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शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

सृष्टि


   मुझे प्रकृति को निहारना और प्रकृति के सृष्टिकर्ता की आराधना करना अच्छा लगता है, लेकिन कभी-कभी मैं अपने आप को प्रकृति में अत्याधिक रुचि दिखाने की दोषी महसूस करती हूँ। मुझे लगता है कि प्रकृति में मेरी रुचि और उसे निहारना कहीं अनुचित तो नहीं है? फिर मुझे स्मरण हो आता है कि हमारे प्रभु यीशु और उसके अनुयायियों ने प्रकृति का उपयोग शिक्षा देने के लिए किया है। उदाहरणस्वरूप, लोगों को अपनी आवश्यकताओं के लिए चिंतित होने की बजाए परमेश्वर पर भरोसा रखना सिखाने के लिए प्रभु यीशु ने साधारण से जंगली सोसन के फूलों का उपयोग किया। प्रभु ने अपने चेलों से कहा, "जंगली सोसनों पर ध्यान करो" और उन्हें स्मरण करवाया कि ये फूल कोई भी परिश्रम नहीं करते, फिर भी उनकी सुन्दरता देखते ही बनती है। प्रभु ने निष्कर्ष दिया कि यदि परमेश्वर थोड़े ही समय रहने वाले उन जंगली फूलों का इतना ध्यान रखता है, उन्हें वैभव देता है, तो अवश्य ही वह हमारे लिए इससे कहीं बढ़कर क्यों ना करेगा? (मत्ती 6:28-34)

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अन्य भाग भी हमें सिखाते हैं कि परमेश्वर अपनी सृष्टि में होकर भी अपने आप को हम मनुष्यों पर प्रकट करता है:
  •    दाऊद ने लिखा, "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है" (भजन 19:1-2)।
  •    आसाप ने कहा, "और स्वर्ग उसके धर्मी होने का प्रचार करेगा क्योंकि परमेश्वर तो आप ही न्यायी है" (भजन 50:6)।
  •    पौलुस ने बताया, "क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं" (रोमियों 1:20)।


   परमेश्वर हम से इतना प्रेम करता है, और इतना चाहता है कि हम उसे जानें, कि जहाँ-जहाँ हमारी दृष्टि जा सकती है, वहाँ-वहाँ सृष्टि में उसने अपने बारे में प्रमाण रख दिए हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर की सृष्टि और प्रकृति उसके बारे में अनेक पाठ हमें पढ़ाती है।

हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है। - भजन 104:24

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56


शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

प्रेम


   नेतृत्व पर लिखी गई पुस्तकें अकसर सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों की सूची में होती हैं। ये पुस्तकें अधिकांशतः सामर्थी और प्रभावशाली अगुवा बनने के तरीके बताती हैं। किंतु हेनरी नौवेन द्वारा लिखी पुस्तक Name of Jesus: Reflections on Christian Leadership एक अलग ही दृष्टिकोण से लिखी गई है। इस पुस्तक के लेखक एक विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफैसर हैं और उन्होंने अनेक वर्षों तक मानसिक तौर पर अपूर्ण विकसित व्यसकों के समाज में सेवा करी है। अपनी पुस्तक में वे कहते हैं, "प्रश्न ये नहीं हैं कि - कितने लोग आपको गंभीरता से लेते हैं? इससे आपको कितनी उपलब्धि प्राप्त हो जाएगी? क्या आप कोई परिणाम दिखाने पाएंगे? वरन प्रश्न यह है कि क्या आप प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं?...अकेलेपन और निराशा से भरे हमारे संसार में, ऐसे लोगों की बहुत आवश्यकता है जो परमेश्वर के हृदय को जानते हैं; उस हृदय को जो क्षमा करता है, जो औरों की परवाह करता है, जो पहल करके तथा आगे बढ़कर लोगों को स्वास्थ्य देता है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के अनुयायी प्रेरित यूहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा, "जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा" (1 यूहन्ना 4:9-10)।

   हेनरी नौवेन ने आगे लिखा कि "आने वाले समय के मसीही अगुवे वे ही होने पाएंगे जो परमेश्वर के हृदय को वास्तव में जानते होंगे; उस हृदय को जो प्रभु यीशु में सदेह होकर हमारे बीच में आया।" प्रभु यीशु में ही हम परमेश्वर के असीम, निस्वार्थ, बिना किसी शर्त पर आधारित प्रेम को जानने और अनुभव करने पाते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में होता है तब ही हमारे हृदय औरों के लिए खुलते हैं।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - यूहन्ना 1:14

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-10
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29


गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

विश्राम


   हमारा पालतु कुत्ता कभी-कभी इतना उत्साहित और उत्तेजित हो जाता है कि उस उत्तेजना से उसे मिर्गी का सा दौरा पड़ जाता है। ऐसा होने से बचाए रखने के लिए हमें उसे शान्त करते रहना पड़ता है। हम उसे सहलाते हैं, शान्तिदायक आवाज़ में उससे बातें करते हैं और उससे लेट जाने को कहते हैं। परन्तु जैसे ही वह हमसे "लेट जाओ" सुनता है, वह तुरंत नज़रें चुराना और दुःखी होने के हाव-भाव दिखाना आरंभ कर देता है; और अन्ततः बड़े नाटकीय ढंग से यह दिखाते हुए कि वह हमारे कहे को करने के लिए मजबूर है, फर्श पर लेट जाता है।

   कभी कभी हम मनुष्यों को भी शान्त होकर लेट जाने की आवश्यकता होती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 23 में हम पाते हैं कि हमारा अच्छा चरवाहा, हमारा परमेश्वर हमें हरी-हरी चराईयों में बैठाता है और सुखदाई जल के झरनों के पास ले जाता है (भजन 23:2-3)। वह जानता है कि हमें जिस शान्ति और विश्राम की आवश्यकता है वह हमें उसकी उन चराईयों और झरनों में आने से ही मिल सकेगा, चाहे हम स्वयं अपनी इस आवश्यकता का आभास ना भी कर सकें।

   हमारे शरीर नियमित विश्राम लेने के लिए बनाए गए हैं। स्वयं परमेश्वर ने भी सृष्टि की रचना करके सातवें दिन विश्राम किया (उत्पत्ति 2:2-3; निर्गमन 20:9-11)। प्रभु यीशु भी जानते थे कि लोगों की भीड़ की सेवकाई का भी समय है और विश्राम करने का भी समय है; अपनी अपनी जगह दोनों ही की आवश्यकता है। प्रभु यीशु ने सेवकाई से लौटे अपने चेलों से कहा: "...तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था" (मरकुस 6:31)। जब हम विश्राम लेते हैं तो हमारे शरीर और मस्तिषक तरोताज़ा होते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियों पर पुनःकेन्द्रित भी हो सकते हैं। जब हम अपने सारे समय को किसी ना किसी कार्य से भरते रहते हैं, चाहे वह भला, उपयुक्त और आवश्यक कार्य ही क्यों ना हों, तो हमारा ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए परमेश्वर को हमें विश्राम में लेटा देना पड़ता है।

   हमारे सृष्टिकर्ता द्वारा, जो हमारी आवश्यकताओं को भली-भांति जानता है, विश्राम हमें दी गई एक भली भेंट है। उसका धन्यवाद करें कि वह कभी-कभी हमें विश्राम के लिए अपनी संगति की हरी चराईयों में लेटा देता है। - सिंडी हैस कैस्पर


यदि हम कार्य से अलग होकर विश्राम नहीं करेंगे, तो हम कार्य करने लायक ही ना रहकर बिखर जाएंगे। - हैवनर

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। - भजन 23:2-3

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:8-11
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43


बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

रणनीति


   ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखे चीनी उपन्यास Romance of the Three Kingdoms में, लेखक ल्यू ग्वँज़ौंग ने "खाली किला" रणनीति, अर्थात शत्रु को छलावा देने के लिए विपरीत मनोविज्ञान के प्रयोग के बारे में बताया है। जब वेई साम्राज्य के 150,000 सैनिकों के साथ उनका सेनापति ज़िंग शहर पहुँचा, जहाँ 2,500 से भी कम सैनिक थे, तो उन्होंने नगर के द्वार को खुला हुआ और वहाँ के सुप्रसिद्ध युद्ध रणनीतिकार ज़ू लियांग को अपने दो बच्चों के साथ बैठे संगीत वाद्य बजाते हुए पाया। ज़ू लियांग के इस बेफिक्र अन्दाज़ को देखकर वेई साम्राज्य का सेनापति घबरा गया, और यह समझकर कि वे किसी भारी षड़यंत्र का शिकार होने वाले हैं, उसने अपने सैनिकों को तुरंत वापस लौट चलने का आदेश दे दिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी ऐसी ही एक रणनीति का उल्लेख है। न्यायियों 7 में परमेश्वर ने गिदोन के 300 आदमियों, घड़ों, तुरहीयों और मशालों का उपयोग टिड्डियों के समान बहुतेरे मिद्यानी सैनिकों और गिनती से परे उनके ऊँटों के विरुद्ध किया। क्या इस्त्राएल ऐसे भारी शत्रु को हरा सकता था, जबकि उनके पास ना तो सैनिक थे और ना ही युद्ध के लिए हथियार? चाहे इस्त्राएल के पास लड़ाई के लिए उपयुक्त समझा जाने वाला कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके पास वह एकमात्र था जिस के बाद फिर और किसी की कोई आवश्यकता नहीं थी - परमेश्वर की प्रतिज्ञा: "तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं" (न्यायियों 7:7)। और परिणाम - इस्त्राएल की विजय!

   क्या आपके जीवन में कोई कठिन चुनौती है जो आपको परेशान कर रही है? प्रभु परमेश्वर ने कहा है, "तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिये कोई भी काम कठिन है?" (यर्मियाह 32:26-27)। परमेश्वर पर रखे गए विश्वास से बेहतर कोई रणनीति नहीं है; अपने विश्वास को बनाए रखें और परमेश्वर को अपने समय तथा विधि से कार्य कर लेने दें; परिणाम अद्भुत होंगे। - पो फ़ैंग चिया


परमेश्वर के साथ सब कुछ संभव है।

किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे। - भजन 20:7

बाइबल पाठ: न्यायियों 7:1-8
Judges 7:1 तब गिदोन जो यरूब्बाल भी कहलाता है और सब लोग जो उसके संग थे सवेरे उठे, और हरोद नाम सोते के पास अपने डेरे खड़े किए; और मिद्यानियों की छावनी उनकी उत्तरी ओर मोरे नाम पहाड़ी के पास तराई में पड़ी थी।
Judges 7:2 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, जो लोग तेरे संग हैं वे इतने हैं कि मैं मिद्यानियों को उनके हाथ नहीं कर सकता, नहीं तो इस्राएल यह कहकर मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई मारने लगे, कि हम अपने ही भुजबल के द्वारा बचे हैं। 
Judges 7:3 इसलिये तू जा कर लोगों में यह प्रचार कर के सुना दे, कि जो कोई डर के मारे थरथराता हो, वह गिलाद पहाड़ से लौटकर चला जाए। तब बाईस हजार लोग लौट गए, और केवल दस हजार रह गए। 
Judges 7:4 फिर यहोवा ने गिदोन से कहा, अब भी लोग अधिक हैं; उन्हें सोते के पास नीचे ले चल, वहां मैं उन्हें तेरे लिये परखूंगा; और जिस जिसके विषय में मैं तुझ से कहूं, कि यह तेरे संग चले, वह तो तेरे संग चले; और जिस जिसके विषय मे मैं कहूं, कि यह तेरे संग न जाए, वह न जाए। 
Judges 7:5 तब वह उन को सोते के पास नीचे ले गया; वहां यहोवा ने गिदोन से कहा, जितने कुत्ते की नाईं जीभ से पानी चपड़ चपड़ कर के पीएं उन को अलग रख; और वैसा ही उन्हें भी जो घुटने टेककर पीएं। 
Judges 7:6 जिन्होंने मुंह में हाथ लगा चपड़ चपड़ कर के पानी पिया उनकी तो गिनती तीन सौ ठहरी; और बाकी सब लोगों ने घुटने टेककर पानी पिया। 
Judges 7:7 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं। 
Judges 7:8 तब उन लोगों ने हाथ में सीधा और अपने अपने नरसिंगे लिये; और उसने इस्राएल के सब पुरूषों को अपने अपने डेरे की ओर भेज दिया, परन्तु उन तीन सौ पुरूषों को अपने पास रख छोड़ा; और मिद्यान की छावनी उसके नीचे तराई में पड़ी थी।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20


मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

प्रेम


   हाल ही में मेरे एक मित्र ने मुझे एक मसीही गीत के लिखे जाने का वर्णन भेजा; हम उस गीत को अपने बचपन में अपने चर्च में अकसर सुनते थे:
यदि सारे समुद्र स्याही होते, और सारा आकाश एक चर्म पत्र;
यदि संसार की हर डाली कलम बन जाती और हर व्यक्ति लिखनेवाला;
तो भी परमेश्वर के प्रेम के बयान को लिखने में,
सारे समुद्र सूख जाते, और सारे आकाश के छोर से छोर तक लिखने पर भी
उस प्रेम का बयान पूरा नहीं लिखा जाता।

   ये शब्द एक प्राचीन यहूदी कविता का भाग हैं जो किसी समय एक पागलखाने में भरती रोगी के कमरे की दीवार पर लिखे मिले थे। अंग्रेज़ी भाषा में इस गीत के लेखक, फ्रेड्रिक एम. लेह्मैन इस कविता से इतने अभिभूत हुए कि उन्होंने इसे और बढ़ाना चाहा। वे व्यवसाय से एक मज़दूर थे और 1917 की एक दोपहर को, भोजन के अवकाश समय में, एक बक्से पर बैठे हुए उन्होंने इस गीत के पहले दो अन्तरे और कोरस लिखकर उस कविता में जोड़े और "परमेश्वर का प्रेम" शीर्षक से यह गीत तैयार हो गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार सांत्वना और चैन देने वाले परमेश्वर के प्रेम का अश्वासन देते हुए कहता है, "हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है" (भजन 36:5)। हमारे जीवन की तत्कालीन परिस्थिति चाहे कैसी भी क्यों ना हो - चाहे किसी कठिन परीक्षा की घड़ी से निकलते हुए, मानसिक उलझनों से भरे मन को सामान्य सन्तुलन के कुछ पल ही क्यों ना मिले हों, परमेश्वर का प्रेम सदा ही आशा की किरण, तथा सामर्थ और साहस का कभी ना समाप्त होने वाला स्त्रोत बनकर हमारा हौंसला बढ़ाता रहता है, हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता रहता है। - जो स्टोवैल


प्रभु आपसे अनन्तकाल के प्रेम से प्रेम करता है।

क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है। - भजन 100:5

बाइबल पाठ: भजन 36:1-12
Psalms 36:1 दुष्ट जन का अपराध मेरे हृदय के भीतर यह कहता है कि परमेश्वर का भय उसकी दृष्टि में नहीं है। 
Psalms 36:2 वह अपने अधर्म के प्रगट होने और घृणित ठहरने के विषय अपने मन में चिकनी चुपड़ी बातें विचारता है। 
Psalms 36:3 उसकी बातें अनर्थ और छल की हैं; उसने बुद्धि और भलाई के काम करने से हाथ उठाया है। 
Psalms 36:4 वह अपने बिछौने पर पड़े पड़े अनर्थ की कलपना करता है; वह अपने कुमार्ग पर दृढ़ता से बना रहता है; बुराई से वह हाथ नहीं उठाता।
Psalms 36:5 हे यहोवा तेरी करूणा स्वर्ग में है, तेरी सच्चाई आकाश मण्डल तक पहुंची है। 
Psalms 36:6 तेरा धर्म ऊंचे पर्वतों के समान है, तेरे नियम अथाह सागर ठहरे हैं; हे यहोवा तू मनुष्य और पशु दोनों की रक्षा करता है।
Psalms 36:7 हे परमेश्वर तेरी करूणा, कैसी अनमोल है! मनुष्य तेरे पंखो के तले शरण लेते हैं। 
Psalms 36:8 वे तेरे भवन के चिकने भोजन से तृप्त होंगे, और तू अपनी सुख की नदी में से उन्हें पिलाएगा। 
Psalms 36:9 क्योंकि जीवन का सोता तेरे ही पास है; तेरे प्रकाश के द्वारा हम प्रकाश पाएंगे।
Psalms 36:10 अपने जानने वालों पर करूणा करता रह, और अपने धर्म के काम सीधे मन वालों में करता रह! 
Psalms 36:11 अहंकारी मुझ पर लात उठाने न पाए, और न दुष्ट अपने हाथ के बल से मुझे भगाने पाए। 
Psalms 36:12 वहां अनर्थकारी गिर पड़े हैं; वे ढकेल दिए गए, और फिर उठ न सकेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 7-8
  • मरकुस 4:21-41


सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

प्रोत्साहन


   जमाइका के यूसेन बोल्ट और योहन ब्लेक ने, लंडन में आयोजित 2012 के ओलंपिक खेलों में ऐतिहासिक कीर्तीमान स्थापित किया; वे दोनों ही 100 और 200 मीटर की दोनों दौड़ों में, क्रमशः प्रथम और द्वितीय आए। दौड़ के मैदान पर उनकी परस्पर स्पर्धा के बावजूद बोल्ट ने प्रशिक्षण सहयोगी होने के लिए ब्लेक की प्रशंसा करते हुए कहा: "बीते वर्षों में योहन ने मुझे एक बेहतर खिलाड़ी बनाया है। वह लगातार मुझे और बेहतर करने के लिए उकसाता रहा, मेरे पीछे पड़ा रहा।" यह स्पष्ट था कि वे दोनों दौड़ की उस स्पर्धा द्वारा एक दूसरे को और बेहतर बनाने में लगे रहते थे।

   मसीह यीशु के विश्वासी और अनुयायी होने के नाते यह हमारी ज़िम्मेदारी और हमें प्रदान किया गया आदर है कि हम एक दूसरे को मसीही विश्वास में प्रोत्साहित करती रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों को लिखी पत्री में लिखा है: "और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें" (इब्रानियों 10:24)।

   चर्च अर्थात, मसीही विश्वासियों की मण्डली, कोई सामाजिक संस्था या समय व्यतीत करने के लिए प्रति सप्ताह मिलने-जुलने का स्थान नहीं है। चर्च वह स्थान है जहाँ हम, जो प्रभु यीशु के द्वारा पापों की क्षमा प्राप्त करके परमेश्वर के निकट लाए गए हैं, मसीह यीशु के स्वरूप में ढलने और बढ़ने में एक दूसरे की सहायता करते हैं। चर्च में हमारे एक साथ एकत्रित होने का उद्देश्य ही एक दूसरे को मसीही विश्वास में उभारना और प्रोत्साहित करना है।

   कोई भी मसीही विश्वासी अकेला रहकर कार्य नहीं कर सकता है; जैसा हमारा प्रभु हमसे चाहता है, वैसा जीवन जीने के लिए हमें मसीही विश्वासियों की संगति चाहिए। जब आप अन्य मसीही विश्वासियों से मिलें, तो यह जानने का प्रयास करें कि ऐसा कौन है जिसके निकट आकर आप उसे अपने शब्दों और कार्यों के द्वारा अपने प्रभु मसीह यीशु की समानता में और अधिक आने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। - सी. पी. हिया


पाप से दुःखी संसार के लिए एक स्वस्थ्य मसीही मण्डली सर्वोत्तम साक्षी है।

और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। - प्रेरितों 2:42

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:19-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। 
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 4-6
  • मरकुस 4:1-20


रविवार, 21 फ़रवरी 2016

बताएं


   मुझे राष्ट्रीय स्तर पर वितृत किए गए एक समाचार लेख को देख कर अचरज हुआ; उस लेख में किशोरों के एक समूह की प्रशंसा करी गई थी जो कॉलेराडो में स्थित बर्फ के ढालों पर स्कींग करने आए लोगों के साथ प्रति इतवार चर्च सभाएं करते थे। इस लेख ने, जिसमें पत्रकार ने उन किशोरों के बारे में लिखा था जो स्कींग करना और साथ ही लोगों को यह बताना कि प्रभु यीशु ने उनके जीवन कैसे बदले पसन्द करते थे, बहुत से लोगों को आकर्षित किया। इन किशोरों का साथ एक युवा मसीही विश्वासियों की संस्था दे रही थी, जो उन्हें परमेश्वर के प्रेम को दूसरों तक पहुँचाने और प्रगट करने में सहायता करती थी।

   दूसरों को कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने से अधिक सरल होता है स्वयं उस कार्य को करना, परन्तु फिर भी प्रभु यीशु ने अपने आप को अपने चेलों के जीवन में निवेश किया, क्योंकि उन चेलों ही के द्वारा उनका सन्देश संसार में जाना था। जब लोग प्रभु से चँगाई पाने के लिए उसे घेरे हुए थे, वह एक पहाड़ पर चढ़ गया और "तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें" (मरकुस 3:14)।

   कॉलेराडो के उन किशोरों में से एक किशोरी ने मसीही शिष्यता के अपने प्रशिक्षण के बारे में बताया: "मैं कभी परिवार या मित्रों के साथ कोई संबंध बना कर नहीं रख सकी; मैं सदा ही उनसे दूरी बनाए रखती थी। लेकिन इस कार्यक्रम ने ना केवल मुझे परमेश्वर के प्रेम का अनुभव करवाया, वरन मुझे उस प्रेम को दूसरों तक पहुँचाना भी सिखाया।

   प्रभु यीशु के प्रेम का व्यक्तिगत अनुभव करने और उसके अनुयायियों के साथ रहने से हम वह साहस और सामर्थ पाते हैं जिससे हम वह सब कह और कर सकते हैं जो हमारे प्रभु को आदर देता है; क्योंकि प्रभु यीशु के प्रेम और उद्देश्य के बारे में बताना ही मसीही जीवन का ध्येय है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही गवाही देना करे जाने के लिए कार्य नहीं वरन जीए जाने के लिए जीवन है।

उस ने उन से कहा, आओ; हम और कहीं आस पास की बस्‍तियों में जाएं, कि मैं वहां भी प्रचार करूं, क्योंकि मैं इसी लिये निकला हूं। - मरकुस 1:38

बाइबल पाठ: मरकुस 3:1-15
Mark 3:1 और वह आराधनालय में फिर गया; और वहां एक मनुष्य था, जिस का हाथ सूख गया था। 
Mark 3:2 और वे उस पर दोष लगाने के लिये उस की घात में लगे हुए थे, कि देखें, वह सब्त के दिन में उसे चंगा करता है कि नहीं। 
Mark 3:3 उसने सूखे हाथ वाले मनुष्य से कहा; बीच में खड़ा हो। 
Mark 3:4 और उन से कहा; क्या सब्त के दिन भला करना उचित है या बुरा करना, प्राण को बचाना या मारना? पर वे चुप रहे। 
Mark 3:5 और उसने उन के मन की कठोरता से उदास हो कर, उन को क्रोध से चारों ओर देखा, और उस मनुष्य से कहा, अपना हाथ बढ़ा उसने बढ़ाया, और उसका हाथ अच्छा हो गया। 
Mark 3:6 तब फरीसी बाहर जा कर तुरन्त हेरोदियों के साथ उसके विरोध में सम्मति करने लगे, कि उसे किस प्रकार नाश करें। 
Mark 3:7 और यीशु अपने चेलों के साथ झील की ओर चला गया: और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। 
Mark 3:8 और यहूदिया, और यरूशलेम और इदूमिया से, और यरदन के पार, और सूर और सैदा के आसपास से एक बड़ी भीड़ यह सुनकर, कि वह कैसे अचम्भे के काम करता है, उसके पास आई। 
Mark 3:9 और उसने अपने चेलों से कहा, भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें। 
Mark 3:10 क्योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिये जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे। 
Mark 3:11 और अशुद्ध आत्माएं भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं, और चिल्लाकर कहती थीं कि तू परमेश्वर का पुत्र है। 
Mark 3:12 और उसने उन्हें बहुत चिताया, कि मुझे प्रगट न करना। 
Mark 3:13 फिर वह पहाड़ पर चढ़ गया, और जिन्हें वह चाहता था उन्हें अपने पास बुलाया; और वे उसके पास चले आए। 
Mark 3:14 तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें। 
Mark 3:15 और दुष्टात्माओं के निकालने का अधिकार रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 1-3
  • मरकुस 3