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बुधवार, 11 अक्टूबर 2017

जाँच


   स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को गंभीर होने से पहले ही पकड़ लेने के लिए चिकित्सक नियमित शारीरिक जाँच की सलाह देते हैं। हम यही कार्य अपने आत्मिक स्वास्थ्य के लिए भी कर सकते हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा बताई गई महान आज्ञाओं (मरकुस 12:29-31) पर आधारित कुछ प्रश्नों के उत्तर देने के द्वारा; जैसे कि:

*क्योंकि पहले उस ने मुझसे प्रेम किया है, इसलिए क्या मैं भी परमेश्वर से अपने सारे मन से प्रेम करता हूँ? मेरे अन्दर क्या अधिक प्रबल रहता है, सांसारिक लाभ, या मसीह यीशु में मेरे लिए रखे गए खज़ाने? (कुलुस्सियों 3:1) प्रभु चाहता है कि उसकी शान्ति हमारे हृदयों में राज्य करे।

*क्या मैं परमेश्वर से अपनी सारे प्राण से प्रेम करता हूँ? क्या मैं परमेश्वर की वाणी को सुनता हूँ जो मुझे बताती है कि मैं कौन हूँ? क्या मैं स्वार्थी अभिलाषाओं से दूर हटता जा रहा हूँ? (कुलुस्सियों 3:5) क्या मैं और अधिक दयालु, कृपालु, नम्र, सुशील, और धीरजवन्त बनता जा रहा हूँ? (कुलुस्सियों 3:12)

*क्या मैं परमेश्वर से अपनी सारी बुध्दि से प्रेम करता हूँ? क्या मैं उसके पुत्र प्रभु यीशु मसीह के साथ अपने संबंध के प्रति सचेत रहता हूँ, या मैं अपनी बुध्दि को इधर-उधर भटकने देता हूँ? (कुलुस्सियों 3:2) मेरे विचार क्या उत्पन्न करते हैं, समस्याएं या समाधान? एकता या फूट? क्षमा या प्रतिशोध? (कुलुस्सियों 3:13)

*क्या मैं परमेश्वर से अपनी सारी शक्ति से प्रेम करता हूँ? क्या मैं कमज़ोर दिखने के लिए राज़ी रहता हूँ जिससे परमेश्वर को अपनी सामर्थ्य मुझमें होकर दिखाने का अवसर मिले? (कुलुस्सियों 3:2) क्या मैं उसके आत्मा के द्वारा सामर्थी होने के लिए उसके अनुग्रह पर निर्भर रहता हूँ?

   जब हम "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने देंगे" (कुलुस्सियों 3:16), तो जैसे जैसे हम आत्मिक रीति से योग्य और उसके लिए उपयोगी बनते जाएंगे, वह हमें एक दूसरे को उभारने, सुधारने और उन्नत करने के लिए संसाधन और समझ-बूझ प्रदान करता चला जाएगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


आत्मिक रीति से स्वस्थ होने के लिए, 
परमेश्वर के वचन का भोजन तथा अपने विश्वास का अभ्यास करें।

यीशु ने उसे उत्तर दिया, सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुध्दि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं। - मरकुस 12:29-31

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:1-14
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। 
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। 
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। 
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे। 
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है। 
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है। 
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे। 
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। 
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। 
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। 
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3


मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

प्रेम


   एक संध्या मेरी एक सहेली ने उसके घर की बैठक में लगने वाली तीन सजावटी पट्टियों में से एक, जिस पर ’प्रेम’ शब्द लिखा हुआ था दिखाते हुए कहा, "देखो मेरे पास ’प्रेम’ तो आ गई है; ’विश्वास’ और ’आशा’ आने वाले हैं। मैंने विचार किया, "तो प्रेम पहले आता है, और फिर उसके बाद विश्वास तथा आशा भी आ जाते हैं।"

   यह वास्तविकता है कि प्रेम ही पहले आता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रेम का उद्गम स्वयं परमेश्वर है: "क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है" (1 यूहन्ना 4:7)। परमेश्वर के सिध्द प्रेम का वर्णन 1 कुरिन्थियों 13 में किया गया है, और इसे बाइबल का ’प्रेम अध्याय’ भी कहा जाता है। यहाँ हम प्रेम का एक गुण पाते हैं, "प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा" (1 कुरिन्थियों 13:8)।

   मसीही विश्वासी के लिए विश्वास और आशा अनिवार्य, क्योंकि परमेश्वर के सम्मुख हम, "हम विश्वास से धर्मी ठहरे..." (रोमियों 5:1); और मसीह यीशु में अपनी आशा के कारण स्थिर रहते हैं, जैसा इब्रानियों की पत्री में आशा के विषय लिखा गया है कि "वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्थिर और दृढ़ है" (इब्रानियों 6:19)।

   एक दिन ऐसा भी आएगा जब हमें विश्वास और आशा की आवश्यकता नहीं रहेगी; क्योंकि हमारा विश्वास - हमारा प्रभु यीशु हमारे सामने प्रत्यक्ष होगा और सदा रहेगा, तथा हमारी प्रत्येक आशा हमारे उध्दारकर्ता प्रभु यीशु में परिपूर्ण हो जाएगी। परन्तु प्रेम शाश्वत है, क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है तथा परमेश्वर प्रेम है (1 यूहन्ना 4:8), वह सदा काल तक अटल बना रहेगा।

   इसीलिए कुरिन्थियों में लिखा है, "पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है" (1 कुरिन्थियों 13:13); प्रेम ही प्रथम और प्रेम ही अन्तिम तथा इसके बीच का सब कुछ है। - सिंडी हैस कैस्पर


हम प्रेम इसलिए करते हैं क्योंकि परमेश्वर ने पहले हम से प्रेम किया।

क्योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं। - गलतियों 5:5

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-21
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिध्द हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिध्द प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिध्द नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। 
1 John 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1 John 4:21 और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2


सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

रचियता


   मन को छू लेने वाले संगीत को भी सभी लोग भिन्न सुनते हैं। उसका रचियता उस संगीत को अपनी कल्पना के कक्ष में सुनता है। श्रोता उसे अपनी इन्द्रियों तथा भावनाओं के साथ सुनते हैं। उससे संबंधित वाद्यों को बजाने वाले कलाकार अपने सबसे निकट के संगीत वाद्य को ही सबसे स्पष्ट सुन पाते हैं।

   एक प्रकार से हम सब परमेश्वर के वाद्य-वृन्द के सदस्य हैं; और हम अपने सबसे निकट बज रहे संगीत को ही सबसे स्पष्ट सुनने पाते हैं। क्योंकि हम उसे एक संतुलित रचना के समान नहीं सुनने पाते हैं, इसलिए हम परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र अय्युब के समान ही अपनी परिस्थितियों के प्रति प्रतिक्रीया देते हैं। अय्युब ने अपने दुःख में विलाप किया, "ऐसे ही लोग अब मुझ पर लगते गीत गाते, और मुझ पर ताना मारते हैं" (अय्युब 30:9)। उसने स्मरण किया कि कैसे जवान और हाकिम उसका आदर किया करते थे, और "मैं अपने पगों को मलाई से धोता था और मेरे पास की चट्टानों से तेल की धाराएं बहा करती थीं" (अय्युब 29:6)। किंतु अब वह ठट्ठा करने वालों का निशाना बन गया था। उसने विलाप किया, "इस कारण मेरी वीणा से विलाप और मेरी बांसुरी से रोने की ध्वनि निकलती है" (अय्युब 30:31)। लेकिन अय्युब उस पूरी संगीत रचना को नहीं सुन पा रहा था, यद्यपि उस रचना में और बहुत कुछ भी था।

   हो सकता है कि आज आप अपने जीवन के संगीत के केवल उदास सुर ही सुनने पा रहे हैं; परन्तु निराश नहीं हों। आपके जीवन की हर बात परमेश्वर की रचना है, वही आपके जीवन के हर सुर, हर लय-ताल, उतार-चढ़ाव का रचियता है। या, यदि आप अपने जीवन में प्रसन्न करने वाले सुरों को सुन रहें हैं तो उसके लिए परमेश्वर की स्तुति कीजिए, अपने आनन्द को औरों के साथ बाँटिए।

   हम मसीही विश्वासी प्रभु परमेश्वर द्वारा हमें सेंत-मेंत उपलब्ध करवाई गई पाप क्षमा और उध्दार की संगीत रचना को बजा रहे हैं, उसे संसार के लोगों को अपने जीवनों से सुना रहे हैं। परमेश्वर हमारे जीवन-संगीत का रचियता है और अन्ततः सब कुछ मिलकर उसके भले उद्देश्यों की पूर्ति तथा हमारी भलाई के लिए कार्य करेगा। वह ऐसा रचियता है जिसकी रचना सदैव ही सिध्द होती है; हम हर बात के भले परिणाम के लिए उस पर भरोसा रख सकते हैं। - कीला ओकोआ


परमेश्वर की भलाई पर भरोसे रखने से हृदय में मधुर संगीत बजता रहता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: अय्युब 29:1-6; 30:1-9
Job 29:1 अय्यूब ने और भी अपनी गूढ़ बात उठाई और कहा, 
Job 29:2 भला होता, कि मेरी दशा बीते हुए महीनों की सी होती, जिन दिनों में ईश्वर मेरी रक्षा करता था, 
Job 29:3 जब उसके दीपक का प्रकाश मेरे सिर पर रहता था, और उस से उजियाला पाकर मैं अन्धेरे में चलता था। 
Job 29:4 वे तो मेरी जवानी के दिन थे, जब ईश्वर की मित्रता मेरे डेरे पर प्रगट होती थी। 
Job 29:5 उस समय तक तो सर्वशक्तिमान मेरे संग रहता था, और मेरे लड़के-बाले मेरे चारों ओर रहते थे। 
Job 29:6 तब मैं अपने पगों को मलाई से धोता था और मेरे पास की चट्टानों से तेल की धाराएं बहा करती थीं। 
Job 30:1 परन्तु अब जिनकी अवस्था मुझ से कम है, वे मेरी हंसी करते हैं, वे जिनके पिताओं को मैं अपनी भेड़ बकरियों के कुत्तों के काम के योग्य भी न जानता था। 
Job 30:2 उनके भुजबल से मुझे क्या लाभ हो सकता था? उनका पौरुष तो जाता रहा। 
Job 30:3 वे दरिद्रता और काल के मारे दुबले पड़े हुए हैं, वे अन्धेरे और सुनसान स्थानों में सूखी धूल फांकते हैं। 
Job 30:4 वे झाड़ी के आसपास का लोनिया साग तोड़ लेते, और झाऊ की जड़ें खाते हैं। 
Job 30:5 वे मनुष्यों के बीच में से निकाले जाते हैं, उनके पीछे ऐसी पुकार होती है, जैसी चोर के पीछे। 
Job 30:6 डरावने नालों में, भूमि के बिलों में, और चट्टानों में, उन्हें रहना पड़ता है। 
Job 30:7 वे झाड़ियों के बीच रेंकते, और बिच्छू पौधों के नीचे इकट्ठे पड़े रहते हैं। 
Job 30:8 वे मूढ़ों और नीच लोगों के वंश हैं जो मार मार के इस देश से निकाले गए थे। 
Job 30:9 ऐसे ही लोग अब मुझ पर लगते गीत गाते, और मुझ पर ताना मारते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


रविवार, 8 अक्टूबर 2017

प्रत्युत्तर


   मुझे गाड़ी चलाते हुए लगभग आधा घंटा ही हुआ था कि पिछली सीट पर बैठी मेरी बेटी ऊँची आवाज़ में रोने लगी। मैंने पूछा, "क्या हो गया?" तो उत्तर मिला कि साथ बैठे उसके भाई ने उसकी बाँह ज़ोर से पकड़ ली थी। भाई का कहना था कि उसे ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि बहन चुटकी भर रही थी। बहन ने कहा कि उसने चुटकी इसलिए भरी क्योंकि भाई ने कुछ ऐसा कहा था जो उसे बुरा लगा था।

   दुर्भाग्यवश, बच्चों में सामान्यतः पाया जाने वाली यह बात, बड़ों के बीच के संबंधों में भी दिखाई देती है। एक व्यक्ति किसी दूसरे को आहत करता है, जिसके प्रत्युत्तर में आहत व्यक्ति कोई अपमानजनक बात कह देता है। फिर एक दूसरे के प्रति चोट पहुँचाने वाले व्यवहार और बातों के उत्तर-प्रत्युत्तर का सिलसिला आरंभ हो जाता है, और समय रहते बात संभाली नहीं गई तो कटु शब्दों तथा ठेस लगाने वाले व्यवहार के कारण संबंध बिगड़ जाते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि "ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार का बोलना तलवार के समान चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं" (नीतिवचन 12:18); और यह कि "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन 15:1)। बाइबल यह भी सिखाती है कि कभी-कभी कोई प्रत्युत्तर न देना ही किसी बुरे व्यवहार या कटु शब्दों से निपटने का सर्वोत्तम तरीका होता है।

   प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले, धर्म के अधिकारियों ने अपने शब्दों के द्वारा उसे उकसाना चाहा (मत्ती 27:41-43); परन्तु, "वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था" (1 पतरस 2:23)।

   प्रभु यीशु का उदाहरण और उसकी आत्मा से मिलने वाली सामर्थ हमें उन लोगों को, जो हमें ठेस पहुँचाना चाहते हैं, सही प्रकार का प्रत्युत्तर देने की सदबुध्दि देते हैं। यदि हमारा भरोसा अपने प्रभु परमेश्वर पर है तो फिर हमें अपने शब्दों और व्यवहार के प्रत्युत्तर को अपने हथियार नहीं बनाना पड़ेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


किसी कठोर हृदय को तोड़ने वाला बहुधा एक नम्र उत्तर होता है।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो। - रोमियों 12:19-21

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:13-25
1 Peter 2:13 प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्‍ध के आधीन में रहो, राजा के इसलिये कि वह सब पर प्रधान है। 
1 Peter 2:14 और हाकिमों के, क्योंकि वे कुकिर्मयों को दण्‍ड देने और सुकिर्मयों की प्रशंसा के लिये उसके भेजे हुए हैं। 
1 Peter 2:15 क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्‍द कर दो। 
1 Peter 2:16 और अपने आप को स्‍वतंत्र जानो पर अपनी इस स्‍वतंत्रता को बुराई के लिये आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आप को परमेश्वर के दास समझ कर चलो। 
1 Peter 2:17 सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो।
1 Peter 2:18 हे सेवकों, हर प्रकार के भय के साथ अपने स्‍वामियों के आधीन रहो, न केवल भलों और नम्रों के, पर कुटिलों के भी। 
1 Peter 2:19 क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार कर के अन्याय से दुख उठाता हुआ क्‍लेश सहता है, तो यह सुहावना है। 
1 Peter 2:20 क्योंकि यदि तुम ने अपराध कर के घूंसे खाए और धीरज धरा, तो उस में क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम कर के दुख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है। 
1 Peter 2:21 और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो। 
1 Peter 2:22 न तो उसने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली। 
1 Peter 2:23 वह गाली सुन कर गाली नहीं देता था, और दुख उठा कर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आप को सच्चे न्यायी के हाथ में सौपता था। 
1 Peter 2:24 वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। 
1 Peter 2:25 क्योंकि तुम पहिले भटकी हुई भेड़ों के समान थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष के पास फिर आ गए हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4


शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

समझ


   मेरी सहेली मिघन बहुत अच्छी घुड़सवार है, और मैं उससे घोड़ों के बारे में कुछ रोचक बातें सीखती रहती हूँ। उदाहरण के लिए, पृथ्वी पर रहने वाले सभी स्तनधारियों में सबसे बड़ी आँखें होते हुए भी, घोड़ों की दृष्टि कमज़ोर होती है, और वे मनुष्यों से कम प्रकार के रंग देख सकते हैं। इस कारण से वे धरती पर पड़ी हुई सभी वस्तुओं को पहचान नहीं पाते हैं। जब उन्हें धरती पर कोई डण्डा दिखाई देता है तो वे यह नहीं समझ पाते हैं कि यह लाँघ लेने लायक डण्डा है या हानि पहुँचाने की क्षमता रखने वाला साँप। इस कारण जब तक वे भली-भाँति प्रशिक्षित न हों, घोड़े सरलता से भयभीत होकर भाग लेते हैं।

   हम भी भयावह परिस्थितियों से भाग जाने का प्रयास करते हैं। हमें परमेश्वर के वचन बाइबल के पात्र, अय्युब के समान लग सकता है, जिसने अपनी कठिनाईयों का गलत अर्थ निकाला और इच्छा की कि उसका जन्म ही नहीं हुआ होता। क्योंकि वह यह नहीं देख पाया कि उसे तोड़ डालने का प्रयास करने वाला वास्तव में शैतान है, इसलिए उसने समझा कि जिस परमेश्वर में उसने विश्वास किया था, वही उसे नष्ट करने के प्रयास कर रहा है। अपनी विकट परिस्थितियों से अभिभूत होकर वह पुकार उठा, "तो यह जान लो कि ईश्वर ने मुझे गिरा दिया है, और मुझे अपने जाल में फंसा लिया है" (अय्युब 19:6)।

   अय्युब की दृष्टि के समान, हमारी दृष्टि भी सीमित होती है। हम उन कठिन परिस्थितियों से जो हमें डराती हैं, भाग जाना चाहते हैं। परन्तु परमेश्वर के दृष्टिकोण से हम मसीही वि९श्वासी कभी अकेले नहीं हैं। उसे समझ है कि हमें व्यग्र करने वाला और डराने वाला क्या है। वह यह भी समझता है कि जब तक हम उसके पास, उसके साथ बने रहते हैं, हम सुरक्षित रहते हैं। हमारी परिस्थितियाँ, हमारा दैनिक जीवन हमारे लिए अवसर होते हैं कि हम सदा उस पर अपना भरोसा बनाए रखते हुए, अपनी समझ के स्थान पर अपने प्रभु परमेश्वर की समझ का सहारा लें, जिससे हमारे सब कार्य परमेश्वर की इच्छा के अनुसार करें और सफल तथा आशीषित हों। - ऐनी सेटास


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखने से हमारे भय दूर हो जाते हैं।

जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा। परमेश्वर की सहायता से मैं उसके वचन की प्रशंसा करूंगा, परमेश्वर पर मैं ने भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा। कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है? - भजन 56:3-4

बाइबल पाठ: अय्युब 19:1-21
Job 19:1 तब अय्यूब ने कहा, 
Job 19:2 तुम कब तक मेरे प्राण को दु:ख देते रहोगे; और बातों से मुझे चूर चूर करोगे? 
Job 19:3 इन दसों बार तुम लोग मेरी निन्दा ही करते रहे, तुम्हें लज्जा नहीं आती, कि तुम मेरे साथ कठोरता का बरताव करते हो? 
Job 19:4 मान लिया कि मुझ से भूल हुई, तौभी वह भूल तो मेरे ही सिर पर रहेगी। 
Job 19:5 यदि तुम सचमुच मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई करते हो और प्रमाण देकर मेरी निन्दा करते हो, 
Job 19:6 तो यह जान लो कि ईश्वर ने मुझे गिरा दिया है, और मुझे अपने जाल में फंसा लिया है। 
Job 19:7 देखो, मैं उपद्रव! उपद्रव! यों चिल्लाता रहता हूँ, परन्तु कोई नहीं सुनता; मैं सहायता के लिये दोहाई देता रहता हूँ, परन्तु कोई न्याय नहीं करता। 
Job 19:8 उसने मेरे मार्ग को ऐसा रूंधा है कि मैं आगे चल नहीं सकता, और मेरी डगरें अन्धेरी कर दी हैं। 
Job 19:9 मेरा वैभव उसने हर लिया है, और मेरे सिर पर से मुकुट उतार दिया है। 
Job 19:10 उसने चारों ओर से मुझे तोड़ दिया, बस मैं जाता रहा, और मेरा आसरा उसने वृक्ष के समान उखाड़ डाला है। 
Job 19:11 उसने मुझ पर अपना क्रोध भड़काया है और अपने शत्रुओं में मुझे गिनता है। 
Job 19:12 उसके दल इकट्ठे हो कर मेरे विरुद्ध मोर्चा बान्धते हैं, और मेरे डेरे के चारों ओर छावनी डालते हैं। 
Job 19:13 उसने मेरे भाइयों को मुझ से दूर किया है, और जो मेरी जान पहचान के थे, वे बिलकुल अनजान हो गए हैं। 
Job 19:14 मेरे कुटुंबी मुझे छोड़ गए हैं, और जो मुझे जानते थे वह मुझे भूल गए हैं। 
Job 19:15 जो मेरे घर में रहा करते थे, वे, वरन मेरी दासियां भी मुझे अनजाना गिनने लगीं हैं; उनकी दृष्टि में मैं परदेशी हो गया हूँ। 
Job 19:16 जब मैं अपने दास को बुलाता हूँ, तब वह नहीं बोलता; मुझे उस से गिड़गिड़ाना पड़ता है। 
Job 19:17 मेरी सांस मेरी स्त्री को और मेरी गन्ध मेरे भाइयों की दृष्टि में घिनौनी लगती है। 
Job 19:18 लड़के भी मुझे तुच्छ जानते हैं; और जब मैं उठने लगता, तब वे मेरे विरुद्ध बोलते हैं। 
Job 19:19 मेरे सब परम मित्र मुझ से द्वेष रखते हैं, और जिन से मैं ने प्रेम किया सो पलटकर मेरे विरोधी हो गए हैं। 
Job 19:20 मेरी खाल और मांस मेरी हड्डियों से सट गए हैं, और मैं बाल बाल बच गया हूं। 
Job 19:21 हे मेरे मित्रो! मुझ पर दया करो, दया, क्योंकि ईश्वर ने मुझे मारा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29
  • फिलिप्पियों 3


शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017

आग


   मेरे बचपन में मेरी माँ ने मुझे सचेत किया कि मैं कभी आग से न खेलूँ। फिर भी एक दिन मैंने यह देखना चाहा कि यदि मैं खेलूँगा तो क्या हो जाएगा। मैंने कुछ कागज़ और माचिस ली और घर के पिछले आँगन में प्रयोग करने के लिए चला गया। मैंने कागज़ों को भूमि पर रखा, और तेज़ धड़कते हृदय के साथ माचिस को जलाया और कागज़ों में आग लगा दी। तभी मैंने अपनी माँ को आते हुए देखा। पकड़े जाने के डर से मैंने अपने किए को छिपाने के लिए अपने पैर लपटों के ऊपर रख दिए। तुरंत माँ ने चिल्ला कर कहा, "डेन्नी अपने पैर वहाँ से हटाओ! पैरों के नीचे आग है!" सौभाग्यवश मैंने अपने पैर तुरंत हटा लिए और जला नहीं। मुझे तब यह एहसास हुआ कि आग से न खेलने का मेरी माँ का नियम मेरे मज़े को खराब करने के लिए नहीं परन्तु मुझे सुरक्षित रखने के लिए था।

   कभी-कभी हम परमेश्वर के नियमों के पीछे उसके कारणों को समझ नहीं पाते हैं। हमें यह भी लगता है मानो वह हमारे आनन्द को बिगाड़ने की इच्छा रखने वाली आकाशीय शक्ति है, जो हमारे लिए नियम और कानून बना कर हमारे मज़े को खराब करना चाहती है। परन्तु क्योंकि परमेश्वर हमारा भला ही चाहता है, इसीलिए वह चाहता है कि हम उसके आज्ञाकारी हों। जब हम आज्ञाकारी होते हैं, हम उसके प्रेम में बने रहते हैं, और उसकी आशीषों तथा आनन्द से परिपूर्ण रहते हैं (यूहन्ना 15:10-11)।

   इसलिए जब परमेश्वर यह कहता है कि हम पाप न करें तो वह इसलिए जिससे हमारा भला हो सके। वह वास्तव में हमें आग से जलने से बचाए रखना चाहता है, वह हमें नरक की आग की अनन्त पीड़ा से दूर रखना चाहता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमें सुरक्षित रखने के लिए अपने वचन द्वारा हमें सप्रेम सचेत करता है।

भला होता कि उनका मन सदैव ऐसा ही बना रहे, कि वे मेरा भय मानते हुए मेरी सब आज्ञाओं पर चलते रहें, जिस से उनकी और उनके वंश की सदैव भलाई होती रहे! - व्यवस्थाविवरण 5:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:10-20
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:18 यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो, कि उसने तुम से पहिले मुझ से भी बैर रखा। 
John 15:19 यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता, परन्तु इस कारण कि तुम संसार के नहीं, वरन मैं ने तुम्हें संसार में से चुन लिया है इसी लिये संसार तुम से बैर रखता है। 
John 15:20 जो बात मैं ने तुम से कही थी, कि दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं होता, उसको याद रखो: यदि उन्होंने मुझे सताया, तो तुम्हें भी सताएंगे; यदि उन्होंने मेरी बात मानी, तो तुम्हारी भी मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2


गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017

समय


   मेरे मित्र बॉब बोर्डमैन ने लिखा, "यदि मनुष्य की संभावित सामान्य आयु को 70 वर्ष मानकर, उसे 24 घंटे के एक दिन में सीमित कर दिया जाए तो मेरे जीवन में अभी संध्या के 8:30 बज रहे हैं...समय बड़ी तेज़ी से निकलता चला जा रहा है।"

   इस तथ्य को मान लेने की कठिनाई ने कि पृथ्वी पर हमारा समय बहुत सीमित है, और जो है वह बहुत तेज़ी से बीतता चला जा रहा है, "टिक्कर" नामक कलाई-घड़ी को बनाने की प्रेरणा दी, जो आपके जीवन का अनुमानित शेष समय बताती है। इसे बनाने वाले इसके प्रचार के लिए दिए गए विज्ञापन में इसके विषय में कहते हैं कि "यह वह घड़ी है जो आपके जीवन के पल गिनती है, जिससे आप हर पल का महत्व जान सकें।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, भजन 39 में दाऊद ने जीवन के अल्पकालीन होने का सामना किया। दाऊद ने कहा, "हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं" (पद 4)। उसने अपने जीवन काल को एक हाथ की बालिश्त भर का बताया, परमेश्वर के समक्ष क्षण भर का, और मात्र एक श्वास कहा (पद 5)। दाऊद का निष्कर्ष था, "और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है" (पद 7)

   समय बीत रहा है। परमेश्वर हमें जिस प्रकार के लोग देखना चाहता है वैसे होने के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य को खोजने, तथा उसकी सहायता से वैसे बन जाने का समय अभी है। हमारे शाश्वत प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह में सच्चे पश्चाताप और समर्पण द्वारा अपनी अनन्त आशा को सुदृढ़ कर लेना ही हमारे जीवनों को सार्थक बना सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु के लिए जीवन जीने का समय अभी है।

हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों 3:12-13

बाइबल पाठ: भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री के समान रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25
  • फिलिप्पियों 1