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सोमवार, 13 अगस्त 2012

नियम और कर्तव्य


   बहुत पहले मेरी पत्नी ने ठान लिया था कि गति सीमा के अन्दर गाड़ी चलाने में उसे स्वतंत्र होने का अद्भुत एहसास होता है। उसका कहना है कि निर्धारित गति सीमा के अन्दर गाड़ी चलाने से उसे ना तो गति सूचक रडार द्वारा पकड़े जाने और गाड़ी तेज़ चलाने का जुर्माना भरने का डर रहता है और ना ही किसी पुलिस की गाड़ी को आता देख अपनी गाड़ी धीमी करने की चिंता रहती है। यदि हम किसी लम्बी यात्रा पर भी हों और खुली सड़क पर दूरी चाहे धीरे धीरे ही कम हो रही हो, वह निर्धारित गति पर ही गाड़ी चलाती है और यात्रा तथा नज़ारों का आनन्द लेती रहती है। साथ ही वह मुझे स्मरण दिलाती है कि ऐसा करना नियम का पालन करना है जो हमारी ज़िम्मेदारी है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों १३:१-१० में हमें अधिकारियों, देश की सरकार और परमेश्वर के नियमों से संबंधित ज़िम्मेदारियों बताया गया है। वहां लिखा है कि जब हम अपने अधिकारियों और सरकार की आज्ञाओं का पालन करते हैं तो हमें किसी दण्ड का डर नहीं रहता, और सही कार्य करने के द्वारा हमारा विवेक भी शुद्ध रहता है (पद ३, ५)।

   प्रेरित पौलुस ने यह खण्ड लिखते समय रोम के विश्वासियों से आग्रह किया कि जो कुछ अधिकारियों और सरकार को देना बनता है वे उसे नियमित रीति से दिया करें - चाहे वे कर हों या महसूल, भय मानना हो या आदर करना (पद ७)। पौलुस ने मानवीय नियमों के संदर्भ से भी आगे बढ़कर लिखा : "आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है" (रोमियों १३:८)।

   मनुष्य द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना प्रत्येक मसीही विश्वासी का कर्तव्य है और दूसरों के साथ प्रेम से व्यवहार करना परमेश्वर के नियम का निर्वाह है; परमेश्वर का नियम ही "स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था" (याकूब १:२५) है। - डेविड मैक्कैसलैंड


नियम पालन द्वारा हम मनुष्यों की विधि पूरी करते हैं और प्रेम द्वारा परमेश्वर की आज्ञा।

आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदान न हो? क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्या पूरी की है। - रोमियों १३:८

बाइबल पाठ: रोमियों १३:१-१०
Rom 13:1  हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के अधीन रहे; क्‍योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Rom 13:2  इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करनेवाले दण्‍ड पाएंगे। 
Rom 13:3  क्‍योंकि हाकिम अच्‍छे काम के नहीं, परन्‍तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्‍छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Rom 13:4  क्‍योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्‍तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्‍योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्‍ड दे। 
Rom 13:5  इसलिये अधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्‍तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Rom 13:6  इसलिये कर भी दो, क्‍योंकि वे परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Rom 13:7  इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Rom 13:8  आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Rom 13:9  क्‍योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, लालच न करना, और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Rom 13:10  प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८७-८८ 
  • रोमियों १३

रविवार, 12 अगस्त 2012

संबंध


   जब मुझे पता चला कि एक बोर्ड मीटिंग में भाग लेने के लिए डेविड उसी दफतर में आया हुआ है जहां मैं काम करती हूँ तो मुझे बहुत खुशी हुई। मेरे और डेविड की एक सामान्य सहेली थी - शैरन, जिसकी म्रुत्यु कुछ वर्ष पहले हुई थी। मुझे और डेविड को कुछ मिनिट का समय मिला कि हम मिल कर शैरन के बारे में बात कर सकें और जीवन था परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम को स्मरण कर सकें। कितना आनन्दमय होता है किसी ऐसे के साथ संपर्क करना जो आपके समान ही किसी ऐसे व्यक्ति को प्रीय जानता हो जिसे आप भी प्रीय जानते हैं। उस सामान्य प्रीय जन के कारण उस दूसरे व्यक्ति से आपका एक विशेष संबंध हो जाता है और आप उसके साथ अपने प्रीय जन के बारे में बातें करके आनन्दित हो सकते हैं।

   जो लोग मसीह यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में जानते हैं, वे आपस में एक गहरे संबंध से जुड़े हैं, क्योंकि हम अपने प्रभु और उसमें होकर एक दूसरे के साथ सदा के लिए जुड़ गए हैं। जैसे प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में कहा: "...हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं" (रोमियों १२:५), और प्रेरित युहन्ना ने भी लिखा "जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्‍पन्न हुआ है और जो कोई उत्‍पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्‍पन्न हुआ है" (१ युहन्ना ५:१)।

   जब हम संगी विश्वासियों के साथ मिलते हैं तो हमारे पास अवसर होता है कि हम अपने प्रीय - प्रभु यीशु के बारे में बातें करें, और उसमें होकर, उसकी मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा जो प्रेम, क्षमा और अनुग्रह हमने अनुभव किया है उसके बारे में एक दूसरे को बताएं। ऐसे समयों पर हम एक दूसरे को प्रोत्साहित भी कर सकते हैं कि उसमें अपने विश्वास में दृढ़ बनें रहें और विश्वासयोग्यता के साथ उसके साथ चलते रहें।

   आज और इस पूरे सप्ताह, हम अपने संगी विश्वासियों को स्मरण दिलाते रहें कि प्रभु ने हमारे लिए क्या क्या किया है और वास्तव में वह कितना अद्भुत है। - ऐनी सेटास


आप जितना अधिक प्रभु यीशु से प्रेम करेंगे, उतना अधिक उसके बारे में बातें करेंगे।

...हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। - रोमियों १२:५

बाइबल पाठ: १ युहन्ना ४:७-५:१
1Jn 4:7  हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है, और परमेश्वर को जानता है। 
1Jn 4:8  जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1Jn 4:9  जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1Jn 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया, पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया, और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1Jn 4:11  हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1Jn 4:12  परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है, और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1Jn 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्‍योंकि उस ने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1Jn 4:14  और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है। 
1Jn 4:15  जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1Jn 4:16  और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है, और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1Jn 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्‍योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1Jn 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्‍योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1Jn 4:19  हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उस ने हम से प्रेम किया। 
1Jn 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं, और अपने भाई से बैर रखे, तो वह झूठा है: क्‍योंकि जो अपने भाई से, जिस उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1Jn 4:21  और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।
1Jn 5:1  जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्वर से उत्‍पन्न हुआ है और जो कोई उत्‍पन्न करने वाले से प्रेम रखता है, वह उस से भी प्रेम रखता है, जो उस से उत्‍पन्न हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८४-८६ 
  • रोमियों १२

शनिवार, 11 अगस्त 2012

अनुकरण


   एक दिन जब हम भोजन खाने को मेज़ पर बैठे थे तो मेरे बड़े बेटे ने शिकायत करी कि उसकी छोटी बहन हमेशा ही उसकी नकल करती है - वह जैसे हंसता है, जैसे भोजन खाता है या कुछ और करता है वह भी वैसा ही करती है, और इससे उसे चिढ़ होती है। मैं ने और मेरी पत्नी ने उसे समझाने का प्रयास किया कि यह क्रोध करने की बात नहीं है, क्योंकि इससे उसके पास अवसर है के वह अपने जीवन के अच्छे उदाहरण द्वारा अपनी बहन को भी अच्छी बातें सिखा सके।

   मेरे बेटे के विचारों के विरुद्ध, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने यह चाहा और दूसरों से कहा भी कि वे उसके उदाहरण का अनुकरण करें: "तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं" (१ कुरिन्थियों ११:१)। इस पत्री के दसवें अध्याय में पौलुस मसीही विश्वासियों को उनकी स्वतंत्रता और प्रेम की ज़िम्मेदारियों के बारे में बता रहा था; जब वे किसी अविश्वासी के घर भोजन पर आमंत्रित हों तो जो सामने परोसा जाए उसे खाने के लिए वे स्वतंत्र थे (पद २७)। किंतु यदि उनके सामने रखे भोजन को किसी मूर्ति को अर्पित कर के परोसा गया हो, और किसी अन्य कमज़ोर विश्वासी को इससे ठेस पहुँचती हो तो उस कमज़ोर विश्वासी की स्वतंत्रता का ध्यान रखते हुए, और उसके प्रति अपने प्रेम के कारण, उन्हें वह अर्पित भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए (पद २८)।

   पौलुस ने उन लोगों को प्रोत्साहित किया कि इस बात में वे उसके द्वारा दिखाए गए उदाहरण का अनुसरण करें; क्योंकि पौलुस अपनी नहीं वरन अपने संगी विश्वासियों की भलाई का इच्छुक रहता था, अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के प्रेम, मेल, त्याग और भलाई आदि के महान गुणों का अनुकरण करने के द्वारा।

   पौलुस के समान ही हम सभी मसीही विश्वासियों को अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के उदाहरण का इतनी निकटता से अनुकरण करना है कि हम भी दुसरों से कह सकें, "तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं।" - मार्विन विलियम्स


मसीह यीशु का अनुकरण करके ऐसा जीवन जीएं जो दूसरों के लिए अनुकरणीय हो।

तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं। - १ कुरिन्थियों ११:१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:२३-११:१
1Co 10:23  सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब लाभ की नहीं: सब वस्‍तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्‍तु सब वस्‍तुओं से उन्नित नहीं। 
1Co 10:24   कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, वरन औरों की। 
1Co 10:25  जो कुछ कस्‍साइयों के यहां बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 
1Co 10:26  क्‍योकि पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है। 
1Co 10:27   और यदि अविश्वासियों में से कोई तुम्हें नेवता दे, और तुम जाना चाहो, तो जो कुछ तुम्हारे साम्हने रखा जाए वही खाओ: और विवेक के कारण कुछ न पूछो। 
1Co 10:28  परन्‍तु यदि कोई तुम से कहे, यह तो मूरत को बलि की हुई वस्‍तु है, तो उसी बताने वाले के कारण, और विवेक के कारण न खाओ। 
1Co 10:29  मेरा मतलब, तेरा विवेक नहीं, परन्‍तु उस दूसरे का। भला, मेरी स्‍वतंत्रता दूसरे के विचार से क्‍यों परखी जाए? 
1Co 10:30  यदि मैं धन्यवाद करके साझी होता हूं, तो जिस पर मैं धन्यवाद करता हूं, उसके कारण मेरी बदनामीं क्‍यों होती है? 
1Co 10:31   सो तुम चाहे खाओ, चाहे पीओ, चाहे जो कुछ करो, सब कुछ परमेश्वर की महीमा के लिये करो। 
1Co 10:32   तुम न यहूदियों, न यूनानियों, और न परमेश्वर की कलीसिया के लिये ठोकर का कारण बनो। 
1Co 10:33  जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूं, और अपना नहीं, परन्‍तु बहुतों का लाभ ढूंढ़ता हूं, कि वे उद्धार पाएं।
1Co 11:1     तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ८१-८३ 
  • रोमियों ११:१९-३६

शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

सदा के लिए


   लड़कपन में जब मुझे कोई छोटी चोट लगती या खरोंच आ जाती तो मेरी प्रतिक्रीया ऊंची आवाज़ में रोने-चिल्लने और खूब आंसू बहाने की होती। मेरे पिताजी मुझे सांत्वना देते और कहते, "यह सोचो कि जब दर्द बन्द हो जाएगा तो कितना अच्छा लगेगा।" उस समय तो मेरे पिताजी की यह सलाह मुझे किसी काम की नहीं लगती थी, और मैं अपने दर्द के अलावा और किसी बात के बारे में सोच भी नहीं सकता थी, लेकिन समय बीतने के साथ मेरे पिताजी की इस सलाह ने मुझे बहुत सी मुश्किलों से निकलने में सहायता करी, चाहे वह टूटे हृदय की वेदना हो या किसी लंबी बिमारी का कष्ट। मैं अपने आप को यही समझाती रहती थी, जो अभी है वह सदा नहीं रहेगा।

   हम मसीही विश्वासियों के पास भी अपने भविष्य के लिए यही आशा है - परमेश्वर ने हमारे भविष्य के लिए कुछ अति उत्तम ठहरा रखा है। कष्ट और परेशानियां परमेश्वर की सृष्टि की मूल योजना के भाग नहीं थे, किंतु आज हमें स्मरण दिलाते हैं कि जब परमेश्वर की आज्ञाओं की अवहेलना होती है तो उसका प्रतिफल कैसा होता है। कष्ट और परेशानियां हमें उकसाते भी हैं कि हम इन के निवारण और पाप से उद्धार पाने के सुसमाचार संबंधित परमेश्वर की योजना का सन्देश लोगों तक लेकर जाएं।

   यद्यपि हम दर्द और निराशा से बच नहीं सकते (यूहन्ना १६:३३), किंतु हम यह भी जानते हैं कि ये कुछ समय के ही हैं। कुछ दुखों से तो हम इस जीवन में ही छुटकारा पा लेंगे किंतु मसीही विश्वासी आते जीवन में प्रत्येक दुख-दर्द से छुटकारा पाने की निश्चितता को जानते हैं, जब परमेश्वर अपने राज्य की स्थापना करेगा और एक नई पृथ्वी और आकाश स्थापित किया जाएगा (प्रकाशितवाक्य २१:१)।

   पाप और पाप के प्रभाव से विहीन यह नई सृष्टि सदा के लिए रहेगी; जो अभी है वह सदा के लिए नहीं है। क्या आप उस नई सृष्टि में होंगे? - जूली ऐकैरमैन लिंक


स्वर्ग का नफा पृथ्वी के नुकसानों से कहीं बढ़कर होगा।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य २१:४

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २१:१-५
Rev 21:1  फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्‍योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Rev 21:2  फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्‍वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Rev 21:3  फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, और उन का परमेश्वर होगा। 
Rev 21:4  और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Rev 21:5  और जो सिंहासन पर बैठा था, उस ने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्‍योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७९-८० 
  • रोमियों ११:१-१८

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

सफल जीवन



   आईज़क हॉन मध्य १८वीं शताब्दी में, इंगलैंड में लौवुड नामक एक छोटे से स्थान के चर्च के पादरी थे; वे एक ऐसे पादरी थे जिनकी कोई खास पहचान नहीं थी। उनकी सेवकाई के अन्त समय उनके चर्च के सदस्यों में २६ महिलाएं और ७ पुरुष थे जिनमें से केवल ४ पुरुष ही चर्च किसी नियमित रूप से आते थे।

   आज के इस विशाल सामूहिक सम्पर्क और बड़े बड़े चर्चों के समय में कौन इस "सफल कार्य" मानता? हमारे आज के संसार में आईज़क हॉन ऐसे पादरियों में गिने जाते जो कुछ प्रभाव नहीं छोड़ सके; ना उन्हें किसी पादरियों की सभा को संभोधित करने का निमंत्रण मिलता और ना ही कोई उनसे चर्च की बढ़ोतरी से संबंधित कोई लेख लिखने का आग्रह करता।

   लेकिन फिर भी जब ८८ वर्ष की आयु में उनका देहान्त हुआ तब उनके चर्च के लोगों ने उनकी याद में अपने चर्च की दीवार पर एक पट्टी लगवाई जो आज भी विद्यमान है और जिस पर अन्य बातों के साथ साथ लिखा है: "बहुत ही कम ऐसे अगुवे हैं जो इतने नम्र हैं, जो इतने आदरणीय हैं। वे ईश्वरीय अनुग्रह द्वारा स्वर्ग के लिए तैयार किए गए थे और ौन्होंने पतझड़ आने तक भी डाल पर बने रहने वाले पक्के फल के समान जीवन समाप्त किया; पाठक, इनके जीवन के समान जीवन की लंबाई की नहीं वरन वैसे ही सफल जीवन की कामना करना।"

   उनका जीवन परमेश्वर के वचन बाइबल के १ पतरस ५:५-६ को स्मरण दिलाता है: "...क्‍योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए।"

   चाहे इस संसार के लोग पादरी आईज़क हॉन को सफल मानें या ना मानें, परन्तु वे स्वर्ग की दृष्टि से सफल थे और स्वर्ग में उनका प्रतिफल कोई उनसे ले नहीं सकता - वे परमेश्वर की दृष्टि में नम्र और सफल थे। हमारे प्रभु यीशु के द्वारा मिलने वाली सामर्थ से, उनके समान नम्रता और विश्वासयोग्यता के साथ जीवन व्यतीत करके हम भी सफल जीवन जीने वाले बन सकते हैं। - डेविड रोपर


नम्रता सफलता का नुसखा है।

जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्‍होंने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्‍हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देख कर उन के विश्वास का अनुकरण करो। 

बाइबल पाठ: १ पतरस ५:१-७
1Pe 5:1  तुम में जो प्राचीन हैं, मैं उन की नाईं प्राचीन और मसीह के दुखों का गवाह और प्रगट होने वाली महिमा में सहभागी होकर उन्‍हें यह समझाता हूं। 
1Pe 5:2  कि परमेश्वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच में हैं रखवाली करो; और यह दबाव से नहीं, परन्‍तु परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार आनन्‍द से, और नीच-कमाई के लिये नहीं, पर मन लगा कर। 
1Pe 5:3   और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं, उन पर अधिकार न जताओ, वरन झुंड के लिये आदर्श बनो। 
1Pe 5:4   और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने को नहीं। 
1Pe 5:5  हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्‍योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1Pe 5:6  इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1Pe 5:7  और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७७-७८ 
  • रोमियों १०

बुधवार, 8 अगस्त 2012

शिक्षा


   अपनी प्रतिदिन के सैर करते समय, मैं अनायास ही उड़ते हुए छोटे छोटे कीड़ों के झुंड में से होकर निकल गया। उस समय तो मुझे कुछ खास नहीं लगा, किंतु बाद में मेरे हाथ-पांवों पर उनके काटे के निशान हो गए जिनसे बहुत खुजली, पीड़ादायक फोड़े और परेशानी होती रही। इस अनुभव द्वारा मुझे परमेश्वर द्वारा फिरौन और मिस्त्र देश पर भेजीं दस विपदाओं में से एक - कुटकियों की विपदा का स्मरण हो आया।

   फिरौन के पुरोहित और पुजारी जो बार बार अपने हाथ-पांव धोने और सफाई करते रहने की रीति पर बड़ा घमण्ड करते थे, अब उन कुटकियों द्वारा आहत थे। परमेश्वर ने तो यह विपदा इसलिए भेजी कि फिरौन पश्चाताप करे और परमेश्वर की प्रजा इस्त्राएल को बन्धुआई से जाने दे, किंतु फिरौन ने अपना मन कठोर कर लिया और परमेश्वर द्वारा भेजे गए उसके सेवकों मूसा और हारून की बात नहीं मानी।

   जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि "वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ, और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो" (याकूब ४:६-८); इसलिए हम मसीही विश्वासियों को परेशानियों के समय में अपने मन कठोर करने की बजाए दीन होकर परमेश्वर के आधीन आ जाना चाहिए; और उससे मांगना चाहिए कि इन परेशानियों द्वारा वह हमें क्या सिखाना चाह रहा है।

   क्या आज आप किसी बात द्वारा परेशान हैं? कहीं आप परमेश्वर के साथ चलना भूलकर संसार के साथ तो नहीं चलने लग गए हैं और परेशानी द्वारा परमेश्वर आप का ध्यान अपनी ओर खींचने के प्रयास कर रहा है? यदि ऐसे में फिरौन के समान मन कठोर कर लेंगे तो परेशानी और बढ़ जाएगी। अपनी परेशानियों से शिक्षा लें और उन्हें अपनी उन्नति का माध्यम बनाएं। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमें हमारे पाप के प्रति कायल होने के लिए हम पर परेशानी आने देता है, जिससे हम पापों के लिए पश्चाताप द्वारा पुनः आनन्दित हो सकें। 

सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। - इब्रानियों ३:७-८

बाइबल पाठ: निर्गमन ८:१६-१९
Exo 8:16  फिर यहोवा ने मूसा से कहा, हारून को आज्ञा दे, कि तू अपनी लाठी बढ़ा कर भूमि की धूल पर मार, जिस से वह मिस्र देश भर में कुटकियां बन जाएं। 
Exo 8:17  और उन्होंने वैसा ही किया; अर्थात हारून ने लाठी को ले हाथ बढ़ा कर भूमि की धूल पर मारा, तब मनुष्य और पशु दोनों पर कुटकियां हो गई वरन सारे मिस्र देश में भूमि की धूल कुटकियां बन गई। 
Exo 8:18  तब जादूगरों ने चाहा कि अपने तंत्र मंत्रों के बल से हम भी कुटकियां ले आएं, परन्तु यह उन से न हो सका। और मनुष्यों और पशुओं दोनों पर कुटकियां बनी ही रहीं। 
Exo 8:19  तब जादूगरों ने फिरौन से कहा, यह तो परमेश्वर के हाथ का काम है। तौभी यहोवा के कहने के अनुसार फिरौन का मन कठोर होता गया, और उस ने मूसा और हारून की बात न मानी।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७४-७६ 
  • रोमियों ९:१६-३३

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

स्वार्थ या निस्वार्थ


   हाल ही में एक भीड़ भरी दुकान में मैंने एक महिला को देखा जो अपने पसन्द की चीज़ें लेने के लिए लोगों को धकेलते हुए दुकान में बढ़ रही थी। उसके व्यवहार के साथ साथ उसकी टी. शर्ट पर बड़े प्रमुख शब्दों में लिखे वाक्य, "सब कुछ मेरे लिए है" ने मेरा ध्यान उसकी ओर खींचा। उसका व्यवहार निश्चय ही उसकी शर्ट के वाक्य को प्रदर्शित कर रहा था।

   दुख की बात यह है कि वह महिला अकेली ऐसी नहीं है। यह वाक्य और ऐसा स्वार्थी व्यवहार संसार के कितने ही लोगों द्वारा प्रतिदिन प्रतिपल प्रदर्शित होता रहता है; ऐसा प्रतीत होता है कि यह आज के समय का आदर्श वाक्य बन गया है। किंतु यह ठीक नहीं है, मसीही विश्वासियों के लिए तो बिलकुल भी नहीं। मसीही विश्वासियों के लिए सब कुछ उनके लिए नहीं वरन उनके उद्धारकर्ता प्रभु यीशु और संसार के अन्य लोगों के लिए है जिनके लिए उनका प्रभु इस संसार में आया और बलिदान हुआ।

   प्रेरित पौलुस का तो निश्चय ही यह मानना था। पौलुस के संगी इस्त्राएली भी प्रभु यीशु को उद्धारकर्ता करके जाने, यह उसकी गहन इच्छा थी; पौलुस ने कहा : "क्‍योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्बी हैं, आप ही मसीह से श्रापित हो जाता" (रोमियों ९:३)। यह एक अद्भुत वाक्य है! अपने स्वार्थ और भले की सोचने की बजाए, पौलुस ने चाहा कि अपने लोगों की भलाई के लिए यदि संभव हो तो वह अपनी अनन्त काल की भलाई उन्हें देकर उनके श्राप को अपने ऊपर ले ले। उनके भले के लिए वह अपनी भलाई का बलिदान देने को तैयार था।

   पौलुस द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई यह शिक्षा इस स्वार्थ से भरे संसार में निस्वार्थ जीवन जीने के लिए एक चुनौती है। हम मसीही विश्वासियों को अपने आप से यह प्रश्न पूछते रहना चाहिए कि हमारा जीवन किस के लिए है - अपने लिए या हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु और अन्य लोगों के लिए, जिनके लिए मसीह यीशु संसार में आया?

   ज़रा विचार कीजिए - आपके जीवन में सब कुछ किसके लिए है? - बिल क्राउडर


मसीही विश्वासियों के जीवन मसीह और अन्य लोगों के प्रति प्रेम द्वारा पहचाने जाने चाहिएं, ना कि स्वार्थ द्वारा।

क्‍योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्बी हैं, आप ही मसीह से श्रापित हो जाता। - रोमियों ९:३

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१-११
Php 2:1  सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Php 2:2  तो मेरा यह आनन्‍द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Php 2:3  विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्‍छा समझो। 
Php 2:4  हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Php 2:5  जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Php 2:6  जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा। 
Php 2:7  वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Php 2:8   और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Php 2:9  इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है। 
Php 2:10  कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Php 2:11  और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७२-७३ 
  • रोमियों ९:१-१५