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रविवार, 18 मई 2014

सर्वोत्तम


   यह वह नहीं है जो मैंने अपने जीवन के बारे में सोचा था। मैंने सोचा था कि मैं 19 वर्ष की आयु में ही शादी कर लूँगी, मेरे आधा-दर्जन बच्चे होंगे और मैं एक पत्नी एवं माँ के रूप में अपना जीवन व्यतीत करूँगी। लेकिन मैं काम करने लगी, चालीस वर्ष से ऊपर की आयु में मेरी शादी हुई, और मैं माँ नहीं बनी। बहुत वर्षों तक मैं यही आशा रखती थी कि परमेश्वर मेरे लिए भजन 37:4 - "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा" के अनुसार करेगा; लेकिन यह भी नहीं हुआ।

   कभी कभी इन अधूरी इच्छाओं की यादें मन को थोड़ा उदास कर देती हैं। जैसे मेरे साथ हुआ, हो सकता है कि आपके साथ भी हुआ हो और जीवन आपकी आशा के अनुसार नहीं वरन उससे भिन्न मार्ग पर चला हो। इस संदर्भ में भजन 37 में लिखी गई कुछ बातें विचार के लिए आपके सामने रखती हूँ (यद्यपि यह भजन मुख्यतः दुष्टों के साथ धर्मी जन के जीवन की तुलना है)।

   इस भजन का चौथा पद हमें सिखाता है कि अपूर्ण इच्छाएं हमारे जीवन के आनन्द को हम से नहीं छीन सकतीं; जैसे जैसे हम परमेश्वर के मन को जानते चले जाते हैं, परमेश्वर स्वयं ही हमारा आनन्द होता चला जाता है।

   पद पाँच हमें सिखाता है कि हम अपने मार्ग की चिंता पूर्णतः परमेश्वर पर छोड़ दें, ऐसे जैसे एक कमज़ोर व्यक्ति अपने उस बोझ को जिसे वह स्वयं नहीं उठा सकता उसे अपने उस बलवन्त मित्र एवं साथी को सौंप देता है जो उसकी सहायता करने के लिए सदा उसके साथ रहता है। साथ ही यह पद हमें अपने उस साथी एवं मित्र, अर्थात परमेश्वर पर सदा भरोसा बनाए रखने को भी कहता है। क्योंकि जब हम यह भरोसा बनाए रखते हैं, तब हम निश्चिंत तथा शांत होकर रह सकते हैं, जैसा कि पद सात कहता है।

   मूल बात है, परमेश्वर पर भरोसा रखें, उस पर ही निर्भर रहें, क्योंकि वह जो करेगा, अपने बच्चों के लिए सर्वोत्तम ही करेगा। - ऐनी सेटास


मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है। - नीतिवचन 16:9

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 37:1-8
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! 
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे। 
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। 
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा। 
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-17


शनिवार, 17 मई 2014

घर


   एक दम्पति ने अपनी एक वृद्ध रिशेतदार को उनकी देख-रेख के लिए अपने साथ रखने का निर्णय लिया। उस दम्पति को चिंता थी कि वे वृद्धा जब एक नए घर और माहौल में आएंगी तो उन्हें अटपटा लगेगा। इसलिए उन्होंने उनके रहने के कमरे को बिलकुल वैसा ही बनाने का निर्णय लिया जैसा उनका अपना कमरा उस घर में था जिसे छोड़कर वे उनके साथ रहने आ रहीं थीं। जब वे वृद्धा उनके साथ रहने आईं तो उन्होंने पाया कि उनके रहने का स्थान, उसकी साज-सज्जा, वहाँ की मेज़-कुर्सी आदि बिलकुल वैसा ही था जैसा वे छोड़कर आईं थीं; यह उनके लिए अपने ही घर में मिले स्वागत के समान था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 13:36-14:4 में प्रभु यीशु की अपने चेलों के साथ हो रही वार्ता में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु उन्हें अपने मारे जाने, पुनरुत्थान और फिर स्वर्गारोहण के लिए तैयार कर रहा है। जब पतरस ने प्रभु यीशु से पूछा कि वह कहाँ जा रहा है तो प्रभु ने उत्तर दिया, जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ अभी तो तू नहीं आ सकता, परन्तु बाद में वहाँ आएगा (यूहन्ना 13:36)। फिर वार्तालाप में और थोड़ा आगे प्रभु यीशु ने पतरस तथा अन्य सभी चेलों को आश्वस्त करते हुए कहा, "मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:2-3)।

   स्वर्ग वह स्थान है जहाँ समस्त संसार के हर जाति, राष्ट्र, भाषा, समूह इत्यादि से मसीही विश्वासी एक साथ एक परिवार के समान एकत्रित होंगे और साथ रहेंगे, क्योंकि वह हम सब मसीही विश्वासियों के स्वर्गीय पिता का घर भी है; और उस घर में प्रभु यीशु हम सब के लिए स्थान तैयार कर रहा है।

   जब आप अपने घर पहुँचेंगे और प्रभु यीशु वहाँ आपका स्वागत करेगा, तो आप तुरंत पहचान लेंगे कि आप अपने घर ही में आए हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी का घर स्वर्ग है।

हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। - 1 पतरस 2:11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:36-14:4
John 13:36 शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तू कहां जाता है यीशु ने उत्तर दिया, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा। 
John 13:37 पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूंगा। 
John 13:38 यीशु ने उत्तर दिया, क्या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि मुर्ग बांग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा। 
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13


शुक्रवार, 16 मई 2014

वार्तालाप


   क्या वर्तमान की तकनीकी प्रगति ने आज हमें परस्पर संवाद और एक दूसरे से आमने-सामने बात करने में अक्षम और कमज़ोर कर दिया है? आज अधिकारी ईमेल के द्वारा अपने कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्तगी की सूचना सरलता से भेज सकते हैं; लोग एक दूसरे की आलोचना ट्विटर पर या फेसबुक पर बिना सामने आए कर सकते हैं। लोगों के लिए एक दूसरे के सामने आकर अपना दृष्टिकोण समझाए या बताए बिना ही अपनी बात दूसरे पर लाद देना या सामाजिक रूप से उनपर ऊँगुली उठा देना बहुत सरल हो गया है। इसलिए यह बेहतर होगा कि हम परमेश्वर के वचन बाइबल के उदाहरणों से सीखें कि यदि किसी बात को लेकर परस्पर मतभेद भी हों तो उनका निवारण कैसे करना चाहिए।

   प्रेरित पौलुस और पतरस में एक परिस्थिति को लेकर मतभेद हुआ, और पौलुस ने पतरस के द्वारा परमेश्वर के अनुग्रह को गौण करने को लेकर उसका सामना किया (गलतियों 2:11-16)। बात यह थी कि पतरस अपनी सेवकाई के दौरान गैर-यहूदियों, अर्थात अन्यजातिय मसीही विश्वासियों के साथ संगति कर रहा था, लेकिन जब कुछ ऐसे यहूदी आए जो मसीह यीशु पर विश्वास रखने का दावा तो करते थे परन्तु साथ ही उस गलत धारणा को भी मानते थे कि उद्धार पाने के लिए मसीह यीशु पर विश्वास के साथ मूसा द्वारा दी गई व्यवस्था का पालन भी आवश्यक है, तो पतरस उन अन्यजाति मसीही विश्वासियों से पृथक होकर उन गलत धारणा रखने वाले यहूदी लोगों के साथ हो गया। पौलुस ने जब पतरस के इस दोगलेपन को देखा, तो मसीही प्रेम और सहानुभूति के साथ उसने पतरस का उसके इस व्यवहार के लिए सामना किया; पतरस को समझाया कि वह क्यों उस विधि सम्मत पद्धति का पालन करना चाह रहा है जो जीवन परिवर्तन करने में अक्षम रही है। साथ ही पौलुस ने पतरस को यह भी स्मरण दिलाया कि पाप की गुलामी से मुक्ति दिलाकर परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहने की सामर्थ केवल परमेश्वर के अनुग्रह ही से मिलती है ना कि किसी विधि-विधान अथवा कर्म-काज के पालन से।

   परमेश्वर के वचन पर आधारित तथ्यों के साथ, परमेश्वर की आत्मा की प्रेर्णा और सहायता से जब हम अपने संगी मसीही विश्वासियों के साथ सादर और सप्रेम वार्तालाप करेंगे तो यह अवश्य ही मतभेदों के निवारण और आपसी प्रेम तथा मसीही पवित्रता के प्रोत्साहन एवं उन्नति का कारण ठहरेगी। एक दूसरे के साथ प्रेम पूर्ण व्यवहार के द्वारा हम सत्य को सप्रेम वार्तालाप द्वारा प्रकट करने और पवित्र आत्मा की आधीनता में अपने आप को संचालित करने की अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह निःसंकोच कर सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


सही रीति से कहे गए थोड़े से शब्द बहुत विवादों का समाधन कर सकते हैं।

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलतियों 6:1

बाइबल पाठ: गलतियों 2:11-21
Galatians 2:11 पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका साम्हना किया, क्योंकि वह दोषी ठहरा था। 
Galatians 2:12 इसलिये कि याकूब की ओर से कितने लोगों के आने से पहिले वह अन्यजातियों के साथ खाया करता था, परन्तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उन से हट गया और किनारा करने लगा। 
Galatians 2:13 और उसके साथ शेष यहूदियों ने भी कपट किया, यहां तक कि बरनबास भी उन के कपट में पड़ गया। 
Galatians 2:14 पर जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैं ने सब के साम्हने कैफा से कहा; कि जब तू यहूदी हो कर अन्यजातियों की नाईं चलता है, और यहूदियों की नाईं नहीं तो तू अन्यजातियों को यहूदियों की नाईं चलने को क्यों कहता है? 
Galatians 2:15 हम जो जन्म के यहूदी हैं, और पापी अन्यजातियों में से नहीं। 
Galatians 2:16 तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा। 
Galatians 2:17 हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं। 
Galatians 2:18 क्योंकि जो कुछ मैं ने गिरा दिया, यदि उसी को फिर बनाता हूं, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूं। 
Galatians 2:19 मैं तो व्यवस्था के द्वारा व्यवस्था के लिये मर गया, कि परमेश्वर के लिये जीऊं। 
Galatians 2:20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया। 
Galatians 2:21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता, क्योंकि यदि व्यवस्था के द्वारा धामिर्कता होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 8-10


गुरुवार, 15 मई 2014

दूर और निकट


   दो स्वस्थ आँखें होना ही स्पष्टता से देख पाने के लिए काफी नहीं है - यह मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभव से जाना है। मेरी आंख का पर्दा खराब हो गया था जिसके लिए मुझे कई ऑपरेशनों से होकर निकलना पड़ा। उन ऑपरेशनों के द्वारा मेरी दोनों आँखों को ठीक से दिखाई तो देने लगा, लेकिन वे दोनों परस्पर ताल-मेल के साथ कार्य नहीं कर रहीं थीं। एक आँख से दूर की चीज़ें स्पष्ट दिखती थीं तो दूसरी से पास की, और एक साथ मिलकर कार्य करने की बजाए, दोनों ही एक दूसरे पर हावी होने के प्रयास में रहती थीं, जिससे मैं किसी भी चीज़ पर दृष्टि केंद्रित कर के उसे स्पष्ट देख नहीं पाती थी। अन्ततः 3 महीने के अंतराल के बाद मुझे एक नया चश्मा दिया गया जिसकी सहायता से मैं दृष्टि केंद्रित कर के स्पष्ट देखने पाई।

   कुछ ऐसा ही परमेश्वर के प्रति हमारे दृष्टिकोण के साथ भी होता है। कुछ लोग परमेश्वर को निकटता से जान पाने पर ही - अर्थात उसे अपने प्रतिदिन के जीवन में निकटता से स्क्रीय अनुभाव कर के ही उस पर अपना ध्यान केंद्रित करने पाते हैं। अन्य लोगों को दूर का परमेश्वर ही स्पष्ट दिखाई देता है - अर्थात वे उसे किसी भी सोच-विचार से ऊपर और महान, सारी सृष्टि पर सामर्थी, प्रभावी और महिमामय जान कर ही उस पर केंद्रित रहने पाते हैं।

   जब इन दोनों दृष्टिकोणों में विवाद हो और सहमति नहीं बने, तब परमेश्वर का वचन बाइबल ही मेरे उस चश्मे के समान कार्य करती है, दोनों दृष्टिकोणों में तालमेल बनाती है और यह दिखाती है कि दोनों ही दृष्टिकोण सही हैं। राजा दाऊद ने अपने लिखे भजन - भजन 145 में दोनों ही दृष्टिकोणों को रखा है। वह कहता है: "यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है" (पद 3); और फिर यह भी कि, "जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है" (पद 18)।

   हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमारे इतना निकट है कि हमारी हर दशा को जानता है और हमारी हर प्रार्थना को सुनता है; लेकिन साथ ही इतना महान, महिमामय और सामर्थी है कि हमारी हर समस्या एवं आवश्यकता से कहीं बड़ा और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखने वाला है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर इतना बड़ा है कि हमारी छोटी से छोटी आवश्यकता को समझ सकता है, उसे पूरा कर सकता है।

देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? - व्यवस्थाविवरण 4:7

बाइबल पाठ: भजन 145
Psalms 145:1 हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा। 
Psalms 145:2 प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा। 
Psalms 145:3 यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है। 
Psalms 145:4 तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा। 
Psalms 145:5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा। 
Psalms 145:6 लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा। 
Psalms 145:7 लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण कर के उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे। 
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। 
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे! 
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे; 
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें। 
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी। 
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है। 
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है। 
Psalms 145:17 यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है। 
Psalms 145:18 जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 
Psalms 145:19 वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है। 
Psalms 145:20 यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है। 
Psalms 145:21 मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 5-7


बुधवार, 14 मई 2014

जीवन का जल


   एक व्यक्ति ने, जो पश्चिमी टेक्सस के एक खेती-किसानी करने वाले परिवार में बड़ा हुआ था, मुझे अपने खलिहान के निकट लगी एक जर्जर पवन-चक्की के बारे में बताया था। उस पवन-चक्की के चलने से ही पानी को उसके घर तक लाने का पंप चलता था, और वही मीलों दूर तक पानी का एकमात्र स्त्रोत थी। जब हवा तेज़ चल रही होती थी तो वह पवन-चक्की भलि-भांति चलती थी और अच्छे से पानी उपलब्ध कराती थी, परन्तु जब हवा धीमी होती थी तो जर्जर अवस्था के कारण पवन-चक्की घूम कर हवा के रुख के अनुकूल अपने आप नहीं हो पाती थी इसलिए नहीं चल पाती थी; तब उसे हाथ से घुमा कर ऐसी स्थिति में लाना पड़ता जहाँ से हवा द्वारा उसके पंखे चल सकें और पानी के पंप को चला सकें जिससे घर को पानी मिल सके। पानी मिलने के लिए पवन-चक्की का हवा के अनुकूल दिशा में होना अनिवार्य था।

   जब मैं दूर-दराज़ के इलाकों में कार्य कर रहे पस्टरों से मिलता हूँ, और उनकी सनस्याएं सुनता हूँ तो मुझे उस पवन-चक्की की याद आती है। बहुत से पास्टर ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि वे बिलकुल अकेले और बेसहारा रह गए हैं - ऐसे देख-रेख करने वाले जिनकी अपनी देख-रेख करने वाला कोई नहीं है। परिणाम यह होता है कि अपनी निराश के कारण वे अपने चर्च के लोगों को जीवन का जल अर्थात परमेश्वर का वचन ठीक से नहीं देने पाते। उन्हें मैं उस पवन-चक्की के बारे में बताता हूँ, और समझाता हूँ कि उन्हें भी अपने आप को ऐसी स्थिति में लाना है, अर्थात प्रभु यीशु और उसके वचन की ओर उन्मुख होना है जिससे उनमें से होकर परमेश्वर का वचन लोगों तक पहुँच सके। जब वे परमेश्वर की ओर सही रीति से होंगे, तब परमेश्वर उन में होकर अपने जीवनदायक वचन को लोगों तक भी पहुँचा सकेगा।

   जो बात उन पास्टरों के लिए सही है, वही हम सब मसीही विश्वासियों के लिए भी उतनी ही सही है, क्योंकि प्रभु की सेवकाई हमारे अन्दर से निकल कर संसार के लोगों में प्रवाहित होती है। प्रभु यीशु ने कहा, "जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (यूहन्ना 7:38)। जब परमेश्वर हमारे अन्दर की गहराइयों से होकर बोलता है, तब ही हम दूसरों के जीवनों को छूने और प्रभावित करने पाते हैं। दूसरों को तरोताज़ा करते रहने के लिए हमें स्वयं भी उस जीवन के जल के स्त्रोत के साथ सही रीति से जुड़े रहना है। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों में थकने लगें तो प्रभु यीशु को अपनी सामर्थ का स्त्रोत बना लीजिए।

यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। - यूहन्ना 4:10

बाइबल पाठ: गलतियों 6:6-10
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 1-4


मंगलवार, 13 मई 2014

चिंता


   आँकड़े पेचीदा होते हैं, वे हमें जानकारी तो देते हैं, लेकिन कभी कभी वे हमें उन लोगों के प्रति संवेदनविहीन भी बना देते हैं जिनकी जानकारी वे हमें दे रहे हैं। मुझे इस बात का एहसास अभी हाल ही में हुआ जब मैंने एक जानकारी देने वाला आँकड़ा पढ़ा: संसार भर में प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ लोग भूख से मर जाते हैं। यह कंपकंपा देने वाली बात है, और उनके लिए जो बहुतायत के समाज में रहते हैं इसे समझना कठिन है। संसार भर में लाखों बच्चे अपने पाँचवे जन्म दिन से पहले ही मर जाते हैं, और इन मौतों में से एक तिहाई भूख के कारण होती हैं। ये संख्याएं स्तब्ध कर देने वाली हैं, लेकिन ये आंकड़ों से बढ़कर भी कुछ हैं - ये मनुष्य हैं, वे मनुष्य जिन्हें परमेश्वर ने बनाया, जिनके उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र को बलिदान किया और जिनसे परमेश्वर उतना ही प्रेम करता है जितना वह मुझ से और आप से करता है।

   परमेश्वर पिता के इस प्रेम को हम उन लोगों तक पहुँचा सकते हैं, उन लोगों की सहायता करने तथा उनकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक होने के द्वारा। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "जो कंगाल पर अंधेर करता, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है, परन्तु जो दरिद्र पर अनुग्रह करता, वह उसकी महिमा करता है" (नीतिवचन 14:31)। स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा इन ज़रूरतमंद लोगों की सहायता के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में स्वयंसेवक बनकर, उन लोगों के लिए नौकरी की तलाश करने में उनकी सहायता कर के, उन्हें कोई रोज़गार कमाने की कला सिखा कर, स्कूल जाने वाले गरीब बच्चों के लिए भोजन का प्रबन्ध कर के, भूख से पीड़ित लोगों के लिए भोजन सामग्री दान कर के, जहाँ स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है उनके लिए स्वच्छ जल के कुएँ खोदने के लिए आर्थिक सहायाता देकर, इत्यादि ऐसे अनेक तरीके हैं जिनके द्वारा हम उन के सहायक हो सकते हैं और वह प्रेम जो परमेश्वर ने हम से किया है, उसकी अनुभूति उन्हें भी करवा सकते हैं।

   इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने का बीड़ा उठा कर हम परमेश्वर के उनके प्रति प्रेम का आदर करते हैं, उनके लिए उसकी चिंता और देख-रेख में संभागी होते हैं। यह सहायता करना का एक और कारण से भी हम मसीही विश्वासियों के लिए आवश्यक है - जब भूख से कुलबुला रहे पेट और अंतड़ियों का शोर उन लोगों पर हावी नहीं होगा तो शायद प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा और सेंत-मेंत उद्धार का सुसमाचार वे लोग बेहतर सुन और समझ भी सकेंगे। - बिल क्राउडर


हम अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम को जितना अधिक समझने पाएंगे, उतना ही उसे दूसरों को पहुँचाने का प्रयास भी करेंगे।

जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा। - नीतिवचन 19:17

बाइबल पाठ: मत्ती 25:31-46
Matthew 25:31 जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। 
Matthew 25:32 और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। 
Matthew 25:33 और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाई और खड़ी करेगा। 
Matthew 25:34 तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। 
Matthew 25:35 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया। 
Matthew 25:36 मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए। 
Matthew 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया? 
Matthew 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए? 
Matthew 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? 
Matthew 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। 
Matthew 25:41 तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। 
Matthew 25:42 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया। 
Matthew 25:43 मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहिनाए; बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि न ली। 
Matthew 25:44 तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की? 
Matthew 25:45 तब वह उन्हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया। 
Matthew 25:46 और यह अनन्त दण्‍ड भोगेंगे परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 8-10


सोमवार, 12 मई 2014

पुकारें


   कातुशिका होकुसई जापान के इतिहास के सबसे यशस्वी और बहुतायत से चित्र बनाने वाले कलाकारों में गिने जाते हैं। सन 1826 से सन 1833 तक, जब उनकी आयु मध्य 60 तथा आरंभिक 70 के मध्य थी, उन्होंने अपने सबसे विख्यात कृति बनाई - लकड़ी के सांचों से रंगीन चित्रों की श्रंखला जिसका शीर्षक था, फूजी पर्वत के 36 दृश्य। इन चित्रों में से एक जो बहुत विख्यात हुआ वह था "The Great Wave off Kanagaawa" (कानागावा तट के निकट विशाल लहर)। उन्होंने यह चित्र उस समय बनाया जब वे आर्थिक और भावनात्मक संघर्ष के दौर से हो कर निकल रहे थे। इस चित्र में एक बहुत ऊँची दीवार के समान समुद्र की लहर दिखाई गई है, लहर के सिरे पर पंजों के समान दिखने वाला फेन है जो कि लहर के नीचे यात्रियों से भरी तीन छोटी नावों पर गिरने को तैयार है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 में भी समुद्र के जोखिम में फंसे लोगों का वर्णन दिया है। वे लहरों पर तैरते हुए एक पल में आकाश की ऊँचाईयों पर तो दुसरे ही पल में समुद्र की गहराईयों में उतर आते हैं, जिससे उनके जी में जी नहीं रहता। तब वे सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारते हैं, परमेश्वर उनकी पुकार सुनकर लहरों को शान्त करता है और उन्हें उनके गन्तव्य तक सुरक्षित पहुँचा देता है।

   जब हम जीवन कि कठिनाईयों का सामना कर रहे होते हैं तो सहायता, मार्गदर्शन और सांत्वना के लिए हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रीया अन्य मनुष्यों की ओर देखने की होती है। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि वे मनुष्य भी तो हमारे समान ही जीवन की परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं, उन्हें भी हमारे समान ही कठिनाईयों और जोखिमों का सामना करना होता है। केवल परमेश्वर ही है जो जीवन रूपी नाव और परिस्थितियों रूपी समुद्र से बाहर है, उनके ऊपर है, तथा उन पर नियंत्रण रखने की सामर्थ रखता है। वह ही है जो परिस्थितियों के समुद्र को शांत कर के हमें गन्तव्य तक भली भांति पहुँचा सकता है। क्या आप भी जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं? परमेश्वर प्रभु यीशु को विश्वास के साथ पुकारें, अपने जीवन की बाग-डोर उसके हाथ में सौंप दें और निश्चिंत हो जाएं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हम उस परमेश्वर की आराधना करते हैं जो हमारी हर समस्या से बड़ा है तथा हमारे जीवन की हर बात को नियंत्रित कर सकता है।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 4-7