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सोमवार, 19 सितंबर 2011

नम्रता कमज़ोरी है?

   अधिकतर लोग नम्रता को कमज़ोरी के रूप में देखते हैं. लेकिन यह सच नहीं है। वास्तव में विनम्र होने के लिए बहुत सामर्थ चाहिए होती है, क्योंकि विनम्र लोग अन्य लोगों के समान न तुरंत पलटवार करते हैं और न बदला लेने की चाह में रहते हैं। वे बिना कुड़कुड़ाए, अपशबद बोले या अपने हाव-भाव द्वारा कोई कटुता दिखाए निन्दा सह लेते हैं; वे हर परिस्थिति के लिए और हर परिस्थिति में - भली हो या बुरी, परमेश्वर के धन्यवादी रहते हैं तथा उसके आधीन बने रहते हैं। ऐसे संयम को बनाए रखना हर किसी के बस की बात नहीं है और ना ही यह मात्र मानवीय समर्थ से संभव है। क्योंकि विनम्र लोग संसार के आम लोगों के समान प्रत्युत्तर नहीं देते और ना ही व्यवहार करते हैं इसलिए संसार के लोग समझते हैं कि उन को दबा लेना या उन पर हावी होकर अपने लिए प्रयोग कर लेना आसान है; किंतु सच्ची नम्रता कमज़ोरी नहीं है। इसके विपरीत यदि नम्रता स्वार्थ सिधि का मार्ग या जीवन में समझौते करने और पाप में पड़ने का माध्यम बन जाए तो अवश्य कमज़ोरी बन जाती है।

   परमेश्वर का वचन पवित्र बाइबल जिस नम्रता की बात करती है, वह कोई कमज़ोरी नहीं वरन एक सामर्थी सद्गुण है जो हमें प्रभु यीशु में देखने को मिलता है। प्रभु यीशु परमेश्वर का प्रतिरूप थे, परमेश्वरत्व की सारी सामर्थ उनमें विद्यमान थी, उनके वचन में हर कार्य को कर देने की सामर्थ थी लेकिन उनहोंने कभी अपनी इस सामर्थ का प्रयोग अपने लिए अथवा किसी स्वार्थ सिधि के लिए नहीं किया। दूसरों ने उनके साथ चाहे जैसा भी बर्ताव किया हो, वे सदा ही दूसरों की भलाई में ही लगा रहे। वे सदा परमेश्वर पिता को भी समर्पित रहे, सदा उनका आज्ञाकारी रहे। परमेश्वर पिता के प्रति उनका समपूर्ण विश्वास, समर्पण और आज्ञाकारिता ही थे जिनके द्वारा वे हर परिस्थिति में साहसी, हरेक व्यक्ति के प्रति करुणामय, पाप और बुराई से कभी कैसा भी समझौता न करने वाले और समस्त संसार के पापों के लिए आत्मबलिदान करने वाले बन सके।

   ऐसी सच्ची नम्रता परमेश्वर के प्रति सच्चे समर्पण तथा मन के अन्दर बसी और बनी भलाई की भावना से ही आती है; और यह भलाई परमेश्वर के साथ बने रहने से आती है, इसीलिए सच्ची नम्रता परमेश्वर की संगति का नतीजा है। जहाँ परमेश्वर की संगति होगी, वहाँ परमेश्वर की सामर्थ भी होगी; और जो परमेश्वर की सामर्थ से होगा वह ना कभी कमज़ोरी हो सकता और ना ही कमज़ोर बना सकता है। - मार्ट डी हॉन


सेवा करने के लिए काबू में ली गई सामर्थ ही नम्रता है।

धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्‍योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। - मत्ती ५:५

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-११
    Php 2:1  सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
    Php 2:2  तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
    Php 2:3  विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।
    Php 2:4  हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
    Php 2:5  जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
    Php 2:6  जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
    Php 2:7  वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
    Php 2:8  और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
    Php 2:9  इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है।
    Php 2:10  कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
    Php 2:11  और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।
एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक १-३ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१६-३३

रविवार, 18 सितंबर 2011

सामर्थ का रहस्य

   सदा अपने पाप के बारे में सोचते ही रहना तथा अपनी खामियों के लिए हर समय विलाप करते रहना न स्वयं को न दुसरों को अच्छा लगता है। लेकिन पापों को हलके में भी नहीं लेना चाहिए। पवित्र परमेश्वर के नैतिक नियमों की अवहेलना तथा उल्लंघन अति गंभीर बात है। जीवन में पाप की भयानकता और दुषप्रभावों को कभी कमतर कर के नहीं आंकना चाहिए।

   स्कॉटलैंड के जाने-माने प्रचारक रौबर्ट मैक्चेन की मृत्योपरांत एक पादरी उनके शहर में आया। मैक्चेन की सेवकाई से बहुत से लोगों ने अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभ यीशु को अपने व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया था। यह पादरी मैक्चेन के ऐसे प्रभावी प्रचार के रहस्य को जानना चाहता था। जिस चर्च से मैक्चेन सेवकाई करते थे, वहाँ के सेवादार ने उस पादरी को मैक्चेन की कुर्सी-मेज़ दिखाई और उनसे कहा, "आप इस कुर्सी पर बैठिए", पादरी बैठ गए; सेवादार ने फिर कहा, "अब अपनी कोहनियाँ मेज़ पर रखिए और अपना सिर अपने हाथों से पकड़ लीजिए", पादरी ने वैसा ही किया; सेवादर ने आगे कहा, "अब पश्चाताप के अपने आँसुओं को अविराल बहने दीजिए, मैक्चेन यही किया करते थे।" फिर सेवादार उस पादरी को चर्च के आगे के भाग में ले गया जहाँ पर वह मंच था जिस से मैक्चेन प्रचार करते थे। सेवादार ने पादरी से कहा, "अपनी कोहनियाँ मंच पर टिकाइए, अपने हाथों से अपने मुँह को पकड़ लीजिए और पश्चाताप के अपने आँसुओं को अविराल बहने दीजिए; मैक्चेन यही किया करते थे।"

   मैक्चेन का स्वभाव था कि वे अपने तथा अपने लोगों के पापों के लिए बेझिझक रोते और पश्चाताप करते थे। पाप के प्रति इस प्रकार कायल रहने ने उन्हें परमेश्वर के सामने दीन और नम्र रखा और परमेश्वर की सामर्थ उनमें हो कर अति प्रभावी रूप से कार्य कर सकी। इसकी तुलना में, पाप के प्रति अकसर हमारा रवैया ढिटाई का होता है। हमें अपने जीवन में पाप के लिए परमेश्वर की पवित्र आत्मा की आवाज़ के प्रति और अधिक संवेदनशील तथा पापमय व्यवहार से अलगाव का जीवन जीने को तत्पर और तैयार रहना चाहिए।

   हम परमेश्वर की क्षमा करने की प्रवृति में आनन्दित तो रह सकते हैं, लेकिन साथ ही हमें पापों के लिए पश्चातापी और शोकित भी रहना चाहिए। यही परमेश्वर के लिए सामर्थी और प्रभावी जीवन का रहस्य है। - डेव एग्नर

कलवरी पर प्रभु यीशु का क्रूस इस बात का प्रमाण है कि पाप परमेश्वर को परेशान करता है; क्या आप भी पाप से परेशान होते हैं?

धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे। - मत्ती ५:४

बाइबल पाठ: दानिएल ९:१-१९
     Dan 9:1  मादी क्षयर्ष का पुत्र दारा, जो कसदियों के देश पर राजा ठहराया गया था,
    Dan 9:2  उसके राज्य के पहिले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।
    Dan 9:3  तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा।
    Dan 9:4  मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है,
    Dan 9:5  हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है, और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है।
    Dan 9:6  और तेरे जो दास नबी लोग, हमारे राजाओं, हाकिमों, पूर्वजों और सब साधारण लोगों से तेरे नाम से बातें करते थे, उनकी हम ने नहीं सुनी।
    Dan 9:7  हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तू ने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरा किया था, देश देश में बरबस कर दिया है, उन सभों को लज्जित होना पड़ता है।
    Dan 9:8  हे यहोवा हम लोगों ने अपने राजाओं, हाकिमों और पूर्वजों समेत तेरे विरूद्ध पाप किया है, इस कारण हम को लज्जित होना पड़ता है।
    Dan 9:9  परन्तु, यद्यपि हम अपने परमेश्वर प्रभु से फिर गए, तौभी तू दयासागर और क्षमा की खान है।
    Dan 9:10  हम तो अपने परमेश्वर यहोवा की शिक्षा सुनने पर भी उस पर नहीं चले जो उस ने अपने दास नबियों से हमको सुनाई।
    Dan 9:11  वरन सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस शाप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह शाप हम पर घट गया, क्योंकि हम ने उसके विरूद्ध पाप किया है।
    Dan 9:12  सो उस ने हमारे और न्यायियों के विषय जो वचन कहे थे, उन्हें हम पर यह बड़ी विपत्ति डाल कर पूरा किया है; यहां तक कि जैसी विपत्ति यरूशलेम पर पड़ी है, वैसी सारी धरती पर और कहीं नहीं पड़ी।
    Dan 9:13  जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही यह सारी विपत्ति हम पर आ पड़ी है, तौभी हम अपने परमेश्वर यहोवा को मनाने के लिये न तो अपने अधर्म के कामों से फिरे, और ने तेरी सत्य बातों पर ध्यान दिया।
    Dan 9:14  इस कारण यहोवा ने सोच विचार कर हम पर विपत्ति डाली है; क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा जितने काम करता है उन सभों में धर्मी ठहरता है; परन्तु हम ने उसकी नहीं सुनी।
    Dan 9:15  और अब, हे हमारे परमेश्वर, हे प्रभु, तू ने अपनी प्रजा को मिस्र देश से, बली हाथ के द्वारा निकाल लाकर अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जो आज तक प्रसिद्ध है, परन्तु हम ने पाप किया है और दुष्टता ही की है।
    Dan 9:16  हे प्रभु, हमारे पापों और हमारे पुरखाओं के अधर्म के कामों के कारण यरूशलेम की और तेरी प्रजा की, और हमारे आस पास के सब लोगों की ओर से नामधराई हो रही है; तौभी तू अपने सब धर्म के कामों के कारण अपना क्रोध और जलजलाहट अपने नगर यरूशलेम पर से उतार दे, जो तेरे पवित्र पर्वत पर बसा है।
    Dan 9:17  हे हमारे परमेश्वर, अपने दास की प्रार्थना और गिड़गड़ाहट सुन कर, अपने उजड़े हुए पवित्रस्थान पर अपने मुख का प्रकाश चमका; हे प्रभु, अपने नाम के निमित्त यह कर।
    Dan 9:18  हे मेरे परमेश्वर, कान लगा कर सुन, आंख खोल कर हमारी उजड़ी हुई दशा और उस नगर को भी देख जो तेरा कहलाता है; क्योंकि हम जो तेरे साम्हने गिड़गिड़ा कर प्रार्थना करते हैं, सो अपने धर्म के कामों पर नहीं, वरन तेरी बड़ी दया ही के कामों पर भरोसा रख कर करते हैं।
    Dan 9:19  हे प्रभु, सुन ले; हे प्रभु, पाप क्षमा कर; हे प्रभु, ध्यान देकर जो करता है उसे कर, विलम्ब न कर; हे मेरे परमेश्वर, तेरा नगर और तेरी प्रजा तेरी ही कहलाती है, इसलिये अपने नाम के निमित्त ऐसा ही कर।
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ३०-३१ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१-१५

शनिवार, 17 सितंबर 2011

"उड़ाऊ पुत्र" का स्वरूप

   पापियों के प्रति परमेश्वर के प्रेम को समझाने के लिए प्रभु यीशु द्वारा कही गई "उड़ाऊ पुत्र" की नीतिकथा (लूका १५:११-३२) एक प्रचलित उदाहरण रही है। इस नीतिकथा में एक पुत्र अपने पिता से संपत्ति का अपना भाग लेकर अलग हो जाता है, और उस संपत्ति को व्यर्थ और दुराचारी जीवन में उड़ा देता है। सम्पत्ति के समाप्त हो जाने पर जब वह अकेला पड़ जाता है और बदहाल हो जाता है तो अपने व्यवहार और किये पर पश्चातापी मन के साथ अपनी उसी बदहाल दशा में अपने पिता के पास लौटता है, जो आनन्द के साथ उसे स्वीकार कर के परिवार में उसे पुनः यथास्थान स्थापित कर देता है।

   एक चित्रकार ने इस कथा पर चित्र बनाना चाहा। उसे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जिस के स्वरूप पर वह उड़ाऊ पुत्र के बदहाल स्वरूप को चित्रित कर सके। मार्ग पर चलते समय उसे एक भिखारी बहुत ही बदहाल स्वरूप में दिखाई दिया, और चित्रकार ने उसे अपनी चित्रशाला में आकर चित्र बनाने के लिए नमुना बनने का निमंत्रण दिया। अगले दिन जब वह भिखारी उसकी चित्रशाला में पहुँचा तो उसका स्वरूप बदला हुआ था - वह नहा-धो कर, अपनी बढ़ी हुई दाढ़ी साफ करवा कर, बाल बना कर, साफ-सुथरे कपड़े पहन कर चित्रकार के समने प्रस्तुत हुआ था। इस हाल में उसे देख कर चित्रकार विस्मय से बोल उठा, "नहीं, ऐसे नहीं, अब इस स्वरूप में मैं तुम्हें प्रयोग नहीं कर सकता।"

   परमेश्वर भी हमें वैसा ही चाहता है, जैसे उड़ाऊ पुत्र अपने पिता के पास आया था - अपनी बदहाल दशा में। यह विचित्र और विनम्र करने वाला अनुभव है, लेकिन यदि हम अपनी ही धार्मिकता और भलाई द्वारा स्वच्छ तथा परमेश्वर को ग्रहणयोग्य होने का प्रयास करते हैं, तो यह परमेश्वर के सामने व्यर्थ है। परमेश्वर की धार्मिकता, भलाई और स्वच्छता - जिसे हमें प्रदान करने के लिए प्रभु यीशु ने अपने प्राण क्रूस पर बलिदान कर दिए, हमें केवल अपने पापों के लिए हमारे पश्चाताप और क्षमा आग्रह द्वारा ही उपलब्ध होती है, हमारे किन्ही कर्मों के द्वारा नहीं।

   प्रभु यीशु के समय में मन्दिर में सेवकाई करने वाले शास्त्री और फरीसी बहुत कड़ाई से अपनी धर्म-व्यवस्था का पालन करते थे। वे समझते थे कि परमेश्वर उनसे प्रसन्न है क्योंकि उन्होंने अपने आप को "स्वच्छ" रखा हुआ है। जब उन्होंने प्रभु यीशु को ऐसे लोगों के साथ संगति करते और उनके घर जाकर भोजन लेते देखा जो उनकी नज़रों में "अशुद्ध" और "दुष्ट" थे तो उन्हें यह बहुत नागवार गुज़रा, और वे प्रभु यीशु के विरुद्ध कुड़कुड़ाने लगे। लेकिन प्रभु यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, "मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं" (लूका ५:३२)। प्रभु यीशु का यह कहना वास्तव में उनके स्वधार्मिक व्यवहार और उस पर उन के घमण्ड पर किया गया कटाक्ष था। उन स्वधर्मी लोगों को भी अपने जीवन में छुपे पाप का अंगीकार करने की आवश्यक्ता थी, जिसे परमेश्वर भली भांति जानता था। यदि वे पश्चाताप करते तो प्रभु यीशु उन्हें भी ग्रहण कर लेते।

   परमेश्वर नहीं चाहता कि कोई भी पाप में नाश हो; "वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें" (१ तिमुथियुस २:४)। वह सब को पाप क्षमा देना चाहता है, यदि वे अपने पाप के अंगीकार और उससे क्षमा प्रार्थना के लिए तैयार हों। जैसे उड़ाऊ पुत्र, जैसा वह था अपने पिता के पास लौट आया, और पिता से सब कुछ पा लिया, वैसे ही आप भी भी जैसे हैं, प्रभु यीशु के नाम से परमेश्वर की ओर लौट आईये, आप भी उद्धार, अनन्त जीवन का अननत आनन्द, परमेश्वर की संगति और उसके राज्य में प्रवेश के भागीदार हो जाएंगे। - डेनिस डी हॉन


संसार में धनी होने की बजाए परमेश्वर के राज्य में धनी होना कहीं बेहतर है।

धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। - मत्ती ५:३
 
बाइबल पाठ: लूका १५:११-२४
    Luk 15:11  फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
    Luk 15:12  उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
    Luk 15:13  और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा कर के एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
    Luk 15:14  जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
    Luk 15:15  और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा: उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
    Luk 15:16  और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
    Luk 15:17  जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहा हूँ।
    Luk 15:18  मैं अब उठ कर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है।
    Luk 15:19  अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
    Luk 15:20  तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देख कर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
    Luk 15:21  पुत्र न उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
    Luk 15:22  परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा, फट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
    Luk 15:23  और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्‍द मनावें।
    Luk 15:24  क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २७-२९ 
  • २ कुरिन्थियों १०

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

प्रलोभन और परीक्षा

   यद्यपि प्रलोभन और परीक्षा अधिकांशतः साथ ही आते हैं, दोनो में फर्क की एक महीन रेखा है। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम की मूल यूनानी भाषा में दोनो के लिए एक ही शब्द प्रयोग हुआ है। याकूब १:२,३ में कहा गया है कि "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो..." और मत्ती २६:४१ में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा कि "जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो" - पहला उदाहरण भले के लिए है और दूसरा खतरे से बचने के लिए।

   १९वीं सदी के एक पास्टर एलेक्ज़ैंडर मैक्लैरन ने प्रलभोन और परीक्षा के बीच की इस महीन रेखा के फर्क को समझाया। उन्होंने कहा, "प्रलोभन कहता है, इस मज़ेदार काम को करो, इस बात से चिंतित मत हो कि यह कम बुरा है। जबकि परीक्षा कहती है, इस सही और भले काम को करो, इस बात की चिंता मत करो कि इसे करने में कष्ट होगा। एक मधुर और सुखद प्रतीत होने किंतु बहका देने वाली धुन है जो अन्तरात्मा को सुला कर धीरे से विनाश की ओर मोड़ देती है तो दूसरा श्रेष्ठ लक्ष्यों की प्राप्ति के संघर्ष के लिए रणभेरी की आवाज़ है।"

   प्रत्येक कठिनाई प्रलोभन भी बन सकती है और परीक्षा भी। जब हम कष्ट और परेशानियों से बचने के लिए समझौते करके छोटे और गलत रास्ते अपनाते हैं तो कठिनाई प्रलोभन बन जाती है। किंतु जब हम हर गलत बात का विरोध करके कठिनाईयों को आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखते हैं तो वह हमारी उन्नति के लिए परीक्षा बन जाती है। जब हम उन्नति के इन अवसरों को स्वीकार करते रहते हैं, और परमेश्वर के पवित्र आत्मा की अगुवाई और सामर्थ में सही लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते रहते हैं, तो परमेश्वर के वचन "तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे" (याकूब १:४) की पूर्ति की ओर अग्रसर भी होते रहते हैं।

   प्रलोभन और परीक्षा में हमारा रवैया, हमारी उन्न्ति अथवा अवनति को निर्धारित करता है। - डेनिस डी हॉन


परमेश्वर आपको परीक्षाओं द्वारा सामर्थी और उन्नत करना चाहता है तो शैतान प्रलोभनों द्वारा गिराने के प्रयास में रहता है।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो... - याकूब १:२,३
 
बाइबल पाठ: याकूब १:१-१५
    Jas 1:1  परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों  को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
    Jas 1:2  हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
    Jas 1:3  तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।
    Jas 1:4  पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
    Jas 1:5  पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उस को दी जाएगी।
    Jas 1:6  पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
    Jas 1:7  ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
    Jas 1:8  वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
    Jas 1:9  दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
    Jas 1:10  और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा।
    Jas 1:11  क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
    Jas 1:12  धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
    Jas 1:13  जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वही किसी की परीक्षा आप करता है।
    Jas 1:14  परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है।
    Jas 1:15  फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्‍पन्न करता है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २५-२६ 
  • २ कुरिन्थियों ९

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

लुभावने विचार

   एक युवक, अपने निज जीवन के रुख से परेशान होकर सहायता के लिए अपने पादरी के पास गया। थोड़ी देर तक उस युवक की छोटी-मोटी बुराईयों और लालसाओं की सूचि सुनने के बाद पादरी को लगा कि वह अपने विवरण में पूरी तरह से ईमानदार नहीं है, इसलिए पादरी ने उससे पूछा, "क्या वास्तविकता में बस इतना ही है?" युवक बोला, "जी हाँ, परेशानी की बस यही बातें हैं।" पादरी ने फिर पूछा, "तुम्हें पूरा निश्चय है कि तुम किन्ही अपवित्र बातों और विचारों से नहीं खेल रहे हो?" युवक ने कहा, "नहीं नहीं, मैं तो उनसे नहीं खेल रहा, वे ही मेरा मन बहला रहे हैं।"

   कुछ लोगों की धारणा रहती है, "प्रलोभनों से बच कर भागने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते मैं उन के लिए अपना पता छोड़ के भाग सकूँ।" यदि हम सच्चे होंगे तो यह अवश्य स्वीकार करेंगे कि पाप पहले विचारों में उत्पन्न होता है, उसके बाद ही जीवन में कार्यकारी हो कर प्रगट होता है।

   प्रलोभन पाप नहीं है। प्रलोभन के पाप में परिवर्तित हो पाने के लिए हमें उसका स्वागत करके अपने मन में बसाना होता है, उसे समय देना होता है, उसके साथ मज़ा लेना होता है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी ने हमारा कुछ बिगाड़ा है तो उससे बदला लेने का पाप हम तब ही कर पाते हैं जब पहले बदला लेने के बारे में सोचना आरंभ करें, फिर उस व्यक्ति को किन बातों से और कैसे कैसे नुकसान हो सकता है, यह विचार करने लगें, तब ही योजना बना कर बदले की भावना से हम उसका नुकसान पहुँचा सकते हैं।

   इन बातों को आरंभ में ही रोक देने और पाप तथा नुकसान की हद तक न पहुँचने देने के लिए प्रेरित पौलुस उपाय देता है, "सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं; और हर एक भावना को कैद कर के मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं" (२ कुरिन्थियों १०:५)।

   जब हम गलत विचारों को अपने मन में स्थान बनाने देते हैं, तो उन के दुषप्रभावों से बचने का मार्ग है कि उन्हें परमेश्वर के सामने पाप के रूप में स्वीकार कर लें, क्षमा मांगें और परमेश्वर से मांगें के वह हमारी सहायता करे; फिर भले विचारों तथा परमेश्वर के वचन से अपने मन को भर लें।

   जब हम परमेश्वर की आधीनता में होकर शैतान का सामना करते हैं, तो वह हमारे सामने टिक नहीं सकता और उसके लुभावने विचार हमें पाप में गिरा नहीं सकते। - डेव एग्नर

जो मन में होता है वही चरित्र में भी आ जाता है।

सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं; और हर एक भावना को कैद कर के मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं। - २ कुरिन्थियों १०:५
 
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १०:१-६
    2Co 10:1  मैं वही पौलुस जो तुम्हारे साम्हने दीन हूं, परन्‍तु पीठ पीछे तुम्हारी ओर साहस करता हूं; तुम को मसीह की नम्रता, और कोमलता के कारण समझाता हूं।
    2Co 10:2  मैं यह बिनती करता हूं, कि तुम्हारे साम्हने मुझे निर्भय होकर साहस करना न पड़े, जैसा मैं कितनों पर जो हम को शरीर के अनुसार चलने वाले समझते हैं, वीरता दिखाने का विचार करता हूं।
    2Co 10:3  क्‍योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते।
    2Co 10:4  क्‍योकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।
    2Co 10:5  सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं; और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।
    2Co 10:6  और तैयार रहते हैं कि जब तुम्हारा आज्ञा मानना पूरा हो जाए, तो हर एक प्रकार के आज्ञा न मानने का पलटा लें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २२-२४ 
  • २ कुरिन्थियों ८

बुधवार, 14 सितंबर 2011

वे भूखे नहीं हैं

   हम दोस्तों ने झील से मछली पकड़ने का मन बनाया और उसकी तैयारी करने लगे। मछली पकड़ने के विभिन्न प्रकार चारे हमने एकत्रित किए, वे अलग अलग रंग और प्रकार के थे, देखने में बहुत लुभावने थे और मछली पकड़ने के लिए शर्तीया कारगर थे। लेकिन फिर भी, यदि मछलियां उन लुभावने चारों से आकर्षित नहीं हों तो आखिरी दांव के रूप में कुछ छोटी मछलियां भी चारे के रूप में लगाने को रख लीं। अगले दिन प्रातः होते ही हम झील की ओर चल पड़े और सबने अपने अपने मन पसन्द स्थानों को चुन लिया और बंसी डाल कर बैठ गए। समय बीतता गया और किसी के हाथ कोई मछली नहीं लगी। हमने अपनी हर विधि आज़मा ली, हर चारे का उपयोग कर लिया, लेकिन कोई मछली किसी से नहीं फंसी। थक हार कर हम अपनी अपनी बंसी उठा कर खाली हाथ वापस लौटने लगे, और एक दूसरे को यह कह कर सांतवना देते रहे कि "आज मछलीयां भूखी नहीं हैं।"

   शैतान के पास भी प्रलोभनों और लालचों का बक्सा भरा है, जिन्हें वह हमें पाप में फंसाने के लिए प्रयोग करता है। कुछ प्रलोभन दिखने में बड़े आकर्षक होते हैं - वे प्रलोभन के रुप में दीख भी जाते हैं, लेकिन इतने रिझाने वाले होते हैं कि उनका इन्कार कर पाना बहुत कठिन होता है। कुछ अन्य हमारी किसी आवश्यक्ता या इच्छा को उकसाते हैं, ऊपर से देखने में अहानिकारक प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तविकता तो चारा खा लेने के बाद ही पता चलती है। शैतान के ये प्रलोभन और लालच कैसे भी क्यों न हों, उन सब में एक बात सामन्य है - वे हमारी शारीरिक एवं सांसारिक इच्छाओं और लालसाओं की पूर्ति के आश्वासनों या दावों के द्वारा ही हमें फंसाने पाते हैं। यदि हमारा ध्यान और मन शारीरिक अथवा सांसारिक बातों पर लगा नहीं होगा तो शैतान के ये हथियार भी हमारे विरुद्ध कारगर नहीं हो पाएंगे।

   इसलिए परमेश्वर का वचन हमें चिताता है कि "निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।" (फिलिप्पियों४:८, ९)

   मानसिक अनुशासन और परमेश्वर के आत्मा की सहायता से हम अपने हृदय को भली बातों से भरा रख सकते हैं, और शारीरिक लालसओं और प्रलोभनों में पड़ने से बच सकते हैं। तब शैतान भी खिसिया कर यही कहेगा, "वे भूखे नहीं हैं।" - डेव एग्नर

बुराई से दूरी के लिए उठाया गया हमारा हर कदम हमें परमेश्वर के एक कदम और निकट ले आता है।

क्‍योंकि जब उस ने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है। - इब्रानियों २:१८
 
बाइबल पाठ: याकूब १:१२-१८
    Jas 1:12  धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
    Jas 1:13  जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वही किसी की परीक्षा आप करता है।
    Jas 1:14  परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
    Jas 1:15  फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्‍पन्न करता है।
    Jas 1:16  हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
    Jas 1:17  क्‍योंकि हर एक अच्‍छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
    Jas 1:18  उस ने अपनी ही इच्‍छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्‍पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १९-२१ 
  • २ कुरिन्थियों ७

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

सहायता को तैयार


   इंग्लैंड और फ्रांस के बीच हुए एक युद्ध में इंग्लैड के राजा एडवर्ड तृतीय का सामना फ्रांस की सेना से हो रहा था। इंगलैंड के राजा का पुत्र सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहा था और राजा सहायता के लिए तैयार एक और दल को लिए कुछ दूरी पर खड़ा युद्ध पर नज़र रखे हुए था। युद्ध आरंभ होने के थोड़े समय पश्चात राजकुमार ने पिता को सन्देश भेजा कि वे अपने सहायक दल को ले कर उसकी सहायता के लिए तुरंत आ जाएं। राजा सहायता के लिए नहीं गए। राजकुमार ने एक और सन्देश भेजा और तुरंत सहायता की विनती करी। राजा ने सन्देश वाहक से कहा, "मेरे पुत्र से जाकर कहो, मैं एक अनुभवी सेनापति हूँ - जानता हूँ कि कब सहायता भेजनी चाहिए और कोई लापरवाह पिता भी नहीं हूँ कि अपने पुत्र की समय पर सहायता न भेजने की लापरवाही करूँ।"

   यह घटना परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु में विश्वासी उसकी सन्तान के संबंध का भी चित्रण करती है। जब हम शैतान द्वारा लाई गई परीक्षाओं, प्रलोभनों और पाप का सामना कर रहे होते हैं तो कभी कभी हमें लगता है कि हमारी सहायता की पुकार को परमेश्वर ने अनसुना कर दिया और हमें अकेला छोड़ दिया है। लेकिन एक क्षण भी ऐसा नहीं होता जब उसकी दृष्टी हम पर से हटती हो। वह कभी हमें असहाय नहीं छोड़ता।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, १ कुरिन्थियों १०:१३ में पौलुस प्रेरित लिखता है, "तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्‍चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा कि तुम सह सको।"

   संघर्ष कितना भी भीषण क्यों न हो, सही समय पर हमारे पक्ष में सहायता के लिए आने के लिए और हमें परीक्षा से निकासी का मार्ग देने के लिए परमेश्वर सदा तैयार बना रहता है। - पौल वैन गोर्डर

जब परमेश्वर हमें कही भेजता है, तो स्वयं साथ भी चलता है।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्‍चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा कि तुम सह सको। - १ कुरिन्थियों १०:१३
 
बाइबल पाठ: भजन १८:१६-३०
    Psa 18:16  उस ने ऊपर से हाथ बढ़ा कर मुझे थाम लिया, और गहिरे जल में से खींच लिया।
    Psa 18:17  उस ने मेरे बलवन्त शत्रु से, और उन से जो मुझ से घृणा करते थे मुझे छुड़ाया क्योंकि वे अधिक सामर्थी थे।
    Psa 18:18  मेरी विपत्ति के दिन वे मुझ पर आ पड़े। परन्तु यहोवा मेरा आश्रय था।
    Psa 18:19  और उस ने मुझे निकाल कर चौड़े स्थान में पहुंचाया, उस ने मुझ को छुड़ाया, क्योंकि वह मुझ से प्रसन्न था।
    Psa 18:20  यहोवा ने मुझ से मेरे धर्म के अनुसार व्यवहार किया; और मेरे हाथों की शुद्धता के अनुसार उस ने मुझे बदला दिया।
    Psa 18:21  क्योंकि मैं यहोवा के मार्गों पर चलता रहा, और दुष्टता के कारण अपने परमेश्वर से दूर न हुआ।
    Psa 18:22  क्योंकि उसके सारे निर्णय मेरे सम्मुख बने रहे और मैं ने उसकी विधियों को न त्यागा।
    Psa 18:23  और मैं उसके सम्मुख सिद्ध बना रहा, और अधर्म से अपने को बचाए रहा।
    Psa 18:24  यहोवा ने मुझे मेरे धर्म के अनुसार बदला दिया, और मेरे हाथों की उस शुद्धता के अनुसार जिसे वह देखता था।
    Psa 18:25  दयावन्त के साथ तू अपने को दयावन्त दिखाता और खरे पुरूष के साथ तू अपने को खरा दिखाता है।
    Psa 18:26  शुद्ध के साथ तू अपने को शुद्ध दिखाता, और टेढ़े के साथ तू तिर्छा बनता है।
    Psa 18:27  क्योंकि तू दीन लोगों को तो बचाता है परन्तु घमण्ड भरी आंखों को नीची करता है।
    Psa 18:28  हां, तू ही मेरे दीपक को जलाता है; मेरा परमेश्वर यहोवा मेरे अन्धियारे को उजियाला कर देता है।
    Psa 18:29  क्योंकि तेरी सहायता से मैं सेना पर धावा करता हूं और अपने परमेश्वर की सहायता से शहरपनाह को लांघ जाता हूं।
    Psa 18:30  ईश्वर का मार्ग सच्चाई, यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १६-१८ 
  • २ कुरिन्थियों ६