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मंगलवार, 5 नवंबर 2019

न्याय



      एशिया में आयोजित एक सम्मलेन में भाग लेते समय, मुझे कुछ ही घंटों के अन्दर दो चौंका देने वाली बातें सुनने को मिलीं। पहले तो एक पास्टर ने बताया कि उसने बरी होने से पहले कैद में ग्यारह वर्ष हत्या के एक गलत आरोप के अन्तर्गत काटे थे। फिर एक परिवार ने बताया कि अपने ही देश में धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए कैसे उन्हें एक बहुत बड़ी रकम देनी पड़ी थी, किन्तु उन्होंने बचाने के लिए जिन्हें वह रकम दी थी, उन्होंने ही उन्हें धोखा देकर पकड़वा दिया। अब वर्षों से एक शरणार्थी शिविर में रहते हुए, वे सोचते हैं कि क्या कभी उन्हें कोई घर मिलेगा!

      इन दोनों ही घटनाओं में, किया गया अत्याचार, न्याय के अभाव में और अधिक पीड़ादायक हो गया, जो कि हमारे सँसार के टूटेपन का एक प्रमाण है। परन्तु यह न्याय का अभाव स्थाई स्थिति नहीं है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 67 में आया है कि परमेश्वर के लोगों को, परमेश्वर के बारे में इस दुखित सँसार को बताना है। परमेश्वर की निकटता में आने और बने रहने का परिणाम आनन्द है, न केवल परमेश्वर के प्रेम के कारण, परन्तु उसके न्याय के भी कारण। भजनकार लिखता है, “राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा” (पद 4)।

      यद्यपि बाइबल के लेखक समझते थी कि “खराई” (निष्पक्षता और न्याय) परमेश्वर के प्रेम का महत्वपूर्ण भाग है, किन्तु वे यह भी समझते थे कि इसकी पूर्ति भविष्य में परमेश्वर का राज्य स्थापित होने के बाद ही होगी। उस समय तक अन्याय से भरे हमारे इस सँसार में, हम लोगों को परमेश्वर के उस सिद्ध न्याय के विषय बताते रहें। प्रभु परमेश्वर का आगमन, “न्याय की नदी के समान, और धर्म महानद के समान होगा” (अमोस 5:24)। - बिल क्राउडर

न्याय के लिए कार्य करें; करुणा के लिए प्रार्थना करें।

परन्तु तुम्हारे लिये जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा, और उसकी किरणों के द्वारा तुम चंगे हो जाओगे; और तुम निकल कर पाले हुए बछड़ों की नाईं कूदोगे और फांदोगे। - मलाकी 4:2

बाइबल पाठ: भजन 67
Psalms 67:1 परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए
Psalms 67:2 जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।
Psalms 67:3 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:4 राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा।
Psalms 67:5 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:6 भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।
Psalms 67:7 परमेश्वर हम को आशीष देगा; और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



सोमवार, 4 नवंबर 2019

मुस्कराहट



      मुझे और मेरी पत्नि को पैरिस में लुवरे संग्रहालय जाने के सौभाग्य मिलने बाद, हमने अपनी ग्यारह वर्षीय पोती से फोन पर बात की। जब हमने उसे बताया कि हमने वहाँ पर सुविख्यात “मोना लिसा” चित्र को देखा, तो उसने तुरंत पूछा, “क्या वह मुस्कुरा रही है?” इस चित्र से संबंधित यह एक बड़ा प्रश्न है। लियोनार्डो द्वारा तेल के रंगों से बनाए गए इस चित्र के बनने के 600 से भी अधिक वर्ष के बाद भी हमें यह निश्चित पता नहीं है कि वह मुस्कुरा रही है या नहीं। हम चाहे उस चित्र की सुंदरता से मन्त्र-मुग्ध हों, परन्तु हम अभी तक मोना लिसा की मुद्रा के विषय अनिश्चित हैं।

      उस चित्र के विसमय का एक भाग उसकी “मुस्कराहट” है। किन्तु क्या यह महत्वपूर्ण है भी? क्या परमेश्वर के वचन बाइबल में मुस्कुराना आया है? वास्तव में, यह शब्द बाइबल में पाँच से भी कम बार आया है, और कभी इस अभिप्राय से नहीं कि हमें ऐसा करना चाहिए। परन्तु बाइबल हमें ऐसा रैवया अपनाने के लिए अवश्य कहती है जिससे कि मुस्कराहट आए – और यह रवैया है आनन्दित रहने का। बाइबल में हम आनन्द से संबंधित शब्दों को लगभग 250 बार पढ़ते हैं। दाऊद बताता है कि वह जब प्रभु के विषय में सोचता है तो, “मेरा हृदय प्रफुल्लित है” (भजन 28:7)। भजनों में यह भी आया है कि हमें “यहोवा के कारण जयजयकार करना है” (भजन 33:1); परमेश्वर के नियम “मेरे[हमारे] हृदय के हर्ष का कारण हैं” (भजन 119:111); और, “हम आनन्दित हैं” क्योंकि “यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं” (भजन 126:3)।

      स्पष्ट रूप से जो आनन्द प्रभु हमें उस सब से प्रदान करता है जो उसने हमारे लिए किया है, वह हमारे चहरे पर मुस्कराहट ला सकता है। - डेव ब्रैनन


हृदय में बसी आशा, चहरे पर मुस्कराहट ला सकती है।

धर्मियों को आशा रखने में आनन्द मिलता है, परन्तु दुष्टों की आशा टूट जाती है। - नीतिवचन 10:28

बाइबल पाठ: भजन 28:6-9
Psalms 28:6 यहोवा धन्य है; क्योंकि उसने मेरी गिड़गिड़ाहट को सुना है।
Psalms 28:7 यहोवा मेरा बल और मेरी ढ़ाल है; उस पर भरोसा रखने से मेरे मन को सहायता मिली है; इसलिये मेरा हृदय प्रफुल्लित है; और मैं गीत गाकर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psalms 28:8 यहोवा उनका बल है, वह अपने अभिषिक्त के लिये उद्धार का दृढ़ गढ़ है।
Psalms 28:9 हे यहोवा अपनी प्रजा का उद्धार कर, और अपने निज भाग के लोगों को आशीष दे; और उनकी चरवाही कर और सदैव उन्हें सम्भाले रह।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1



रविवार, 3 नवंबर 2019

महत्व



      जब मैंने उसे पहली बार देखा, मैं रो पड़ा। वह पूर्णतः अपने पालने में सो रहे नवजात शिशु जैसा दिख रहा था। परन्तु हम जानते थे कि वह कभी नहीं उठेगा; जब तक कि वह प्रभु यीशु की बाहों में न हो। वह कई महीने तक जीवन से संघर्ष करता रहा था। फिर उसकी माँ ने एक दिल को कसमसा देने वाली ई-मेल के द्वारा हमें बताया कि उसकी मृत्यु हो गई। उसने उस “गहरी, अति गहरी पीड़ा जो आपके अन्दर कराहती है” के विषय लिखा; फिर उसने कहा, “उस छोटे से जीवन के द्वारा परमेश्वर ने अपने प्रेम को कितनी गहराई से हमारे हृदयों में तराशा था! वह जीवन कितना सामर्थी था।”

      सामर्थी? वह यह कैसे कह सकती थी?

      उस परिवार के छोटे और प्रिय बच्चे ने उन्हें और हमें दिखाया कि हमें प्रत्येक बात के लिए परमेश्वर पर निर्भर रहना चाहिए। विशेषकर तब, जब परिस्थितियाँ ऐसे अत्यंत बिगड़ी हुई हो जाएँ। यह कठोर किन्तु सांत्वना देने वाला सत्य है कि परमेश्वर हम से हमारी पीड़ा में मिलता और बातें करता है। उसने भी पुत्र को खोने की पीड़ा को सहा है।

      अपनी पीड़ा की गहराईयों में हम परमेश्वर के वचन में दाऊद के भजनों की ओर मुड़ते हैं, क्योंकि वह अपनी पीड़ा के विषय लिखता है। उसने भजन 13:2 में प्रश्न किया, “मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?” और फिर कहा कि “मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी” (पद 3)। किन्तु फिर भी दाऊद अपने सभी प्रश्न परमेश्वर को सौंप सका और कह सका कि, “परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा” (पद 5)।

      केवल परमेश्वर ही है जो हमारी सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से भी हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ महत्व दे सकता है। - टिम गुस्ताफासन

जो हमें सबसे तुच्छ लगता है, परमेश्वर उसे भी सर्वाधिक उपयोगी बना सकता है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! – भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 13
Psalms 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?
Psalms 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?
Psalms 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;
Psalms 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।।
Psalms 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करूणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।
Psalms 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमोन



शनिवार, 2 नवंबर 2019

सिद्धान्त



      मुझे जेन योलेन द्वारा लिखित निबंध “Working Up to Anon” (Anonymus - अज्ञात) बारंबार पढ़ना बहुत अच्छा लगता है, और मैं इसे कई बार पढ़ चुका हूँ। मैंने इस निबंध की एक प्रति कई वर्ष पहल ‘द राईटर’ पत्रिका से ली थी। जेन ने लिखा है कि सबसे अच्छे लेखक वे होते हैं जो वास्तव में, अपने दिल की गहराईयों में, अपने नाम के बजाए ‘अज्ञात’ होकर लिखना चाहते हैं। उनके लिए महत्व कहानी का है, न कि कहानी को बताने वाले का।

      हम मसीही विश्वासी भी प्रभु यीशु के विषय, जिन्होंने हमारे उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए, बताते हैं। उनके अन्य विश्वासियों के साथ मिलकर हम उनके लिए जीवन जीते हैं तथा औरों के साथ उनके प्रेम को बाँटते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 12:3-21 में नम्रता और प्रेम के उस आचरण का वर्णन किया गया है जिसे मसीही अनुयायी होने के नाते हमें औरों के साथ अपने संबंधों में दिखाना चाहिए – “क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो” (पद 3, 10)।

      अपनी उपलब्धियों में किया जाने वाला हमारा गर्व औरों के गुणों के प्रति हमें अन्धा कर सकता है। हमारा अभिमान हमारे भविष्य में ज़हर घोल सकता है।

      यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने, जिसका उद्देश्य था प्रभु यीशु के लिए मार्ग तैयार करना था, कहा – “अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं” (यूहन्ना 3:30)।

      यह हम सभी के अनुसरण करने के लिए अच्छा सिद्धान्त है। - अज्ञात

परमेश्वर के समक्ष सदा नम्र रहो और उसे अपना सर्वे-सर्वा होने दो।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-13
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3



शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

यह कौन है?



      मैं जब विद्यार्थी था, तो जब भी कक्षा में आकर अध्यापक ये भयभीत करने वाले शब्द कहते कि, “अपने डेस्क पर से सब कुछ हटा लो, और एक कोरा कागज़ तथा पेन्सिल निकाल कर रख लो” तो हम समझ जाते थे कि परिक्षा देने का समय आ गया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 4 अध्याय में हम पढ़ते हैं कि प्रभु यीशु के दिन का आरंभ झील के किनारे प्रचार करने से हुआ था (पद 1), और उस दिन का अन्त झील में परिक्षा के साथ हुआ ( 35)। जिस नाव पर चढ़कर प्रभु ने भीड़ को प्रचार किया था, अब उसी नाव में प्रभु यीशु और उनके चेले झील के पार जा रहे थे। उस यात्रा के दौरान (जब प्रभु थक कर नाव कि पिछले भाग में सो रहे थे), उन लोगों को एक भयानक तूफ़ान का सामना करना पड़ा (पद 37)। तूफ़ान की तीव्रता से घबरा कर चेलों ने प्रभु यीशु को यह कहकर जगाया, “...हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?” (पद 38)। फिर कुछ अप्रत्याशित और अविश्वसनीय हुआ; जिस प्रभु ने भीड़ को संबोधित करते हुए उनसे उसकी सुनने के लिए कहा था (पद 3), उसी ने प्रकृति के इस प्रबल स्वरूप को एक सहज और बलवंत आज्ञा दी – “शान्त रह, और थम जा!” (पद 39)।

      तूफ़ान ने प्रभु की आज्ञा का पालन किया, और विस्मित तथा भयभीत चेले पूछने लगे “यह कौन है?” ( 41) प्रश्न तो अच्छा था, परन्तु इसके उत्तर को वास्तव में समझने और उसके महत्व को पहचानने में, कि प्रभु यीशु परमेश्वर का पुत्र है, उन्हें कुछ समय लगा। निष्ठापूर्ण, सच्चे, खुले-दिल से किए गए प्रश्न और अनुभव आज भी लोगों को उसी निष्कर्ष पर लेकर आते हैं जिस पर तब वे अचम्भित चेले आए थे – यीशु ही प्रभु है।

      प्रभु यीशु सुनने भर के लिए एक अच्छा शिक्षक मात्र नहीं है; वह आराध्य प्रभु परमेश्वर है! – आर्थर जैक्सन

“...हे गुरू, जहां कहीं तू जाएगा, मैं तेरे पीछे पीछे हो लूंगा।” – मत्ती 8:19

रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा - रूत 1:16

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं।
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी।
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया।
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2



गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

नया जीवन



      रूथ अपने नए जीवन की कहानी बिना रोए नहीं बता पाती है। वह अब अपनी आयु के अस्सीवें दशक के मध्य में है, और अधिक चल फिर नहीं सकती है, और न ही वह हमारे चर्च में कोई प्रमुख व्यक्ति है। कहीं भी आने-जाने के लिए उसे औरों की सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है, और क्योंकि वह अकेली रहती है इसलिए उसके प्रभाव का दायरा भी छोटा ही है।

      परन्तु जब वह अपने नए जीवन – अपने उद्धार पाने की कहानी को बताती है, जो वह बहुधा करती है, रूथ परमेश्वर के अनुग्रह के कार्य का एक अनुपम उदाहरण बनकर सामने आती है। जब वह आयु के तीसवें दशक में थी, तो एक रात उसकी एक सहेली ने उसे एक सभा में आने के लिए आमंत्रित किया। रूथ को यह पता नहीं था कि उस सभा में वह एक प्रचारक को सुनने जा रही है। वह कहती है, “यदि मुझे यह पता होता, तो मैं न जाती।” वह पहले से ही “धर्म” को निभा रही थी, किन्तु उसे इससे कुछ लाभ होता हुआ नहीं दिख रहा था। परन्तु वह उस सभा में गई, और उस रात्रि वहाँ उसने प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार को सुना।

      अब, पचास से भी अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी, जब भी वह उस रात्रि उसे प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने के द्वारा मिले नए जीवन के विषय बताती है, और फिर कैसे प्रभु यीशु ने उसका जीवन परिवर्तित किया, उसकी आँखों से आनन्द और हर्ष के आँसू निकलने लगते हैं। उस रात्रि वह परमेश्वर की एक पुत्री बन गई; और उसके नए जीवन की यह कहानी कभी पुरानी नहीं होती है, सदा रोमांचित करती रहती है।

      इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हमारी कहानी भी रूथ के समान है कि नहीं। जिस बात का फर्क पड़ता है वह है कि हम ने भी रूथ के समान, “धर्म” के निर्वाह के स्थान पर प्रभु यीशु के हमारे पापों के लिए मारे जाने, गाड़े जाने, और तीसरे दिन मृतकों में से जी उठने तथा उसमें मिलने वाली पापों की क्षमा में विश्वास लाने का निर्णय लिया है या नहीं। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने लिखा है, “कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा” (रोमियों 10:9)।

      रूथ ने भी बस यही किया था, और प्रभु यीशु ने उसे पापों से छुड़ाकर, उसका जीवन परिवर्तित कर दिया, उसे एक अविनाशी तथा अनन्तकालीन नया जीवन दे दिया। रूथ के समान प्रभु में विश्वास लाने से यह नया जीवन आपको भी मिल सकता है – अभी; इसी वक्त! – डेव ब्रैनन

मसीह यीशु का हो जाना पुनःस्थापित होना नहीं है; यह नई सृष्टि होना है!

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: रोमियों 10:1-13
Romans 10:1 हे भाइयो, मेरे मन की अभिलाषा और उन के लिये परमेश्वर से मेरी प्रार्थना है, कि वे उद्धार पाएं।
Romans 10:2 क्योंकि मैं उन की गवाही देता हूं, कि उन को परमेश्वर के लिये धुन रहती है, परन्तु बुद्धिमानी के साथ नहीं।
Romans 10:3 क्योकि वे परमेश्वर की धामिर्कता से अनजान हो कर, और अपनी धामिर्कता स्थापन करने का यत्न कर के, परमेश्वर की धामिर्कता के आधीन न हुए।
Romans 10:4 क्योंकि हर एक विश्वास करने वाले के लिये धामिर्कता के निमित मसीह व्यवस्था का अन्त है।
Romans 10:5 क्योंकि मूसा ने यह लिखा है, कि जो मनुष्य उस धामिर्कता पर जो व्यवस्था से है, चलता है, वह इसी कारण जीवित रहेगा।
Romans 10:6 परन्तु जो धामिर्कता विश्वास से है, वह यों कहती है, कि तू अपने मन में यह न कहना कि स्वर्ग पर कौन चढ़ेगा? अर्थात मसीह को उतार लाने के लिये!
Romans 10:7 या गहिराव में कौन उतरेगा? अर्थात मसीह को मरे हुओं में से जिलाकर ऊपर लाने के लिये!
Romans 10:8 परन्तु वह क्या कहती है? यह, कि वचन तेरे निकट है, तेरे मुंह में और तेरे मन में है; यह वही विश्वास का वचन है, जो हम प्रचार करते हैं।
Romans 10:9 कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा।
Romans 10:10 क्योंकि धामिर्कता के लिये मन से विश्वास किया जाता है, और उद्धार के लिये मुंह से अंगीकार किया जाता है।
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा।
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है।
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1



बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

खोज



      कार्टून चरित्र “पीनट” के रचियता चार्ल्स शुल्टज़ के मसखरेपन और अन्तःदृष्टि से मैं सदा आनन्दित होता आया हूँ। उनके द्वारा बनाए गए कार्टूनों में से मेरे सबसे पसन्दीदा कार्टून में से एक चर्च में जवान लोगों के संबंध में था। उस कार्टून में एक जवान लड़का परमेश्वर के वचन बाइबल को पकडे हुए, फोन पर अपने मित्र को कह रहा है, “मुझे लगता है कि मैंने पुराने नियम के रहस्यों को समझने की ओर पहला कदम बढ़ा लिया है...मैंने उसे पढ़ना आरंभ कर दिया है!”

      बाइबल में भजन 119 परमेश्वर के वचन को समझने और उसकी सामर्थ्य को प्रतिदिन अनुभव करते रहने के लिए भजन के लेखक की भूख की अभिव्यक्तियों से भरा पड़ा है। वह कहता है, “अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है” (पद 97)। इस लालसा भरे प्रयास के कारण वह बुद्धिमत्ता, समझ और परमेश्वर की आज्ञाकारिता में बने रहना में बढ़ता जाता है (पद 98-100)।

      बाइबल में रहस्यों को समझने का कोई जादूई सूत्र नहीं दिया गया है। यह करने की प्रक्रिया मस्तिष्क के कार्य से भी बढ़कर है; जो हम पढ़ते हैं उसके प्रति हमसे प्रत्युत्तर मांगती है। जबकि कुछ खण्ड हमारे लिए असमंजस से भरे हो सकते हैं, फिर भी जिन सत्यों को हम स्पष्टतः समझने पाते हैं, हमें उन्हें अपनाना और उनका पालन करना चाहिए; और प्रभु परमेश्वर से कहना चाहिए, “तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं! तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं” (पद 103-104)।

      परमेश्वर के वचन में खोज की एक अद्भुत यात्रा हमारी प्रतीक्षा कर रही है। - डेविड मैक्कैस्लैंड

परमेश्वर के वचन को रोज पढ़ने और और उसका पालन करने के प्रति समर्पण 
उसके प्रेम और सामर्थ्य को समझने की हमारी दैनिक यात्रा का आरंभ है।

तेरी बातों के खुलने से प्रकाश होता है; उस से भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं। - भजन 119:130

बाइबल पाठ: भजन 119:97-105
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है।
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं।
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है।
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।
Psalms 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21
  • 2 तिमुथियुस 4