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मंगलवार, 9 जनवरी 2018

उद्धार के सोते


   जब लोग धरती के अन्दर गहरे कुएँ या छेद बनाते हैं तो वे पानी निकालने, तेल निकालने, या फिर धरती के भीतरी भाग के नमूने निकालने के लिए ऐसा करते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम यशायाह 12 में पाते हैं कि परमेश्वर ने अपने लोगों से, जो आत्मिक एवं भौगोलिक मरूभूमी में रह रहे थे, चाहा कि वे उसके “उद्धार के सोतों” को खोजें। यशायाह भविष्यद्वक्ता ने परमेश्वर से मिलने वाले उद्धार को तरोताज़गी प्रदान करने वाले सर्वोत्तम जल के समान बताया। बहुत वर्षों तक परमेश्वर के विमुख चलने के कारण, यहूदा अब बंधुवाई में जाने वाला था, क्योंकि परमेश्वर ने विदेशी आक्रमणकारियों को उनपर हमला करने और उन्हें तित्तर-बित्तर करने की अनुमति दे दी थी। परन्तु, यशायाह भविष्यद्वक्ता ने कहा, कुछ बचे हुए लोग अपने इस निवास-स्थान को लौटकर आएँगे, जो परमेश्वर की ओर से चिन्ह होगा कि उसके प्रति विमुख तथा अनाज्ञाकारी होने के बावजूद, परमेश्वर फिर भी उनके साथ बना रहा है (यशायाह 11:11-12)।

   यशायाह 12 एक स्तुति गीत है, जो परमेश्वर की उसकी भलाई और विश्वासयोग्यता, विशेषकर उद्धार देने की विश्वासयोग्यता के लिए है। यशायाह ने लोगों को प्रोत्साहित किया कि परमेश्वर के उद्धार के सोतों की गहराईयों में वे परमेश्वर के अनुग्रह, सामर्थ्य, और आनन्द के ‘शीतल जल’ को अनुभव करेंगे (पद 1-3)। इस ‘शीतल जल’ से फिर वे हृदयों की तरोताज़गी तथा सामर्थ्य पाएँगे जिससे उनके हृदयों से परमेश्वर के प्रति स्तुति तथा कृतज्ञता प्रवाहित होगी (पद 4-6)।

   परमेश्वर चाहता है कि हम सभी, अपने पापों के अंगीकार और उनसे पश्चाताप के द्वारा, उसके उद्धार के सोतों में पाए जाने वाले सुखदायी ‘शीतल जल’ का व्यक्तिगत अनुभव करें। - मारविन विलियम्स


परमेश्वर के उद्धार के सोते कभी सूखते नहीं हैं।

उस समय प्रभु अपना हाथ दूसरी बार बढ़ा कर बचे हुओं को, जो उसकी प्रजा के रह गए हैं, अश्शूर से, मिस्र से, पत्रोस से, कूश से, एलाम से, शिनार से, हमात से, और समुद्र के द्वीपों से मोल ले कर छुड़ाएगा। वह अन्यजातियों के लिये झण्डा खड़ा कर के इस्राएल के सब निकाले हुओं को, और यहूदा के सब बिखरे हुओं को पृथ्वी की चारों दिशाओं से इकट्ठा करेगा। - यशायाह 11:11-12

बाइबल पाठ: यशायाह 12
Isaiah 12:1 उस दिन तू कहेगा, हे यहोवा, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, क्योंकि यद्यिप तू मुझ पर क्रोधित हुआ था, परन्तु अब तेरा क्रोध शान्त हुआ, और तू ने मुझे शान्ति दी है।
Isaiah 12:2 परमेश्वर मेरा उद्धार है, मैं भरोसा रखूंगा और न थरथराऊंगा; क्योंकि प्रभु यहोवा मेरा बल और मेरे भजन का विषय है, और वह मेरा उद्धारकर्ता हो गया है।
Isaiah 12:3 तुम आनन्द पूर्वक उद्धार के सोतों से जल भरोगे।
Isaiah 12:4 और उस दिन तुम कहोगे, यहोवा की स्तुति करो, उस से प्रार्थना करो; सब जातियों में उसके बड़े कामों का प्रचार करो, और कहो कि उसका नाम महान है।
Isaiah 12:5 यहोवा का भजन गाओ, क्योंकि उसने प्रतापमय काम किए हैं, इसे सारी पृथ्वी पर प्रगट करो।
Isaiah 12:6 हे सिय्योन में बसने वाली तू जयजयकार कर और ऊंचे स्वर से गा, क्योंकि इस्राएल का पवित्र तुझ में महान है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 23-24
  • मत्ती 7



सोमवार, 8 जनवरी 2018

परिपूर्ण और संतोषजनक


   जब मैं युवा था, तो अपनी बात मनवाने के लिए मैं बहुधा दलील दिया दिया करता था, “परन्तु और सब भी तो कर रहे हैं,” और मुझे लगता था कि इस तर्क के सहारे मैं अपनी बात मनवा लूँगा। परन्तु मेरे माता-पिता मेरी बात मानने के लिए कभी इस तर्क के आगे नहीं झुके, यदि उन्हें लगा कि जो मैं कह अथवा चाह रहा हूँ वह असुरक्षित, अनुचित या मूर्खतापूर्ण है, मैं उस बात के लिए चाहे जितना अधीर और जोर देने वाला रहा हूँ, उन्होंने उसे कभी स्वीकार नहीं किया।

   जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं, अपनी बात मनवाने या अपनी इच्छा पूरी करने के लिए हम अपने तर्कों और बहानों के खजाने में और नए तर्क तथा बहाने जोड़ते चले जाते हैं: “इससे किसी को कोई हानि नहीं होगी”, “यह गैरकानूनी नहीं है”, “पहले उसने मेरे साथ ऐसा किया”, “उसे पता नहीं चलेगा” आदि कितने ही ऐसे बहाने और तर्क हैं जिनके सहारे हम अपनी बात को ऊपर रखना चाहते हैं, पूरा होता हुआ देखना चाहते हैं। इन सभी और ऐसे ही अन्य सभी तर्कों के पीछे भावना होती है कि जो मैं चाहता हूँ, वही सबसे महत्वपूर्ण तथा सबसे अधिक आवश्यक है।

   अंततः यही त्रुटिपूर्ण सोच, परमेश्वर के संबंध में हमारे विचारों और विश्वास का आधार भी बन जाती है। एक झूठ जिसे हम बहुधा मानना चुन लेते हैं, है – सृष्टि का केन्द्र परमेश्वर नहीं वरन हम हैं। हमें लगने लगता है कि जब हम सँसार को अपनी इच्छाओं और पसन्द के अनुसार पुनःव्यवस्थित कर लेंगे तब हम प्रसन्न और निश्चिन्त हो जाएँगे। यह झूठ हमें युक्तिसंगत प्रतीत होता है क्योंकि यह हमें वह अपनी लालसाओं को पा लेने का शीघ्र और सरल उपाय लगता है। इस तर्क का आधार यह विचार है: “परमेश्वर प्रेम है; वह मुझे प्रसन्न देखना चाहता है; इसलिए जिस बात से मुझे प्रसन्नता मिलती है, वह उचित तथा परमेश्वर को स्वीकार भी होगी।” किंतु इस विचार के आधीन होकर कार्य करना अंततः प्रसन्नता और संतोष नहीं, दुःख ही लाता है।

   प्रभु यीशु ने उन लोगों से, जिन्होंने उस पर विश्वास करने का दावा किया, कहा कि वह सत्य ही है जो उन्हें वास्तव में स्वतंत्र करेगा (यूहन्ना 8:31-32)। परन्तु प्रभु ने सचेत भी किया: “मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है” (पद 34)। सबसे उत्तम प्रसन्नता उस स्वतंत्रता से मिलती है जिसे हम इस सत्य ग्रहण कर लेने पर पाते हैं कि परिपूर्ण और संतोषजनक जीवन का आधार तथा मार्ग प्रभु यीशु मसीह ही है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सच्चे सुख और प्रसन्नता के लिए कोई छोटा मार्ग नहीं है।

तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। - यूहन्ना 15:4-5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-38
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा।
John 8:33 उन्होंने उसको उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?
John 8:34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
John 8:35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है।
John 8:36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे।
John 8:37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
John 8:38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 20-22
  • मत्ती 6:19-34


रविवार, 7 जनवरी 2018

अनुग्रह


   मेरा घर एक बड़े पहाड़ की जड़ में स्थित घाटी में एक पानी के नाले कि किनारे पर है। जब शरद ऋतु के बाद बर्फ पिघलती है, या जब कभी भारी बारिश होती है, वह नाला नदी का रूप ले लेता है। उसके पानी में इतनी गहराई और वेग हो जाता है कि लोग उसमें डूब चुके हैं। एक दिन मैं उस नाले के उद्गम को देखने निकल पड़ा। नाले के किनारे से होते हुए पहाड़ के ऊपर चढ़ने पर मुझे पता चला कि उस नाले का पानी पहाड़ के ऊपर स्थित एक बर्फ से ढके मैदान से आ रहा था। उस मैदान से बर्फ पिघल कर छोटी-छोटी नालियों से नीचे की ओर बहना आरंभ करती है, और ये नालियां एक-दूसरे के साथ मिलकर फिर वह नाला बना देती हैं जो मेरे घर के पास से बहता है।

   इससे मुझे प्रार्थना के बारे में विचार आया कि अधिकांशतः हम प्रार्थना संबंधी प्रवाह को गलत ओर करते हैं। हम नीचे, अपनी चिंताओं से, ऊपर परमेश्वर की ओर जाना चाहते हैं। हम परमेश्वर को अपनी बातों, आवश्यकताओं और चिंताओं के बारे में ऐसे बताते हैं, जैसे कि परमेश्वर को उनके बारे में कुछ पता ही नहीं है। हम परमेश्वर से ऐसे विनती करते हैं, मानो किसी रीति से परमेश्वर के मन को बदल देंगे, ईश्वरीय अनिच्छा को परिवर्तित कर देंगे। क्या हमें ऊपर, जहाँ से परमेश्वर के अनुग्रह का प्रवाह आरंभ होता है, वहाँ से ही आरंभ नहीं करना चाहिए?

   जब हम अपना दृष्टिकोण बदलते हैं तो हमें एहसास होता है कि परमेश्वर पहले से ही हमारी चिंताओं और आवश्यकताओं से अवगत है, और उनके लिए कार्यरत है। हमारा स्वर्गीय पिता जानता है कि हमें किस बात की आवश्यकता है (मत्ती 6:8)।

   जल के समान, ईश्वरीय अनुग्रह भी ऊपर से नीचे की ओर प्रवाहित होता है। हमें परमेश्वर के साथ आरंभ कर के उससे पूछना चाहिए कि पृथ्वी पर उसके कार्य में हम क्या भूमिका निभा सकते हैं। प्रार्थना के इस नए आरंभ बिंदु के साथ हमारा परिप्रेक्ष्य बदल जाता है। हम अपने चारों ओर प्रकृति में एक महान कलाकार की कलाकृतियों को देखने लगते हैं। हम मनुष्यों को देखते हैं और परमेश्वर की छवि में बने अनन्त नियति वाले व्यक्तियों को पाते हैं। इस बदले हुए दृष्टिकोण के कारण परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता, धन्यवाद और स्तुति स्वतः ही हमारे हृदयों से निकलने लगते हैं; हम चिंता करने वाले नहीं वरन आराधना करने वाले बन जाते हैं। - फिलिप यैन्सी


प्रार्थना परमेश्वर के प्रावधानों को हमारी आवश्यकताओं के साथ मिला देती है।

इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। – मत्ती-6:31-33

बाइबल पाठ: मत्ती 6:5-13
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके।
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों के समान बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी।
Matthew 6:8 सो तुम उन के समान न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है।
Matthew 6:9 सो तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो; “हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।
Matthew 6:10 तेरा राज्य आए; तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो।
Matthew 6:11 हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे।
Matthew 6:12 और जिस प्रकार हम ने अपने अपराधियों को क्षमा किया है, वैसे ही तू भी हमारे अपराधों को क्षमा कर।
Matthew 6:13 और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा; क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।” आमीन।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 18-19
  • मत्ती 6:1-18


शनिवार, 6 जनवरी 2018

साहस


   इंग्लैण्ड के लंडन शहर के वेस्टमिनिस्टर में स्थित घंटाघर में प्रसिद्ध बिग बेन घड़ी स्थापित है। परम्परानुसार उस घड़ी के घंटों की सुरीली लय हैंडल की सुप्रसिद्ध वाद्य रचना मस्सायाह (Messiah) के अंश “I Know That My Redeemer Liveth” से ली गई है। बाद में इस लय के साथ ये शब्द जोड़ दिए गए और उन्हें घंटों के कमरे में लिख कर लगा दिया गया:
     प्रभु, इस पल आप हमारे मार्गदर्शक हों;
     तब आपकी सामर्थ्य से कोई पग नहीं फिसलेगा।

   ये शब्द परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 37 के पदों की ओर संकेत करते हैं: “मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है; चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है” (पद 23-24)। ध्यान कीजिए परमेश्वर अपने बच्चों के जीवन और अनुभवों में कितनी गहराई और रुचि के साथ संलग्न रहता है: “...क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है” (पद 23)। पद 31 इसमें आगे जोड़ता है: “उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते ।”

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह कितनी अद्भुत बात है! इस सृष्टि का सृष्टिकर्ता न केवल हमें संभाल कर रखता है और हमारी सहायता करता है, वरन सदा ही हमारे जीवन के हर पल पर बारीकी से नज़र बनाए रखता है। इसीलिए प्रेरित पतरस बड़े भरोसे के साथ हमें निमंत्रण दे सका: “और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है” (1 पतरस 5:7)। परमेश्वर की इसी देखभाल का अटल भरोसा हमें हर बात, हर परिस्थिति का सामना करने का साहस प्रदान करता है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के हाथों में रहने वाले व्यक्ति से अधिक सुरक्षित कोई हो नहीं सकता है।

यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। - भजन 145:14

बाइबल पाठ: भजन 37:20-31
Psalms 37:20 दुष्ट लोग नाश हो जाएंगे; और यहोवा के शत्रु खेत की सुथरी घास के समान नाश होंगे, वे धूएं के समान लुप्त हो जाएंगे।
Psalms 37:21 दुष्ट ऋण लेता है, और भरता नहीं परन्तु धर्मीं अनुग्रह कर के दान देता है;
Psalms 37:22 क्योंकि जो उस से आशीष पाते हैं वे तो पृथ्वी के अधिकारी होंगे, परन्तु जो उस से श्रापित होते हैं, वे नाश हो जाएंगे।
Psalms 37:23 मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है;
Psalms 37:24 चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।
Psalms 37:25 मैं लड़कपन से ले कर बुढ़ापे तक देखता आया हूं; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है।
Psalms 37:26 वह तो दिन भर अनुग्रह कर कर के ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है।
Psalms 37:27 बुराई को छोड़ भलाई कर; और तू सर्वदा बना रहेगा।
Psalms 37:28 क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा।
Psalms 37:29 धर्मी लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और उस में सदा बसे रहेंगे।
Psalms 37:30 धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है।
Psalms 37:31 उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।


एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 16-17
  • मत्ती 5:27-48



शुक्रवार, 5 जनवरी 2018

अकेले


   क्रिसमस के समय आई हुई डाक को देखते हुए मुझे एक बहुमूल्य चीज़ मिली – हाथ से बनाया गया एक क्रिसमस कार्ड; जो पुनःउपयोग के लिए तैयार किए गए कार्ड पर बनाया गया था। सामान्य वाटर-कलर द्वारा बनाया गया पहाड़ियों और सदाबहार वृक्षों का दृश्य, और उसके नीचे कार्ड के मध्य में हाथ से लिखा एक सन्देश: “आपको शान्ति मिले!”

   उस कार्ड का बनाने वाला मेरा एक कैदी मित्र था। जब मैं उसकी इस हस्त-कला को सराह रहा था, तब मुझे एहसास हुआ कि मैंने दो वर्ष से उससे कोई पत्राचार नहीं किया था।

   बहुत पहले की बात है, परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि एक और कैदी था जो अपने आप को अकेला अनुभव कर रहा था। प्रेरित पौलुस ने अपने मसीही विश्वास और प्रचार के कारण उसे मिली कैद में रहते हुए, अपने साथी तीमुथियुस को लिखा, “केवल लूका मेरे साथ है: मरकुस को ले कर चला आ; क्योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है” (2 तीमुथियुस 4:11); “मेरे पहिले प्रत्युत्तर करने के समय में किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, वरन सब ने मुझे छोड़ दिया था: भला हो, कि इस का उन को लेखा देना न पड़े” (2 तीमुथियुस 4:16)। परन्तु उस कैदखाने में भी पौलुस को सान्तवना और प्रोत्साहन देने वाला कोई था, उसने आगे लिखा, “परन्तु प्रभु मेरा सहायक रहा, और मुझे सामार्थ्य दी: ताकि मेरे द्वारा पूरा पूरा प्रचार हो, और सब अन्यजाति सुन लें; और मैं तो सिंह के मुंह से छुड़ाया गया” (2 तीमुथियुस 4:17)। किंतु निःसंदेह, पौलुस ने अकेलेपन की व्यथा को अनुभव किया था।

   उस अद्भुत क्रिसमस कार्ड के पीछे, मेरे उस मित्र ने लिखा था, “प्रभु यीशु के जन्म के द्वारा आपको और आपके अपनों को शान्ति, आनन्द, आशा, और प्रेम सदा मिलते रहें;” और उसने अपने हस्ताक्षर के लिए लिखा, “मसीह में आपका भाई।” मैंने उस कार्ड को अपनी दीवार पर लगा दिया जिससे मैं उसे सदा स्मरण रख सकूँ, उसके लिए प्रार्थना कर सकूँ; और उसे पत्र लिखने के लिए बैठ गया।

   प्रयास करें कि इस पूरे वर्ष हम अकेले पड़े हुए लोगों के साथ संपर्क करने और उनके लिए प्रार्थना करने में संलग्न रहें। - टिम गुस्टाफसन


अकेले लोगों की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाएँ और उन्हें प्रोत्साहित करें।

तुम्हारे लिये धन्यवाद करना नहीं छोड़ता, और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं। - इफिसियों 1:16

बाइबल पाठ: 2 तीमुथियुस 4:6-18
2 Timothy 4:6 क्योंकि अब मैं अर्घ की नाईं उंडेला जाता हूं, और मेरे कूच का समय आ पहुंचा है।
2 Timothy 4:7 मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है।
2 Timothy 4:8 भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।
2 Timothy 4:9 मेरे पास शीघ्र आने का प्रयत्न कर।
2 Timothy 4:10 क्योंकि देमास ने इस संसार को प्रिय जान कर मुझे छोड़ दिया है, और थिस्सलुनीके को चला गया है, और क्रेसकेंस गलतिया को और तीतुस दलमतिया को चला गया है।
2 Timothy 4:11 केवल लूका मेरे साथ है: मरकुस को ले कर चला आ; क्योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है।
2 Timothy 4:12 तुखिकुस को मैं ने इफिसुस को भेजा है।
2 Timothy 4:13 जो बागा मैं त्रोआस में करपुस के यहां छोड़ आया हूं, जब तू आए, तो उसे और पुस्‍तकें विशेष कर के चर्मपत्रों को लेते आना।
2 Timothy 4:14 सिकन्‍दर ठठेरे ने मुझ से बहुत बुराइयां की हैं प्रभु उसे उसके कामों के अनुसार बदला देगा।
2 Timothy 4:15 तू भी उस से सावधान रह, क्योंकि उसने हमारी बातों का बहुत ही विरोध किया।
2 Timothy 4:16 मेरे पहिले प्रत्युत्तर करने के समय में किसी ने भी मेरा साथ नहीं दिया, वरन सब ने मुझे छोड़ दिया था: भला हो, कि इस का उन को लेखा देना न पड़े।
2 Timothy 4:17 परन्तु प्रभु मेरा सहायक रहा, और मुझे सामर्थ्य दी: ताकि मेरे द्वारा पूरा पूरा प्रचार हो, और सब अन्यजाति सुन लें; और मैं तो सिंह के मुंह से छुड़ाया गया।
2 Timothy 4:18 और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्‍वर्गीय राज्य में उद्धार करके पहुंचाएगा: उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 13-15
  • मत्ती 5:1-26


गुरुवार, 4 जनवरी 2018

कार्य


   एक महिला ने, जो प्रभु यीशु के साथ अपने चलने को एक अच्छे मसीही विश्वासी के समान सुदृढ़ बनाए रखना चाहती थी, और साथ ही पति के पियक्कड़ होने की समस्याओं को भी झेल रही थी, कहा – “कभी कभी लगता है कि परमेश्वर मेरी सुन ही नहीं रहा है।” वह महिला अनेकों वर्षों से प्रार्थना कर रही थी कि उसका पति सुधार जाए परन्तु ऐसा हो नहीं रहा था। उस महिला के समान अनेकों अन्य मसीही विश्वासियों ने भी इस परिस्थिति का सामना किया है, और कर भी रहे हैं।

   जब हम परमेश्वर से बारंबार कुछ भली वस्तु या भलाई की बात माँगें, कुछ ऐसा जिससे सरलता से उसकी महिमा हो सकती है, परन्तु हमारी प्रार्थना फिर भी अनसुनी रहे, तो हम क्या सोचें? क्या वह हमारी प्रार्थना सुन रहा है कि नहीं?

   हम अपने तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के जीवन से देखें। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, क्रूस पर चढाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से ठीक पहले, प्रभु ने परमेश्वर पिता के साथ प्रार्थना में लंबा समय बिताया। वह व्याकुल था, प्रार्थना में जूझ रहा था, परमेश्वर पिता के सामने अपना हृदय उंडेल रहा था, परमेश्वर से विनती कर रहा था, “यह प्याला मुझ से दूर हो जाए” (मत्ती 26:39)। परन्तु पिता परमेश्वर का स्पष्ट उत्तर था, “नहीं”; हमारे उद्धार के लिए परमेश्वर को अपने पुत्र को क्रूस पर बलिदान होने की यातना उठाने के लिए भेजना ही था। चाहे प्रभु यीशु को लगा कि पिता परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया है (मत्ती 27:45-46), फिर भी उसने बलपूर्वक और सच्चे मन परमेश्वर से प्रार्थना की, क्योंकि प्रभु को पूरा विश्वास था कि परमेश्वर उसकी सुन रहा है।

   जब हम प्रार्थना करें, तो चाहे हम समझ सकें या नहीं समझ सकें कि वह उसका उत्तर कैसे देगा, कब देगा, और क्या देगा; या कैसे उस परिस्थिति में से भी हमारे लिए कुछ भलाई निकालेगा, फिर भी विश्वास बनाए रखें कि परमेश्वर हमारी सुन रहा है, अपने समय और इच्छा के अनुसार उत्तर देगा, और उसका जो भी उत्तर होगा, वह सर्वोत्तम होगा, हमारी भलाई के लिए ही होगा। हमें अपने सभी अधिकार त्याग के, भरोसे के साथ प्रार्थना में रहने का यह कार्य करते रहना है।

   हमें सर्वज्ञानी, सर्वसामर्थी परमेश्वर के हाथों में सब कुछ छोड़ देना चाहिए; वह हमारी सुनता है, हमारे लिए मार्ग निकालता है, हमारी भलाई के लिए ही कार्य करता है। - डेव ब्रेनन


जब हम प्रार्थना के लिए घुटने झुकाते हैं, परमेश्वर सुनने के लिए कान झुकाता है।

दोपहर से ले कर तीसरे पहर तक उस सारे देश में अन्‍धेरा छाया रहा। तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी अर्थात हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? – मत्ती  27:45-46

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-46
Matthew 26:36 तब यीशु अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं।
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा।
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके?
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है।
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो।
Matthew 26:43 तब उसने आकर उन्हें फिर सोते पाया, क्योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं।
Matthew 26:44 और उन्हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की।
Matthew 26:45 तब उसने चेलों के पास आकर उन से कहा; अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
Matthew 26:46 उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-12
  • मत्ती 4

बुधवार, 3 जनवरी 2018

उपकार


   हमारी जीवन-यात्रा में बारंबार आने वाली एक कठिनाई है कि हम उस पल जो हमें चाहिए होता है उस पर इतने केन्द्रित हो जाते हैं कि जो हमारे पास है हम उसे भूल जाते हैं। मुझे इस बात का एहसास तब हुआ जब हमारे चर्च की गीत मण्डली ने भजन 103 पर आधारित एक स्तुति-गान, “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना” (पद 2) प्रस्तुत किया। हमारा प्रभु परमेश्वर हमें क्षमा करने वाला, चँगा करने वाला, छुड़ाने वाला, प्रावधान करने वाला, संतुष्टि देने वाला, और बहाल करने वाला है (पद 4-5)। हम यह सब कैसे भूल सकते हैं। लेकिन फिर भी हम बहुधा यह सब भूल जाते हैं, जब जीवन की बातें और घटनाएँ, प्रबल हो रही आवश्यकताएं, बारंबार मिलाने वाली असफलताएं, और परिस्थितियाँ हमारा ध्यान खींचती हैं और हमें लगता ही कि सब कुछ अनियंत्रित और अव्यवस्थित हो गया है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के इस भजन में भजनकार हम से निवेदन करता है कि हम  स्मरण रखें कि “यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है” (पद 8, 10-11)।

   हम मसीही विश्वास के मार्ग पर, प्रभु यीशु मसीह के पास अपने सर्वथा अयोग्य होने के एहसास के साथ आते हैं। उसके किसी भी अनुग्रह, किसी भी कृपा के हम कदापि योग्य नहीं हैं; हम उस पर और उसके अनुग्रह तथा कृपा पर कोई दावा नहीं कर सकते हैं। परन्तु फिर भी हमारे प्रति उसका अद्भुत प्रेम और असीम उदारता, हमारे प्रति उसके उपकार हमें अभिभूत कर देते हैं।

“हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!” (पद 1)। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर का हमारे उद्धार के लिए मनुष्य बनकर आ जाना उसके प्रेम का प्रगटीकरण है।

परमेश्वर का भजन गाओ, भजन गाओ! हमारे महाराजा का भजन गाओ, भजन गाओ! क्योंकि परमेश्वर सारी पृथ्वी का महाराजा है; समझ बूझकर बुद्धि से भजन गाओ; परमेश्वर जाति जाति पर राज्य करता है; परमेश्वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजमान है। - भजन 47:6-8

बाइबल पाठ: भजन  103
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
Psalms 103:14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।
Psalms 103:15 मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है,
Psalms 103:16 जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
Psalms 103:17 परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है,
Psalms 103:18 अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण कर के उन पर चलते हैं।
Psalms 103:19 यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।
Psalms 103:20 हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो!
Psalms 103:21 हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो!
Psalms 103:22 हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 7-9
  • मत्ती 3