक को दिखला और जो चढ़ावा मूसा ने ठहराया है उसे चढ़ा, ताकि उन के लिये गवाही हो।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 12-13
  • लूका 22:1-20



कार्य



      मेरे बेटी ने अपनी एक सहेली को, शीघ्र ही अपने प्रश्न का उत्तर पाने की आशा से, अपने मोबाइल फोन से टेक्सट सन्देश भेजा। उसके फोन पर जानकारी आ गई कि उसकी सहेली ने उसका सन्देश पढ़ लिया है, इसलिए वह उत्सुकता से उत्तर की प्रतीक्षा करने लगी। कुछ ही पल बीते थे कि वह बेचैन होने लगी, फिर उत्तर आने में हो रहे विलम्ब के कारण वह चिढ़ने लगी, मुँह से कराहने की आवाजें निकालने लगी। और थोड़ी देर में उसका चिढ़ना चिन्ता में परिवर्तित हो गया, उसे लगने लगा कि कहीं उत्तर आने में विलम्ब का कारण यह तो नहीं है कि उनके बीच में कुछ समस्या उत्पन्न हो रही है। थोड़े समय पश्चात उत्तर आ गया, और मेरी बेटी निश्चिंत हुई कि उनका संबंध ठीक था। उसकी सहेली प्रश्न के उत्तर से संबंधित बातों के विवरण खोज कर भेजने से पहले उन्हें व्यवस्थित कर रही थी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में  दानिय्येल नबी भी अपनी प्रार्थना के उत्तर पाने के लिए व्याकुल था। दानिय्येल ने एक बड़ी लड़ाई का डरावना दर्शन देखा था, और उसने उपवास और प्रार्थना के साथ परमेश्वर से उसके विषय पूछा था (10:3, 12)। तीन सप्ताह तक उसके पास कोई उत्तर नहीं पहुँचा (पद 2, 13)। अन्ततः एक स्वर्गदूत आया और उसने दानिय्येल को आश्वस्त किया कि उसकी प्रार्थनाएं “उसी दिन” सुन ली गईं थीं। किन्तु उन प्रार्थनाओं का उत्तर दानिय्येल तक लाने में शैतान बाधा डाल रहा था, और स्वर्गदूत को शैतान से संघर्ष करना पड़ा था। चाहे दानिय्येल को यह पता नहीं था, किन्तु दानिय्येल के प्रार्थना करने से उत्तर उस तक पहुँचने के मध्य के उन तीन सप्ताह में भी परमेश्वर अपना कार्य कर रहा था।

      यह भरोसा कि परमेश्वर हमारी प्रार्थनाएं सुनता है, हमें कभी-कभी विचलित कर सकता है जब हमें अपनी प्रार्थनाओं के अपेक्षानुसार उत्तर नहीं मिलते हैं। हम यह सोचने लगते हैं कि उसे हमारी परवाह है भी कि नहीं। परन्तु दानिय्येल का अनुभव हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर उनके पक्ष में जिन से वह प्रेम करता है, अपना कार्य करता रहता है, चाहे यह हम पर प्रगट न भी हो। - कर्स्टेन होम्बर्ग


परमेश्वर अपने लोगों के लिए सदैव कार्य करता रहता है।

जैसे तू वायु के चलने का मार्ग नहीं जानता और किस रीति से गर्भवती के पेट में हड्डियां बढ़ती हैं, वैसे ही तू परमेश्वर का काम नहीं जानता जो सब कुछ करता है। - सभोपदेशक 11:5

बाइबल पाठ: दानिय्येल 10:1-14
Daniel 10:1 फारस देश के राजा कुस्रू के राज्य के तीसरे वर्ष में दानिय्येल पर, जो बेलतशस्सर भी कहलाता है, एक बात प्रगट की गई। और वह बात सच थी कि बड़ा युद्ध होगा। उसने इस बात को बूझ लिया, और उसको इस देखी हुई बात की समझ आ गई।
Daniel 10:2 उन दिनों मैं, दानिय्येल, तीन सप्ताह तक शोक करता रहा।
Daniel 10:3 उन तीन सप्ताहों के पूरे होने तक, मैं ने न तो स्वादिष्ट भोजन किया और न मांस वा दाखमधु अपने मुंह में रखा, और न अपनी देह में कुछ भी तेल लगाया।
Daniel 10:4 फिर पहिले महिने के चौबीसवें दिन को जब मैं हिद्देकेल नाम नदी के तीर पर था,
Daniel 10:5 तब मैं ने आंखें उठा कर देखा, कि सन का वस्त्र पहिने हुए, और ऊफाज देश के कुन्दन से कमर बान्धे हुए एक पुरूष खड़ा है।
Daniel 10:6 उसका शरीर फीरोजा के समान, उसका मुख बिजली के समान, उसकी आंखें जलते हुए दीपक की सी, उसकी बाहें और पांव चमकाए हुए पीतल के से, और उसके वचनों के शब्द भीड़ों के शब्द का सा था।
Daniel 10:7 उसको केवल मुझ दानिय्येल ही ने देखा, और मेरे संगी मनुष्यों को उसका कुछ भी दर्शन न हुआ; परन्तु वे बहुत ही थरथराने लगे, और छिपने के लिये भाग गए।
Daniel 10:8 तब मैं अकेला रहकर यह अद्‌भुत दर्शन देखता रहा, इस से मेरा बल जाता रहा; मैं भयातुर हो गया, और मुझ में कुछ भी बल न रहा।
Daniel 10:9 तौभी मैं ने उस पुरूष के वचनों का शब्द सुना, और जब वह मुझे सुन पड़ा तब मैं मुंह के बल गिर गया और गहरी नींद में भूमि पर औंधे मुंह पड़ा रहा।
Daniel 10:10 फिर किसी ने अपने हाथ से मेरी देह को छुआ, और मुझे उठा कर घुटनों और हथेलियों के बल थरथराते हुए बैठा दिया।
Daniel 10:11 तब उसने मुझ से कहा, हे दानिय्येल, हे अति प्रिय पुरूष, जो वचन मैं तुझ से कहता हूं उसे समझ ले, और सीधा खड़ा हो, क्योंकि मैं अभी तेरे पास भेजा गया हूं। जब उसने मुझ से यह वचन कहा, तब मैं खड़ा तो हो गया परन्तु थरथराता रहा।
Daniel 10:12 फिर उसने मुझ से कहा, हे दानिय्येल, मत डर, क्योंकि पहिले ही दिन को जब तू ने समझने-बूझने के लिये मन लगाया और अपने परमेश्वर के साम्हने अपने को दीन किया, उसी दिन तेरे वचन सुने गए, और मैं तेरे वचनों के कारण आ गया हूं।
Daniel 10:13 फारस के राज्य का प्रधान इक्कीस दिन तक मेरा साम्हना किए रहा; परन्तु मीकाएल जो मुख्य प्रधानों में से है, वह मेरी सहायता के लिये आया, इसलिये मैं फारस के राजाओं के पास रहा,
Daniel 10:14 और अब मैं तुझे समझाने आया हूं, कि अन्त के दिनों में तेरे लोगों की क्या दशा होगी। क्योंकि जो दर्शन तू ने देखा है, वह कुछ दिनों के बाद पूरा होगा।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 16-18
  • लूका 7:1-30



सोमवार, 1 अप्रैल 2019

प्रार्थना



      मैंने परमेश्वर का धन्यवाद किया कि अपनी माँ के ल्यूकीमिया (बल्ड कैंसर) के साथ संघर्ष और इलाज के समय मैं उनकी देखभाल के लिए उनके साथ हो सकी। जब दवाईयां लेने से सहायता कम और तकलीफ अधिक होने लगी तो माँ ने उन्हें लेना बन्द कर देने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा, “मैं और तकलीफ नहीं उठाना चाहती हूँ; मैं बस अपने अंतिम दिन अपने परिवार के साथ आनन्दित रहना चाहती हूँ। परमेश्वर जानता है कि मैं अब घर जाने के लिए तैयार हूँ।”

      मैंने प्रार्थनाओं में हमारे प्रेमी स्वर्गीय पिता परमेश्वर से उनके लिए विनती की – कि वो उन्हें चंगाई प्रदान करे। परन्तु परमेश्वर यदि मेरी माँ की प्रार्थना के लिए ‘हाँ’ करता, तो उसे मेरी प्रार्थनाओं के लिए ‘नहीं’ कहना पड़ता। इसलिए रोते हुए मैंने परमेश्वर के सामने समर्पण कर दिया, कि मेरी नहीं वरन उसकी इच्छा पूरी हो। कुछ ही समय के बाद प्रभु यीशु ने मेरी माँ का दुख-तकलीफ से बाहर उनके अनन्त घर में स्वागत कर लिया।

      पाप में गिरे हुए इस सँसार में हम प्रभु यीशु के दोबारा आगमन तक दुखों का अनुभव करते रहेंगे (रोमियों 8:22-25)। हमारा पापी स्वभाव, हमारी सीमित दृष्टि, और पीड़ा का भय हमारी प्रार्थनाओं के स्वरूप को प्रभावित करता तथा बिगाड़ता रहेगा। परन्तु हम धन्यवादी हो सकते हैं कि परमेश्वर का आत्मा हमारी सहायता करता है और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार प्रार्थना करने में हमारा मार्गदर्शन करता है (पद 27), हमें स्मरण करवाता है कि हमारी प्रत्येक परिस्थिति और अनुभव अन्ततः हमारे लिए भलाई ही को उत्पन्न करेगा (पद 28)।

      जब परमेश्वर के महान उद्देश्य में हम अपनी छोटे सी भूमिका को स्वीकार कर लेते हैं, तो हम मेरी माँ के शब्दों “परमेश्वर भला है और बस इतना काफी है। वह जो भी निर्णय करे, मुझे स्वीकार है, मैं शान्ति से हूँ” की पुष्टि करते हैं। परमेश्वर की भलाई में भरोसा रखते हुए, हम विश्वास रख सकते हैं कि हमारी प्रार्थनाओं का वह जो भी उत्तर देगा, वह उसकी इच्छा के अनुसार और महिमा के लिए होगा। - डिक्सन


परमेश्वर के उत्तर हमारी प्रार्थनाओं से अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण होते हैं।

संकट के समय मैं ने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली। - भजन 120:1

बाइबल पाठ: रोमियों 8:19-30
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी।
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 13-15
  • लूका 6:27-49



रविवार, 31 मार्च 2019

निमंत्रण



      हाल ही के एक सप्ताह में मुझे डाक में अनेकों निमंत्रण मिले, विभिन्न प्रकार के समारोहों के लिए। उनमें से जितने मुझे ‘सेवा-निवृत्ति’, ‘घर-ज़मीन खरीदने/बेचने’, ‘जीवन-बीमा’ आदि विषयों पर होने वाली चर्चाओं में बुलाने के लिए थे, उन्हें मैंने तुरंत अलग कर दिया, वे मुझे स्वीकारीय नहीं थे। किन्तु एक निमंत्रण मेरे एक लंबे समय के दिवंगत मित्र के सम्मान में आयोजित होने वाली सभा में आने के लिए था, जिसे मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। निमंत्रण + इच्छा = स्वीकृति!

      परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर की ओर से सभी के लिए एक महान निमंत्रण है, “ओहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो” (यशायाह 55:1)। यह परमेश्वर की ओर से भीतरी पोषण, गहरी आत्मिक तृप्ति, और अनन्त जीवन (पद 2-3) ले लेने का निमंत्रण है। इसी निमंत्रण को प्रभु यीशु के द्वारा बाइबल के अंतिम अध्याय में भी दोहराया गया है: “...जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले” (प्रकाशितवाक्य 22:17)।

      बहुधा हम सोचते हैं कि अनन्त जीवन का आरंभ हमारे शारीरिक जीवन के अन्त के बाद आरंभ होता है। वास्तविकता यह है कि अनन्त जीवन का आरंभ हमारे द्वारा प्रभु यीशु  को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु ग्रहण कर लेने के साथ ही आरंभ हो जाता है। प्रभु यीशु में अनन्त जीवन प्राप्त कर लेने का निमंत्रण परमेश्वर की ओर से सँसार के सभी लोगों को दिया गया सबसे महान निमंत्रण है; उसे स्वीकार अथवा अस्वीकार करना प्रत्येक व्यक्ति का अपना चुनाव है! निमंत्रण + इच्छा = स्वीकृति! – डेविड मैक्कैस्लैंड


जब हम उसके पीछे हो लेने के प्रभु यीशु के निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, 
तो हमारे समस्त जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल जाते हैं।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” – मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-7
Isaiah 55:1 ओहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isaiah 55:2 जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isaiah 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isaiah 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isaiah 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26