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शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

श्रेय


   जब मेरे पति स्थानीय कॉलेज में लेखांकन सिखा रहे थे, तो मैं मज़े के लिए एक परीक्षा में बैठी, यह देखने के लिए कि मैं कितना जानती हूँ। परिणाम अच्छे नहीं थे; मैंने प्रत्येक प्रशन का गलत उत्तर दिया। मेरे गलत उत्तरों का मूल कारण था कि मैंने जमा और खर्च का लेखा रखने के बैंकिंग के बुनियादी सिद्धांत को ही गलत समझा था; मैंने अपने उत्तरों में जमा के स्थान पर खर्च और खर्च के स्थान पर जमा डाल दिया।

   कभी-कभी आत्मिक जीवन में भी हम अपने जमा और खर्च को लेकर ऐसे ही उलझनों में पड़ जाते हैं। जब हमारे साथ जो कुछ भी गलत हो रहा है, हम उस सब का श्रेय शैतान को देते हैं, चाहे वह खराब मौसम हो, या ठीक से काम नहीं कर रहा कोई उपकरण हो, या कोई आर्थिक समस्या हो, तो हम शैतान को वह देते हैं जिसके काबिल वह है ही नहीं। ऐसा करके हम उसे उस सामर्थ्य का श्रेय दे रहे हैं जो वह कभी कर नहीं सकता - हमारे जीवनों से संबंधित बातें और उन बातों की गुणवन्ता को निर्धारित करना। शैतान समय और स्थान की सीमाओं में बंधा हुआ है। बिना परमेश्वर से अनुमति लिए वह हम मसीही विश्वासियों को छू भी नहीं सकता है (अय्युब 1:12; लूका 22:31)।

   परन्तु इस संसार के सरदार और झूठ का पिता (यूहन्ना 8:44; 16:11) होने के नाते, शैतान भ्रम और उलझनें उत्पन्न कर सकता है। प्रभु यीशु ने चिताया था कि ऐसा समय आएगा कि जब लोग सही और गलत में भेद और पहिचान करने नहीं पाएंगे (16:2)। परन्तु प्रभु यीशु ने साथ ही आश्वसन भी दिया कि शैतान दोषी ठहराया जा चुका है (पद 11)।

   हमारे जीवनों के साथ समस्याएं तो लगी रहेंगी; वे हमें परेशान तो कर सकती हैं किंतु पराजित नहीं कर सकती हैं; क्योंकि जगत के उद्धाकर्ता, हमारे प्रभु यीशु ने संसार को जीत लिया है। इसलिए सारा श्रेय उस ही को जाता है; केवल वह ही इसका हकदार है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


शैतान चाहे दोष लगाए, भ्रम और उलझनें उत्पन्न करे; 
नियंत्रण और निर्धारण परमेश्वर ही के हाथों में है।

तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है। - यूहन्ना 8:44

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:1-11
John 16:1 ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ। 
John 16:2 वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा वह समझेगा कि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूं। 
John 16:3 और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं।
John 16:4 परन्तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्हें स्मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहिले ही कह दिया था: और मैं ने आरम्भ में तुम से ये बातें इसलिये नहीं कहीं क्योंकि मैं तुम्हारे साथ था। 
John 16:5 अब मैं अपने भेजने वाले के पास जाता हूं और तुम में से कोई मुझ से नहीं पूछता, कि तू कहां जाता है? 
John 16:6 परन्तु मैं ने जो ये बातें तुम से कही हैं, इसलिये तुम्हारा मन शोक से भर गया। 
John 16:7 तौभी मैं तुम से सच कहता हूं, कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। 
John 16:8 और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा। 
John 16:9 पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते। 
John 16:10 और धामिर्कता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं, 
John 16:11 और तुम मुझे फिर न देखोगे: न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 81-83
  • रोमियों 11:19-36


गुरुवार, 10 अगस्त 2017

सहायक


   संवाददाता जेकब रीस द्वारा 19वीं शताब्दी में न्यू यॉर्क शहर की गरीबी के विवरण और चित्रण ने सामान्यतः बेपरवाह समाज को झकझोर दिया। अपनी पुस्तक How The Other Half Lives में रीस ने अपने लेखन को अपने द्वारा ली गई तस्वीरों के साथ प्रस्तुत किया, और यह इतना सजीव था कि जनता गरीबी के हताशापूर्ण अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकी। रीस अपने माता-पिता के पंद्रह बच्चों में से तीसरी सन्तान था, और उस भयावह हताशाजनक माहौल में रहा था, इसीलिए वह इतने प्रभावी ढ़ंग से लिखने पाया।

   अपनी पुस्तक के प्रकाशन के थोड़े ही समय के पश्चात रीस को एक जवान व्यक्ति द्वारा, जो अपने राजनैतिक जीवन का आरंभ कर रहा था, भेजा गया एक कार्ड मिला। उस कार्ड में बस इतना लिखा था, "मैंने आपकी पुस्तक पढ़ी है, और मैं सहायता करने के लिए आया हूँ। - थियोडर रूज़वेल्ट"। आगे चलकर यह राजनितिज्ञ अमेरिका का राष्ट्रपति बना।

   सच्चा विश्वास, परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब 1:19-27 के अनुसार औरों की आवश्यकता के प्रति संवेदनशील होता है और उनका प्रत्युत्तर देता है। काश कि हमारे हृदय भी निष्क्रियता से सक्रीयता की ओर मुड़ें; हम केवल कहे गए शब्दों से निकल कर किए गए कार्यों द्वारा सहायता प्रदर्शित करें। अनुकंपा के साथ किया गया कार्य न केवल उनकी सहायता करता है जो जीवन की कठिनाईयों में फंसे हैं, वरन उनके हृदयों को हमारे महान उद्धारकर्ता के सुसमाचार के लिए खोलता और तैयार भी करता है। उन्हें उस महान सहायक प्रभु परमेश्वर के संपर्क में लाता है जो उनके लिए और भी कहीं अधिक कर सकता है। - रैंडी किलगोर


जब लोग हमारे जीवनों में "परमेश्वर प्रेम है" को कार्यान्वित होता देखेंगे,
 तो वे इसके अर्थ को समझ भी सकेंगे।

क्योंकि परमेश्वर के यहां व्यवस्था के सुनने वाले धर्मी नहीं, पर व्यवस्था पर चलने वाले धर्मी ठहराए जाएंगे। - रोमियों 2:13

बाइबल पाठ: याकूब 1:19-27
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 
James 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 79-80
  • रोमियों 11:1-18


बुधवार, 9 अगस्त 2017

संसाधन


   मुझे और मेरी बेटी को चॉकलेट केक्स (ब्राउनीज़) बहुत पसन्द हैं। एक दिन जब मैं और वह मिलकर ब्राउनीज़ बनाने की तैयारियाँ कर रहे थे, तो मेरी बेटी ने निवेदन किया कि पकाने के साँचों में डालने के बाद मैं कटोरे में थोड़ा सा फेंटा हुआ मिश्रण लगा हुआ छोड़ दूँ; वह उसे चाट कर उसके स्वाद का मज़ा लेना चाहती थी। मैंने मुस्कुराते हुए सहमति जताई; और फिर उससे कहा कि इसे बीनना या बटोरना कहते हैं, और यह ब्राउनीज़ बनाने के साथ आरंभ नहीं हुआ था।

   बाद में जब हम बैठकर गर्म ब्राउनीज़ का स्वाद और आनन्द ले रहे थे, तो मैंने उसे परमेश्वर के वचन बाइबल में रूत की कहानी से बाताया कि कैसे रूत ने अपने तथा अपनी सास नाओमी के लिए भोजन जुटाने के लिए खेतों में बचा हुआ अनाज बटोरा था (रूत 2:2-3); क्योंकि वे दोनों ही विधवा थीं। अनाज बटोरने का यह कार्य करते हुए रूत की मुलाकात एक धनी ज़मींदार बोअज़ के साथ हुई, और रूत ने उससे निवेदन किया कि "मुझे लवने वालों के पीछे पीछे पूलों के बीच बीनने और बालें बटोरने दे" (पद 7)। न केवल बोअज़ ने रूत का निवेदन स्वीकार कर लिया, वरन अपने कर्मियों को निर्देश भी दिया कि रूत के लिए जान-बूझकर अनाज नीचे गिरने दें (पद 16)।

   जैसे बोअज़ ने रूत के लिए अपने खेतों की बहुतायत में से उपलब्ध करवाया, परमेश्वर भी हमारी आवश्यकताओं के लिए अपने असीम संसाधनों से उपलब्ध करवाता है। उसके संसाधनों का कोई अन्त नहीं है, और वह अपनी आशीषों को हमारी भलाई के लिए हम पर गिरने देता है। वह अपनी खुशी से हमारे लिए शारीरिक और आत्मिक खुराक उपलब्ध करवाता है। हर भली बात हमें उसके संसाधनों से ही प्राप्त होती है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हमारी बड़ी से बड़ी आवशयकता भी 
परमेश्वर के संसाधनों से बढ़कर नहीं हो सकती है।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: रूत 2:1-12
Ruth 2:1 नाओमी के पति एलीमेलेक के कुल में उसका एक बड़ा धनी कुटुम्बी था, जिसका नाम बोअज था। 
Ruth 2:2 और मोआबिन रूत ने नाओमी से कहा, मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जो मुझ पर अनुग्रह की दृष्टि करे, उसके पीछे पीछे मैं सिला बीनती जाऊं। उसने कहा, चली जा, बेटी। 
Ruth 2:3 सो वह जा कर एक खेत में लवने वालों के पीछे बीनने लगी, और जिस खेत में वह संयोग से गई थी वह एलीमेलेक के कुटुम्बी बोअज का था। 
Ruth 2:4 और बोअज बेतलेहेम से आकर लवने वालों से कहने लगा, यहोवा तुम्हारे संग रहे, और वे उस से बोले, यहोवा तुझे आशीष दे। 
Ruth 2:5 तब बोअज ने अपने उस सेवक से जो लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था पूछा, वह किस की कन्या है। 
Ruth 2:6 जो सेवक लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था उसने उत्तर दिया, वह मोआबिन कन्या है, जो नाओमी के संग मोआब देश से लौट आई है। 
Ruth 2:7 उसने कहा था, मुझे लवने वालों के पीछे पीछे पूलों के बीच बीनने और बालें बटोरने दे। तो वह आई, और भोर से अब तक यहीं है, केवल थोड़ी देर तक घर में रही थी। 
Ruth 2:8 तब बोअज ने रूत से कहा, हे मेरी बेटी, क्या तू सुनती है? किसी दूसरे के खेत में बीनने को न जाना, मेरी ही दासियों के संग यहीं रहना। 
Ruth 2:9 जिस खेत को वे लवतीं हों उसी पर तेरा ध्यान बन्धा रहे, और उन्हीं के पीछे पीछे चला करना। क्या मैं ने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझ से न बोलें? और जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू बरतनों के पास जा कर जवानों का भरा हुआ पानी पीना। 
Ruth 2:10 तब वह भूमि तक झुककर मुंह के बल गिरी, और उस से कहने लगी, क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि कर के मेरी सुधि ली है? 
Ruth 2:11 बोअज ने उत्तर दिया, जो कुछ तू ने पति मरने के पीछे अपनी सास से किया है, और तू किस रीति अपने माता पिता और जन्मभूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिन को पहिले तू ने जानती थी, यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है। 
Ruth 2:12 यहोवा तेरी करनी का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों के तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दे

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 77-78
  • रोमियों 10


मंगलवार, 8 अगस्त 2017

शान्त


   अमेरिका में महिलाओं की व्यवसायिक गोल्फ प्रतियोगिताओं में, सन 2003 की विमेंस ऑपेन को एक अपेक्षाकृत अनजानी खिलाड़ी हिलैरी लंके ने जीत कर इतिहास बनाया। न केवल उसने यह प्रतियोगिता जीती, वरन पेशेवर गोल्फ में यह उसकी एक मात्र जीत भी थी। उसकी यह अप्रत्याशित और उत्साहवर्धक जीत इस बात की पुष्टि करती है कि खेल-कूद में सबसे रोमाँचक बात होती है उनकी अनिश्चितता।

   परन्तु जीवन में अनिश्चितता सदा रोमाँचकारी नहीं होती है। हम योजनाएं तथा रणनीतियाँ बनाते हैं। जो हम जीवन में होते देखना चाहते हैं उन बातों के विषय मंसूबे बाँधते हैं, प्रस्ताव रखते हैं; परन्तु बहुधा यह सब अच्छे अनुमानों से बढ़कर और कुछ नहीं हो पाते हैं। हमें कुछ पता नहीं है कि एक वर्ष, एक माह, एक सप्ताह, या एक दिन भी क्या लेकर आ जाएगा। इसलिए हम मसीही विश्वासी प्रार्थना करते हैं और उसके अनुसार योजना बनाते हैं; और फिर अपने प्रभु परमेश्वर के हाथों में, जो सब कुछ संपूर्णता के साथ जानता है, सब कुछ समर्पित करते हैं, क्योंकि हम किसी बात के विषय भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। इसीलिए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 46:10, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!", को बहुत पसन्द करता हूँ।

   जीवन अप्रत्याशित है; कभी भी कुछ भी हो सकता है। ऐसी अनेकों बातें हैं जिनके बारे में मैं कुछ नहीं जानता हूँ, और न जान सकता हूँ, कम से कम किसी निश्चितता के साथ तो कदापि नहीं जान सकता हूँ। परन्तु मैं यह तो निश्चितता के साथ जानता हूँ कि मेरा प्रभु परमेश्वर है जो सब कुछ के बारे में सब कुछ - भूत, वर्तमान, भविष्य, जानता है; वह मुझ से बहुत प्रेम करता है, मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ता है और मेरी सहायाता के लिए सदा मेरे साथ रहता है। उसे, और मेरे लिए उसकी योजनाओं के उद्देश्य को जानने के कारण, मैं हर बात में, हर परिस्थिति में शान्त बना रह सकता हूँ। - बिल क्राउडर


जीवन की अनिश्चितताओं में हमारे प्रति परमेश्वर की देखभाल ही निश्चितता है।

और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। - याकूब 4:14-15

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 74-76
  • रोमियों 9:16-33


सोमवार, 7 अगस्त 2017

दोष और आलोचना


   अनेकों लोगों के समान, जब मैं समाचार-पत्र या कोई पत्रिका पढ़ता हूँ, तो वर्तनी और व्याकरण की त्रुटियाँ मेरे सामने आती हैं। मैं जान बूझकर उन त्रुटियों को ढूँढ़ने का प्रयास नही करता हूँ; वे स्वतः ही मुझे दिखाई दे जाती हैं। ऐसे में मेरी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि मैं उस प्रकाशन और उससे संबंधित लोगों की आलोचना करूँ, और इस संबंध में अपनी चिड़चिड़ाहट व्यक्त करूँ।

   संभव है कि आपके विशिष्ट कार्य-क्षेत्र को लेकर आपका भी कुछ ऐसा ही अनुभव हो। ऐसा लगता है कि हम किसी बात के बारे में जितना अधिक जानते हैं, उससे संबंधित त्रुटियों के विषय में उतने अधिक आलोचनात्मक हो जाते हैं। यहाँ तक कि हमारे ऐसे आलोचनात्मक व्यवहार के कारण अन्य लोगों के साथ हमारे संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।

   परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक भिन्न दृष्टिकोण प्रदान करती है। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में लिखा, "मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए" (फिलिप्पियों 1:9)। परमेश्वर चाहता है कि हम उसे जितना अधिक जानें और समझें, उतने अधिक नम्र और प्रेम करने वाले बनते जाएं। बजाए इसके कि हम दोष ढूँढ़ने और आलोचना करने वाले बनें, या ऐसा व्यवहार करें कि मानों हमने देखा नहीं, या हम परवाह नहीं करते हैं, हमारी समझ-बूझ के कारण हमारे अन्दर सहानुभूति और नम्रता बढ़ती जानी चाहिए। आलोचना के स्थान पर करुणा होनी चाहिए।

   बजाए इसके कि हम दूसरों में दोष ढूँढ़ने वाले हों, प्रभु परमेश्वर चाहता है कि हम "उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे" (पद 11)।

   जब प्रभु यीशु हमारे जीवनों और मनों में बसेगा, तब जैसे वह हमारे दोषों के प्रति व्यवहार करता है, हम औरों के दोषों के प्रति व्यवहार करना सीखेंगे; जैसे वह हमारी आलोचना नहीं करता है, हम भी औरों कि आलोचना नहीं करेंगे। उसके समान ही हमारा व्यवहार भी प्रेम का होगा, हम चाहे उन लोगों और उनकी कमियों के बारे में चाहे जितना भी जानने वाले क्यों न हों। - डेविड मैक्कैसलैंड


गलती करना मानवीय स्वभाव है, 
परन्तु क्षमा करना दिव्य स्वभाव है। - एलेकज़ैंडर पोप

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:5

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:1-11
Philippians 1:1 मसीह यीशु के दास पौलुस और तीमुथियुस की ओर से सब पवित्र लोगों के नाम, जो मसीह यीशु में हो कर फिलिप्पी में रहते हैं, अध्यक्षों और सेवकों समेत। 
Philippians 1:2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
Philippians 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं। 
Philippians 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं। 
Philippians 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। 
Philippians 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। 
Philippians 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो। 
Philippians 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं। 
Philippians 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। 
Philippians 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ। 
Philippians 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 72-73
  • रोमियों 9:1-15


रविवार, 6 अगस्त 2017

परिवार का सदस्य


   मुजे मेरी प्राथमिक शिक्षा के लिए अपने माता-पिता से दूर, एक अन्य परिवार के साथ रहना पड़ा था। वह परिवार मुझ से बहुत प्रेम करने और देखभाल करने वाला था, तथा मेरी देखरेख बहुत अच्छे से करता था। एक दिन एक पारिवारिक अवसर को मनाने के लिए सभी बच्चे एक स्थान पर एकत्रित हुए। उस सभा के दो भाग थे; पहले भाग में सभी बच्चों ने भाग लिया, और सब ने अपने अनुभव बताए; मैं भी उनमें सम्मिलित था। परन्तु दूसरे भाग में केवल वही बच्चे भाग ले सकते थे जो "सगे" थे, और मुझे नम्रता के साथ, सम्मिलित नहीं होने के लिए कहा गया। उस समय मुझे उस कटु सत्य का बोध हुआ कि मैं उस परिवार का सगा सदस्य नहीं था। वह परिवार मुझसे बहुत प्रेम करता था, बहुत अच्छे से मेरी देखभाल करता था, परन्तु मैं केवल उनके साथ रहने वाला एक जन था, उनके परिवार का सगा तथा वैध सदस्य नहीं था।

   मेरे जीवन का यह अनुभव मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह के विषय यूहन्ना 1:11-13 में लिखी बात स्मरण करवाता है। परमेश्वर का पुत्र, प्रभु यीशु मसीह, अपनों के मध्य आया, परन्तु उन्होंने उसका तिरिस्कार कर दिया। परन्तु परमेश्वर ने उसे ही मनुष्यों के लिए परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनने का माध्यम बना दिया। जो कोई भी साधारण विश्वास के साथ उसे ग्रहण करता है, अपना जीवन उसे समर्पित करता है, वह परमेश्वर के परिवार का सदस्य हो जाता है, चाहे उसका जन्म किसी भी परिवार में क्यों न हुआ हो। परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनने का आधार हमारा सांसारिक परिवार और उसका विश्वास, रीतियाँ या मान्यताएं नहीं है, वरन हमारे द्वारा स्वेच्छा से प्रभु यीशु मसीह पर लाया गया विश्वास और उसके प्रति हमारा समर्पण है; हम चाहे किसी भी परिवार में क्यों न जन्मे हों और पले-बड़े हुए हों। जब हम अपने द्वारा लिए गए निर्णय से परमेश्वर के परिवार का अंग बनते हैं, तब ही "आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं" (रोमियों 8:16)।

   जो कोई भी परमेश्वर पिता के पास प्रभु यीशु में होकर आता है, उसकी लेपालक संतान बनता है, परमेश्वर कभी उसे अस्विकार नहीं करता है, वरन उन्हें अपने परिवार का वैध और सगा सदस्य बना लेता है। परन्तु जो भी प्रभु यीशु पर विश्वास और समर्पण की इस साधारण सी आवश्यकता को पूरा नहीं करता है, वह चाहे परमेश्वर के प्रेम और देखभाल को कितना भी अनुभव कर ले, वह परमेश्वर के परिवार का वैध तथा सगा सदस्य नहीं है; अन्ततः उसे अलग होना ही होगा।

   अपने जन्म के सांसारिक परिवार को अपने अनन्त का आधार न बनाएं; आपने चाहे जिस भी परिवार में जन्म क्यों न लिया हो, सुखद अनन्त के लिए अनिवार्य है कि आप परमेश्वर के परिवार के सदस्य बन जाएं। - लॉरेंस दरमानी


उद्धार आप क्या जानते हैं से नहीं, 
वरन प्रभु यीशु को जानने-मानने से सुनिश्चित होता है।

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। - रोमियों 8:1

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 70-71
  • रोमियों 8:22-39


शनिवार, 5 अगस्त 2017

उस्ताद


   हाई स्कूल की पढ़ाई करते समय मुझे अपने शतरंज खेलने की योग्यता पर गर्व था। मैंने शतरंज क्लब की सदस्यता ली, और दोपहर के भोजन अवकाश के समय मैं अन्य सदस्यों के साथ बैठा हुआ पाया जाता था; हम शतरंज के खेल से संबंधित अनेकों किताबें पढ़ते थे, खेल की रणनीति बनाने के नए-नए तरीके सीखते थे; मैंने अपनी अधिकांशतः स्पर्धाएं जीतीं, और फिर खेलना छोड़ दिया। लगभग 20 वर्ष पश्चात मेरी मुलाकात एक कुशल शतरंज खिलाड़ी से हुई, जो हाई स्कूल के बाद भी अपने कौशल को निखारता चला जा रहा था, और उससे खेलने पर मुझे पता चला कि एक उस्ताद के साथ खेलना क्या होता है। यद्यपि शतरंज की बिसात पर मैं कोई भी चाल चलने के लिए स्वतंत्र था, परन्तु उसके सामने मेरे द्वारा बनाए गई कोई भी रणनीति, मेरी कोई भी चाल किसी काम की नहीं थी। उस उस्ताद के श्रेष्ठ कौशल के कारण मेरे द्वारा चली गई प्रत्येक चाल, वह अपने पक्ष में, अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए परिवर्तित कर लेता था।

   यहाँ पर हमारे लिए एक आत्मिक शिक्षा का चित्रण है। परमेश्वर ने हम मनुष्यों को अपने निर्णय लेने और अपनी इच्छानुसार करने की स्वतंत्रता दी है, और हम में से अधिकांश परमेश्वर की इच्छा और योजना के बाहर, उसके उद्देश्यों के विरुद्ध अपनी मनमर्ज़ी करते हैं, योजनाएं बनाते हैं, और उन्हें कार्यान्वित करते हैं। परन्तु ऐसा करने पर भी हम अन्ततः हमारे पुनःस्थापन के परमेश्वर के उद्देश्य को ही पूरा कर देते हैं (रोमियों 8:21, 2 पतरस 3:13, प्रकाशितवाक्य 21:1)। इस एहसास ने जीवन में भली और बुरी दोनों ही प्रकार की बातों के प्रति मेरा दृष्टिकोण बदल दिया। भली बातें, जैसे स्वास्थ्य, योग्यताएं, धन आदि को मैं परमेश्वर को उसके उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अर्पित कर सकता हूँ। बुरी बातें, जैसे कि कोई अक्षमता, निर्धनता, पारिवारिक समस्याएं, असफलताएं आदि को मैं परमेश्वर के निकट आने और उसकी निकटता में बढ़ने का साधन बनाकर उनका सदुपयोग कर सकता हूँ।

   हम मसीही विश्वासियों को आश्वस्त रहना चाहिए कि उस उस्ताद, हमारे परमेश्वर पिता के हाथों से, हर बात और परिस्थिति में हमारी विजय सुनिश्चित है, चाहे जीवन के शतरंज की बिसात कैसी भी प्रतीत क्यों न हो रही हो। - फिलिप यैन्सी


जब हमें परमेश्वर का हाथ दिखाई न भी दे, 
तब भी हम उसके हृदय को लेकर आश्वस्त रह सकते हैं।

पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी। - 2 पतरस 3:13

बाइबल पाठ: रोमियों 8:16-25
Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं। 
Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
Romans 8:18 क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। 
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। 
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। 
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी। 
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है। 
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं। 
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा? 
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 68-69
  • रोमियों 8:1-21