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गुरुवार, 14 नवंबर 2013

विलाप और सांत्वना


   यरुशलेम आग की लपटों से घिरा हुआ था और परमेश्वर का भविष्यद्वकता यिर्मयाह उसकी दुर्दशा पर विलाप कर रहा था। लंबे समय से तथा बारंबार यिर्मयाह यरुशलेम के लोगों और हाकिमों को आते विनाश से बचने के लिए पश्चाताप करने का परमेश्वर का सन्देश पहुँचाता रहा था, लेकिन उन्होंने उसकी एक ना सुनी, उसका तिरस्कार किया, उसे सताया, उसे झूठा कहा। अब वह विनाश का समय अपनी संपूर्ण वीभत्सता के साथ यरुशलेम पर आ पड़ा था और चारों ओर बरबादी ही बरबादी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह द्वारा लिखित छोटी सी पुस्तक ’विलापगीत’ यिर्मयाह द्वारा यरुशलेम की इस बरबादी पर किए गए शोक और विलाप का वर्णन है।

   यिर्मयाह ने इस पुस्तक को एक विशेष रीति से लिखा है। मूल इब्रानी भाषा की वर्णमाला में, जिसमें यह पुस्तक लिखी गई, 22 अक्षर होते हैं। यिर्मयाह ने इस पुस्तक को कविता के रूप में लिखा, और कविता का हर छंद इब्रानी वर्णनमाला के अक्षर से क्रमबुद्ध रूप में आरंभ होता है। प्रत्येक अक्षर के इस प्रकार क्रमबद्ध रूप में प्रयोग करे जाने से ना केवल पाठकों को इसे स्मरण करना सरल है, वरन यह इस बात का भी सूचक है कि यिर्मयाह का शोक और विलाप अधूरा नहीं वरन आरंभ से अन्त तक संपूर्ण था। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि यिर्मयाह ने ना केवल यरुशलेम और उसके लोगों की दशा बयान करी, वरन साथ ही अपना अनुभव और अपनी व्यथा भी बयान करी, और उससे भी बढ़कर, इस सारे कठोर अनुभव में उसने परमेश्वर से मिलने वाली शांति और सांत्वना को भी लिखा है। यिर्मयाह ने लिखा, "क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;" (विलापगीत 3:31-32)।

   यह हम मसीही विश्वासियों के लिए एक अद्भुत आशा और मार्गदर्श्न की बात है - हमारा प्रभु, जिस पर हमने विश्वास किया है और जिसे अपना जीवन समर्पित किया है वह हमारे कष्ट और क्लेष में हमारे साथ होता है, हमें संभालता है, हमें सांत्वना देता है। क्या आप भी किसी हृदय विदारक घटना या क्लेष से होकर निकल रहे हैं अथवा आप को निकलना पड़ा है? यिर्मयाह के समान ही, अपने मन के शोक और विलाप को पूरा अवसर दीजिए, साथ ही परमेश्वर की उपस्थिति और बीती समय में उसके द्वारा दिखाई गई भलाईयों को भी स्मरण रखिए। इससे आप उसकी शांति तथा सांत्वना को भी अनुभव करने पाएंगे और भविषय के लिए आशावान भी बने रहेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर आज हमारे हृदयों को हमारे आँसुओं से धुल लेने देता है जिससे आते सुख और आनन्द के लिए वे साफ रहें।

क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:22-33
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5 
  • इब्रानियों 10:19-39


बुधवार, 13 नवंबर 2013

हम जो हैं


   एक स्थानीय अस्पताल में अपने नियमित चिकित्सा जाँच किए जाने की प्रतीक्षा करते हुए मेरा ध्यान वहाँ दीवार पर लगे क्रूस पर चढ़ाए हुए प्रभु यीशु मसीह के चित्र पर गया। थोड़ी देर बाद, जाँच से पहले एक नर्स ने मेरे फॉर्म भरते और जाँच संबंधी कागज़ तैयार करते हुए मुझसे अनेक प्रश्न पूछे, जिनमें से एक था, "क्या आपकी कोई आत्मिक आवश्यकताएं हैं जिनके बारे में आप हमारे पादरी से चर्चा चाहेंगे?" मैंने कहा कि वर्तमान संसार के संदर्भ में मुझे उनका यह प्रश्न पूछना अच्छा लगा। उस नर्स ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि हम मसीही विश्वास पर आधारित और संचालित अस्पताल हैं और यह करना हमारी सेवकाई का एक भाग है। मैं प्रभावित हुआ कि आज के बहुवादी और धर्मनिर्पेक्ष धारणाओं को मान्यता देने वाले संसार में भी ऐसे लोग हैं जो वह दिखाने में हिचकिचाते नहीं हैं जो वो हैं।

   प्रेरित पतरस ने प्रथम सदी के मसीही विश्वासियों को ढ़ाढ़स दिया, उन्हें जो मसीही विश्वास के कारण उन पर आए सताव के कारण घर-बार छोड़कर भागने और तित्तर-बित्तर हो जाने को बाध्य हो गए थे, कि सच्चाई के कारण क्लेष उठाना भी उनके लिए आशीष का कारण है। अपनी पत्री में पतरस ने उन्हें लिखा: "और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:14-15)।

   जैसे उस अस्पताल की नर्स ने बिना झिझके अपने विश्वास को व्यक्त किया, वैसे ही हम मसीही विश्वासी भी अपने विश्वास को बिना हिचकिचाए बयान कर सकते हैं। यदि इस कारण लोग हमसे अनुचित व्यवहार करें या हमारी आलोचना करें तो हमें नम्रता और आदर के साथ ही उन्हें अपना प्रत्युत्तर देना चाहिए। हम जो हैं उसके लिए हमें कभी भयभीत होने या शर्मिंदा होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारा परमेश्वर सदा हमारे साथ है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीह के कार्य को कष्ट देने के बजाए भला है कि मसीह के कार्य के लिए कष्ट उठाना।

फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है। - 1 पतरस 4:14

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-17
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2 
  • इब्रानियों 10:1-18


मंगलवार, 12 नवंबर 2013

पालनहारा परमेश्वर


   रॉबिन और स्टीव परमर्श देने का कार्य करते हैं, यही उनकी मसीही सेवकाई भी है; किंतु इससे उन्हें आमदानी बहुत कम मिलती है। हाल ही में परिवार में उठी एक समस्य के कारण अपनी पुरानी कार में उन्हें 5,000 मील की यात्रा करनी पड़ी। समस्या से निपटने के बाद वापस लौटते हुए, घर से लगभग 2,000 मील दूर उनकी कार से आवाज़ें आने लगीं और वह चलने में दिक्कत देने लगी। उन्होंने गाड़ी को जब एक कार ठीक करने वाले मिस्त्री को दिखाया तो उत्तर मिला, इसका अब कुछ नहीं हो सकता, पूरा इंजन ही बदलना पड़ेगा। उनके पास नया इंजन डलवाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए बड़ी कठिनाई से वे जैसे-तैसे उस गाड़ी में घर तक तो लौट आए। तब उन्हें एक "कार मिशनरी" का पता चला जो मसीही सेवकाई में लगे लोगों कि सहायता करता था। उसने उनकी कार देखी और उसे अचंभा हुआ कि वह वापस घर तक आ गई थी। लेकिन उससे भी अधिक अचंभा स्टीव और रॉबिन को हुआ जब उस "कार मिशनरी" ने उनसे बिना कोई पैसा लिए उनकी गाड़ी में नया इंजन लगवाने का प्रस्ताव दिया। यदि उन्होंने मार्ग में नया इंजन डलवाने का प्रयास किया होता तो व्यर्थ ही, उतने पैसे ना होते हुए भी उन्हें हज़ारों डॉलर का खर्चा उठाना पड़ जाता। परमेश्वर ने उनके लिए कुछ अलग ही इन्तज़ाम पहले ही कर रखा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब इस्त्राएली मिस्त्र की गुलामी से निकल कर परमेश्वर की अगुवाई में वाचा के देश कनान की ओर चले तो उन्हें मरुभूमि से होकर जाना पड़ा। तीन दिन कि यात्रा के बाद उनका पानी समाप्त हो गया, और उन्हें यह भी पता नहीं था कि अब पानी कहाँ से मिलेगा। लेकिन परमेश्वर समस्या भी जानता था और उसका समाधान भी। जिस मार्ग से वे इस्त्राएली जा रहे थे वहाँ दो जगह, मारा और एलीम पर, पानी के सोते थे और परमेश्वर उन्हें वहीं लेकर गया। उन स्थानों पर ना केवल उन्हें पानी मिला वरन विश्राम करने के लिए अच्छा स्थान भी मिला।

   चाहे हमारी समस्या गंभीर और परिस्थिति विकट लगे, हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का यह आश्वासन है कि परमेश्वर हमारी अगुवाई कर रहा है। वह हमारा पालनहारा परमेश्वर है, हमारी यात्रा के मार्ग और मार्ग की हर बात को तथा मार्ग के लिए हमारी प्रत्येक आवश्यकता को वह भली-भांति जानता है। जब आवश्यकता आन पड़ेगी तब हमारा पालनहारा परमेश्वर उसका समाधान भी करेगा। - डेव ब्रैनन


असंभव परिस्थितियाँ परमेश्वर पर हमारे विश्वास को दृढ़ करने के अवसर होते हैं।

तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। - निर्गमन 15:25

बाइबल पाठ: निर्गमन 15:22-27
Exodus 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला। 
Exodus 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा। 
Exodus 15:24 तब वे यह कहकर मूसा के विरुद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं? 
Exodus 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उसने यह कहकर उनकी परीक्षा की, 
Exodus 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं। 
Exodus 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52 
  • इब्रानियों 9


सोमवार, 11 नवंबर 2013

सच्ची सुरक्षा


   शीत युद्ध के दिनों में - जो विश्व की दो महा-शक्तियों रूस और अमेरिका के बीच 20वीं सदी के दूसरे अर्ध-भाग में अत्यंत तनाव का समय था, अमेरिका के निवासी किसी भी समय घटित हो सकने वाले परमाणु युद्ध के भय में रहते थे। मुझे स्मरण है कि 1962 में क्यूबा में रुस द्वारा परमाणु मिसाइल लाने के प्रयास किए जाने से उत्पन्न संकट के समय हम विनाश के बहुत निकट आ गए थे। वह बड़ी उत्सुकता का समय था। उन दिनों की यादों में से आज मुझे एक बात की याद बड़ी विचित्र लगती है - हमारे स्कूल में होने वाला सुरक्षा अभ्यास। उस अभ्यास के लिए अचानक ही संकट सूचक घंटी बजती और हम सब जल्दी से सब कार्य छोड़कर अपने अपने डेस्क के नीचे छुप कर बैठ जाते, जब तक कि खतरा टलने की घंटी नहीं बजती थी - परमाणु हमले से बचने के लिए! आज मैं जानता हूँ और सोचता हूँ कि यदि वास्तव में परमाणु हमला होता तो हमारा वह डेस्क के नीचे जा छिपना हमारी लिए किसी भी रीति से ज़रा भी लाभदयाक नहीं हो सकता था। उस अभ्यास ने हमें सुरक्षा कि एक झूठी दिलासा तो दी लेकिन वह थी बिलकुल व्यर्थ।

   चाहे आज हम उसी स्तर के परमाणु खतरे का सामना नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिर भी कई बातें हैं जो हमारे लिए संकट उत्पन्न कर सकती हैं, उनमें से कुछ हैं आत्मिक एवं आध्यात्मिक खतरे। परमेश्वर का वचन बाइबल, इफिसियों 6:12 में हम मसीही विश्वासियों को स्मरण दिलाती है, "क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं"। ये वास्तव में शक्तिशाली शत्रु हैं, लेकिन परमेश्वर के प्रेम की सुरक्षा भी हमारे साथ है (रोमियों 8:35, 38-39)। लेकिन साथ ही हमारे परमेश्वर पिता ने हमें, और उन सभी को जो मसीह यीशु पर विश्वास लाते हैं एक आत्मिक सुरक्षा कवच तथा हथियार भी दिए हैं - इफिसियों 6:13-17, जिन्हें हमें सदा ही धारण किए रहना है क्योंकि शत्रु शैतान और उसकि सेनाओं का खतरा सदा ही हमारे लिए बना रहता है।

   इस सुरक्षा कवच और आत्मिक हथियार को सदा धारण किए रहने के परिणामस्वरूप, जब भी हम मसीही विश्वासियों पर किसी शत्रु का कोई हमला होता है तब, "...इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं" (रोमियों 8:37)। परमेश्वर पिता में और उसके द्वारा हमें सच्ची और कारगर सुरक्षा मिली है। यह सुरक्षा प्रत्येक आत्मिक परिस्थिति में उपयोगी है, प्रभावी है, जयवंत है।

   क्या आप के पास भी यह सच्ची सुरक्षा है? यदि नहीं तो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और विश्वास द्वारा आप इसे इसी क्षण पा सकते हैं; अवसर का लाभ उठाएं और परमेश्वर की आधीनता तथा सुरक्षा में आ जाएं। - बिल क्राउडर


सच्ची सुरक्षा खतरे की अनुपस्थिति में नहीं परमेश्वर की उपस्थिति में है।

क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। - रोमियों 8:38-39

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:10-18
Ephesians 6:10 निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। 
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। 
Ephesians 6:12 क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं। 
Ephesians 6:13 इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको। 
Ephesians 6:14 सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मिकता की झिलम पहिन कर। 
Ephesians 6:15 और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर। 
Ephesians 6:16 और उन सब के साथ विश्वास की ढाल ले कर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। 
Ephesians 6:17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो। 
Ephesians 6:18 और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50 
  • इब्रानियों 8


रविवार, 10 नवंबर 2013

बढ़ना - घटना


   जब शेरी की मंगनी हुई तो उसकी अविवाहिता सहेली एमी ने शेरी के साथ आनन्द मनाया। जब शेरी के विवाह का समय आया तो एमी उसके साथ रही, उसके लिए विवाह वस्त्र तैयार करवाए, शेरी को विवाह के लिए सजा-संवार कर तैयार किया और विवाह संबंधित सभी बातों और अनुष्ठानों में आनन्द के साथ शेरी का साथ दिया। एमी के व्यवहार में शेरी के जीवन साथी पाने और अपने अकेले रह जाने को लेकर कभी कोई बदलाव नहीं आया। जब शेरी के बच्चे हुए तब भी एमी ने अपनी सहेली के साथ खुशियाँ मनाईं और उन बच्चों की देखभाल में सहायता करी।

   बाद में शेरी ने एमी से कहा, "तुम ने मुझे कठिन समयों में संभाला है, लेकिन जिस बात से मैं अपने प्रति तुम्हारे प्रेम को विशेष रीति से जानने पाई वह थी तुम्हारा मेरी हर खुशी में मेरे साथ आनन्दित होना। मुझे मिल रही खुशियों को लेकर किसी प्रकार के किसी भी द्वेष या ईर्ष्या को तुमने हमारे बीच में आने नहीं दिया, बस मेरे साथ मेरी खुशियों में आनन्दित बनी रहीं।"

   जब यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले के चेलों ने आकर उसे कहा कि यीशु भी चेले बना रहा है और लोगों में उसकी ख्याति बढ़ रही है, तो उन्हें लगा कि यूहन्ना को इससे ईर्ष्या होगी (यूहन्ना 3:26)। उन्होंने उससे से कहा, "वह बपतिस्मा देता है और सब उसके पास आ रहे हैं।" लेकिन यूहन्ना प्रभु यीशु की सेवकाई और लोकप्रीयता से आनन्दित हुआ और कहा, "तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूं। जिस की दुलहिन है, वही दूल्हा है: परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है" (यूहन्ना 3:28-29)।

   मसीही विश्वासी होने के नाते नम्रता का यही आचरण हमारे भी चरित्र का अभिन्न अँग होना चाहिए। जो कुछ भी हम करें वह लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए नहीं वरन अपने तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह की ओर लोगों का ध्यान करने के लिए होना चाहिए। जैसा यूहन्ना ने कहा, हमारे जीवनों में भी "अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं" (यूहन्ना 3:30)। - एनी सेटास


यदि अपने जीवनों में हम मसीह को बढ़ते हुए देखना चाहते हैं तो हमें घटना होगा।

अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं। - यूहन्ना 3:30

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:22-36
John 3:22 इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा। 
John 3:23 और यूहन्ना भी शालेम् के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे। 
John 3:24 क्योंकि यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था। 
John 3:25 वहां यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ। 
John 3:26 और उन्होंने यूहन्ना के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं। 
John 3:27 यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।
John 3:28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूं। 
John 3:29 जिस की दुलहिन है, वही दूल्हा है: परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है। 
John 3:30 अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं।
John 3:31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है; और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है। 
John 3:32 जो कुछ उसने देखा, और सुना है, उसी की गवाही देता है; और कोई उस की गवाही ग्रहण नहीं करता।
John 3:33 जिसने उस की गवाही ग्रहण कर ली उसने इस बात पर छाप दे दी कि परमेश्वर सच्चा है। 
John 3:34 क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है: क्योंकि वह आत्मा नाप नापकर नहीं देता। 
John 3:35 पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब वस्तुएं उसके हाथ में दे दी हैं। 
John 3:36 जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49 
  • इब्रानियों 7


शनिवार, 9 नवंबर 2013

प्रतीक्षा


   मेरे प्रदेश मिशिगन में शरद ऋतु शिकार करने का समय होता है। कुछ सप्ताहों के लिए शिकारी शिकार करने का लाईसेन्स लेकर कुछ प्रकार के वन्य-जीवों का शिकार कर सकते हैं। कुछ शिकारी शिकार के लिए पेड़ों पर मचान बना कर धरती से काफी ऊँचाई पर जाकर बैठ जाते हैं और शांति-पूर्वक किसी शिकार योग्य जानवर के निकट आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। जिन्हें अपने मचान के स्थान पर और अपने शिकार कौशल पर विश्वास होता है वे लंबी प्रतीक्षा कर लेते हैं, जो अभी नए शिकारी हैं, उन्हें लंबी प्रतीक्षा करना कुछ भारी लगता है, वे अधीर रहते हैं।

   जब मैं उन शिकारियों के धैर्य के विषय में सोचती हूँ जो घंटों ऐसे ही बैठे जानवरों के आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं, तो मेरा ध्यान इस बात की ओर जाता है कि परमेश्वर को समय देने के लिए हम कितने अधीर हो उठते हैं! हम अकसर प्रतीक्षा को बर्बादी के साथ जोड़ कर देखते हैं। यदि हमें किसी बात की अथवा किसी जन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है तो हमें लगता है कि हम कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं, और हमारे तुरंत परिणाम एवं उपलब्धि पाने की लालसा रखने वाले समाज में यह प्रतीक्षा समय की बर्बादी मानी जाती है।

   लेकिन प्रतीक्षा कुछ उद्देश्य भी पूरे करती है, जिनमें से एक है हमारे विश्वास को प्रमाणित करना। जिनका विश्वास कमज़ोर होता है वे अधिक प्रतीक्षा नहीं करने पाते, लेकिन जिनका विश्वास दृढ़ होता है वे लंबे समय तक प्रतीक्षा कर लेते हैं - यह बात केवल आत्मिक संदर्भ में ही नहीं, वरन परस्पर मानवीय संबंधों पर भी उतनी ही लागू होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम लूका के 2 अध्याय में, प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित घटनाओं में हम दो जनों शमौन और हन्नाह का उल्लेख पाते हैं, जिन्हें बहुत समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। उन दोनों को परमेश्वर की ओर से आश्वासन था कि जब तक वे परमेश्वर द्वारा भेजे गए समस्त जगत के उद्धारकर्ता को अपनी आँखों से देख नहीं लेंगे, वे संसार से विदा नहीं होंगे; और प्रभु यीशु के आगमन कि प्रतीक्षा में उन दोनों ने परमेश्वर के मन्दिर में प्रार्थना और धार्मिकता के जीवन के साथ एक लंबी उम्र बिताई। उनकी यह प्रतीक्षा और इस प्रतीक्षा के साथ उनका प्रार्थना तथा धार्मिकता का जीवन अनेक लोगों के लिए गवाही बना, और आज भी मसीही विश्वासियों के लिए शिक्षा का स्त्रोत है।

   प्रार्थना का तुरंत उत्तर ना मिलना विश्वास को छोड़ देने का कारण नहीं होना चाहिए। विश्वास की परिपक्वता प्रतीक्षा को दिए गए समय से भी आँकी जा सकती है। - जूली ऐकैर्मैन लिंक


परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा कभी समय की बर्बादी नहीं होती।

तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं। - यशायाह 30:18

बाइबल पाठ: लूका 2:22-38
Luke 2:22 और जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार उन के शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो वे उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएं। 
Luke 2:23 (जैसा कि प्रभु की व्यवस्था में लिखा है कि हर एक पहिलौठा प्रभु के लिये पवित्र ठहरेगा)। 
Luke 2:24 और प्रभु की व्यवस्था के वचन के अनुसार पंडुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्‍चे ला कर बलिदान करें। 
Luke 2:25 और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। 
Luke 2:26 और पवित्र आत्मा से उसको चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा। 
Luke 2:27 और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें। 
Luke 2:28 तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद कर के कहा, 
Luke 2:29 हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। 
Luke 2:30 क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है। 
Luke 2:31 जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। 
Luke 2:32 कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो। 
Luke 2:33 और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। 
Luke 2:34 तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं -- 
Luke 2:35 वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे। 
Luke 2:36 और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 
Luke 2:37 वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर कर के रात-दिन उपासना किया करती थी। 
Luke 2:38 और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47 
  • इब्रानियों 6


शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

पड़ौस


   आपके रहने का स्थान आप को कुछ बातों का ध्यान रखने और मानने के लिए सावधान करता है; यदि आप ऐसा नहीं करते तो आप स्वयं और आपके द्वारा आपके पड़ौसी भी कठिनाईयों में पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए मेरे रहने के स्थान को ही लीजिए। हमारे इलाके में कूड़ा उठाने वाला मंगलवार की प्रातः ही आता है, इसलिए यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं सोमवार की देर रात को ही कूड़ा उठा कर बाहर सड़क की पटरी के किनारे पर रख दूँ। यदि मैं अपने घर का कूड़ा प्रतिदिन ही बाहर रखता रहूँ तो निश्चय ही मेरे पड़ौसी मुझे से अप्रसन्न रहेंगे, एतराज़ करेंगे। फिर, मेरे घर के आस-पास बहुत से छोटे बच्चे हैं जो बाहर खेलते रहते हैं, कभी-कभी वे अपनी गेंद या अन्य किसी खेल अथवा खिलौने के पीछे अचानक ही बाहर सड़क पर भाग कर आ जाते हैं, बिना यह देखे कि कोई गाड़ी तो नहीं आ रही है। इसलिए हम लोगों ने सड़क पर बहुत से संकेत लगा रखे हैं जिससे गाड़ी चलाने वालों को ध्यान रहे कि वे गाड़ी बहुत धीरे से चलाएं और बच्चों का ध्यान रखें। मुझे भी अपनी गाड़ी वहाँ धीरे से और ध्यान से चलानी होती है। निश्चय ही मेरा रहने का स्थान मेरे व्यवहार को निर्धारित करता है।

   हम मसीही विश्वासियों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि परमेश्वर ने "...हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया" (कुलुस्सियों 1:13)। अब प्रभु यीशु के राज्य और उस के पड़ौस में रहने के कारण हमारे व्यवहार में कुछ ऐसे मूलभूत परिवर्तन दिखाई देने चाहिएं जो हमारे आत्मिक ठिकाने के अनुरूप हों। इसीलिए रोम के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस उन्हें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर का राज्य सांसारिक बातों को लेकर तर्क और झगड़ों का स्थान नहीं है वरन धार्मिकता, शांति और आनन्द का स्थान है (रोमियों 14:17); अर्थात हमारे जीवन परमेश्वर के आत्मिक मानकों के अनुसार, तथा दूसरों को शांति एवं आनन्द देने वाले होने चाहिएं। जब हम ऐसे जीवन व्यतीत करते हैं तो यह ना केवल अन्य लोगों को वरन परमेश्वर को भी भाता है, प्रसन्न करता है (पद 18)।

  मसीही विश्वासी होने के नाते, यदि आप एक ऐसा पड़ौस बना लेंगे, तो भला कौन वहाँ नहीं रहना चाहेगा? - जो स्टोवैल


यदि आप परमेश्वर के राज्य के निवासी हैं, तो यह आप की जीवन-शैली में प्रकट होना चाहिए।

और धर्म का फल शांति और उसका परिणाम सदा का चैन और निश्चिन्त रहना होगा। - यशायाह 32:17

बाइबल पाठ: रोमियों 14:13-19
Romans 14:13 सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के साम्हने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। 
Romans 14:14 मैं जानता हूं, और प्रभु यीशु से मुझे निश्चय हुआ है, कि कोई वस्तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्तु जो उसको अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है। 
Romans 14:15 यदि तेरा भाई तेरे भोजन के कारण उदास होता है, तो फिर तू प्रेम की रीति से नहीं चलता: जिस के लिये मसीह मरा उसको तू अपने भोजन के द्वारा नाश न कर। 
Romans 14:16 अब तुम्हारी भलाई की निन्दा न होने पाए। 
Romans 14:17 क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना पीना नहीं; परन्तु धर्म और मिलाप और वह आनन्द है; 
Romans 14:18 जो पवित्र आत्मा से होता है और जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्वर को भाता है और मनुष्यों में ग्रहण योग्य ठहरता है। 
Romans 14:19 इसलिये हम उन बातों का प्रयत्न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45 
  • इब्रानियों 5