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रविवार, 27 मई 2012

पक्षपात

   रूथ रेचल पेशे से भोजनालयों, होटलों और रेस्टुरैंटों के स्तर, कार्य और व्यवस्था की समीक्षा करने वाली महिला थीं, जो देश के जाने माने अखबार "The New York Times" में प्रकाशित होने वाली अपनी प्रभावकारी समीक्षा और अलोचना के लिए जानी जाती थीं। अपनी रोचक पुस्तक "Garlic and Sapphires: the Secret Life of a Critic in Disguise" में रेचल अपने ६ वर्ष के अनुभवों को बताती हैं। क्योंकि उनकी आलोचनाओं और समीक्षाओं का व्यापक प्रभाव होता था, इसलिए बड़े बड़े और नामी होटलों तथा रेस्टुरैंटों ने उनकी तस्वीर लगा कर रखी हुई थी जिससे उनके कर्मचारी उन्हें पहचान लें और उनकी आव-भगत तथा सेवा में कोई कमी न रहे, और वे उनके बारे में अच्छे लेख लिख सकें।

   पहचाने जाने के कारण असामान्य ध्यान और सेवा मिलने से बचने और सच्ची समीक्षा लिख पाने के लिए रेचल ने एक कुशल उपाय लागू किया, वे भेष बदल कर होटलों और रेस्टुरैंटों में जाने लगीं, जिससे उनके साथ भी वहां के किसी सामान्य ग्राहक के समान ही बर्ताव हो सके। एक बार वे एक वृद्ध महिला बनकर गईं, और पाया कि रेस्टुरैंट में बैठाए जाने के लिए उन्हें लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी, और फिर उनकी ओर कोई विशेष ध्यान भी नहीं दिया गया, उनके आग्रहों को अन्देखा किया गया।

   ऐसे पक्षपाती व्यवहार के विरुद्ध परमेश्वर का वचन बाइबल स्पष्ट निर्देश देती है। याकूब ने अपनी पत्री में लिखा: "हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्त प्रभु यीशु मसीह का विश्वास तुम में पक्षपात के साथ न हो। क्‍योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्ले और सुन्‍दर वस्‍त्र पहिने हुए तुम्हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए। और तुम उस सुन्‍दर वस्‍त्र वाले का मुंह देख कर कहो कि तू वहां अच्‍छी जगह बैठ; और उस कंगाल से कहो, कि तू यहां खड़ा रह, या मेरे पांव की पीढ़ी के पास बैठ। तो क्‍या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्याय करने वाले न ठहरे?" (याकूब २:१-४)

   जब कोई व्यक्ति हमारे चर्च या मण्डली में आता है तो उसके साथ कैसे व्यवहार होता है? क्या हम धनवानों और प्रसिद्धी प्राप्त लोगों के प्रति पक्षपाती होते हैं? परमेश्वर की इच्छा है कि हम सब के साथ समान व्यवहार करें, सबके लिए बराबर चिंता करें, उन में एक समान रुचि दिखाएं, ना कि ऊपरी रीति से या बाहर से प्रतीत होने वाले उनके धन और सामाजिक स्तर के अनुसार।

   अपने प्रभु की आराधना और उपासना में हम सब को समान स्तर और रीति से स्वागत करें और उन्हें समानता के साथ सम्मिलित करें। - डेनिस फिशर


जब परमेश्वर हमें, जैसे हम हैं वैसे ही, अपने साथ सहभागी करता है, अपने निकट लाता है तो फिर दूसरों के साथ भेद-भाव करने वाले हम कौन होते हैं?

पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो, और व्यवस्था तुम्हें अपराधी ठहराती है। - याकूब २:९

बाइबल पाठ: याकूब २:१-९
Jas 2:1   हे मेरे भाइयों, हमारे महिमायुक्त प्रभु यीशु मसीह का विश्वास तुम में पक्षपात के साथ न हो।
Jas 2:2  क्‍योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्ले और सुन्‍दर वस्‍त्र पहिने हुए तुम्हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए।
Jas 2:3  और तुम उस सुन्‍दर वस्‍त्र वाले का मुंह देख कर कहो कि तू वहां अच्‍छी जगह बैठ; और उस कंगाल से कहो, कि तू यहां खड़ा रह, या मेरे पांव की पीढ़ी के पास बैठ।
Jas 2:4  तो क्‍या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्याय करने वाले न ठहरे?
Jas 2:5  हे मेरे प्रिय भाइयों सुनो? क्‍या परमेश्वर ने इस जगत के कंगालों को नहीं चुना कि विश्वास में धर्मी, और उस राज्य के अधिकारी हों, जिस की प्रतिज्ञा उस ने उन से की है जो उस से प्रेम रखते हैं?
Jas 2:6  पर तुम ने उस कंगाल का अपमान किया: क्‍या धनी लोग तुम पर अत्याचार नहीं करते और क्‍या वे ही तुम्हें कचहिरयों में घसीट घसीट कर नहीं ले जाते?
Jas 2:7  क्‍या वे उस उत्तम नाम की निन्‍दा नहीं करते जिस के तुम कहलाए जाते हो?
Jas 2:8  तौभी यदि तुम पवित्र शास्‍त्र के इस वचन के अनुसार, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख, सचमुच उस राज-व्यवस्था को पूरी करते हो, तो अच्‍छा करते हो।
Jas 2:9   पर यदि तुम पक्षपात करते हो, तो पाप करते हो, और व्यवस्था तुम्हें अपराधी ठहराती है।


एक साल में बाइबल: 

  • २ इतिहास १-३ 
  • यूहन्ना १०:१-२३

शनिवार, 26 मई 2012

ज़िम्मेदारी

   मेरा ऑस्ट्रेलियाई मित्र ग्रैहम अन्धा पैदा नहीं हुआ था, ९ वर्ष की आयु में घटित एक दुर्घटना के कारण वह अन्धा हो गया था। फिर भी वह अपने लिए कभी दुखी नहीं रहा; उसने अपना अध्ययन पूरा किया और एक फिज़्योथेरपिस्ट बना। वह जहां कहीं भी जाता था, अपने फिज़्योथेरपी के काम के साथ साथ वह यह बात अवश्य बांटता था कि प्रभु यीशु उसके लिए और उसके जीवन में क्या अर्थ रखते हैं। उसकी अन्तिम यात्रा थाइलैंड की थी और वहां भी वह फिज़ियोथैरिपी के साथ साथ प्रभु यीशु के सुसमाचार के प्रचार का कार्य करता रहा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में राजाओं के वृतांत में हम चार कोढ़ियों के बारे में पढ़ते हैं। अराम की सेना ने उनके शहर को घेर रखा था, शहर के अन्दर खाने-पीने की सामग्री समाप्त हो चुकी थी और लोग बहुत क्लेष में थे। ये कोढ़ी अराम की छावनी की ओर चले, इस विचार से कि या तो वहां से कुछ खाने को मिलेगा या मौत मिलेगी जो भूखों मरने से बेहतर होगी। वहां पहुंच कर उन्होंने पाया कि अराम की सेना छावनी छोड़ कर भाग गई है और अपना सब सामान वहीं छावनी में छोड़ गई है। उन्होंने तुरंत वहां पड़ा भोजन किया और लूट जमा करने लगे, लेकिन थोड़ी ही देर में उन्हें कुछ ध्यान आया और: "तब वे आपस में कहने लगे, जो हम कर रहे हैं वह अच्छा काम नहीं है, यह आनन्द के समाचार का दिन है, परन्तु हम किसी को नहीं बताते। जो हम पौ फटने तक ठहरे रहें तो हम को दण्ड मिलेगा; सो अब आओ हम राजा के घराने के पास जाकर यह बात बतला दें" (२ राजा ७:९)। और उन्होंने जा कर शेष इस्त्राएलियों को यह समाचार दिया और लोग भूखों मरने से बच गए।

   अपनी शारीरिक अपंगताओं के बावजूद ग्राहम और उन कोढ़ियों, दोनो ही ने दूसरों के बारे में सोचा। जो उन्हें मिला था वे उसके लिए परमेश्वर की धन्यवादी थे और उन्होंने पहचाना कि यह उत्तम बात केवल अपने तक सीमित रखने के लिए नहीं है, इसे दूसरों के साथ बांटना उनकी ज़िम्मेदारी है, उनके लिए अनिवार्य है।

   क्या आप ने प्रभु यीशु के प्रेम को जाना है और उससे उद्धार पाया है? क्या आप के आस-पास ऐसा कोई है या आप किसी ऐसे को जानते हैं जिसे प्रभु यीशु के प्रेम और उद्धार की आवश्यक्ता है? उनके साथ प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार बांटना आपका दायित्व है, आपके लिए अनिवार्य है। सुसमाचार ना बांटने के लिए बहाने मत ढूंढिए, अपनी मजबूरियां मत गिनाईए; वरन इसके विपरीत प्रभु यीशु जो कुछ भी आपके जीवन में किया है उसी का वर्णन लोगों में कीजिए। प्रभु के साथ के अपने अनुभव को संसार के साथ बांटिए और आप पाएंगे कि आपके जीवन का एक नया उद्देश्य हो जाएगा; एक ऐसा उद्देश्य जिस की आशीष अनन्त काल तक रहेगी। - सी. पी. हीया


जब जो हमारे पास है हम उसके लिए धन्यवादी होते हैं तो हम उसे दूसरों के साथ बांटना भी चाहते हैं।


... यह आनन्द के समाचार का दिन है, परन्तु हम किसी को नहीं बताते। - २ राजा ७:९

बाइबल पाठ: २ राजा ७:३-११
2Ki 7:3  और चार कोढ़ी फाटक के बाहर थे; वे आपस में कहने लगे, हम क्यों यहां बैठे बैठे मर जाएं?
2Ki 7:4  यदि हम कहें, कि नगर में जाएं, तो वहां मर जाएंगे, क्योंकि वहां मंहगी पड़ी है, और जो हम यहीं बैठे रहें, तौभी मर ही जाएंगे। तो आओ हम अराम की सेना में पकड़े जाएं; यदि वे हम को जिलाए रखें तो हम जीवित रहेंगे, और यदि वे हम को मार डालें, तौभी हम को मरना ही है।
2Ki 7:5  तब वे सांझ को अराम की छावनी में जाने को चले, और अराम की छावनी की छोर पर पहुंच कर क्या देखा, कि वहां कोई नहीं है।
2Ki 7:6  क्योंकि प्रभु ने अराम की सेना को रथों और घोड़ों की और भारी सेना की सी आहट सुनाई थी, और वे आपस में कहने लगे थे कि, सुनो, इस्राएल के राजा ने हित्ती और मिस्री राजाओं को वेतन पर बुलवाया है कि हम पर चढ़ाई करें।
2Ki 7:7  इसलिए वे सांझ को उठ कर ऐसे भाग गए, कि अपने डेरे, घोड़े, गदहे, और छावनी जैसी की तैसी छोड़-छाड़ अपना अपना प्राण लेकर भाग गए।
2Ki 7:8  तो जब वे कोढ़ी छावनी की छोर के डेरों के पास पहुंचे, तब एक डेरे में घुस कर खाया पिया, और उस में से चान्दी, सोना और वस्त्र ले जा कर छिपा रखा; फिर लौट कर दूसरे डेरे में घुस गए और उस में से भी ले जा कर छिपा रखा।
2Ki 7:9  तब वे आपस में कहने लगे, जो हम कर रहे हैं वह अच्छा काम नहीं है, यह आनन्द के समाचार का दिन है, परन्तु हम किसी को नहीं बताते। जो हम पौ फटने तक ठहरे रहें तो हम को दण्ड मिलेगा; सो अब आओ हम राजा के घराने के पास जाकर यह बात बतला दें।
2Ki 7:10  तब वे चले और नगर के चौकीदारों को बुला कर बताया, कि हम जो अराम की छावनी में गए, तो क्या देखा, कि वहां कोई नहीं है, और मनुष्य की कुछ आहट नहीं है, केवल बन्धे हूए घोड़े और गदहे हैं, और डेरे जैसे के तैसे हैं।
2Ki 7:11  तब चौकीदारों ने पुकार के राजभवन के भीतर समाचार दिया।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास २८-२९ 
  • यूहन्ना ९:२४-४१

शुक्रवार, 25 मई 2012

संपूर्ण

   जौन स्टेईन्बैक का पुलिटज़र पुरुस्कार प्राप्त उपन्यास "The Grapes of Wrath" का कथानक २०वीं सदी के आरंभ में आई भीषण आर्थिक मंदी के समय में स्थित है। कहानी का आरंभ होता है मंदी की मार झेल रहे और अकाल ग्रस्त ओक्लाहोमा प्रांत के दृश्य से जहां फसल सूख रही है और खेत धूल होते जा रहे हैं। ऐसी विकट स्थिति में महिलाओं की नज़र अपने मर्दों पर टिकी थी कि वे इस कठिनाई को कैसे झेलते हैं; कहीं वे इस तनाव में टूट तो नहीं रहे। जब वे देखती हैं कि उनके आदमी मेहनत करने और जीवन यापन के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हट रहे तो वे भी हिम्मत पाती हैं। स्टेईन्बैक ने इस संबंध में लिखा, "महिलाएं और बच्चे अपने अन्दर इस बात को जानते थे कि यदि उनके मर्द ’संपूर्ण’ रहेंगे तो वे फिर प्रत्येक दुर्भाग्य सहन कर सकते हैं।" यहां बात खुशी या संपन्नता या संतुष्टि की भी नहीं थी, बात थी अपने अन्दर, अपने जीवन में संपूर्ण होना। यही ’संपूर्णता’ हम सब के लिए आज भी बड़ी आवश्यक है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के किंग जेम्स अनुवाद में मूल भाषा में आए शब्द ’संपूर्ण’ का अकसर अनुवाद शरीर के किसी रोग की ’चंगाई’ पाने में किया गया है। उदाहरणस्वरूप, जब ३८ वर्ष से रोगावस्था में पड़े एक मनुष्य से प्रभु की बातचीत होती है तो प्रभु यीशु ने उससे पूछा, "क्या तू चंगा होना चाहता है?" (यूहन्ना ५:५-६); उस मनुष्य को शारीरिक व्याधि से चंगा करने के बाद प्रभु उसे आत्मिक रूप से भी स्वस्थ रहने के लिए चिताते हैं: "...देख, तू तो चंगा हो गया है; फिर से पाप मत करना, ऐसा न हो कि इस से कोई भारी विपत्ति तुझ पर आ पड़े" (यूहन्ना ५:१४)।

   यदि हम केवल प्रभु यीशु से वह चाहते हैं जो वह हमारे लिए कर सकता है, तो प्रभु के साथ हमारा संबंध बहुत सीमित रहेगा। जब हम अपने जीवन में स्वयं प्रभु यीशु ही को चाहेंगे तो उसकी उपस्थिति हमारे जीवनों में संपूर्णता को लेकर आएगी; क्योंकि केवल वह ही संपूर्ण है (कुलुस्सियों १:१९) और हमारी संपूर्णता उसकी चाह है (कुलुस्सियों १:२२)। - डेविड मैक्कैस्लैंड


एक टूटे और अधूरे जीवन को संपूर्णता केवल प्रभु यीशू ही दे सकते हैं।

...क्‍या तू चंगा [संपूर्ण] होना चाहता है? - यूहन्ना ५:५-६

बाइबल पाठ: यूहन्ना ५:१-१६
Joh 5:1  इन बातों के पीछे यहूदियों का एक पर्व हुआ और यीशु यरूशलेम को गया।
Joh 5:2  यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्‍ड है जो इब्रानी भाषा में बेतहसदा कहलाता है, और उसके पांच ओसारे हैं।
Joh 5:3  इन में बहुत से बीमार, अन्‍धे, लंगड़े और सूखे अंगवाले (पानी के हिलने की आशा में) पड़े रहते थे।
Joh 5:4  (क्‍योंकि नियुक्ति समय पर परमेश्वर के स्‍वर्गदूत कुण्‍ड में उतर कर पानी को हिलाया करते थे: पानी हिलते ही जो कोई पहिले उतरता वह चंगा हो जाता था चाहे उसकी कोई बीमारी क्‍यों न हो।)
Joh 5:5   वहां एक मनुष्य था, जो अड़तीस वर्ष से बीमारी में पड़ा था।
Joh 5:6  यीशु ने उसे पड़ा हुआ देख कर और जान कर कि वह बहुत दिनों से इस दशा में पड़ा है, उस से पूछा, क्‍या तू चंगा होना चाहता है?
Joh 5:7  उस बीमार ने उस को उत्तर दिया, कि हे प्रभु, मेरे पास कोई मनुष्य नहीं, कि जब पानी हिलाया जाए, तो मुझे कुण्‍ड में उतारे, परन्‍तु मेरे पहुंचते पहुंचते दूसरा मुझ से पहिले उतर पड़ता है।
Joh 5:8   यीशु ने उस से कहा, उठ, अपनी खाट उठा कर चल फिर।
Joh 5:9  वह मनुष्य तुरन्‍त चंगा हो गया, और अपनी खाट उठा कर चलने फिरने लगा।
Joh 5:10  वह सब्‍त का दिन था। इसलिए यहूदी उस से, जो चंगा हुआ था, कहने लगे, कि आज तो सब्‍त का दिन है, तुझे खाट उठानी उचित नहीं।
Joh 5:11  उस ने उन्‍हें उत्तर दिया, कि जिस ने मुझे चंगा किया, उसी ने मुझ से कहा, अपनी खाट उठा कर चल फिर।
Joh 5:12  उन्‍होंने उस से पूछा वह कौन मनुष्य है जिस ने तुझ से कहा, खाट उठाकर चल फिर?
Joh 5:13  परन्‍तु जो चंगा हो गया था, वह नहीं जानता था वह कौन है; क्‍योंकि उस जगह में भीड़ होने के कारण यीशु वहां से हट गया था।
Joh 5:14  इन बातों के बाद वह यीशु को मन्‍दिर में मिला, तब उस न उस से कहा, देख, तू तो चंगा हो गया है; फिर से पाप मत करना, ऐसा न हो कि इस से कोई भारी विपत्ति तुझ पर आ पड़े।
Joh 5:15   उस मनुष्य ने जा कर यहूदियों से कह दिया, कि जिस ने मुझे चंगा किया, वह यीशु है।
Joh 5:16  इस कारण यहूदी यीशु को सताने लगे, क्‍योंकि वह ऐसे ऐसे काम सब्‍त के दिन करता था।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास २५-२७ 
  • यूहन्ना ९:१-२३

गुरुवार, 24 मई 2012

बच्चों का ध्यान

   कई वर्षों तक कॉलेज के प्राध्यापक रहे डेविड होलक्विस्ट नामक ७७ वर्षीय वृद्ध की मृत्योपरांत, उनकी यादगार सभा में परमेश्वर के वचन बाइबल से पढ़ा गया लूका १८ का भाग कुछ असाधारण लगा क्योंकि बाइबल का वह खंड बच्चों से संबंधित है। किंतु जो लोग डेविड को जानते थे वे पास्टर कि बात से सहमत थे कि यह खंड डेविड की इस यादगार सभा में उनके लिए बिलकुल उपयुक्त है; क्योंकि डेविड को बच्चों से बहुत प्यार था; अपने बच्चों से भी और दूसरों के बच्चों से भी।

   डेविड बच्चों के लिए गुब्बारों से जानवरों के आकार बनाते थे, उनके लिए कठपुतलियां बनाते थे और कठपुतलियों के माध्यम से बच्चों तक मसीही संदेश पहुंचाते थे। जब चर्च के किसी कार्यक्रम की योजना बन रही होती थी तो सदा ही उनका प्रश्न होता था कि बच्चों के लिए क्या किया जाएगा? उनको चिंता रहती थी कि ना केवल व्यसक वरन किसी न किसी रीति से बच्चे भी चर्च की गतिविधियों और परमेश्वर की आराधना में भाग ले सकें।

   लूका के १८ अध्याय में हम प्रभु यीशु मसीह के बच्चों के प्रति ध्यान को पाते हैं। जब लोग बच्चों को प्रभु यीशु के पास लाने लगे तो चेलों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, कि व्यस्त प्रभु को बच्चे परेशान ना करें। किंतु प्रभु बच्चों से परेशान नहीं थे, वरन इसके विपरीत उन्होंने चेलों की यह बात पसन्द नहीं आई; उन्हों ने चेलों से कहा: "...बालकों को मेरे पास आने दो, और उन्‍हें मना न करो: क्‍योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है" (लूका १८:१६)। इसी वृतांत को लिखते हुए मरकुस ने लिखा है कि प्रभु ने बच्चों को अपनी गोद में बैठाया और उन्हें आशीष दी (मरकुस १०:१४-१६)।

   क्यों ना हम बच्चों के प्रति अपने रवैये को जांच लें और अपने प्रभु की इच्छा के अनुरूप और डेविड होलक्विस्ट के उदाहरण के समान उनका ध्यान रखें, उन्हें परमेश्वर की आराधना के लिए प्रोत्साहित करें, बच्चों को किसी रीति से प्रभु के निकट लाने के माध्यम बनें। आखिरकर हमारे प्रभु ने स्वयं ही कहा है कि परमेश्वर का राज्य उन्हीं का है जो बच्चों के समान हैं। - ऐनी सेटास


परमेश्वर छोटे बच्चों के विष्य में बड़ी चिन्ता रखता है।

यीशु न बच्‍चों को पास बुला कर कहा, बालकों को मेरे पास आने दो, और उन्‍हें मना न करो: क्‍योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है। - लूका १८:१६

बाइबल पाठ: मरकुस १०:१३-१६
Mar 10:13  फिर लोग बालकों को उसके पास लाने लगे, कि वह उन पर हाथ रखे, पर चेलों ने उनको डांटा।
Mar 10:14 यीशु ने यह देख क्रुध होकर उन से कहा, बालकों को मेरे पास आने दो और उन्‍हें मना न करो, क्‍योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है।
Mar 10:15  मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो कोई परमेश्वर के राज्य को बालक की नाई ग्रहण न करे, वह उस में कभी प्रवेश करने न पाएगा।
Mar 10:16 और उस ने उन्‍हें गोद में लिया, और उन पर हाथ रखकर उन्‍हें आशीष दी।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास २२-२४ 
  • यूहन्ना ८:२८-५९

बुधवार, 23 मई 2012

उच्चतम संदेशवाहन तकनीक

   संदेशवाहन और सूचनाओं के आदान-प्रदान में हमारा संसार उच्च-तकनीक का प्रयोग कर रहा है और उसमें दिन प्रतिदिन और भी सुधार तथा उन्नति करता जा रहा है। केवल वैज्ञानिक स्तर पर ही नहीं, आम आदमी और सामन्य संपर्क में भी यह बात लागू है। मोबाइल फोन, एस.एम.एस. संदेशों, इंटरनैट, ट्विटर और फेस्बुक जैसे माध्यमों के द्वारा आज के लोग जैसे आपस में सम्पर्क बनाए रखते हैं और सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान होता रहता है, उससे कुछ लोगों को लग सकता है कि परमेश्वर का वचन बाइबल पुराने ज़माने की बात है। परन्तु सत्य यह है कि बाइबल में जो संदेशवाहन की क्षमता है, वह आज के नवीनतम तथा सबसे उन्नत संदेशवाहन प्रौद्यग्की द्वारा भी संभव नहीं है।

   ज़रा कलपना कीजिए, जब और जैसी आपकी आवश्यक्ता है, उसी के अनुसार इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता से आपको एक व्यक्तिगत संदेश मिलता है, उस के वचन से, उस के किसी जन के द्वारा, जिस से आप जानने पाते हैं कि अब आगे आप को क्या करना है। संसार और विज्ञान कितनी भी उन्नति कर ले, किसी का मन पढ़कर उसको सही व्यक्तिगत मार्गदर्शन देना, जो आने वाली परिस्थितियों और बीती हुई बातों, दोनों का ध्यान रखता हो और उन में सही तालमेल बनाता हो, किसी भी उच्च से उच्च तकनीक के लिए कभी संभव नहीं है।

   परमेश्वर के वचन के प्रचारक या पास्टर को किसी न किसी उपस्थित श्रोता से यह बात अकसर सुनने को मिलती है कि "जो आज आपने संदेश दिया, वह मेरे ही लिए था, मुझे इसी मार्गदर्शन कि आवश्यक्ता थी।" किसी रीति से संदेश के दिये जाने के समय, परमेश्वर के वचन ने उस श्रोता के मन से बातें कीं, उसकी दुविधा में उसे सही मार्ग दिखाया, उसके प्रश्नों का उत्तर दिया, उसके असमंजस को दूर किया। जब प्रचारक या पास्टर वह संदेश तैयार कर रहा था और दे रहा था तब उसे उस व्यक्ति और उस की समस्या के बारे में पता भी नहीं था, किंतु परमेश्वर जो सब कुछ और सबको जानता है, उसने अपने वचन द्वारा सम्भव किया कि वह संदेश उस व्यक्ति तक पहुंचे और उसका मार्गदर्शन करे। हम मसीही विश्वासी जो परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में समय बिताते हैं, इस बात को भली भांति जानते हैं कि समय समय पर परमेश्वर का जीवता वचन हम से हमारी आवश्यक्ता के अनुसार बातें करता है; हम सब ने यह अनुभव किया है। परमेश्वर ने हर एक मनुष्य को उसके वचन को समझने के योग्य बनाया है, आवश्यक्ता है उस वचन को मानने और विश्वास के साथ ग्रहण करने की। परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ उसे सिखाने के लिए उपलब्ध रहता है।

   इस बात में हर्षित और आनन्दित हों कि इस वैज्ञानिक युग में उच्चतम संदेशवाहन तकनीक और क्षमता हम मसीही विश्वासियों को सेंतमेंत और अति सहज रीति से उपलब्ध है: "परन्‍तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्‍तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं" (१ कुरिन्थियों २:१२)। - जो स्टोवैल


बाइबल प्राचीन अवश्य है, परन्तु उसके सत्य सदा नए रहते हैं।


हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्‍तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। - १ कुरिन्थियों २:१२

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों २:१-१६
1Co 2:1   और हे भाइयों, जब मैं परमेश्वर का भेद सुनाता हुआ तुम्हारे पास आया, तो वचन या ज्ञान की उत्तमता के साथ नहीं आया।
1Co 2:2  क्‍योंकि मैं ने यह ठान लिया था, कि तुम्हारे बीच यीशु मसीह, वरन क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह को छोड़ और किसी बात को न जानूं।
1Co 2:3   और मैं निर्बलता और भय के साथ, और बहुत थरथराता हुआ तुम्हारे साथ रहा।
1Co 2:4  ओर मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं परन्‍तु आत्मा और सामर्थ का प्रमाण था।
1Co 2:5  इसलिए कि तुम्हारा विश्वास मनुष्यों के ज्ञान पर नहीं, परन्‍तु परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर हो।
1Co 2:6  फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्‍तु इस संसार का और इस संसार के नाश होने वाले हाकिमों का ज्ञान नहीं।
1Co 2:7  परन्‍तु हम परमेश्वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिए ठहराया।
1Co 2:8  जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्‍योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते।
1Co 2:9  परन्‍तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिए तैयार की हैं।
1Co 2:10  परन्‍तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया, क्‍योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है।
1Co 2:11   मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा।
1Co 2:12  परन्‍तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्‍तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं।
1Co 2:13  जिन को हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्‍तु आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिलाकर सुनाते हैं।
1Co 2:14  परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्‍योंकि वे उस की दृष्‍टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्‍हें जान सकता है क्‍योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है।
1Co 2:15  आत्मिक जन सब कुछ जांचता है, परन्‍तु वह आप किसी से जांचा नहीं जाता।
1Co 2:16  क्‍योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए परन्‍तु हम में मसीह का मन है।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास १९-२१ 
  • यूहन्ना ८:१-२७

मंगलवार, 22 मई 2012

आपूर्ति

   चील के बच्चे अभी एक सप्ताह के भी नहीं हुए थे, वे रोएंदार परों की गेंद के समान दिखाई देते थे, उनका स्वरूप अभी ठीक से बना भी नहीं था लेकिन वे भोजन के लिए आपस में लड़ने लगे थे। अभी उनमें इतनी ताकत भी नहीं थी कि अपने सिर कुछ सैकिंड के लिए ही संभाल कर सीधे रख सकें, लेकिन वे एक दूसरे पर अपनी छोटी सी चोंच से प्रहार करने से नहीं रुक रहे थे। अभी उनकी आंखें खुली भी नहीं थीं और वे एक दुसरे को देख भी नहीं सकते थे, लेकिन अपने स्वार्थ के आगे एक को दूसरे की उपस्थिति स्वीकार नहीं थी। जब भी उनके माता-पिता उनके लिए भोजन लाते, तो तुरंत ही वे एक दुसरे को दबा कर उस भोजन को अकेले ही हड़प करने के प्रयासों में लग जाते थे। यदि भोजन की उपलब्धता में कोई कमी होती, या माता-पिता एक को दे रहे और दूसरे को नज़रंदाज़ कर रहे होते तो उनका व्यवहार समझा जा सकता था; किंतु ऐसा बिलकुल नहीं था। माता-पिता दोनो के लिए बहुतायत से भोजन ला कर दोनों को खिला रहे थे, उनकी ओर से कोई भेदभाव नहीं था, लेकिन उन चूज़ों में इस बात का कोई एहसास नहीं था। उनकी हर क्रीया केवल अपने स्वार्थ से ही वशीभूत और निर्देषित थी।

   चील के उन लालची और स्वार्थी चूज़ों को देख कर मुझे लोगों में विद्यमान ऐसी ही स्वार्थी भावना और मूर्खता स्मरण हो आई, जो अपने लिए हर वह वस्तु पाने की लालसा रखते हैं जो किसी और के लिए है (याकूब ४:१-५)। हमारे आपसी विवाद और झगड़ों का एक बहुत बड़ा कारण है हमारा लालच और आपसी द्वेष। जो परमेश्वर ने किसी दूसरे के लिए रखी है, हम वही वस्तु पाना चाहते हैं, फिर चाहे वह हमारे परिवार, संबंधी, मित्र या पड़ौसी के पास हो या उसके लिए हो। हम यह भूल जाते हैं कि परमेश्वर ने हम में से प्रत्येक के लिए कुछ न कुछ भला रखा है, और वह हमें देता है। हमें किसी दूसरे की वस्तु का लालच करने या उसके कारण दूसरे से द्वेष रखने की आवश्यक्ता नहीं है। जो हमारा है, वह परमेश्वर हमें अवश्य ही देगा, कुछ पाने के लिए किसी दूसरे का हक छीनने या उसका नुकसान करने की कोई आवश्यक्ता नहीं है।

   हमारे परमेश्वर पिता के पास हम सब के लिए बहुतायत से है, और हमारा भला भी केवल उस से ही होगा जो परमेश्वर ने हमारे किए निर्धारित किया है; बाकी सब हमारे लिए व्यर्थ है। व्यर्थ कड़ुवाहट में पड़ने की बजाए अपने लिए परमेश्वर की आपूर्ति पर विश्वास रखिए और उसी में आनन्दित रहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारी आवश्यक्ताएं कितनी भी हों, वे कभी भी परमेश्वर की आपूर्ति की क्षमता से अधिक नहीं हो सकतीं।


...क्योंकि जगत और जो कुछ उस में है वह मेरा है। - भजन ५०:१२

बाइबल पाठ: याकूब ४:१-१०
Jas 4:1  तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्‍या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?
Jas 4:2  तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, और कुछ प्राप्‍त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिए नहीं मिलता, कि मांगते नहीं।
Jas 4:3  तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिए कि बुरी इच्‍छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो।
Jas 4:4  हे व्यभिचारिणयों, क्‍या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है? सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है।
Jas 4:5  क्‍या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्‍त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उस ने हमारे भीतर बसाया है, क्‍या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो?
Jas 4:6   वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है।
Jas 4:7  इसलिए परमेश्वर के आधीन हो जाओ, और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा।
Jas 4:8  परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो।
Jas 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ; तुम्हारी हंसी शोक से और तुम्हारा आनन्‍द उदासी से बदल जाए।
Jas 4:10  प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास १६-१८ 
  • यूहन्ना ७:२८-५३

सोमवार, 21 मई 2012

स्वार्थ


   १९७० के दशक में उस समय के प्रसिद्ध गायक दल बीटल्स (The Beatles) ने यह दिखाने के उद्देश्य से कि उनके संगीत की रचना कैसे होती है, अपने दल के सदस्यों और उनके कार्यों पर एक चलचित्र (documentary) बनाना आरंभ किया। परन्तु जब चलचित्र बना तब बजाए यह दिखाने के कि उनके संगीत की रचना कैसे होती थी, जो सामने आया वह था उनमें से प्रत्येक का स्वार्थ और आपसी कलह। दल का हर सदस्य दल की उन्नति के लिए नहीं वरन अपनी ही उन्नति की चाह और महत्वकांक्षाओं से भरा हुआ था, और अपने स्वार्थ में होकर ही कार्य कर रहा था। इस चलचित्र के बनने के कुछ समय पश्चात ही यह प्रसिद्ध संगीत दल टूट कर बिखर गया; कारण था स्वार्थ से उपजा आपसी विवाद और टूटी मित्रता।

   स्वार्थ, मानव संबंधों को बिगाड़ने वाली एक बहुत पुरानी समस्या रही है। प्रथम ईसवीं में प्रेरित पौलुस को भय था कि फिलिप्पी की मण्डली भी इसी व्याधि का शिकार न बन जाए। वह भली भांति जानता था कि जब व्यक्तिगत उन्नति की भावना, मण्डली की सामूहिक उन्नति की लालसा पर भारी पड़ने लगती है तो शीघ्र ही लोगों के रवैये भी एक दूसरे के प्रति फूट और द्वेष के हो जाते हैं, और मण्डली पतन की ओर चल निकलती है।
   इस खतरनाक प्रवृति को पनपने से रोकने के लिए पौलुस ने उन्हें अपनी पत्री में लिखा: "विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे" (फिलिप्पियों २:३-४)।

   आज यदि आपके जीवन पर एक चलचित्र बनाया जाए तो वह क्या प्रगट करेगा; स्वार्थी या निस्वार्थी जीवन? हम मसीही विश्वासियों को विशेषकर इस बात में बहुत सावधान रहना है और अपने प्रभु यीशु के जीवन के अनुरूप अपने जीवनों में भी औरों के लिए निस्वार्थ चिंता प्रगट करनी है। निस्वार्थ भावना द्वारा ही हम चर्च और परिवारों में टूटना और बिखरना रोक सकेंगे और सामूहिक उन्न्ति की राह पर अग्रसर हो सकेंगे। - बिल क्राउडर


जो मन दुसरों के हित की भावना से भरा रहता है वह कभी स्वार्थ द्वारा नष्ट नहीं हो सकता।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। - फिलिप्पियों २:३

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-११
Php 2:1  सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Php 2:2  तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Php 2:3  विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो।
Php 2:4  हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
Php 2:5  जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Php 2:6  जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
Php 2:7  वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Php 2:8   और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Php 2:9  इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है।
Php 2:10  कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Php 2:11  और परमेश्वर पिता की महिमा के लिए हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।


एक साल में बाइबल: 

  • १ इतिहास १३-१५ 
  • यूहन्ना ७:१-२७