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मंगलवार, 16 जून 2015

लालची


   प्रति वर्ष मैं हम्मिंग-बर्ड पक्षियों के भोजन का बर्तन बाहर लगाती हूँ, और वे छोटे पक्षी वहाँ आकर भोजन लेने के लिए आपस में लड़ने लगते हैं। उस बर्तन पर बैठने के लिए चार स्थान हैं और उन चारों स्थानों से उनको उनका प्रीय भोजन - शीरा, एक ही स्त्रोत से भरपूरी से प्राप्त हो सकता है। फिर भी वे पक्षी, अन्य खाली स्थानों को छोड़कर, वहीं बैठना चाहते हैं जहाँ से कोई अन्य पक्षी बैठकर भोजन ले रहा होता है। यह जानते हुए कि उनके बैठने प्रत्येक स्थान से उन्हें उसी एक स्थान से भरपूरी से भोजन मिलेगा, मुझे उनके लालच को देखकर अचरज होता है।

   लेकिन फिर मैं यह भी सोचती हूँ, "मेरे लिए उन पक्षियों का लालच देखना इतना सरल और अपना लालच देखना इतना कठिन क्यों है?" अकसर मेरी लालसा रहती है कि मैं परमेश्वर के निकट उस स्थान पर बैठूँ जहाँ पर कोई अन्य बैठा होता है, जबकि मैं जानती हूँ कि हर भली वस्तु मुझे परमेश्वर से ही प्राप्त होती है, और ना उसके भण्डार में और ना ही मेरे प्रति उसके प्रेम तथा देख-रेख में कोई घटी है; वह मेरी प्रत्येक आवश्यकता को भली भांति पूरा करता है। क्योंकि हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर हमारे शत्रुओं के सामने भी मेज़ सजा सकता है (भजन 23:5), तो फिर हमें इस बात की चिंता करने की क्या आवश्यकता है कि किसी अन्य के पास वह क्यों है जिसकी लालसा मैं करता हूँ?

   परमेश्वर हमें सब भले कार्यों के लिए हर आवश्यक वस्तु भरपूरी से दे सकता है (2 कुरिन्थियों 9:8)। जब हम परमेश्वर के लिए उसके अनुग्रह के सेवक (1 पतरस 4:10) होने की अपनी बुलाहट को पहचान लेंगे, तब हम किसी अन्य के स्थान को लेकर परस्पर द्वेष रखने और लड़ने की बजाए, उस सेवकाई को पूरा करने के लिए जो स्थान परमेश्वर ने हमें दिया है, उसी के लिए कृतज्ञ एवं धन्यवादी हो जाएंगे, और उसके अनुग्रह तथा प्रेम को उसकी इच्छा के अनुसार दूसरों के पास पहुँचाने वाले बन जाएंगे। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


दूसरों की ओर देखने से अप्रसन्नता, परन्तु परमेश्वर की ओर देखने से संतुष्टि आती है।

और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। - फिलिप्पियों 4:19

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 9:6-15
2 Corinthians 9:6 परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। 
2 Corinthians 9:7 हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। 
2 Corinthians 9:8 और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। 
2 Corinthians 9:9 जैसा लिखा है, उसने बिथराया, उसने कंगालों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा। 
2 Corinthians 9:10 सो जो बोने वाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्‍त करेगा; और तुम्हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा। 
2 Corinthians 9:11 कि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ। 
2 Corinthians 9:12 क्योंकि इस सेवा के पूरा करने से, न केवल पवित्र लोगों की घटियां पूरी होती हैं, परन्तु लोगों की ओर से परमेश्वर का बहुत धन्यवाद होता है। 
2 Corinthians 9:13 क्योंकि इस सेवा से प्रमाण ले कर वे परमेश्वर की महिमा प्रगट करते हैं, कि तुम मसीह के सुसमाचार को मान कर उसके आधीन रहते हो, और उन की, और सब की सहायता करने में उदारता प्रगट करते रहते हो। 
2 Corinthians 9:14 ओर वे तुम्हारे लिये प्रार्थना करते हैं; और इसलिये कि तुम पर परमेश्वर का बड़ा ही अनुग्रह है, तुम्हारी लालसा करते रहते हैं। 
2 Corinthians 9:15 परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47



सोमवार, 15 जून 2015

महिमा


   जेसन अपने शहर से बाहर एक अन्य स्थान पर था, और वहाँ के स्थानीय चर्च में आरधना के लिए गया। आरधना आरंभ होने से कुछ ही देर पहले जेसन से आग्रह किया गया कि वह परमेश्वर की महिमा के लिए कोई स्तुति गीत आरधना में गाए। जेसन ने सहर्ष वह आग्रह स्वीकार किया और एक जाना-पहचाना स्तुति गीत, To God Be the Glory गाने का निर्णय किया, क्योंकि वह गीत उसके लिए विशेष अर्थ रखता था। उसने चर्च भवन के तहखाने में जाकर उस गीत का अभ्यास किया और फिर आरधना के दौरान जब उसे बुलाया गया तो उसने बिना किसी संगीत वाद्य के अकेले ही वह गीत गाया।

   कुछ सप्ताह के बाद जेसन को पता चला कि उस दिन उसके द्वारा गाए गए गीत को लेकर उस चर्च के कुछ लोग अप्रसन्न हुए क्योंकि उन्हें लगा कि वह परमेश्वर कि स्तुति के लिए नहीं वरन अपनी संगीत प्रतिभा दिखाने के लिए अकेले ही गा रहा था। क्योंकि वे लोग जेसन को जानते नहीं थे, इसलिए उन्होंने यह गलत अन्दाज़ा लगाया कि जेसन परमेश्वर को महिमा देने के लिए नहीं वरन चर्च के लोगों को प्रभावित करने के लिए गीत गा रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड से हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अलग अलग गुण वाले लोगों को मन्दिर में सेवा और आरधना के लिए नियुक्त किया - निर्माण कार्य में लगे कारीगर से लेकर आरधना की अगुवाई करने और संचालित करने वाले लोग, उनके गुणों और योग्यताओं के आधार पर नियुक्त किए गए (1 इतिहास 15:22; 25:1, 7)।

   प्रभु परमेश्वर ने हम सब को भिन्न भिन्न गुण, योग्यताएं और आत्मिक वरदान दिए हैं जिन्हें हमें उसकी महिमा के लिए उपयोग करना है (कुलुस्सियों 3:23-24)। जब हम उन गुणों, योग्यताओं और वरदानों का उपयोग परमेश्वर की महिमा के उद्देश्य से करते हैं ना कि अपनी प्रतिभा को दिखाने के उद्देश्य से, तो फिर हमें अन्य लोगों के विचारों और समझ को लेकर चिंतित रहने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर ने हमारे लिए अपने सर्वोत्तम को, अर्थात अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को दे दिया; अब उसे अपना सर्वोत्तम अर्पित करके हम उसकी महिमा करते हैं। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर की जो सेवकाई हम अपने पूरे मन से करते हैं, वही हमारी सर्वोत्तम सेवा होती है।

और बसलेल और ओहोलीआब और सब बुद्धिमान जिन को यहोवा ने ऐसी बुद्धि और समझ दी हो, कि वे यहोवा की सारी आज्ञाओं के अनुसार पवित्रस्थान की सेवकाई के लिये सब प्रकार का काम करना जानें, वे सब यह काम करें। -  निर्गमन 36:1

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 25:1-8
1 Chronicles 25:1 फिर दाऊद और सेनापतियों ने आसाप, हेमान और यदूतून के कितने पुत्रों को सेवकाई के लिये अलग किया कि वे वीणा, सारंगी और झांझ बजा बजाकर नबूवत करें। और इस सेवकाई के काम करने वाले मनुष्यों की गिनती यह थी: 
1 Chronicles 25:2 अर्थात आसाप के पुत्रों में से तो जक्कूर, योसेप, नतन्याह और अशरेला, आसाप के ये पुत्र आसाप ही की आज्ञा में थे, जो राजा की आज्ञा के अनुसार नबूवत करता था। 
1 Chronicles 25:3 फिर यदूतून के पुत्रों में से गदल्याह, सरीयशायाह, हसब्याह, मत्तित्याह, ये ही छ: अपने पिता यदूतून की आज्ञा में हो कर जो यहोवा का धन्यवाद और स्तुति कर कर के नबूवत करता था, वीणा बजाते थे। 
1 Chronicles 25:4 और हेमान के पुत्रों में से, मुक्किय्याह, मत्तन्याह, लज्जीएल, शबूएल, यरीमोत, हनन्याह, हनानी, एलीआता, गिद्दलती, रोममतीएजेर, योशबकाशा, मल्लोती, होतीर और महजीओत। 
1 Chronicles 25:5 परमेश्वर की प्रतिज्ञानुकूल जो उसका नाम बढ़ाने की थी, ये सब हेमान के पुत्र थे जो राजा का दशीं था; क्योंकि परमेश्वर ने हेमान को चौदह बेटे और तीन बेटियां दीं थीं। 
1 Chronicles 25:6 ये सब यहोवा के भवन में गाने के लिये अपने अपने पिता के आधीन रह कर, परमेश्वर के भवन, की सेवकाई में झांझ, सारंगी और वीणा बजाते थे। और आसाप, यदूतून और हेमान राजा के आधीन रहते थे। 
1 Chronicles 25:7 इन सभों की गिनती भाइयों समेत जो यहोवा के गीत सीखे हुए और सब प्रकार से निपुण थे, दो सौ अठासी थी। 
1 Chronicles 25:8 और उन्होंने क्या बड़ा, क्या छोटा, क्या गुरू, क्या चेला, अपनी अपनी बारी के लिये चिट्ठी डाली।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21



रविवार, 14 जून 2015

मित्र


   कुछ समय पहले मुझे एक प्रमुख सड़क मार्ग के किनारे लगे विज्ञापन पटल के बारे में पता चला जिस पर लिखा गया था: "परमेश्वर तो एक कालपनिक मित्र है - वास्तविकता चुनें। यही हम सब के लिए भला रहेगा।" प्रकट था कि यह कथन मसीही विश्वासियों को बच्चों के समान दर्शा रहा था जो अपनी कलपनाओं में कालपनिक मित्रों एवं सहयोगियों से प्रसन्न रहते हैं, ाइसे मित्र और सहयोगी जो वस्तविकता में उनकी कभी कोई सहायता नहीं कर सकते। किंतु क्या परमेश्वर वास्तव में एक कालपनिक मित्र है?

   थोड़ा विचार और अध्ययन करें तो उपलब्ध प्रमाण परमेश्वर के वास्तविक होने के पक्ष में हैं। यह पूरी सृष्टि और उसके सभी कार्य दिखाते हैं कि यह सब एक योजनाबद्ध तरीके से संचालित और कार्यान्वित हो रहा है, जो दिखाता है कि इस सृष्टि और उसके कार्य तथा संचालन के पीछे एक योजना बनाने और योजनबद्ध तरीके से कार्य करने वाला है (रोमियों 1:18-20)। प्रत्येक मनुष्य का विवेक इस बात की गवाही देता है कि हमारे अन्दर नैतिकता तथा सही-गलत की पहचान करने की क्षमता डाली गई है (रोमियों 2:14-15) जो किसी भी अन्य पशु-पक्षी में देखने को नहीं मिलती। संगीत और कला के विभिन्न रूपों में जो रचनात्मक योग्यता हम मनुष्य दिखाते हैं, वह हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की रचनात्मक क्षमता का एक छोटा सा अंश है (निर्गमन 35:31-32)। प्रभु यीशु ने परमेश्वर को मानव रूप में प्रकट किया (इब्रानियों 1:1-4) और मसीही विश्वासियों के हृदय में परमेश्वर के पवित्र आत्मा के साथ होने वाली सहभागिता परमेश्वर की वास्तविकता का प्रमाण है (गलतियों 5:22-23)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि ऐसे समय और लोग होंगे जो परमेश्वर की वास्तविकता से इंकार करेंगे (2 पतरस 3:4-6)। साथ ही बाइबल परमेश्वर के एक मित्र के जीवन की गवाही और परमेश्वर के साथ उसके अनुभवों को भी बयान करती है: "और पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हुआ, कि इब्राहीम ने परमेश्वर की प्रतीति की, और यह उसके लिये धर्म गिना गया, और वह परमेश्वर का मित्र कहलाया" (याकूब 2:23)।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को आपका सच्चा और अनन्तकाल का मित्र तथा उद्धारकर्ता बनने के लिए भेजा है (यूहन्ना 15:15); क्या आपने उसकी मित्रता के इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है? - डेनिस फिशर


इस पृथ्वी का सबसे प्रीय और निकटतम मानव मित्र प्रभु यीशु की छाया मात्र से बढ़कर नहीं है। - चैम्बर्स

अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:15

बाइबल पाठ: रोमियों 1:18-25
Romans 1:18 परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं। 
Romans 1:19 इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। 
Romans 1:20 क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। 
Romans 1:21 इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। 
Romans 1:22 वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। 
Romans 1:23 और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला। 
Romans 1:24 इस कारण परमेश्वर ने उन्हें उन के मन के अभिलाषाओं के अुनसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें। 
Romans 1:25 क्योंकि उन्होंने परमेश्वर की सच्चाई को बदलकर झूठ बना डाला, और सृष्टि की उपासना और सेवा की, न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 9-10
  • प्रेरितों 1


शनिवार, 13 जून 2015

सक्रीय संबंध


   एक प्रातः मैंने पाया कि मेरा इंटरनैट कनेक्शन काम नहीं कर रहा था। मैंने अपने इंटरनैट सेवा देने वाले से बात करी तो उसने आकर जाँच करी और बताया कि मेरे कंप्यूटर को इंटरनैट से जोड़ने वाला यंत्र - मोडेम खराब हो गया है और उसे बदलना पड़ेगा, किंतु नया मोडेम उपलब्ध होने और लगाए जाने में एक दिन का समय लगेगा; अर्थात मैं एक दिन तक इंटरनैट से जुड़ा नहीं रहूँगा। यह जान कर मुझे थोड़ी घबराहट हुई, और मन में विचार आया, "बिना इंटरनैट के एक दिन! ऐसे मैं कैसे रह पाऊँगा?"

   फिर मेरे मन में एक और प्रश्न उठा, "क्या मैं इसी प्रकार घबरा जाऊँगा यदि परमेश्वर के साथ मेरा संबंध एक दिन के लिए बाधित हो जाए?" हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध को सक्रीय रखते हैं परमेश्वर के वचन बाइबल के साथ समय बिताने से, प्रार्थना में परमेश्वर के साथ संगति रखने से, उसके वचन और निर्देशों का पालन करने से (याकूब 1:22-24)।

   भजन 119 के लेखक ने परमेश्वर के साथ अविरल सक्रीय संबंध बनाए रखने के महत्व को पहचाना और परमेश्वर से आग्रह किया कि वह उसे अपने नियम सिखाए और उन नियमों को समझने की समझ-बूझ दे (पद 33-34)। फिर लेखक ने इच्छा जताई कि वह उन नियमों का पूरे मन से पालन करेगा (पद 34), उनके मार्गदर्शन में चलेगा (पद 35), और अपनी आँखों को व्यर्थ बातों को देखने से रोके रखेगा (पद 37)। परमेश्वर के वचन पर मनन करने और उसे अपने जीवन में लागू करने के द्वारा भजनकार परमेश्वर के साथ अविरल सक्रीय संबंध बना कर रख सका।

   परमेश्वर ने हमें अपना वचन इसीलिए दिया है जिससे कि वह हमारे पथ के लिए दीपक और मार्ग के लिए उजियाला हो सके और उसके साथ हमारा सक्रीय संबंध अविरल बना रहे। - सी. पी. हिया

अपनी आत्मिक बैटरी भरी रखने के लिए उसे आत्मिक स्त्रोत से जोड़े रखें।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105 

बाइबल पाठ: भजन 119:33-40
Psalms 119:33 हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा। 
Psalms 119:34 मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा। 
Psalms 119:35 अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं। 
Psalms 119:36 मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। 
Psalms 119:37 मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला। 
Psalms 119:38 तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर। 
Psalms 119:39 जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं। 
Psalms 119:40 देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 6-8
  • यूहन्ना 21


शुक्रवार, 12 जून 2015

अधूरा कार्य


   लिओ प्लास ने 99 वर्ष की आयु में ईस्टर्न ओरेगन विश्वविद्यालय से कॉलेज स्नातक होने का अपना डिपलोमा प्राप्त किया। लिओ ने 1930 के दशक में पढ़ाई छोड़कर काम करना आरंभ किया था जिससे वह कुछ कमाई कर सके। अब 79 वर्ष बाद उस अधूरी छूटी हुई पढ़ाई को उन्होंने पूरा किया और कॉलेज से स्नातक होने की उपाधि प्राप्त करके अपने जीवन का वह महत्वपूर्ण अधूरा कार्य पूरा किया।

   हम में से अनेक जन लिओ से सीख ले सकते हैं। संभवतः हमारे जीवनों में भी कुछ अधूरे कार्य हो सकते हैं, जैसे कि किसी से क्षमा माँगना, या उससे भी बढ़कर कुछ ऐसे आवश्यक आत्मिक निर्णय लेना, जिन्हें हम टालते आ रहे हैं। प्रभु यीशु के साथ जो दो डाकू क्रूस पर चढ़ाए गए थे, उनमें से एक ने निर्णय लेने की इस अनिवार्यता को पहचाना। वह जीवन के अन्तिम पलों में था जब उसे यह बोध हुआ कि प्रभु यीशु कौन है, तथा उसने अपने बारे में पहचाना कि वह पापी है और निष्पाप प्रभु यीशु अभी उसके पाप क्षमा करने में सक्षम है; उसने विश्वास किया कि वह प्रभु यीशु के साथ स्वर्ग में जा सकता है। जीवन की अन्तिम साँसों में उसने प्रभु यीशु से विनती करी, "...हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना" (लूका 23:42), और तुरंत ही प्रभु यीशु ने उसे आश्वासन दिया, "...मैं तुझ से सच कहता हूं; कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा" (लूका 23:43)। निर्णय के उस एक पल में उस डाकू के लिए वह अधूरा कार्य पूरा हो गया और वह परमेश्वर के पास स्वर्ग में अनन्तकाल तक रहने के योग्य बन गया।

   हमारा सृष्टिकर्ता परमेश्वर पिता नहीं चाहता कि हम में से एक भी जन अपने पापों में नाश हो। इसलिए परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में विश्वास लाने और पापों की क्षमा माँगने के द्वारा सारे संसार के सभी लोगों के लिए, वे चाहे किसी भी उम्र, स्थान, जाति, रंग, आदि के क्यों ना हों उद्धार और परमेश्वर की सन्तान बनने का गौरव, इस पृथ्वी पर उनकी अन्तिम श्वास तक सेंत-मेंत उपलब्ध है। यदि आपने परमेश्वर के इस प्रस्ताव को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अभी आप के लिए अवसर है, इस अधूरे कार्य को पूरा कर लीजिए, "क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)।

   यह निर्णय लेने में देर नहीं कीजिए; इस अति महत्वपूर्ण और अभी तक अधूरे कार्य को समय रहते पूरा कर लीजिए; क्या जानें कि बाद में अवसर हो या नहीं, आप निर्णय लेने लायक हालत में हों या नहीं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


इस पृथ्वी पर मिले उद्धार का अर्थ है स्वर्ग में अनन्तकाल के लिए सुरक्षित भविषय।

प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। - 2 पतरस 3:9 

बाइबल पाठ: लूका 23:32-43
Luke 23:32 वे और दो मनुष्यों को भी जो कुकर्मी थे उसके साथ घात करने को ले चले।
Luke 23:33 जब वे उस जगह जिसे खोपड़ी कहते हैं पहुंचे, तो उन्होंने वहां उसे और उन कुकिर्मयों को भी एक को दाहिनी और और दूसरे को बाईं और क्रूसों पर चढ़ाया। 
Luke 23:34 तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं और उन्होंने चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए। 
Luke 23:35 लोग खड़े खड़े देख रहे थे, और सरदार भी ठट्ठा कर कर के कहते थे, कि इस ने औरों को बचाया, यदि यह परमेश्वर का मसीह है, और उसका चुना हुआ है, तो अपने आप को बचा ले। 
Luke 23:36 सिपाही भी पास आकर और सिरका देकर उसका ठट्ठा कर के कहते थे। 
Luke 23:37 यदि तू यहूदियों का राजा है, तो अपने आप को बचा। 
Luke 23:38 और उसके ऊपर एक पत्र भी लगा था, कि यह यहूदियों का राजा है। 
Luke 23:39 जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्‍दा कर के कहा; क्या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा। 
Luke 23:40 इस पर दूसरे ने उसे डांटकर कहा, क्या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता? तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है। 
Luke 23:41 और हम तो न्यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया। 
Luke 23:42 तब उसने कहा; हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना। 
Luke 23:43 उसने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं; कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 3-5
  • यूहन्ना 20



गुरुवार, 11 जून 2015

स्वाद लेकर


   मेरी पत्नि मार्टी को धीरे धीरे भोजन के स्वाद का आनन्द लेते हुए खाना अच्छा लगता है। क्योंकि सामन्यतः भोजन करते हुए मैं मार्टी से बहुत पहले ही अपना भोजन समप्त कर लेता हूँ इसलिए वह अकसर मुझ से कहती है, "जो, तुम बहुत जल्दबाज़ी में खाते हो! धीमे होकर और भोजन का स्वाद लेते हुए खाओ।"

   मैं सोचता हूँ, हम में से कितने ऐसे हैं जो परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी परमेश्वर की बातों का भरपूर स्वाद लिए बिना उसको जल्दबाज़ी के साथ पढ़ते हैं। भजनकार ने लिखा, "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं" (भजन 119:103)। बाइबल की यह बात मुझे अच्छी प्रतीत होती है!

   परमेश्वर के वचन में भरपूरी से उपलब्ध इस पौष्टिक आत्मिक भोजन से क्या लाभ हैं? परमेश्वर के वचन से लिया गया यह दैनिक भोजन हमारे कमज़ोर मन को चिंता, घमंड, भय और प्रलोभन के दुषप्रभावों से बचाए रखता है और जयवंत जीवन मार्ग पर अग्रसर रखता है। यह वचन हमें समझ-बूझ और बुद्धिमता प्रदान करता है (पद 98-100) और हमारे कदमों को बुरे मार्गों पर चलने से रोके रहता है (पद 101)। जैसे जब शारीरिक भोजन हमारे पाचन तंत्र से होकर निकलता है तो उसके पौष्टिक तत्व शरीर के सभी अंगों तक पहुँचते हैं और उन्हें विकसित करते हैं, उसी प्रकार जब परमेश्वर का वचन हमारे अन्दर पचाया जाता है तो वह हमारे मन, भावनाओं और इच्छा-शक्ति को स्वस्थ रीति से पोषित तथा विकसित करता है।

   जल्दबाज़ी में परमेश्वर के वचन को लेकर बाहर संसार में भागने की बजाए, उसे ऐसे समय और स्थान में पढ़ना चाहिए जब हम उसके साथ समय बिता सकें, उस में होकर हम परमेश्वर के साथ संगति कर सकें। परमेश्वर के वचन बाइबल को स्वाद लेकर, समय लगाकर नियमित रूप से पढ़ें; यह आपके जीवन के लिए बहुत लाभदायक रहेगा। - जो स्टोवैल


आत्मिक विकास के लिए आवश्यक सभी तत्वों को बाइबल भरपूरी से उपलब्ध करती है।

यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। - भजन 19:9-11

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। 
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं। 
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है। 
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं। 
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं। 
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है। 
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! 
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-2
  • यूहन्ना 19:23-42



बुधवार, 10 जून 2015

डटे रहें


   सितंबर 1961 में एक हाई स्कूल के छात्र हार्वे कार्लसन ने, जो अमेरिका में न्यूयॉर्क के ब्रु्कलिन क्षेत्र का निवासी था, इंगलैण्ड में रहने वाले विश्व-विख्यात लेखक सी. एस. लूइस को एक पत्र लिखा। हार्वे ने लूइस की पुस्तक The Screwtape Letters पढ़ी थी, और उसी के संदर्भ में उसने लेखक से पूछा, "आप के द्वारा इस पुस्तक के लिखे जाने के दौरान क्या शैतान ने आपको किसी रीति से परेशान किया; यदि किया तो आपने इस बारे में क्या किया?"

   तीन सप्ताह के बाद लूइस का उत्तर आया जिसमें उन्होंने स्वीकारा कि उन्हें अब तक बहुत से प्रलोभनों का सामना करना पड़ रहा है। उन बातों का सामना करने के विषय में उन्होंने कहा, "संभवतः जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात है वह है डटे रहना और आगे बढ़ते रहना; चाहे कितनी ही बार प्रलभनों का सामना करना पड़े या उनमें गिर भी जाएं तो भी निराश हुए बिना, परमेश्वर से क्षमा माँगना, उठकर पुनः खड़ा होना और आगे कदम बढ़ाना।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना अपनी पत्रियों में यह बात बार बार दोहराता है और पाठकों को प्रोत्साहित करता है कि परीक्षाओं और प्रलोभनों के समयों में दृढ़ता से स्थिर खड़े रहें: "हे बालकों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि उसके नाम से तुम्हारे पाप क्षमा हुए। हे पितरों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि जो आदि से है, तुम उसे जानते हो: हे जवानों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है: हे लड़कों मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम पिता को जान गए हो" (1 यूहन्ना 2:12-13)।

   हमारी उम्र अथवा अनुभव जो भी हो, हम सभी मसीही विश्वासी सदा ही शत्रु शैतान के साथ एक आत्मिक युद्ध की स्थिति में रहते हैं, इस युद्ध में हमें कमज़ोर करने के लिए शैतान बारंबार हमारे सामने सांसारिक लालसाओं, उपलब्धियों और ऐश्वर्य में पड़ने के प्रलोभन और परीक्षाएं लाता है। शैतान की इन चालबाज़ियों पर विजयी होने का मार्ग है परमेश्वर के वचन की बात को सदा स्मरण रखना और अपने अन्दर बसाए रहना कि, "संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा" (1 यूहन्ना 2:17)।

   यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो शैतान आपकी भी परीक्षा अवश्य लेता रहेगा; घबराएं नहीं, परमेश्वर और उसके वचन से लिपटे रहें तथा परमेश्वर के मार्ग पर डटे रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


परीक्षाओं और प्रलभनों पर विजयी होने के लिए मसीह यीशु को अपने ऊपर प्रभुत्व करने दें।

हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। - 1 यूहन्ना 2:1

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:9-17
1 John 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है। 
1 John 2:10 जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1 John 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।
1 John 2:12 हे बालकों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि उसके नाम से तुम्हारे पाप क्षमा हुए। 
1 John 2:13 हे पितरों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि जो आदि से है, तुम उसे जानते हो: हे जवानों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है: हे लड़कों मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम पिता को जान गए हो। 
1 John 2:14 हे पितरों, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि जो आदि से है तुम उसे जान गए हो: हे जवानो, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम बलवन्‍त हो, और परमेश्वर का वचन तुम में बना रहता है, और तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है। 
1 John 2:15 तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। 
1 John 2:16 क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। 
1 John 2:17 और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 34-36
  • यूहन्ना 19:1-22