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सोमवार, 7 मई 2012

परमेश्वर की उपस्थिति

   भाई लौरेंस बैराग लेकर एक मठ में रहने वाले बैरागी थे। १७वीं शताब्दी के इस बैरागी को मठ में रसोई में कार्य और सफाई करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। अपनी इस तुच्छ प्रतीत होने वाली ज़िम्मेदारी को परमेश्वर के प्रति जिस समर्पण और प्रेम भावना से उन्होंने निभाया था, वह आज भी लोगों के लिए एक उदाहरण है। अपनी पुस्तक, The Practice of the Presence of God में भाई लौरेंस ने परमेश्वर को, प्रतिदिन के कार्य करते रहने में भी, संपूर्ण समर्पण करने के तरीके बताए, चाहे वह कार्य भोजन पकाना हो या अन्य साथियों के जूते साफ करना। लौरेंस का कहना था कि आप के आत्मिक जीवन की गहराई इस बात पर निर्भर नहीं है कि आप अपने हालात को कितना बदल पाते हैं, वरन इस बात पर निरभर है कि आप किस उद्देश्य से कार्य करते हैं - जो आप सामन्यतः अपने लिए करते हैं उसे परमेश्वर के लिए करना आरंभ कर दीजिए, और आपका कार्य करने का ढंग ही बदल जाएगा।

   भाई लौरेंस की प्रशंसा में लिखे गए एक विवरण में कहा गया, "इस भले भाई को परमेश्वर की उपस्थिति हर स्थान पर मिलती थी, चाहे वह प्रार्थना का समय हो या जूते साफ तथा ठीक करने का। उन की दृष्टि कार्य पर नहीं, उपस्थित परमेश्वर पर लगी होती थी। वे जानते थे कि कार्य जितना उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति के विरुद्ध होगा, उसे भली भांति कर के वह उतने ही अधिक प्रेम के साथ परमेश्वर को उसे भेंट के रूप में अर्पित कर सकेंगे।"

   इस बात ने मेरी पत्नी को बहुत प्रभावित किया। शिकागो नगर के एक भाग में बुज़ुर्ग व्यक्तियों के बीच उनकी सहायातार्थ कार्य करते समय मेरी पत्नि को कई बार ऐसे कार्य करने होते थे जो उसकी प्रवृत्ति के विरुद्ध होते थे, जिन्हें करना उसे पसन्द नहीं था। ऐसे कार्यों को करते समय, वह अपने आप को स्मरण दिलाती रहती थी कि उसे बस केवल परमेश्वर और उसकी महिमा को ही अपने सामने रखना है और उसी के लिए वह कार्य करना है।

   सतत प्रयास के साथ, कठिन से कठिन लगने वाला कार्य भी परमेश्वर के लिए और परमेश्वर को अर्पित करने के लिए किया जा सकता है (कुलुस्सियों ३:१७)। - फिलिप यैन्सी


कार्य को मात्र कर्तव्य देखना ऊबा देने वाली नीरसता है; प्रेम सहित कर्तव्य का निर्वाह आनन्द है।
 
और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो। - कुलुस्सियों ३:१७
 
बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१२-१७
Col 3:12  इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Col 3:13  और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Col 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Col 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिए तुम एक देह होकर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Col 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो, और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिए भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Col 3:17  और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • २ राजा १-३ 
  • लूका २४:१-३५

रविवार, 6 मई 2012

सुनने के लिए समय

   इतिहासकार कैसियस डियो ने रोमी सम्राट हेड्रियन (११७-१३८ ईस्वीं) के जीवन की एक रोचक घटना लिखी। हेड्रियन मार्ग से होकर एक कार्य के लिए जा रहा था कि एक महिला ने उससे रुक कर उसकी विनती सुनने का आग्रह किया। हेड्रियन बिना रुके, यह कहते हुए आगे बढ़ गया कि "मेरे पास समय नहीं है।" किंतु जब उस महिला ने पीछे से पुकार कर कहा, "तो फिर अपने सम्राट होने के पद को छोड़ दो", तो वह लौट कर आया और उस महिला की बात सुनी।

   हमारे अपने जीवनों में यही बात कितनी ही बार होती है; कितनी बार हमें सुनना या कहना पड़ता है कि, "अभी नहीं, अभी मैं व्यस्त हूँ", या "माफ कीजिए, मेरे पास अभी समय नहीं है"। किंतु हमारे परमेश्वर पिता के पास, जो इस सारी सृष्टि का सृजनहार और चलाने वाला है, हमारे लिए सदा समय रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा, "यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं। धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है" (भजन३४:१५,१७)।

   हमारा परमेश्वर पिता किसी ऐसे सम्राट या व्यस्त अधिकारी के समान नहीं है जो अपने समय और कार्यों में आने वाली अड़चनों और बातों से बचने के प्रयास करता हो। हमारा पिता परमेश्वर अपने बच्चों की बात सुनने और उनकी प्रार्थना का उत्तर देने को सदा तैयार रहता है, उससे आनन्दित होता है; भजनकार ने आगे लिखा "यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है" (पद १८)।

   अपनी प्रजा के एक जन की बात सुनना, सम्राट हेड्रियन के पुनः विचार का नतीजा था; किंतु हमारे परमेश्वर का प्रथम विचार ही सदा हमारी सुनने के लिए होता है। हमें जब कभी उससे कुछ कहना हो, उसके पास हमारी बात सुनने के लिए समय सदैव होता है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर कभी इतना व्यस्त नहीं होता कि अपने बच्चों के लिए उसके पास समय ना हो।
इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया। - भजन३४:६
बाइबल पाठ: भजन३४:४-१८
Psa 34:4  मैं यहोवा के पास गया, तब उस ने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psa 34:5  जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई, और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psa 34:6  इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psa 34:7  यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उनको बचाता है।
Psa 34:8  परख कर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।
Psa 34:9  हे यहोवा के पवित्र लोगों, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!
Psa 34:10  जवान सिहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं, परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।
Psa 34:11  हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psa 34:12  वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psa 34:13  अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psa 34:14  बुराई को छोड़ और भलाई कर, मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psa 34:15  यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psa 34:16  यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psa 34:17  धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psa 34:18  यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा २१-२२ 
  • लूका २३:२६-५६

शनिवार, 5 मई 2012

सही चुनाव

   हमारे मनों में कई बातें और इच्छाएं ऐसी भी होती हैं जिन्हें हम दूसरों के आगे बयान करने से हिचकिचाते हैं, या उन्हें किसी को बता नहीं पाते; ये हमारे विवाह, कार्य, किसी सेवकाई, कहीं जाने की इच्छा इत्यादि, कुछ भी हो सकता है। लेकिन हमारे मन की हर एक बात परमेश्वर जानता है, उस से कुछ भी छुपा नहीं है; इसलिए आप बेखटके और बिना किसी हिचकिचाहट के साथ उस से सब कह सकते हैं। यदि आप कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं, किसी बात के लिए मार्गदर्शन चाहते हैं, तो परमेश्वर पिता से कहिए, उस निर्णय को या उस बात उस के हाथों में रख कर वहीं छोड़ दीजिए, उस के समय और विधि की प्रतीक्षा कीजिए, और वह आपके लिए सर्वोत्तम मार्ग निकालेगा, आपको सही दिशानिर्देष देगा, आपको आने वाले हरेक नुकसान से भी बचा कर रखेगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में उत्पत्ति १३ में लूत का उल्लेख है जिसने अपनी मनसा की पूर्ति के लिए अपनी इच्छा के अनुसार और अपनी नज़रों में सही निर्णय लिया। लूत अब्राम का भतीजा था, अब्राम ने उसे अपनी सन्तान की तरह पाला-पोसा था, किंतु संपदा के कारण लूत और अब्राम के नौकरों मे होने वाली बार बार की अनबन के कारण अब्राम और लूत ने अलग अलग हो जाने का निर्णय लिया। अब्राम ने लूत को पहले चुनने का अवसर दिया, कि वह अपने रहने के लिए स्थान चुन ले। लिखा है कि, "तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की बाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी। सो लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गए। अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया" (उत्पत्ति १३:१०-१२)। यरदन नदी की तराई का क्षेत्र, उसके उपजाऊ और भली भांति सींचे हुए होने के कारण, लूत को भाया और उसने अपने लिए वही क्षेत्र चुन लिया। लेकिन जो बाहर और दूर से अच्छा दीख पड़ता था, वह अन्दर से और वास्तव में क्या था, यह लूत ने वहां पहुँचने के बाद ही जाना।

   पास्टर रे स्टैडमैन ने इस बारे में लिखा कि, "लूत ने अपने निर्णय स्वयं लेने चाहे, और ऊपर से दिखाई देने वाली बातों और अपनी समझ के आधार पर अपने रहने का स्थान चुन लिया। वह नहीं जानता था कि जिसे स्थान को वह चुन रहा है, वह व्यभिचार और पाप में कितना लिप्त है। अपनी नज़र और बुद्धि के आसरे, लूत एक ऐसे दुखःदायी स्थान में आ पड़ा जो अपने न्याय की प्रतीक्षा कर रहा था, और वह न्याय बस होने को ही था। दूसरी ओर, अब्राम परमेश्वर के हाथ में अपने चुनाव छोड़ने को सन्तुष्ट था, और परमेश्वर ने उसे सुरक्षा और आशीष के स्थान में बनाए रखा।" लूत ने अपने लिए चुना और अपनी संपदा, अपना परिवार, मनुष्यों में अपना आदर और स्थान - सब कुछ खो दिया। अब्राम ने परमेशवर को अपने लिए चुनने दिया, परमेश्वर के चुनाव का आदर किया और कभी नुकसान नहीं उठाया, सदा बढ़ोतरी ही पाई।

   हमारे लिए सही चुनाव वही है जो परमेश्वर हमारे लिए करता है। हमारा भला इसी में है कि हम परमेश्वर को अपने लिए चुनने दें, और हम केवल उसके निर्णय और दिशानिर्देशों का पालन करें। क्योंकि परमेश्वर के चुनाव उसकी अनन्त बुद्धिमानी और भविष्य की जानकारी के अनुसार हमारे भले ही के लिए होते हैं। - डेविड रोपर


जब हम अपनी लालसाओं से अधिक परमेश्वर की इच्छाओं को चाहते हैं, सच्ची संतुष्टि तब ही मिलती है।
सो लूत अपने लिए यरद्न की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला और वे एक दुसरे से अलग हो गए। - उत्पत्ति १३:११
बाइबल पाठ: उत्पत्ति १३:९-१३; २ पतरस २:७-८
Gen 13:9 क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा।
Gen 13:10 तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की बाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
Gen 13:11 सो लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गए।
Gen 13:12 अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।
Gen 13:13 सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।
2Pe 2:7  और धर्मी लूत को जो अधमिर्यों के अशुद्ध चाल-चलन से बहुत दुखी था छुटकारा दिया।
2Pe 2:8 (क्‍योंकि वह धर्मी उन के बीच में रहते हुए, और उन के अधर्म के कामों को देख देखकर, और सुन सुनकर, हर दिन अपने सच्‍चे मन को पीड़ित करता था)।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १९-२० 
  • लूका २३:१-२५

शुक्रवार, 4 मई 2012

समर्पण

   अंग्रेज़ी लेखक थौमस कार्लय्ल का विवाह जेन वैल्श से सन १८२६ में हुआ था। विवाह के समय जेन भी एक प्रसिद्धि प्राप्त लेखिका थीं, किंतु विवाह के बाद उन्होंने अपने पति की सफलता के लिए अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया और उन की सेवा में लगी रहीं। थौमस को पेट और स्नायुतंत्र के रोग होने के कारण, उनका स्वभाव चिड़चिड़ा रहता था और उनके साथ निभा पाना सरल नहीं था। लेकिन जेन ने उनके लेखन में सहायता के लिए घर को यथासंभव शांत बनाए रखने और उन के लिए विशेष भोजन बना कर देने का बीड़ा उठा लिया, जिससे लिखने में थौमस को कम से कम बाधा हो।

   थौमस, अपने व्यवहार या बोलचाल में बाहरी रूप से, जेन के इस प्रेम पूर्ण समर्पित व्यवहार के लिए ना तो कोई विशेष ध्यान दिखाते थे और ना ही इस के लिए उसे कोई मान देते थे; जेन के साथ उनका समय भी बहुत कम बीतता था, लेकिन जेन अपने कार्य में लगी रहती थी। थौमस ने अपनी माँ को लिखे एक पत्र में जेन के बारे में लिखा, "मैं अपने हृदय से कह सकता हूँ कि वह मुझसे एक ऐसे समर्पण के साथ प्रेम करती है जो मेरी समझ से बाहर है, मैं जिसके कदापि योग्य नहीं हूँ। वह मेरे उदास चेहरे की ओर ऐसे मृदु भाव से देखती है कि उस से नज़र मिलाने भर से ही हर बार मेरे अन्दर एक नई ताज़गी आ जाती है।"

   ऐसा ही, वरन इससे भी बढ़कर प्रेम परमेश्वर ने हम पाप से भरे मनुष्यों और संसार से भी किया; क्यों किया, यह हमारी समझ से परे है। परमेश्वर वह पिता है जिसने पापी संसार के उद्धार के लिए अपने निष्पाप पुत्र को दे दिया, "क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए" (यूहन्ना ३:१६)। परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसीयों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने प्रार्थना करी कि वे प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर के प्रेम की चौड़ाई, लंबाई, गहराई और ऊँचाई समझ पाएं (इफिसीयों ३:१८)।

   थोड़ा ठहर कर अपने निज जीवन और व्यवहार तथा संसार के व्यवहार पर विचार कीजिए। हम में ऐसा क्या है जिससे परमेश्वर हम से प्रेम करे? क्या हमारे निकट और चारों ओर ही ऐसे कितने ही लोग नहीं हैं जिनसे हम कोई वास्ता नहीं रखना चाहते, जिनसे प्रेम करना तो दूर उनके बारे में बिना मन खट्टा हुए सोचना भी हमारे लिए कठिन है? क्या हमारे अपने बारे में भी कई लोग ऐसे ही विचार और धारणा नहीं रखते? किंतु परमेश्वर फिर भी हम में से प्रत्येक से, और उन से भी जो उसके बैरी हैं, उसके विरोध में बोलते हैं निस्वार्थ प्रेम करता है। ऐसा क्यों? अपने प्रति परमेश्वर के इस प्रेम के लिए हम क्या स्पष्टिकरण दे सकते हैं, क्या कारण बता सकते हैं?

   परमेश्वर के इस प्रेम को समझ सकने की सामर्थ पाने के लिए विश्वास द्वारा मसीह का हमारे हृदय में बसना और हमारा उस में जड़ पकड़कर दृढ़ होना आवश्यक है। परमेश्वर के प्रेम को जानना है तो मसीह को जानिए, उसे अपने हृदय में स्थान दीजिए। - ऐनी सेटास


इससे बढ़कर कोई आनन्द नहीं कि हम यथार्थ में जान सकें कि परमेश्वर हम से प्रेम करता है।
और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर, सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है। - इफिसीयों ३:१७, १८
बाइबल पाठ: इफिसीयों ३:१४-२१
Eph 3:14  मैं इसी कारण उस पिता के साम्हने घुटने टेकता हूं,
Eph 3:15 जिस से स्‍वर्ग और पृथ्वी पर, हर एक घराने का नाम रखा जाता है।
Eph 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्‍व में सामर्थ पाकर बलवन्‍त होते जाओ।
Eph 3:17  और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नेव डाल कर,
Eph 3:18  सब पवित्र लागों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।
Eph 3:19  और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
Eph 3:20  अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है,
Eph 3:21  कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १६-१८ 
  • लूका २२:४७-७१

गुरुवार, 3 मई 2012

शब्दों का महत्व

  समाज द्वारा भाषा प्रयोग करने का स्तर हाल ही के कुछ वर्षों में बहुत गिर गया है। इसका यह अर्थ नहीं है कि हम अपने स्तर को भी गिरा लें। यदि हम सभी अपने स्तर को ना केवल बनाए रखने, वरन बेहतर करने की ठान लें, तो समाज का स्तर भी स्वतः ही उठ जाएगा; समाज हमारे संयुक्त आचरण ही से तो बनता है।

  एक किशोर ने, जो मसीही परिवार से था, कहा, "मेरी माँ कसम खाने वाले या बात का दबाव बनाने के लिए कहे गए शब्दों को बुरा नहीं मानती" और फिर उसने उन शब्दों की एक सुची दी जिन से उसकी माँ को कोई आपत्ति नहीं था; सूची के सभी शब्द ऐसे शब्द थे जो आम समाज में साधारण वार्तालाप में प्रयुक्त होने के लिए अनुचित माने जाते हैं या जिनके प्रयोग पर आपत्ति होना स्वाभाविक है।

   मसीही विश्वास और परमेश्वर का वचन बाइबल ऐसी कोई छूट किसी को नहीं देता, वरन चिताता है कि, "इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो" (इफिसीयों ५:१५)। हमारी बोलचाल से संबंधित और भी कई निर्देष परमेश्वर के वचन में हमें मिलते हैं, जैसे:- हमारा शब्दों के चुनाव और उपयोग में समझ-बूझ दिखाना, बुद्धिमता की निशानी है, "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन १०:१९)।- हमें अपने भले के लिए अपने मूँह से निकलने वाले शब्दों को नाप-तौल कर ही बाहर निकलने देना है, "जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है" (नीतिवचन २१:२३)।- कठिन परिस्थितियों में भी मृदु भाषा का उपयोग भला होता है, "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन १५:१)।

   प्रेरित पौलुस ने चिताया कि मसीही विश्वासियों को ऐसे शब्द प्रयोग करने से बचना चाहिए जो हमारे परमेश्वर की संतान होने के अनुरूप नहीं हैं, "कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो" (इफिसीयों ४:२९)। पौलुस द्वारा दिया गया शब्दों के उपयोग का यह मापदण्ड हमें सदा स्मरण रहना चहिए, और इसी के अनुसार ही हमें ना केवल अपने वार्तालाप को वरन अपने सोच-विचार को भी निर्देषित करना चाहिए, क्योंकि जो और जैसा हमारे मन में होगा, वह और वैसा ही हमारे मूँह से भी निकलेगा।

   अपने जीवन द्वारा परमेश्वर का आदर करने के लिए, अपने शब्दों के प्रयोग को उस पवित्र परमेश्वर की गरिमा के अनुसार निर्धारित करें। - डेव ब्रैनन


हम जो बोलते हैं उससे हम जो हैं प्रगट होता है।
यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। - याकूब १:२६
बाइबल पाठ: नीतिवचन १५:१-७
Pro 15:1  कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है।
Pro 15:2  बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है।
Pro 15:3  यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं।
Pro 15:4  शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है।
Pro 15:5  मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है।
Pro 15:6  धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है।
Pro 15:7  बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १४-१५ 
  • लूका २२:२१-४६

बुधवार, 2 मई 2012

आर्थिक मन्दी से शिक्षाएं

   अपने सन्देश "आर्थिक मन्दी के उद्देश्य" में पास्टर जौन पाइपर कहते हैं कि जब अर्थ व्यवस्था में गिरावट आती है तो परमेश्वर उस से भी अपने उद्देश्य पूरे करने में सक्षम है, जैसे:
  1.  - हमारे छुपे हुए पाप प्रगट कर के हमें पश्चाताप और शुद्धता में लाना।
  2.  - हमारा ध्यान विकासशील देशों की स्थिति की ओर खेंचना और हमें उन की आवश्यकताओं प्रति संवेदन शील करना, जहां हमेशा ही आर्थिक संकट बना रहता है।
  3.  - हमें एक बार फिर स्मरण दिलाना कि हमारे सुख-शांति का आधार उसका अनुग्रह है ना कि हमारी संपत्ति, उसकी दया है ना कि हमारी दौलत, उसकी सामर्थ्य है ना कि हमारी सामर्थ।
  4.  - संसार में उसके उद्धार और बचाव के सन्देश को और भी फैलाना तथा उसकी मण्डली की बढ़ोतरी को और भी बढ़ा कर दिखाना, यह प्रमाणित करने के लिए कि ये कार्य लिए सांसारिक स्त्रोतों और संपदा पर निर्भर नहीं हैं।
  5.  - अपनी मण्डली के सदस्यों को यह सीखने का अवसर देना कि वे अपने दुखते अंगों के दुख में शामिल हों, उनकी सहायता और देखभाल करें और प्रेम के वरदान में उन्नति पाएं।

   इन कठिन समयों में परमेश्वर हमें और क्या सिखाना चाहता है? 
  • यह कि उस के लिए कुछ भी असंभव नहीं है (लूका १:३७)। 
  • यह कि "वन के सारे जीव-जन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर" (भजन ५०:१०) उसी के हैं, और संसार की अर्थ व्यवस्था का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। 
  • यह कि चाहे संसार की संपदा ने हमें छोड़ दिया हो किंतु परमेश्वर हमें कभी नहीं छोड़ता है; और 
  • संसार की बदलती परिस्थितियाँ उसके अनुयायियों के लिए उसके सुसमाचार प्रचार के उद्देश्य (मत्ती २८:२०) को बदल नहीं सकतीं, वह हर परिस्थिति में मान्य और लागू है।

   अपनी आशा सांसारिक धन संपत्ति पर नहीं वरन उस पर लगाएं जो संसार और सृष्टि का स्वामी है। - सिंडी हैस कैस्पर


जब आपके पास परमेश्वर के सिवाय और कुछ नहीं होता, तब आपके पास जिसे होना चाहिए वह होता है।
हे यहोवा ! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है, क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा ! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है। - १ इतिहास २९:११
बाइबल पाठ: भजन ५०:१-११
Psa 50:1  ईश्वर परमेश्वर यहोवा ने कहा है, और उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक पृथ्वी के लोगों को बुलाया है।
Psa 50:2  सिरयोन से, जो परम सुन्दर है, परमेश्वर ने अपना तेज दिखाया है।
Psa 50:3  हमारा परमेश्वर आएगा और चुपचाप न रहेगा, आग उसके आगे आगे भस्म करती जाएगी, और उसके चारों ओर बड़ी आंधी चलेगी।
Psa 50:4  वह अपनी प्रजा का न्याय करने के लिये ऊपर से आकाश को और पृथ्वी को भी पुकारेगा:
Psa 50:5  मेरे भक्तों को मेरे पास इकट्ठा करो, जिन्होंने बलिदान चढ़ा कर मुझ से वाचा बान्धी है!
Psa 50:6  और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है।
Psa 50:7  हे मेरी प्रजा, सुन, मैं बोलता हूं, और हे इस्राएल, मैं तेरे विषय साक्षी देता हूं। परमेश्वर तेरा परमेश्वर मैं ही हूं।
Psa 50:8  मैं तुझ पर तेरे मेलबलियों के विषय दोष नहीं लगाता, तेरे होमबलि तो नित्य मेरे लिये चढ़ते हैं।
Psa 50:9  मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशालों से बकरे ले लूंगा।
Psa 50:10  क्योंकि वन के सारे जीव-जन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं।
Psa 50:11  पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूं, और मैदान पर चलने फिरने वाले जानवर मेरे ही हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १२-१३ 
  • लूका २२:१-२०

मंगलवार, 1 मई 2012

संतुष्टि

   जिग-सौ पज़ल के चित्र को पूर्ण बना पाने की संतुष्टि के लिए हमें उस चित्र के सभी भागों की आवश्यक्ता होती है। कई प्रकार से जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हम अपने दिन अपने जीवन के बिखरे हुए टुकड़ों को जमा करने और फिर उन्हें ठीक से जोड़ कर एक अच्छा और पूर्ण चित्र बनाने में लगे रहते हैं, किंतु फिर भी कभी कभी लगता है कि कोई भाग कहीं ग़ायब है, चित्र अधूरा है और संतुष्टि नहीं है।

   ऐसे में थोड़ा रुक कर जांचना आवश्यक है कि क्या हम चित्र को पूरा करने के लिए गलत भागों को लगाने के प्रयास तो नहीं कर रहे? यद्यपि हम जानते हैं कि जिस जीवन में परमेश्वर केंद्रबिंदु नहीं है वह जीवन अपने सबसे महत्वपूर्ण भाग से रहित है, क्या फिर भी हम ऐसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं मानों परमेश्वर हमारे लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता? चाहे हम नियमित रूप से चर्च जाते हों, आराधना में सम्मिलित होते हों, तो भी क्या परमेश्वर हमारे जीवन में सबसे अधिक महत्व रखता है? कई बार हम परमेश्वर से अपनी दूरी के आदी हो जाते हैं, उस की कमी हमें कुछ विशेष नहीं खलती, और हमारे लिए पाप में पड़ जाना या समझौता कर लेना सरल हो जाता है, बिना यह एहसास रखे कि इस से हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग नष्ट हो रहा है।

   लेकिन हम चाहे परमेश्वर से कितने ही दूर चले जाएं, वह सदा हमें अपने पास लाने के प्रयासों में लगा रहता है, क्योंकि उसकी लालसा यही रहती है कि उस की संतान उसके पास रहे। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपने नबी यशायाह द्वारा अपनी प्रजा से कहलवाया: "जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे" (यशायाह ५५:२)।

   यदि आपके जीवन से भी कुछ खोया हुआ प्रतीत होता है, तो स्मरण रखिए कि केवल परमेश्वर ही है जो आपको भरपूरी से संतुष्टि और संपूर्ण तृप्ति दे सकता है। उसे ही अपने जीवन के चित्र को पूर्ण करने दीजिए। उसकी संतुष्टि स्थाई संतुष्टि है। - जो स्टोवैल


प्रत्येक मन में ऐसी लालसाएं हैं जिन्हें केवल यीशु ही तृप्त कर सकता है।
जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। - यशायाह ५५:२
बाइबल पाठ: यशायाह ५५:१-६
Isa 55:1  अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ, और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isa 55:2  जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isa 55:3  कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे, और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isa 55:4  सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isa 55:5  सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उस ने तुझे शोभायमान किया है।
Isa 55:6  जब जब यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १०-११ 
  • लूका २१:२०-३८