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शनिवार, 3 जुलाई 2021

ईमानदार

 

          मेरे तीन वर्षीय पोते के दिन का आरंभ अच्छा नहीं हुआ था। उसे अपनी पसंदीदा शर्ट नहीं मिल रही थी। जिन जूतियों को वह पहनना चाह रहा था वे बहुत भड़कीली थीं। पहले तो वह इनके लिए अपनी दादी के निर्देशों को लेकर खिसियाता और चिड़चिड़ाता रहा, और फिर बैठकर रोने लग गया।

          मैंने उससे पूछा, “तुम इतने परेशान क्यों हो?” हमने थोड़ी देर बैठकर बातें कीं, और वह शांत हो गया। फिर मैंने उससे कोमलता से पूछा, “क्या तुम दादी के प्रति अच्छे थे?” उसने थोड़ी देर विचार-पूर्वक अपनी जूतियों की ओर देखा, और फिर उत्तर दिया, “नहीं, मैं अच्छा नहीं था, मुझे माफ करें।”

          मेरा हृदय गदगद हो गया। अपने किए के लिए बहाने बनाने और अपने आप को सही ठहराने के स्थान पर वह ईमानदार रहा। फिर हम दोनों ने साथ मिलकर प्रार्थना की, प्रभु यीशु से हमने अपनी गलतियों के लिए माफी माँगी, और उससे निवेदन किया कि हमें बुराई से बचाए रखे, तथा हमने अपने व्यवहार में और बेहतर होते जाने के लिए प्रभु से सहायता तथा मार्गदर्शन माँगा।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह 1 अध्याय में, परमेश्वर अपने लोगों का सामना करता है, और उन्हें उनकी गलतियों का बोध करवाता है। उनकी कचहरियों में अन्याय और रिश्वत लेना-देना भरा पड़ा था; भौतिक लाभ के लिए अनाथों और विधवाओं का विशेषकर शोषण किया जाता था। लेकिन फिर भी परमेश्वर ने उनके प्रति करुणा का व्यवहार करते हुए, उन्हें कहा कि वे अपने पापों को मान लें, और उन से मुड़ जाएँ, “यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वाद-विवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे” (यशायाह 1:18)।

          परमेश्वर की लालसा है कि हम उसके साथ अपने पापों के प्रति ईमानदार और खुले हों। वह पश्चाताप और ईमानदारी के प्रति प्रेम और क्षमा का प्रत्युत्तर देता है: “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9)। क्योंकि हमारा परमेश्वर दयालु, क्षमा करने वाला और धैर्य रखने वाला है, इसलिए हम ईमानदारी से उसके सामने आ सकते हैं। - जेम्स बैंक्स

 

हे पिता, मुझे मेरे पाप से मुड़कर, सच्चे मन से आपके पीछे चलने वाला बनाएँ।


जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उन को मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी। - नीतिवचन 28:13

बाइबल पाठ: यशायाह 1:12-18

यशायाह 1:12 मैं बछड़ों या भेड़ के बच्चों या बकरों के लहू से प्रसन्न नहीं होता। तुम जब अपने मुंह मुझे दिखाने के लिये आते हो, तब यह कौन चाहता है कि तुम मेरे आंगनों को पांव से रौंदो?

यशायाह 1:13 व्यर्थ अन्नबलि फिर मत लाओ; धूप से मुझे घृणा है। नये चांद और विश्रामदिन का मानना, और सभाओं का प्रचार करना, यह मुझे बुरा लगता है। महासभा के साथ ही साथ अनर्थ काम करना मुझ से सहा नहीं जाता।

यशायाह 1:14 तुम्हारे नये चांदों और नियत पर्वों के मानने से मैं जी से बैर रखता हूं; वे सब मुझे बोझ से जान पड़ते हैं, मैं उन को सहते सहते उकता गया हूं।

यशायाह 1:15 जब तुम मेरी ओर हाथ फैलाओ, तब मैं तुम से मुंह फेर लूंगा; तुम कितनी ही प्रार्थना क्यों न करो, तौभी मैं तुम्हारी न सुनूंगा; क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से भरे हैं।

यशायाह 1:16 अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आंखों के सामने से अपने बुरे कामों को दूर करो; भविष्य में बुराई करना छोड़ दो,

यशायाह 1:17 भलाई करना सीखो; यत्न से न्याय करो, उपद्रवी को सुधारो; अनाथ का न्याय चुकाओ, विधवा का मुकद्दमा लड़ो।

यशायाह 1:18 यहोवा कहता है, आओ, हम आपस में वाद-विवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तौभी वे हिम के समान उजले हो जाएंगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तौभी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 25-27
  • प्रेरितों 12


शुक्रवार, 2 जुलाई 2021

शान्ति

 

          हम साथ बैठे भोजन कर रहे थे, जब मेरे मित्र ने मुझ से प्रश्न किया, “तुम शान्ति के बारे में क्या सोचती हो?” मैंने कुछ विस्मय से उसकी ओर देखकर पूछा “शान्ति? लेकिन तुम मुझ से यह क्यों पूछ रहे हो?” उसने उत्तर दिया, “तुम चर्च की सभा के समय अपने पैरों को काफी हिला रहीं थीं। मुझे लगा कि किसी बात के लिए चिंतित हो। क्या तुम ने कभी उस शान्ति के बारे में विचार किया है जो परमेश्वर उस से प्रेम करने वालों को देता है?”

          यह कुछ वर्ष पहले की बात है, और उस दिन मैं अपने उस मित्र के उस प्रश्न से कुछ आहत हुई थी। किन्तु उसके प्रश्न ने मुझे एक यात्रा के मार्ग पर भी डाल दिया। मैंने उसके प्रश्न से प्रभावित होकर परमेश्वर के वचन बाइबल में खोजना आरंभ किया कि कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के होते हुए भी परमेश्वर के लोग भलाई और शान्ति के मार्ग पर किस प्रकार से दृढ़ बने रहे। मैं जब पौलुस द्वारा कुलुस्सियों को लिखी गई पत्री को पढ़ रही थी, तो मैंने प्रेरित द्वारा उन्हें दिए गए निर्देश, कि वे मसीह की शान्ति को अपने हृदयों पर राज्य करने दें (कुलुस्सियों 3:15), पर गंभीरता से विचार करना आरंभ किया।

          पौलुस ने यह पत्री एक ऐसे चर्च को लिखी थी जिस से वह कभी जाकर मिला नहीं था। उसने उनके बारे में अपने मित्र, और उस चर्च के अगुवे, इपफ्रास से सुना था। वह चिंतित था कि गलत शिक्षाओं का सामना करते हुए वे मसीह की शान्ति से दूर होते जा रहे थे। किन्तु इसके लिए उन्हें उलाहना देने के स्थान पर पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे प्रभु यीशु पर विश्वास में दृढ़ बने रहें, और प्रभु उन्हें आश्वासन और आशा से भरपूर रखेगा (पद 15)।

          हम सभी को ऐसे समयों का सामना करना पड़ेगा जब हम मसीह की शान्ति को अपने हृदयों पर राज्य करने से या तो इनकार कर सकते हैं या स्वीकार कर सकते हैं। जब हम प्रभु की ओर मुड़ते हैं, और उसे अपने हृदयों पर राज्य करने के लिए आमंत्रित करते हैं, तो वह हमारे अन्दर आकर हमें कोमलता से हमारी चिंताओं और व्यग्रता से मुक्त करता है, जो हमें जकड़े हुए हैं। जब हम उसकी शान्ति के खोजी होते हैं, तो हमें यह भरोसा भी रखना चाहिए कि वह अपने प्रेम के साथ हमें अपनी शान्ति में रखेगा। - एमी बाउचर पाई

 

प्रभु, आपकी शान्ति मेरे मन-मस्तिष्क पर राज्य करे।


[प्रभु यीशु ने कहा:] मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17

कुलुस्सियों 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।

कुलुस्सियों 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।

कुलुस्सियों 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्ध लो।

कुलुस्सियों 3:15 और मसीह की शान्ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।

कुलुस्सियों 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुति-गान और आत्मिक गीत गाओ।

कुलुस्सियों 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 22-24
  • प्रेरितों 11


गुरुवार, 1 जुलाई 2021

मालूम

 

          थॉमस को मालूम था कि उसे क्या करना है। वह भारत के एक निर्धन परिवार में पैदा हुआ था और अमेरिका के एक दंपति ने उसे गोद ले लिया था। एक बार अपनी एक भारत यात्रा के समय, जब वह अपने घर के इलाके से निकल रहा था तो उसने वहाँ के बच्चों की दयनीय दशा को देखा। उसने निर्णय लिया कि उसे उनकी सहायता करनी होगी। उसने योजना बनानी आरंभ कर दी कि वह वापस अमेरिका जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करेगा, बहुत सा धन एकत्रित करेगा और भविष्य में कभी वापस आकर उन बच्चों के लिए कुछ करेगा।

          फिर एक दिन परमेश्वर के वचन बाइबल में से याकूब की पत्री को पढ़ते समय उसका ध्यान याकूब 2:14-18 में लिखी बात पर गया। वहाँ पर याकूब प्रश्न उठा रहा है कि कोई विश्वास करने का दावा करे किन्तु अपने कर्मों से उस विश्वास को जी कर न दिखाए, तो उसके विश्वास के दावे करने का क्या लाभ? थॉमस को ध्यान आया एक छोटी लड़की रोती हुई अपनी माँ से कह रही थी कि “माँ लेकिन मुझे तो भूख अभी लग रही है।” थॉमस को अपने दिन याद आए जब वह भी तीव्र भूख से पीड़ित बच्चा था, और कुछ भोजन पा लेने के लिए कूड़े के ढेर खंगालता था। थॉमस को समझ में आ गया कि वह सहायता करने के लिए कई वर्ष तक प्रतीक्षा नहीं कर सकता है। उसने निर्णय लिया, “मैं अभी ही आरंभ करूँगा!”

          उसने एक अनाथालय आरंभ किया, जिसमें आज पचास बच्चों का पालन पोषण होता है, उन्हें अच्छा भोजन खाने को मिलता है, अच्छी शिक्षा मिलती है, और वो प्रभु यीशु मसीह कर बारे में भी सीखते हैं। यह सब इसलिए क्योंकि एक आदमी को मालूम था कि उसे क्या करना है, और उसने उस बात को बाद के समय के लिए नहीं टाला, वरन परमेश्वर की इच्छा को तत्काल पूरा किया।

          बाइबल में, याकूब की पत्री में दिया गया सन्देश हमारे लिए भी लागू होता है। प्रभु यीशु मसीह में हमारा विश्वास हमें बहुत से लाभ भी प्रदान करता है – उसके साथ संबंध, बहुतायत का जीवन, और भविष्य की एक अद्भुत आशा। लेकिन इस सब से औरों को क्या लाभ मिल रहा है? जब तक हम हाथ बढ़ाकर आज उनकी सहायता नहीं करते हैं जो रो रहे हैं, “लेकिन मुझे भूख तो अभी लग रही है।”

          यदि आपको मालूम है कि आपको क्या करना है, तो उसे आरंभ भी कर दीजिए। - डेव ब्रैनन

 

प्रभु मेरा मार्गदर्शन करें कि मैं औरों की सहायता कर सकूँ।


क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: याकूब 2:14-18

याकूब 2:14 हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?

याकूब 2:15 यदि कोई भाई या बहिन नंगे उघाड़े हों, और उन्हें प्रति दिन भोजन की घटी हो।

याकूब 2:16 और तुम में से कोई उन से कहे, कुशल से जाओ, तुम गरम रहो और तृप्त रहो; पर जो वस्तुएं देह के लिये आवश्यक हैं वह उन्हें न दे, तो क्या लाभ?

याकूब 2:17 वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है।

याकूब 2:18 वरन कोई कह सकता है कि तुझे विश्वास है, और मैं कर्म करता हूं: तू अपना विश्वास मुझे कर्म बिना तो दिखा; और मैं अपना विश्वास अपने कर्मों के द्वारा तुझे दिखाऊंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48


बुधवार, 30 जून 2021

दृष्टिकोण

 

          मैं उस समय 18 वर्ष की थी, और मुझे हाल ही में साफ़ देख पाने के लिए चश्मा लगाना पड़ा था, जिसे मैं पसंद नहीं कर रही थी। मेरे पिता ने एक दिन मुझ से कहा, “किसी पेड़ को देखते समय, पहले उसे बजाए केवल धुंधला और हरा देख पाने के स्थान पर, अब उसके प्रत्येक पत्ते को स्पष्ट देख पाना बहुत अद्भुत अनुभव होगा; है न?” उनकी इस टिप्पणी ने उस चश्मे के प्रति मेरा दृष्टिकोण बदल दिया।

          परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ते समय, कभी-कभी बाइबल के कुछ भाग वैसे ही प्रतीत होते हैं, जैसे बिना चश्मा पहने हुए पेड़ दिखते हैं – धुंधले, जैसे उनमें कुछ विशेष नहीं है। किन्तु यदि हम ध्यान देकर बारीकी से देखें तो उन खंडों में भी परमेश्वर की बातों की सुन्दरता दिखाई देती है।

          यह मेरे साथ निर्गमन की पुस्तक पढ़ते समय हुआ। परमेश्वर ने इस्राएलियों को अपने अस्थायी निवास-स्थान को बनाने के लिए जो निर्देश दिए थे, उसका विवरण अरुचिकर और अस्पष्ट प्रतीत हो सकता है। लेकिन मैं अध्याय 25 के अन्त की ओर आकर थोड़ा रुकी, और परमेश्वर ने दीवट के बनाने के लिए जो विवरण दिया है, उस पर विचार करने लगी। उसे “चोखे सोने” से बनाया जाना था; उसके पाये, डंडी, पुष्प-कोष, गाँठ, और फूल, सब कुछ चोखे सोने से बनने थे (पद 31)। उसकी डंडियों के ऊपर के पुष्प-कोषों को बादाम के फूलों के समान होना था (पद 34)।

          बादाम के पेड़ बहुत सुन्दर होते हैं, और परमेश्वर ने उसी प्राकृतिक सुन्दरता को अपने निवास-स्थान में सम्मिलित किया था।

          पौलुस ने लिखा, “क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ्य, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं...” (रोमियों 1:20)। परमेश्वर की सुन्दरता को देख पाने के लिए हमें उसकी सृष्टि और उसके वचन, दोनों को निहारना चाहिए, और कभी-कभी उस सुन्दरता को स्पष्ट देखने के लिए, हमें उन्हें एक नए दृष्टिकोण से उसे देखना चाहिए। - जूली स्क्वाब

 

 

परमेश्वर के वचन, और उसकी सृष्टि, दोनों को एक नए दृष्टिकोण से देखिए; 

परमेश्वर की अद्भुत बातें प्रकट होने लगेंगी!


आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन संहिता 19:1

बाइबल पाठ: निर्गमन 25:31-40

निर्गमन 25:31 फिर चोखे सोने की एक दीवट बनवाना। सोना ढलवाकर वह दीवट, पाये और डण्डी सहित बनाया जाए; उसके पुष्प-कोष, गांठ और फूल, सब एक ही टुकड़े के बनें;

निर्गमन 25:32 और उसकी किनारों से छ: डालियां निकलें, तीन डालियां तो दीवट के एक किनारे से और तीन डालियां उसकी दूसरे किनारे से निकली हुई हों;

निर्गमन 25:33 एक एक डाली में बादाम के फूल के समान तीन तीन पुष्प-कोष, एक एक गांठ, और एक एक फूल हों; दीवट से निकली हुई छहों डालियों का यही आकार या रूप हो;

निर्गमन 25:34 और दीवट की डण्डी में बादाम के फूल के समान चार पुष्प-कोष अपनी अपनी गांठ और फूल समेत हों;

निर्गमन 25:35 और दीवट से निकली हुई छहों डालियों में से दो दो डालियों के नीचे एक एक गांठ हो, वे दीवट समेत एक ही टुकड़े के बने हुए हों।

निर्गमन 25:36 उनकी गांठे और डालियां, सब दीवट समेत एक ही टुकड़े की हों, चोखा सोना ढलवाकर पूरा दीवट एक ही टुकड़े का बनवाना।

निर्गमन 25:37 और सात दीपक बनवाना; और दीपक जलाए जाएं कि वे दीवट के सामने प्रकाश दें।

निर्गमन 25:38 और उसके गुलतराश और गुलदान सब चोखे सोने के हों।

निर्गमन 25:39 वह सब इन समस्त सामान समेत किक्कार भर चोखे सोने का बने।

निर्गमन 25:40 और सावधान रहकर इन सब वस्तुओं को उस नमूने के समान बनवाना, जो तुझे इस पर्वत पर दिखाया गया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23


मंगलवार, 29 जून 2021

तृप्ति

 

          मेरे बच्चे तो रोमांचित थे, लेकिन मैं बहुत आशंकित थी। छुट्टियाँ मनाने के समय में हम एक मछली-घर घूमने गए थे, और वहाँ एक विशेष टैंक में छोटी शार्क मछलियाँ भी थीं, जिन्हें दर्शक छू सकते थे, दुलार से थपथपा सकते थे। मैंने वहाँ के सहायक से पूछा कि क्या ये शार्क कभी किसी को काटती या पकड़ती नहीं हैं? उसने उत्तर दिया कि इन शार्क मछलियों को अभी कुछ देर पहले ही भरपेट भोजन करवाया गया है, और फिर उसके ऊपर कुछ और अतिरिक्त भी खिला दिया गया है। क्योंकि अब उन्हें भूख नहीं थी, उनके पेट भरे हुए थे, इसलिए वे काटेंगी भी नहीं।

          मैंने जो शार्क को छूने और थपथपाने के विषय में उस दिन सीखा, वह परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन में लिखी बात, “सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं” (नीतिवचन 27:7) के अनुसार है। भूख – वह अन्दर से खालीपन का भाव – हमारे सही निर्णय करने की बुद्धिमत्ता को क्षीण बना सकती है। भूखा होना या तृप्त न होना हमें ऐसा कुछ भी स्वीकार करने के लिए बाध्य कर सकता है, जिसके द्वारा हमें लगता है कि हमारी भूख शांत हो सकेगी, हमें तृप्ति मिल सकेगी – चाहे उसके लिए हमें किसी और का कोई भाग ही काटना या छीनना क्यों न पड़े।

          परमेश्वर नहीं चाहता है कि हम अपनी भूख या तृप्त होने की भावना से बाध्य होकर जीवन जीएँ। वह चाहता है कि हम मसीह यीशु के प्रेम से भर जाएँ जिससे हम जो भी करें वह उस शान्ति और स्थिरता के साथ हो जो वह हमें प्रदान करता है। इस बात का निरंतर एहसास कि हमें बिना किसी भी शर्त के लगातार प्रेम किया जाता है, हमें इसके लिए भरोसा देता है। इस प्रेम में स्थिर और दृढ़ होने के द्वारा हम हमारी ओर आने वाले प्रत्येक “अच्छी” प्रतीत होने वाली वस्तु को स्वीकार करने के स्थान पर, अपने लिए अपनी संपत्ति, संबंधों, सामग्री के विषय जाँच-परख कर सही चुनाव कर सकते हैं।

          केवल प्रभु यीशु मसीह के साथ एक सही संबंध ही हमें पूर्ण संतुष्टि दे सकता है, हमें तृप्त रख सकता है। हम अपने लिए उसके अनुपम, अद्भुत प्रेम को समझें, और अपनी तथा औरों की तृप्ति के लिए “...परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाएँ” (इफिसियों 3:19)। - जेनिफर बेनसन शुल्ट

 

जो प्रभु यीशु को जीवन की रोटी के रूप में देखते हैं, वे कभी भूखे नहीं होंगे।


जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: नीतिवचन 27:1-10

नीतिवचन 27:1 कल के दिन के विषय में मत फूल, क्योंकि तू नहीं जानता कि दिन भर में क्या होगा।

नीतिवचन 27:2 तेरी प्रशंसा और लोग करें तो करें, परन्तु तू आप न करना; दूसरा तुझे सराहे तो सराहे, परन्तु तू अपनी सराहना न करना।

नीतिवचन 27:3 पत्थर तो भारी है और बालू में बोझ है, परन्तु मूढ का क्रोध उन दोनों से भी भारी है।

नीतिवचन 27:4 क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है?

नीतिवचन 27:5 खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है।

नीतिवचन 27:6 जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है।

नीतिवचन 27:7 सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं।

नीतिवचन 27:8 स्थान छोड़ कर घूमने वाला मनुष्य उस चिडिय़ा के समान है, जो घोंसला छोड़ कर उड़ती फिरती है।

नीतिवचन 27:9 जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।

नीतिवचन 27:10 जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


सोमवार, 28 जून 2021

कृतज्ञ

 

          “नहीं” या “अभी नहीं” सुनना कठिन हो सकता है, विशेषकर तब, जब हमें यह लगता है कि परमेश्वर ने हमारे द्वारा औरों की सेवकाई के लिए द्वार खोले हैं। मेरी मसीही सेवकाई के आरंभिक दिनों में, मेरे सामने ऐसे दो अवसर आए, जिनके लिए मुझे लगा कि मेरे आत्मिक वरदान और कौशल उन अवसरों के अंतर्गत चर्च की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए बिलकुल सही हैं। किन्तु अन्ततः वे दोनों ही द्वार बन्द हो गए। इन दोनों निराशाओं के पश्चात एक अन्य स्थान मेरे लिए उपलब्ध हुआ, जिसमें मैं चुना गया और नियुक्त कर लिया गया। पास्टर की उस सेवकाई के अवसर के साथ तेरह वर्षों तक जीवनों को छू लेने वाले परिश्रम करने के समय भी आए।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रेरितों 16 में दो बार पौलुस और उसके साथियों को परमेश्वर ने एक ओर जाने से रोका। पहले “और पवित्र आत्मा ने उन्हें आसिया में वचन सुनाने से मना किया” (पद 6)। फिर “और उन्होंने मूसिया के निकट पहुंचकर, बितूनिया में जाना चाहा; परन्तु यीशु के आत्मा ने उन्हें जाने न दिया” (पद 7)। उन्हें इसका पता नहीं था, लेकिन परमेश्वर ने उनके लिए वह योजना बना रखी थी जो पौलुस और उसके साथियों के कार्यों के लिए अधिक उपयुक्त थी। उनकी अपनी योजनाओं के विषय परमेश्वर से “नहीं” सुनने के द्वारा वे उसके मार्गदर्शन को सुनने और भरोसे के साथ मानने के लिए तैयार किए गए (पद 9-10)।

          हम में से ऐसा कौन होगा जो जो किसी ऐसी बात को लेकर दुखी न हुआ हो जो हमें एक दुखद हानि प्रतीत होती है? जब हमें कोई इच्छा की हुई नौकरी नहीं मिली, या सेवकाई का कोई अपेक्षित अवसर हमें नहीं दिया गया, जब कहीं अन्य स्थान के लिए हमारा स्थानान्तरण सफल नहीं हुआ, तब हम सभी आहत अनुभव करते हैं। यद्यपि ये सभी बातें कुछ समय के लिए हमें भारी प्रतीत हो सकती हैं, किन्तु अकसर समय हमें दिखाता है कि इस प्रकार के घुमावदार मार्ग प्रभु की ओर से भेजे गए माध्यम हैं जिनके द्वारा वह हमें वहाँ पहुंचाता है, जहाँ वह हमें ले जाना चाहता है।

          हम प्रभु परमेश्वर की योजनाओं और मार्गदर्शनों के लिए उसके कृतज्ञ रहें। - आर्थर जैक्सन

 

हे पिता परमेश्वर, जीवन की बातों में मेरे मार्गदर्शक बने रहें, 

मुझे अपनी योजनाओं की गलतियों से बचाए रहें।


सुन, मैं एक दूत तेरे आगे आगे भेजता हूं जो मार्ग में तेरी रक्षा करेगा, और जिस स्थान को मैंने तैयार किया है उस में तुझे पहुंचाएगा। - निर्गमन 23:20

बाइबल पाठ: प्रेरितों 16:6-10

प्रेरितों के काम 16:6 और वे फ्रूगिया और गलतिया देशों में से हो कर गए, और पवित्र आत्मा ने उन्हें आसिया में वचन सुनाने से मना किया।

प्रेरितों के काम 16:7 और उन्होंने मूसिया के निकट पहुंचकर, बितूनिया में जाना चाहा; परन्तु यीशु के आत्मा ने उन्हें जाने न दिया।

प्रेरितों के काम 16:8 सो मूसिया से हो कर वे त्रोआस में आए।

प्रेरितों के काम 16:9 और पौलुस ने रात को एक दर्शन देखा कि एक मकिदुनी पुरुष खड़ा हुआ, उस से बिनती कर के कहता है, कि पार उतरकर मकिदुनिया में आ; और हमारी सहायता कर।

प्रेरितों के काम 16:10 उसके यह दर्शन देखते ही हम ने तुरन्त मकिदुनिया जाना चाहा, यह समझकर, कि परमेश्वर ने हमें उन्हें सुसमाचार सुनाने के लिये बुलाया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 11-13
  • प्रेरितों 9:1-21