ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 11 मार्च 2015

सदा धन्यवादी


   मेरी बेटी को मूँगफली से एलर्जी है। मूँगफली के प्रति उसके शरीर की संवेदनशीलता इतनी अधिक है कि मूँगफली का एक छोटा सा टुकड़ा भी उसकी जान के लिए खतरा हो जाता है। इस कारण हम किसी भी खाद्य-वस्तु को खरीदने से पहले उसमें विद्यमान वस्तुओं के बारे में बड़ी बारीकी से जाँच-पड़ताल करते हैं; हम यदि कहीं बाहर कुछ खाने जाते हैं तो पहले से ही फोन द्वारा वहाँ उपलब्ध खाने की वस्तुओं की जानकारी ले लेते हैं और सदा ही अपने साथ एलर्जी होने की स्थिति में जान बचाने के लिए तुरंत लगाए जाने वाले इंजेक्शैन से भरी एक सिरिंज लेकर चलते हैं। इन सारी सावधानियों के बावजूद मैं फिर भी अपनी बेटी के वर्तमान तथा भविष्य की सुरक्षा के बारे में चिंतित रहती हूँ।

   ऐसी अनिश्चित और खतरनाक स्थिति के लिए धन्यवादी होना कोई स्वाभाविक प्रतिक्रीया नहीं है; लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल मुझे चुनौती देती है: "हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है" (1 थिस्सलुनीकियों 5:18)। हम मसीही विश्वासियों के लिए बाइबल के इस निर्देश से बच निकलने का कोई मार्ग नहीं है। परमेश्वर चाहता है कि चाहे भविष्य अनिश्चित ही हो, चाहे दुख अत्याधिक हों, चाहे कमी-घटी से होकर निकल रहे हों, हम जो प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा परमेश्वर की सन्तान हो गए हैं, हम सभी परिस्थितियों में सदा ही परमेश्वर के प्रति धन्यवादी बने रहें।

   कठिनाईयों के समयों में धन्यवादी होना कठिन होता है, लेकिन असंभव नहीं है, जैसा बाइबल के अनेक नायकों के जीवन से हम देखते हैं। जब दानिय्येल भविष्यद्वक्ता का जीवन खतरे में था उसने तब भी परमेश्वर का धन्यवाद किया: "जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के साम्हने घुटने टेक कर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा" (दानिय्येल 6:10)। योना नबी ने जल-जन्तु के पेट में पड़े होने पर भी धन्यवाद के साथ परमेश्वर को पुकारा: "परन्तु मैं ऊंचे शब्द से धन्यवाद कर के तुझे बलिदान चढ़ाऊंगा; जो मन्नत मैं ने मानी, उसको पूरी करूंगा। उद्धार यहोवा ही से होता है" (योना 2:9)। ये और उनके जैसे कई और परमेश्वर के लोग ऐसा इसलिए कर सके क्योंकि परमेश्वर ने अपने लोगों से हर परिस्थिति के द्वारा सदैव ही उनकी भलाई करते रहने की प्रतिज्ञा की है (रोमियों 8:28)।

   बाइबल में लिखे इन लोगों के जीवन परमेश्वर की इस प्रतिज्ञा की सच्चाई का प्रमाण तथा आज हमारे लिए परमेश्वर के प्रति सदा धन्यवादी बने रहने के प्रेरक हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हम प्रत्येक परिस्थिति में परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं क्योंकि वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28 

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 5:12-22
1 Thessalonians 5:12 और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो। 
1 Thessalonians 5:13 और उन के काम के कारण प्रेम के साथ उन को बहुत ही आदर के योग्य समझो: आपस में मेल-मिलाप से रहो। 
1 Thessalonians 5:14 और हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उन को समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ। 
1 Thessalonians 5:15 सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो। 
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो। 
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना में लगे रहो। 
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है। 
1 Thessalonians 5:19 आत्मा को न बुझाओ। 
1 Thessalonians 5:20 भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो। 
1 Thessalonians 5:21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। 
1 Thessalonians 5:22 सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44



मंगलवार, 10 मार्च 2015

भेंट


   बात उस समय की है जब मैं एक छोटे से चर्च का पास्टर था; हम अचानक ही एक बड़े संकट में आ गए। हमें उस चर्च भवन को, लागू स्थानीय भवन सुरक्षा मानकों के अनुरूप करने के लिए भवन के नवीनिकरण की आज्ञा मिली, जिसे एक निर्धारित समय सीमा में किया जाना था, अन्यथा वह भवन हम से ले लिया जाता और हमारे पास आराधना के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। इस बड़े कार्य के लिए पर्याप्त धन हमारे पास नहीं था इसलिए चर्च के लोगों से भेंट और दान द्वारा आवश्यक धन को एकत्रित करने के लिए आहवाहन होने लगे। जो भेंट और दान आए उन में से एक ने हमारे चर्च के नेतृत्व करने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

   एक व्रुद्ध महिला ने इस विशेष कार्य के लिए कई सौ डॉलर दान किए, और हम सब जानते थे कि इतना पैसा देना उसकी क्षमता के बाहर था। वास्तव में वो महिला इस पैसे को कई वर्षों से थोड़ा थोड़ा कर के जमा कर रही थी क्योंकि उसे घर के लिए एक अच्छा स्टोव खरीदना था, जबकि अभी तक वह एक छोटी सी हॉट-प्लेट पर ही खाना बनाने का कार्य कर रही थी। हम सब ने उस दान के लिए उसका बहुत धन्यवाद किया और वह पैसा उसे लौटाना चाहा, यह मानते हुए कि उसकी अपनी आवश्यकताएं चर्च की आवश्यकताओं से बढ़कर थीं। लेकिन उस ने पैसा वापस लेने से इन्कार कर दिया क्योंकि उसका मानना था कि चर्च की आवश्यकताएं उसके घर की आवश्यक्ताओं से अधिक महत्वपूर्ण थीं और उसके लिए स्टोव की बजाए यह अधिक आवश्यक था कि उसके परिवार के पास परमेश्वर की आराधना करने के लिए एक स्थान हो। हम सब उसके द्वारा अपनी सीमा से परे दी गई भेंट से स्तब्ध रह गए।

   जब प्रभु यीशु ने एक विधवा को मन्दिर की दान पेटी में दो दमड़ी, जो उस समय का सबसे छोटा सिक्का था, डालते देखा तो प्रभु ने भी उसकी दानवीरता के लिए उस विधवा की प्रशंसा करी (लूका 21:3-4)। क्यों? जितना उस ने दिया था उसके लिए नहीं, वरन इसलिए क्योंकि उसने जो कुछ उसके पास था, वह सब दे दिया था। इस तरह की भेंट देना ना केवल परमेश्वर को आदर देता है, वरन हमें परमेश्वर द्वारा सारे संसार के उद्धार तथा पापों की क्षमा के लिए दी गई उसकी सब से मूल्यवान भेंट - प्रभु यीशु मसीह की भी याद दिलाता है।

   परमेश्वर ने हमारे लिए अपना सर्वोत्तम न्योछावर कर दिया; उसकी इस भेंट का आदर करें और परमेश्वर के समान परमेश्वर के कार्य के लिए अपना सर्वोत्त्म भेंट में देना भी सीखें। - बिल क्राउडर


मन की कृतज्ञता एक उदार आत्मा द्वारा भी प्रदर्शित की जाती है।

परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। - 2 कुरिन्थियों 9:6-7

बाइबल पाठ: लूका 21:1-4
Luke 21:1 फिर उसने आंख उठा कर धनवानों को अपना अपना दान भण्‍डार में डालते देखा। 
Luke 21:2 और उसने एक कंगाल विधवा को भी उस में दो दमडिय़ां डालते देखा। 
Luke 21:3 तब उसने कहा; मैं तुम से सच कहता हूं कि इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़कर डाला है। 
Luke 21:4 क्योंकि उन सब ने अपनी अपनी बढ़ती में से दान में कुछ डाला है, परन्तु इस ने अपनी घटी में से अपनी सारी जीविका डाल दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 11-13
  • मरकुस 12:1-27



सोमवार, 9 मार्च 2015

प्रार्थना मित्र


   मैं अपनी सहेली एन्जी से कई महीनों के बाद मिली, हमने एक साथ बैठकर बातचीत करी, भोजन किया, फिर मुलाकात के अन्त में एन्जी ने अपने पर्स में से एक काग़ज़ निकाला जिस पर हमारी पिछली मुलाकातों में मेरे द्वारा प्रार्थना करने के लिए व्यक्त करे गए विषयों की सूची थी; वह उन बातों के लिए लगातार प्रार्थना कर रही थी। उसने मुझ से प्रत्येक विषय के बारे में पूछा, जानकारी ली कि कौन कौन से विषयों पर क्या क्या प्रगति हुई, किन विषयों के उत्तर मिल चुके हैं, किन के लिए प्रार्थना की आवश्यकता अभी बनी हुई है। इसके बाद मैंने भी उस से उसके प्रार्थना विषयों के बारे में ऐसी ही जानकारी ली, तब ही हमारी उस मुलाकात का अन्त हुआ। प्रार्थना करने वाले मित्रों का होना कितना उत्साहवर्धक होता है।

   प्रेरित पौलुस का भी उसके समय की मसीही विश्वासी मण्डलियों के साथ प्रार्थना का गहन संबंध था। पौलुस ने थिस्सलुनीके की मण्डली को लिखी अपने पत्री में लिखा कि वह उनके विश्वास, प्रेम तथा आशा के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करता है (1 थिस्सलुनीकियों 1:2-3); उन्हें देखने की लालसा रखता है और रात-दिन परमेश्वर से प्रार्थना करता है कि वह उनसे मिलने आ सके (3:10-11)। पौलुस उन के लिए प्रार्थना करता था कि, "...तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए" (पद 12) तथा यह कि उनके मन परमेश्वर के सम्मुख पवित्र एवं निर्दोष ठहरें (पद 13)। उनके लिए पौलुस की इन प्रार्थनाओं के बारे में जानकर, थिस्सलुनीके के मसीही विश्वासियों का मन अवश्य प्रफुल्लित एवं उत्साहित हुआ होगा। उनके लिए और भी उत्साहवर्धक बात रही होगी कि पौलुस स्वयं भी उनकी प्रार्थनाओं का अभिलाषी था, और उसने पत्री के अन्त में उन से निवेदन किया, "हे भाइयों, हमारे लिये प्रार्थना करो" (1 थिस्सलुनीकियों 5:25) क्योंकि पौलुस को परमेश्वर की उपस्थिति, सामर्थ तथा सहायता की आवश्यकता बनी रहती थी।

   प्रेमी परमेश्वर पिता, हम आपके बहुत धन्यवादी हैं कि आप चाहते हैं कि हम आप से वार्तालाप करते रहें, एक दुसरे को आपके सम्मुख स्मरण करते रहें, एक दुसरे के लिए प्रार्थना करते रहें। हम सभी को एक दुसरे के प्रार्थना मित्र बनाएं। - एनी सेटास


सर्वोत्तम मित्र प्रार्थना करने वाले मित्र होते हैं।

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो। और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूं जिस के लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूं। - इफिसीयों 6:18-19

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 3:6-13
1 Thessalonians 3:6 पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्हारे पास से हमारे यहां आकर तुम्हारे विश्वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्हें देखने की। 
1 Thessalonians 3:7 इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्हारे विश्वास से तुम्हारे विषय में शान्‍ति पाई। 
1 Thessalonians 3:8 क्योंकि अब यदि तुम प्रभु में स्थिर रहो तो हम जीवित हैं। 
1 Thessalonians 3:9 और जैसा आनन्द हमें तुम्हारे कारण अपने परमेश्वर के साम्हने है, उसके बदले तुम्हारे विषय में हम किस रीति से परमेश्वर का धन्यवाद करें? 
1 Thessalonians 3:10 हम रात दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्हारा मुंह देखें, और तुम्हारे विश्वास की घटी पूरी करें। 
1 Thessalonians 3:11 अब हमारा परमेश्वर और पिता आप ही और हमारा प्रभु यीशु, तुम्हारे यहां आने के लिये हमारी अगुवाई करे। 
1 Thessalonians 3:12 और प्रभु ऐसा करे, कि जैसा हम तुम से प्रेम रखते हैं; वैसा ही तुम्हारा प्रेम भी आपस में, और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए। 
1 Thessalonians 3:13 ताकि वह तुम्हारे मनों को ऐसा स्थिर करे, कि जब हमारा प्रभु यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ आए, तो वे हमारे परमेश्वर और पिता के साम्हने पवित्रता में निर्दोष ठहरें।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33



रविवार, 8 मार्च 2015

टीम


   ओकलैण्ड एथेलेटिक्स ने सन 2002 में एक बड़े ही अपरंपरागत तरीके से विजयी बेसबॉल टीम बनाई। उन्होंने 2001 के पश्चात अपनी टीम के तीन प्रमुख खिलाड़ियों को खो दिया था, और उनके पास अन्य जाने-माने खिलाड़ियों को टीम में लेने के लिए पर्याप्त धन की घटी थी। इसलिए ओकलैण्ड टीम के महाप्रबंधक, बिली बीन ने कुछ उपेक्षित आँकड़ों पर ध्यान किया और कुछ ऐसे कम ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों को एकत्रित किया जिन्हें अन्य टीमें या तो कम योग्यता वाले या फिर कम क्षमता वाले आँकते थे। ओकलैण्ड द्वारा जोड़-तोड़ करके बनाई गई यह टीम लगातार 20 गेम जीतती हुई अपने मण्डलीय खेलों में विजयी बनी तथा कुल 103 गेमों में विजयी रही!

   यह मुझे प्रभु यीशु द्वारा चुने गए चेलों की टीम की याद दिलाता है। उन चेलों की टीम में कोई विद्वान, ख्याति-प्राप्त या समाज के उच्च-वर्ग से संबंधित व्यक्ति नहीं था। प्रभु यीशु की टीम में थे गलील के रूखे अनपढ़ मछुवारे, एक उन्मादी व्यक्ति और लेवी (मत्ती) नाम का उपेक्षित चुंगी लेने वाला। इस टीम के इन लोगों के बारे में पढ़कर परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा लिखी बात स्मरण हो आती है: "हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे" (1 कुरिन्थियों 1:26-27)। परमेश्वर ने जगत द्वारा उपेक्षित परन्तु प्रभु यीशु के प्रति पूर्णतः समर्पित (यहूदा इस्करियोती को छोड़) इन व्यक्तियों को अपनी सामर्थ तथा ज्ञान से भरकर एक ऐसे अभियान के लिए प्रयोग किया जिसने सारे संसार को प्रभावित किया और हमेशा के लिए बदल डाला और आज भी यही कर रहा है।

   हम सब के लिए यहाँ एक महत्वपूर्ण सबक है: अकसर हम परिचित, प्रभावी, ख्याति-प्राप्त तथा समृद्ध लोगों को खोजते हैं और उनकी उपेक्षा करते हैं जो या तो कम हैसियत अथवा कुशलता रखते हैं, या जो किसी शारीरिक कमज़ोरी से ग्रसित हैं। लेकिन हमारे प्रभु ने उदाहरण द्वारा दिखा दिया कि समाज के उपेक्षित और कमज़ोर लोग भी उसके लिए उपयोगी हैं, वह उन्हें भी ऐसी सामर्थ से भर सकता है जो अलौकिक है, वह उनसे भी वह कार्य करवा सकता है जो संसार के सामर्थी और यशस्वी नहीं कर सकते।

   सांसारिक मापदण्डों और योग्यता परखने के पैमानों के आधार पर किसी को कभी कमतर नहीं आँकें। प्रभु यीशु के लिए सब समान हैं, वह सबसे प्रेम करता है, वह सबको सामर्थी बना सकता है, सबको अपनी महिमा के लिए प्रयोग कर सकता है। प्रभु यीशु का नज़रिया अपनाएं, सबको समान दृष्टि से देखें, सब को साथ लेकर प्रभु के लिए कार्य करें। - डेविड एग्नर


प्रभु यीशु की मण्डली में कोई महत्वहीन नहीं है।

क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। - रोमियों 12:3

बाइबल पाठ: लूका 5:27-35
Luke 5:27 और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेने वाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Luke 5:28 तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया। 
Luke 5:29 और लेवी ने अपने घर में उसके लिये बड़ी जेवनार की; और चुंगी लेने वालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी। 
Luke 5:30 और फरीसी और उन के शास्त्री उस के चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, कि तुम चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाते-पीते हो? 
Luke 5:31 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्तु बीमारों के लिये अवश्य है। 
Luke 5:32 मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं। 
Luke 5:33 और उन्होंने उस से कहा, यूहन्ना के चेले तो बराबर उपवास रखते और प्रार्थना किया करते हैं, और वैसे ही फरीसियों के भी, परन्तु तेरे चेले तो खाते पीते हैं! 
Luke 5:34 यीशु ने उन से कहा; क्या तुम बरातियों से जब तक दूल्हा उन के साथ रहे, उपवास करवा सकते हो? 
Luke 5:35 परन्तु वे दिन आएंगे, जिन में दूल्हा उन से अलग किया जाएगा, तब वे उन दिनों में उपवास करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18



शनिवार, 7 मार्च 2015

लालसा


   ग्रैण्ड रैपिड्स, मिशिगन में स्थित फ़्रेड्रिक मेइजर उद्यान में तितलियों के लिए एक विशेष कक्ष बनाया गया है जहाँ उनके स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक तापमान और नमी के वातावरण को वर्ष भर बनाए रखा जाता है, काँच से बनी छत से धूप तथा रौशनी आती रहती है, उनके लिए उपयुक्त भोजन उपलब्ध करवाया जाता है। उन तितलियों को बाहर कहीं जाने, भोजन ढ़ूँढ़ने, खतरे उठाने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्राकृतिक फूल, स्वच्छ वातावरण और उपयुक्त भोजन सब वहीं उस कक्ष में उनके लिए उपलब्ध करवाया गया है। लेकिन फिर भी कुछ तितलियाँ उस कक्ष की काँच की बनी छत के निकट मंडराती रहती हैं, उसपर बैठी रहती हैं; उस सुरक्षित और बहुतायत के कक्ष से बाहर निकलने की लालसा शायद उन्हें ऐसा करने को उकसाती है। मेरा मन होता है कि उन तितलियों से कहूँ, "क्या तुम को एहसास नहीं है कि जो कुछ तुम्हें चाहिए वह सब इस कक्ष में तुम्हारे लिए पहले से ही उपलब्ध करवाया गया है; यहाँ सुरक्षा है। बाहर ठंडा है, खतरे हैं और बाहर निकलने की लालसा के पूरे होने के कुछ ही समय में वहाँ तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।"

   मेरे लिए शायद यही सन्देश परमेश्वर की ओर से भी है - परमेश्वर ने मुझे अपने सुरक्षा और देख-रेख के बाड़े में बनाए रखा है; वह मेरी प्रत्येक आवश्यकता को जानता है, उसे पूरा करता है, लेकिन फिर भी मेरी नज़रें बाहर के संसार और संसार की बातों की ओर जाती रहती हैं। इसलिए मैं अपने आप से पूछती हूँ, क्या मैं उन बातों की लालसा करती रहती हूँ जो मेरे लिए हानिकारक हैं? क्या मैं अपनी शक्ति और सामर्थ उन बातों पर व्यय करती हूँ जिनकी ना तो मुझे आवश्यकता है और जो ना ही मेरे लिए उचित हैं? उसे नज़रन्दाज़ करके जो मुझे उपलब्ध है, उसे बेहतर मानकर तथा उसकी लालसा में जो मेरी पकड़ के बाहर है, क्या मैं परमेश्वर द्वारा बहुतायत से उपलब्ध करवाई गई आशीशों को महत्वहीन कर देती हूँ? क्या मैं अपने मसीही विश्वास को भरपूरी से जीने की बजाए, उस विश्वास की ज़िम्मेदारियों की सीमाओं को तोड़ने की लालसा में दिन बिताती हूँ?

   परमेश्वर अपने बहुतायत के खज़ानों से हमारी हर आवश्यकता को पूरा करता रहता है (फिलिप्पियों 4:19); इसलिए बजाए इसके कि हम अपना समय उन बातों की लालसाओं में व्यतीत करें जो हमें उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं, हम उन बातों के लिए जो परमेश्वर ने हमारे लिए उपलब्ध करवाई हैं, उस देख-रेख एवं सुरक्षा के लिए जो वह हमारे प्रति लगातार बनाए रखता है, हम उसके धन्यवादी हों तथा अपने मसीही विश्वास को अपने आशीषपूर्ण जीवन द्वारा प्रकट करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमारी आवश्यकताएं परमेश्वर के भण्डार को कभी अपर्याप्त नहीं जता सकतीं।

और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। - 2 कुरिन्थियों 9:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-20
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है। 
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। 
Philippians 4:20 हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52



शुक्रवार, 6 मार्च 2015

अनुग्रह और क्षमा


   जीवन कई बातों में मनोरंजन स्थलों पर पाई जाने वाली "बम्पर कारों" के समान होता है। उन कारों में आप यह जानते हुए बैठते हैं कि आपको टक्कर अवश्य लगेगी, बस यह नहीं पता कि किसके द्वारा और कितनी ज़ोर से लगेगी। जब किसी के द्वारा आपकी कार को टक्कर लगती है, तो फिर आप उसकी कार का पीछा करके उसे टक्कर मारने का प्रयास करते हैं, और वह भी उसकी दी हुई टक्कर से अधिक ज़ोर से!

   किसी मनोरंजन स्थल में, विशेष रीति से बनाई गई कारों में बैठकर ऐसा करना मनोरंजक हो सकता है, लेकिन वास्तविक जीवन में ऐसा करना बहुत हानिकारक होता है। यदि जीवन में कोई आपको टक्कर या ठोकर दे तो पलट कर उसे टक्कर या ठोकर देना समस्या का समाधान नहीं करता वरन बात को बढ़ाता ही है, और अन्ततः यह सभी के लिए हानिकारक होता है।

   प्रभु यीशु के पास ऐसे में अपनाने के लिए एक भिन्न तथा बेहतर कार्यनीति है - जो आपको टक्कर या ठोकर दें उन्हें क्षमा कर दो। प्रभु यीशु के चेले प्रेरित पतरस के समान हम भी प्रभु से पूछ सकते हैं कि हमारे द्वारा किसी को कितनी बार क्षमा करना उचित होगा? जो उत्तर प्रभु यीशु ने पतरस को दिया था, वही हमारे लिए भी लागू होता है; पतरस ने पूछा क्या सात बार क्षमा करना उचित होगा, तो प्रभु यीशु का उत्तर था, सात के सत्तर गुना बार (मत्ती 18:21-22)! दूसरे शब्दों में, जो प्रभु यीशु कहना चाह रहे थे वह था कि अनुग्रह तथा क्षमा की कोई सीमा नहीं है, हमें सदा ही अनुग्रह और क्षमा के भाव से बर्ताव करना चाहिए। इस संदर्भ में प्रभु यीशु ने एक नीतिकथा द्वारा समझाया कि अनुग्रह और क्षमा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारा विरोध करने वाला इसके योग्य है, वरन इसलिए अनुग्रह और क्षमा का बर्ताव बनाए रखना है क्योंकि परमेश्वर हमारे प्रति यही बर्ताव बनाए रखता है: "तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उस से कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से बिनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया। सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था?" (मत्ती 18:32-33)

   हम मसीही विश्वासी यह भली भांति जानते हैं कि परमेश्वर ने कैसे प्रभु यीशु द्वारा अनुग्रह में होकर हमें क्षमा किया है, अपने साथ हमारा मेल-मिलाप किया है, हमारे साथ वह प्रेम किया है जिसके हम कभी योग्य नहीं थे। क्योंकि यह बहुतायत का अनुग्रह और क्षमा हमें सेंत-मेंत प्रदान किया गया है, इसलिए हम वे लोग बनें जो बुरे व्यवहार के बदले में वैसा ही बुरा व्यवहार नहीं वरन अनुग्रह और क्षमा का बर्ताव लौटा कर दें। - जो स्टोवैल


हमारे द्वारा दुसरों के प्रति क्षमा के व्यवहार द्वारा परमेश्वर का अनुग्रह प्रगट होता है।

और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। - इफिसियों 4:32

बाइबल पाठ: मत्ती 18:21-35
Matthew 18:21 तब पतरस ने पास आकर, उस से कहा, हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूं, क्या सात बार तक? 
Matthew 18:22 यीशु ने उस से कहा, मैं तुझ से यह नहीं कहता, कि सात बार, वरन सात बार के सत्तर गुने तक। 
Matthew 18:23 इसलिये स्वर्ग का राज्य उस राजा के समान है, जिसने अपने दासों से लेखा लेना चाहा। 
Matthew 18:24 जब वह लेखा लेने लगा, तो एक जन उसके साम्हने लाया गया जो दस हजार तोड़े धारता था। 
Matthew 18:25 जब कि चुकाने को उसके पास कुछ न था, तो उसके स्‍वामी ने कहा, कि यह और इस की पत्‍नी और लड़के बाले और जो कुछ इस का है सब बेचा जाए, और वह कर्ज चुका दिया जाए। 
Matthew 18:26 इस पर उस दास ने गिरकर उसे प्रणाम किया, और कहा; हे स्‍वामी, धीरज धर, मैं सब कुछ भर दूंगा। 
Matthew 18:27 तब उस दास के स्‍वामी ने तरस खाकर उसे छोड़ दिया, और उसका धार क्षमा किया। 
Matthew 18:28 परन्तु जब वह दास बाहर निकला, तो उसके संगी दासों में से एक उसको मिला, जो उसके सौ दीनार धारता था; उसने उसे पकड़कर उसका गला घोंटा, और कहा; जो कुछ तू धारता है भर दे। 
Matthew 18:29 इस पर उसका संगी दास गिरकर, उस से बिनती करने लगा; कि धीरज धर मैं सब भर दूंगा। 
Matthew 18:30 उसने न माना, परन्तु जा कर उसे बन्‍दीगृह में डाल दिया; कि जब तक कर्ज को भर न दे, तब तक वहीं रहे। 
Matthew 18:31 उसके संगी दास यह जो हुआ था देखकर बहुत उदास हुए, और जा कर अपने स्‍वामी को पूरा हाल बता दिया। 
Matthew 18:32 तब उसके स्‍वामी ने उसको बुलाकर उस से कहा, हे दुष्‍ट दास, तू ने जो मुझ से बिनती की, तो मैं ने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया। 
Matthew 18:33 सो जैसा मैं ने तुझ पर दया की, वैसे ही क्या तुझे भी अपने संगी दास पर दया करना नहीं चाहिए था? 
Matthew 18:34 और उसके स्‍वामी ने क्रोध में आकर उसे दण्‍ड देने वालों के हाथ में सौंप दिया, कि जब तक वह सब कर्जा भर न दे, तब तक उन के हाथ में रहे। 
Matthew 18:35 इसी प्रकार यदि तुम में से हर एक अपने भाई को मन से क्षमा न करेगा, तो मेरा पिता जो स्वर्ग में है, तुम से भी वैसा ही करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31



गुरुवार, 5 मार्च 2015

अवकाश


   एक साल, क्रिसमस से ठीक पहले, एक मित्र - किम को पता चला कि उसे ल्युकीमीया (रक्त का कैंसर) है तथा उसे शीघ्रातिशीघ्र इलाज के लिए अस्पताल में भरती होना होगा। इससे कुछ ही सप्ताह पहले किम ने अपने मित्रों को बताया था कि एक प्रेमी परिवार, एक आरामदेह घर और एक नए पोते के आने के कारण वह अपने आप को कितना आशीशित तथा संतुष्ट अनुभव करती है। इलाज के लिए अस्पताल मे भरती होते समय किम ने प्रभु यीशु से प्रार्थना करी कि वे उसके निकट रहें और उसे अपनी निकटता का आभास करवाते रहें।

   इसके पश्चात सात महीने तक किम का इलाज चलता रहा जिस में से कुछ समय उसे अकेले में बिताना पड़ा; किम अब उन समयों को "विवशता का अवकाश" कहती है। किम बताती है कि उन "अवकाश" के दिनों में उसने अपने व्यस्त जीवन की गति को मध्यम करना, मनन करना और परमेश्वर की भलाई, प्रेम और सिद्ध योजना में विश्राम करना सीखा - बिना इस बात की परवाह किए कि वह पुनः स्वस्थ होने पाएगी अथवा नहीं।

   अपनी प्रजा इस्त्राएल से किए गए परमेश्वर के वायदों में से एक किम के लिए उन दिनों में व्यक्तिगत वायदा बन गया: "तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा" (सपन्याह 3:17)।

   एक ऐसी यात्रा के बाद जिसने, किम के अनुसार, उसके जीवन को बेहतर बना दिया, अब किम का कैंसर थमा हुआ है। वह अपने व्यस्त जीवन में वापस लौट आई है, लेकिन वह अकसर थम कर उस "विवशता के अवकाश" के समयों में सीखे गए सबकों को याद करती रहती है।

   यह हमारे लिए भी कितना महत्वपूर्ण है कि हम अपने व्यस्त जीवन में, चाहे हम भली परिस्थितियों में हों या चुनौती भरी में, अवकाश का कुछ समय निकालकर परमेश्वर के साथ बिताएं, उसके निकट आएं और उसकी वाणी को सुनें तथा अपने जीवनों को पुनः उसके हाथों में समपूर्ण समर्पण के साथ छोड़ दें। - डेविड मैक्कैसलैंड


लोग ही परमेश्वर के हृदय के निकट होते हैं।

और यहोवा तेरी भलाई के लिये तेरे सब कामों में, और तेरी सन्तान, और पशुओं के बच्चों, और भूमि की उपज में तेरी बढ़ती करेगा; क्योंकि यहोवा फिर तेरे ऊपर भलाई के लिये वैसा ही आनन्द करेगा, जैसा उसने तेरे पूर्वजों के ऊपर किया था; - व्यवस्थाविवरण 30:9

बाइबल पाठ: सपन्याह 3:14-20
Zephaniah 3:14 हे सिय्योन, ऊंचे स्वर से गा; हे इस्राएल, जयजयकार कर! हे यरूशलेम अपने सम्पूर्ण मन से आनन्द कर, और प्रसन्न हो! 
Zephaniah 3:15 यहोवा ने तेरा दण्ड दूर कर दिया और तेरा शत्रु भी दूर किया गया है। इस्राएल का राजा यहोवा तेरे बीच में है, इसलिये तू फिर विपत्ति न भोगेगी। 
Zephaniah 3:16 उस समय यरूशलेम से यह कहा जाएगा, हे सिय्योन मत डर, तेरे हाथ ढीले न पड़ने पाएं। 
Zephaniah 3:17 तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है; वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुपका रहेगा; फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा।
Zephaniah 3:18 जो लोग नियत पर्वो में सम्मिलित न होने के कारण खेदित रहते हैं, उन को मैं इकट्ठा करूंगा, क्योंकि वे तेरे हैं; और उसकी नामधराई उन को बोझ जान पड़ती है। 
Zephaniah 3:19 उस समय मैं उन सभों से जो तुझे दु:ख देते हैं, उचित बर्ताव करूंगा। और मैं लंगड़ों को चंगा करूंगा, और बरबस निकाले हुओं को इकट्ठा करूंगा, और जिनकी लज्जा की चर्चा सारी पृथ्वी पर फैली है, उनकी प्रशंसा और कीर्ति सब कहीं फैलाऊंगा। 
Zephaniah 3:20 उसी समय मैं तुम्हें ले जाऊंगा, और उसी समय मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा; और जब मैं तुम्हारे साम्हने तुम्हारे बंधुओं को लौटा लाऊंगा, तब पृथ्वी की सारी जातियों के बीच में तुम्हारी कीर्ति और प्रशंसा फैला दूंगा, यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50