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गुरुवार, 7 जुलाई 2011

चिकने और गोलाकार

समुद्र के किनारे पैदल चलते हुए मैं एक छोटी से खाड़ीनुमा स्थान पर आया जिसका मुहाना तंग तथा सुरक्षित था और बड़ी तथा तेज़ लहरें वहाँ अन्दर तक वेग से नहीं आ पाती थीं। मैंने ध्यान किया कि जो पत्थर और चट्टानें वहाँ तट पर पड़ीं थीं वे उबड़-खाबड़ और पैनी थीं न की चिकनी और गोलाकार, जैसी की उस खाड़ीनुमा इलाके के बाहर थीं जहाँ पर समुद्र की लहरें वेग से आकर चट्टानों पर टूटती थीं और उन से घिस कर चट्टानों का पैनापन जाता रहा था और वे चिकनी हो गई थीं।

यही बात मसीही विश्वासी के चरित्र पर भी लागु होती है। जैसे लहरों और पानी का कठोर प्रहार चट्टानों को घिस कर चिकना कर देता है, वैसे ही हमारे जीवनों की कठिनाईयाँ और परिक्षाएं हमारे चरित्र को निखार कर हम में मसीही परिपक्वता ले आती हैं। इसी लिए भजनकार ने लिखा कि, "मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं" (भजन ११९:७१)। इसी भाव को प्रचारक सैमुएल रदरफोर्ड ने भी व्यक्त किया जब उसने कहा कि "क्लेषों की भट्टी से होकर निकलने से मुझे परमेश्वर का वचन एक नए रूप में मिल गया है।" जब उसका विश्वास परखा गया तो परमेश्वर के वचन की एक नई समझ उसे मिली और साथ ही उसका चरित्र भी और अधिक निखर गया।

एक सामन्य भ्रांति है कि जब हमारे साथ कुछ बुरा हो रहा होता है, तब परमेश्वर हमें दण्ड दे रहा होता है। यह सदा सत्य नहीं होता, परमेश्वर का वचन हमें यह भी सिखाता है कि परीक्षाएं एक मसीही विश्वासी के लिए सम्मान के पदक भी हो सकते हैं। वे दिखाती हैं कि उन परीक्षाओं में होकर परमेश्वर हम में कार्य कर रहा है जिससे वह हम में वह धैर्य उत्पन्न कर सके जिसकी चर्चा याकूब ने करी और जो हमें परिपक्व करता है जिससे हम किसी भी घटी में न रहें (याकूब १:४)।

क्लेषों और परीक्षाओं के द्वारा परमेश्वर हमारे चरित्र के पैने और ऊबड़-खाबड़ हिस्सों को घिस कर चिकना और गोलाकार करता है और हमें अपने पुत्र और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में बदलता जाता है। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर हमारे जीवनों में कठिनाईयाँ और परिक्षाएं हमें निखारने के लिए आने देता है, हमें बिगाड़ने के लिए नहीं।

...तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है। - याकूब १:३


बाइबल पाठ: याकूब १:१-१८

Jas 1:1 परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
Jas 1:2 हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
Jas 1:3 तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।
Jas 1:4 पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
Jas 1:5 पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है और उस को दी जाएगी।
Jas 1:6 पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
Jas 1:7 ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
Jas 1:8 वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
Jas 1:9 दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
Jas 1:10 और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा।
Jas 1:11 क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
Jas 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
Jas 1:13 जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वही किसी की परीक्षा आप करता है।
Jas 1:14 परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
Jas 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनता है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्‍पन्न करता है।
Jas 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
Jas 1:17 क्‍योंकि हर एक अच्‍छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
Jas 1:18 उस ने अपनी ही इच्‍छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्‍पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३४-३५
  • प्रेरितों १५:१-२१

बुधवार, 6 जुलाई 2011

दिल पर हावी

अपनी बैसाखियों के कारण रौजर कभी खेल-कूद में भाग नहीं ले सका, लेकिन वह अपनी पढ़ाई में सदा अच्छा स्थान बनाए रहा, सदा हँसमुख रहता था और उसके साथ के लोग उसे बहुत पसन्द करते थे। बहुत समय तक उसकी इस असमर्थता के बारे में किसी ने उससे कुछ नहीं पूछा, लेकिन एक दिन उसके एक अच्छे मित्र ने उस से पूछ ही लिया। रौजर ने उसे बताया कि उसकी यह असमर्थता बचपन में हुई पोलियो की बीमारी के कारण थी। उसके मित्र ने फिर पूछा "इतनी कठिनाईयों और तकलीफों के बावजूद तुम्हारे अन्दर कोई कडुवाहट क्यों नहीं दिखाई देती?" रौजर ने अपने दिल की ओर ऊँगुली का इशारा करते हुए और मुस्कुराते हुए उत्तर दिया "क्योंकि मैंने इसे अपने दिल पर कभी हावी नहीं होने दिया।"

हो सकता है कि कोई लोग ऐसे भी हों जिन्होंने कभी क्लेषों का सामना नहीं किया हो। लेकिन हम में से अधिकांश लोगों के लिये क्लेष - शारीरिक, मानसिक अथवा भावनाओं से जुड़े हुए, अनजान नहीं हैं; देर-सवेर, किसी न किसी रूप में, ये हमारे जीवनों में आ ही जाते हैं और तब हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया इनसे बचने और राहत पाने की होती है। परमेश्वर का वचन बाइबल कभी कहीं यह आश्वासन नहीं देती कि हमारे जीवन सदा क्लेषों से मुक्त होंगें और हम पर कभी कोई असमर्थता नहीं आएगी, और ना ही कोई ऐसा आश्वासन देती है कि क्लेषों से मुक्ति की प्रत्येक प्रार्थना का उत्तर हमारी इच्छानुसार ही होगा, यद्यपि कभी ऐसा होता भी है। लेकिन परमेश्वर का वचन हमें यह आश्वासन अवश्य देता है कि हर क्लेष में हमारा परमेश्वर और उसकी शांति तथा सामर्थ हमारे साथ बनी रहेगी और हर क्लेष में वह हमारे अविनाशी आत्मा को संभाले रहेगा, जो नशवर शरीर से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

यदि हम किसी ऐसी व्याधि से होकर निकलें, जिसका निवारण परमेश्वर तुरंत और हमारी इच्छानुसार नहीं कर देता तो हमें निराश और हताश होकर अपने जीवनों में कडुवाहट, आत्मग्लानि और परमेश्वर के प्रति विरोध और विद्रोह को आने नहीं देना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में अवश्य ही इस प्रकार के विचार हमारे मनों में घर बनाने का प्रयास करेंगे। जब जब ऐसा हो तो बड़ी सच्चाई और साधारण विश्वास के साथ हमें अपनी इन भावनाओं को परमेश्वर के सामने मान लेना चाहिए, क्योंकि वह न केवल सब कुछ जानता है वरन हमारी दशा को समझता भी है और हमसे प्रेम तथा सहानुभुति भी रखता है। ऐसा करने से न केवल हम परिस्थितियों पर जयवंत होंगे और हमारे जीवनों में परमेश्वर की शांति राज करेगी, वरन परमेश्वर भी हमें अपने प्रेम और सामर्थ का उदाहरण बना कर दूसरों तक अपनी गवाही को पहुँचाने पाएगा जिससे कि उनके जीवनों में भी निराशा राज न करने पाए।

यदि हर परिस्थिति में हम अपने जीवन परमेश्वर के आगे खुले रखेंगे तो कोई परिस्थिति कभी हमारे दिलों पर हावी नहीं हो सकेगी। - डेनिस डी हॉन


शरीर का ऐसा कोई क्लेष नहीं है जिससे आत्मा सामर्थ न पा सके।

जब वह व्याधि के मारे सेज पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा। - भजन ४१:३


बाइबल पाठ: भजन ४१

Psa 41:1 क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।
Psa 41:2 यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।
Psa 41:3 जब वह व्याधि के मारे सेज पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा।
Psa 41:4 मैं ने कहा, हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ को चंगा कर, क्योंकि मैं ने तो तेरे विरूद्ध पाप किया है!
Psa 41:5 मेरे शत्रु यह कह कर मेरी बुराई करते हैं: वह कब मरेगा, और उसका नाम कब मिटेगा?
Psa 41:6 और जब वह मुझ से मिलने को आता है, तब वह व्यर्थ बातें बकता है, जब कि उसका मन अपने अन्दर अधर्म की बातें संचय करता है; और बाहर जाकर उनकी चर्चा करता है।
Psa 41:7 मेरे सब बैरी मिलकर मेरे विरूद्ध कानाफूसी करते हैं; वे मेरे विरूद्ध होकर मेरी हानि की कल्पना करते हैं।
Psa 41:8 वे कहते हैं कि इसे तो कोई बुरा रोग लग गया है, अब जो यह पड़ा है, तो फिर कभी उठने का नहीं।
Psa 41:9 मेरा परम मित्र जिस पर मैं भरोसा रखता था, जो मेरी रोटी खाता था, उस ने भी मेरे विरूद्ध लात उठाई है।
Psa 41:10 परन्तु हे यहोवा, तु मुझ पर अनुग्रह करके मुझ को उठा ले कि मैं उनको बदला दूं!
Psa 41:11 मेरा शत्रु जो मुझ पर जयवन्त नहीं हो पाता, इस से मैं ने जान लिया है कि तू मुझ से प्रसन्न है।
Psa 41:12 और मुझे तो तू खराई से सम्भालता, और सर्वदा के लिये अपने सम्मुख स्थिर करता है।
Psa 41:13 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य है आमीन, फिर आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३२-३३
  • प्रेरितों १४

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

क्लेषों का उद्देश्य

सूखे और पत्थरीले रेगिस्तानी इलाकों में पाई जाने वाली कुछ झाड़ीयों के बीज तब तक अंकुरित नहीं होते जब तक रगड़ खाकर उनके बाहरी खोल क्षतिग्रस्त नहीं हो जाते। जब झाड़ीयों में बीज बनता है तो उसपर एक कठोर खोल भी चढा होता है जो उनके अन्दर के अंकुरित होने की क्षमता और सामग्री की रक्षा करता है, लेकिन इस खोल के कारण पानी उनके अन्दर भी नहीं पहुंच पाता और वे सही परिस्थितयों के होने तक अंकुरित नहीं हो पाते। जब भारी बारिश से उन पत्थरीली ढालों पर पानी तेज़ी से बहता है, तो उस पानी के वेग से वे बीज भी कंकड़ों और पत्थरों से टकाराते और रगड़ खाते हुए पानी के प्रवाह के साथ लुड़कते चले जाते हैं और उनका कठोर बाहरी खोल क्षतिग्रस्त होता जाता है, जिससे पानी उनके अन्दर पहुँच पाता है। पानी के साथ बहते हुए ये बीज ऐसे स्थानों में मिट्टी में दब जाते हैं जहाँ पानी का कुछ ठहराव हो और भूमि की नमी कुछ समय बनी रहे। यहाँ पर इन अनुकूल परिस्थितित्यों में अब ये अंकुरित होकर जड़ पकड़ सकते हैं और आगे चलकर बीज बनाने वाले नए पौधे बन सकते हैं।

कभी कभी हम मसीही विश्वासी भी इन बीजों की तरह ही होते हैं। हमें भी जीवन के तेज़ प्रवाह द्वारा इधर उधर पटके जाने की आवश्यक्ता होती है जिससे परमेश्वर के वचन का जल हमारे अन्दर पहुँच सके और हम में मसीही चरित्र को अंकुरित कर सके। हम तब तक अपने विश्वास को गंभीरता से नहीं लेते जब तक कुछ उग्र हमारे साथ घटित नहीं हो जाता, जैसे, बीमारी और अस्पताल के बिस्तर पर बिताया कुछ समय, या अचानक आया कोई बड़ा खर्च, या परिवार में आई कोई गंभीर समस्या आदि। यद्यपि हमारा परमेश्वर पिता हमें अनावश्यक रूप से किसी दुख और संकट में जाने नहीं देना चाहता, लेकिन वह हमारे जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आने देता है जो हमारे अन्दर परमेश्वर के वचन रूपी जल को पहुँचने से रोकने वाली बातों को छीलकर हटाती रहें और हमें नम्र बनाए रखें। ऐसी परिस्थितियाँ अवश्य दुख देती हैं, लेकिन जब इनमें भी हम परमेश्वर की योजना को पहचान कर परमेश्वर के आगे नम्र और उसके आधीन हो जाते हैं तो यही परिस्थितियाँ हमारे आत्मिक जीवन की बढ़ोतरी का कारण भी बन जाती हैं।

चाहे हम बीज के रुप में एक स्थान पर सूखे और शिथिल पड़े रहना चाहते हों, लेकिन हमारा परमेश्वर पिता हमें फलवन्त वृक्ष देखना चाहता है, और इसलिए वह हम पर क्लेष भी आने देता है कि हम अंकुरित हों और उसकी महिमा के लिए फल लाएं। - मार्ट डी हॉन


कठिनाईयों से निकले बिना कुछ प्राप्त नहीं होता।

हे मेरे पुत्र, यहोवा की शिक्षा से मुंह न मोड़ना, और जब वह तुझे डांटे, तब तू बुरा न मानना, क्योंकि यहोवा जिस से प्रेम रखता है उसको डांटता है, जैसे कि बाप उस बेटे को जिसे वह अधिक चाहता है। - नीतिवचन ३:११, १२


बाइबल पाठ: इब्रानियों १२:१-१२

Heb 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।
Heb 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर से ताकते रहें, जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दुख सहा और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।
Heb 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो।
Heb 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो।
Heb 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाई दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़।
Heb 12:6 क्‍योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है और जिसे पुत्र बना लेता है, उस को कोड़े भी लगाता है।
Heb 12:7 तुम दुख को ताड़ना समझ कर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता?
Heb 12:8 यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्‍तान ठहरे!
Heb 12:9 फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्‍या आत्माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से जीवित रहें।
Heb 12:10 वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएं।
Heb 12:11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्‍द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उस को सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्‍हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है।
Heb 12:12 इसलिये ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३०-३१
  • प्रेरितों १३:२६-५२

सोमवार, 4 जुलाई 2011

तराशा हुआ हीरा

एक हीरा अपने स्वाभाविक स्वरूप में कंकड़ या छोटे पत्थर के समान ही दिखता है, उसकी सुन्दरता तराशे जाने के बाद ही निखर कर बाहर आने लगती है तथा तराशे जाने के बाद जब उसे चमकाया जाता है और तब उसकी चमक देखने लायक होती है तथा उसकी कीमत बन जाती है। साधारण कंकड़ से बहुमूल्य हीरा बनाने के लिए निपुण कारीगर उसे कठोर सान पर लगा कर चारों ओर से घिसता है, जिससे उसके बेडौल स्वाभाविक स्वरूप को सुन्दर स्वरूप में बदल सके। यह एक बहुत बारीकी से करी गई कारिगरी की प्रक्रिया है जिसमें बहुत ध्यान और समय लगता है। स्वरूप देने के बाद कारीगर फिर उसे निखारने के लिए रगड़ कर उसे चमकाता है।

यह प्रक्रिया उस प्रक्रिया के समान है जो परमेश्वर अपनी सन्तान के साथ करता है। जिन कठोर परिस्थितियों का सामना हमें प्रति दिन करना पड़ता है वे उस सान के समान हैं जो हीरे को स्वरूप देती है। परमेश्वर जीवन की कठिनाईयों और विषम परिस्थितियों द्वारा हमें तराशता और चमकाता है जिससे हमारा चरित्र निखर कर सिद्ध हो जाए और हम एक दिन उसके साथ स्वर्ग में सुन्दर और तेजोमय हो सकें। अवश्य ही यह प्रक्रिया सुखद नहीं होती, और ना ही उस ईश्वरीय कारीगर का उद्देश्य इसका सुखदाई होना है। उसकी नज़र हमारे अन्तिम तेजोमय स्वरूप पर है, और उस स्वरूप में बदलने के लिए वह हमारे जीवन और चरित्र से हर अनावश्यक बात तराश कर निकालता रहता है और हमें रगड़ कर चमकाता रहता है।

पतरस प्रेरित ने कहा "... कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो" (१ पतरस १:६), लेकिन जब हम इन परीक्षाओं के उद्देश्य को समझ लेंगे तो अपनी इन परीक्षाओं की आवश्यक्ता और कीमत को भी जान सकेंगे। परमेश्वर का, इस निखारे जाने की प्रक्रिया के दौरान, अपनी सन्तान के लिए एक ही ध्येय है: "और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे" (१ पतरस १:७)।

अपने जीवन में आने वाली परेशानियों और कठिनाईयों के उद्देश्य को जानते और पहचानते हुए, हमें परमेश्वर और हमारे प्रति उसके प्रेम पर शक नहीं करना चाहिए, वरन इन बातों के आगे आने वाले तेजोमय भविष्य पर अपनी नज़रें लगा कर वर्तमान में भी आनन्दित रहना चाहिए ना कि उन से निराशा होना चाहिए। - पौल वैन गौर्डर


जैसे सान पर लगाए बिना हीरा तराशा नहीं जा सकता, वैसे ही कठिनाईयों की रगड़ लगे बिना मनुष्य निखर नहीं सकता।

और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।" - १ पतरस १:७


बाइबल पाठ: १ पतरस १:१-९

1Pe 1:1 पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बितुनिया में तित्तर बित्तर होकर रहते हैं।
1Pe 1:2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1Pe 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिस ने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।
1Pe 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये।
1Pe 1:5 जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है।
1Pe 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो।
1Pe 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।
1Pe 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है।
1Pe 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्‍त करते हो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब २८-२९
  • प्रेरितों १३:१-२५

रविवार, 3 जुलाई 2011

मसीही विश्वास की आशा

मुझे एक मसीही विश्वासी का पत्र मिला, यह पत्र एक ऐसे व्यक्ति ने लिखा था जो विश्वास में होकर आने वाले विजयी जीवन को मानों थामे बैठा था। इस व्यक्ति के मस्तिष्क की एक लंबी और बहुत कठिन शल्य चिकित्सा हुई थी, लेकिन उसके मस्तिष्क का कुछ भग क्षतोग्रस्त हो गया था, जिससे वह कुछ कम देखने पाता था, उसकी सुनने की क्षमता भी कम हो गई थी और शरीर का एक भाग अधरंग का शिकार हो गया था; क्योंकि उसके गुर्दों ने भी कम करन बन्द कर दिया था, उसे कई महीने रक्त की सफाई के लिए डायालिसिस मशीन पर भी बिताने पड़े थे। उसने मान कि कई बार उसे निराशा भी हुई, लेकिन वह निराशा से पराजित नहीं हुआ। वह अब भी पूरी रीति से विश्वास करता है कि परमेश्वर का उसके जीवन में कोई प्रेम भरा प्रयोजन है, जिसके अन्तर्गत परमेश्वर ने उसके जीवन में यह सब आने दिया है। उसने अपने पत्र के अन्त में लिखा, "मैं अपनी समस्याओं के साथ जी सकता हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ कि ये सब चीज़ें मुझे स्वर्ग के लिए तैयार कर रही हैं।" उसे अपनी महिमामयी देह मिलने की पूरी आशा थी, और उसके लिए वह आनन्दित था।

परमेश्वर के सन्तान यदि आने वाले जीवन की महिमा और अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह की आशा पर अपनी नज़रें लगाए रखें तो अपने जीवन की प्रत्येक कठीनाई और दुख के ऊपर विजयी हो सकते हैं।

परमेश्वर के वचन में अय्युब के १९ अध्ययाय में हम न केवल अपने दुखों के लिए अय्युब क विलाप पढ़ते हैं, वरन साथ ही उसकी अद्भुत आशा की अभिव्यक्ति भी पढ़ते हैं। अय्युब ने अपने अकएलेपन के लिए विलाप किया, क्योंकि उसने न केवल अपना स्वास्थ्य और संपत्ति ही को खोया था वरन साथ ही उसने अपने बेटे बेटियाँ भी खो दिये और उसके मित्रों ने भी उसे छोड़ दिया था। लेकिन फिर भी उसने तसल्ली पाई क्योंकि उसक विश्वास था कि मृत्यु के उस पार वह परमेश्वर को अपने मित्र और उद्धारकर्ता के रूप में पाएगा।

उसकी इसी आशा ने उसे हर बात पर विजयी बना दिया। यही मसीही विश्वास की आशा की सामर्थ है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


जिस किसी की आशा परमेश्वर से है, वह कभी निराश नहीं रह सकता।

और अपनी खाल के इस प्रकार नाश हो जाने के बाद भी, मैं शरीर में होकर ईश्वर का दर्शन पाऊंगा। उसका दर्शन मैं आप अपनी आंखों से अपने लिये करूंगा... अय्युब १९:२६, २७


बाइबल पाठ: अय्युब १९:१३-२७

Job 19:13 उस ने मेरे भाइयों को मुझ से दूर किया है, और जो मेरी जान पहचान के थे, वे बिलकुल अनजान हो गए हैं।
Job 19:14 मेरे कुटुंबी मुझे छोड़ गए हैं, और जो मुझे जानते थे वह मुझे भूल गए हैं।
Job 19:15 जो मेरे घर में रहा करते थे, वे, वरन मेरी दासियां भी मुझे अनजाना गिनने लगीं हैं; उनकी दृष्टि में मैं परदेशी हो गया हूँ।
Job 19:16 जब मैं अपने दास को बुलाता हूँ, तब वह नहीं बोलता, मुझे उस से गिड़गिड़ाना पड़ता है।
Job 19:17 मेरी सांस मेरी स्त्री को और मेरी गन्ध मेरे भाइयों की दृष्टि में घिनौनी लगती है।
Job 19:18 लड़के भी मुझे तुच्छ जानते हैं और जब मैं उठने लगता, तब वे मेरे विरुद्ध बोलते हैं।
Job 19:19 मेरे सब परम मित्र मुझ से द्वेष रखते हैं, और जिन से मैं ने प्रेम किया सो पलट कर मेरे विरोधी हो गए हैं।
Job 19:20 मेरी खाल और मांस मेरी हड्डियों से सट गए हैं, और मैं बाल बाल बच गया हूं।
Job 19:21 हे मेरे मित्रो! मुझ पर दया करो, दया, क्योंकि ईश्वर ने मुझे मारा है।
Job 19:22 तुम ईश्वर की नाई क्यों मेरे पीछे पड़े हो? और मेरे मांस से क्यों तृप्त नहीं हुए?
Job 19:23 भला होता, कि मेरी बातें लिखी जातीं; भला होता, कि वे पुस्तक में लिखी जातीं,
Job 19:24 और लोहे की टांकी और शीशे से वे सदा के लिये चट्टान पर खोदी जातीं।
Job 19:25 मुझे तो निश्चय है, कि मेरा छुड़ाने वाला जीवित है, और वह अन्त में पृथ्वी पर खड़ा होगा।
Job 19:26 और अपनी खाल के इस प्रकार नाश हो जाने के बाद भी, मैं शरीर में होकर ईश्वर का दर्शन पाऊंगा।
Job 19:27 उसका दर्शन मैं आप अपनी आंखों से अपने लिथे करूंगा, और न कोई दूसरा। यद्यपि मेरा ह्रृदय अन्दर ही अन्दर चूर चूर भी हो जाए

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब २५-२७
  • प्रेरितों १२

शनिवार, 2 जुलाई 2011

सबसे बड़ी आशीष

एक ७६ वर्ष की आयु के स्वस्थ और मज़बूत दिखने वाले व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य के लिए जब मैंने उसकी प्रशंसा करी तो, तो वह बोला, "यह मेरे लिए सबसे बड़ी आशीष है।" मैंने उत्तर दिया, "क्या वाकई आप इसे सबसे बड़ी आशीष मानते हैं? मैं एक ऐसे मनुष्य को भी जानता हूँ जो अपनी बीमारी के लिए परमेश्वर का धन्यवादी है, क्योंकि बीमारी में हो कर ही उसने परमेश्वर पर निर्भर रहना और उसकी सामर्थ पर विश्वास करना सीखा है।" मुस्कुराते हुए उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, "आप ठीक कहते हैं, परमेश्वर पर भरोसा रख पाना अच्छी सेहत से कहीं बेहतर आशीष है। यदि बीमारी और तकलीफ द्वारा परमेश्वर और उसकी महिमा के बारे में सीखने को मिलता है, तो मैं कहूँगा कि बीमारी और तकलीफ के लिए परमेश्वर का धन्यवाद हो।"

भजनकार ने लिखा, "मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं" (भजन ११९:७१)। बहुत से विश्वासियों ने दुख और क्लेषों के समयों में ही परमेश्वर के कोमल स्पर्श और उसकी शांतिदायक उपस्थिति का अनुभव किया है, और सीखा है कि परमेश्वर कभी उनसे दूर नहीं होता। संभवतः वे नहीं चाहेंगे कि ऐसी परिस्थितियों से उन्हें दोबारा निकलना पड़े, लेकिन परमेश्वर के बारे में जो कुछ उन्होंने उन दुखों में जाना और सीखा, उसके मूल्य के सामने उनकी वे तकलीफें बहुत छोटी हैं।

अच्छा स्वास्थ्य और आर्थिक संपन्नता अवश्य बड़ी आशीषें हैं, और उनके लिए हमें परमेश्वर का धन्यवादी भी होना चाहिए। लेकिन यदि हमें बीमारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े तो हमें निराश और हतोसाहित नहीं होना चाहिए क्योंकि इन के द्वारा भी प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने परमेश्वर को बेहतर जान सकता है, और अय्युब के साथ मिलकर कह सकता है: "मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं" - अय्युब ४२:५।

परमेश्वर को निकटता से जान पाना सबसे बड़ी आशीष यही है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


कभी कभी परमेश्वर हमें अन्धेरों में जा लेने देता है, जिससे हम पहचान सकें कि सच्ची ज्योति वही है।

मैं ने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं। - अय्युब ४२:५

बाइबल पाठ: अय्युब ४२
Job 42:1 तब अय्यूब यहोवा को उत्तर दिया,
Job 42:2 मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती।
Job 42:3 तू कौन है जो ज्ञान रहित होकर युक्ति पर परदा डालता है? परन्तु मैं ने तो जो नहीं समझता था वही कहा, अर्थात जो बातें मेरे लिये अधिक कठिन और मेरी समझ से बाहर थीं जिनको मैं जानता भी नहीं था।
Job 42:4 मैं निवेदन करता हूं सुन, मैं कुछ कहूंगा, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, तू मुझे बता दे।
Job 42:5 मैं ने कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं;
Job 42:6 इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ।
Job 42:7 और ऐसा हुआ कि जब यहोवा ये बातें अय्यूब से कह चुका, तब उस ने तेमानी एलीपज से कहा, मेरा क्रोध तेरे और तेरे दोनों मित्रों पर भड़का है, क्योंकि जैसी ठीक बात मेरे दास अय्यूब ने मेरे विषय कही है, वैसी तुम लोगों ने नहीं कही।
Job 42:8 इसलिये अब तुम सात बैल और सात मेढ़े छांटकर मेरे दास अय्यूब के पास जाकर अपने निमित्त होमबलि चढ़ाओ, तब मेरा दास अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा, क्योंकि उसी की मैं ग्रहण करूंगा और नहीं, तो मैं तुम से तुम्हारी मूढ़ता के योग्य बर्ताव करूंगा, क्योंकि तुम लोगों ने मेरे विषय मेरे दास अय्यूब की सी ठीक बात नहीं कही।
Job 42:9 यह सुन तेमानी एलीपज, शूही बिल्दद और नामाती सोपर ने जाकर यहोवा की आज्ञा के अनुसार किया, और यहोवा ने अय्यूब की प्रार्थना ग्रहण की।
Job 42:10 जब अय्यूब ने अपने मित्रों के लिथे प्रार्थना की, तब यहोवा ने उसका सारा दु:ख दूर किया, और जितना अय्यूब का पहिले था, उसका दुगना यहोवा ने उसे दे दिया।
Job 42:11 तब उसके सब भाई, और सब बहिनें, और जितने पहिले उसको जानते पहिचानते थे, उन सभों ने आकर उसके यहां उसके संग भोजन किया और जितनी विपत्ति यहोवा ने उस पर डाली थी, उस सब के विषय उन्होंने विलाप किया, और उसे शान्ति दी और उसे एक एक सिक्का और सोने की एक एक बाली दी।
Job 42:12 और यहोवा ने अय्यूब के पिछले दिनों में उसको अगले दिनों से अधिक आशीष दी और उसके चौदह हजार भेड़ बकरियां, छ: हजार ऊंट, हजार जोड़ी बैल, और हजार गदहियां हो गई।
Job 42:13 और उसके सात बेटे ओर तीन बेटियां भी उत्पन्न हुई।
Job 42:14 इन में से उस ने जेठी बेटी का नाम तो यमीमा, दूसरी का कसीआ और तीसरी का केरेन्हप्पूक रखा।
Job 42:15 और उस सारे देश में ऐसी स्त्रियां कहीं न थीं, जो अय्यूब की बेटियों के समान सुन्दर हों, और उनके पिता ने उनको उनके भाइयों के संग ही सम्पत्ति दी।
Job 42:16 इसके बाद अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, और चार पीढ़ी तक अपना वंश देखने पाया।
Job 42:17 निदान अय्यूब वृद्धावस्था में दीर्घायु होकर मर गया।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब २२-२४
  • प्रेरितों ११

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

"ईमानदार एबी"

हमारे समाज की यह दशा हो गई है कि हमें अब ईमानदारी की एक बड़ी खुराक अच्छे से पिलाई जाने की बहुत आवश्यक्ता है, विशेषकर हमारे नेताओं को। चाहे व्यापार हो, राजनीति हो, स्कूल में, घरों में यहाँ तक कि चर्चों में भी ईमानदारी का यह अति आवश्यक गुण घटता ही जा रहा है। कपट, घूस, छिपाई हुई कमाई, जमा-खर्च के दोगले रेकॉर्ड, करों की चोरी, अनचुकाए जुर्माने आदि बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि समाज का नियम बन गया है कि नियम तोड़ने से मत डरिए, विशेषकर यदि आप बचकर निकल सकते हैं तो।

ऐसे में हमें भूतपूर्व अमरीकी राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन के जीवन से उनके नैतिक और आत्मिक गुणों के बारे में सीखना चाहिए। राष्ट्रपति बनने से पहले वे अपने एक साथी के साथ वकील का कार्य करते थे। अधिकाँशतः लिंकन बाहर जाकर न्यायिक मामलों को संभालते और उनका साथी दफतर में बैठकर बाकी के संबंधित काम देखता। लिंकन दफतर वापस लौटने से पहले मुकद्दमे का शुल्क ले लिया करते थे। शुल्क लेकर वे उसे दो भागों में विभाजित करते, एक भाग को सावधानी से एक कागज़ में लपटेते और उस पर अपने साथी और मुकद्दमे का नाम सावधानी से लिख लेते थे, जिससे यदि उनके दफतर वापस पहुँच कर साथी को उसका हिस्सा देने से पहले यदि कुछ अन्होनी हो जाए तो उनके साथी को उसका हिस्सा मिलने में कोई परेशानी न हो। देखने में तो यह एक छोटी सी बात लगती है, लेकिन यह उस व्यक्ति के चरित्र को दिखाती है जिसे संसार ने "Honest Abe" (ईमानदार एबी) के उपनाम से जाना था।

हमें भी ऐसे ही जीवन जीने चाहिएं जिनसे हमारे नाम के आगे यदि कोई "ईमानदार" शब्द लगाए तो वह झूठा प्रतीत न हो। - डेनिस डी हॉन


मलाई की बातें कर के लोगों को सप्रेटा मत परोसिए।

निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगया करो। - फिलिप्पियों ४:८


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ४:५-९

Php 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
Php 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
Php 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।
Php 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
Php 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब २०-२१
  • प्रेरितों १०:२४-४८