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गुरुवार, 4 दिसंबर 2014

उदार


   एक बेघर व्यक्ति हमारे इलाके के स्थानीय पुस्तकालय में समय बिताता है। एक दोपहर को जब मैं पुस्त्कालय में बैठी कुछ लिख रही थी, मैंने भोजन करने के लिए अपना काम रोका और अपने साथ लाया हुआ भोजन खाने लगी। खाते-खाते मुझे उस व्यक्ति का चेहरा स्मरण हो आया और मैं भोजन खाते-खाते रुक गई। मैं उसके पास गई और बचा हुआ अछूता भोजन उसे प्रस्तुत किया, जो उसने ले लिया। इस छोटे सी घटना ने मुझे इस बात का एहसास करवाया कि जो परमेश्वर ने मुझे दिया है, मुझे उसे उन लोगों के साथ बाँटना भी है जिनके पास नहीं है।

   बाद में इस घटना के बारे में सोचते हुए मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल से इस संबंध में मूसा के द्वारा व्यवस्था में दिए गए निर्देशों को पढ़ा। मूसा में होकर परमेश्वर ने इस्त्राएलियों से कहा: "जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसके किसी फाटक के भीतर यदि तेरे भाइयों में से कोई तेरे पास द्ररिद्र हो, तो अपने उस दरिद्र भाई के लिये न तो अपना हृदय कठोर करना, और न अपनी मुट्ठी कड़ी करना; जिस वस्तु की घटी उसको हो, उसका जितना प्रयोजन हो उतना अवश्य अपना हाथ ढीला कर के उसको उधार देना" (व्यवस्थाविवरण 15:7-8)। एक ढीला किया हुआ हाथ दिखाता है उस बात की आज्ञाकारिता को जो परमेश्वर ने अपने लोगों से कही - दरिद्रों के लिए स्वेच्छा और मुक्त-भाव से दो; कोई बहाना नहीं, कुछ रोक कर नहीं रखना।

   जब हम ऐसे उदार होकर गरीबों की सहायता करते हैं तो परमेश्वर हमें हमारी उदारता के लिए आशीषित करता है (भजन 41:1-3; नीतिवचन 19:17; यशायाह 58:10)। परमेश्वर की अगुवाई में विचार कीजिए कि आप किस प्रकार भूखों की सहायता कर सकते हैं और प्रभु यीशु के नाम में कैसे ज़रूरतमन्दों को दे सकते हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


आप बिना प्रेम किए दे तो सकते हैं, लेकिन बिना दिए प्रेम नहीं कर सकते।

उदारता से भूखे की सहायता करे और दीन दु:खियों को सन्तुष्ट करे, तब अन्धियारे में तेरा प्रकाश चमकेगा, और तेरा घोर अन्धकार दोपहर का सा उजियाला हो जाएगा। - यशायाह 58:10

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 15:7-11
Deuteronomy 15:7 जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसके किसी फाटक के भीतर यदि तेरे भाइयों में से कोई तेरे पास द्ररिद्र हो, तो अपने उस दरिद्र भाई के लिये न तो अपना हृदय कठोर करना, और न अपनी मुट्ठी कड़ी करना; 
Deuteronomy 15:8 जिस वस्तु की घटी उसको हो, उसका जितना प्रयोजन हो उतना अवश्य अपना हाथ ढीला कर के उसको उधार देना। 
Deuteronomy 15:9 सचेत रह कि तेरे मन में ऐसी अधम चिन्ता न समाए, कि सातवां वर्ष जो छुटकारे का वर्ष है वह निकट है, और अपनी दृष्टि तू अपने उस दरिद्र भाई की ओर से क्रूर कर के उसे कुछ न दे, और वह तेरे विरुद्ध यहोवा की दुहाई दे, तो यह तेरे लिये पाप ठहरेगा। 
Deuteronomy 15:10 तू उसको अवश्य देना, और उसे देते समय तेरे मन को बुरा न लगे; क्योकि इसी बात के कारण तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे सब कामों में जिन में तू अपना हाथ लगाएगा तुझे आशीष देगा। 
Deuteronomy 15:11 तेरे देश में दरिद्र तो सदा पाए जाएंगे, इसलिये मैं तुझे यह आज्ञा देता हूं कि तू अपने देश में अपने दीन-दरिद्र भाइयों को अपना हाथ ढीला कर के अवश्य दान देना।

एक साल में बाइबल: 
  • इफिसियों 4-6


बुधवार, 3 दिसंबर 2014

विचारधारा


   प्रत्येक युग के अपने विचार और मान्यताएं होते हैं जो उस युग की संसकृति को प्रभावित करते हैं और "युग की विचारधारा" माने जाते हैं। यह एक प्रकार कि प्रचलित सर्वसम्मति होती है जिसे संसार के लोग मानते और निभाते हैं तथा दूसरों पर भी उसे मानने एवं निभाने के लिए दबाव डालते हैं। संसार के लोगों की यह प्रवृत्ति सभी को समाज की प्रचलित मान्यताओं को स्वीकार करने और निभाने के लिए उकसाती रहती है और हमें आत्मिक रीति से जागरूक नहीं रहने देती क्योंकि वह परमेश्वर की अटल एवं स्थिर मान्यताओं तथा निर्देशों के अनुसार नहीं वरन मनुष्यों के चंचल विचारों पर आधारित होती है।

   प्रेरित पौलुस ने इस भ्रष्ट कर देने वाले बहुआयामी वातावरण को "संसार की रीति" कहा। इफिसुस के मसीही विश्वासियों के मसीह यीशु में आने से पूर्व के जीवन के संबंध में उसने लिखा: "और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है" (इफिसियों 2:1-2)। यह "संसार की रीति" संसार द्वारा लाया जाने वाला वह दबाव है जो अलग अलग तरीकों से, समय और परिस्थिति अनुसार, शैतान द्वारा प्रेरित मान्यताओं और विचारों के द्वारा एक ऐसी जीवन शैली प्रचलित करवाना चाहता है जो परमेश्वर और उसके स्थिर निर्देशों से पृथक परन्तु तत्कालीन मनुष्यों के अपने विचारों, अहम, मानकों, प्रयासों और कार्यविधि पर आधारित हो।

   इसीलिए प्रभु यीशु मसीह हम मसीही विश्वासियों के लिए, क्योंकि हम संसार के नहीं हैं, संसार में रहते हुए भी हमें शैतान के दुराचारी प्रभावों से सुरक्षित रहने की प्रार्थना करता है (यूहन्ना 17:14-15)। वह जानता था कि संसार में रहते हुए संसार के प्रभावों से बचे रहना सरल नहीं है, इसलिए उसने हमारी सुरक्षा के लिए हमें कई साधन जुटा कर दिए हैं; वह हमारी सहायता करता है कि हम उसकी ज्योति में चलें (इफिसियों 5:8)। उसने अपना वचन हमें दिया है जिसे अपने अन्दर बसा कर हम संसार के अनुकूल बनने से बचे रहें (रोमियों 12:1-2)। उसने अपना पवित्र आत्मा हममें रहने को दिया है जिससे हम उसके चलाए चलते रहें (गलतियों 5:25), और प्रेम (इफिसियों 5:2), सत्य (3 यूहन्ना 1:4) तथा मसीह यीशु में बने रहें (कुलुस्सियों 2:6)।

   हम जितना परमेश्वर के वचन बाइबल के साथ समय बिताएंगे और परमेश्वर की सामर्थ से उसके निर्देषों के अनुसार चलते रहेंगे, हम संसार की युग तथा समयानुसार बदलते रहने वाली हानिकारक विचारधारा और रीति से बचे रहेंगे तथा परमेश्वर की चिरस्थाई, अपरिवर्तनीय और अनन्तकाल के लिए लाभदायक विचारधारा के अनुसार चलते रहने पाएंगे। - डेनिस फिशर

हम मसीही विश्वासी कुछ समय के लिए ही संसार में हैं इसीलिए हमारी निष्ठा हमारे अनन्त निवास स्थान स्वर्ग के प्रति है।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2 

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)। 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • इफिसियों 1-3


मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

आशा


   आदम और हव्वा के पास सब कुछ था, साथ ही उनके पास यह सोचने का कोई कारण नहीं था कि उनका जीवन जैसे परमेश्वर द्वारा उपलब्ध करवाई गई हर उत्तम बात के साथ आरंभ हुआ था वैसे ही आगे बढ़ता नहीं रह पाएगा, किसी समय उनके उस आनन्द और आराम में कोई बाधा आ जाएगी; इस लिए उन्हें किसी बात की आशा रखने की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन उन्होंने अपनी इस उत्तम स्थिति और आशीष को उस एक बात के लिए जोखिम में डाल दिया जो शैतान ने उनसे कही, कि परमेश्वर ने सब कुछ तो दिया लेकिन भले और बुरे के ज्ञान से वंचित रखा है (उत्पत्ति 2:17, 3:5)। जब शैतान ने उनके समक्ष इस बात को पा लेने का प्रस्ताव रखा तो हव्वा ने उसकी बातों में आकर उस प्रस्ताव को मान लिया, और आदम ने भी हव्वा का अनुसरण किया (उत्पत्ति 3:6)। उन्हें वह तो मिल गया जिसकी उन्होंने लालसा करी - ज्ञान, लेकिन उन्होंने वह गवाँ दिया जो उनके पास था - निर्दोष, निष्पाप जीवन और परमेश्वर के साथ संगति। इस निर्दोष और निष्पाप जीवन की हानि के साथ ही आशा की आवश्यकता ने जन्म लिया - आशा कि उनके पाप का दोष कभी हट सकेगा, वे कभी शर्मिंदगी से निकल सकेंगे और पुनः निर्दोष और निष्पाप होकर परमेश्वर के साथ संगति कर सकेंगे।

   इसी आशा की पूर्ति के लिए परमेश्वर ने प्रभु यीशु के रूप में अपने आप को संसार के सामने प्रस्तुत किया। प्रभु यीशु ही मानव जाति के परमेश्वर से पुनः मेल हो जाने की एकमात्र आशा है; वही सभी जातियों का मनभावना है (हग्गै 2:7); उसी के द्वारा हम अन्धकार से ज्योति में आते हैं और पापों से छुटकारा पाते हैं (कुलुस्सियों 1:13-14); "वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं" (कुलुस्सियों 1:15-17)। प्रभु यीशु मसीह ही सारे संसार के लिए पापों के दोष से मुक्त हो कर अनन्त काल की महिमा की आशा है (कुलुस्सियों 1:27)।

   प्रभु यीशु के रूप में हमें दिए गए इस उत्तम आशा के वरदान के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें और उसकी इस भेंट को सहर्ष स्वीकार करें। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


आशा प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए निश्चितता है क्योंकि वह मसीह यीशु पर आधारित है।

जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। - कुलुस्सियों 1:27

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-17
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है। 
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। 
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। 
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गलतियों 4-6


सोमवार, 1 दिसंबर 2014

परवाह


   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने एक प्रश्न उठाया, "जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?" (भजन 8:3-4)। बाइबल का पुराना नियम खण्ड इस प्रश्न के भिन्न रूपों से जूझता रहा है। मिस्त्र के दासत्व में कराह रहे इसत्राएली राष्ट्र को मूसा द्वारा दीए गए इस आश्वासन पर विश्वास करना असंभव लगा कि परमेश्वर को उनकी परवाह है और वह उन्हें शीघ्र ही दासत्व से निकालकर एक नए स्थान पर बसा देगा। स्भोपदेशक नामक बाइबल की पुस्तक का लेखक इसी प्रश्न को व्यंग के साथ प्रस्तुत करता है जब वह इस पुस्तक में बारंबर कहता है, "सब व्यर्थ है", अर्थात, क्या इस संसार में कुछ भी ऐसा है जो अर्थपूर्ण है?

   मैं भी इसी सन्देह के साथ जूझ रहा था जब मुझे निमंत्रण मिला कि मैं एक ऐसी सभा को संबोधित करूँ जिसके आयोजन की विषय-वस्तु थी बाइबल का यह पद: "देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है" (यशायाह 49:16)।

   बाइबल के जिस भाग से यह पद लिया गया था वह परमेश्वर का अपने लोगों को संबोधन था जब वे अपने इतिहास में एक निम्न बिंदु से होकर निकल रहे थे क्योंकि परमेश्वर ने अपने भविष्यद्वक्ता यशायाह द्वारा उन्हें बताया था कि वे बन्दी बना कर बाबुल ले जाए जाएंगे। अपने विषय यह भविष्यवाणी सुनकर इस्त्राएल के लोग कहने लगे, "...यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है" (यशायाह 49:14)। उनका यह विलाप सुनकर परमेश्वर ने उन्हें अनेक प्रतिज्ञाएं भी दीं जो यशायाह के 42 से 53 अध्याय में मिलती हैं और जिन्हें सेवकों के गीत भी कहा जाता है। इन प्रतिज्ञाओं में परमेश्वर इस्त्राएल के सामने शत्रुओं से छुटकारे और भविष्य की आशा को रखता है। इसी खण्ड में परमेश्वर आते समय में प्रभु यीशु के मानव अवतार के रूप में आने और संसार के पापों के निवारण तथा उद्धार का मार्ग तैयार कर के देने की भविष्यवाणी भी करता है।

   क्या वास्तव में परमेश्वर हम मनुष्यों की परवाह करता है? परमेश्वर के वचन बाइबल का ज़ोरदार ढंग से उत्तर है "हाँ" और इसका प्रमाण है प्रभु यीशु मसीह - यदि परमेश्वर को हमारी परवाह नहीं होती और वह हमसे प्रेम नहीं करता तो फिर उसे अपने पुत्र को हमारे पापों के बदले दण्ड उठाने और हमारे उद्धार पाने के लिए मारे जाने के लिए स्वर्ग के वैभव को छोड़कर संसार में दुख उठाने आने की आवश्यकता भी नहीं थी। क्योंकि परमेश्वर आपसे और मुझसे प्रेम रखता है, हमारी परवाह करता है इसीलिए आज भी हमारे लिए प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त करने का मार्ग उसने खुला रखा हुआ है। - फिलिप यैन्सी


प्रभु यीशु का आगमन इस बात का सर्वोच्च तथा अकाट्य प्रमाण है कि परमेश्वर हमारी परवाह करता है। - विलियम बार्कले

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: यशायाह 49:8-18
Isaiah 49:8 यहोवा यों कहता है, अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, उद्धार करने के दिन मैं ने तेरी सहायता की है; मैं तेरी रक्षा कर के तुझे लोगों के लिये एक वाचा ठहराऊंगा, ताकि देश को स्थिर करे और उजड़े हुए स्थानों को उनके अधिकारियों के हाथ में दे दे; और बंधुओं से कहे, बन्दीगृह से निकल आओ; 
Isaiah 49:9 और जो अन्धियारे में हैं उन से कहे, अपने आप को दिखलाओ! वे मार्गों के किनारे किनारे पेट भरने पाएंगे, सब मुण्डे टीलों पर भी उन को चराई मिलेगी। 
Isaiah 49:10 वे भूखे और प्यासे होंगे, न लूह और न घाम उन्हें लगेगा, क्योंकि, वह जो उन पर दया करता है, वही उनका अगुवा होगा, और जल के सोतों के पास उन्हें ले चलेगा। 
Isaiah 49:11 और, मैं अपने सब पहाड़ों को मार्ग बना दूंगा, और मेरे राजमार्ग ऊंचे किए जाएंगे। 
Isaiah 49:12 देखो, ये दूर से आएंगे, और, ये उत्तर और पच्छिम से और सीनियों के देश से आएंगे। 
Isaiah 49:13 हे आकाश, जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोल कर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है।
Isaiah 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है। 
Isaiah 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता। 
Isaiah 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है। 
Isaiah 49:17 तेरे लड़के फुर्ती से आ रहे हैं और खण्डहर बनाने वाले और उजाड़ने वाले तेरे बीच से निकले जा रहे हैं। 
Isaiah 49:18 अपनी आंखें उठा कर चारों ओर देख, वे सब के सब इकट्ठे हो कर तेरे पास आ रहे हैं। यहोवा की यह वाणी है कि मेरे जीवन की शपथ, तू निश्चय उन सभों को गहने के समान पहिन लेगी, तू दुल्हिन की नाईं अपने शरीर में उन सब को बान्ध लेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • गलतियों 1-3


रविवार, 30 नवंबर 2014

प्रार्थना तथा इच्छा


   प्रार्थना के लिए दिया गया वह हस्तलिखित निवेदन लगभग असंभव होने के कारण हृदयविदारक था। निवेदन देने वाली महिला ने लिखा, "मैं मलटिपल स्क्लिरोसिस रोग से पीड़ित हूँ, मेरी माँस पेशियाँ कमज़ोर पड़ गई हैं, मुझे से निगला नहीं जाता तथा मेरी दृष्टि घट रही है और दर्द बढ़ रहा है।" उस महिला का शरीर जवाब दे रहा था, और मुझे उसके प्रार्थना के निवेदन में निराशा का आभास हुआ। लेकिन आगे पढ़कर आशा जागी - उसके पास वह सामर्थ थी जो शारीरिक नुकसान और क्षीणता पर जयवंत होती है; उस महिला ने लिखा, "मैं जानती हूँ कि मेरे धन्य उद्धारकर्ता के नियंत्रण में ही सब कुछ है। मेरे लिए उसकी इच्छा ही सर्वोपरी है।"

   इस महिला को मेरी प्रार्थनाओं की आवश्यकता अवश्य थी, लेकिन उस के पास भी कुछ ऐसा था जिसकी मुझे आवश्यकता थी - परमेश्वर में अडिग विश्वास। वह प्रत्यक्ष रूप से उस सच्चाई की तसवीर थी जो परमेश्वर ने प्रेरित पौलुस को सिखाई थी जब पौलुस ने अपने ऊपर आई उस विपदा से छुटकारा चाहा जिसे उसने "शरीर में एक काँटा" कहा (2 कुरिन्थियों 12:7)। उस दुख से आराम पाने का पौलुस का प्रयास केवल असंभव ही प्रमाणित नहीं हुआ, वरन इस विषय की उसकी प्रार्थना को परमेश्वर ने पूरी तरह से खारिज कर दिया गया। उस "काँटे" के साथ पौलुस का लगातार चलने वाला यह संघर्ष जो स्पष्ट रीति से परमेश्वर की ओर से था एक महत्वपूर्ण पाठ सिखाने के लिए था - पौलुस की इस दुर्बलता में ही परमेश्वर की सामर्थ सिद्ध होने का प्रमाण सब के सामने आ सका जिससे आते समय के सभी लोगों के लिए हिम्मत बनाए रखने के लिए एक उदाहरण हो सके।

   जब हम प्रार्थनाओं में अपने हृदय परमेश्वर के सामने उँडेलेते हैं, तो साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि हम अपनी प्रार्थना के उत्तर पाने से अधिक परमेश्वर की इच्छा जानने और मानने के लालायित रहें। वहीं से अनुग्रह और सामर्थ प्राप्त होती है। - डेव ब्रैनन


हमारी प्रार्थनाएं स्वर्ग में हमारी इच्छापूर्ति के लिए नहीं वरन धरती पर परमेश्वर की इच्छापूर्ति के लिए होनी चाहिएं।

फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। - मत्ती 26:39 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:7-10
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 10-13


शनिवार, 29 नवंबर 2014

आदर तथा आशीष


   मेरे पिता, हैल, के 90वें जन्म दिवस पर हम सभी भाईयों ने मिलकर एक बड़ा जश्न आयोजित किया। हमने अपने परिवार जनों एवं मित्रों को बुलाया, बहुत सा स्वादिष्ट भोजन बनाकर रखा और संगीत तथा संगति का खुला आयोजन किया। घर में परिवार तथा मित्रगणों ने कोई भी वाद्य यंत्र, जैसे बैन्जो, मैण्डोलिन, गिटार, ढोल इत्यादि, जो भी वे बजा सकते थे लिया और हम सारी दोपहर खाते और गाते-बजाते रहे। पिताजी के लिए एक बड़ा से केक बनवाया जिस पर लिखवाया गया, "परमेश्वर की स्तुति हो! धन्य है वह पुरुष जो यहोवा का भय मानता है - भजन 112:1। हैल तुम्हें 90वाँ जन्म दिम मुबारक हो!"

   बाद में जब मैं भजन 112 का अध्ययन कर रहा था तब मैंने पाया कि वह भजन मेरे पिताजी के चरित्र का, जो 50 वर्षों से भी अधिक तक परमेश्वर के साथ चलते रहे और अब उसके साथ हैं, कितना सटीक वर्णन था। ऐसा नहीं है कि पिताजी को कभी कोई दुख या तकलीफ नहीं हुई - उन्हें भी उन सभी बातों से होकर गुज़रना पड़ा जिन से होकर हम सभी निकलते हैं, लेकिन उन कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर और उसके प्रेम में उनके अडिग  विश्वास का प्रतिफल उनके जीवन में आने वालि अनेक आशीषें थीं। भजन 112 भी हमें यही बात बताता है, कि जो मनुष्य परमेश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा, भय और प्रेम को बनाए रखता है और उसके वचन में आनन्दित होता है वह आशीषों से परिपूर्ण रहेगा। उस मनुष्य की परमेश्वर के प्रति लगातार बनी और बढ़ती रहने वाली ईमानदारी तथा विश्वास के कारण, ना केवल वह स्वयं आशीषित रहेगा, वरन यह आशीष उसकी सन्तान पर भी जाएगी (पद 2)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का यह भजन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवनों में परमेश्वर के प्रति एक भीतरी श्रद्धा का जीवन व्यतीत करें और उसकी आज्ञाकारिता में चलते रहें, अपने जीवन के सभी निर्णय उसकी आज्ञाओं और निर्देशों के अनुसार लेते रहें - अर्थात परमेश्वर को आदर देते रहने वाला जीवन व्यतीत करें। यदि हम ऐसा करेंगे, तो हम देखेंगे कि हमारे आयु के दिन - वे चाहे जितने भी कम या अधिक क्यों ना हों, परमेश्वर की ओर से हमारे लिए आदर तथा आशीष के दिन होंगे, और यह सब ना केवल हमारे अपने लिए होगा वरन हमारी सन्तान तक भी जाएगा। - डेनिस फिशर


यदि आप परमेश्वर को अपने जीवन से आदर देंगे, तो वह आपके जीवन को आदरणीय बना देगा।

बुद्धि का मूल यहोवा का भय है; जितने उसकी आज्ञाओं को मानते हैं, उनकी बुद्धि अच्छी होती है। उसकी स्तुति सदा बनी रहेगी। - भजन 111:10

बाइबल पाठ: भजन 112
Psalms 112:1 याह की स्तुति करो। क्या ही धन्य है वह पुरूष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है! 
Psalms 112:2 उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी। 
Psalms 112:3 उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा। 
Psalms 112:4 सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है। 
Psalms 112:5 जो पुरूष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकद्दमें को जीतेगा। 
Psalms 112:6 वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा। 
Psalms 112:7 वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है। 
Psalms 112:8 उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिये वह न डरेगा, वरन अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के सन्तुष्ट होगा। 
Psalms 112:9 उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा और उसका सींग महिमा के साथ ऊंचा किया जाएगा। 
Psalms 112:10 दुष्ट उसे देख कर कुढेगा; वह दांत पीस-पीसकर गल जाएगा; दुष्टों की लालसा पूरी न होगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 7-9


शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

ध्येय


   आज के इलैक्ट्रौनिक उपकरणों और अन्य ध्यान बंटाने वाली वस्तुओं के आने से पहले, मेरे लड़कपन के ग्रीष्मावकाश के लंबे दिन प्रति सप्ताह आने वाले चलते-फिरते पुस्तकालय के आगमन से आनन्दमय हो जाते थे। वह पुस्तकालय एक बस थी जिसमें अन्दर बैठने के स्थान की बजाए शेल्फ बनी हुईं थी और उन शेल्फों पर पुस्तकें भरी हुई थीं जो कि स्थानीय पुस्तकाअलय से लाई जाती थीं जिससे वे लोग जो पुस्त्कालय तक नहीं जा पाते, पुस्तकें पढ़ सकें। उस चलते-फिरते पुस्त्कालय के कारण मैंने बहुत से दिन ऐसी पुस्तकों को पढ़ते हुए बिताए जो मुझे अन्यथा नहीं मिल पातीं। मैं आज भी उस पुस्त्कालय का धन्यवादी हूँ जिसने मेरे अन्दर पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रेरित पौलुस को भी पुस्तकों से प्रेम था, और वह अपने जीवन के अन्त तक उन्हें पढ़ता रहा था। कैदखाने से लिखी अपनी अन्तिम पत्री में, जिसके लिखे जाने के कुछ समय पश्चात उसका अन्त मृत्युदण्ड द्वारा करवा दिया गया था, पौलुस ने तिमुथियुस को लिखा, "जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहां छोड़ आया हूं, जब तू आए, तो उसे और पुस्‍तकें विशेष कर के चर्मपत्रों को लेते आना" (2 तिमुथियुस 4:13)। जिन पुस्तकों और चमर्पत्रों का उल्लेख पौलुस यहाँ कर रहा है वे परमेश्वर के वचन के पुराने नियम के खण्ड तथा/या उसकी लिखी हुई रचानाएं थीं।

   पौलुस का पुस्तकों के प्रति यह प्रेम क्या महज़ ज्ञानवर्धन के शौक या मनोरंजन पाने के लिए था? पुस्तकों के अलावा पौलुस का एक प्रेम और भी था, जो पुस्तकों के प्रति उसके प्रेम का आधार था - अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को और अधिक गहराई एवं निकटता से जानते रहने का प्रेम। पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों के नाम अपनी पत्री में उन्हें इस संबंध में लिखा कि उसके जीवन का ध्येय था, "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:10)।

   मेरी प्रार्थना है कि जैसा पौलुस का ध्येय प्रभु यीशु को लगातार और भी अधिक निकटता तथा गहराई से जानते रहने का था, वैसे ही हमारे जीवनों का भी यही ध्येय हो और हम प्रभु यीशु की निकटता में बढ़ते चले जाएं। - बिल क्राउडर


सभी ज्ञान से उत्तम ज्ञान है प्रभु यीशु मसीह की पहचान में बढ़ते जाना।

परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:2-3

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 कुरिन्थियों 4-6