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मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

साथ

 

          जब उसकी पत्नी एक ऐसी घातक बीमारी से ग्रसित हुई, जिसका कोई इलाज नहीं था, और उसके जीवन के दिन थोड़े ही रह गए, तब माइकल की बहुत लालसा थी, कि उसके समान उसकी पत्नी भी परमेश्वर के साथ अपने संबंध ठीक कर ले और परमेश्वर की अद्भुत शान्ति को अपने जीवन में अनुभव कर ले। माइकल अपनी पत्नी के साथ अपने मसीही विश्वास को बाँट चुका था, लेकिन उसे प्रभु में कोई रुचि नहीं थी। एक दिन जब वह एक स्थानीय पुस्तकों की दुकान में घूम रहा था, तो उसका ध्यान एक पुस्तक पर गया, जिसका शीर्षक था God, Are You There? (परमेश्वर, क्या आप मौजूद हैं?); लेकिन वह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि उस पुस्तक के प्रति उसकी पत्नी की प्रतिक्रिया क्या होगी। इसी असमंजस में वह कई बार उस पुस्तकों की दुकान के अन्दर और बाहर आया और गया। आखिरकार उसने उस पुस्तक को खरीद लिया, और अपनी पत्नी को दे दिया; और उसे यह देख कर अचंभा हुआ कि उसकी पत्नी ने उस पुस्तक को स्वीकार कर लिया, और वह उसे पढ़ने लगी। उस पुस्तक ने माइकल की पत्नी के मन को छूआ, और उसने बाइबल पढ़ना भी आरंभ कर दिया। इसके दो सप्ताह पश्चात, माइकल की पत्नी का देहांत हो गया, लेकिन तब तक वह उस अनन्त शान्ति को ग्रहण कर चुकी थी जो प्रभु यीशु से मिलती है, और आश्वस्त थी कि अब यह शान्ति उससे किसी के भी द्वारा, कभी भी नहीं ले ली जाएगी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब परमेश्वर ने मूसा को बुलाया कि उसके लोगों को मिस्र के दासत्व में से निकालकर लाए, तब परमेश्वर ने इसके लिए उसे कोई विशिष्ट अद्भुत ताकत देने का वायदा नहीं किया। वरन परमेश्वर ने उससे यह वायदा किया कि वह स्वयं सदा मूसा के साथ बना रहेगा, “उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा” (निर्गमन 3:12)। प्रभु यीशु द्वारा अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले शिष्यों से कहे गए अंतिम शब्दों में, प्रभु ने भी शिष्यों से परमेश्वर के उनके साथ बने रहने का वायदा किया, जो पवित्र आत्मा के मिलने के द्वारा उनके लिए पूरा होगा (यूहन्ना 15:26)।

          जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायक होने के लिए परमेश्वर अनेकों बातें हमें दे सकता है, जैसे कि भौतिक सुविधाएँ, चंगाइयाँ, या समस्याओं के तुरन्त समाधान, आदि। वह कभी कभी ऐसा करता भी है। लेकिन जो सर्वोत्तम उपहार वह हमें दे सकता है वह है स्वयं हमारे साथ सदा बने रहना। हमारे लिए सबसे अधिक शान्ति की बात यही है – वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा, सदा हमारे साथ बना रहेगा। - लेस्ली कोह

 

परमेश्वर अपनी संतानों के साथ सर्वदा बना रहता है।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: निर्गमन 3:11-14

निर्गमन 3:11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मैं कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं?

निर्गमन 3:12 उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजने वाला मैं हूं, तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे।

निर्गमन 3:13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियों के पास जा कर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पितृों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उन को क्या बताऊं?

निर्गमन 3:14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उसने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

जीवन यात्रा

 

          अपनी पुस्तक The Call में ऑस गिन्निस इंग्लैंड के भूतपूर्व प्रधानमंत्री, विंस्टन चर्चिल के जीवन की एक घटना बताते हैं। चर्चिल अपने मित्रों के साथ दक्षिणी फ्रांस में मित्रों के साथ थे। एक ठंडी रात्रि के समय वे आग के पास बैठे हुए थे, और आग में पड़े हुए चीढ़ के लट्ठों को जलते हुए सुन रहे थे; उनके जलने से उनमें से कड़कने, चटकने और फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं। अचानक ही उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में गुर्राती हुई सी आवाज़ में कहा, “मैं समझ सकता हूँ कि ये लट्ठे इस प्रकार की आवाजें क्यों निकाल रहे हैं; मैंने भी जलन का अनुभव किया है।”

          हमारी जीवन यात्रा में कठिनाइयाँ, निराशाएं, खतरे, विपत्तियाँ, हमारी अपनी गलतियों का परिणाम हो सकते हैं, किन्तु फिर भी वे हमें जलन देने वाले अनुभव हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियाँ, धीरे-धीरे हमारे हृदय में से शान्ति और आनन्द को छीन लेती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब दाऊद ने अपने ही पाप के कारण उसके जीवन को खोखला कर देने वाले परिणामों को अनुभव किया, तो उसने अपने इस अनुभव के बारे में लिखा, “जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई” (भजन 32:3-4)।

          ऐसी कठिन परिस्थितियों में हम सहायता तथा आशा के लिए किस की ओर मुड़ते हैं? प्रेरित पौलुस ने, जिसकी मसीही जीवन यात्रा सेवकाई के बोझों और दुखों से भरी हुई थी, लिखा “हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते” (2 कुरिन्थियों 4:8-9)।

          यह किस प्रकार कार्य करता है? जब हम प्रभु यीशु में विश्राम लेते हैं, तो वह अच्छा चरवाहा हमारे जी में जी ले आता है (भजन 23:3), और जीवन यात्रा के अगले चरण के लिए हमें सामर्थ्य प्रदान करता है। उसका हम से वायदा है कि हमारी जीवन यात्रा के हर कदम में वह हमारे साथ बना रहेगा, और जीवन यात्रा के पूरे होने तक हर कदम में साथ चलता रहेगा (इब्रानियों 13:5)। - बिल क्राऊडर

 

प्रभु इस जीवन यात्रा में मेरा हाथ थामे हुए मेरा मार्गदर्शन करते हुए, मुझे लिए चल।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: भजन 32

भजन संहिता 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो।

भजन संहिता 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।

भजन संहिता 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई।

भजन संहिता 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।

भजन संहिता 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।

भजन संहिता 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।

भजन संहिता 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।

भजन संहिता 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।

भजन संहिता 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।।

भजन संहिता 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।

भजन संहिता 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54

रविवार, 11 अप्रैल 2021

शान्ति

 

          एक व्यावसायिक फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में उसके समय के पूरा हो जाने के पैंतालीस वर्ष बाद भी जेरी क्रैमर को उसके खेल की सर्वोच्च प्रतिष्ठा – ‘हॉल ऑफ़ फेम’ में उसके नाम का लिखा जाना, नहीं मिल सका। उसे बहुत से अन्य सम्मान और उपलब्धियां प्राप्त हुईं, लेकिन यह एक उपलब्धि वह प्राप्त नहीं कर सका। यद्यपि दस बार इस उपलब्धि के लिए उसके नाम को सुझाया गया, किन्तु हर बार यह पुरस्कार अन्ततः किसी अन्य खिलाड़ी को दे दिया गया। इतनी बार आशा के टूटने के बाद भी क्रैमर की प्रतिक्रिया विनीत रहने की ही रही। उसका कहना था, “मुझे लगा मानो राष्ट्रीय फुटबॉल लीग ने मुझे मेरे जीवन के दौरान 100 पुरस्कार दिए हैं; इसलिए उस एक के लिए जो मुझे नहीं मिला, विचलित होना और कुड़कुड़ाना, मूर्खता होगी।”

          जिस बात को लेकर कुछ अन्य लोग द्वेष से भर सकते थे, कि बारंबार उनके स्थान पर अन्य खिलाड़ियों को यह आदर दे दिया जाता है, क्रैमर नम्र बना रहा। उसका यह रवैया दिखाता है कि हम किस प्रकार से डाह और द्वेष के कारण हमारे हृदयों को भ्रष्ट और नष्ट होने से बचाए रख सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि ईर्ष्या “हड्डियों को जला देती है” (नीतिवचन 14:30)। जब हम उस बात पर ही ध्यान लगाए रहते हैं जो हमारे पास नहीं है, या हमें नहीं मिल रही है, और उन अनेकों बातों पर ध्यान नहीं देते हैं जो हमें दी गई हैं, मिल रही हैं – तो परमेश्वर की शान्ति हम से दूर रहेगी।

          फिर ग्यारहवीं बार उसका नाम सुझाए जाने के बाद, फरवरी 2018 में, जेरी क्रैमर को अन्ततः “हॉल ऑफ़ फेम” में स्थान मिल गया। हो सकता है कि क्रैमर के समान हमारी पार्थिव इच्छाओं को पूरा होने में बहुत समय लगे, या वो पूरी न भी हों, लेकिन फिर भी हम अपने मनों में शान्ति बनाए रख सकते हैं। यदि हम उन बातों पर अपना ध्यान लगाए रखेंगे जो परमेश्वर ने हमें दी हैं, और दे रहा है, तथा उनके लिए उसके कृतज्ञ भी रहेंगे, तो परमेश्वर की शान्ति भी हमारे मनों में बसी रहेगी।

          हमारी सांसारिक इच्छाएं चाहे पूरी हों अथवा न हों, परन्तु हमारे प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ सदा बनी रहती है, और वही हमें सच्ची शान्ति देता है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर हमारे हृदयों में शान्ति तथा और बहुत कुछ देता है।


मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: नीतिवचन 14:29-35

नीतिवचन 14:29 जो विलम्ब से क्रोध करने वाला है वह बड़ा समझ वाला है, परन्तु जो अधीर है, वह मूढ़ता की बढ़ती करता है।

नीतिवचन 14:30 शान्त मन, तन का जीवन है, परन्तु मन के जलने से हड्डियां भी जल जाती हैं।

नीतिवचन 14:31 जो कंगाल पर अंधेर करता, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है, परन्तु जो दरिद्र पर अनुग्रह करता, वह उसकी महिमा करता है।

नीतिवचन 14:32 दुष्ट मनुष्य बुराई करता हुआ नाश हो जाता है, परन्तु धर्मी को मृत्यु के समय भी शरण मिलती है।

नीतिवचन 14:33 समझ वाले के मन में बुद्धि वास किए रहती है, परन्तु मूर्खों के अन्तःकरण में जो कुछ है वह प्रगट हो जाता है।

नीतिवचन 14:34 जाति की बढ़ती धर्म ही से होती है, परन्तु पाप से देश के लोगों का अपमान होता है।

नीतिवचन 14:35 जो कर्मचारी बुद्धि से काम करता है उस पर राजा प्रसन्न होता है, परन्तु जो लज्जा के काम करता, उस पर वह रोष करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 17-18
  • लूका 11:1-28

शनिवार, 10 अप्रैल 2021

परेशानी

 

          हाऐ वू को चीन की सीमा को पार करने के जुर्म में उत्तरी कोरिया के एक श्रम-शिविर में बंदी बना कर रखा गया। उसने बताया कि वहाँ पर दिन और रात निरंतर बहुत परेशानी के समय थे। क्रूर पहरेदार यातनाएँ देते थे, बहुत कठोरता से कठिन परिश्रम करवाया जाता था, और सोने के लिए बर्फ के समान ठण्डा फर्श था जिस पर चूहे और  पिस्सु घूमते रहते थे, इसलिए बहुत ही कम सोने को मिलता था। परन्तु प्रतिदिन परमेश्वर उसकी सहायता करता था, उसे दिखाता था कि किस कैदी के साथ दोस्ती करके उससे अपने मसीही विश्वास को साझा करे।

          बाद में उसे उस शिविर से रिहा कर दिया गया, और अब वह दक्षिणी कोरिया में रह रही है। वू ने अपने बंदी होने के समय पर मनन करते हुए कहा कि भजन 23 उसके अनुभवों का सार है। यद्यपि वह अन्धकार भरी तराई में फँस गई थी, लेकिन वहाँ पर प्रभु यीशु उसके चरवाहे थे, जो उसे शान्ति देते थे: “यद्यपि मुझे ऐसा लगता था कि मैं वास्तविकता में मृत्यु की परछाईं से भरी हुई तराई में हूँ, फिर भी मुझे किसी बात का भय नहीं था। परमेश्वर प्रतिदिन मुझे शान्ति देता रहता था।” उसने परमेश्वर के प्रेम और भलाई का अनुभव किया, और उसके आश्वासन को पाया कि वह उसकी प्रिय पुत्री है, वह सदा उसके साथ है; “मैं एक बहुत भयानक स्थान में थी, परन्तु मैं जानती थी कि मैं परमेश्वर के प्रेम और भलाई को अनुभव करूँगी; और सदा उसकी उपस्थिति में बनी रहूँगी।”

          हम वू की कहानी से प्रोत्साहन पा सकते हैं। उसके भयानक अनुभवों के बावजूद उसने परमेश्वर के प्रेम, भलाई, और अगुवाई को अनुभव किया; और परमेश्वर ने सभी परेशानियों में उसे संभाल के रखा, उसके सभी भय को दूर किया। यदि हम प्रभु यीशु मसीह के पीछे चलेंगे तो वह हमारी सभी परेशानियों के समयों में हमारा मार्गदर्शन करता हुआ हमें कोमलता के साथ सही मार्ग पर लिए चलेगा। हमें परेशानियों से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम “यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा” (पद 6)। एमी बाउचर पाई

 

हे परमेश्वर तू परेशानी की तराई में से भी मेरे लिए स्वर्गीय आशीषों की ऊंचाइयों का मार्ग प्रदान करता है।


तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: भजन 23

भजन संहिता 23:1 यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।

भजन संहिता 23:2 वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है;

भजन संहिता 23:3 वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गों में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है।

भजन संहिता 23:4 चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।

भजन संहिता 23:5 तू मेरे सताने वालों के सामने मेरे लिये मेज बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है।

भजन संहिता 23:6 निश्चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 15-16
  • लूका 10:25-42

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

सुसमाचार

 

          एक ईरानी विद्यार्थी, अरमान, ने मुझ से पूछा, “आपका नाम क्या है?” जब मैंने उसे बताया कि मेरा नाम एस्तेरा है, तो उसका चेहरा चमक उठा, और उसने उत्तेजित आवाज़ में कहा, “हमारी भाषा फारसी में भी ऐसा ही एक नाम, सेतारे है!” उस छोटी सी बातचीत के द्वारा एक अद्भुत वार्तालाप के लिए द्वार खुल गया। मैंने उसे बताया कि मेरा नाम परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, रानी एस्तेर के नाम पर रखा गया है, जो फारस (वर्तमान ईरान) के एक राजा की यहूदी रानी थी। उस कहानी से आरंभ कर के मैंने उसे प्रभु यीशु के बारे में बताया, उसके साथ सुसमाचार बाँटा। हमारे उस वार्तालाप के परिणामस्वरूप अरमान ने एक साप्ताहिक बाइबल अध्ययन में भाग लेना आरंभ कर दिया जिससे मसीह के बारे में और अधिक सीख सके।

          प्रभु यीशु मसीह के एक अनुयायी, फिलिप्पुस ने, पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में एक इथोपिया के राज-अधिकारी से, जो अपने रथ में सवार बाइबल के पुराने नियम भाग की एक पुस्तक पढ़ता हुआ जा रहा था, एक प्रश्न पूछा: “तू जो पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है?” (प्रेरितों 8:30)। इथोपिया का वह व्यक्ति यशायाह की पुस्तक के एक खण्ड को पढ़ रहा था और उसे समझना चाह रहा था। इसलिए फिलिप्पुस का प्रश्न उसके सामने बिलकुल सही समय पर आया, और उसने फिलिप्पुस को अपने पास ऊपर रथ में बुलाकर बैठा लिया और उससे सुनने लगा। फिलिप्पुस को एहसास हुआ कि यह उसे सुसमाचार सुनाने का कितना अद्भुत अवसर था, “तब फिलिप्पुस ने अपना मुंह खोला, और इसी शास्त्र से आरम्भ कर के उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया” (पद 35)।

          फिलिप्पुस के समान, हमारे पास भी औरों को बताने के लिए सुसमाचार है। हम अपने कार्य स्थल, दुकान, पड़ौस, आदि में, जहाँ पर भी अवसर मिले, उसका उपयोग करें। हम पवित्र आत्मा को हमारा मार्गदर्शन करने दें, और प्रार्थना करें कि वह हमें सही समय, सही स्थान पर सही व्यक्ति के लिए सही शब्द दे जिससे हर व्यक्ति की समझ और आवश्यकता के अनुसार हम उसके साथ सुसमाचार बाँट सकें। - एस्तेरा पिरोसका एस्कोबार

 

हे प्रभु मुझे किसी ऐसे के पास ले जाएँ जिसे उस अनन्त आशा की आवश्यकता है 

जो केवल प्रभु यीशु से मिल सकती है।


प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। - यशायाह 50:4

बाइबल पाठ: प्रेरितों 8:26-35

प्रेरितों 8:26 फिर प्रभु के एक स्वर्गदूत ने फिलिप्पुस से कहा; उठ कर दक्षिण की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से अज्ज़ाह को जाता है, और जंगल में है।

प्रेरितों 8:27 वह उठ कर चल दिया, और देखो, कूश देश का एक मनुष्य आ रहा था जो खोजा और कूशियों की रानी कन्‍दाके का मन्त्री और खजांची था, और भजन करने को यरूशलेम आया था।

प्रेरितों 8:28 और वह अपने रथ पर बैठा हुआ था, और यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक पढ़ता हुआ लौटा जा रहा था।

प्रेरितों 8:29 तब आत्मा ने फिलिप्पुस से कहा, निकट जा कर इस रथ के साथ हो ले।

प्रेरितों 8:30 फिलिप्पुस ने उस ओर दौड़ कर उसे यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक पढ़ते हुए सुना, और पूछा, कि तू जो पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है?

प्रेरितों 8:31 उसने कहा, जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं क्योंकर समझूं और उसने फिलिप्पुस से बिनती की, कि चढ़कर मेरे पास बैठ।

प्रेरितों 8:32 पवित्र शास्त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, वह यह था; कि वह भेड़ के समान वध होने को पहुंचाया गया, और जैसा मेम्ना अपने ऊन कतरने वालों के सामने  चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला।

प्रेरितों 8:33 उस की दीनता में उसका न्याय होने नहीं पाया, और उसके समय के लोगों का वर्णन कौन करेगा, क्योंकि पृथ्वी से उसका प्राण उठाया जाता है।

प्रेरितों 8:34 इस पर खोजे ने फिलिप्पुस से पूछा; मैं तुझ से बिनती करता हूं, यह बता कि भविष्यद्वक्ता यह किस विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में।

प्रेरितों 8:35 तब फिलिप्पुस ने अपना मुंह खोला, और इसी शास्त्र से आरम्भ कर के उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 13-14
  • लूका 10:1-24

गुरुवार, 8 अप्रैल 2021

अनुग्रह

 

          2018 के शरद् ऋतु के ओलंपिक खेलों का संभवतः सबसे अद्भुत, और विस्मयकारी पल था जब चेक गणराज्य की विश्व-विजेता स्नोबोर्डर, एस्टर लेडक्का, ने एक बिलकुल ही भिन्न स्पर्धा – स्की करने, में स्वर्ण पदक जीता! यद्यपि वह स्कीइंग के प्रतियोगियों में स्तर के अनुसार 26वाँ स्थान रखती थी, और उसके लिए यह स्पर्धा जीत पाना लगभग असंभव समझा जा रहा था, फिर भी वह जीत गई।

          यह आश्चर्यजनक था कि लेडक्का उस सकी-स्पर्धा में भाग लेने के लिए स्वीकार कर ली गई; वह स्पर्धा बहुत कठिन थी, उसमें न केवल पहाड़ से नीचे सकी करके जाना था, परन्तु ऐसा एक सर्पाकार घुमावों वाले मार्ग से होकर करते हुए जाना था। उसने इस स्पर्धा में उधार ली हुई सकी प्रयोग कर के भाग लिया, और सभी यही समझ रहे थे कि अन्य उच्च स्थान रखने वाला कोई प्रतियोगी ही जीतेगा। इसलिए जब परिणाम आया कि लेडक्का ने यह स्पर्धा 0.01 सेकेंड से जीत ली है, तो औरों के समान ही वह स्वयं भी बहुत चकित हुई।

          संसार के कार्य करने की यही रीति है। हम यही मान कर चलते हैं कि एक बार जीतने वाले हमेशा ही जीतते रहेंगे, और अन्य सभी हारते रहेंगे। इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रभु यीशु के शिष्यों को प्रभु के मुख से यह सुनकर बहुत अचरज हुआ कि “मैं तुम से सच कहता हूं, कि धनवान का स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना कठिन है” (मत्ती 19:23)। प्रभु यीशु ने तो सामान्य धारणा को बिलकुल उलट-पलट कर दिया था। यह कैसे संभव था कि धनी, अर्थात संसार में सफल होना, स्वर्ग की राज्य के लिए एक बाधा था? प्रभु के कहने का अभिप्राय था की यदि हम उसमें भरोसा रखते हैं, जो सांसारिक रीति से हमारे पास है – हमारा धन-संपत्ति, हमारा सामाजिक स्तर, और आदर सम्मान; हमारी योग्यताएँ, हमारे कौशल, हमारी क्षमताएं, आदि – तो फिर किसी भी बात के लिए हमारा परमेश्वर में भरोसा बनाए रखना कठिन नहीं, लगभग असंभव हो जाता है।

          परमेश्वर का राज्य हमारे नियमों और इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता है। प्रभु यीशु ने कहा कि स्वर्ग में राज्य में, “परन्तु बहुतेरे जो पहिले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, पहिले होंगे” (पद 30)। इसलिए हमें सदा इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि हम जो भी हैं, या जो भी होंगे – चाहे प्रथम अथवा अंतिम, या मध्य में कहीं पर, यह हमारी अपनी किसी योग्यता के द्वारा नहीं है, वरन परमेश्वर के अनुग्रह ही से है। - विन कोलियर

 

संसार के स्तर और परमेश्वर के राज्य के स्तर में कोई समानता नहीं है।


परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था। - 1 कुरिन्थियों 15:10

बाइबल पाठ: मत्ती 19:16-30

मत्ती 19:16 और देखो, एक मनुष्य ने पास आकर उस से कहा, हे गुरु; मैं कौन सा भला काम करूं, कि अनन्त जीवन पाऊं?

मत्ती 19:17 उसने उस से कहा, तू मुझ से भलाई के विषय में क्यों पूछता है? भला तो एक ही है; पर यदि तू जीवन में प्रवेश करना चाहता है, तो आज्ञाओं को माना कर।

मत्ती 19:18 उसने उस से कहा, कौन सी आज्ञाएं? यीशु ने कहा, यह कि हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना।

मत्ती 19:19 अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।

मत्ती 19:20 उस जवान ने उस से कहा, इन सब को तो मैं ने माना है अब मुझ में किस बात की घटी है?

मत्ती 19:21 यीशु ने उस से कहा, यदि तू सिद्ध होना चाहता है; तो जा, अपना माल बेचकर कंगालों को दे; और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा; और आकर मेरे पीछे हो ले।

मत्ती 19:22 परन्तु वह जवान यह बात सुन उदास हो कर चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।

मत्ती 19:23 तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि धनवान का स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना कठिन है।

मत्ती 19:24 फिर तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है।

मत्ती 19:25 यह सुनकर, चेलों ने बहुत चकित हो कर कहा, फिर किस का उद्धार हो सकता है?

मत्ती 19:26 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

मत्ती 19:27 इस पर पतरस ने उस से कहा, कि देख, हम तो सब कुछ छोड़ के तेरे पीछे हो लिये हैं: तो हमें क्या मिलेगा?

मत्ती 19:28 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि नई उत्पत्ति से जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा के सिंहासन पर बैठेगा, तो तुम भी जो मेरे पीछे हो लिये हो, बारह सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करोगे।

मत्ती 19:29 और जिस किसी ने घरों या भाइयों या बहिनों या पिता या माता या लड़के-बालों या खेतों को मेरे नाम के लिये छोड़ दिया है, उसको सौ गुना मिलेगा: और वह अनन्त जीवन का अधिकारी होगा।

मत्ती 19:30 परन्तु बहुतेरे जो पहिले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, पहिले होंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 10-12
  • लूका 9:37-62

बुधवार, 7 अप्रैल 2021

नम्र

 

          एक शनिवार की दोपहर को मेरे चर्च के युवा समूह के कुछ सदस्य एक दूसरे से फिलिप्पियों 2:3-4 “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे” पर आधारित कुछ कठिन प्रश्न पूछने के लिए एकत्रित हुए। उनके द्वारा पूछे गए उन कठिन प्रश्नों में से कुछ थे: औरों में आप कितनी बार रुचि लेते हैं? कोई आपको क्या कहेगा – नम्र या घमण्डी; और क्यों? आदि। उनकी बातें सुनते हुए मैं उनके ईमानदार उत्तरों से प्रभावित हुई। वे किशोर इस बात से सहमत थे कि अपनी कमियों को स्वीकार कर लेना तो सहज है, किन्तु बदलना, या फिर, बदलने की इच्छा भी रखना, बहुत कठिन होता है। एक किशोर ने बड़े खेदित भाव से यह भी कहा, “स्वार्थी होना तो मेरे खून में है।”

          अपने ही ऊपर ध्यान केन्द्रित किए रहने के स्थान पर औरों की सेवा करने पर ध्यान लगाना केवल हम में निवास करने वाले प्रभु यीशु के आत्मा के द्वारा ही संभव है। इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में, पौलुस प्रेरित ने भी यही बात फिलिप्पी की मसीही मण्डली को समझाई कि वे उन बातों पर ध्यान लगाएँ जो परमेश्वर ने उनके लिए की हैं, तथा संभव कर के दी हैं। परमेश्वर ने अपने बड़े अनुग्रह में उन्हें गोद ले लिया, अपने प्रेम से उन्हें सांत्वना दी, और सदा उनकी सहायता करते रहने के लिए उन्हें अपना पवित्र आत्मा दिया है (फिलिप्पियों 2:1-2)। और परमेश्वर ने यह न केवल फिलिप्पी के उन मसीही विश्वासियों के लिए किया, वरन संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए किया है। तो फिर ऐसे अनुग्रह के प्रति कोई भी मसीही विश्वासी सिवाए स्वभाव में विनम्र और व्यवहार में दीन हो जाने के और कोई भी प्रत्युत्तर कैसे दे सकता है?

          जी हाँ; परमेश्वर ही हमारे लिए बदल जाने का कारण है, और केवल वह ही हमें बदल सकता है: “क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है” (फिलिप्पियों 2:13)। जब हम इन बातों पर ध्यान लगाए रखते हैं, तब हम अपने ध्यान को अपने ऊपर कम और दूसरों की सेवा करने के लिए नम्र होने पर अधिक लगा सकते हैं। - पोह फेंग चिया

 

विनम्रता के साथ परमेश्वर की इच्छा को समर्पित हो जाना हमारी ज़िम्मेदारी है।


इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। - कुलुस्सियों 3:12-13

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11

फिलिप्पियों 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करुणा और दया है।

फिलिप्पियों 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।

फिलिप्पियों 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।

फिलिप्पियों 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे।

फिलिप्पियों 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो।

फिलिप्पियों 2:6 जिसने परमेश्वर के स्वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।

फिलिप्पियों 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।

फिलिप्पियों 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

फिलिप्पियों 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।

फिलिप्पियों 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।

फिलिप्पियों 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 7-9
  • लूका 9:18-36