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बुधवार, 6 अप्रैल 2016

इच्छा


   मेरे जीवन के लिए परमेश्वर की इच्छा क्या है? मेरे वयस्क होने तक यह प्रश्न बार-बार मेरे सामने आता रहता था; साथ ही संबंधित प्रश्न भी मुझे परेशान करते थे - यदि मैं परमेश्वर की इच्छा को ना जान पाई तो क्या होगा? यदि मैं परमेश्वर की इच्छा को पहचान ही ना सकूँ तो? मुझे लगता कि परमेश्वर की इच्छा को जानना मानो भूसे के ढेर में छिपी सूईं को ढूँढ़ना है - वह इच्छा छिपी हुई है; उसके समान लगने वाली बातों के कारण अस्पष्ट है; नकली बातों की भरमार उस एक सही बात से कहीं अधिक है; और यह असमंजस मुझे बेचैन करता था।

   लेकिन परमेश्वर की इच्छा के प्रति मेरा यह दृष्टिकोण गलत था, क्योंकि परमेश्वर के प्रति मेरा दृष्टिकोण गलत था। हमें इधर-उधर भटकते हुए, व्यर्थ प्रयास करते हुए, अनिश्चित होकर खोजते हुए देखना परमेश्वर को कदापि अच्छा नहीं लगता। वह चाहता है कि हम उसकी इच्छा को जानें; इसीलिए वह अपनी इच्छा को स्पष्ट और सरल बनाकर देता है और इसलिए वह हमें अनेकों-में-से-एक नहीं वरन केवल दो विकल्पों में से एक ही को चुनने कहता है, और ये विकल्प हैं - "जीवन और लाभ" या "मृत्यु और हानि" (व्यवस्थाविवरण 30:15)। इसे और भी सरल बनाते हुए, परमेश्वर कहता है, "जीवन ही को अपना लो" (व्यवस्थाविवरण 30:19)। जीवन को अपनाना, अर्थात परमेश्वर को चुनना और उसके वचन बाइबल का आज्ञाकारी हो जाना।

   जब मूसा ने अपनी मृत्यु से पहले इस्त्राएलियों को अंतिम बार संबोधित किया, तो उसने उन से आग्रह किया कि वे सही चुनाव करें और परमेश्वर के सारे वचन को मानने में चौकसी करें, क्योंकि यही उनके लिए जीवन होगा (व्यवस्थाविवरण 32:46-47)। हमारे लिए परमेश्वर की इच्छा और उसका वचन ही जीवन है; और प्रभु यीशु ही वह शाश्वत, अटल, जीवित वचन है और अनन्त जीवन का स्त्रोत है। परमेश्वर चाहे हमें हर चुनाव को करने का नुस्खा ना भी दे, लेकिन उसने हमारे अनुसरण करने के लिए एक सिद्ध उदाहरण हमें दिया है - प्रभु यीशु मसीह। सही चुनाव करना यदि सरल ना भी लगे, तो भी यदि परमेश्वर का वचन हमारा मार्गदर्शक है और परमेश्वर को महिमा देना हमारा उद्देश्य है, तो परमेश्वर अवश्य ही हमें सदबुद्धि देगा कि हम सही चुनाव कर सकें और उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के मार्गदर्शन का प्रमाण अकसर आगे देखने से नहीं वरन पीछे मुड़कर बीते जीवन पर ध्यान करने से मिलता है।

तब उसने उन से कहा कि जितनी बातें मैं आज तुम से चिताकर कहता हूं उन सब पर अपना अपना मन लगाओ, और उनके अर्थात इस व्यवस्था की सारी बातों के मानने में चौकसी करने की आज्ञा अपने लड़के-बालों को दो। क्योंकि यह तुम्हारे लिये व्यर्थ काम नहीं, परन्तु तुम्हारा जीवन ही है, और ऐसा करने से उस देश में तुम्हारी आयु के दिन बहुत होंगे, जिसके अधिकारी होने को तुम यरदन पार जा रहे हो। - व्यवस्थाविवरण 32:46-47

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 30:11-20
Deuteronomy 30:11 देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। 
Deuteronomy 30:12 और न तो यह आकाश में है, कि तू कहे, कि कौन हमारे लिये आकाश में चढ़कर उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:13 और न यह समुद्र पार है, कि तू कहे, कौन हमारे लिये समुद्र पार जाए, और उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:14 परन्तु यह वचन तेरे बहुत निकट, वरन तेरे मुंह और मन ही में है ताकि तू इस पर चले।
Deuteronomy 30:15 सुन, आज मैं ने तुझ को जीवन और मरण, हानि और लाभ दिखाया है। 
Deuteronomy 30:16 क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे। 
Deuteronomy 30:17 परन्तु यदि तेरा मन भटक जाए, और तू न सुने, और भटककर पराए देवताओं को दण्डवत करे और उनकी उपासना करने लगे, 
Deuteronomy 30:18 तो मैं तुम्हें आज यह चितौनी दिए देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे; और जिस देश का अधिकारी होने के लिये तू यरदन पार जा रहा है, उस देश में तुम बहुत दिनों के लिये रहने न पाओगे। 
Deuteronomy 30:19 मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें; 
Deuteronomy 30:20 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है, और ऐसा करने से जिस देश को यहोवा ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को देने की शपथ खाई थी उस देश में तू बसा रहेगा। 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 4-6
  • लूका 9:1-17


मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

उपहार


   एक प्रसिद्ध नाटक है Amadeus (अमेडियस) जो 18वीं सदी के एक संगीतज्ञ के परमेश्वर की इच्छा को जानने के प्रयास पर लिखा गया है। इस नाटक का एक पात्र, परमेश्वर भक्त एन्टोनियो सैलिरी की तीव्र इच्छा है कि वह ऐसा संगीतज्ञ बने जिसकी रचनाएं सदा स्मरण करी जाएं, किंतु उसके पास इसकी योग्यता नहीं है। इस बात को लेकर एन्टोनियो बहुत क्षुब्ध रहता है कि परमेश्वर ने उसकी बजाए ऐसा सर्वोत्तम संगीतज्ञ बनाने की योग्य्ता वोल्फ्गैंग अमेडियस मोज़ार्ट को दी है जो परमेश्वर भक्त भी नहीं है तथा स्वभाव से शरारती भी है।

   इस नाटक द्वारा, नाटक के लेखक ने वही प्रश्न उठाया है जो परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक के लेखक ने उठाया है, केवल प्रश्न को उठाने का ढ़ंग भिन्न है। अय्युब की पुस्तक में प्रश्न उठाया गया है कि परमेश्वर एक भक्त और धर्मी जन को परेशानियों और दुःख में क्यों आने देता है; जबकि अमेडियस का लेखक प्रश्न उठाता है कि परमेश्वर एक भक्तिहीन और शरारती व्यक्ति को, जो परमेश्वर से किसी भलाई पाने के सर्वथा अयोग्य है, इतनी अनोखी प्रतिभा क्यों प्रदान करता है?

   प्रभु यीशु मसीह द्वारा मज़दूरों और उनको मिलने वाले मेहनताने को लेकर कहा गया दृष्टांत, उप्रोक्त विरोधाभास का एक उत्तर समझता है। उस दृष्टांत में एक स्वामी अपने खेत में मज़दुरी के लिए मज़दुरों को ढूंढ़ने जाता है, और उन्हें काम पर लगाता है, और ऐसा वह दिन में कई बार करता है, दिन के अन्तिम घंटे में भी। दिन की स्माप्ति पर वह सब को उनकी निर्धारित मज़दूरी देता है। जिन मज़दूरों ने सारा दिन उसके लिए काम किया वे समझते हैं कि उन्हें उन लोगों से अधिक मज़दूरी मिलेगी जिन्होंने बस घंटा भर ही काम किया था। लेकिन जब स्वामी सबको एक समान ही मज़दूरी देता है तो वे भौंचके रह जाते हैं और इस असंगति को लेकर प्रश्न उठाते हैं। स्वामी उन्हें उत्तर देता है कि वह उनके साथ कोई अन्याय नहीं कर रहा है क्योंकि जितना उन से कार्य आरंभ करने के समय तय हुआ था, उतनी ही मज़दूरी उसने उन्हें दी है, और साथ ही यह भी समझाता है कि यदि वह अपनी संपत्ति में से, स्वेच्छा से, किसी को कुछ देना चाहे तो इससे कौन और क्योंकर उसे रोक सकता है?

   प्रभु यीशु के इस दृष्टांत द्वारा जो बात समझाई गई है वह है कि परमेश्वर अपनी सुइच्छा से लोगों को अपने अनुग्रह का दान देता है; यह उसकी सप्रेम भेंट है जिसका मज़दूरी के समान आँकलन कदापि नहीं किया जा सकता है। परमेश्वर जिसे जो देना चाहता है, उसे देता है - उसकी यह इच्छा और इसके पीछे छिपी उसकी भावना या योजना चाहे हमारी समझ में आए या ना आए। उसके उपहार उस से किसी रीति से कमा कर नहीं लिए जा सकते, बस धन्यवादी और कृतज्ञ होकर ग्रहण ही किए जा सकते हैं।

   प्रभु यीशु मसीह में होकर मिलने वाली पापों की क्षमा, धार्मिकता और उद्धार भी परमेश्वर के अनुग्रह से मिलने वाले उपहार हैं। हम इन्हें अपनी किसी नेकी या भलाई इत्यादि द्वारा उससे कमा नहीं सकते और ना ही इन बातों के आधार पर परमेश्वर को इन्हें हमें देने के लिए बाध्य कर सकते हैं। जो कोई साधारण विश्वास और सच्चे पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान द्वारा उपलब्ध करवाई गई परमेश्वर की इस अनमोल भेंट को स्वीकार कर लेता है वह परमेश्वर की सनतान और स्वर्ग का अधिकारी हो जाता है। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर के अनुग्रह के क्षेत्र में, "योग्य होना" कोई अर्थ नहीं रखता।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। - इफिसियों 2:4-8

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-15
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सवेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकल कर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 1-3
  • लूका 8:26-56


सोमवार, 4 अप्रैल 2016

रख-रखाव


   मैं जब अपनी बेटियों को कार चलाना सिखा रहा था तो मैंने उन्हें कार के रख-रखाव से संबंधित कुछ बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना सिखाया। हम एक स्थानीय सर्विस स्टेशन पर गए जहाँ उन्होंने देखा और सीखा कि जब भी कार में पैट्रोल डलवाएं तो साथ ही इंजन में तेल भी कैसे जाँच लें। इसके महत्व को समझाने के लिए मैंने उन से कहा, "तेल सस्ता होता है; लेकिन इंजन बहुत महंगा है"; अर्थात इंजन में तेल डालने का, इंजन के रख-रखाव का, खर्च तो थोड़ा सा ही है लेकिन तेल या रख-रखाव के अभाव में खराब हो जाने वाले इंजन को बदलना बहुत महंगा होता है। आज, कई सालों बाद भी उन्हें वह बात याद है, और वे मुझे यह बताती रहती हैं।

   ऐसे ही रख-रखाव हमारे आत्मिक जीवनों के लिए भी बहुत आवश्यक है। प्रति-दिन समय निकाल कर परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और प्रार्थना के द्वारा परमेश्वर की आवाज़ को सुनना, उसके अनुसार अपने जीवन को सुधारना, सुचारू रीति से चलाना हमारे व्यक्तिगत जीवन के रख-रखाव का बहुत महत्वपूर्ण भाग है। दाऊद ने भजन 5 में लिखा: "हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा" (भजन 5:3), और इसके बाद के पदों में उसने अपने हृदय से परमेश्वर की आराधना, धन्यवाद और प्रार्थना के निवेदन करे।

   बहुत से लोगों का नियम है कि वे अपना दिन परमेश्वर के साथ संगति के साथ करके आरंभ करते हैं। अपनी निज किसी भी बात को करने से पहले, वह चाहे खबरें जानना हो या प्रातः का नाश्ता करना हो या फिर ईमेल देखना हो, वे कुछ समय परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग पढ़ने, परमेश्वर के प्रति उसके प्रेम तथा महानता के लिए धनयवादी होने, आराधना और प्रार्थना करके उससे दिन भर के लिए मार्गदर्शन लेने के द्वारा करते हैं। तो अन्य कुछ लोग दिन के भिन्न समयों में जब अवसर मिलता है परमेश्वर के वचन को पढ़ने और प्रार्थना करने के द्वारा उससे संगति बनाए रखते हैं।

   यह सब ना तो कोई रीति-रिवाज़ है और ना ही किसी धार्मिक रिवाज़ की पूर्ति मात्र है; यह आत्मिक रख-रखाव है - हम प्रतिदिन अपने प्रभु परमेश्वर को स्मरण करते हैं, उसका धन्यवाद करते हैं और उससे आग्रह करते हैं कि वह हमारे हृदयों में, हमारे साथ-साथ बना रहे, हमारा सहायक और मार्गदर्शक हो तथा प्रत्येक अनुचित बात और बुराई से हमें बचाए रखे। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में जीवन की जड़ें जमा लेने से ही परिस्थित्यों का सामना करने की स्थिरता आती है।

और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं। आमीन। - मत्ती 6:13

बाइबल पाठ: भजन 5
Psalms 5:1 हे यहोवा, मेरे वचनों पर कान लगा; मेरे ध्यान करने की ओर मन लगा। 
Psalms 5:2 हे मेरे राजा, हे मेरे परमेश्वर, मेरी दोहाई पर ध्यान दे, क्योंकि मैं तुझी से प्रार्थना करता हूं। 
Psalms 5:3 हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा। 
Psalms 5:4 क्योंकि तू ऐसा ईश्वर नहीं जो दुष्टता से प्रसन्न हो; बुराई तेरे साथ नहीं रह सकती। 
Psalms 5:5 घमंडी तेरे सम्मुख खड़े होने न पांएगे; तुझे सब अनर्थकारियों से घृणा है। 
Psalms 5:6 तू उन को जो झूठ बोलते हैं नाश करेगा; यहोवा तो हत्यारे और छली मनुष्य से घृणा करता है। 
Psalms 5:7 परन्तु मैं तो तेरी अपार करूणा के कारण तेरे भवन में आऊंगा, मैं तेरा भय मानकर तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत करूंगा। 
Psalms 5:8 हे यहोवा, मेरे शत्रुओं के कारण अपने धर्म के मार्ग में मेरी अगुवाई कर; मेरे आगे आगे अपने सीधे मार्ग को दिखा। 
Psalms 5:9 क्योंकि उनके मुंह में कोई सच्चाई नहीं; उनके मन में निरी दुष्टता है। उनका गला खुली हुई कब्र है, वे अपनी जीभ से चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं। 
Psalms 5:10 हे परमेश्वर तू उन को दोषी ठहरा; वे अपनी ही युक्तियों से आप ही गिर जाएं; उन को उनके अपराधों की अधिकाई के कारण निकाल बाहर कर, क्योंकि उन्होंने तुझ से बलवा किया है। 
Psalms 5:11 परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों। 
Psalms 5:12 क्योंकि तू धर्मी को आशीष देगा; हे यहोवा, तू उसको अपने अनुग्रहरूपी ढाल से घेरे रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • रूत 1-4
  • लूका 8:1-25


रविवार, 3 अप्रैल 2016

महत्व


   मेरे मित्र ने अपने नए जन्मे बच्चे के नाम पत्र लिखा, जिसे वह चाहता था कि उसका बेटा बड़ा होकर पढ़े। उसने पत्र में लिखा: "मेरे प्रीय पुत्र, हम, तुम्हारे माता तथा पिता, चाहते हैं कि तुम सदा प्रकाश पर ध्यान लगाए रखो। तुम्हारा चीनी भाषा का नाम है ’शिन शुआन’; चीनी भाषा में ’शिन’ का तात्पर्य वफादारी, सन्तुष्टता और ईमानदारी से होता है, तथा ’शुआन’ का तात्पर्य ज्योति और गर्माहट से होता है।" मेरे मित्र और उसकी पत्नि ने बड़ी सावधानी से अपने बेटे के लिए वह नाम चुना था जिसके अनुरूप वे उसे बनते देखना चाहते थे, जैसी अपने शिशु पुत्र के लिए उनकी उम्मीदें थीं।

   जब प्रभु यीशु ने अपने एक अनुयायी शमौन को कैफा / पतरस कहा (यूहन्ना 1:42), तो यह कोई अनायास, बेमतलब नहीं कहा गया था। मूल युनानी भाषा में कैफा या पतरस का अर्थ होता है चट्टान का टुकड़ा, अर्थात चट्टान के समान दृढ़ और मज़बूत। लेकिन शमौन को अपने नए नाम पतरस के अनुरूप बनने में कुछ समय लगा। उसके वास्तव में ’पतरस’ बनने से पहले वह एक जल्दबाज़ और बिना ध्यान से सोचे-समझे बोल देने वाला मछुआरा था जो रेत के समान अस्थिर रहता था। अपने नए नाम के अनुरूप होने के दौरान वह प्रभु यीशु से असहमत हुआ (मत्ती 16:22-23), उसने एक व्यक्ति पर तलवार चलाई (यूहन्ना 18:10-11) और तीन बार प्रभु यीशु का इन्कार भी किया (यूहन्ना 18:15-27)। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों के काम नामक पुस्तक के आरंभ में हम पढ़ते हैं की यही शमौन ’पतरस’ बनकर अपने प्रभु यीशु के लिए खड़ा हो गया; इसी पतरस के प्रचार से मसीही विश्वासियों की पहली मण्डली बनी और आरंभिक मसीही मण्डलियों की स्थापना और बढ़ोतरी के लिए परमेश्वर ने उसे बहुतायत से इस्तेमाल किया।

   यदि पतरस के समान आप भी मसीह यीशु के अनुयायी हैं, तो प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के कारण अब आपकी एक नई पहचान है। प्रेरितों 11:26 में हम पढ़ते हैं कि, "...और चेले सब से पहिले अन्‍ताकिया ही में मसीही कहलाए।" मसीही होना अर्थात मसीह के समान होना - मसीही विश्वासी होने के कारण अब आप को मसीह के समान होना है। यह उपाधि, ’मसीही’, आपको उठा कर एक महान स्तर पर लाती है और जो आप अभी नहीं हैं, परमेश्वर की सहायता और सामर्थ, से वह बनने के लिए बुलाती है। परमेश्वर अपना कोई काम अधूरा नहीं छोड़ता (फिलिप्पियों 1:6), आप के अन्दर वह अपने कार्य को अवश्य पूरा करेगा। आप बस अपनी इस नई पहचान के महत्व को समझें और परमेश्वर को अपने जीवन में कार्य करने दें, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहें। - पो फैंग चिया


जब हम परमेश्वर को पिता कहकर संबोधित करते हैं और उसकी सनतान होने के अनुरूप जीवन व्यतीत करते हैं, हम परमेश्वर को आदर देते हैं।

और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। - फिलिप्पियों 1:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:32-42
John 1:32 और यूहन्ना ने यह गवाही दी, कि मैं ने आत्मा को कबूतर की नाईं आकाश से उतरते देखा है, और वह उस पर ठहर गया। 
John 1:33 और मैं तो उसे पहिचानता नहीं था, परन्तु जिसने मुझे जल से बपतिस्मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे; वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देनेवाला है। 
John 1:34 और मैं ने देखा, और गवाही दी है, कि यही परमेश्वर का पुत्र है। 
John 1:35 दूसरे दिन फिर यूहन्ना और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे। 
John 1:36 और उसने यीशु पर जो जा रहा था दृष्टि कर के कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है। 
John 1:37 तब वे दोनों चेले उस की यह सुनकर यीशु के पीछे हो लिए। 
John 1:38 यीशु ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उसने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे। 
John 1:39 तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था। 
John 1:40 उन दोनों में से जो यूहन्ना की बात सुनकर यीशु के पीछे हो लिये थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था। 
John 1:41 उसने पहिले अपने सगे भाई शमौन से मिलकर उस से कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात मसीह मिल गया। 
John 1:42 वह उसे यीशु के पास लाया: यीशु ने उस पर दृष्टि कर के कहा, कि तू यूहन्ना का पुत्र शमौन है, तू केफा, अर्थात पतरस कहलाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 19-21
  • लूका 7:31-50


शनिवार, 2 अप्रैल 2016

मित्र


   इलैक्ट्रोनिक सामाजिक संपर्क माध्यमों के व्यापक उपयोग का एक प्रतिकूल परीणाम है कि हम अपने आप को व्यक्तिगत रीति से अधिक अकेला पाते हैं। इंटरनैट पर एक लेख में लेखक ने पाठकों को सचेत किया है कि "जो लोगों द्वारा अधिकाई से अथवा पूर्णतया जीवन इन इलैक्ट्रोनिक सामाजिक संपर्क माध्यमों के साथ बिताने का विरोध करते हैं वे ऐसा इस दावे के आधार पर करते हैं कि इंटरनैट के अप्रत्यक्ष मित्र वास्तविक भौतिक संसार के प्रत्यक्ष मित्रों का स्थान नहीं ले सकते; और जो लोग उन अप्रत्यक्ष मित्रों को वास्तविक प्रत्यक्ष मित्रों से अधिक महत्व देते हैं वे और भी अधिक अकेले और खिन्न हो जाते हैं।"

   तकनीकी की बात छोड़ भी दें, तो भी हम सभी अकेलेपन और मायूसी के समयों से होकर निकलते हैं, हमें लगता है कि क्या कोई ऐसा है भी जो हमारे बारे में जानता है, हमें समझता है, हमारे बोझ की चिन्ता करता है, हमारे संघर्षों से अवगत है? लेकिन हम मसीही विश्वासियों के पास ऐसी परिस्थितियों के लिए हमारे प्रभु परमेश्वर से वह आश्वासन है जो थके हुए हृदयों को तरोताज़ा कर देता है। हमारे उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर के अटल वचनों का आश्वासन, जैसा दाऊद ने अपने भजन में व्यक्त किया है: "चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है" (भजन 23:4)।

   चाहे हम अपने चुनावों के कारण अकेले पड़ गए हों, या हमारे आस-पास के समाज की सांसकृतिक मान्यताओं के प्रति हमारी असहमति के कारण, या फिर किसी प्रीय जन को खो देने के कारण - हमें अकेलेपन का एहसास करवाने वाली परिस्थिति चाहे कोई भी हो, किंतु प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह की लगातार साथ बनी रहने वाली उपस्थिति से आश्वस्त रह सकता है कि वह कभी अकेला या बेसहारा नहीं है; उसके साथ सदा ही सृष्टिकर्ता और उस सृष्टीकर्ता की सामर्थ है।

   हमारे हर दुःख में साथ देने, हमारे हर एक बोझ को उठाने के लिए यीशु जैसा प्यारा मित्र और कोई नहीं है। - बिल क्राउडर


जो प्रभु यीशु को मित्र के रुप में जानते हैं वे कभी अकेले नहीं होते।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:13-15

बाइबल पाठ: भजन 23:1-6
Psalms 23:1 यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। 
Psalms 23:2 वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; 
Psalms 23:3 वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। 
Psalms 23:4 चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में हो कर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है। 
Psalms 23:5 तू मेरे सताने वालों के साम्हने मेरे लिये मेज बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है। 
Psalms 23:6 निश्चय भलाई और करूणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 16-18
  • लूका 7:1-30


शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

उदार


   दुकान से खरीद्दारी करके बाहर आने पर मैं अपनी कार में सामान रख रही थी, कि मेरी दृष्टि साथ ही खड़ी हुई गाड़ी पर गई। उस गाड़ी में टमाटरों से भरे टोकरे लदे हुए थे; सभी टमाटर सुर्ख लाल, बड़े आकार के, और बिलकुल ताज़े थे। ऐसे बढ़िया टमाटर अन्दर दुकान में भी नहीं रखे थे। इतने में गाड़ी की मालकिन आ गई और मैंने उससे कहा, "आपके टमाटर बहुत अच्छे हैं!" उसने उत्तर दिया, "इस वर्ष मेरी फसल अच्छी हुई है; क्या आप कुछ लेना चाहेंगी?" उसकी इस उदारता से चकित, मैंने सहमति जताई और उसने मुझे घर ले जाने के लिए कुछ टमाटर मुफ्त में दे दिए - और उन टमाटरों का स्वाद भी उनके स्वरूप के समान बहुत अच्छा था।

  हम इससे भी अधिक उदार होने का उदाहरण इस्त्रएलियों में पाते हैं जब उन्होंने परमेश्वर की आराधना के लिए तम्बू बनाए जाने के लिए स्वेच्छा से दान दिए। जब मूसा द्वारा इस कार्य के लिए दान देने का आवाहन किया गया तो, "जितनों को उत्साह हुआ, और जितनों के मन में ऐसी इच्छा उत्पन्न हुई थी, वे मिलापवाले तम्बू के काम करने और उसकी सारी सेवकाई और पवित्र वस्त्रों के बनाने के लिये यहोवा की भेंट ले आने लगे" (निर्गमन 35:21)। उन इस्त्राएलियों ने सहर्ष स्वेच्छा से और बहुतायात से अपने ज़ेवर, सोना, रंगीन धागे, सूक्षम सनि के कपड़े, चाँदी, पीतल, मणि और सुगन्ध द्रव्य दान करे; कुछ ने तो अपना समय और प्रतिभा भी दीं (पद 25-26)। यदि हम उन इस्त्राएलियों के उदाहरण का अनुसरण करें, और अपने संसाधनों में से सहर्ष और उदार हृदय से दें तो हमारा यह रवैया परमेश्वर को भाएगा भी और उसे आदर भी देगा।

   लेकिन उदार हृदय से देने का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है परमेश्वर द्वारा अपने पुत्र, प्रभु यीशु मसीह को समस्त मानव जाति पापों के लिए बलिदान होने के लिए दे देना: "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16); उदारता का इससे श्रेष्ठ उदाहरण कोई अन्य नहीं है। इस उदार और प्रेमी परमेश्वर के प्रति अत्यन्त धन्यवादी होकर उसकी इस भेंट को स्वीकार करें और जैसे उसने हमें दिया है, वैसे ही प्रभु यीशु में सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को औरों तक भी पहुँचाएं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हमारी भेंटों के आकार से अधिक महत्वपूर्ण है हमारे मन की भावनाएं।

हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। - 2 कुरिन्थियों 9:7

बाइबल पाठ: निर्गमन 35:21-29
Exodus 35:21 और जितनों को उत्साह हुआ, और जितनों के मन में ऐसी इच्छा उत्पन्न हुई थी, वे मिलापवाले तम्बू के काम करने और उसकी सारी सेवकाई और पवित्र वस्त्रों के बनाने के लिये यहोवा की भेंट ले आने लगे। 
Exodus 35:22 क्या स्त्री, क्या पुरूष, जितनों के मन में ऐसी इच्छा उत्पन्न हुई भी वे सब जुगनू, नथुनी, मुंदरी, और कंगन आदि सोने के गहने ले आने लगे, इस भांति जितने मनुष्य यहोवा के लिये सोने की भेंट के देने वाले थे वे सब उन को ले आए। 
Exodus 35:23 और जिस जिस पुरूष के पास नीले, बैंजनी वा लाल रंग का कपड़ा वा सूक्ष्म सनी का कपड़ा, वा बकरी का बाल, वा लाल रंग से रंगी हुई मेढ़ों की खालें, वा सूइसों की खालें थी वे उन्हें ले आए। 
Exodus 35:24 फिर जितने चांदी, वा पीतल की भेंट के देने वाले थे वे यहोवा के लिये वैसी भेंट ले आए; और जिस जिसके पास सेवकाई के किसी काम के लिये बबूल की लकड़ी थी वे उसे ले आए। 
Exodus 35:25 और जितनी स्त्रियों के हृदय में बुद्धि का प्रकाश था वे अपने हाथों से सूत कात कातकर नीले, बैंजनी और लाल रंग के, और सूक्ष्म सनी के काते हुए सूत को ले आईं। 
Exodus 35:26 और जितनी स्त्रियों के मन में ऐसी बुद्धि का प्रकाश था उन्होंने बकरी के बाल भी काते। 
Exodus 35:27 और प्रधान लोग एपोद और चपरास के लिये सुलैमानी मणि, और जड़ने के लिये मणि, 
Exodus 35:28 और उजियाला देने और अभिषेक और धूप के सुगन्धद्रव्य और तेल ले आये। 
Exodus 35:29 जिस जिस वस्तु के बनाने की आज्ञा यहोवा ने मूसा के द्वारा दी थी उसके लिये जो कुछ आवश्यक था, उसे वे सब पुरूष और स्त्रियां ले आई, जिनके हृदय में ऐसी इच्छा उत्पन्न हुई थी। इस प्रकार इस्त्राएली यहोवा के लिये अपनी ही इच्छा से भेंट ले आए।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 13-15
  • लूका 6:27-49


गुरुवार, 31 मार्च 2016

जीवन जल


   यहाँ अमेरिका में, हम अमेरिका निवासी पिछ्ले अनेक वर्षों से बोतल-बन्द पानी पीने के आदि हो गए हैं, जबकि अधिकांश लोगों के पास नलों से साफ और सुरक्षित जल पाने की सुविधा है, लेकिन फिर भी लोग पानी खरीद कर ही पीना पसन्द करते हैं। लोगों को लगता है कि खरीदा गया पानी नल में आने वाले मुफ्त पानी से अच्छा है। जब एक सही चीज़ आपको निःशुल्क मिल रही है तो उसे खरीदने के लिए कीमत चुकाने की बात मेरी समझ में बिल्कुल नहीं आती।

   यही बात हमारे आत्मिक जीवन पर भी लागू होती है। अनेक लोगों के लिए पापों की क्षमा और उद्धार को परमेश्वर से मुफ्त मिलने वाले उपहार के रूप में स्वीकार करना बहुत कठिन है; वे उसे प्राप्त करने के लिए कुछ कीमत चुकाना चाहते हैं, अपने प्रयास करना चाहते हैं। लेकिन इस कीमत चुकाने की इच्छा के साथ समस्य यह है कि पापों की क्षमा और उद्धार बहुत महंगा है, और कोई ऐसा नहीं है जो इतनी कीमत चुका सके, क्योंकि इसे खरीद पाना पूर्ण सिद्धता द्वारा ही संभव है (मत्ती 19:21)। इसीलिए मानव इतिहास में उस एकमात्र व्यक्ति ने ही, जो मन-ध्यान-विचार तथा प्राण-देह आत्मा में पूर्णतः सिद्ध, निष्पाप और निषकलंक था (रोमियों 5:18), सब के लिए यह कीमत चुका कर इस क्षमा और उद्धार को सबके लिए मुफ्त उपहार के रूप में उपलब्ध करवा दिया है। अब जो भी एक प्यासे के समान जीवन का जल पीने के लिए उसके पास आता है, उसे वह अनन्त जीवन का यह जल सेंत-मेंत प्रदान करने का वायदा करता है (यूहन्ना 4:14; प्रकाशितवाक्य 21:6)।

   लेकिन फिर भी कुछ लोग अनन्त जीवन के इस जल को पाने के लिए कुछ कीमत चुकाने का प्रयास करते हैं, अपने भले कार्यों, उपकारों तथा दान-दक्षिणा के द्वारा। यद्यपि आत्मिक सेवा के ये कार्य परमेश्वर की नज़रों में भले और महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके द्वारा परमेश्वर से पापों की क्षमा और उद्धार खरीदा नहीं जा सकता है। समस्त मानव जाति के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु ने अपने बलिदान द्वारा सभी के लिए यह कीमत चुका कर, अपने पुनरुत्थान द्वारा सबके लिए उद्धार का मार्ग खोल दिया है; अब दोबारा यह कीमत चुकाने का प्रयास करने की ना तो आवश्यक्ता है और ना ही यह कर पाना संभव है। परमेश्वर द्वारा जो उप्लब्ध करवा दिया गया है, उसे तो बस धन्यवाद के साथ ग्रहण ही किया जा सकता है।

   आज जो भी आत्मिक जीवन की प्यास बुझाने के लिए उस जीवन के जल की नदी प्रभु यीशु के पास पश्चाताप और विश्वास के साथ आता है, उसे परमेश्वर की ओर से यह जीवन जल भरपूरी के साथ सेंत-मेंत मिलता है। और अद्भुत बात यह है कि जो यह जीवन जल स्वीकार करता है, परमेश्वर का यह जीवन जल फिर उस व्यक्ति में होकर औरों के लिए भी प्रवाहित होने लग जाता है (यूहन्ना 7:37-38)। - जूली ऐकैरमन लिंक


प्रभु यीशु ही वह एक मात्र स्त्रोत है जो आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:37-38

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:10-14; रोमियों 5:12-21
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 

Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे।
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। 
Romans 5:20 और व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हो, परन्तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ। 
Romans 5:21 कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26