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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

अनुसरण


   ग्रीष्म ऋतु की एक खूबसूरत शाम को, एक सुन्दर स्थान पर, कॉलेज समय के मेरे एक मित्र द्वारा प्रस्तुत होने वाले एक संगीत कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए बहुत से लोग आए। वह दिन मेरे उस मित्र का जन्म दिन भी था, इसलिए कार्यक्रम के संचालक ने उपस्थित लोगों यह संकेत दिया कि वे साधारणतया जन्म दिन पर गाए जाने वाले ’हैप्पी बर्थडे’ गीत को गाकर मेरे उस मित्र को मुबारकबाद दें। एक एक करके लोगों ने जन्म दिन का वह गीत गाना आरंभ कर दिया। सब अपने अपने सुर, लय और ताल में गा रहे थे, आपस में किसी का किसी दूसरे से कोई ताल-मेल नहीं था, और परिणाम था कि जो मुबारकबाद का संगीत होना चाहिए था वह शोर बन गया। मेरा मित्र मंच पर आया और उसने सब को वह गीत गाने का एक और अवसर दिया, परन्तु उसके द्वारा दिए गए लय, ताल और सुर में। अब जो गीत गाया गया वह सिद्ध तो नहीं था, परन्तु पहले से कहीं अच्छा था और संगीत जैसा प्रतीत हो रहा था।

   इस घटना ने मुझे पहली शताब्दी की मसीही मण्डली की एक समस्या की याद दिलाई। कुरिन्थुस की मण्डली के लोग किसी एक अगुवे को लेकर एकमत नहीं थे; कोई पौलुस का अनुसरण कर रहा था तो कोई अपुल्लौस का तो कोई किसी और का। इसका परिणाम था मण्डली में फूट और कलह और उनकी आत्मिक उन्नति बाधित हो गई थी। सब अपना अपना सुर और राग गा रहे थे जिससे संगीत नहीं शोर सुनाई दे रहा था। जब लोग किसी एक अगुवे पर एकमत नहीं होते तो परिणाम यही होता है, इसीलिए पौलुस ने उन्हें चिताया कि वे किसी मनुष्य की ओर नहीं वरन प्रभु यीशु की ओर देखें और उसका अनुसरण करें।

   यदि हमें संसार के लोगों को प्रभु यीशु की ओर आकर्षित करना है तो हमारे जीवनों से संसार को प्रभु यीशु में उद्धार और पापों की क्षमा का संगीत सुनाई देना चाहिए ना कि प्रभु के नाम में किया गया शोर। इसके लिए अनिवार्य है कि हम में से प्रत्येक प्रभु यीशु की ओर अपना ध्यान लगाए और उसी का अनुसरण करे, किसी मनुष्य या मत अथवा दल का नहीं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु के साथ स्वर्बद्ध रहने से सारी मण्डली में ताल मेल रहता है।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत हो कर मिले रहो। - 1 कुरिन्थियों 1:10

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:1-17
1 Corinthians 3:1 हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। 
1 Corinthians 3:2 मैं ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्योंकि तुम उसको न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो। 
1 Corinthians 3:3 क्योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्या तुम शारीरिक नहीं? और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते? 
1 Corinthians 3:4 इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्या तुम मनुष्य नहीं? 
1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है। 
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:11 क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 
1 Corinthians 3:12 और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 
1 Corinthians 3:13 तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा; क्योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है। 
1 Corinthians 3:14 जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:15 और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्तु जलते जलते।
1 Corinthians 3:16 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 
1 Corinthians 3:17 यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3


मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

वचन और शांति


   लगभग 85 वर्ष पहले हंगरी देश के एक लेखक ने एक लघु-कथा लिखी थी जिसका शीर्षक था ’चेन-लिंक्स’, जिसमें उसने यह विचार दिया था कि संसार में कोई भी दो व्यक्तियों के बीच संबंध की कड़ी में अधिक से अधिक पाँच व्यक्तियों तक की दूरी की कड़ी होती है। यह विचार अब पुनः जागृत किया गया है और इसे अब Six Degrees of Separation अर्थात ’अलगाव के छः स्तर’ कहा जाता है। इस विचार का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन यह हमारा ध्यान इस बात कि ओर खींचती है कि संसार में कुछ ऐसा कार्य कर रहा है जो हमें एक दूसरे के साथ संबंधित करता है, और वह है परमेश्वर की समझ-बूझ और प्रावधान जो उसके वचन में होकर कार्य कर रहे हैं।

   कुछ वर्ष पहले मुझे एक पत्र मिला, जो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया था जिसे मैं ना तो जानता था और ना कभी उससे मिला था, और ना ही उससे मेरा कोई संबंध था। उसने मुझे बताया कि मेरे द्वारा मेरे एक मित्र को भेजा गया एक पत्र (जिसे मैंने अपने उस मित्र को उसकी घोर निराशा और परेशानी में प्रोत्साहित करने के लिए लिखा था) उस व्यक्ति तक पहुँच गया था और उस व्यक्ति को उसकी घोर निराशा और परेशानी में उस पत्र से बहुत प्रोत्साहन मिला था। जो पत्र मैंने अपने मित्र को भेजा था, वह उस ने अपने किसी अन्य मित्र को भी दिया, जिसने उसे फिर आगे किसी अन्य मित्र को दे दिया और इस प्रकार एक कड़ी से दूसरी कड़ी जुड़ती चली गई और चलते चलते वह पत्र उस व्यक्ति तक पहुँच गया जिसने मुझे पत्र लिखा था। एक व्यक्ति को दिया गया प्रोत्साहन आगे चलकर ना जाने कितने लोगों के लिए प्रोत्साहन का कारण बन गया।

   यह संभव है कि परमेश्वर की समझ-बूझ में होकर लिखा गया प्रेम का एक छोटा सा सन्देश, परमेश्वर के आत्मा के द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में अनन्तकालीन प्रभाव ले आए। इसलिए क्या हमें अपने आप को परमेश्वर के वचन से भर नहीं लेना चाहिए और फिर उस वचन को आगे किसी अन्य तक इस प्रार्थना के साथ पहुँचा नहीं देना चाहिए कि परमेश्वर उस वचन को अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग करे (यशायाह 55:11), जिससे वह शांति जो हमने परमेश्वर के वचन से प्राप्त करी है दूसरों को भी प्राप्त हो सके? - डेविड रोपर


जैसे फूल नहीं जानता कि उसकी सुगंध कहाँ क्या प्रभाव ला रही है वैसे ही हम नहीं जानते कि हमारा मसीही प्रेम से भरा व्यवहार कहाँ क्या प्रभाव लाएगा।

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। - इब्रानियों 4:12

बाइबल पाठ: यशायाह 55:8-11
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। 
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है, 
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 24-27


सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

परमेश्वर का कार्य


   चार्ल्स फिन्नी एक 29 वर्षीय वकील था जब वह अपने उद्धार पाने के विषय में चिंतित हुआ। 10 अक्तूबर, 1821 को वह प्रार्थना करने के लिए अपने घर के निकट के जंगल के एक इलाके में गया। वहाँ पर उसे उद्धार का अद्भुत अनुभव हुआ, जिसके बारे में उसने लिखा, "मुझे प्रतीत हुआ मानो पवित्र आत्मा मेरे शरीर और प्राण के अन्दर समा गया, वह प्रेम की तरल लहरों के समान मुझ पर आ रहा था।" अपने इस अनुभव के अगले दिन उसकी भेंट उसके एक मुव्वकिल से हुई जो उसके पास वकालत के लिए आया था। चार्ल्स फिन्नी ने उस से कहा, "अब मुझे प्रभु यीशु ने अपने लिए वकालत करने के लिए नियुक्त कर लिया है, इसलिए अब मैं तुम्हारे लिए वकालत नहीं कर सकता।" फिन्नी ने अपनी वकालत को छोड़ दिया और मसीही सेवकाई में आ गया, और आगे चलकर परमेश्वर ने उसे बड़े सामर्थी रूप में बहुतेरों को प्रभु यीशु में मिलने वाले उद्धार तथा पापों की क्षमा तक लाने के लिए उपयोग किया।

   इसी प्रकार प्रेरित पौलुस को भी प्रभु यीशु की वकालत के लिए नियुक्त किया गया था; पौलुस ने लिखा, "...मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं...।" (फिलिप्पियों 1:16); यहाँ जिस शब्द का अनुवाद ’उत्तर देने के लिए’ किया गया है वह उन दिनों की मूल भाषा में एक वकील द्वारा अपने मुव्वकिल के बचाव के लिए अदालत में जिरह करने के लिए प्रयोग होता था। प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार का यह कार्य केवल पौलुस या फिन्नी ही के लिए नहीं था, वरन यह प्रत्येक मसीही विश्वासी की ज़िम्मेदारी है, जैसा पौलुस एक अन्य स्थान पर लिखा, "सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो" (2 कुरिन्थियों 5:20)।

   कितना बड़ा सौभाग्य है कि परमेश्वर हमें अपने कार्य सौंपता है, दूसरों को पापों की क्षमा और उद्धार के लिए प्रभु यीशु के निकट लाने के लिए उपयोग करता है। क्या आप परमेश्वर के इस कार्य में लगे हैं? - डेनिस फिशर


प्रभु यीशु में उद्धार और पापों की क्षमा का सुसमाचार इतना अच्छा है कि उसे अपने तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

और यदि मैं सुसमाचार सुनाऊं, तो मेरा कुछ घमण्‍ड नहीं; क्योंकि यह तो मेरे लिये अवश्य है; और यदि मैं सुसमाचार न सुनाऊं, तो मुझ पर हाय। - 1 कुरिन्थियों 9:16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-18
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 20-23


रविवार, 2 फ़रवरी 2014

विश्वास में सफलता


   जब इस्त्राएली मिस्त्र के दासत्व से निकलकर कनान देश की ओर जा रहे थे तब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के मध्य में आते समय में अपनी उपस्थिति के एहसास और अपने स्मरण को बनाए रखने के लिए एक वाचा का सन्दूक बनवाया था जो स्वर्ग में परमेश्वर के सिंहासन का प्रतिरूप था। अपनी उस यात्रा में इस्त्राएली उस वाचा के सन्दूक को लिए चलते थे। कनान में बसने के बाद वह वाचा का सन्दूक शीलोह में परमेश्वर की आराधना के तम्बू में रख दिया गया। कई वर्षों के बाद, एक युद्ध में फिलिस्तीनियों से हार जाने के बाद इस्त्राएली सेना के अगुवों ने शीलोह सन्देश भेजा कि परमेश्वर का वह वाचा का सन्दूक युद्ध भूमि पर लाया जाए जिससे परमेश्वर की उपस्थिति के कारण उनको अपने शत्रुओं पर विजय मिल सके।

   जब वह सन्दूक युद्ध स्थल पर इस्त्राएली छावनी में पहुँचा तो हर्ष के कारण इस्त्राएली सेना ने बड़ी ज़ोर से ललकार का शब्द किया जिसे सुन कर उनके शत्रु फिलिस्ती घबराहट में आ गए। उस सन्दूक के कारण अब इस्त्राएली तो साहस और फिलिस्ती डर से भर गए। फिर युद्ध ठना, इस्त्राएली सेना वाचा का सन्दूक लेकर युद्ध भूमि पर पहुँची, लेकिन युद्ध के समय दोनो, इस्त्राएलियों और फिलिस्तियों, की धारणाएं गलत निकलीं - इस बार इस्त्राएली और भी भयानक रीति से पराजित हुए, उनके और भी अधिक सैनिक मारे गए और अब वाचा का सन्दूक फिलिस्तियों के कबज़े में चला गया जिसे लेजाकर उन्होंने अपने देवता के मन्दिर में रख दिया और फलस्वरूप पाया कि उनके देवता की मूर्ति टूट कर नीचे गिर पड़ी और उनके इलाके में महामारी फैल गई।

   हम फिलिस्तियों की गलती तो समझ सकते हैं - वे मूर्ति पूजक थे, सच्चे और जीवते परमेश्वर के विषय में नहीं जानते थे; परन्तु इस्त्राएलियों को तो बेहतर समझ-बूझ रखनी चाहिए थी। उन इस्त्राएलियों ने भी परमेश्वर से मार्गदर्शन लिए बिना, अपनी ही धारणा के अनुसार वाचा के सन्दूक का उपयोग करा। अवश्य ही पहले इस्त्राएल के कनान देश में प्रवेश के समय वाचा के सन्दूक को युद्ध भूमि में लेजाया गया था (यहोशु 6), परन्तु वे यह भूल गए कि ऐसा परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार और उसकी योजना के अन्तर्गत किया गया था। उन्हें पहले मिली विजय उनके मध्य सन्दूक की उपस्थिति के कारण नहीं वरन परमेश्वर की आज्ञाकारिता के कारण थी।

   यह घटना आज हमें भी एक महत्वपूर्ण शिक्षा देती है - हमारे पास चाहे कोई भी संसाधन उपलब्ध क्यों ना हों, यदि उनका उपयोग परमेश्वर की योजना के अन्तर्गत और उसकी आज्ञा के अनुसार नहीं होगा तो परिणाम बुरा ही होगा। इसलिए हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन करने तथा प्रार्थना करने में समय बिताना चाहिए जिससे हम परमेश्वर की इच्छा और आज्ञा जान सकें और फिर परमेश्वर की इच्छा और आज्ञाकारिता में ही अपने कार्यों को करें, क्योंकि परमेश्वर की अगुवाई पर रखे गए विश्वास में ही सफलता है। - डेव ब्रैनन


हम तो अधूरा ही जानते हैं, परमेश्वर सब कुछ और संपूर्ण जानता है।

मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा। - भजन 91:2

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 4:1-11
1 Samuel 4:1 और शमूएल का वचन सारे इस्राएल के पास पहुंचा। और इस्राएली पलिश्तियों से युद्ध करने को निकले; और उन्होंने तो एबेनेजेर के आस-पास छावनी डाली, और पलिश्तियों ने अपेक में छावनी डाली। 
1 Samuel 4:2 तब पलिश्तियों ने इस्राएल के विरुद्ध पांति बान्धी, और जब घमासान युद्ध होने लगा तब इस्राएली पलिश्तियों से हार गए, और उन्होंने कोई चार हजार इस्राएली सेना के पुरूषों को मैदान ही में मार डाला। 
1 Samuel 4:3 और जब वे लोग छावनी में लौट आए, तब इस्राएल के वृद्ध लोग कहने लगे, कि यहोवा ने आज हमें पलिश्तियों से क्यों हरवा दिया है? आओ, हम यहोवा की वाचा का सन्दूक शीलो से मांग ले आएं, कि वह हमारे बीच में आकर हमें शत्रुओं के हाथ से बचाए।
1 Samuel 4:4 तब उन लोगों ने शीलो में भेज कर वहां से करूबों के ऊपर विराजने वाले सेनाओं के यहोवा की वाचा का सन्दूक मंगा लिया; और परमेश्वर की वाचा के सन्दूक के साथ एली के दोनों पुत्र, होप्नी और पिनहास भी वहां थे। 
1 Samuel 4:5 जब यहोवा की वाचा का सन्दूक छावनी में पहुंचा, तब सारे इस्राएली इतने बल से ललकार उठे, कि भूमि गूंज उठी। 
1 Samuel 4:6 इस ललकार का शब्द सुनकर पलिश्तियों ने पूछा, इब्रियों की छावनी में ऐसी बड़ी ललकार का क्या कारण है? तब उन्होंने जान लिया, कि यहोवा का सन्दूक छावनी में आया है। 
1 Samuel 4:7 तब पलिश्ती डरकर कहने लगे, उस छावनी में परमेश्वर आ गया है। फिर उन्होंने कहा, हाय! हम पर ऐसी बात पहिले नहीं हुई थी। 
1 Samuel 4:8 हाय! ऐसे महाप्रतापी देवताओं के हाथ से हम को कौन बचाएगा? ये तो वे ही देवता हैं जिन्होंने मिस्रियों पर जंगल में सब प्रकार की विपत्तियां डाली थीं। 
1 Samuel 4:9 हे पलिश्तियों, तुम हियाव बान्धो, और पुरूषार्थ जगाओ, कहीं ऐसा न हो कि जैसे इब्री तुम्हारे आधीन हो गए वैसे तुम भी उनके आधीन हो जाओ; पुरूषार्थ कर के संग्राम करो। 
1 Samuel 4:10 तब पलिश्ती लड़ाई के मैदान में टूट पड़े, और इस्राएली हार कर अपने अपने डेरे को भागने लगे; और ऐसा अत्यन्त संहार हुआ, कि तीस हजार इस्राएली पैदल खेत आए। 
1 Samuel 4:11 और परमेश्वर का सन्दूक छीन लिया गया; और एली के दोनों पुत्र, होप्नी और पीनहास, भी मारे गए।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 17-19


शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

तृप्ति के सोते


   प्रायः देखा जाता है कि लोगों में परोपकार, भलाई और उदारता की अभिव्यक्ति जो दिसंबर महीने में दिखाई देती है वह कुछ ही समय में धूमिल पड़ने लगती है और लोग कहने लगते हैं कि, "काश हम क्रिसमस का उत्साह साल भरे बनाए रख सकते।" ऐसा क्यों होता है कि भलाई, परोपकार, उदारता, दया आदि भावनाएं केवल त्यौहारों के साथ ही जुड़ी दिखाई देती हैं मानों इन्हें किसी दिन विशेष के साथ जोड़ कर रखा गया हो? क्या इन त्यौहारों और पर्वों के साथ जुड़ी इस छिछली दया भावना के अतिरिक्त कोई ऐसा गहरा बहने वाला दया का सोता है जो अविराल साल-ब-साल बहता रहता हो, लोगों को तृप्त करता रहता हो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार के पहले दो अध्यायों में परमेश्वर के पवित्र आत्मा का सात बार वर्णन आया है। पवित्र आत्मा को पाँच लोगों के जीवन में कार्य करते दिखाया गया है - यूहन्ना बप्तिसमा देने वाला (1:15), मरियम (1:35), इलीशिबा (1:41), ज़कर्याह (1:67) और शमौन (2:25-27)। इस खण्ड में, जिसे हम आम तौर से "क्रिसमस की कहानी" के नाम से जानते हैं, हम ऐसा नहीं पाते कि इन लोगों को अचानक ही कुछ ध्यान आया हो या उन्होंने अपने अन्दर कुछ विचित्र होता हुआ अनुभव किया हो। इसके स्थान पर हम पाते हैं कि वे बहुत साधारण और सामान्य लोग थे जो अपनी दिनचर्या का निर्वाह कर रहे थे और उनके ऐसा करते हुए ही पवित्र आत्मा ने शमौन का मार्गदर्शन किया, ज़कर्याह और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हुए और पवित्र आत्मा की सामर्थ से मरियम की कोख में प्रभु यीशु का आगमन हुआ। इन सब ने पवित्र आत्मा के कार्य को अपने अन्दर अनुभव किया, उसकी सामर्थ को पहचाना।

   क्या आज हमारे अन्दर यह अनुभूति है कि उपरोक्त लोगों के समान ही हम भी अपने जीवन में पवित्र आत्मा के कार्य को पहचानें और संसार की अन्य सब आवाज़ों से अलग उसकी आवाज़ पर ध्यान लगाएं? क्या हम पवित्र आत्मा द्वारा उकसाए और प्रोत्साहित किए जाने के प्रति सचेत और उसकी आज्ञा मानने को तत्पर तथा तैयार रहते हैं? क्या हमने पवित्र आत्मा को यह आदर दिया है कि वह अपनी गर्माहट से हमारे हृदय भर दे और फिर उसे हमारे हाथों से दूसरों के जीवनों में प्रवाहित हो लेने दे?

   आज हम मसीही विश्वासियों के साथ पवित्र आत्मा की उपस्थिति और उसके द्वारा प्रभु यीशु की सामर्थ हमारे जीवनों में बनी रहती है, जिसे वह हमारे अन्दर से साल-ब-साल बहते रहने वाले तृप्ति के सोते के रूप में संसार में प्रवाहित करना चाहता है, किसी दिन अथवा त्यौहार विशेष पर ही नहीं, कुछ खास लोगों ही के लिए नहीं, वरन सदा-सर्वदा संसार के प्रत्येक जन के लिए, "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


प्रभु यीशु में विश्वास हमारी आत्मा को पाप के दाग़ से शुद्ध और हमारी देह को पवित्र आत्मा का मन्दिर बना देता है।

...यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे...। - यूहन्ना 7:37-39 

बाइबल पाठ: लूका 1:31-41
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरिहत नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया। 
Luke 1:39 उन दिनों में मरियम उठ कर शीघ्र ही पहाड़ी देश में यहूदा के एक नगर को गई। 
Luke 1:40 और जकरयाह के घर में जा कर इलीशिबा को नमस्‍कार किया। 
Luke 1:41 ज्योंही इलीशिबा ने मरियम का नमस्‍कार सुना, त्योंही बच्‍चा उसके पेट में उछला, और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14-16


शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

बहुतायत का जीवन


   चीनी नव वर्ष का उत्सव मनाते समय पारस्परिक संपर्क में कुछ विशेष शब्दों का लिखित एवं मौखिक प्रयोग करना पारंपरिक है। ऐसा ही एक शब्द जो बहुत प्रयोग होता है वह है ’बहुतायत’ और इसे दूसरों को आते संपूर्ण वर्ष भर भौतिक समृद्धि मिलते रहने की कामना करने के भाव के साथ प्रयोग किया जाता है।

   जब मूसा इस्त्राएलियों को मिस्त्र की गुलामी से निकालकर वाचा किए हुए कनान देश को लेकर चला तो उस देश में उनके प्रवेश करने से पहले मूसा ने इस्त्राएलियों को स्मरण दिलाया कि परमेश्वर उन्हें एक धनी और समृद्ध देश में लिए जा रहा है (व्यवस्थाविवरण 8:7-9)। मूसा ने उन्हें बताया कि उस देश में उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बहुतायत से उपलब्ध होगा, जो भी उन्हें चाहिए वह वहाँ होगा। लेकिन साथ ही मूसा ने इस्त्राएलियों को चेतावनी भी दी कि इस समृद्धी में आने और सभी आवश्यकताओं के पूरे हो जाने के बाद वे परमेश्वर को भूल ना जाएं, क्योंकि परमेश्वर ही है जो उन्हें मिस्त्र से निकाल कर लाया, मार्ग में उनकी रक्षा करी, इस बहुतायत के देश तक पहुँचाया और यहाँ बस जाने की सामर्थ दी। मूसा ने कहा: "परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है"(व्यवस्थाविवरण 8:18)।

   समृद्धि केवल भौतिक वस्तुओं ही की नहीं होती - जो कुछ भी हमारे पास है वह सब परमेश्वर का ही दिया हुआ तो है। प्रभु यीशु मसीह ने चेलों से कहा, "...मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं" (यूहन्ना 10:10)। जैसे उन इस्त्राएलियों के लिए, आज हमारे लिए भी यही चेतावनी है कि हम यह कभी ना भूलें कि हमारे पास जो कुछ भी है वह परमेश्वर के अनुग्रह और उसकी आशीष से ही है। जब तक हम और हमारे जीवन परमेश्वर प्रभु यीशु के साथ जुड़े रहेंगे, वे संतुष्टि के और परमेश्वर की आशीषों की बहुतायत से भरे हुए जीवन होंगे। - सी० पी० हिया


परमेश्वर के उपहारों की बहुतायत में कभी उस अनुग्रह से देने वाले को भूल ना जाएं।

क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। - यूहन्ना 1:16 

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 8:7-18
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है। 
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है। 
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा। 
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा। 
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; 
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे, 
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए, 
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है, 
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला, 
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे। 
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई। 
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 11-13


गुरुवार, 30 जनवरी 2014

सान्तवना और शाँति


   हैरॉलड, कैथी और उनके दोनो बेटे एक जंगल के इलाके में थे, जब एक चक्रवाधी तूफान वहाँ से होकर निकला। कैथी ने इस घटना के कई वर्षों के बाद मुझसे बात करते हुए उस समय का अपना अनुभव बयान किया: "मेरे पति और बड़ा बेटा मुझसे कुछ दूर थे, मैंने और मेरे छोटे बेटे ने एक लकड़ी से बनी कोठरी में शरण ली। हमें बहुत तेज़ शोर सुनाई दिया मानों सैंकड़ों रेलगाड़ियाँ एक साथ वहाँ से निकल रही हों, और मैं तथा मेरा बेटा ज़मीन पर अपने सिर अपने हाथों में दबाए सिमटकर लेट गए। हमारी आँखों के सामने वह कोठरी टूट कर बिखरने लगी और मलबा हमारे चारों ओर उड़ने लगा। मैंने उड़ते हुए मलबे की चोट से बचने के लिए अपनी आँखें बन्द कर लीं। तभी मुझे लगा मानों मैं हवा में तेज़ी से उठ गई हूँ और फिर मैं पास की झील के पानी में जा गिरी, जहाँ अपने आप को डूबने से बचाए रखने के लिए मैं उड़ के आए हुए मलबे को थामे तैरती रही। लेकिन मेरा छोटा बेटा उस तूफान से बच नहीं पाया। अगले छः हफतों तक हम प्रतिदिन रोते रहे। लेकिन हमें परमेश्वर की सार्वभौमिकता पर पूरा विश्वास है और हम मानते हैं कि परमेश्वर ने अपनी किसी योजना के अन्तर्गत ही उस तूफान को हमारे ऊपर आने दिया। हमें यह स्मरण कर के भी शाँति है कि हमारा बेटा प्रभु यीशु को मानता था।"

   जब कोई प्रीय जन हम से बिछड़ जाता है तो हमारे मनों में अनेक प्रशन उठने लगते हैं। ऐसे समयों में हम मसीही विश्वासियों के लिए रोमियों 8:28 प्रोत्साहन और आश्वासन प्रदान करने का एक अच्छा माध्यम होता है। हम मसीही विश्वासी इस बात में आश्वस्त और शाँति से रह सकते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में जो भी आने देगा वह अन्ततः हमारे भले ही के लिए होगा; परमेश्वर कभी हमारा बुरा कर ही नहीं सकता, और ना ही हमारे साथ बुरा होने दे सकता है। वह हमारा प्रेमी पिता है जिसने जब हम पापों में उससे दूर थे तब भी हमारे उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र को भी रख नहीं छोड़ा, तो फिर अब जब हम उसके परिवार का अंग हैं तो वह हमें कैसे हानि में जा लेने देगा?

   इस दम्पति के परमेश्वर की सार्वभौमिकता और प्रभु यीशु में विश्वास ने ही उनके इस बड़े दुख की घड़ी में उन्हें सान्तवना और शाँति दी। यही शाँति और सान्तवना प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए प्रत्येक परिस्थिति में सदा उपलब्ध रहती है। क्या आपने प्रभु यीशु को अपनी सान्तवना और शाँति का स्त्रोत बनाया है? यदि नहीं तो अभी बना लीजिए। - डेनिस फिशर


दुख में शाँति का हमारा सबसे महान कारण है हमारा विश्वास कि हर परिस्थिति परमेश्वर के नियंत्रण में है, हमारे भले ही के लिए है।

हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है। वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों। - 2 कुरिन्थियों 1:3-4

बाइबल पाठ:  रोमियों 8:26-30
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर हैं, हमारे लिये बिनती करता है। 
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है। 
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। 
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे। 
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10