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रविवार, 22 मई 2011

शब्दों की आड़

अकसर लोग अपने मन की बात सच्चाई से कहने में झिझकते हैं और उसे शब्दों की आड़ के पीछे छुपाने का प्रयास करते हैं लेकिन उनके शब्द उनकी मनोभावनाओं के अनुकूल नहीं होते। न्यूयॉर्क के एक वकील जैराल्ड निरेनबर्ग ने इस विष्य पर एक पुस्तक लिखी जिसका शीर्षक है Meta Talk: Guide to Hidden Meanings in Conversation. इस पुस्तक में उन्होंने छुपी या गोल-मोल बात बनाने के ३५० उदाहरण दिये हैं।

एक संवाद विशेषज्ञ का मानना है कि लोग इस बात से डरते हैं कि ईमानदारी से कहे गई उनकी बातों के कारण उन्हें मित्रता, प्रेम, आदर का नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए या तो वे अपने होंठ बन्द रखते हैं या वे जो कहना चाहते हैं उसे घुमा फिराकर अस्पष्ट रूप से कहते हैं। अपने प्रति हीन भावना या दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का भय भी लोगों के स्पष्ट और सही बात कहने में बाधा बनते हैं।

मसीही विश्वासी भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। ईमानदार रहना और किसी को ठेस पहुँचाए बिना सत्य बोलना, दोनो को एक साथ निभा पाना बहुत कठिन हो सकता। बाइबल इस समस्या का संतुलित हल देती है। प्रभु यीशु का जीवन इस का सजीव उदाहरण है। उन्हों ने सदा ही सत्य बोला, कभी मक्कारी नहीं करी, न ही किसी से घुमा-फिरा कर बातों करीं और न किसी को दोगली बातों में उलझाया; तौ भी कभी किसी ने उन पर अपमान जनक व्यवहार का दोष नहीं लगाया। इस का कारण था उनका सदा नम्रता और करुणा का व्यवहार रखना, कभी घमण्ड न करना और न किसी को नीचा दिखाने का व्यवहार करना और सदा दूसरों की भलाई तथा सहायता में कार्यरत रहना।

परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि हम कैसे सच्चे और ईमानदार रहते हुए भी किसी को ठेस पहुँचाने से बच सकते हैं। याकूब की पत्री के तीसरे अध्याय में स्वर्गीय ज्ञान के बारे में बताया गया है जो हमें ईमानदार और मृदु रख सकता है, क्योंकि "जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है" (याकूब ३:१७)। इसलिए इस स्वर्गीय ज्ञान और समझ बूझ के साथ हम प्रभु यीशु के समान हम अपनी बात चीत और व्यवहार में ईमानदार किंतु मृदु रह सकते हैं।

जो मसीही विश्वासी इस स्वर्गीय ज्ञान को अपना बोलचाल और व्यवहार निर्धारित करने देंगे उन्हें फिर कभी शब्दों की आड़ से अपनी बात नहीं कहनी पड़ेगी। - मार्ट डी हॉन


नम्रता से कहे गए वचन सुनने में हलके लगते हैं किंतु उनका प्रभाव भारी होता है।

बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। - नीतिवचन १६:२३


बाइबल पाठ:
याकूब
Jas 3:1 हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्‍योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे।
Jas 3:2 इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।
Jas 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
Jas 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्‍छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
Jas 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े बन में आग लग जाती है।
Jas 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्‍ड की आग से जलती रहती है।
Jas 3:7 क्‍योंकि हर प्रकार के वन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
Jas 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रूकती ही नहीं, वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
Jas 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्‍पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
Jas 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
Jas 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नही होना चाहिए।
Jas 3:12 क्‍या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलता है? हे मेरे भाइयों, क्‍या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।
Jas 3:13 तुम में ज्ञानवान और समझदार कौन है? जो ऐसा हो वह अपने कामों को अच्‍छे चालचलन से उस नम्रता सहित प्रगट करे जो ज्ञान से उत्‍पन्न होती है।
Jas 3:14 पर यदि तुम अपने अपने मन में कड़वी डाह और विरोध रखते हो, तो सत्य के विरोध में घमण्‍ड न करना, और न तो झूठ बोलना।
Jas 3:15 यह ज्ञान वह नहीं, जो ऊपर से उतरता है वरन सांसारिक, और शारीरिक, और शैतानी है।
Jas 3:16 इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है।
Jas 3:17 पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है।
Jas 3:18 और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १६-१८
  • यूहन्ना ७:२८-५३

शनिवार, 21 मई 2011

सर्वोत्तम निवेदन

एक फारसी दार्शनिक से पूछा गया कि उसने इतना ज्ञान कैसे अर्जित किया? उसने उत्तर दिया, "मैंने घमंड को कभी अपने आड़े आने नहीं दिया; यदि मैं किसी चीज़ के बारे में नहीं जानता था तो बिना झिझके पूछ लिया करता था।"

जीवन निर्वाह करने के लिए हम सब को समझ-बूझ चाहिए। नवयुवक वयस्क होते समय सोचते हैं कि मैं अपने जीवन में क्या करूँ? वयस्क नौकरी, परिवार की ज़िम्मेदारियों तथा कई अन्य निर्णयों के बारे में सोचते हैं जिनके बहुत दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। अकसर हम परमेश्वर से समझ-बूझ इसलिए माँगते हैं कि उसके द्वारा हम धन और रुतबा अर्जित कर सकें। लेकिन हम परमेश्वर को झाँसा नहीं दे सकते; वह हमारी मनसा तथा उद्देश्य जानता है। जो उसका आदर करते हैं, उन्हें वह यह सब स्वतः ही दे देता है।

यद्यपि सुलेमान इस्त्राएल का राजा था, तौ भी उसे अपनी समझ-बूझ की सीमाएं स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं थी। लेकिन वह केवल सांसारिक ज्ञान पाने ही से संतुष्ट नहीं था, उसे ज्ञान से भी अधिक परमेश्वर की लालसा थी। जब परमेश्वर ने उससे पूछा कि तू क्या चाहता है कि मैं तुझे दूँ, तो सुलेमान ने परमेश्वर से केवल एक ही निवेदन किया; उसने माँगा कि परमेश्वर उसे अपनी प्रजा का खरा न्याय करने की सामर्थ और सदबुद्धि दे। परमेश्वर ने उसे न केवल यह सामर्थ दी वरन असीम दौलत, वैभव और आदर भी साथ में दे दिया।

हमें अपने हृदयों को टटोलने और परमेश्वर से ज्ञान तथा समझ-बूझ पाने के अपने वास्तस्विक उद्देश्य का उसके सामने अंगीकार करने की आवश्यक्ता है। जब हम अपनी प्राथमिकताएं सही निर्धारित कर लेंगे, तब हम परमेश्वर से याकूब १:५ में उसकी दी हुई प्रतिज्ञा "पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उस को दी जाएगी" को भी बेझिझक माँग सकते हैं।

यदि हमारी दिली इच्छा अपने जीवन से परमेश्वर का आदर करने की है, तो परमेश्वर से समझ-बूझ पाने के सर्वोत्तम निवेदन को करने में हमें कोई रुकावट नहीं। - डेनिस डी हॉन


वे ही बुद्धिमान हैं जो परमेश्वर को अपना गुरू बना लेते हैं।

अब मुझे ऐसी बुद्धि और ज्ञान दे, कि मैं इस प्रजा के साम्हने अन्दर-बाहर आना-जाना कर सकूं, क्योंकि कौन ऐसा है कि तेरी इतनी बड़ी प्रजा का न्याय कर सके? - २ इतिहास १:१०


बाइबल पाठ: २ इतिहास १:१- १२

2Ch 1:1 दाऊद का पुत्र सुलैमान राज्य में स्थिर हो गया, और उसका परमेश्वर यहोवा उसके संग रहा और उसको बहुत ही बढ़ाया।
2Ch 1:2 और सुलैमान ने सारे इस्राएल से, अर्थात सहस्रपतियों, शतपतियों, न्यायियों और इस्राएल के सब रईसों से जो पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरुष थे, बातें कीं।
2Ch 1:3 और सुलैमान पूरी मण्डली समेत गिबोन के ऊंचे स्थान पर गया, क्योंकि परमेश्वर का मिलाप वाला तम्बू, जिसे यहोवा के दास मूसा ने जंगल में बनाया था, वह वहीं पर था।
2Ch 1:4 परन्तु परमेश्वर के सन्दूक को दाऊद किर्यत्यारीम से उस स्थान पर ले आया था जिसे उस ने उसके लिये तैयार किया था, उस ने तो उसके लिये यरूशलेम में एक तम्बू खड़ा कराया था।
2Ch 1:5 और पीतल की जो वेदी ऊरी के पुत्र बसलेल ने, जो हूर का पोता था, बनाई थी, वह गिबोन में यहोवा के निवास के साम्हने थी। इसलिये सुलैमान मण्डली समेत उसके पास गया।
2Ch 1:6 और सुलैमान ने वहीं उस पीतल की वेदी के पास जाकर, जो यहोवा के साम्हने मिलाप वाले तम्बू के पास थी, उस पर एक हजार होमबलि चढ़ाए।
2Ch 1:7 उसी दिन रात को परमेश्वर ने सुलैमान को दर्शन देकर उस से कहा, जो कुछ तू चाहे कि मैं तुझे दूं, वह मांग।
2Ch 1:8 सुलैमान ने परमेश्वर से कहा, तू मेरे पिता दाऊद पर बड़ी करुणा करता रहा और मुझ को उसके स्थान पर राजा बनाया है।
2Ch 1:9 अब हे यहोवा परमेश्वर ! जो वचन तू ने मेरे पिता दाऊद को दिया था, वह पूरा हो; तू ने तो मुझे ऐसी प्रजा का राजा बनाया है जो भूमि की धूलि के किनकों के समान बहुत है।
2Ch 1:10 अब मुझे ऐसी बुद्धि और ज्ञान दे, कि मैं इस प्रजा के साम्हने अन्दर- बाहर आना-जाना कर सकूं, क्योंकि कौन ऐसा है कि तेरी इतनी बड़ी प्रजा का न्याय कर सके?
2Ch 1:11 परमेश्वर ने सुलैमान से कहा, तेरी जो ऐसी ही मनसा हुई, अर्थात तू ने न तो धन सम्पत्ति मांगी है, न ऐश्वर्य और न अपने बैरियों का प्राण और न अपनी दीर्घायु मांगी, केवल बुद्धि और ज्ञान का वर मांगा है, जिस से तू मेरी प्रजा का जिसके ऊपर मैं ने तुझे राजा नियुक्त किया है, न्याय कर सके,
2Ch 1:12 इस कारण बुद्धि और ज्ञान तुझे दिया जाता है। और मैं तुझे इतना धन सम्पत्ति और ऐश्वर्य दूंगा, जितना न तो तुझ से पहिले किसी राजा को, मिला और न तेरे बाद किसी राजा को मिलेगा।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १३-१५
  • यूहन्ना ७:१-२७

शुक्रवार, 20 मई 2011

आईये गाएं

संगीत का भक्ति में सदा महत्वपूर्ण स्थान रहा है। परमेश्वर के मन्दिर में आराधना करने वाले भजन गाया करते थे। प्रभु यीशु और उनके चेलों ने प्रभु भोज के बाद भजन गाया (मत्ती २६:३०)। पौलुस ने विश्वासियों को प्रोत्साहित किया कि "आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो" (इफिसीयों ५:१९)।

भजन गाने का उद्देश्य केवल लोगों को आते सन्देश के लिए तैयार करना ही नहीं है, यदि ऐसा होता तो भक्ति संगीत केवल एक व्यर्थ औपचारिकता बन के रह जाता। पौलुस इस प्रकार भजन गाने से कभी सहमत नहीं होता, क्योंकि उसका दृढ़ विश्वास था कि खराई से प्रचार किया गया सुसमाचार ही "उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है" (रोमियों १:१६)। हम भक्ति संगीत द्वारा प्रभावी रूप से परमेश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं, अपनी विनतियाँ उसके सामने प्रस्तुत कर सकते हैं और अपने विश्वास की गवाही संसार के सामने रख सकते हैं।

भजन ३३ में इस्त्राएलियों को परमेश्वर के सामर्थी वचन के लिए, उसके कभी असफल न होने वाले मार्गदर्शन के लिए और सदा अपने लोगों के प्रति बनी रहने वाली उसकी देखभाल के लिए स्तुति गाने को कहा गया है। जब पौलुस और सिलास बन्दीगृह में डाल दिये गए थे, उनके पाँव काठ में ठोक दिये गए और कोड़े मार मार कर उनकी पीठ उधेड़ दी गई, तब उस हालत में भी वे भजन गा रहे थे क्योंकि उनके मन उद्धार के आनन्द से भरे हुए थे (प्रेरितों १६:२५)।

यदि हम वास्तव में प्रभु से प्रेम करते हैं, तो हम उत्साहपूर्वक उसके आराधकों के साथ मिलकर उसकी स्तुति अवश्य गाएंगे। जब हम अकेले हों और हमारे हृदय आराधना से भरे हों, तब भी हम ऊँचे स्वर में गा सकते हैं, बिना इस बात की चिंता करे कि हम कैसा गा रहे हैं।

दिल से निकली कैसी भी आराधना परमेश्वर को प्रसन्न करती है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


संगीत दिल के उन भावों को अभिव्यक्त कर सकता है जिन्हें हम शब्दों में ला पाते, लेकिन जिनके बारे में हम खामोश भी नहीं रह पाते।

हे धर्मियों यहोवा के कारण जयजयकार करो क्योंकि धर्मी लोगों को स्तुति करनी सोहती है। - भजन ३३:१


बाइबल पाठ: भजन ३३:१-११

Psa 33:1 हे धर्मियों यहोवा के कारण जयजयकार करो क्योंकि धर्मी लोगों को स्तुति करनी सोहती है।
Psa 33:2 वीणा बजा बजाकर यहोवा का धन्यवाद करो, दस तार वाली सारंगी बजा बजाकर उसका भजन गाओ।
Psa 33:3 उसके लिये नया गीत गाओ, जयजयकार के साथ भली भांति बजाओ।
Psa 33:4 क्योंकि यहोवा का वचन सीधा है, और उसका सब काम सच्चाई से होता है।
Psa 33:5 वह धर्म और न्याय से प्रीति रखता है, यहोवा की करूणा से पृथ्वी भरपूर है।
Psa 33:6 आकाशमण्डल यहोवा के वचन से, और उसके सारे गण उसके मुंह की श्वास से बने।
Psa 33:7 वह समुद्र का जल ढेर की नाई इकट्ठा करता; वह गहिरे सागर को अपने भण्डार में रखता है।
Psa 33:8 सारी पृथ्वी के लोग यहोवा से डरें, जगत के सब निवासी उसका भय मानें!
Psa 33:9 क्योंकि जब उस ने कहा, तब हो गया; जब उस ने आज्ञा दी, तब वास्तव में वैसा ही हो गया।
Psa 33:10 यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है।
Psa 33:11 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १०-१२
  • यूहन्ना ६:४५-७१

गुरुवार, 19 मई 2011

प्रशंसा

एक संगीत समालोचक को वायलिन वादक पर्लमैन की प्रशंसा कर पाने के लिए काफी शब्द नहीं मिल पा रहे थे। पर्लमैन Grand Rapid Symphony नामक वाद्यवृंद के साथ मेहमान एकल वायलिन वाद्क के रूप में प्रस्तुत हुआ था, और उसने वाद्यवृन्द के साथ एक बहुत ही कठिन धुन बजाई थी। समालोचक ने लिखा, "उनका वायलिन बजाने का ढंग इतना स्वाभाविक होते हुए भी इतना सिद्ध है कि वे संगीत के ताल और लय को सिद्धता से निभाते हुए भी ऐसे प्रतीत होते हैं कि जैसे उन्हें इसके लिए कोई प्रयास करना ही नहीं पड़ रहा हो। संगीत की गति कैसी भी हो, उनका हर सुर अपनी बिलकुल सही जगह पर लगा हुआ, और अन्य सुरों के साथ पूरे ताल-मेल में स्पष्ट सुनाई देता है। उन्होंने वाद्यवृन्द के अन्य साज़ों के साथ मिलकर और एकल रूप में ऐसे बजाया मानो उनके वायलिन और अन्य साज़ों में कोई संगीतमयी वार्तालाप चल रहा हो और वे उन अन्य साज़ों से अपनी बात भी कह रहे हों और उनकी बातों का उत्तर भी दे रहे हों।"

ऐसी अतिश्य प्रशंसा मुझे विचिलित करती है; इसलिए नहीं कि इससे पर्लमैन को आदर मिला - वे इस आदर के पूरे हकदार हैं। मैं इसलिए विचिलित होता हूँ कि मैंने शायद ही कभी किसी को परमेश्वर की प्रशंसा ऐसे खुले दिल और उदार शब्दों में करते हुए सुना हो। अवश्य ही हमारा परमेश्वर जिसने वायलिन वादक को रचा, अपनी इस उत्कृष्ट रचना के लिए, उस वायलिन वादक से, जिसने अपने परमेश्वर प्रदित गुण का प्रदर्शन किया, और भी अधिक प्रशंसा के योग्य है।

हम जो परमेश्वर को जानते हैं, क्या हमें उसकी महिमा, वैभव और उसके अद्भुत कार्यों का वर्णन उस समालोचक के संगीत प्रशंसा से भी अधिक उत्साह और विस्तार से नहीं करना चाहिए? - मार्ट डी हॉन


यदि मसीही विश्वासी परमेश्वर पर बेहतर विश्वास करें, तो संसार परमेश्वर पर संदेह कम करेगा।

याह की स्तुति करो। हे मेरे मन यहोवा की स्तुति कर! - भजन १४६:१

बाइबल पाठ: भजन १४८
Psa 148:1 याह की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊंचे स्थानों में करो!
Psa 148:2 हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर!
Psa 148:3 हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो!
Psa 148:4 हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपर वाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो।
Psa 148:5 वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और थे सिरजे गए।
Psa 148:6 और उस ने उनको सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं।
Psa 148:7 पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर,
Psa 148:8 हे अग्नि और ओलो, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन मानने वाली प्रचण्ड बयार!
Psa 148:9 हे पहाड़ों और सब टीलो, हे फलदाई वृक्षों और सब देवदारों!
Psa 148:10 हे वन-पशुओं और सब घरैलू पशुओं, हे रेंगने वाले जन्तुओं और हे पक्षियों!
Psa 148:11 हे पृथ्वी के राजाओं, और राज्य राज्य के सब लोगों, हे हाकिमों और पृथ्वी के सब न्यायियों!
Psa 148:12 हे जवानों और कुमारियों, हे पुरनियों और बालकों!
Psa 148:13 यहोवा के नाम की स्तुति करो, क्योंकि केवल उसकी का नाम महान है; उसका ऐश्वर्य पृथ्वी और आकाश के ऊपर है।
Psa 148:14 और उस ने अपनी प्रजा के लिये एक सींग ऊंचा किया है; यह उसके सब भक्तों के लिये अर्थात् इस्राएलियों के लिये और उसके समीप रहने वाली प्रजा के लिये स्तुति करने का विषय है। याह की स्तुति करो।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास ७-९
  • यूहन्ना ६:२२-२४

बुधवार, 18 मई 2011

सर्वप्रधान

विख्यात मसीही लेखक A. W. Tozer ने अपनी पुस्तक "The Pursuit of God" में आराधना के एक महान गीत "The Faith of Our Fathers" के लेखक फ्रेड्रिक फेबर को श्रद्धाँजलि अर्पित करते हुए उनके बारे में लिखा कि, "मसीह के प्रति उनका प्रेम इतना प्रचण्ड था कि मानो वे उसमें सुलग रहे थे; यह प्रेम उनके अन्दर एक धधकती हुई ज्वाला के समान था जो उनके मुख से पिघले हुए सोने के समान बहता था। अपने एक सन्देश में फेबर ने कहा, ’हम परमेश्वर के मन्दिर में जिस ओर भी दृष्टि करें, हमें मसीह दिखाई देता है.....सृष्टि में ऐसा कुछ भी भला, पवित्र, सुन्दर, आनन्दमयी नहीं है, जो मसीह अपने सेवकों के लिए न बन जाए....किसी को निराश होने की आवश्यक्ता नहीं है क्योंकि यीशु स्वर्ग का आनन्द है और यीशु का आनन्द है शोकित हृदयों में आकर उन्हें प्रफुल्लित कर देना। हम कई बातों का बयान बढ़ा-चढ़ा कर कर सकते हैं, लेकिन कभी भी हमारे प्रति मसीह यीशु के प्रेम को अथवा मसीह के प्रति हमारे कर्तव्य का पूरा वर्णन कर पाना संभव नहीं। यदि हम अपना सारा जीवन यीशु मसीह के बारे में बताने में लगा दें तो भी उसके विष्य में जो कुछ मधुर कहा जा सकता है, उसे पूरा कह पाना संभव नहीं हो पाएगा।’"

हम कभी भी मसीह की महानता का वर्णन अतिश्योक्तिपूर्वक नहीं कर सकते। पौलुस ने प्रभु यीशु मसीह के विष्य में कहा, "वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुतांए, क्‍या प्रधानताएं, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्‍तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।" (कुलुस्सियों १:१५-१७)

मसीह यीशु वास्तव में सर्वप्रधान है और हमारी प्रेम पूर्ण आराधना का एकमात्र सच्चा हकदार भी। - रिचर्ड डी हॉन


जब हम मसीह यीशु के प्रभुत्व को स्वीकार करेंगे, तभी हम उसकी आरधाना भी कर सकेंगे।

और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है - कुलुस्सियों १:१८


बाइबल पाठ: कुलुस्सियों १:९-१९

Col 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Col 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Col 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Col 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Col 1:13 उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Col 1:14 जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
Col 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Col 1:16 क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुतांए, क्‍या प्रधानताएं, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Col 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्‍तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Col 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
Col 1:19 क्‍योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास ४-६
  • यूहन्ना ६:१-२१

मंगलवार, 17 मई 2011

आराधना की प्रेरणा

दो वर्ष की आयु से अन्धी और बहरी हेलेन कीलर से एक बालक ने पूछा, "क्या अन्धा होना संसार का सबसे बड़ा दुर्भाग्य नहीं है?" मुस्कुराते हुए हेलेन कीलर ने उत्तर दिया, "दो अच्छी आँखें रहते हुए भी न देख सकने वालों के दुर्भाग्य से तो आधा भी नहीं है।"

कई लोग, अच्छी दृष्टि और सुनने की क्षमता के बावजूद, अपने आस-पास प्रकृति के सुन्दर दृश्यों और मधुर ध्वनियों से अछूते रहते हैं। उनका ध्यान कभी ऊंचे शानदार पेड़ों के सौन्दर्य, झील के शांत वातावरण, सितारों से भरे आकाश की भव्यता आदि की ओर नहीं जाता।

जब हम परमेश्वर की सृष्टि की अद्भुत बातों को देखकर उसकी आराधना करते हैं तो यह परमेश्वर को भाता है। परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित होकर दाउद ने भजन २९ में आँधी का वर्णन किया, उसे यहोवा की प्रतापमय वाणी कहा। भजनकार ने अपने वर्णन में आँधी के उठकर देश पर छा जाने, विशाल देवदारों के वृक्षों को हिला कर तोड़ डालने और जंगल में पतझड़ कर देने को दर्शाया है। जब परमेश्वर के मन्दिर में इस भजन को गाया जाता था तो लोग परमेश्वर की स्तुति में ’महिमा हो’ कहते थे।

कोई आता तूफान और गरजती कौन्धती बिजली परमेश्वर की सामर्थ का दर्शन है। हमारे आस-पास प्रकृति के दृश्य और आवाज़ें परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि के लिए उसकी आराधना करने को हमें प्रेरित करती हैं।

जब हम बाहर निकल कर ताज़ी हवा में साँस लेते हैं, तो एक पल रुक कर परमेश्वर को जीवन के लिए धन्यवाद करें, और उसके लिए जीने और उसकी आराधना करने को सदैव तत्पर रहें। - हर्ब वैन्डर लुग्ट



प्रकृति परमेश्वर की लिखाई है, उसके सौन्दर्य को निहारना और उससे आनन्दित होना सीखिए।

आज वह दिन है जो यहोवा ने बनाया है, हम इस में मगन और आनन्दित हों। - भजन ११८:२४


बाइबल पाठ: भजन २९

Psa 29:1 हे परमेश्वर के पुत्रों यहोवा का, हां यहोवा ही का गुणानुवाद करो, यहोवा की महिमा और सामर्थ को सराहो।
Psa 29:2 यहोवा के नाम की महिमा करो; पवित्रता से शोभायमान होकर यहोवा को दण्डवत करो।
Psa 29:3 यहोवा की वाणी मेघों के ऊपर सुन पड़ती है, प्रतापी ईश्वर गरजता है, यहोवा घने मेघों के ऊपर रहता है।
Psa 29:4 यहोवा की वाणी शक्तिशाली है, यहोवा की वाणी प्रतापमय है।
Psa 29:5 यहोवा की वाणी देवदारों को तोड़ डालती है, यहोवा लबानोन के देवदारों को भी तोड़ डालता है।
Psa 29:6 वह उन्हें बछड़े की नाई और लबानोन और सिर्योन को जंगली बछड़े के समान उछालता है।
Psa 29:7 यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है।
Psa 29:8 यहोवा की वाणी वन को हिला देती है, यहोवा कादेश के वन को भी कंपाता है।
Psa 29:9 यहोवा की वाणी से हरिणियों का गर्भपात हो जाता है। और अरण्य में पतझड़ होती है, और उसके मन्दिर में सब कोई महिमा ही महिमा बोलता रहता है।
Psa 29:10 जलप्रलय के समय यहोवा विराजमान था और यहोवा सर्वदा के लिये राजा होकर विराजमान रहता है।
Psa 29:11 यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा, यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा।

एक साल में बाइबल:
  • १ इतिहास १-३
  • यूहन्ना ५:२५-४७

सोमवार, 16 मई 2011

स्तुति संगीत

एक पुरानी यहूदी किवदन्ती है कि जब परमेश्वर संसार की सृष्टि कर चुका तो उसने सभी स्वर्गदूतों को अपने पास बुलाया और उनसे पूछा कि वे इस रचना के विष्य में क्या विचार रखते हैं। उनमें से एक ने कहा, "बस एक बात की कमी है, यहाँ सृष्टिकर्ता की स्तुति नहीं सुनाई पड़ रही।" तब परमेश्वर ने संगीत सृजा, और वह हवा के बहने, पक्षियों की आवाज़ों और संसार की विभिन्न बातों में प्रकट होने लगा। परमेश्वर ने मनुष्य को संगीत की धुन पर गीत गाने का हुनर भी दिया, और सदियों से संगीत अनगिनित लोगों को प्रफुल्लित और आनन्दित करता आ रहा है।

संगीत परमेश्वर द्वारा दिये गये जीवन के उन अनुग्रहों में से है जिन्हें हम बहुत सामन्य समझते हैं और साधारणत्या उसकी कोई विशेष कीमत नहीं आंकते। यह एक ऐसा वरदान है जिसे हमने परमेश्वर से लेकर उसका सदुप्योग कम तथा दुरुप्योग अधिक किया है। हम संसार में संगीत के गलत प्रयोग और उसके साथ जुड़ी शर्मनाक व्यवहार की बातों को भली भांति जानते हैं। लेकिन भला संगीत परमेश्वर से मिली आशीश है; उससे दुखते हृदय सांत्वना पाते हैं, समयनुसार लोगों को प्रेर्णा मिलती है और विचिलित मन शांति पाते हैं। परमेश्वर की स्तुति संगीत में होकर हम अपने हृदयों को स्तुति में परम्श्वर के सम्मुख उठाते हैं और वह हमें मसीह के लिए जीने को प्रोत्साहित भी करता है।

हमें जब कभी मौका मिले, संगीत द्वारा अपने आत्मा की आवाज़ को अन्य विश्वासियों के साथ मिलाकर हम अपने हृदयों को परमेश्वर की स्तुति के लिए उठाएं, यह परमेश्वर को आदर देता है और हम विश्वासी भाई-बहिनों को उभारता है, आनन्दित करता है।

जब आप अन्य विश्वासियों के साथ मिलकर परमेश्वर की स्तुति गाएं तो स्तुति में संगीत के महत्व के एक नए एहसास के साथ ऐसा करें, परमेश्वर की महिमा के लिए एक नया गीत गाएं। - रिचर्ड डी हॉन


अपने भक्तों के सच्चे हृदय से निकले सतुति के गीतों से बढ़कर परमेश्वर के लिए कोई संगीत नहीं है।

हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! - भजन १००:१, २


बाइबल पाठ: भजन १००

Psa 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psa 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psa 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psa 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psa 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा २४-२५
  • यूहन्ना ५:१-२४