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शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

अकेले?


   कुछ बस यात्रियों के साथ एक विचित्र घटना हुई; वे जिस यात्रा पर उस बस में सवार होकर निकले थे, सामान्यतः उसे पूरा होने में छः घंटे लगते हैं। लेकिन उनकी बस का चालक उन यात्रियों को एक पेट्रोल पम्प पर बस में बैठा छोड़कर चला गया। नए चालक के आने और बस के आगे बढ़ने के लिए उन्हें रात भर का समय निकालना पड़ा, आठ घंटों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। वे सब यात्री इस अप्रत्याशित विलंब के कारण विचलित, अपने परिणाम को लेकर आशंकित और परिस्थिति से निकाले जाने के लिए अधीर रहे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, यूसुफ भी ऐसे ही विचलित, आशंकित और अधीर रहा होगा, जब उसे निर्दोष होने पर भी एक झूठे इल्ज़ाम में फंसा कर कैदखाने में डलवा दिया गया (उत्पत्ति 39)। कहने को तो यूसुफ के पास सहायता के लिए कोई नहीं था, लेकिन "यहोवा यूसुफ के संग संग रहा, और उस पर करूणा की, और बन्दीगृह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई" (उत्पत्ति 39:21)। उस बन्दीगृह के दारोगा ने यूसुफ को सब कैदियों के ऊपर देखरेख करने के लिए नियुक्त कर दिया, और जो भी यूसुफ करता था, परमेश्वर उसमें उसे सफलता देता था (पद 23)। परमेश्वर का साथ और आशीष होने के बावजूद यूसुफ को सालों तक कैदखाने में रहना तो पड़ा, लेकिन जब वह बाहर निकला तो मिस्त्र देश का प्रधानमंत्री बना दिया गया, मिस्त्र देश में राजा के बाद वह ही सबसे अधिक सामर्थी व्यक्ति था।

   संभव है कि आप कहीं ऐसे ही मजबूर होकर पड़े हों, किसी अस्पताल के कमरे में, किसी कैदखाने में, अपने घर से दूर किसी अन्य देश या स्थान पर, या फिर अपने मन के अन्दर के कैदखाने में! आप जहाँ कहीं भी हैं, जैसे भी हैं, अपने आप को जैसा भी अनुभव कर रहे हैं, परमेश्वर की दया और करुणा आप तक हर स्थान और परिस्थिति में पहुँच सकती है। क्योंकि वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है (निर्गमन 6:3) और सर्वव्यापी है (यिर्मयाह 23:23-24), इसलिए जब ऐसा लग रहा हो कि आप बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं, कोई सहायता करने के लिए नहीं है, तब भी वह उन विपरीत परिस्थितियों में भी आपको सुरक्षित रख सकता है, आपको उन्नति दे सकता है, और आपके लिए उपलब्ध करवा सकता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर तब भी हमारे साथ होता है जब हमें लगे कि उसने भी साथ छोड़ दिया है।

यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ, जो दूर नहीं, निकट ही रहता हूँ? फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं? - यिर्मयाह 23:23-24

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 39:19-23
Genesis 39:19 अपनी पत्नी की ये बातें सुनकर, कि तेरे दास ने मुझ से ऐसा ऐसा काम किया, यूसुफ के स्वामी का कोप भड़का। 
Genesis 39:20 और यूसुफ के स्वामी ने उसको पकड़कर बन्दीगृह में, जहां राजा के कैदी बन्द थे, डलवा दिया: सो वह उस बन्दीगृह में रहने लगा। 
Genesis 39:21 पर यहोवा यूसुफ के संग संग रहा, और उस पर करूणा की, और बन्दीगृह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई। 
Genesis 39:22 सो बन्दीगृह के दरोगा ने उन सब बन्धुओं को, जो कारागार में थे, यूसुफ के हाथ में सौंप दिया; और जो जो काम वे वहां करते थे, वह उसी की आज्ञा से होता था। 
Genesis 39:23 बन्दीगृह के दरोगा के वश में जो कुछ था; क्योंकि उस में से उसको कोई भी वस्तु देखनी न पड़ती थी; इसलिये कि यहोवा यूसुफ के साथ था; और जो कुछ वह करता था, यहोवा उसको उस में सफलता देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28



शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2015

प्रमाण


   एक रात एक पादरी मार्ग पर जा रहा था कि एक चोर ने उसे पकड़ा और बन्दूक दिखाते हुए कहा कि या तो अपने पैसे दे दे नहीं तो जान से जाएगा। पादरी ने अपना बटुवा निकालने के लिए जब अपना हाथ अपनी जेब की ओर किया तो उस चोर को पादरी का चोगा दिखाई दिया; चोर ने कहा, "अच्छा तो तुम पादरी हो; चलो रहने दो, तुम ऐसे ही चले जाओ।" पादरी उस चोर द्वारा दया के इस अनेपक्षित आचरण से चकित हुआ, और जेब से निकाल कर कुछ टॉफी चोर की ओर बढ़ाईं। चोर ने टॉफी लेने से इन्कार करते हुए कहा, "धन्यवाद; लेकिन मैं इन उपवास के दिनों में कुछ नहीं खाता।"

   उस चोर ने उपवास के दिनों में टॉफी तक खाना तो छोड़ रखा था, लेकिन चोरी की आदत नहीं छोड़ी; उसका व्यवहार ही उसके असली चरित्र का प्रमाण था। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन के लेखक ने भी इसी बात को लिखा, कि व्यवहार ही चरित्र का सबसे अच्छा सूचक है; यदि कोई कहता है कि वह एक भक्त व्यक्ति है, तो उसका आचरण ही उसकी भक्ति का प्रमाण है (नीतिवचन 20:11)। आचरण और प्रवचन का विरोधाभास प्रभु यीशु के समय के धार्मिक अगुवों के चरित्र का भी भाग था। इसीलिए प्रभु यीशु उनके इस दोगलेपन को उजागर तथा उनके व्यवहार की भर्त्सना करते रहते थे (मत्ती 23:13-36)। बाहरी स्वरूप तथा शब्द तो धोखा दे सकते हैं लेकिन व्यवहार चरित्र की असलियत का प्रमाण दे देता है; और यह बात हम सब पर समानता से लागू होती है।

   प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को उसके प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम अपने व्यवहार तथा चरित्र से प्रदर्शित करनी है ना कि केवल अपने शब्दों से। होने दें कि परमेश्वर के हमारे प्रति  दिखाए गए प्रेम के कारण उसके प्रति आपका समर्पण संसार के समक्ष आपके व्यवहार से प्रमाणित हो सके। - मार्विन विलियम्स


व्यवहार चरित्र का सर्वोत्तम प्रमाण है।

लड़का भी अपने कामों से पहिचाना जाता है, कि उसका काम पवित्र और सीधा है, वा नहीं। - नीतिवचन 20:11

बाइबल पाठ: मत्ती 23:23-33
Matthew 23:23 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। 
Matthew 23:24 हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छर को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो। 
Matthew 23:25 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं। 
Matthew 23:26 हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों।
Matthew 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हिड्डयों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। 
Matthew 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Matthew 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धर्मियों की कब्रें बनाते हो। 
Matthew 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपने बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते। 
Matthew 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्तान हो। 
Matthew 23:32 सो तुम अपने बाप-दादों के पाप का घड़ा भर दो। 
Matthew 23:33 हे सांपो, हे करैतों के बच्चों, तुम नरक के दण्‍ड से क्योंकर बचोगे?

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 39-40
  • मत्ती 23:23-39



गुरुवार, 5 फ़रवरी 2015

शिक्षा


   मैं अपने हाई-स्कूल के पुराने साथियों की पुनर्मिलन-सभा में आई हुई थी; किसी ने पीछे से मेरे कंधे को थपथपाया और मैंने पीछे मुड़कर उसकी ओर देखा, फिर उसकी नाम की पट्टी को पढ़ा, और मेरा ध्यान कुछ पुरानी यादों की ओर चला गया। मुझे याद आया कि किसी ने मेरे स्कूल के लॉकर में एक पर्चा डाला था जिसमें मुझे तिरिस्कृत तथा शर्मिंदा करने के लिए मेरे विरुद्ध बहुत कुछ लिखा था जिससे तब मैं अन्दर से टूट गई थी। मुझे ध्यान आया कि उस पर्चे के लिकिहने वाले के प्रति मेरे मन में कटुता थी और मुझे लगता था कि किसी को उसे दूसरों के साथ व्यवहार करना कठोरता के साथ सिखाना चाहिए। अब उसे सामने देख कर मुझे ऐसा लगा मानों मैं उस समय की अपनी पीड़ा से फिर से होकर निकल रही हूँ। फिर भी मैंने हिम्मत करके एक बनावटी मुस्कान अपने चेहरे पर लगा ली और मेरे मूँह से दिखावे के शब्द निकलने आरंभ हो गए।

   हमने वार्तालाप करना आरंभ किया और उसने अपने दुखदायी जीवन की बातें मुझे बतानी आरंभ कर दीं, कैसे उसकी परवरिश परेशानी भरी कठिन परिस्थितियों में हुई, फिर बड़े होने पर उसकी शादी भी सफल नहीं रही। उसकी कहानी सुनते हुए मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों 12:15 में लिखी "कड़ुवी जड़" की बात स्मरण आने लगी। मैंने अपने लिए सोचा, इतने वर्षों के बाद भी मेरे मन भी उसके विरुद्ध एक  गहरी कड़ुवी जड़ बनी हुई थी जिसने मेरे मन को जकड़ रखा था। फिर परमेश्वर के वचन का एक और पद मुझे स्मरण आया: "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)।

   हम बातें करते रहे, एक दूसरे के लिए कुछ आँसू भी बहाए। हम दोनों में से किसी ने भी लॉकर वाली उस पुरानी घटना का उल्लेख नहीं किया। उस दोपहर परमेश्वर ने एक शिक्षा दी - कड़ुवाहट को छोड़कर आगे बढ़ने और क्षमा करने की शिक्षा। उस पुरानी घटना ने मेरे जीवन में एक नयापन ला दिया। - सिंडी हैस कैसपर


प्रतिशोध की भावना हमें बन्धनों में डाल देती है; क्षमा हमें स्वतंत्र कर देती है।

और ध्यान से देखते रहो, ऐसा न हो, कि कोई परमेश्वर के अनुग्रह से वंचित रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूट कर कष्‍ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएं। - इब्रानियों 12:15

बाइबल पाठ: रोमियों 12:14-21
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। 
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। 
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 36-38
  • मत्ती 23:1-22



बुधवार, 4 फ़रवरी 2015

पर्याप्त



   मुझे Our Daily Bread पुस्तिका के लिए सन्देश लिखना अच्छा लगता है। लेकिन मैं यह भी मान लेती हूँ कि कई बार मैं अपने मित्रों के सामने इस बात को लेकर कुड़कुड़ाई हूँ कि 220 शब्दों के एक छोटे से सन्देश में जो कुछ मैं कहना चाहती हूँ, वह सब कह पाना कितना कठिन हो जाता है; काश मुझे इससे अधिक शब्दों का प्रयोग कर पाने की अनुमति होती।

   इस वर्ष जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने के अपने क्रम में मत्ती रचित सुसमाचार पर आई तो पहली बार मेरा ध्यान कुछ ऐसे पर गया जिस पर इससे पहले कभी नहीं गया था। जब मैं प्रभु यीशु की परीक्षा के विवरण को पढ़ रही थी (मत्ती 4:1-11), तो मेरे ध्यान में आया कि यह विवरण कितना संक्षिप्त था; मत्ती ने 250 से भी कम शब्दों में एक ऐसी घटना को लिखा जिसका परमेश्वर के वचन में अभूतपूर्व स्थान तथा महत्व है। फिर मुझे ध्यान आया बाइबल में अन्य ऐसे ही जाने-पहिचाने, संक्षिप्त किंतु अति सशक्त तथा महत्वपूर्ण खण्ड और भी हैं, जैसे भजन 23 और प्रभु की प्रार्थना (मत्ती 6:9-13)।

   स्पष्ट था कि मुझे अधिक शब्दों की नहीं, वरन शब्दों को अधिक उचित रीति से उपयोग करने की आवश्यकता थी। यही तथ्य जीवन के अन्य क्षेत्रों पर - जैसे समय, धन, स्थान आदि पर भी लागू होता है। परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि परमेश्वर उन लोगों की सभी आवश्यकताएं पूरी करता है जो उसके राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज में रहते हैं (मत्ती 6:33)। राजा दाऊद ने अपने एक भजन में कहा, "जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी" (भजन 34:10)।

   यदि आज आप किसी वस्तु या बात के लिए यह सोचे बैठे हैं कि "मुझे यह बस थोड़ी सी और चाहिए", तो ज़रा थम कर थोड़ा विचार कीजिए; परमेश्वर ने आपकी आवश्यकता के अनुसार आपको पर्याप्त दिया है, संभवतः आपकी आवश्यकता "थोड़ी और" की नहीं वरन दिए हुए के "थोड़े और उचित प्रयोग" की है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


वह धनी है जो उतने में संतुष्ट है जितना उसके पास है।

मैं लड़कपन से ले कर बुढ़ापे तक देखता आया हूं; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है। - भजन 37:25

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उस के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 34-35
  • मत्ती 22:23-46



मंगलवार, 3 फ़रवरी 2015

दावत



   आज के इस द्रुत गति के जीवन में बहुत कम लोगों के पास आराम से मित्रों के साथ बैठकर भोजन करने का समय रह गया है। किसी ने इस बात पर व्यंग्य करते हुए कहा, आज के समय में विविध व्यंजनों वाले भोज का स्वाद लेने का एक ही तरीका है; उन सारे व्यंजनों को डबलरोटी के दो स्लाईसों के बीच में एक साथ लगाओ और खाओ!

   इस्त्राएल के बहुत से लोगों के बाबुल की बन्धुवाई से यरुशलेम के मन्दिर और शहरपनाह के पुनःनिर्माण के लिए वापस लौट कर आने के पश्चात एज़्रा ने उन्हें मूसा में होकर मिली परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक को पढ़कर सुनाया (नहेम्याह 8:1)। वे लोग घंटों तक परमेश्वर के वचन को सुनते थे और वहाँ ऐसे शिक्षक थे जो उन्हें उस पढ़े गए वचन को समझाते थे। जब परमेश्वर के उन वचनों को सुन-समझकर उन लोगों को अपनी कमियों का बोध हुआ, तो वे पश्चाताप और ग्लानि में रोने लगे। तब एज़्रा तथा उस समय के उनके अधिपति नहेम्याह ने उन्हें समझाया कि यह समय रोने का नहीं वरन आनन्दित होने का है; और उन से कहा कि वे एक बड़े भोज की तैयारी करें और उन लोगों के साथ बाँटें जिनके पास कुछ नहीं है, "...क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। तब सब लोग खाने, पीने, बैना भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उन को समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे" (नहेम्याह 8:10, 12)।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में जो आत्मिक भोजन की दावत हमारे लिए तैयार करके दी है, वह हमारे लिए बड़े आनन्द की बात है। समय निकालकर इस दावत का आनन्द लेना सीखें क्योंकि इस दावत की वस्तुएं स्वादिष्ट भी हैं तथा पौष्टिक भी, और हमें हर परिस्थिति के लिए हृष्ट-पुष्ट बनाती हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु जो जीवन की रोटी है, अपने जीवते वचन से हमारी आत्मिक भूख-प्यास तृप्त करता है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: नहेम्याह 8:1-12
Nehemiah 8:1 जब सातवां महीना निकट आया, उस समय सब इस्राएली अपने अपने नगर में थे। तब उन सब लोगों ने एक मन हो कर, जलफाटक के साम्हने के चौक में इकट्ठे हो कर, एज्रा शास्त्री से कहा, कि मूसा की जो व्यवस्था यहोवा ने इस्राएल को दी थी, उसकी पुस्तक ले आ। 
Nehemiah 8:2 तब एज्रा याजक सातवें महीने के पहिले दिन को क्या स्त्री, क्या पुरुष, जितने सुनकर समझ सकते थे, उन सभों के साम्हने व्यवस्था को ले आया। 
Nehemiah 8:3 और वह उसकी बातें भोर से दो पहर तक उस चौक के साम्हने जो जलफाटक के साम्हने था, क्या स्त्री, क्या पुरुष और सब समझने वालों को पढ़कर सुनाता रहा; और लोग व्यवस्था की पुस्तक पर कान लगाए रहे। 
Nehemiah 8:4 एज्रा शास्त्री, काठ के एक मचान पर जो इसी काम के लिये बना था, खड़ा हो गया; और उसकी दाहिनी अलंग मत्तित्याह, शेमा, अनायाह, ऊरिय्याह, हिल्किय्याह और मासेयाह; और बाई अलंग, पदायाह, मीशाएल, मल्किय्याह, हाशूम, हश्बद्दाना,जकर्याह और मशुल्लाम खड़े हुए। 
Nehemiah 8:5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए। 
Nehemiah 8:6 तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमेन, आमेन, कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया। 
Nehemiah 8:7 और येशू, बानी, शेरेब्याह, यामीन, अक्कूब, शब्बतै, होदिय्याह, मासेयाह, कलीता, अजर्याह, योजाबाद, हानान और पलायाह नाम लेवीय, लोगों को व्यवस्था समझाते गए, और लोग अपने अपने स्थान पर खड़े रहे। 
Nehemiah 8:8 और उन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक से पढ़कर अर्थ समझा दिया; और लोगों ने पाठ को समझ लिया। 
Nehemiah 8:9 तब नहेम्याह जो अधिपति था, और एज्रा जो याजक और शास्त्री था, और जो लेवीय लोगों को समझा रहे थे, उन्होंने सब लोगों से कहा, आज का दिन तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के लिये पवित्र है; इसलिये विलाप न करो और न रोओ। क्योंकि सब लोग व्यवस्था के वचन सुनकर रोते रहे। 
Nehemiah 8:10 फिर उसने उन से कहा, कि जा कर चिकना चिकना भोजन करो और मीठा मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास बैना भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। 
Nehemiah 8:11 यों लेवियों ने सब लोगों को यह कहकर चुप करा दिया, कि चुप रहो क्योंकि आज का दिन पवित्र है; और उदास मत रहो। 
Nehemiah 8:12 तब सब लोग खाने, पीने, बैना भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उन को समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 31-33
  • मत्ती 22:1-22



सोमवार, 2 फ़रवरी 2015

नई आँखें



   मैं एक कॉलेज छात्रा से मिला जिसने हाल ही में प्रभु यीशु में विश्वास किया था और उसे अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया था। उस छात्रा ने अपने परिवर्तित जीवन के नए अनुभव को कुछ ऐसे व्यक्त किया: "जब मैंने मसीह यीशु पर विश्वास किया और उद्धार पाया तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे स्वर्ग से परमेश्वर ने मेरी ओर हाथ बढ़ाया और मुझे नई आँखें लगा कर दे दीं। अब मैं आत्मिक सत्यों को देख-समझ सकती थी।"

   उस छात्रा का समस्त संसार के उद्धारकर्ता के साथ हुई इस भेंट तथा उसके नए आत्मिक दृष्टिकोण के बारे में सुनना हृदयस्पर्शी था। लेकिन उसका यह अनुभव एकमात्र नहीं है; उन सब को जो मसीह यीशु में विश्वास लाते तथा उद्धार पाते हैं, एक नया आत्मिक दृष्टिकोण प्राप्त होता है। लेकिन कभी कभी एक कोहरा सा हमारे जीवनों में आ जाता है और हमारे इस दृष्टिकोण को धुँधला कर देता है। ऐसा तब होता है जब हम प्रभु यीशु के साथ अपने संबंध के प्रति लापरवाह हो जाते हैं, उसे नज़रन्दाज़ करने लगते हैं।

   प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों की आत्मिक दृष्टि के लिए बड़ी तीव्र लालसा के साथ प्रार्थना करी, जो दिखाता है कि हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है कि जो कुछ परमेश्वर ने हमारे लिए मसीह यीशु में होकर किया है उसके प्रति हम सचेत रहें, उसके महत्व को समझें। पौलुस ने अपनी प्रार्थना में कहा, "और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है" (इफिसियों 1:18)।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी को नई आँखें दी गईं हैं जिससे वे आत्मिक सत्यों को देख तथा पहचान सकें। जब हम अपने मनों को परमेश्वर के प्रति लगाते हैं, वह हमें हमारी आत्मिक आँखों से वह सब देखने की सामर्थ देता है जो कुछ उसने मसीह यीशु में होकर हमें दिया है। - डेनिस फिशर


कभी मैं अन्धा था, लेकिन अब देखता हूँ!

कि तू उन की आंखे खोले, कि वे अंधकार से ज्योति की ओर, और शैतान के अधिकार से परमेश्वर की ओर फिरें; कि पापों की क्षमा, और उन लोगों के साथ जो मुझ पर विश्वास करने से पवित्र किए गए हैं, मीरास पाएं। - प्रेरितों 26:18

बाइबल पाठ: इफिसियों 1:15-21
Ephesians 1:15 इस कारण, मैं भी उस विश्वास का समाचार सुनकर जो तुम लोगों में प्रभु यीशु पर है और सब पवित्र लोगों पर प्रगट है। 
Ephesians 1:16 तुम्हारे लिये धन्यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं। 
Ephesians 1:17 कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी पहचान में, ज्ञान और प्रकाश का आत्मा दे। 
Ephesians 1:18 और तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों कि तुम जान लो कि उसके बुलाने से कैसी आशा होती है, और पवित्र लोगों में उस की मीरास की महिमा का धन कैसा है। 
Ephesians 1:19 और उस की सामर्थ हमारी ओर जो विश्वास करते हैं, कितनी महान है, उस की शक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार। 
Ephesians 1:20 जो उसने मसीह के विषय में किया, कि उसको मरे हुओं में से जिलाकर स्‍वर्गीय स्थानों में अपनी दाहिनी ओर। 
Ephesians 1:21 सब प्रकार की प्रधानता, और अधिकार, और सामर्थ, और प्रभुता के, और हर एक नाम के ऊपर, जो न केवल इस लोक में, पर आने वाले लोक में भी लिया जाएगा, बैठाया।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 29-30
  • मत्ती 21:23-46



रविवार, 1 फ़रवरी 2015

मन और उत्साह



   मुझे खेल प्रतियोगिताएं देखना बहुत अच्छा लगता है। खिलाड़ियों द्वारा उत्साह के साथ खेल मैदान पर जी-जान लगाते देखना मुझे पसन्द है; यह उत्साह उनके खेल के प्रति प्रेम को दिखाता है। इसके विपरीत, जब खेल प्रतियोग्यताओं का समय पूरा हो रहा होता है और कोई खेल टीम हार कर प्रतियोगिता में कोई भी पुरुस्कृत स्थान पाने के अवसर खो चुकी होती है, तो उसके खिलाड़ियों द्वारा शेष बची हुई प्रतियोगिताओं में बिना किसी उत्साह के केवल दिखाने भर के लिए भाग लेना, मेरे जैसे खेल प्रेमी दर्शकों को बड़ा निराशाजनक लगता है।

   हमारे व्यक्तिगत जीवनों में भी किसी कार्य को अच्छे से करने के लिए उत्साह भावना का बड़ा महत्व है और उत्साह का होना परमेश्वर के प्रति हमारे कार्यों और सेवकाई में भी महत्वपूर्ण है। प्रेरित पौलुस ने लिखा कि हमारे दैनिक कार्यों के प्रति हमारा रवैया परमेश्वर के प्रति हमारे रवैये का सूचक भी है। इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने लिखा: "और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो" (इफिसीयों 6:6-7)।

   मेरे लिए पौलुस द्वारा कही इस बात का मुख्य बिंदु है "मन से"। मेरा ऐसा प्रेमी परमेश्वर पिता है जिसने अपने पूरे मन से मुझ से इतना प्रेम किया कि मेरे साथ मेल-मिलाप कर पाने के लिए उस ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को बलिदान होने संसार में भेज दिया। जिस परमेश्वर ने मेरे लिए अपना सर्वोत्तम बलिदान होने के लिए दे दिया, उसके लिए मैं अपने सर्वोत्तम से कम कुछ कैसे कर सकता हूँ? जिस परमेश्वर पिता ने हमारे लिए सब कुछ कर के दे दिया, उसके लिए पूरे मन और उत्साह के साथ अपना सर्वोत्तम करने की भावना और लालसा उसके प्रति हमारे प्रेम का सूचक है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का प्रेम हमें उत्साहित करता है कि हम परमेश्वर के लिए जीवन व्यतीत करें।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23

बाइबल पाठ: इफिसीयों 6:5-9
Ephesians 6:5 हे दासों, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। 
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22