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सोमवार, 16 जून 2014

अद्भुत रचना


   जब मैं बालक था तो मेरे एक निकट संबंधी ने मुझे और बेहतर करने को प्रोत्साहित करने के विचार से बार बार मुझे "तुम इतने बेवकूफ क्यों हो?" कहना आरंभ कर दिया। उनकी इस बात का मुझपर कैसा प्रभाव हुआ यह मैंने अपनी युवावस्था में जा कर समझा - तब जब किसी ने मेरी पीठ पीछे किसी अन्य को कहा "बेवकूफ" और मैंने तुरंत इस आश्य से कि कोई मुझे बुला रहा है पीछे मुड़कर उसकी ओर देखा!

   प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु मान लेने के बाद मुझे यह एहसास हुआ कि परमेश्वर ने मुझे अपने स्वरूप में बनाया है (उत्पत्ति 1:27), और मैं बेवकूफ नहीं वरन परमेश्वर की अद्भुत रचना हूँ (भजन 39:14)। संसार की रचना के बाद परमेश्वर ने सब कुछ का अवलोकन किया और कहा, "बहुत अच्छा" (उत्पत्ति 1:31)।

   दाऊद अपने भजन में वर्णन करता है कि कैसे परमेश्वर हम सब को बहुत निकटता से, अन्दर-बाहर से जानता है: "हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है। तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है" (भजन 139:1-3)।

   ना केवल हम परमेश्वर की अद्भुत रचना हैं, वरन प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर दिए बलिदान के द्वारा हम परमेश्वर के साथ सही संबंध में बहाल भी किए जाते हैं, एक नई सृष्टि के समान: "सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है" (2 कुरिन्थियों 5:17-18)।

   परमेश्वर के स्वरूप में बनाई गई परमेश्वर ही की अद्भुत रचना होने के कारण हमारा कर्तव्य है कि हम सब मनुष्यों को आदर की दृष्टि से देखें, किसी को नीचा या हीन ना समझें और परमेश्वर की इच्छा एवं उद्देश्यों के अनुसार सभी को प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा मिलने वाले उद्धार तथा पापों की क्षमा का सुसमाचार सुनाएं, उन्हें परमेश्वर के साथ सही संबंध में बहाल होने के तरीके के बारे में बताएं। - एल्बर्ट ली


प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के स्नेह की अद्वितीय अभिव्यक्ति है।

फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। - उत्पत्ति 1:26-27

बाइबल पाठ: भजन 139:1-16
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है। 
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 67-69


रविवार, 15 जून 2014

स्वर्गीय पिता


   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को प्रार्थना करना सिखाया, तो प्रार्थना आरंभ करते हुए परमेश्वर को संबोधित करने के लिए जो शब्द प्रयोग करने को कहा वे हैं "हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है" (मत्ती 6:9)। परमेश्वर के वचन बाइबल में ऐसे ही अनेक अन्य पद हैं जहाँ परमेश्वर को पिता के रुप में संबोधित किया गया है। मुझे यह बड़ी रोचक और शिक्षाप्रद बात लगती है कि परमेश्वर ने अपने बारे में हम मनुष्यों को जानकारी देने के लिए अपने आप को एक पिता के रूप में हमारे समक्ष रखा।

   परमेश्वर के पिता होने बारे में, विशेषकर व्यक्तिगत रीति से अपना पिता होने के बारे में हम क्या जानते हैं? प्रभु द्वारा सिखाई गई इस प्रार्थना से हम सीख सकते हैं कि हमारा स्वर्गीय पिता हमारे लिए सदा उपलब्ध और हमारी ओर ध्यान लगाए रखने वाला है। यहाँ हम यह भी देखते हैं कि वह हमारा ध्यान रखता है और हमारी आवश्यकताओं के लिए उचित प्रयोजन करता है; वह हमें बड़े धैर्य के साथ हमें क्षमा करता है और बुराई से बचाता है।

   पितृत्व का यह नमूना हम सांसारिक पिताओं के लिए कैसा अद्भुत उदाहरण है। यह निश्चित है कि हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता के समान कोई अन्य सिद्ध पिता इस पृथ्वी पर ना है और ना हो सकता है, लेकिन हम असिद्ध मनुष्यों को अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए उसने अपना नमूना निर्धारित कर के दिया है। मैं अपने अनुभव से जानता हूँ कि अपनी सेवकाई और पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के आरंभिक समय में ही मुझे यह आभास हो गया था कि मेरे बच्चों को मेरे द्वारा लिखी गई पुस्तकों की संख्या से, मुझे मिलने वाली उपाधियों से या कितने स्थानों पर मुझे प्रचार के लिए निमंत्रण मिलता है आदि बातों से कोई लेना-देना नहीं है। उन के लिए महत्वपूर्ण था तो बस मेरा उनके प्रति ध्यान और उनके साथ बिताया गया समय, और वे इन्हीं के लालायित रहते थे। उनकी मुझ से यही आशा रहती थी कि मैं उनसे प्रेम दिखाऊँ, धैर्य के साथ उन्हें उनकी गलतियों के लिए क्षमा करूँ, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करूँ और उनके रहने और परवरिश के लिए एक अच्छा स्थान बनाए रखूँ। पितृत्व की ज़िम्मेदारियों की यह सूची चाहे लंबी ना भी हो, तौ भी गंभीर अवश्य है।

   उन लोगों का क्या जिन्हें यह सब करने वाले पिता नहीं मिले हों? हमारी व्यकतिगत परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी रही हों, फिर भी हम सभी इस तथ्य से प्रोत्साहित एवं आशावान रह सकते हैं कि प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें सबसे सिद्ध और सबसे उत्तम स्वर्गीय पिता - स्वयं परमेश्वर तक पहुँच प्राप्त है।

   क्या आपने सृष्टि के परमेश्वर को व्यक्तिगत रीति से अपने पिता के रूप में जान लिया है? यदि नहीं, तो वह अभी आपके निर्णय की प्रतीक्षा में है। - जो स्टोवैल


स्वर्गीय पिता परमेश्वर की बाहें अपने बच्चों तो थामे रखने और उनकी देखरेख करते रहने से कभी नहीं थकतीं।

और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने। - यूहन्ना 17:3

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-13
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके। 
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा। 
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों की नाईं बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी। 
Matthew 6:8 सो तुम उन की नाईं न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है। 
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। 
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो। 
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे। 
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर। 
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 64-66


शनिवार, 14 जून 2014

आराधना के योग्य


   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, यूहन्ना के प्रकाशितवाक्य, के 5 अध्याय में प्रभु यीशु मसीह के दो शब्द चित्र मिलते हैं - यहूदा का सिंह (पद 5) तथा वध किया हुआ मेमना (पद 6)। इन शब्द चित्रों का संदर्भ देकर प्रसिद्ध मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन ने प्रश्न किया, "ऐसा क्यों है कि हमारा महान प्रभु अपनी महिमा में घातक घावों के साथ दिखाया गया है?" अपने प्रश्न का स्पर्जन ने उत्तर दिया, "क्योंकि वे घाव ही उसकी महिमा हैं।"

   सामान्यतः मेमने का चिन्ह सामर्थ और विजय का प्रतीक नहीं हैं। अधिकांश लोग ऐसे चिन्ह पसन्द करते हैं जो सामर्थ दिखाते हैं और लोगों की प्रशंसा को आमंत्रित करते हैं। लेकिन परमेश्वर ने यही चुना कि वह एक शिशु बनकर संसार में अवतरित हो, एक गरीब बढ़ई के घर में जन्म ले और बड़ा हो। वह अपनी सेवकाई के दिनों में पैदल ही एक से दूसरे स्थान पर यात्रा करते हुए परमेश्वर के राज्य और धार्मिकता तथा पापों से पश्चताप का प्रचार करता रहा और एक रोमी क्रूस पर लटा कर उसे मार डाला गया। सबने, यहाँ तक कि उसके चेलों ने भी यही सोचा कि क्रूस पर उसकी मृत्यु का तात्पर्य था अपने समय की स्थापित धर्म व्यवस्था को चुनौती देने वाले का अन्त। लेकिन मेमने के समान दीन जीवन बिताने वाले प्रभु यीशु मसीह ने तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जी उठ कर, परमेश्वर की अतुल्य सामर्थ और महिमा को संसार के सामने प्रकट किया।

   वह दिन आने वाला है जब प्रभु यीशु अपनी महिमा में लौट कर आएगा और अपना राज्य स्थापित करेगा। उस दिन सारे संसार के सब लोग उसके सामने दण्डवत करेंगे और कहेंगे, "... कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है" (प्रकाशितवाक्य 5:12)! मेमने के समान दीन और नम्र प्रभु यीशु, सिंह के समान सामर्थी और जयवन्त तथा हमारी आराधना के योग्य है। - सी. पी. हिया


अपने राजा के आदर के लिए हम उसका यशगान करते हैं।

इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। फिलिप्पियों 2:9-11

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 5:1-12
Revelation 5:1 और जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्‍तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई भी, और वह सात मुहर लगा कर बन्‍द की गई थी। 
Revelation 5:2 फिर मैं ने एक बलवन्‍त स्वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्द से यह प्रचार करता था कि इस पुस्‍तक के खोलने और उस की मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है? 
Revelation 5:3 और न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्‍तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला। 
Revelation 5:4 और मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला। 
Revelation 5:5 तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है। 
Revelation 5:6 और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आंखे थीं; ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं। 
Revelation 5:7 उसने आ कर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्‍तक ले ली, 
Revelation 5:8 और जब उसने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं। 
Revelation 5:9 और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध हो कर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है। 
Revelation 5:10 और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं। 
Revelation 5:11 और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी। 
Revelation 5:12 और वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 61-63


शुक्रवार, 13 जून 2014

सर्वोत्तम शिक्षक


   बहुत से जवान लोगों ने, भविष्य की अपनी तैयारी के संबंध में मुझ से कहा है, "हमें संसार में जाकर अधर्मी परिस्थितियों और लोगों का अनुभव लेना आवश्यक है जिस से हम उनके लिए तैयार और उनका सामना करने के लिए सामर्थी बन सकें।" इस विचारधारा ने बहुत से अपरिपक्व मसीहियों को निगल लिया है और कुछ को तो परमेश्वर के विरुद्ध भी कर दिया है।

   यह सच है कि हम संसार में रहते हैं तथा हमें संसार में ही रहना भी है (यूहन्ना 17:15) और अपने स्कूल, व्यवसाय, पड़ौस आदि में गैर-मसीही लोगों और विचारधारा का सामना भी हमें करना पड़ता है, इसलिए यह अति आवश्यक है कि हम सावधान रहें कि संसार की बातों का सामना करते करते कहीं हमें उन के अनुरूप ना होने लग जाएं, उन से संबंध ना बनाने लग जाएं। हम सब मसीही विश्वासी परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 1:1 में दिए परमेश्वर के निर्देश के पालन से भली-भांति परिपक्व हो सकते हैं। इस भजन में दिए निर्देशों के अनुसार हमें:
  • प्रथम, ध्यान रखना है कि हमारे चुनाव तथा निर्णय "दुष्टों की युक्ति" के अनुसार ना हों।
  • दूसरे, हमें अपने आप को ऐसी परिस्थितियों से दूर रखना है जहाँ वे लोग जो मसीह यीशु को व्यक्तिगत रीति से नहीं जानते और उसे समर्पित जीवन व्यतीत नहीं करते, वे हमारे सोच-विचार को प्रभावित कर सकें।
  • तीसरे, हम उनके साथ निकट या घनिष्ट ना हों जो परमेश्वर के वचन बाइबल का, परमेश्वर का और हमारे जीवनों में उनकी भूमिका का ठट्ठा करते हैं या उसे महत्वहीन मानते हैं।
   ऐसे लोगों की सलाह हमें परमेश्वर से दूर ले जाती है। इसलिए अपने प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और परामर्श के लिए हमें परमेश्वर के पवित्र वचन बाइबल तथा बाइबल से प्रेम करने वालों एवं उसके आज्ञाकारी रहकर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के पास ही जाना चाहिए। संसार का ज्ञान या अनुभव नहीं वरन परमेश्वर और उसका जीवता एवं सच्चा वचन ही हर बात तथा परिस्थिति के लिए हमारा सर्वोत्तम शिक्षक है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने मस्तिष्क को भर लें, उसे अपने मन पर राज्य और अपने जीवन का मार्गदर्शन करने दें।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:2 

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है! 
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है। 
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है। 
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे; 
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 58-60


गुरुवार, 12 जून 2014

उपयोगी


   नर मोर बहुत खूबसूरत पक्षी होते हैं। उनकी रंगीन पंखों से बनी लंबी पूँछ, उस पूँछ में भिन्न प्रकार के पंख और उनके चमकते चटकीले रंग, उनके सिर की कलगी, उनकी गरदन और छाती के चमकते हुए रंग बस देखते ही बनते हैं, खासकर जब वे अपनी पूँछ खड़ी करके नृत्य करते हैं तो देखने वालों को मानों मंत्र-मुग्ध कर देते हैं। लेकिन उनके पाँव बड़े कुरूप होते हैं!

   ईमानदारी से कहें तो यह हम सब की दशा भी है - हम सब में कोई ना कोई कमज़ोरी या किसी ना किसी बात की घटी अवश्य होती है - वह हम में जन्म से विद्यमान हो सकती है या किसी कारणवश हम में आने वाली हो सकती है; वह लंबे समय से हमारे साथ हो सकती है, या फिर हाल ही में किसी घटना के कारण हम में आ सकती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी एक कमी को "शरीर में चुभाया गया काँटा" कहा जो उसे नम्र रखने के लिए था (2 कुरिन्थियों 12:7-9)। पौलुस ने तीन बार परमेश्वर से उसे हटाने के लिए प्रार्थना करी, संभवतः इस विचार से कि उसके हटने के बाद वह और भली रीति से परमेश्वर की सेवा करने पाएगा, लेकिन परमेश्वर ने उसे आश्वस्त किया कि "मेरा अनुग्रह ही तेरे लिए काफी है" और "मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है"। परमेश्वर के इस आश्वासन पर पौलुस का प्रत्युत्तर था, "इसलिए मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूँगा कि मसीह की सामर्थ्य मुझ पर छाया करती रहे"।

   मसीही विश्वास की एक विशेषता है कि परमेश्वर अपने महत्वपूर्ण कार्यों को हमारे द्वारा संपन्न कराने के लिए हमें हमारी निर्बलताओं के बावजूद चुन लेता है, ना कि इसलिए कि हम में कोई वाकपटुता है, या हम कार्य करने की विशेष योग्यता रखते हैं या हमारा रूप-रंग अच्छा है। प्रसिद्ध मिशनरी सेवक हडसन टेलर ने कहा था, "परमेश्वर को अपने कार्य करवाने के लिए किसी योग्यता-विहीन तथा निर्बल जन की आवश्यकता थी, इसलिए उसने मुझे और आपको चुन लिया"।

   जब हम परमेश्वर को ही अपनी सामर्थ और योग्यता का आधार बना लेते हैं, तो वो हमें ऐसे उपयोग करने पाता है जो हमारी कलपना से परे है। - डेविड रोपर


परमेश्वर की सामर्थ हमारी निर्बलता में प्रकट होती है।

हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - 1 कुरिन्थियों 1:26-27

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:7-10
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 55-57


बुधवार, 11 जून 2014

मित्र


   स्कूल में जाने वाले अनेक ऐसे छात्र-छात्राएं होते हैं जो किसी शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता से ग्रस्त होते हैं, और अन्य "स्वस्थ" छात्र-छात्राओं को उनके साथ संबंध बनाने और उन्हें समझने में कठिनाई होती है, इसलिए वे उनके साथ व्यवहार नहीं करते और कुछ तो उनकी परवाह भी नहीं करते। इसलिए ये विकलांग लोग अपने आप को अकेला और उपेक्षित अनुभव करते हैं, भीड़ भरे भोजन स्थलों पर भी अकेले ही बैठ कर खाते-पीते हैं। उनकी इस आवश्यकता को देखते और समझते हुए बारबर्रा पेलिलिस नामक एक महिला ने "मित्रों का समूह" नामक एक कार्यक्रम आरंभ किया है, जिसमें विकलांग छात्रों का स्वस्थ छात्रों के साथ जोड़ा बनाया जाता है और वे भोजन के लिए या सामाजिक कार्यों के लिए एकसाथ जाते हैं। इस प्रकार से मित्र बना कर दोनों ही प्रकार के लोगों को एक दूसरे को समझने और अपनी धारणाएं बदलने का अवसर मिलता है जो दोनों के लिए ही लाभप्रद रहता है।

   मेल-मिलाप के साथ रहना प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार का एक अभिन्न अंग है; परमेश्वर ने भी प्रभु यीशु में होकर हम से हमारे पाप की दशा में मेल-मिलाप किया: "परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)" (इफिसीयों 2:4-5)। मसीह यीशु में विश्वास लाने से "पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो" (इफिसीयों 2:13)।

   अब मसीह यीशु में होकर हम परमेश्वर के घराने के गौरवान्वित सदस्य बन गए हैं (पद 19), इसलिए अब हम मसीही विश्वासियों को अपने आस-पास के उपेक्षित और अकेले लोगों को देखने की आँखें और उनकी सहायता करने के मन होने चाहिएं। यदि हम में से प्रत्येक एक उपेक्षित और अकेले जन की सहायता के लिए हाथ बढ़ाएगा, उनका मित्र बनेगा, तो समाज पर इसका कितना व्यापक प्रभाव पड़ेगा, मसीह यीशु की कितनी भली और महिमामय गवाही संसार के सामने जाएगी। - डेविड मैक्कैसलैंड


मित्रता का हाथ बढ़ाकर अकेलों को प्रोत्साहित और कमज़ोरों को सबल करने वाले बन जाएं।

और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। - 2 कुरिन्थियों 5:18

बाइबल पाठ: इफिसीयों 2:1-13
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)। 
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे। 
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 52-54


मंगलवार, 10 जून 2014

अनुत्तरित


   मेरे सबसे बड़े संघर्षों में से एक है अनुत्तरित प्रार्थना; संभवतः आप समझ सकते हैं कि मैं क्या कह रही हूँ। हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे मित्र को नशे की आदत से छुड़ा ले, या किसी प्रीय जन को उद्धार दे, या किसी बीमार बच्चे को स्वस्थ कर दे, या फिर कोई बिगड़े हुए संबंध को सुधार दे। हम यह मानते हैं कि ये सब तथा इनके जैसी अन्य कई बातें परमेश्वर को पसन्द होंगी, उसकी इच्छा के अनुसार होंगी। वर्षों तक हम इन विषयों के लिए प्रार्थना करते रहते हैं, लेकिन ना तो परमेश्वर से कोई उत्तर आता है और ना ही प्रार्थना के अनुरूप कोई प्रभाव दिखाई देता है।

   हम परमेश्वर को स्मर्ण दिलाते हैं कि वह सर्वसामर्थी परमेश्वर है, कुछ भी कर सकता है और हमारी प्रार्थना एक भली प्रार्थना है; हम उससे विननती करते हैं, गिड़गिड़ाते हैं। हमारे अन्दर सन्देह भी आते हैं - शायद वह हमारी सुनने को तैयार नहीं है, या शायद वह इतना सामर्थी नहीं है जितना हम उसे समझ रहे थे। हम प्रार्थना में वह बात माँगना छोड़ देते हैं - कई दिन या महीनों तक। हम फिर अपने सन्देह के कारण दोषी भी अनुभव करते हैं। हम स्मरण करते हैं कि परमेश्वर चाहता है कि हम अपनी आवश्यकताएं उसके पास लेकर जाएं, और हम फिर से अपनी प्रार्थनाओं में उन बातों को माँगने लग जाते हैं।

   कभी कभी हमें लगता है कि हम प्रभु यीशु द्वारा लूका 18 में दिए गए दृष्टान्त की विधवा के समान हैं, जो न्यायी के आगे गुहार लगाती रही, उससे अपना न्याय माँगती रही, जब तक कि उसने उस विधवा की सुन नहीं ली। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि हमारा परमेश्वर उस कठोर न्यायी के समान नहीं है, वह दयालु है, सामर्थी है। हमें अपने परमेश्वर पर विश्वास है क्योंकि वह भला है, बुद्धिमान है, और सर्वप्रभुतासंपन्न है। हम समरण करते हैं कि हमारे प्रभु यीशु ने हमें सिखाया है कि हमें, "...नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए..." (लूका 18:1)।

   इसलिए हम परमेश्वर से माँगते हैं, प्रार्थना करते हैं और उसके उत्तर की प्रतीक्षा करते हैं। - ऐनी सेटास


विलंब इनकार नहीं है; इसलिए प्रार्थना करते रहिए।

इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचने, और मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो। - लूका 21:36

बाइबल पाठ: लूका 18:1-8
Luke 18:1 फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा। 
Luke 18:2 कि किसी नगर में एक न्यायी रहता था; जो न परमेश्वर से डरता था और न किसी मनुष्य की परवाह करता था। 
Luke 18:3 और उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी: जो उसके पास आ आकर कहा करती थी, कि मेरा न्याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा। 
Luke 18:4 उसने कितने समय तक तो न माना परन्तु अन्‍त में मन में विचारकर कहा, यद्यपि मैं न परमेश्वर से डरता, और न मनुष्यों की कुछ परवाह करता हूं। 
Luke 18:5 तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्याय चुकाऊंगा कहीं ऐसा न हो कि घड़ी घड़ी आकर अन्‍त को मेरा नाक में दम करे। 
Luke 18:6 प्रभु ने कहा, सुनो, कि यह अधर्मी न्यायी क्या कहता है? 
Luke 18:7 सो क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उस की दुहाई देते रहते; और क्या वह उन के विषय में देर करेगा? 
Luke 18:8 मैं तुम से कहता हूं; वह तुरन्त उन का न्याय चुकाएगा; तौभी मनुष्य का पुत्र जब आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्वास पाएगा?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-51