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सोमवार, 16 सितंबर 2019

क्रोध प्रबंधन



      मैं अपनी एक सहेली के साथ भोजन कर रही थी, तो उसने बताया कि वह अपने परिवार के एक सदस्य से कितनी खिसिया चुकी थी। परन्तु वह उस सदस्य से कुछ भी कहने से हिचकिचाती थी। मेरी सहेली को उस सदस्य द्वारा लगातार उसकी उपेक्षा करते रहना या उसका मजाक उड़ाते रहना कतई पसन्द नहीं था, परन्तु फिर भी वह ऐसा करता ही रहता था, मेरी सहेली को क्रोध दिलाता रहता था। अनतः जब उसने उस सदस्य से इस समस्या के विषय बात-चीत करनी चाही, तो उस सदस्य ने निन्दापूर्ण आलोचना करने के द्वारा प्रत्युत्तर दिया। इससे मेरी सहेली भड़क उठी और उसपर बहुत क्रुद्ध हुई। परिणामस्वरूप दोनों ही व्यक्तियों ने अपने-अपने रुख और कठोर कर लिए तथा परिवार के मध्य की फूट और बढ़ गई।

      मैं उसके साथ सहानुभूति रखती हूँ, उसकी परिस्थिति को समझ सकती हूँ, क्योंकि मैं भी व्यवहार में उसके समान ही हूँ। मुझे भी लोगों का उनकी गलत बातों के लिए सामना करने में बहुत कठिनाई होती है। यदि कोई परिवार का सदस्य या कोई मित्र आकर कुछ बुरा बोलता अथवा करता है, तो अकसर मैं उसे अपना प्रत्युत्तर देने की भावनाओं को दबाए रखती हूँ; और तब तक दबाए रखती हूँ जब तक कि वही व्यक्ति या कोई और आकर कुछ और अनुचित कह या कर नहीं देता है। मेरे सहने की शक्ति के परे बात जाते ही मैं भी फट पड़ती हूँ।

      संभवतः इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा कि “क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे” (इफिसियों 4:26)। अनसुलझी बातों को सुलझाने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने से क्रोध नियंत्रण में रहता है। किसी गलती का पात्र बनने पर उसे लेकर बुड़बुड़ाते और खिसियाते रहने से कडुवाहट ही उत्पन्न होती है। ऐसा करने की बजाए हमें उस बात को लेकर परमेश्वर के पास जाना चाहिए, और परमेश्वर की सहायता से “प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं” (इफिसियों 4:15)।

      क्या आज किसी व्यक्ति को लेकर आप किसी समस्या में पड़े हुए हैं? उसे अपने अन्दर दबाए रखने के स्थान पर, उस समस्या को परमेश्वर के सम्मुख खोल दें। परमेश्वर आपके क्रोध और रोष की अग्नि को अपने प्रेम और क्षमा से बुझा सकता है। - लिंडा वॉशिंगटन

क्रोध की अग्नि को बेकाबू हो जाने से पहले ही बुझा दें।

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:17-19

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:15, 26-32
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9



रविवार, 15 सितंबर 2019

परिवार



      मैं मध्य-पूर्व के इलाके में थी, और मुझे एक मोबाइल फोन खरीदने की आवश्यकता पड़ी। फोन के विक्रेता ने मुझ से कुछ विशष्ट प्रश्न पूछे – मेरा नाम, मेरी राष्ट्रीयता, मेरा पता। फिर फ़ार्म के भरते समय उसने मुझ से मेरे पिता का नाम पूछा, जिससे मैं चकित हुई, और सोचने लगी कि मेरे पिता के नाम की जानकारी भरने का मेरी संस्कृति में कोई विशेष महत्व नहीं है, परन्तु यहाँ पर, मेरी पहचान को स्थापित करने के लिए वह अनिवार्य था। कुछ संस्कृतियों में वंशावली का बहुत महत्व होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों के लिए भी वंशावली का बहुत महत्व था। उन्हें इस बात का घमण्ड था कि वे कुल-पिता अब्राहम की संतान थे, और उन्हें लगता था कि अब्राहम का वंशज होने के नाते वे परमेश्वर की सन्तान भी ठहरते थे। उनकी समझ के अनुसार, उनकी मानवीय वंशावली, उन्हें परमेश्वर के आत्मिक परिवार से जोड़ देती थी।

      जब प्रभु यीशु मसीह पृथ्वी पर आए और यहूदियों के साथ रहते और संवाद करते थे, तो प्रभु यीशु ने उन यहूदियों को बताया कि उनकी यह धारणा गलत है। वे यहूदी यह तो कह सकते थे कि अब्राहम उनका सांसारिक मूल-पिता है; परन्तु यदि वे प्रभु यीशु पर विश्वास नहीं करते, जिन्हें परमेश्वर पिता ने पृथ्वी पर भेजा था, तो फिर वे लोग परमेश्वर के परिवार के सदस्य नहीं हो सकते थे।

      यही बात आज भी वैसे ही लागू होती है। हम अपने सांसारिक परिवार और माता-पिता को तो नहीं चुन सकते हैं, परन्तु हम यह निर्णय अवश्य ले सकते हैं कि हम किस आत्मिक परिवार के सदस्य बनेंगे। यदि हम प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाएंगे तो परमेश्वर हमें अपनी सन्तान होने का अधिकार देता है (यूहन्ना 1:12)।

      आज आप अपने आत्मिक पिता और परिवार के बारे में क्या कह सकते हैं – वे कौन हैं? क्या आपने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास किया है? यदि नहीं तो अपने पापों की क्षमा और परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनने के लिए आज ही प्रभु यीशु पर विश्वास करें। - कीला ओकोआ

परमेश्वर प्रभु यीशु के विश्वासियों का अनन्त-काल के लिए आत्मिक पिता है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:39-47
John 8:39 उन्होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा; यदि तुम इब्राहीम के सन्तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते।
John 8:40 परन्तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिसने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था।
John 8:41 तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर।
John 8:42 यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा।
John 8:43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते।
John 8:44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।
John 8:45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।
John 8:46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते?
John 8:47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 22-24
  • 2 कुरिन्थियों 8



शनिवार, 14 सितंबर 2019

राजा



      जब बात मेरी इच्छा के अनुसार नहीं बनी तो मैंने अपने पति पर दुखी करने वाले शब्दों से हमला किया, और जब पवित्र-आत्मा ने मुझे बाइबल के वे पद स्मरण करवाए जो मेरे पापमय व्यवहार को मेरे सम्मुख ला रहे थे तो मैंने मेरे जीवन में पवित्र-आत्मा के अधिकार का भी अपमान किया। क्या ढिठाई से अपने अहम को ऊँचा उठाए रहना मेरे विवाहित जीवन में उसके कारण हो रही क्षति और व्यक्तिगत जीवन में परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के कारण हो रही हानि के लिए उचित था? कदापि नहीं। परन्तु जब तक मैंने परमेश्वर तथा अपने पति से इनके लिए क्षमा माँगी तब तक मैं अपने पीछे जीवनों में ज़ख्मों की एक श्रंखला बना चुकी थी – जो बुद्धिमानी के परामर्श की उपेक्षा करने और ऐसे जीवन जीने के कारण हुए कि मानो मुझे स्वयं को छोड़कर अन्य किसी को कोई उत्तर नहीं देना है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों ने भी परमेश्वर के विरुद्ध बलवा करने का व्यवहार रखा हुआ था। मूसा की मृत्यु के पश्चात, यहोशू उन्हें वाचा किए हुए देश में लेकर गया। यहोशू के नेतृत्व में इस्राएली परमेश्वर की सेवा करते रहे (न्यायियों 2:7)। परन्तु जब यहोशू और उसके साथ के लोगों की पीढ़ी जाती रही, इस्राएली परमेश्वर और उसके द्वारा उनके हित में किए गए कार्यों को भूल गए (पद 10)। उन्होंने परमेश्वर की इच्छानुसार नेतृत्व को त्याग दिया और पाप में फंस गए (पद 11-15)।

      उनकी परिस्थितयों में परिवर्तन आता था जब परमेश्वर उनके लिए न्यायी खड़े करता था (पद 16-18), जो इस्राएलियों में राजाओं के समान काम करते थे। परन्तु जब उन न्यायियों की मृत्यु हो जाती थी तो इस्राएली फिर से परमेश्वर के विमुख होकर पाप में जीने लगते थी, मानों उनकी किसी के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है, और जिससे फिर उन्हें भयानक परिणाम भुगतने पड़ते थे (पद 19-22)।

      परन्तु हमारे साथ भी यही नहीं होना चाहिए। हम अनन्तकाल के सार्वभौमिक शासक, प्रभु परमेश्वर की आधीनता में जीवन बिता सकते हैं। प्रभु यीशु न केवल हमारा उद्धारकर्ता है, वरन वह समस्त सृष्टि और पृथ्वी के प्रत्येक जन का राजा और न्यायी भी है। - जोशील डिक्सन

परमेश्वर हमें सामर्थ्य और सौभाग्य प्रदान करता है कि हम 
उसकी इच्छानुसार काम करके उससे उत्तम प्रतिफलों का आनन्द लें।

इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है। - प्रेरितों 17:30-31

बाइबल पाठ: न्यायियों 2:10-23
Judges 2:10 और उस पीढ़ी के सब लोग भी अपने अपने पितरों में मिल गए; तब उसके बाद जो दूसरी पीढ़ी हुई उसके लोग न तो यहोवा को जानते थे और न उस काम को जो उसने इस्राएल के लिये किया था।
Judges 2:11 इसलिये इस्राएली वह करने लगे जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और बाल नाम देवताओं की उपासना करने लगे;
Judges 2:12 वे अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया था, त्यागकर पराये देवताओं की उपासना करने लगे, और उन्हें दण्डवत किया; और यहोवा को रिस दिलाई।
Judges 2:13 वे यहोवा को त्याग कर के बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों की उपासना करने लगे।
Judges 2:14 इसलिये यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा, और उसने उन को लुटेरों के हाथ में कर दिया जो उन्हें लूटने लगे; और उसने उन को चारों ओर के शत्रुओं के आधीन कर दिया; और वे फिर अपने शत्रुओं के साम्हने ठहर न सके।
Judges 2:15 जहां कहीं वे बाहर जाते वहां यहोवा का हाथ उनकी बुराई में लगा रहता था, जैसे यहोवा ने उन से कहा था, वरन यहोवा ने शपथ खाई थी; इस प्रकार से बड़े संकट में पड़ गए।
Judges 2:16 तौभी यहोवा उनके लिये न्यायी ठहराता था जो उन्हें लूटने वाले के हाथ से छुड़ाते थे।
Judges 2:17 परन्तु वे अपने न्यायियों की भी नहीं मानते थे; वरन व्यभिचारिन के समान पराये देवताओं के पीछे चलते और उन्हें दण्डवत करते थे; उनके पूर्वज जो यहोवा की आज्ञाएं मानते थे, उनकी उस लीक को उन्होंने शीघ्र ही छोड़ दिया, और उनके अनुसार न किया।
Judges 2:18 और जब जब यहोवा उनके लिये न्यायी को ठहराता तब तब वह उस न्यायी के संग रहकर उसके जीवन भर उन्हें शत्रुओं के हाथ से छुड़ाता था; क्योंकि यहोवा उनका कराहना जो अन्धेर और उपद्रव करने वालों के कारण होता था सुनकर दु:खी था।
Judges 2:19 परन्तु जब न्यायी मर जाता, तब वे फिर पराये देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना करते, और उन्हें दण्डवत कर के अपने पुरखाओं से अधिक बिगड़ जाते थे; और अपने बुरे कामों और हठीली चाल को नहीं छोड़ते थे।
Judges 2:20 इसलिये यहोवा का कोप इस्राएल पर भड़क उठा; और उसने कहा, इस जाति ने उस वाचा को जो मैं ने उनके पूर्वजों से बान्धी थी तोड़ दिया, और मेरी बात नहीं मानी,
Judges 2:21 इस कारण जिन जातियों को यहोशू मरते समय छोड़ गया है उन में से मैं अब किसी को उनके साम्हने से न निकालूंगा;
Judges 2:22 जिस से उनके द्वारा मैं इस्राएलियों की परीक्षा करूं, कि जैसे उनके पूर्वज मेरे मार्ग पर चलते थे वैसे ही ये भी चलेंगे कि नहीं।
Judges 2:23 इसलिये यहोवा ने उन जातियों को एकाएक न निकाला, वरन रहने दिया, और उसने उन्हें यहोशू के हाथ में भी उन को न सौंपा था।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7



शुक्रवार, 13 सितंबर 2019

रुके


      तीन संबंधित फिल्मों, The Lord of the Rings की श्रंखला के विषय हो रही चर्चा के दौरान एक किशोर ने कहा कि उसे कहानियाँ फिल्मों की बजाए पुस्तकों में अधिक पसन्द हैं। जब उससे पूछा गया कि ऐसा क्यों, तो उस जवान ने उत्तर दिया, “क्योंकि पुस्तक में मैं जितनी देर चाहूँ उतनी देर तक एक स्थान पर रुका रह सकता हूँ। किसी भी पुस्तक में एक स्थान पर रुके रहने, विशेषकर परमेश्वर के वचन बाइबल में रुके रहने और उसकी बातों में रम जाने के अपने ही लाभ हैं।

      बाइबल में इब्रानियों 11 अध्याय को “विश्वास का अध्याय” कहा जाता है, और इसमें उन्नीस लोगों का नाम आया है। उनमें से प्रत्येक को कठिनाइयों और संदेह के मार्ग से होकर निकालना पड़ा, परन्तु उन्होंने परमेश्वर की आज्ञाकारिता में बने रहने को चुना। उनके लिए इब्रानियों का लेखक कहता है, “ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं” (पद 13)।

      हमारे लिए बहुत सहज होता है बाइबल को शीघ्रता से पढ़ जाना बिना उसके लेख में वर्णित लोगों और घटनाओं पर मनन किए, या उनके बारे में कोई विचार किए। हमने जो अपने दैनिक कार्यों के लिए समय-सारिणी बनाई होती है, वह हमें परमेश्वर के वचन की गहराइयों  में जाने और हमारे जीवनों के लिए उसकी योजना के बारे में जानने नहीं देती है। परन्तु जब हम कुछ देर परमेश्वर के वचन में रुके रहते हैं, तो हम भी अपने आप को अपने ही समान लोगों के जीवनों की घटनाओं में होकर निकलता हुआ पाते हैं, जिन्होंने अपने जीवनों के लिए परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर भरोसा किया।

      जब हम परमेश्वर के वचन को खोलते हैं, तो इस बात का एहसास रखना हमारे लिए अच्छा है कि हम जितनी देर चाहें, उतनी देर तक उसमें रुके रह सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड

परमेश्वर के वचन में रुके रहें, और आपको विश्वास की कहानियाँ मिलेंगी।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-13
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6



गुरुवार, 12 सितंबर 2019

पहला कदम



      थाम दाशु को अनुभव हो रहा था कि उसके जीवन में किसी बात की कमी है, इसलिए उसने चर्च जाना आरंभ कर दिया – वो उसी चर्च में जाता था जिसमें उसकी बेटी भी जाती थी, परन्तु वे दोनों कभी भी साथ चर्च नहीं जाते थे। कुछ समय पहले थाम ने कुछ ऐसा किया था जिससे उसकी बेटी को ठेस पहुँची थी और तब से उसमें और उसकी बेटी के मध्य संबंध टूटे हुए थे। इसलिए थाम चर्च में तब प्रवेश करता था जब आरंभिक स्तुतिगान आरंभ हो जाता था, और जैसे ही आराधना समाप्त होती, वह तुरंत ही उठकर चला आता था।

      चर्च के सदस्यों ने उसके साथ सुसमाचार को बहुत बार बाँटा था, परन्तु थाम हमेशा ही प्रभु यीशु में विश्वास लाने के उनके निमंत्रण को नम्रतापूर्वक मना कर देता था। परन्तु वह फिर भी चर्च आता रहता था। एक दिन थाम बहुत बीमार पड़ गया। उसकी बेटी ने यह देखकर सिम्मत करके थाम को पत्र लिखा, और बताया कि कैसे प्रभु यीशु ने उसके जीवन में काम किया है और उसे परिवर्तित किया है, और उसने अपने पिता के साथ संबंधों की बहाली की भी इच्छा व्यक्त की। उसी रात थाम प्रभु यीशु में अपना विश्वास लाया, उसने अपना जीवन प्रभु को समर्पित किया, तथा परिवार के टूटे हुए संबंध बहाल हो गए। इसके कुछ दिन पश्चात, थाम का देहांत हो गया, और वह प्रभु यीशु के पास चला गया, प्रभु परमेश्वर और अपने प्रिय जनों के साथ शान्ति के साथ।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा कि हमें प्रभु परमेश्वर के प्रेम और क्षमा की बात को लोगों को समझाना है (2 कुरिन्थियों 5:11)। पौलुस ने कहा कि, “क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए” (पद 14)।

      किसी दूसरे को क्षमा करने के लिए हमारी इच्छा और उसकी ओर बढ़ाया गया हमारा पहला कदम, उस व्यक्ति को यह एहसास दिला सकता है कि परमेश्वर भी हमें  क्षमा करके अपने साथ हमारा मेल-मिलाप करना चाहता है (पद 19)। क्या आप परमेश्वर की ओर अपना पहला कदम बढ़ाकर उसेक साथ मेल-मिलाप करने के लिए तैयार हैं? – पो फैंग चिया

दूसरों के साथ मेल-मिलाप करने की हमारी इच्छा उनपर परमेश्वर के हृदय को प्रगट करती है।

और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया।  क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। - इफिसियों 2:17-18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:11-21
2 Corinthians 5:11 सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं।
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे।
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 13-15
  • 2 कुरिन्थियों 5



बुधवार, 11 सितंबर 2019

समझ



      पास्टर जौन बैबलर टेक्सस शहर के पुलिस तथा अग्निशमन विभागों के कर्मचारियों के लिए पादरी का काम करते हैं। उन्होंने अपने काम से बाईस सप्ताह का विश्राम अवकाश लेकर, पुलिस प्रशिक्षण कोर्स को किया जिससे वे पुलिस कर्मियों द्वारा, उनके कर्तव्य के निर्वाह के समय में आने वाली परिस्थितियों को बेहतर समझ सकें। अन्य प्रशिक्षार्थियों के साथ समय बिताने और उनके कार्य के साथ जुड़ी हुई तीव्र चुनौतियों के बारे में जानकारी लेने के कारण बैबलर में उनके लिए एक नई सहानुभूति और दीनता जागृत हुई। उन्हें लगता है कि भविष्य में वे उन पुलिस अफसरों की और प्रभावी रीति से सहायता कर पाएँगे और उन्हें परामर्श देने पाएँगे जो  भावनात्मक तनाव, थकान, और क्षति के कारण संघर्ष कर रहे हैं।

      हम जानते हैं कि परमेश्वर हमारी सभी परिस्थितियों को जानता है क्योंकि उस ही ने हमें बनाया है, तथा जो कुछ भी हमारे साथ होता है, वह सब देखता है। हम यह भी जानते हैं कि वह हमारी हर परिस्थिति को समझता है, क्योंकि वह पृथ्वी पर मनुष्य बनाकर रहा है “वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया” (यूहन्ना 1:14), मनुष्य के सभी अनुभवों से होकर निकला है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु के आरंभिक जीवन में अनेकों प्रकार की कठिनाइयाँ थीं। उन्होंने तेज धूप के कष्ट, भूखे पेट की पीड़ा, बेघर होने की अनिश्चितता, सभी को सहा है। भावनात्मक रूप में, उन्होंने असहमति के तनावों, धोखा खाने की जलन, और लगातार उत्पीड़न की व्यथा को सहा है।

      प्रभु यीशु ने मित्रता के आनन्द और परिवार के प्रेम का भी आनन्द पाया है और पृथ्वी पर हम जिन सबसे बुरी समस्याओं का सामना करते हैं उन्हें भी सहन किया है। इसलिए वह हमें हर परिस्थिति में, हर बात के लिए आशा और सांत्वना प्रदान कर सकते हैं। वे ऐसे अद्भुत परामर्शदाता हैं जो हमारी समस्याओं और चिंताओं के लिए सहनशीलता से हमारी ओर कान लगाए रहते हैं, और हमें उचित सलाह तथा मार्गदर्शन दे सकते हैं।

      केवल प्रभु यीशु ही हैं जो यह कह सकते हैं कि “मैं इन सब बातों से होकर निकला हूँ; मैं समझता हूँ।” – जेनिफर बेन्सन शुल्ट

प्रभु परमेश्वर हमारे संघर्षों को समझता है।

क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। - इब्रानियों 4:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-18
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था।
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था।
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी।
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
John 1:15 यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था।
John 1:16 क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह।
John 1:17 इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची।
John 1:18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 10-12
  • 2 कुरिन्थियों 4



मंगलवार, 10 सितंबर 2019

सन्देश



      मेरी माँ और उनकी बहनें अभी भी परस्पर कुछ ऐसा करती हैं जो एक लुप्त होती जा रही कला है – पत्र लिखना। प्रति सप्ताह, बिना किसी चूक के, वे एक दूसरे को व्यक्तिगत पत्र लिखती हैं; और इसलिए उनमें से एक के डाकिए को चिंता होने लगती है यदि उसके पास उन्हें देने के लिए चिट्ठी नहीं होती है। उनके पत्रों में जीवन की बातों का आनन्द, मित्रों तथा परिवार जनों से संबंधित दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों तथा घटनाओं की मज़ेदार बातें और दिल को दुखाने वाले किस्से भी होते हैं।

      मुझे अपने परिवार की इन महिलाओं द्वारा किए जाने वाले इस नियमित अभ्यास पर मनन करना पसन्द है। इससे मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस के द्वारा प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों को कही गई एक बात और भी अधिक सराहनीय लगती है कि “यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों के समान लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है” (2 कुरिन्थियों 3:3)। पौलुस ने यह बात कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन झूठे उपदेशकों की गलत शिक्षाओं के प्रत्युत्तर में कही, जो पौलुस द्वारा उन विश्वासियों को दी गई शिक्षाओं का विरोध कर रहे थे (देखे कुरिन्थियों 11)।

      पौलुस ने कोरिन्थ की मसीही विश्वासियों की मण्डली को प्रोत्साहित किया कि वे सच्चे और जीवते परमेश्वर का अनुसरण वैसे ही करते रहें, जैसा कि उसने उन्हें सिखाया था। उन्हें यह समझाते हुए, पौलुस ने उन मसीही विश्वासियों को विस्मरणीय रूप में मसीह की पत्री बताया, और यह कि उनके परिवर्तित जीवन पौलुस की सेवकाई के द्वारा उनमें हुए पवित्र-आत्मा के कार्य की इतनी प्रबल गवाही है जितनी कभी कोई लिखित पत्री नहीं हो सकती है।

      यह कितना अद्भुत है कि आज परमेश्वर का पवित्र-आत्मा हम में अनुग्रह और छुटकारे की गवाही का पत्र लिखता है। लिखित शब्द चाहे जितने भी सार्थक और प्रभावी क्यों न हों, लेकिन सुसमाचार के सत्य के सबसे प्रबल और प्रभावी गवाह हमारे परिवर्तित जीवन हैं, जो हमारे चरित्र और व्यवहार में आए दयालुता, सेवा, कृतज्ञता, और आनन्द के भावों द्वारा मसीह यीशु के प्रभाव के विषय बताते हैं।

      हमारे कार्यों और व्यवहार के द्वारा प्रभु अपने अनन्त-जीवन देने वाले प्रेम के सुसमाचार को लोगों में फैलाता है। आज आपका जीवन लोगों को क्या सन्देश दे रहा है? – एमी बाउचर पाई

हम मसीह की पत्रियां हैं।

परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनों के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं। - 2 कुरिन्थियों 2:14-15

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:1-6
2 Corinthians 3:1 क्या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों के समान सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं?
2 Corinthians 3:2 हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है।
2 Corinthians 3:3 यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों के समान लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है।
2 Corinthians 3:4 हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं।
2 Corinthians 3:5 यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है।
2 Corinthians 3:6 जिसने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 8-9
  • 2 कुरिन्थियों 3