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बुधवार, 16 मार्च 2011

हमारा निर्दोष एवज़ी

एक अनाथ युवती के गुर्दों ने काम करना बन्द कर दिया। बहुत इलाज के बाद भी जब कुछ सफलता नहीं मिली, उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसके जीवित रहने की आशा क्षीण होने लगी। अन्तिम उपाय के तौर पर चिकित्सकों ने गुर्दे बदलने का निर्णय किया, किंतु कोई रिश्तेदार नहीं था जो उसके लिये अपना गुर्दा दान करता। चिकित्सकों ने समाज के सामने युवती के लिये निशुल्क गुर्दा दान देने के लिये आग्रह जारी किया। एक युवक आगे आया और अपना गुर्दा दान करने के लिये राज़ी हो गया। युवक का गुर्दा निकालते समय ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें आईं और युवक की मृत्यु हो गई, लेकिन उसके दान किये हुए गुर्दे के कारण युवती की जान बच सकी। उस युवक ने केवल गुर्दा ही नहीं वरन अपने प्राण देकर उस युवती को नया जीवन दिया।

हमारे प्रभु में ऐसा कोई कारण नहीं था जिससे उसे मृत्यु दण्ड सहना पड़ता, फिर भी उसने स्वेच्छा से हमारे स्थान पर मृत्यु दण्ड सहना स्वीकार किया। एक कवि ने उसके इस बलिदान के लिये कुछ यूँ लिखा: "उसने हमारे स्थान पर मृत्यु सही/ उसने अपने लोगों को बचा लिया/ जो श्राप और दण्ड उसपर गिरा/ वह हमारे पापों का था।

एलिज़ाबेथ बैरेट ब्राउनिंग ने मसीह के क्रूस पर दिये महान बलिदान के आत्मिक मर्म को इन श्ब्दों में व्यक्त किया: वह त्यागा गया! परमेश्वर ने भी उससे अपना मुँह मोड़ लिया/ आदम का पाप धर्मी पुत्र और पिता के बीच आ गया/ हाँ एक बार इम्मैनुएल की कराह ने इस सृष्टी को झकझोर दिया/ वह तन्हा कराह "हे मेरे परमेश्वर, मैं त्यागा गया"।

परमेश्वर के पुत्र के बलिदान द्वारा बचाए जाकर अब हमें अपने उस निर्दोष एवज़ी के लिये अपने हृदय खोल देने चाहियें। - पौल वैन गौर्डर

यीशु हमारे पापों के लिये मरा ताकि हम पापों से मुक्त किये जाएं।

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं। - २ कुरिन्थियों ५:२१


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१७-२१

2Co 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो, वे सब नई हो गईं।
2Co 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2Co 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2Co 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2Co 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २८-२९
  • मरकुस १४:५४-७२

मंगलवार, 15 मार्च 2011

काठ में अभिव्यक्ति

एक बढ़ई एक अन्धे भूमिहर को अपनी कारीगरी के सिद्धांतों को समझाने की कोशिश कर रहा था। बढ़ई ने कहा कि कलाकार अपने आप को रंगों के द्वारा अपने आप को अभिव्यक्त करते हैं, लेखक शब्दों द्वारा और शिल्पकार पत्थर पर काम करके, मैं अपने आप को काठ पर अपनी कारीगरी के द्वारा ही सबसे बेहतर तरह अभिव्यक्त कर सकता हूँ। भूमीधर ने अद्भुत आत्मिक अन्तःदृष्टि से कहा, "काठ द्वारा? श्रीमान क्या आप जानते हैं कि सारे संसार में मनुष्य की महानत्म अभिव्यक्ति काठ में ही हुई है?" बढ़ई ने भूमिहर से बड़े अचरज से पूछा, "कैसे?" भूमिहर ने उत्तर दिया, "यीशु मसीह के क्रूस द्वारा।"

जब प्रभु यीशु इस पृथ्वी पर रहने के लिये आए तो अपने स्वर्गीय पिता के वचनानुसार आए। जो कुछ भी उन्होंने कहा या किया वह सब परमेश्वर पिता की आज्ञा के अनुसार था, इसलिये उनका जीवन और शिक्षाएं मनुष्य जाति के प्रति परमेश्वर के प्रेम भरे हृदय की सच्ची अभिव्यक्ति हैं। परन्तु प्रभु यीशु ने मनुष्य जाति के लिये परमेश्वर के प्रेम की अनन्त योजना की अभिव्यक्ति किसी महान शिक्षा के प्रचार या किसी बड़े आश्चर्यकर्म द्वारा नहीं करी, वरन उन्होंने परमेश्वर के प्रेम का सबसे प्रभावशाली प्रगटिकरण क्रूस पर स्वेच्छा से अपने बलिदान द्वारा किया।

क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान परमेश्वर के प्रेम की महानत्म अभिव्यक्ति था। यह बलिदान, यह मृत्यु सहना, यह अनन्त प्रेम की अभिव्यक्ति मेरे और आपके लिये थी। जिसने इस काठ पर करी गई प्रेम की महानतम अभिव्यक्ति के मर्म को समझ लिया और स्वीकार कर लिया, वह अनन्त उद्धार पा गया। - डेव एगनर


मसीह ने हमारे पाप के दोष को अपने ऊपर ले लिया और हमें अपने अनुग्रह तथा आशीश की भेंट दे दी।

यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। - १ कुरिन्थियों १:२२-२४


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-२५

1Co 1:18 क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।
1Co 1:19 क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा।
1Co 1:20 कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया?
1Co 1:21 क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे।
1Co 1:22 यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं।
1Co 1:23 परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है।
1Co 1:24 परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है।
1Co 1:25 क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २६-२७
  • मरकुस १४:२७-५३

सोमवार, 14 मार्च 2011

"रेड क्रौस" का निशान

अपनी पुस्तक The Great Boer War, जो दक्षिणी अफ्रीका में हुए योरपीय सेनाओं के युद्ध का वृतांत है, सर आरथर कौनन डोयल ने एक घटना दर्ज की: अंग्रेज़ी सैनिकों की एक छोटी टुकड़ी अचानक ही विरोधियों की एक बड़ी सेना के हमले में फंस गई और भयानक गोली बारी ने उन्हें बुरी तरह ज़ख्मी कर के पीछे खदेड़ दिया। उनके घायल सैनिक बड़ी खतरनाक स्थिति में थे और उनकी रक्षा केवल रेड क्रौस के झंडे के संरक्षण में आने से ही होनी संभव थी। उनके पास सफेद कपड़ा तो था लेकिन उस पर रेड क्रौस का निशान बनाने के लिये लाल रंग नहीं था; उन्होंने अपने ज़ख्मों से बहते खून से उस कपड़े पर लाल क्रौस का निशान बना कर वह झण्डा ऊंचा किया। उनके आक्रमणकारियों ने जब वह रेड क्रौस का झण्डा देखा तो अपना हमला रोक दिया और बचाव दल आकर उन्हें सुरक्षित निकाल कर ले गया।

कलवरी के ल्रूस पर बहे मसीह यीशु के लहू के आगे हमारा शत्रु शैतान भी निरुपाय है और हमारा कुछ बिगाड़ नहीं सकता। मसीह का लहु उस महान त्याग का प्रतीक है जिसके कारण हम अपने पाप के दोष और उसके अनन्त मृत्यु के दण्ड की पकड़ से छूट सके। वह हमारे विरुद्ध शैतान के सभी दोषारोपणों से मिलने वाला सिद्ध संरक्षण है और हमारे पापों की क्षमा और पाप की प्रवृति पर विजय का प्रमाण है। इसी कारण हम मसीह के क्रूस में गर्व करते हैं।

यीशु मसीह को अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार करने के बाद कलवरी के क्रूस पर दिये गए उसके महान बलिदान की महिमा सदा हमारे जीवनों से होनी चाहिये। जो मसीह ने हमारे लिये किया उसके लिये प्रातः ही से हमें उसका आभारी होना चाहिये, सारे दिन उसके संरक्षण में रहना चाहिये और रात को उसपर विश्वास से विश्राम करना चाहिये।

मसीह के लहु से रंगे उस क्रूस के बलिदान ही से हमें पापों की क्षमा और उनके दण्ड से छुटकारा मिला है। - डेनिस डी हॉन


कलवरी शैतान को मिली हार का स्थान है।

जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है। - कुलुस्सियों १:१४


बाइबल पाठ: इब्रानियों ९:११-२८

परन्‍तु जब मसीह आने वाली अच्‍छी अच्‍छी वस्‍तुओं का महायाजक होकर आया, तो उस ने और भी बड़े और सिद्ध तम्बू से होकर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात सृष्‍टि का नहीं।
और बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्‍त छुटकारा प्राप्‍त किया।
क्‍योंकि जब बकरों और बैलों का लोहू और कलोर की राख अपवित्र लोगों पर छिड़के जाने से शरीर की शुद्धता के लिये पवित्र करती है।
तो मसीह का लोहू जिस ने अपने आप को सनातन आत्मा के द्वारा परमेश्वर के साम्हने निर्दोष चढ़ाया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से क्‍यों न शुद्ध करेगा, ताकि तुम जीवते परमेश्वर की सेवा करो।
और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, ताकि उस मृत्यु के द्वारा जो पहिली वाचा के समय के अपराधों से छुटकारा पाने के लिये हुई है, बुलाए हुए लोग प्रतिज्ञा के अनुसार अनन्‍त मीरास को प्राप्‍त करें।
क्‍योंकि जहां वाचा बान्‍धी गई है वहां वाचा बान्‍धने वाले की मृत्यु का समझ लेना भी अवश्य है।
क्‍योंकि ऐसी वाचा मरने पर पक्की होती है, और जब तक वाचा बान्‍धने वाला जीवित रहता है, तब तक वाचा काम की नहीं होती।
इसी लिये पहिली वाचा भी बिना लोहू के नहीं बान्‍धी गई।
क्‍योंकि जब मूसा सब लोगों को व्यवस्था की हर एक आज्ञा सुना चुका, तो उस ने बछड़ों और बकरों का लोहू लेकर, पानी और लाल ऊन, और जूफा के साथ, उस पुस्‍तक पर और सब लोगों पर छिड़क दिया।
और कहा, कि यह उस वाचा का लोहू है, जिस की आज्ञा परमेश्वर ने तुम्हारे लिये दी है।
और इसी रीति से उस ने तम्बू और सेवा के सारे सामान पर लोहू छिड़का।
और व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्‍तुएं लोहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं और बिना लोहू बहाए क्षमा नहीं होती।
इसलिये अवश्य है, कि स्‍वर्ग में की वस्‍तुओं के प्रतिरूप इन के द्वारा शुद्ध किए जाएं, पर स्‍वर्ग में की वस्‍तुएं आप इन से उत्तम बलिदानों के द्वारा।
क्‍योंकि मसीह ने उस हाथ के बनाए हुए पवित्र स्थान में जो सच्‍चे पवित्र स्थान का नमूना है, प्रवेश नहीं किया, पर स्‍वर्ग ही में प्रवेश किया, ताकि हमारे लिये अब परमेश्वर के साम्हने दिखाई दे।
यह नहीं कि वह अपने आप को बार बार चढ़ाए, जैसा कि महायाजक प्रति वर्ष दूसरे का लोहू लिये पवित्रस्थान में प्रवेश किया करता है।
नहीं तो जगत की उत्‍पत्ति से लेकर उस को बार बार दुख उठाना पड़ता; पर अब युग के अन्‍त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।
और जैसे मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।
वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ और जो लोग उस की बाट जोहते हैं, उन के उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप के दिखाई देगा।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २३-२५
  • मरकुस १४:१-२६

रविवार, 13 मार्च 2011

प्रेम की सामर्थ

एक गांव के प्रार्थना भवन की दीवार पर दो बारह वर्षीय युवकों की तसवीरें लगीं हैं। एक का नाम है रिक और दूसरे का रोज़ी। वे तसवीरें यादगार हैं एक दुर्घटना की जो कई साल पहले घटी थी। उस गांव के बच्चे एक झील पर नौका विहार के लिये गए थे। नौका अभियान के बाद वे किनारे लौटे और अपने खेमे लगाने लगे। तभी रोज़ी को पानी में कुछ तैरता दिखाई दिया, और वह उसे लेने के लिये नाव पानी में उतार कर उसकी ओर चल दिया। तेज़ हवाओं ने उसे शीघ्र ही किनारे से दूर धकेल दिया। उसकी खतरनाक दशा को देखकर उनके साथ के अधिकारियों ने दो नौकाएं और पानी में उतारीं के उसे बचा लाएं। जब रिक ने देखा कि उसका सबसे अच्छा मित्र खतरे में है तो उसने भी बचाव दल के साथ जाने का हठ किया और उनके साथ चल दिया। तेज़ हवाओं ने उन तीनों नौकाओं को झकझोर दिया और उलट दिया। बचाव दल के लोग किसी तरह तैरकर अपनी जान बचाने में सफल हुए लेकिन रिक और रोज़ी दोनो ही झील की गहराईयों में खो गए। उन दोनो की तसवीर के बीच में एक स्मृति-पटिका पर यह शब्द खुदे हैं "रिक, जिसने इतना प्रेम किया कि अपनी जान दूसरे के लिये दे दी। रोज़ी, जो ऐसे प्रेम के लायक था कि दूसरे ने उसके लिये अपनी जान दे दी।"

यह कहानी स्मरण दिलाती है " देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है..." (१ यूहन्ना ३:१) - ऐसा प्रेम कि हमारे पापों के लिये अपने पुत्र को बलिदान होने को दे दिया। और हम ऐसे प्रेम के भागी बने कि पुत्र स्वेच्छा से हमारे सन्ती बलिदान हो गया।

हमारा उद्धार ही उसके प्रेम की इस सामर्थ का सबसे महान प्रमाण है। - डेव एगनर


परमेश्वर के प्रेम का सच्चा माप यही है कि उसके प्रेम को मापा नहीं जा सकता।

देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है... - १ यूहन्ना ३:१


बाइबल पाठ : १ यूहन्ना ४:७-११

हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है और परमेश्वर को जानता है।
जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है।
जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २०-२२
  • मरकुस १३:२१-३७

शनिवार, 12 मार्च 2011

आत्मत्याग की कला

धार्मिक कलाकृतियों में पेलिकन नामक समुद्री तट पर पाए जाने वाले पक्षी को आत्मत्याग का प्रतीक माना जाता है। इस किंवदंती के प्रचलित होने का कारण है उनका सफेद रंग और उनकी बड़ी सी चोंच के सिरे का गहरे लाल रंग का होना। कहते हैं कि जब मादा पेलिकन अपने बच्चों के लिये भोजन नहीं जुटा पाती तो अपने सीने में अपनी चोंच मारकर अपने बच्चों का अपने लहू से पोषण करती है, इसीलिये उसकी चोंच लाल रंग की होती है। आरंभिक चर्च के लोगों ने इस बात में प्रभु यीशु मसीह द्वारा हमारे लिये किये गए कार्य का सुन्दर प्रतिरूप देखा और यह भी कि सच्चे मसीही विश्वासियों को कैसी गवाही रखनी चाहिये तथा पेलिकन को धार्मिक कलाकृतियों में आत्मत्याग का चित्रण करने के लिये ले लिया।

पेलिकन की यह किंवदंती न केवल प्रभु यीशु मसीह के व्यवहार को दर्शाती है, वरन हम जो उसके खून खरीदे सन्तान हैं, हमारे स्वरूप को भी दर्शाती है। पेलिकन के बच्चों की तरह, पाप में गिरी मनुष्य जाति भी, किसी भी कीमत पर, अपने लोभ और इच्छा की पूर्ति चाहती है। प्रभु यीशु मसीह ने अपने बलिदान के लहू द्वारा ऐसों को अपना लिया।

अब मसीही विश्वास में आ जाने के बाद हमारा व्यवहार भी स्वार्थी नहीं वरन आत्मत्याग का होना चाहिये। मसीह द्वारा हमारे नए किये जाने के बाद हमें भी मसीह के समान आत्मत्याग की कला का अभ्यास करते रहना चाहिये। - मार्ट डी हॉन


प्रेम से प्रेरित किये गए आत्मत्याग के समान परमेश्वर को और कुछ सन्तुष्ट नहीं कर सकता।

परन्‍तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता: कि उसे प्रीय जानूं, वरन यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवाकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है। - प्रेरितों २०:२४


बाइबल पाठ: प्रेरितों के काम २०:१७-२७

और उस ने मीलेतुस से इफिसुस में कहला भेजा, और कलीसिया के प्राचीनों को बुलवाया।
जब वे उस के पास आए, तो उन से कहा, तुम जानते हो, कि पहिले ही दिन से जब मैं आसिया में पहुंचा, मैं हर समय तुम्हारे साथ किस प्रकार रहा।
अर्थात बड़ी दीनता से, और आंसू बहा बहाकर, और उन परीक्षाओं में जो यहूदियों के षडयन्‍त्र के कारण मुझ पर आ पड़ीं, मैं प्रभु की सेवा करता ही रहा।
और जो जो बातें तुम्हारे लाभ की थीं, उन को बताने और लोगों के साम्हने और घर घर सिखाने से कभी न झिझका।
वरन यहूदियों और यूनानियों के साम्हने गवाही देता रहा, कि परमेश्वर की ओर मन फिराना, और हमारे प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करना चाहिए।
और अब देखो, मैं आत्मा में बन्‍धा हुआ यरूशलेम को जाता हूं, और नहीं जानता, कि वहां मुझ पर क्‍या क्‍या बीतेगा
केवल यह कि पवित्र आत्मा हर नगर में गवाही दे देकर मुझ से कहता है, कि बन्‍धन और क्‍लेश तेरे लिये तैयार हैं।
परन्‍तु मैं अपने प्राण को कुछ नहीं समझता: कि उसे प्रीय जानूं, वरन यह कि मैं अपनी दौड़ को, और उस सेवाकाई को पूरी करूं, जो मैं ने परमेश्वर के अनुग्रह के सुसमाचार पर गवाही देने के लिये प्रभु यीशु से पाई है।
और अब देखो, मैं जानता हूं, कि तुम सब जिन से मैं परमेश्वर के राज्य का प्रचार करता फिरा, मेरा मुंह फिर न देखोगे।
इसलिये मैं आज के दिन तुम से गवाही देकर कहता हूं, कि मैं सब के लोहू से निर्दोष हूं।
क्‍योंकि मैं परमेश्वर की सारी मनसा को तुम्हें पूरी रीति से बनाने से न झिझका।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण १७-१९
  • मरकुस १३:१-२०

शुक्रवार, 11 मार्च 2011

सिद्धांत - स्वतंत्रता का या प्रेम का

अमेरिका में, जहां सड़क के दाहिनी ओर चलने का नियम है, कई प्रांतों में चौराहों की लाल बत्ती पर दाहिनी ओर मुड़ने की अनुमति है, यदि मार्ग साफ हो और कोई अन्य उस ओर से न आ-जा रहा हो। यह वाहन चालकों को दी गई स्वतंत्रता है। लेकिन कुछ चौराहों पर चेतावनी लगी होती है "दाहिनी ओर मुड़ना मना है" क्योंकि वे चौराहे खतरनाक हैं और वहां दुर्घटना की संभावना अधिक है।

बाइबल में १ कुरिन्थियों ८ अध्याय में भी मसीही स्वतंत्रता के संबंध में कुछ ऐसी ही परिस्थिति है। पौलुस मूर्तियों को भेंट के रूप में चढ़ाई गई भोजन वस्तुओं को खाने के लिये स्वतंत्रता था। उसे मालूम था कि मूर्तियां कुछ नहीं होतीं और उन पर चढ़ाई गई भोजन वस्तु खाना न सही था न गलत।

परन्तु सभी विश्वासी ऐसा नहीं समझते थे। वे जिनके विवेक कमज़ोर थे मानते थे कि मूर्ति को चढ़ाने से भोजन वस्तु अशुद्ध हो गई है इसलिये अब उसे नहीं खाना चाहिये। पौलुस ने इस बात का ध्यान किया कि इस विष्य में उसे विशेष सावधानी बरतनी है, कहीं उसके ऐसा भोजन खाने से वह कमज़ोर विवेक वाला ठोकर न खाए। विश्वास में नए और अपरिपक्व लोगों के विवेक की चिंता ने उसे अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करने से रोक कर रखा।

मसिही विश्वासी मसीह में स्वतंत्र हैं समाज की उन बातों में भाग लेने के लिये जिनके विष्य में बाइबल स्पष्ट रूप से मना नहीं करती, लेकिन परमेश्वर का पवित्र आत्मा किन्ही परिस्थितियों में हमें कुछ ऐसी जायज़ बातों में भाग लेने से मना कर सकता है। ये हमारे वे निर्ण्य हैं जहां प्रेम के सिद्धांत का पालन स्वतंत्रता के सिद्धांत के पालन से ऊपर होता है।

एक परिपक्व मसीही विश्वासी अपने कमज़ोर साथी का ध्यान करके किसी "लाल बत्ती" पर बिना ध्यान किये " वर्जित दाहिने" नहीं मुड़ेगा। - डेनिस डी हॉन


जब तक हम सही करने के कर्तव्य को नहीं निभाते, हमें अपनी मर्ज़ी करने की स्वतंत्रता भी नहीं निभा सकते।

परन्‍तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारी यह स्‍वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए। - १ कुरिन्थियों ८:९


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ८

अब मूरतों के साम्हने बलि की हुई वस्‍तुओं के विषय में हम जानते हैं, कि हम सब को ज्ञान है: ज्ञान घमण्‍ड उत्‍पन्न करता है, परन्‍तु प्रेम से उन्नति होती है।
यदि कोई समझे, कि मैं कुछ जानता हूं, तो जैसा जानना चाहिए वैसा अब तक नहीं जानता।
परन्‍तु यदि कोई परमेश्वर से प्रेम रखता है, तो उसे परमेश्वर पहिचानता है।
सो मूरतों के साम्हने बलि की हुई वस्‍तुओं के खाने के विषय में हम जानते हैं, कि मूरत जगत में कोई वस्‍तु नहीं, और एक को छोड़ और कोई परमेश्वर नहीं।
यद्यपि आकाश में और पृथ्वी पर बहुत से ईश्वर कहलाते हैं, (जैसा कि बहुत से ईश्वर ओर बहुत से प्रभु हैं)।
तौभी हमारे निकट तो एक ही परमेश्वर है: अर्थात पिता जिस की ओर से सब वस्‍तुएं हैं, और हम उसी के लिये हैं, और एक ही प्रभु है, अर्थात यीशु मसीह जिस के द्वारा सब वस्‍तुएं हुई, और हम भी उसी के द्वारा हैं।
परन्‍तु सब को यह ज्ञान नही; परन्‍तु कितने तो अब तक मूरत को कुछ समझने के कारण मूरतों के साम्हने बलि की हुई को कुछ वस्‍तु समझ कर खाते हैं, और उन का विवेक निर्बल होकर अशुद्ध होता है।
भोजन हमें परमेश्वर के निकट नहीं पहुंचाता, यदि हम न खांए, तो हमारी कुछ हानि नहीं, और यदि खाएं, तो कुछ लाभ नहीं।
परन्‍तु चौकस रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारी यह स्‍वतंत्रता कहीं निर्बलों के लिये ठोकर का कारण हो जाए।
क्‍योंकि यदि कोई तुझ ज्ञानी को मूरत के मन्‍दिर में भोजन करते देखे, और वह निर्बल जन हो, तो क्‍या उसके विवेक में मूरत के साम्हने बलि की हुई वस्‍तु के खाने का हियाव न हो जाएगा?
इस रीति से तेरे ज्ञान के कारण वह निर्बल भाई जिस के लिये मसीह मरा नाश हो जाएगा।
सो भाइयों का अपराध करने से ओर उन के निर्बल विवेक को चोट देने से तुम मसीह का अपराध करते हो।
इस कारण यदि भोजन मेरे भाई को ठोकर खिलाए, तो मैं कभी किसी रीति से मांस न खाऊंगा, न हो कि मैं अपने भाई के ठोकर का कारण बनूं।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण १४-१६
  • मरकुस १२:२८-४४

गुरुवार, 10 मार्च 2011

मजबूरी अथवा स्वेच्छा?

कुछ मसीही सेवक अपने मसीही विश्वास में आने के बारे में बातचीत कर रहे थे। अधिकांश ने बड़े नाटकीय ढंग से हुए अपने परिवर्तन के बारे में बताया, और उन्हें वह समय और स्थान याद था जब उन्होंने मसीह पर विश्वास किया और अपना जीवन उसे समर्पित किया। लेकिन उनमें एक ऐसा था जो एक मसीही घराने में पैदा-पला-बड़ा हुआ था; उसने कहा "मुझे जहां तक याद आता है, मैंने सदा ही मसीह को जाना है और उससे प्रेम किया है; लेकिन मुझे यह भी याद है कि कब मेरे लिये मजबूरी एक स्वेच्छा और प्रेम का कार्य बन गयी।"

यही हमारे विश्वास की वास्तविक्ता की परख है - परमेश्वर का आत्मा जो मसीही विश्वासी के अन्दर निवास करता है, उसे परमेश्वर के प्रति ऐसे प्रेम से भर देता है कि फिर परमेश्वर की आज्ञाकारिता उसके लिये मजबूरी या बन्धन नहीं वरन हृदय के नये हो जाने से प्रेम के प्रत्युतर में किया गया कार्य हो जाती है। जब पौलुस ने २ कुरिन्थियों ३:६ में लिखा "... शब्‍द के सेवक नहीं वरन आत्मा के, क्‍योंकि शब्‍द मारता है, पर आत्मा जिलाता है" तो उसका यही अर्थ था।

यदि परमेश्वर के लिये हमारी सेवा केवल किसी मजबूरी या बन्धन या रीति के अन्तर्गत या किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिये है और उसमें प्रेम की स्वेच्छा नहीं है तो वह सच्ची सेवा नहीं; वह फिर मनुष्यों के बनाए नियमों के अन्तर्गत किया गया मजबूरी का पालन है, जिससे मनुष्य तो प्रसन्न या सन्तुष्ट हो सकते हैं परन्तु परमेश्वर नहीं।

मसीही विश्वासी होने के नाते, यदि कभी परमेश्वर की सेवा स्वेच्छा नहीं मजबूरी लगने लगे तो हमें थोड़ा ठहर कर प्रभु यीशु द्वारा हमारे उद्धार के लिये चुकाई गई कीमत पर विचार करना चाहिये। हमारे प्रति अपने प्रेम के कारण परमेश्वर ने अपने पुत्र के ऊपर वह दण्ड रख दिया जिसका हमें भागी होना चाहिये था। क्या इतने महान प्रेम और इतने बड़े बलिदान के सामने कोई भी आज्ञाकारिता मजबूरी बन सकती है?

जब हम अपने और परमेश्वर के संबंधों के बीच में आने वाले पापों को मान कर परमेश्वर से क्षमा मांग लेते हैं और परमेश्वर के आत्मा से विनती करते हैं कि वह हमें अपनी उपस्थिति से भर दे, तो परमेश्वर के अद्भुत प्रेम का एक नया अनुभव हमें मिलता है और पुनः हमारे लिये "मजबूरी" स्वेच्छा में बदल जाती है। - डेनिस डी हॉन


"नियम" हमें बाध्य करते हैं, प्रेम हमें स्वतंत्र करता है।

...क्‍योंकि शब्‍द मारता है, पर आत्मा जिलाता है। - २ कुरिन्थियों ३:६


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ३:१-१०

क्‍या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगें या हमें कितनों कि नाईं सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं?
हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे ह्रृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है।
यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाई लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्‍तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्‍तु ह्रृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है।
हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं।
यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें, पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है।
जिस ने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्‍द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्‍योंकि शब्‍द मारता है, पर आत्मा जिलाता है।
और यदि मृत्यु की यह वाचा जिस के अक्षर पत्थरों पर खोद गए थे, यहां तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुंह पर के तेज के कराण जो घटता भी जाता था, इस्‍त्राएल उसके मुंह पर दृष्‍टि नहीं कर सकते थे।
तो आत्मा की वाचा और भी तेजोमय क्‍यों न होगी?
क्‍योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी तेजोमय क्‍यों न होगी?
और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उस से बढ़ कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण ११-१३
  • मरकुस १२:१-२७