ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

महान पुरुस्कार


   प्रयास के प्रत्येक क्षेत्र में कोई न कोई पुरुस्कार ऐसा होता है जिसे उस क्षेत्र के लिए पहचान तथा सफलता का सर्वोच्च पुरुस्कार माना जाता है, जैसे कि ओलंपिक खेल स्पर्धाओं में मिलने वाला स्वर्ण पदक, गायिकी के लिए दिया जाने वाला ग्रैमी पुरुस्कार, सिनेमा के क्षेत्र में ऐकेडमी पुरुस्कार, वैज्ञानिक तथा अन्य क्षेत्रों की उपलब्धियों के लिए नोबेल पुरुस्कार, आदि। ये सभी पुरुस्कार महत्वपूर्ण हैं। परन्तु एक सबसे महान पुरुस्कार है, और उसे कोई भी प्राप्त कर सकता है।

   प्रेरित पौलुस प्रथम ईसवीं में होने वाली खेल स्पर्धाओं के लिए खिलाड़ियों द्वारा पुरुस्कार जीतने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देने के बारे में भली-भांति जानता था। इस बात को ध्यान में रखते हुए, उसने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री में लिखा: "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है" (फिलिप्पियों 3:7)। क्यों? क्योंकि उसके हृदय ने एक नया उद्देश्य स्वीकार किया था: "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (पद 10)। इसलिए, पौलुस ने कहा, "...उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था" (पद 12)। अपनी इस दौड़ को भली-भांति पूरा कर लेने का पुरुस्कार उसके लिए धार्मिकता का मुकुट था (2 तिमुथियुस 4:8)।

   हम में से प्रत्येक उस पुरुस्कार को पाने के लिए प्रयास कर सकता है, यह जानते हुए कि ऐसा करने से हम प्रभु का आदर करते हैं। प्रतिदिन अपने दैनिक कार्यों को प्रभु की महिमा के लिए करते रहने से हम उस महान पुरुस्कार की ओर बढ़ते जाते हैं - उस स्वर्गीय पुरुस्कार की ओर जिसके लिए परमेश्वर, मसीह यीशु में होकर हमें बुलाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह के लिए जो कुछ भी इस जीवन में किया जाता है, 
उसका पुरुस्कार आने वाले जीवन में अवश्य मिलेगा।

भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


सोमवार, 20 नवंबर 2017

प्रमुख उद्देश्य


   कई बातों के लिए साथ के लोगों से आने वाला दबाव हमारे दैनिक जीवन का एक भाग है। कभी-कभी हम अपने निर्णय इस आधार पर लेते हैं कि लोग क्या सोचेंगे या कहेंगे, न कि इस बात पर कि हमारे परमेश्वर को क्या पसन्द आता है, क्योंकि हमें चिंता रहती है कि यदि हम उनके अनुसार नहीं चले तो फिर लोग हम पर टिप्पणी करेंगे या हमारा मज़ाक उड़ाएंगे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपने साथ के लोगों से प्रभु यीशु में अपने विश्वास के प्रति काफ़ी दबाव झेला। यहूदी धर्म से मसीही विश्वास में आने वाले कुछ विश्वासी मानते थे कि वास्तव में उद्धार प्राप्त करने के लिए अन्यजातियों से मसीही विश्वास में आए लोगों को खतना करवा लेना चाहिए (गलातियों 1:7; देखें 6:12-15)। परन्तु पौलुस अपने निर्णय पर दृढ़ बना रहा और प्रचार करता रहा कि उद्धार केवल परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा मसीह यीशु पर लाए गए विश्वास मात्र ही से है; इसमें और किसी कार्य का कोई स्थान नहीं है। उसके इस प्रचार के लिए उस पर स्वयं ही अपने आप को प्रेरित बना लेने का आरोप लगाया गया। उस पर यह आरोप भी लगाया गया कि प्रेरितों ने कभी उसके द्वारा प्रचार किए जाने वाले सुसमाचार के स्वरूप का अनुमोदन नहीं किया था (2:1-10)।

   इस दबाव के होते हुए भी, पौलुस इस बात को लेकर बिलकुल स्पष्ट था कि वह किस की सेवा कर रहा है - मसीह यीशु की। उसके लिए मनुष्यों का नहीं, वरन परमेश्वर के अनुमोदन का स्थान सर्वोपरि था (गलातियों 1:10)। उसने अपने लिए यह लक्ष्य निर्धारित किया हुआ था कि वह मनुष्यों से नहीं वरन परमेश्वर की स्वीकृति से कार्य करेगा।

   इसी प्रकार हम मसीही विश्वासी भी मसीह के सेवक हैं। लोग चाहे हमें आदर दें अथवा हम से घृणा करें, हमारी निंदा करें या प्रशंसा, हमारा उद्देश्य परमेश्वर की सेवा करना है। एक दिन हम में से प्रत्येक को परमेश्वर के सामने अपने जीवन का, अपनी इस सेवकाई का हिसाब देना होगा (रोमियों 14:12)।

   इसका यह अर्थ नहीं है कि हमें लोगों की बात की कदापि कोई चिंता नहीं करनी चाहिए; परन्तु यह कि अन्ततः हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए कि हम परमेश्वर को भावते रहने वाले बनें। हम सभी अन्त में अपने विषय यही सुनना चाहेंगे, "धन्य हे अच्‍छे और विश्वासयोग्य दास" (मत्ती 25:23)। इसके लिए मनुष्यों को नहीं वरन परमेश्वर को प्रसन्न करना अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बना लें। - जेमी फर्नान्डेज़ गर्रिदो


सदैव यीशु का अनुसरण करते रहें।

सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा। - रोमियों 14:12

बाइबल पाठ: गलातियों 1:6-10
Galatians 1:6 मुझे आश्चर्य होता है, कि जिसने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Galatians 1:7 परन्तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Galatians 1:8 परन्तु यदि हम या स्वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Galatians 1:9 जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्या मनुष्यों को मनाता हूं या परमेश्वर को? क्या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Galatians 1:10 यदि मैं अब तक मनुष्यों को ही प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2


रविवार, 19 नवंबर 2017

निर्देष


   जब वस्तुओं को जोड़ कर बनाना होता है, वे चाहे इलैक्ट्रौनिक हों या अन्य कोई, तो मेरे और मेरे पुत्र स्टीव की कार्य विधि बहुत भिन्न है। स्टीव को यांत्रिक रीति से कार्य करना अच्छा लगता है; इसलिए मैं अभी उस वस्तु को जोड़ने और बनाने के निर्देषों को पढकर समझने का प्रयास ही कर रहा होता हूँ, कि इतने में वह निर्देषों को पढ़े बिना ही उसे लगभग आधा बना चुका होता है। कभी-कभी हम निर्देषों को जाने बिना या उन का पालन किए बिना ही काम चला सकते हैं। परन्तु यदि हमें एक ऐसा जीवन बनाना है जो परमेश्वर की भलाई और बुद्धिमता को दिखाता है तो परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उसके निर्देषों की अवहेलना कर के हम ऐसा कदापि नहीं कर सकते हैं।

   इस तथ्य का एक अच्छा उदाहरण बाबुल की बन्धुआई से लौट कर आने वाले इस्त्राएली हैं। अपनी मातृभूमि में लौट कर आने के पश्चात वे परमेश्वर की उपासना को पुनः स्थापित करने के प्रयास करने लगे; और इसके लिए उन्होंने "...कमर बान्ध कर इस्राएल के परमेश्वर की वेदी को बनाया कि उस पर होमबलि चढ़ाएं, जैसे कि परमेश्वर के भक्त मूसा की व्यवस्था में लिखा है" (एज़्रा 3:2)। सही प्रकार से वेदी बनाने और परमेश्वर द्वारा लैव्यवस्था 23:33-43 में दी गई विधि के अनुसार झोंपड़ियों का पर्व मनाने में उन्होंने वैसा ही किया जैसा परमेश्वर ने अपने वचन में निर्दिष्ट किया था।

   प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने अनुयायियों को कुछ निर्देष दिए हैं। प्रभु ने कहा, "...तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख"; और "...तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख" (मत्ती 22:37, 39)। जब हम प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं और उसका अनुसरण करने का निर्णय लेते हैं, अपने जीवन उसे समर्पित करते हैं, तो वह सही रीति से जीवन जीने के लिए हमारा मार्गदर्शन भी करता है। वह हमारा सृष्टिकर्ता है और हमें तथा हमारे बारे में, हम से कहीं अधिक अच्छी रीति से जानता है; उसे हम से अधिक अच्छे से पता है कि जीवन को भली-भांति जीने के लिए हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं; हमारे लिए क्या उपयुक्त एवं उचित है और क्या नहीं। इसलिए जब हम मसीह यीशु को अपना प्रभु मान लेते हैं तो उसके निर्देशों के अनुसार जीवन व्यतीत करने में ही हमारी भलाई है। - डेव ब्रैनन


यदि हम चाहते हैं कि परमेश्वर हमारी अगुवाई करे, 
तो हमें उसका अनुसरण करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

जब तुम मेरा कहना नहीं मानते, तो क्यों मुझे हे प्रभु, हे प्रभु, कहते हो? - लूका 6:46

बाइबल पाठ: एज़्रा 3:1-6
Ezra 3:1 जब सातवां महीना आया, और इस्राएली अपने अपने नगर में बस गए, तो लोग यरूशलेम में एक मन हो कर इकट्ठे हुए। 
Ezra 3:2 तब योसादाक के पुत्र येशू ने अपने भाई याजकों समेत और शालतीएल के पुत्र जरूब्बाबेल ने अपने भाइयों समेत कमर बान्ध कर इस्राएल के परमेश्वर की वेदी को बनाया कि उस पर होमबलि चढ़ाएं, जैसे कि परमेश्वर के भक्त मूसा की व्यवस्था में लिखा है। 
Ezra 3:3 तब उन्होंने वेदी को उसके स्थान पर खड़ा किया क्योंकि उन्हें उस ओर के देशों के लोगों का भय रहा, और वे उस पर यहोवा के लिये होमबलि अर्थात प्रतिदिन सबेरे और सांझ के होमबलि चढ़ाने लगे। 
Ezra 3:4 और उन्होंने झोंपडिय़ों के पर्व को माना, जैसे कि लिखा है, और प्रतिदिन के होमबलि एक एक दिन की गिनती और नियम के अनुसार चढ़ाए। 
Ezra 3:5 और उसके बाद नित्य होमबलि और नये नये चान्द और यहोवा के पवित्र किए हुए सब नियत पर्वों के बलि और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये सब स्वेच्छाबलि हर एक के लिये बलि चढ़ाए। 
Ezra 3:6 सातवें महीने के पहिले दिन से वे यहोवा को होमबलि चढ़ाने लगे। परन्तु यहोवा के मन्दिर की नेव तब तक न डाली गई थी।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1


शनिवार, 18 नवंबर 2017

प्रतिबिंबित


   ऊँचे और सीधे खड़े पहाड़ों की तलहटी में स्थित होने तथा उत्तरी ध्रुव के निकट की अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण नॉर्वे देश के रजूकान शहर में अक्तुबर से मार्च तक सूर्य की सीधी रौशनी पहुँचने नहीं पाती है। उस शहर को रौशन करने के लिए रजूकान शहर के लोगों ने पहाड़ों पर विशाल दर्पण लगाए जो सूर्य के प्रकाश को शहर में प्रतिबिंबित करते हैं; क्योंकि ये दर्पण आकाश में सूरज की स्थिति के साथ-साथ घूमते रहते हैं इसलिए सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक वे शहर में लगातार रौशनी को बनाए रखते हैं।

   मैं मसीही जीवन को भी इसी प्रकार से देखता हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा कि उसके अनुयायी "जगत की ज्योति हैं" (मत्ती 5:14); और यूहन्ना ने लिखा कि मसीह यीशु ही वह सच्ची ज्योति है जो "अन्धकार में चमकती है" (यूहन्ना 1:5)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आमंत्रित किया कि, "तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। यह प्रभु की ओर से आवाहन है कि हम जो उसके लोग हैं, घृणा का प्रत्युत्तर प्रेम से दें, परेशानी में धैर्य दिखाएं, और संघर्षों में शान्ति को प्रदर्शित करें। प्रेरित पौलुस हमें स्मरण करवाता है कि, "क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान के समान चलो" (इफिसियों 5:8)।

   प्रभु यीशु ने यह भी कहा कि, "...जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा" (यूहन्ना 8:12)। हमारी ज्योति परमेश्वर के पुत्र हमारे प्रभु यीशु से है; हम उसकी ज्योति को संसार में प्रतिबिंबित करते हैं। जैसे कि यदि सूर्य न हो तो रजूकान के उन विशाल दर्पणों को प्रतिबिंबित करने के लिए कोई ज्योति नहीं मिलेगी, उसी प्रकार यदि हम में प्रभु यीशु का वास न हो तो हम भी संसार को कोई ज्योति प्रतिबिंबित नहीं करने पाएंगे। - लॉरेंस दरमानी


प्रभु की ज्योति को प्रतिबिंबित करें और उसके लिए चमकें।

और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। - यूहन्ना 1:5

बाइबल पाठ: मत्ती 5:14-16
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13


शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

निर्भर


   मेरी बेटी का ऑपरेशन हुआ था, और ऑपरेशन के पश्चात मैं उसके पास बैठी हुई थी। जब उसे होश आया और उसने आँखें खोलीं, तो साथ ही उसे यह आभास भी हुआ कि वह कष्ट में है और वह रोने लगी। मैंने उसकी बाहें सहलाने के द्वारा उसे निश्चिंत करना चाहा, परन्तु वह और व्याकुल हो गई। फिर नर्स की सहायाता से मैंने उसे अपनी गोदी में लिया, उसके गालों से आँसू पोंछे, और उससे प्रेम के साथ बात करनी लगी, उसे समझाया कि शीघ्र ही वह बेहतर अनुभव करने लगेगी।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वकता में होकर अपने लोगों, इस्त्राएलियों, को स्मरण कराया कि "जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दूंगा" (यशायाह 66:13)। परमेश्वर ने वायदा किया कि वह उन्हें शान्ति देगा और अपनी गोद में ऐसे लिए चलेगा, जैसे एक माँ अपने बच्चे को गोदी में लिए चलती है। परमेश्वर की ओर से यह प्रेम भरा सन्देश उसके उन लोगों के लिए था जो उसके प्रति श्रद्धा रखते थे।

   अपने लोगों को सांत्वना देने की परमेश्वर की इच्छा और सामर्थ्य पौलुस द्वारा कुरिन्थियों को लिखी दूसरी पत्री में फिर प्रकट होती है। पौलुस ने लिखा कि "वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों" (2 कुरिन्थियों 1:4)। हमारी परेशानियों में परमेश्वर हमारे साथ कोमल और सहानुभूतिपूर्ण होता है। एक दिन हमारी सारी परेशानियों का अन्त हो जाएगा, हमारे सभी आँसू सदा के लिए पोंछ डाले जाएंगे और हम अनन्तकाल तक परमेश्वर के साथ रहेंगे (प्रकशितवाक्य 21:3-4)। उस दिन के आने तक हम परमेश्वर पर निर्भर रह सकते हैं कि वह हमसे प्रेम और सहायता का व्यवहार बनाए रखेगा, हमें अपनी शान्ति में रखेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर अपने लोगों को सांत्वना और शान्ति देता है।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: यशायाह 66:5-13
Isaiah 66:5 तुम्हारे भाई जो तुम से बैर रखते और मेरे नाम के निमित्त तुम को अलग कर देते हैं उन्होंने कहा है, यहोवा की महिमा तो बढ़े, जिस से हम तुम्हारा आनन्द देखते पाएं; परन्तु उन्हीं को लज्जित होना पड़ेगा।
Isaiah 66:6 सुनो, नगर से कोलाहल की धूम, मन्दिर से एक शब्द, सुनाई देता है! वह यहोवा का शब्द है, वह अपने शत्रुओं को उनकी करनी का फल दे रहा है! 
Isaiah 66:7 उसकी पीड़ाएं उठाने से पहले ही उसने जन्मा दिया; उसको पीड़ाएं होने से पहिले ही उस से बेटा जन्मा। 
Isaiah 66:8 ऐसी बात किस ने कभी सुनी? किस ने कभी ऐसी बातें देखी? क्या देश एक ही दिन में उत्पन्न हो सकता है? क्या एक जाति क्षण मात्र में ही उत्पन्न हो सकती है? क्योंकि सिय्योन की पीड़ाएं उठी ही थीं कि उस से सन्तान उत्पन्न हो गए। 
Isaiah 66:9 यहोवा कहता है, क्या मैं उसे जन्माने के समय तक पहुंचाकर न जन्माऊं? तेरा परमेश्वर कहता है, मैं जो गर्भ देता हूं क्या मैं कोख बन्द करूं? 
Isaiah 66:10 हे यरूशलेम से सब प्रेम रखने वालो, उसके साथ आनन्द करो और उसके कारण मगन हो; हे उसके विषय सब विलाप करने वालो उसके साथ हषिर्त हो! 
Isaiah 66:11 जिस से तुम उसके शान्तिरूपी स्तन से दूध पी पीकर तृप्त हो; और दूध पीकर उसकी महिमा की बहुतायत से अत्यन्त सुखी हो।
Isaiah 66:12 क्योंकि यहोवा यों कहता है, देखो, मैं उसकी ओर शान्ति को नदी के समान, और अन्यजातियों के धन को नदी की बाढ़ के समान बहा दूंगा; और तुम उस से पीओगे, तुम उसकी गोद में उठाए जाओगे और उसके घुटनों पर कुदाए जाओगे। 
Isaiah 66:13 जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दुंगा; तुम को यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12


गुरुवार, 16 नवंबर 2017

संघर्ष


   अप्रैल 25, 2015 ANZAC (Australia New Zealand Army Corps) का 100वाँ स्थापना दिवस था। इस दिन को प्रतिवर्ष ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड की सेनाएँ मिलकर मनाती हैं, अपने उन सैनिकों की याद में जिन्होंने प्रथम विश्व-युद्ध साझा सेना के रूप में लड़ा था। यह उस समय को दिखाता है जब दोनों में से किसी भी देश को युद्ध के जोखिम अकेले उठाने नहीं पड़े थे; दोनों देशों के सैनिक संघर्षों में साथ-साथ थे।

   प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों को भी जीवन के संघर्षों में एक दूसरे के साथ खड़ा होने के लिए कहा गया है। जैसे कि पौलुस ने कहा, "तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो" (गलतियों 6:2)। जब कठिन समय आएँ तो जीवन के संघर्षों में एक साथ खड़े होने तथा मिलकर कार्य करने से हम एक दूसरे को सामर्थ्य एवं सहायता प्रदान कर सकते हैं। जब हम एक दूसरे के प्रति मसीह के प्रेम और देख-भाल को व्यक्त करते हैं, तो जीवन की कठिनाइयाँ हमें मसीह यीशु और एक दुसरे के निकट लाने वाली बन जाती हैं - न कि हमें एक दुसरे से अलग कर देने वाली।

   औरों के संघर्षों को परस्पर बाँटने के द्वारा हम प्रभु यीशु के प्रेम के नमूने को व्यावाहरिक करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता ने प्रभु के विषय में जो कहा उसे मत्ती ने उद्धृत किया: "ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो, कि उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया" (मत्ती 8:17)। हमारे संघर्ष चाहे कितने भी बड़े क्यों न हों, हमें कभी अकेले उनका सामना करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। - बिल क्राउडर


हम एक साथ मिलकर अकेले से कहीं अधिक दूरी तक जा सकते हैं।

निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। - रोमियों 15:1

बाइबल पाठ: गलतियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। 
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। 
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। 
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40


बुधवार, 15 नवंबर 2017

धन्यवादी


   अपनी जीवनी में कोरी टेन बूम ने अपने तथा अपनी बहन बेट्सी तथा अन्य बन्दियों पर जर्मन सेनाओं द्वारा 1940 के दशक के आरंभिक भाग में नज़रबन्दी शिविर में किए गए दिल दहला देने वाले अत्याचारों का वर्णन किया है। एक बार उन्हें एक जाँच के दौरान निर्वस्त्र होकर पंक्ति में खड़े होने को कहा गया; उस नग्नावस्था में कोरी अपने आप को भ्रष्ट किया और त्यागा हुआ अनुभव कर रही थी। तभी उसे स्मरण हो आया कि सारे संसार का उद्धारकर्ता प्रभु यीशु भी, सारे संसार के सभी लोगों के पापों के दण्ड को सहते हुए निर्वस्त्र अवस्था में क्रूस पर टंगा रहा था। तुरंत कोरी का मन प्रभु के प्रति धन्यवाद और आराधना से भर आया, और उसने साथ खड़ी अपनी बहन बेट्सी से फुसफुसा कर कहा, "बेट्सी, उन्होंने प्रभु को भी निर्वस्त्र कर दिया था।" यह सुनते ही बेट्सी भी चौंक गई और लंबी सांस लेकर बोली, "ओह कोरी, और मैंने कभी उसे इसके लिए धन्यवाद व्यक्त नहीं किया।"

   इस परेशानी, संघर्ष, और दुःखों से भरे संसार में बिना धन्यवाद दिए रहना बहुत सरल है। हमारे पास प्रतिदिन कितनी ही बातों के लिए शिकायतें करने के कितने ही कारण होते हैं। किंतु परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 100 पाठकों को उभारता है कि परमेश्वर के लोग सदा आनन्दित, मग्न, और धन्यवादी रहें, क्योंकि "...उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं" (पद 3)। जब हम यह स्मरण रखेंगे कि हम कौन हैं, और साथ ही हमें यह दर्जा देने के लिए प्रभु यीशु मसीह द्वारा हमारे लिए दिए गए बलिदान को और उसके महान प्रेम को भी स्मरण रखेंगे, तो हम उसके प्रति अपनी हर परिस्थिति में धन्यवादी भी रह सकेंगे।

   संसार की निर्ममता और क्रुरता आपके अन्दर से धन्यवादी मन को छीनने न पाए; सदा स्मरण रखें कि प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास के कारण आप परमेश्वर की सन्तान हैं। उसने आपके प्रति अपने प्रेम, अनुग्रह और भलाई का प्रमाण क्रूस पर दिखाया है; प्रत्युत्तर में हमें उसके इस बलिदान और प्रेम के लिए धन्यवादी बने रहना चाहिए। - ऐल्बर्ट ली


जब आप प्रभु से मिली आशीषें गिनने लगते हैं, 
तो मन से आराधना स्वतः ही निकलने लगती है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो! 
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ! 
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो! 
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19