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शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

चिंता


   मेरी मित्र मार्सिया ने, जो बधिरों के जमाइका क्रिश्चियन स्कूल की निर्देशिका है, हाल ही में परिस्थितियों के प्रति एक महतवपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाया। अपने कार्य के विषय में भेजे गए समाचार के पत्र में उसने "एक धन्य आरंभ" शीर्षक के अन्तर्गत एक लेख लिखा, जिसमें उसने बताया कि 7 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि उन्होंने नए वर्ष का आरंभ एक "अधिकाई" से किया। क्या थी वह "अधिकाई"? क्या बैंक में हज़ार डॉलर की रकम? नहीं। क्या साल भर के लिए स्कूल की आवश्यकताओं की आपूर्ति? नहीं। वह "अधिकाई" केवल एक माह की भोजन सामग्री अलमारी में विद्यमान होना थी।

   जब 30 भूखे बच्चों को, बहुत कम पैसों के सहारे, भोजन उपलब्ध करवाना आपकी ज़िम्मेदारी हो तो भोजन सामग्री की यह मात्रा बड़ी बात है। मार्सिया ने अपने लेख में परमेश्वर के वचन बाइबल में से 1 इतिहास 16:34 को भी लिखा: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है।"

   साल-ब-साल मार्सिया परमेश्वर पर भरोसा रखती है कि वह उसके स्कूल के बच्चों एवं कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। उसके पास कभी अधिक नहीं होता - वह चाहे पानी या भोजन सामग्री या स्कूल की आवश्यकता की कोई वस्तु हो। लेकिन जो भी परमेश्वर उसे भेजता है, उसके लिए वह परमेश्वर की धन्यवादी रहती है, और साथ ही विश्वासयोग्य भी रहती है कि आते समय में भी परमेश्वर उसकी आवश्यकताओं को पूरा करता रहेगा।

   नए साल के आरंभ में क्या हमारे पास मार्सिया के समान विश्वास है कि परमेश्वर हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा? यह विश्वास रखना हमारे प्रभु के आश्वासन को मानना है कि हम ना तो अपने जीवन और ना कल की कोई चिंता करें क्योंकि परमेश्वर हमारी चिंता करता है, हमारे लिए उपलब्ध करवाता है (मत्ती 6:25, 34)। - डेव ब्रैनन


चिंता कल के दुःख को तो समाप्त नहीं करती, परन्तु आज की सामर्थ को अवश्य समाप्त कर देती है। - कोरी टेन बूम

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42


गुरुवार, 14 जनवरी 2016

नींद और आराम


   कभी कभी हम चाहे जितना प्रयत्न कर लें, अपने तकिए को सही करें या उसे दबाएं-पीटें, करवटें बदलें लेकिन हमें नींद नहीं आती। एक अखबार में छपे लेख ने अच्छी नींद सोने के कुछ सुझाव देने के बाद अन्त में कहा कि अच्छी नींद प्राप्त करने का कोई "सही उपाय" नहीं है।

   नींद ना आने के कई कारण हो सकते हैं, और उन कारणों में से अनेक के बारे में हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन कई बार ना सो पाने का कारण होते हैं हमारी चिन्ताएं, व्याकुलता या दोषी मन। ऐसे में परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 4 में दिए गए दाऊद के उदाहरण से हम सहायता पा सकते हैं। भजन के आरंभ में ही दाऊद ने परमेश्वर से उसकी प्रार्थना सुनने और उस पर करुणा करने की याचना करी (पद 1)। दाऊद ने अपने आप को भी यह स्मरण कराया कि जब भी वह परमेश्वर को पुकारता है, वह उसकी सुनता है (पद 3)। दाऊद हमें प्रोत्साहित करता है: "कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो" (भजन 4:4)। अपने मनों को जब हम परमेश्वर की भलाईओं, करुणा और प्रेम पर लगाते हैं, जो उसने हमारे और हमारे प्रीय जनों के प्रति तथा संसार के प्रति करी हैं, तो यह हमारे विश्वास को बढ़ाता है (पद 5)।

   परमेश्वर हमारी सहायता करना चाहता है जिससे हम अपनी चिन्ताएं और उनके समाधान उस पर छोड़ कर अपना विश्वास उस पर बनाए रखें कि वह हमारे लिए मार्ग निकालेगा। जब हम ऐसा करेंगे तो परमेश्वर के आनन्द से हमारे हृदय भर जाएंगे और हम दाऊद के समान पाएंगे कि "मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है" (भजन 4:8)। - डेव एगनर


चाहे हम सोने ना भी पाएं, तो भी परमेश्वर हमें विश्राम दे सकता है।

तुम जो सवेरे उठते और देर कर के विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद दान करता है। - भजन 127:2

बाइबल पाठ: भजन 4
Psalms 4:1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
Psalms 4:2 हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे? 
Psalms 4:3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा।
Psalms 4:4 कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो। 
Psalms 4:5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
Psalms 4:6 बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका! 
Psalms 4:7 तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था। 
Psalms 4:8 मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


बुधवार, 13 जनवरी 2016

विश्वासयोग्य


   अप्रैल 1937 में मुसुलोनी की आक्रमणकारी सेना ने इथियोपिया के वालामो क्षेत्र में काम कर रहे सभी मसीही मिशनरी सेवकों को छोड़कर जाने पर विवश कर दिया। वे अपने पीछे 48 जन जिन्होंने मसीह यीशु को अपना उद्धाकर्ता माना था छोड़कर गए। उन पीछे छोड़े गए लोगों के पास उनके आत्मिक पोषण के लिए केवल मरकुस रचित सुसमाचार ही था और उन में से बहुत थोड़े ही थे जिन्हें पढ़ना आता था। लेकिन 4 वर्ष पश्चात जब वे मसीही मिशनरी उस इलाके में लौट कर आए तो ना केवल वह चर्च बचा हुआ था, वरन अब उसके 10,000 सदस्य थे!

   जब प्रेरित पौलुस को थिस्सलुनीके छोड़ने को विवश किया गया (प्रेरितों 17:1-10) उसकी लालसा रही कि वह उन थोड़े से मसीही विश्वासियों के हाल-चाल को जाने जिन्हें वह पीछे छोड़ कर आया था (1 थिस्स्लुनिकीयों 2:17)। बाद में तिमुथियुस थिस्स्लुनीके की मसीही मण्डली से मिला और पौलुस के पास उनके विश्वास और प्रेम का समाचार लाया (1 थिस्स्लुनिकीयों 3:6)। तब तक वे लोग अन्य मसीही विश्वासियों और मकिदूनिया तथा अखया के क्षेत्र के लोगों के लिए उदाहरण और मसीही विश्वास के प्रचार का माध्यम बन चुके थे (1 थिस्स्लुनिकीयों 1:8)।

   पौलुस ने कभी अपनी सेवकाई में लोगों की संख्या की किसी वृद्धि के लिए कोई श्रेय नहीं लिया, और ना ही उसने यह श्रेय किसी अन्य मनुष्य को दिया, वरन उसने इसका सारा श्रेय परमेश्वर को ही दिया। उसने अपनी सेवकाई से मसीही विश्वासियों की बढ़ोतरी के संबंध में लिखा: "मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया" (1 कुरिन्थियों 3:6)।

   कठिन परिस्थितियाँ हमारे अच्छे से अच्छे इरादों को भी बाधित कर सकती हैं, मित्रों और संबंधियों को एक दूसरे से पृथक कर सकती हैं, लेकिन परमेश्वर के इरादों को कभी बाधित नहीं कर सकतीं, उसकी योजनाओं को पनपने और बढ़ने से कभी रोक नहीं सकतीं। परमेश्वर अपनी मण्डली को बना और बढ़ा रहा है; हमें केवल विश्वासयोग्य रहकर, परिणामों की चिन्ता किए बगैर, उसका आज्ञाकारी बने रहना है और उसे अपना कार्य करने का अवसर प्रदान करते रहना है। - सी. पी. हिया


...मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। - प्रभु यीशु (मत्ती 16:18)

क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। - 1 थिस्सलुनीकियों 1:8 

बाइबल पाठ: 1 थिस्स्लुनिकीयों 2:17-3:7
1 Thessalonians 2:17 हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं वरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुंह देखने के लिये और भी अधिक यत्‍न किया। 
1 Thessalonians 2:18 इसलिये हम ने (अर्थात मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्तु शैतान हमें रोके रहा। 
1 Thessalonians 2:19 भला हमारी आशा, या आनन्द या बड़ाई का मुकुट क्या है? क्या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे? 
1 Thessalonians 2:20 हमारी बड़ाई और आनन्द तुम ही हो।
1 Thessalonians 3:1 इसलिये जब हम से और भी न रहा गया, तो हम ने यह ठहराया कि एथेन्‍स में अकेले रह जाएं। 
1 Thessalonians 3:2 और हम ने तीमुथियुस को जो मसीह के सुसमाचार में हमारा भाई, और परमेश्वर का सेवक है, इसलिये भेजा, कि वह तुम्हें स्थिर करे; और तुम्हारे विश्वास के विषय में तुम्हें समझाए। 
1 Thessalonians 3:3 कि कोई इन क्‍लेशों के कारण डगमगा न जाए; क्योंकि तुम आप जानते हो, कि हम इन ही के लिये ठहराए गए हैं। 
1 Thessalonians 3:4 क्योंकि पहिले भी, जब हम तुम्हारे यहां थे, तो तुम से कहा करते थे, कि हमें क्‍लेश उठाने पड़ेंगे, और ऐसा ही हुआ है, और तुम जानते भी हो। 
1 Thessalonians 3:5 इस कारण जब मुझ से और न रहा गया, तो तुम्हारे विश्वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करने वाले ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो गया हो। 
1 Thessalonians 3:6 पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्हारे पास से हमारे यहां आकर तुम्हारे विश्वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्हें देखने की। 
1 Thessalonians 3:7 इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्हारे विश्वास से तुम्हारे विषय में शान्‍ति पाई।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38


मंगलवार, 12 जनवरी 2016

संबंध


   हमारे घर के आहते का एक ओर का बाड़ा कमज़ोर होकर टूट रहा था, और मैंने तथा मेरे पति कार्ल ने निर्णय लिया कि इससे पहले कि वह बाड़ा गिर जाए, उसे हटा देना चाहिए। क्योंकि उसे हटाना कोई कठिन कार्य नहीं था इसलिए हमने एक दोपहर को उसे आसानी से हटा भी दिया। इसके कुछ सप्ताह के बाद, कार्ल जब हमारे बाग़ में काम कर रहे थे तो पड़ौस की एक महिला, जो अपने कुत्ते को टहलाने के लिए निकली थी, कार्ल से बात करने को रुक गई और बोली: "आपका आहता बिना उस बाड़े के बहुत अच्छा लग रहा है; वैसे भी, मैं बाड़ों में विश्वास नहीं रखती। मुझे लोगों के बीच बिना किसी बाधा के संबंध होना, उनका एकजुट होकर एक समूह में रहना मुझे अच्छा लगता है।"

   यद्यपि बाड़े लगाने के कुछ वाजिब कारण होते हैं, लेकिन हमें अपने पड़ौसियों से अलग करके रखना उन कारणों में से एक नहीं है, इसलिए अपनी उस पड़ौसन के दृष्टिकोण को समझना मेरे लिए कठिन नहीं था। जिस चर्च में मैं जाती हूँ उसमें कुछ समूह बने हुए हैं जो सप्ताह में एक बार एकत्रित होते और मिलते हैं, एक दुसरे से संबंध बनाने और बढ़ाने के लिए, और परमेश्वर के साथ अपनी जीवन यात्रा में एक दूसरे को प्रोत्साहित करने के लिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रथम चर्च के लोग प्रतिदिन मन्दिर में एकत्रित हुआ करते थे (प्रेरितों 2:44, 46)। इस प्रकार इकठ्ठे होकर संगति रखने और प्रार्थना करने से वे अपने उद्देश्यों और मनसा में एकजुट हो गए; इसका एक और लाभ यह हुआ कि जब भी उन पर परेशानी आती तो उसे झेलने में सहायता के लिए उनके पास साथी होते थे, जैसा बाइबल के सभोपदेशक 4:9-10 में लिखा है।

   मसीही विश्वासियों का अन्य विश्वासियों के समूह के साथ संबंध बनाए रखना उनकी मसीही जीवन यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है; परस्पर संबंध के द्वारा एक दूसरे से दिखाया गया प्रेम, परमेश्वर के द्वारा हमें किए जाने वाले प्रेम को दर्शाता है। - ऐनी सेटास


हम सभी मसीही विश्वासियों को मसीही संगति की आवश्यकता है जिससे हम एक दूसरे को उठाए रखें और मसीही जीवन यात्रा में आगे बढ़ते रहें।

एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो। - सभोपदेशक 4:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:41-47
Acts 2:41 सो जिन्हों ने उसका वचन ग्रहण किया उन्होंने बपतिस्मा लिया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्यों के लगभग उन में मिल गए। 
Acts 2:42 और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। 
Acts 2:43 और सब लोगों पर भय छा गया, और बहुत से अद्भुत काम और चिन्ह प्रेरितों के द्वारा प्रगट होते थे। 
Acts 2:44 और वे सब विश्वास करने वाले इकट्ठे रहते थे, और उन की सब वस्तुएं साझे की थीं। 
Acts 2:45 और वे अपनी अपनी सम्पत्ति और सामान बेच बेचकर जैसी जिस की आवश्यकता होती थी बांट दिया करते थे। 
Acts 2:46 और वे प्रति दिन एक मन हो कर मन्दिर में इकट्ठे होते थे, और घर घर रोटी तोड़ते हुए आनन्द और मन की सीधाई से भोजन किया करते थे। 
Acts 2:47 और परमेश्वर की स्‍तुति करते थे, और सब लोग उन से प्रसन्न थे: और जो उद्धार पाते थे, उन को प्रभु प्रति दिन उन में मिला देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17


सोमवार, 11 जनवरी 2016

परिस्थिति


   प्रथम विश्व-युद्ध के समय, मॉरने की प्रथम लड़ाई में, फ्रांस के लेफ्टिनेंट जनरल फर्डिनेन्ड फॉक ने एक सूचना भेजी: "आक्रमण कर रही मेरी सेना का मध्य भाग कमज़ोर पड़ रहा है और दाहिने भाग को पीछे हटना पड़ रहा है। स्थिति उत्कृष्ट है; मैं आक्रमण में लगा हूँ!" कठिन परिस्थितियों में भी आशा बनाए रखने की उनकी प्रवृति के कारण ही उनकी सेना विजयी हो सकी।

   कभी-कभी जीवन की लड़ाईयों में हमें लगता है मानो जीवन के हर मोर्चे पर हम हार रहे हैं - पारिवारिक कलह, व्यवसाय में हानि, स्वास्थ्य में गड़बड़ी इत्यादि जीवन के प्रति हमारे नज़रिए में निराशाएं ला सकती हैं। लेकिन हर मसीही विश्वासी, अपने अन्त-फल के कारण, सदा ही इस निषकर्ष पर बना रह सकता है कि "स्थिति उत्कृष्ट है"।

   प्रेरित पौलुस को ही देखिए; जब उसे सुसमाचार प्रचार के लिए कैदखाने में डाल दिया गया, तौ भी उसका रवैया आशावादी ही रहा। कैदखाने से फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री के आरंभ ही में पौलुस ने लिखा: "हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है" (फिलिप्पियों 1:12)।

   पौलुस ने अपनी कैद और कैदखाने को सुसमाचार प्रचार करने का एक नया मंच बना लिया जहाँ से वह रोमी सेना के उन लोगों को सुसमाचार दे सका जो वहाँ तैनात थे, और उनमें से कई मसीही विश्वासी हो गए। साथ ही उसकी इस परिस्थिति और इस परिस्थिति के प्रति उसकी प्रतिक्रीया से अन्य मसीही विश्वासी भी साहस प्राप्त कर सके और सुसमाचार प्रचार में और निर्भीक होकर लग सके (पद 13-14)।

   हमारी परिस्थितियों, परेशानियों और परीक्षाओं को, वे चाहे कष्टदायक ही क्यों ना हों, परमेश्वर हमारी भलाई के लिए (रोमियों 8:28) और अपने राज्य की बढ़ोतरी के लिए प्रयोग कर सकता है। हमारी हर परिस्थिति उसे आदर और महिमा देने का एक और कारण है। - डेनिस फिशर


क्लेष, विजयी होने के लिए परमेश्वर का दिया एक मार्ग हो सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:3-14
Philippians 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं। 
Philippians 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं। 
Philippians 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। 
Philippians 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। 
Philippians 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो। 
Philippians 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं। 
Philippians 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। 
Philippians 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ। 
Philippians 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे। 
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-12
  • मत्ती 4


रविवार, 10 जनवरी 2016

धैर्य


   सन 2006 में 1000 व्यसक लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि कतार में खड़े रहने पर एक व्यक्ति औसतन 17 मिनिट में धैर्य खो देता है। यह भी पाया गया कि यदि फोन पर उन्हें प्रतीक्षा करने के लिए कहा जाए तो वे औसतन 9 मिनिट में अधीर हो जाते हैं। अधीर हो जाना सभी मनुष्यों का एक सामान्य गुण है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब की लिखी पत्री उन मसीही विश्वासियों को लिखी गई थी जो प्रभु यीशु में अपने विश्वास के कारण संघर्षों का सामना कर रहे थे और इन संघर्षों के कारण प्रभु के पुनःआगमन को लेकर अधीर हो चले थे (याकूब 5:7)। वे शोषण और दुःखों से होकर निकल रहे थे, और याकूब ने उन्हें समझाया कि वे अधीर ना हों परन्तु अपने धैर्य को बनाए रखें। उन्हें कष्टों का सामना करने में धीरज दिखाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए याकूब ने उन से कहा कि वे अपने मसीही विश्वास में दृढ़ बने रहें और प्रभु के लिए त्याग करने से ना घबराएं क्योंकि प्रभु का आना निकट है और वह आकर सभी अन्याय और अनुचित को सही कर देगा: "तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है" (याकूब 5:8)।

   याकूब ने उन्हें उस किसान के समान धैर्य रखने को कहा जो वर्षा और फसल के लिए धैर्य के साथ प्रतीक्षा करता है (पद 7)। साथ ही उसने उन विश्वासियों को पुराने समय के भविष्यद्वक्ताओं का और कुलप्ति अय्युब का भी उदाहरण स्मरण करवाया जो हर परिस्थिति में परमेश्वर पर अपने विश्वास में दृढ़ डटा रहा (पद 10-11)। याकूब ने उन्हें उभारा, क्योंकि उनके मसीही विश्वास की दौड़ की समापन रेखा निकट ही है इसलिए अब वे अपना धैर्य ना खोएं।

   आज जब हम अपने मसीही विश्वास के कारण दुःखों की कुठाली में परखे जाते हैं, तो परमेश्वर चाहता है कि हम अपने मसीही विश्वास को थामे रहें और उसके प्रेम, और करुणा पर भरोसा बनाए रखें, उसके समय की प्रतीक्षा करें (पद 11)। - मार्विन विलियम्स


महान धीरज का मार्ग महान परीक्षाओं से होकर निकलता है।

धन्य हो तुम, जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुम से बैर करेंगे, और तुम्हें निकाल देंगे, और तुम्हारी निन्‍दा करेंगे, और तुम्हारा नाम बुरा जानकर काट देंगे। उस दिन आनन्‍दित हो कर उछलना, क्योंकि देखो, तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है: उन के बाप-दादे भविष्यद्वक्ताओं के साथ भी वैसा ही किया करते थे। - लूका 6:22-23

बाइबल पाठ: याकूब 5:7-11
James 5:7 सो हे भाइयों, प्रभु के आगमन तक धीरज धरो, देखो, गृहस्थ पृथ्वी के बहुमूल्य फल की आशा रखता हुआ प्रथम और अन्‍तिम वर्षा होने तक धीरज धरता है। 
James 5:8 तुम भी धीरज धरो, और अपने हृदय को दृढ़ करो, क्योंकि प्रभु का शुभागमन निकट है। 
James 5:9 हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। 
James 5:10 हे भाइयो, जिन भविष्यद्वक्ताओं ने प्रभु के नाम से बातें की, उन्हें दुख उठाने और धीरज धरने का एक आदर्श समझो। 
James 5:11 देखो, हम धीरज धरने वालों को धन्य कहते हैं: तुम ने अय्यूब के धीरज के विषय में तो सुना ही है, और प्रभु की ओर से जो उसका प्रतिफल हुआ उसे भी जान लिया है, जिस से प्रभु की अत्यन्‍त करूणा और दया प्रगट होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17


शनिवार, 9 जनवरी 2016

ऊपर और नीचे


   प्रभु यीशु के पृथ्वी के जीवन के समय में रोमी साम्राज्य था और रोमियों की धार्मिक आस्थाएं प्रचलित थीं। उन आस्थाओं में से एक थी कि जो ऊपर स्वर्ग में हो रहा होता है, उसका प्रभाव नीचे पृथ्वी पर पड़ता है। यदि युनानी देवराज ज़्यूस क्रोधित हैं तो पृथ्वी पर वज्रपात होगा। उन दिनों माना जाने वाला सिद्धांत था, "जैसा ऊपर, वैसा नीचे"।

   लेकिन प्रभु यीशु इस सिद्धांत का उलट दिखाते और सिखाते थे: "जैसा नीचे, वैसा ऊपर"। नीचे पृथ्वी पर एक मसीही विश्वासी प्रार्थना करता है और ऊपर स्वर्ग से उत्तर आता है; नीचे एक पापी पश्चाताप करता है, ऊपर स्वर्ग में आनन्द मनाया जाता है; नीचे परमेश्वर का कार्य पूरा किया जाता है, ऊपर परमेश्वर महिमान्वित होता है; नीचे एक मसीही विश्वासी अनाज्ञाकारी होता है, ऊपर परमेश्वर शोकित होता है।

   मैं इन सब बातों को जानता और मानता हूँ, लेकिन फिर भी उन्हें बार बार भूल जाता हूँ। मैं भूल जाता हूँ कि परमेश्वर के सामने मेरी प्रार्थनाओं का महत्व है। मैं भूल जाता हूँ कि जो चुनाव मैं करता हूं वे सृष्टि के प्रभु परमेश्वर को प्रसन्न अथवा शोकित करती हैं। मैं भूल जाता हूँ कि मुझे अपने पड़ौसियों और साथियों को उनके अनन्त गन्तव्य के विषय बताना और सचेत करना है।

   परमेश्वर की क्षमा और प्रेम का जो सुसमाचार प्रभु यीशु संसार में लेकर आए थे, हमें उसे संसार के सभी लोगों तक पहुँचाना है। यही जिम्मेदारी प्रभु ने अपने स्वर्गारोहण के समय अपने चेलों को सौंपी थी (मत्ती 28:18-20)। हम जो मसीह यीशु के अनुयायी हैं, उसके  पृथ्वी पर आने और देहधारी होने का कारण और उसकी सेवा को आगे बढ़ाने वाले लोग हैं, उसके गवाह हैं (लूका 24:48)। पृथ्वी पर के अपने समय के अन्तिम दिनों में प्रभु ने अपने चेलों से वायदा किया था कि वह उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा, वह ऊपर से अपनी पवित्र आत्मा नीचे उनके साथ रहने के लिए भेजेगा (यूहन्ना 14:16-18)। ऊपर से मिली पवित्र आत्मा की यह सामर्थ और सहायता आज नीचे हमें पार्थिव जीवनों को प्रभावित करने, और उन जीवनों को अनन्तकाल के लिए ऊपर परमेश्वर के साथ रहना समझाने वाला बनाती है। - फिलिप यैन्सी


आप हमारे सामने स्वर्ग पर उठा लिए गए, हम शोकित होकर पीछे मुड़े और पाया कि आप हमारे हृदयों में बस गए हैं। - ऑगस्टीन

और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। - यूहन्ना 14:16-18

बाइबल पाठ: लूका 24:44-53
Luke 24:44 फिर उसने उन से कहा, ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्‍तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों। 
Luke 24:45 तब उसने पवित्र शास्त्र बूझने के लिये उन की समझ खोल दी। 
Luke 24:46 और उन से कहा, यों लिखा है; कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। 
Luke 24:47 और यरूशलेम से ले कर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। 
Luke 24:48 तुम इन सब बातें के गवाह हो। 
Luke 24:49 और देखो, जिस की प्रतिज्ञा मेरे पिता ने की है, मैं उसको तुम पर उतारूंगा और जब तक स्वर्ग से सामर्थ न पाओ, तब तक तुम इसी नगर में ठहरे रहो।
Luke 24:50 तब वह उन्हें बैतनिय्याह तक बाहर ले गया, और अपने हाथ उठा कर उन्हें आशीष दी। 
Luke 24:51 और उन्हें आशीष देते हुए वह उन से अलग हो गया और स्वर्ग से उठा लिया गया। 
Luke 24:52 और वे उसको दण्‍डवत कर के बड़े आनन्द से यरूशलेम को लौट गए। 
Luke 24:53 और लगातार मन्दिर में उपस्थित हो कर परमेश्वर की स्‍तुति किया करते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 23-24
  • मत्ती 7