ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 4 मार्च 2020

निकट



      उसे मेरे जीवन का सबसे रोमांचक समय होना चाहिए था; परन्तु वह सबसे अधिक अकेलेपन का समय हो गया था। कॉलेज की पढ़ाई समाप्त करने के पश्चात, यह मेरी पहली ‘वास्तविक’ नौकरी थी; एक ऐसे शहर में जो मेरे घर से सैंकड़ों मील दूर था। अपना यह पहला बड़ा कदम उठाने का मेरा यह रोमांच शीघ्र ही फीका पड़ गया। मेरे पास रहने के लिए एक छोटा सा कमरा था, कोई घर का सामान, मेज़, कुर्सी आदि नहीं थे, और मैं यहाँ पर किसी को भी नहीं जानता था। मेरा काम तो रोचक था, परन्तु काम के बाद का अकेलापन काटने को दौड़ता था।

      एक रात मैं अपने कमरे में दीवार से पीठ लगाए हुए बैठा था। मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल को खोला, और भजन 16 मेरे सामने आ गया, जिसमें पद 11 में परमेश्वर अपनी निकटता से भर देने की प्रतिज्ञा देता है। मैं प्रार्थना करने लगा, “हे प्रभु, मुझे लगा था की यह नौकरी मेरे लिए सही है, परन्तु मैं इतना अकेला अनुभव करता हूँ। कृपया मुझे अपनी निकटता के एहसास से भर दें।” मैं कई हफ़्तों तक इसी प्रार्थना को विभिन्न शब्दों में दोहराता रहा। किसी रात को मेरे अकेलेपन की भावना हट जाती और मुझे परमेश्वर की उपस्थिति का गहरा एहसास होता था; अन्य रातों को मुझे फिर से बेचैन करने वाला अकेलापन सताता था।

      परन्तु मैं बार-बार लौटकर उसी पद पर आता रहा; हर रात अपने मन को उसी पद पर स्थिर करता रहा, और धीरे-धीरे परमेश्वर मेरे विश्वास को और गहरा करता चला गया। मैंने उसकी विश्वासयोग्यता को ऐसे अनुभव किया जैसा पहले कभी नहीं किया था। साथ ही मैंने यह भी सीखा कि मेरा काम था अपने हृदय को परमेश्वर के आगे खोल कर उंडेल देना...और विनम्रतापूर्वक उसके विश्वासयोग्य प्रत्युत्तर की प्रतीक्षा करना, इस भरोसे के साथ कि वह मुझे अपनी निकटता के एहसास से भर देगा। - एडम होल्ज़

अपने हृदय को परमेश्वर में दृढ़ रखें।

परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है। - नीतिवचन 4:18

बाइबल पाठ: भजन 16:5-11
Psalms 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं।
Psalms 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं।
Psalms 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं।
Psalms 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा।
Psalms 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है।
Psalms 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
Psalms 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है।
Psalms 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।
Psalms 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा।
Psalms 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
Psalms 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29



मंगलवार, 3 मार्च 2020

मूल्यवान



      उसका नाम डेविड था, परन्तु अधिकाँश लोग उसे “बाजा बजाने वाला” ही बुलाते थे। डेविड एक वृद्ध, बिखरे बालों, और बिना संवरे रहने वाला व्यक्ति था, जो सड़क के किनारे खड़ा हुआ आने-जाने वालों का अपने वायलिन बजाने के असाधारण कौशल द्वारा मनोरंजन करता रहता था, और यदि सुनने वालों में से कोई, कभी-कभी उसके वायलिन के खुले हुए डिब्बे में कुछ पैसे डाला देता था; तब डेविड मुस्कुरा कर उसकी ओर देखता धन्यवाद के लिए अपना सिर झुकाता और वायलिन बजाता रहता।

      हाल ही में डेविड का देहांत हो गया, और स्थानीय अखबार में उसके निधन की सूचना छपी, जिसमें उसके बारे में कुछ बताया गया। लोगों को पढ़कर अचंभा हुआ कि वह एक प्रसिद्द विश्वविद्यालय का स्नातक था, कई भाषाएँ बोल लेता था, और कई वर्ष पहले उसने अपने क्षेत्र से राज्यसभा के लिए चुनाव भी लड़ा था। लोग चकित थे कि केवल उसके बाहरी स्वरूप पर ही वे उसका आंकलन करते रहे थे, उन्होंने उसके स्वरूप के कारण उसे कोई विशेष मूल्य नहीं दिया।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि, “परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में बनाया है” (उत्पत्ति 1:27)। यह हम सभी के अन्दर विद्यमान एक निहित मूल्य का सूचक है, चाहे हमारा बाहरी स्वरूप कैसा भी हो, हमारी उपलब्धियां या हमारे बारे में लोगों के विचार जो भी हों। परमेश्वर के लिए हम इतने मूल्यवान हैं की उसने अपने एकलौते पुत्र को हमारे लिए बलिदान होने, हमारे उद्धार का मार्ग तैयार करने और हमारे उसके साथ अनन्त जीवन बिताने का माध्यम बनने के लिए भेजा। जब हमने अपने पापों से परमेश्वर की ओर मुड़ने का निर्णय लेते हैं, तब वह हमें इसी मूल्य के अंतर्गत स्वीकार करता है।

      परमेश्वर हमसे प्रेम करता है, और हमारे चारों ओर ऐसे अनेकों लोग हैं जो परमेश्वर के लिए मूल्यवान हैं। हम परमेश्वर द्वारा मनुष्यों को मूल्यवान समझने का आदर करें, और उसके प्रेम, क्षमा और उद्धार के सन्देश को उन्हें बाँटें। - जेम्स बैंक्स

परमेश्वर का प्रेम बांटे जाने के लिए है।

हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:14-21
John 3:14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए।
John 3:15 ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए।
John 3:16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
John 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
John 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
John 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।
John 3:20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
John 3:21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 28-30
  • मरकुस 8:22-38



सोमवार, 2 मार्च 2020

सुरक्षित स्थान



      मोबाइल फोन का एक लाभ है कि अब हमारे पास किसी अन्य से कभी भी और कितनी भी बातचीत कर पाना संभव है। इसका एक परिणाम यह भी है कि लोग वाहन चलाते हुए भी फोन पार बात करते या सन्देश भेजते रहते हैं – जिससे कभी-कभी भयानक दुर्घटनाएँ हो जाती हैं। ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए संसार के अनेकों देशों ने फोन का प्रयोग करते समय वाहन चलाना प्रतिबंधित किया है। अमेरिका में अनेकों स्थानों पर सड़कों पर चिन्ह लगाए जा रहे हैं की वाहन चालकों को रुक कर बातचीत करने के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध हैं। वे उन फोन कर पाने के सुरक्षित स्थानों पर रुक कर अपनी इच्छा के समयानुसार फोन पर बातचीत कर सकते हैं।

      वाहन चालकों के लिए वाहन चलाते समय फोन पर बातचीत प्रतिबंधित करना अच्छा है; परन्तु एक अन्य प्रकार की बातचीत है जिस पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है: परमेश्वर से प्रार्थना। परमेश्वर द्वारा हमें खुला निमंत्रण है कि हम चाहे आ रहे हों, जा रहे हों, या शांत बैठे हुए हों, हम कभी भी किसी भी बात के लिए उससे वार्तालाप कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खंड में प्रेरित पौलुस द्वारा उन सभी के लिए परामर्श है, जो परमेश्वर से बातचीत करना चाहते हैं, कि वे “निरंतर प्रार्थना में लगे रहें” (1 थिस्सलुनीकियों 5:17)। पौलुस परमेश्वर से बातचीत करने के इस खुले निमंत्रण के साथ ही हमें “सदा आनंदित” रहने और हर परिस्थिति में हर बात के लिए धन्यवाद देने के लिए भी कहता है (पद 16, 18)। परमेश्वर हमें आनन्द और धन्यवाद के मनोभाव में रहने के लिए कहता है – जो निरंतर प्रार्थना करते रहने पर आधारित मसीह यीशु में होकर परमेश्वर पर भरोसा रखने की अभिव्यक्तियाँ हैं।

      परमेश्वर सदैव सहायता के लिए हमारी त्वरित पुकार के लिए भी, और किसी बात को लेकर उससे लम्बी बातचीत के लिए भी उपलब्ध रहता है। वह उसके साथ संबंध बनाकर रहने के लिए हमारा स्वागत करता है, जहां हम उसके साथ अपनी भावनाओं और बातों का निरंतर और अविरल आदान-प्रदान करते रह सकते हैं; वे चाहे हमारे आनन्द हों, कृतज्ञता हो, या हमारी आवश्यकताएं हों या हमारे प्रश्न हों, या हमारी कोई चिंता अथवा भय हो (इब्रानियों 4:15-16)। वह हमारे लिए सदा प्रार्थना के एक सुरक्षित स्थान को उपलब्ध रखता है। - बिल क्राउडर

परमेश्वर के सिंहासन तक पहुँच सदा बनी रहती है।

क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे। - इब्रानियों 4:15-16

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 5:16-24
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो।
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो।
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।
1 Thessalonians 5:19 आत्मा को न बुझाओ।
1 Thessalonians 5:20 भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो।
1 Thessalonians 5:21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।
1 Thessalonians 5:22 सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।
1 Thessalonians 5:23 शान्‍ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे; और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरक्षित रहें।
1 Thessalonians 5:24 तुम्हारा बुलाने वाला सच्चा है, और वह ऐसा ही करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 26-27
  • मरकुस 8:1-21



रविवार, 1 मार्च 2020

दृढ़



      मैं कैलिफोर्निया की निवासी हूँ और धूप से चमकती हुई चीजें मुझे अच्छी लगती हैं, तथा सभी ठंडी चीज़ों से मैं बच कर रहना चाहती हूँ। परन्तु मुझे बर्फ के सुन्दर दृश्यों की फोटो देखना अच्छा लगता है। इसलिए जब मुझे अपनी एक सहेली द्वारा उसकी खिड़की के बाहर उगने वाले एक पौधे का चित्र प्राप्त हुआ तो मैं मुस्कुराई; मेरी सहेली इल्लिनोय में रहती है और उस फोटो की प्रशंसा शीघ्र ही उदासी में बदल गयी क्योंकि उस पौधे की शाखाएं बर्फ के बोझ से झुकी हुई थीं। मैं सोचने लगी कि ये शाखाएं कितने समय तक बर्फ के बोझ को सहने पाएंगी? क्या वो इस बोझ से टूट नहीं जाएँगी?

      उस पौधे की शाखाओं पर पड़े उस जोखिम को देखकर मुझे अपने कन्धों पर पड़े चिन्ताओं का बोझ स्मरण हो आया। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने यह कहने के पश्चात कि सबसे उत्तम खज़ाने पृथ्वी के या नाशवान नहीं होते हैं, उन्होंने प्रोत्साहित किया कि हम अपनी चिंताओं और परेशानियों को उन्हें सौंप दें। इस सृष्टि का सृष्टिकर्ता और पालनहार अपने बच्चों से प्रेम करता है और उनके लिए उपलब्ध करवाता है, इसलिए हमें अपने बहुमूल्य समय को चिंता में गंवाने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर हमारी आवश्यकताओं को जानता है और उनके लिए प्रावधान करेगा (मत्ती 6:19-32)।

      हमारा प्रभु परमेश्वर यह भी जानता है कि हम चिंता करने के प्रलोभन में पड़ेंगे। इसीलिए वह कहता है कि हम पहले उसके निकट आ जाएं, वर्तमान में उसके प्रावधान और उपस्थिति पर भरोसा रखें, और विश्वास के साथ दिन प्रति दिन का जीवन जीएँ (पद 33-34)।

      इस जीवन में हमें अभिभूत करने वाली कठिनाइयों और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ेगा, जो हमारे कंधों को चिंताओं के बोझ तले दबा सकते हैं। हम इस चिंता के बोझ तले कुछ समय के लिए दब भी सकते हैं; परन्तु जब हम प्रभु में भरोसा बनाए रखेंगे तो ये बोझ हमें तोड़ने नहीं पाएंगे, प्रभु की सामर्थ्य हमें दृढ़ बनाए रखेगी। - जोशील डिक्सन

जब हम सभी भली वस्तुओं के देने वाले पर भरोसा रखेंगे, 
तो चिंता हमें तोड़ने नहीं पाएगी।

[प्रभु यीशु ने कहा] हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा?
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे?
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 23-25
  • मरकुस 7:14-37



शनिवार, 29 फ़रवरी 2020

उड़ान



      परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह के धैर्य के साथ प्रतीक्षा करने से संबंधित शब्द, भरोसे के साथ भविष्य के प्रति आशा की उपेक्षा रखते हैं। हमारे परीक्षाओं के स्थान में, हम उस उद्धार के छुटकारे की प्रतीक्षा में है जिसका आगमन अवश्यंभावी है। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को आश्वस्त किया, “धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे” (मत्ती 5:4)।

      यह जानते हुए कि हमारी नियति, जो कि स्वर्ग की निश्चित आशा है, महिमामयी है; हम यहाँ पृथ्वी पर रहते हुए उसकी ओर कदम बढ़ा सकते हैं। चाहे हम थके हुए हों, फिर भी हम अपने विश्वास के पंखों को फैला कर उड़ान भर सकते हैं। हम परमेश्वर की आज्ञाकारिता के मार्ग पर चल सकते हैं, बिना थकित हुए। हम बिना ऊबे हुए अपनी दिनचर्या में चलते रह सकते हैं।  हम मसीही विश्वासियों के लिए एक बेहतर संसार आ रहा है, जहां पर हमारी आत्मा क्रियाशील होंगी और हमारे शरीर भागेंगे, कूदेंगे, और उड़ान भरेंगे! यही हमारी आशा है।

      इस बीच में, जो अन्ततः एक दिन सत्य हो जाएगा, वह आज भी सच होना आरंभ हो सकता है। हम अपनी अत्याधिक थकान के होते हुए भी दृढ़, धीरजवंत, और आनंदित हो सकते हैं। शांत और कृपालु हो सकते हैं, अपनी दुर्बलताओं और थकान पर कम ध्यान लगाने और अपने बारे में चिंता करने की बजाए दूसरों की चिंता करने वाले हो सकते हैं। जो किसी परेशानी या विपरीत परिस्थिति में हों उन्हें प्रेम और प्रोत्साहन के कुछ शब्द कहने वाले हो सकते हैं।

      हम अभी उस समय के लिए तैयार हो सकते हैं जब हमारी आत्माएं उड़ान भरेंगी! – डेविड रोपर

जब आप जीवन के संघर्षों से थकित होने लगें तो प्रभु में विश्राम लें।

यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह! – भजन 27:14

बाइबल पाठ: यशायाह 40:27-31
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता?
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है।
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है।
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं;
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13



शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

अनुभव


      जब हमें पता चला कि एक रिश्तेदार के साथ खरीददारी करने के लिए गई मेरी सास कहीं गुम हो गई हैं, तो मैं और मेरी पत्नी बहुत घबरा गए। मेरी सास को भूल जाने की बीमारी है, और इसके कारण होने वाले असमंजस में वे कुछ भी कर बैठती हैं। हम घबराहट अनुभव कर रहे थे, यह सोचते हुए कि क्या वे उसी इलाके में भटक रही होंगी, या यह सोचकर कि वह उनके घर को जा रही है, कहीं वे किसी भी बस में तो नहीं चढ़ गई होंगी। हमारे मनों में जो बुरे से बुरा हो सकता था, वह सब आने लगा, और हम घबराए हुए उनकी खोज में लग गए, साथ ही परमेश्वर को भी पुकारते जा रहे थे की उन्हें ढुँढवा दे।

      कई घंटों के पश्चात किसी ने मेरी सास को कई मील दूर एक सड़क पर चलते हुए देखा; और हमने उन्हें पा लेने में परमेश्वर की आशीष को अनुभव किया। इसके कुछ महीने के बाद, हमने परमेश्वर की एक और आशीष को अनुभव किया: अस्सी वर्ष की आयु में मेरी सास प्रभु यीशु मसीह की ओर उद्धार के लिए मुडीं और उन्हें अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने एक दृष्टांत सुनाया, उनहोंने कहा, “तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है। और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है” (लूका 15:4-6)।

      चरवाहे अपनी भेड़ों की गिनती रखते हैं, यह जानने के लिए कि उनकी सभी भेड़ें उनके पास हैं कि नहीं। इसी प्रकार से प्रभु यीशु भी, जिन्होंने अपने आप को अच्छे चरवाहे के समान बताया है, हम सभी को बहुमूल्य मानता है, हम चाहे वृद्ध हों अथवा युवा। जब हम जीवन में भटक रहे होते हैं, अपने जीवन के उद्देश्य को लेकर चिंतित और उसकी खोज में होते हैं, तो प्रभु यीशु की ओर मुड़ने और उसे अपना जीवन समर्पित करना सदा लाभप्रद रहता है। परमेश्वर चाहता है कि हम प्रभु यीशु में होकर उसके प्रेम और आशीषों का अनुभव करें। - लेस्ली कोह

अद्भुत अनुग्रह...मैं कभी खोया हुआ था, परन्तु अब खोज लिया गया हूँ। - जॉन न्यूटन

अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। - यूहन्ना 10:11

बाइबल पाठ: लूका 15:1-9
Luke 15:1 सब चुंगी लेने वाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उस की सुनें।
Luke 15:2 और फरीसी और शास्त्री कुड़कुड़ा कर कहने लगे, कि यह तो पापियों से मिलता है और उन के साथ खाता भी है।
Luke 15:3 तब उसने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा।
Luke 15:4 तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए तो निन्नानवे को जंगल में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे?
Luke 15:5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे कांधे पर उठा लेता है।
Luke 15:6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे कर के कहता है, मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।
Luke 15:7 मैं तुम से कहता हूं; कि इसी रीति से एक मन फिराने वाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्नानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।
Luke 15:8 या कौन ऐसी स्त्री होगी, जिस के पास दस सिक्के हों, और उन में से एक खो जाए; तो वह दीया बारकर और घर झाड़ बुहार कर जब तक मिल न जाए, जी लगाकर खोजती न रहे?
Luke 15:9 और जब मिल जाता है, तो वह अपने सखियों और पड़ोसिनियों को इकट्ठी कर के कहती है, कि मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरा खोया हुआ सिक्‍का मिल गया है।

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

शान्त



      आतंक और भय की अनुभूति होने पर हमारे शरीर प्रतिक्रिया देते हैं। हमारे पेट में एक भारीपन सा होता है, हृदय के गति बहुत बढ़ जाती है, और हम लंबी साँसें लेने लगते हैं। हमारे शरीरों की प्रवृत्ति इन संकट की भावनाओं की अनदेखी नहीं होने देती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु के शिष्यों ने एक रात को अत्याधिक भय का सामना किया। प्रभु यीशु ने पांच हज़ार की भीड़ को भोजन खिलाने का आश्चर्यकर्म किया था, और फिर उसने संध्या के समय शिष्यों को नाव द्वारा बैथसेदा की और रवाना कर दिया, जब कि वह स्वयं पीछे रुक कर प्रार्थना में समय बिता रहा था। रात्री के समय शिष्य नाव में प्रतिकूल हवा में नाव खे रहे थे, तभी प्रभु यीशु पानी पर चलते हुए उनकी ओर आए। शिष्यों को लगा कि कोई भूत उनकी ओर आ रहा है, और वे बहुत भयभीत हो गए (मरकुस 6:49-50)।

      परन्तु प्रभु यीशु ने उन्हें ढाढ़स बंधाया, उनसे कहा की भयभीत न हों, और साहस रखें। जैसे ही प्रभु यीशु उनकी नाव में आए, हवा शांत हो गयी और वे सुरक्षित किनारे पर पहुँच गए।मैं उनमें आने वाली उस शान्ति के अनुभव की कल्पना करती हूँ जो प्रभु के आने से उन्हें मिली, उस भय की भावना के पश्चात।

      जब भी हम चिंतित होकर बेचैन हो रहे होते हैं, हम प्रभु यीशु की सामर्थ्य में आश्वस्त होकर शान्त हो सकते हैं। वह चाहे हमारे भय को दूर करे, या फिर हमें उन परिस्थितियों का सामना करने की सामर्थ्य दे, किन्तु उसकी शान्ति जो “समझ से परे” है (फिलिप्पियों 4:7) हमें उपलब्ध रहती है। और जब वह हमें हमारे भय से मुक्त करता है, तो हमारी आत्मा और शरीर शान्त स्थिति में वापस लौट सकते हैं। - एमी बाउचर पाई

प्रभु परमेश्वर हमें भय से मुक्ति देता है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4: 6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 6:45-53
Mark 6:45 तब उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mark 6:46 और उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।
Mark 6:47 और जब सांझ हुई, तो नाव झील के बीच में थी, और वह अकेला भूमि पर था।
Mark 6:48 और जब उसने देखा, कि वे खेते खेते घबरा गए हैं, क्योंकि हवा उनके विरुद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उन के पास आया; और उन से आगे निकल जाना चाहता था।
Mark 6:49 परन्तु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है, और चिल्ला उठे, क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे।
Mark 6:50 पर उसने तुरन्त उन से बातें कीं और कहा; ढाढ़स बान्‍धो: मैं हूं; डरो मत।
Mark 6:51 तब वह उन के पास नाव पर आया, और हवा थम गई: और वे बहुत ही आश्चर्य करने लगे।
Mark 6:52 क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में ने समझे थे परन्तु उन के मन कठोर हो गए थे।
Mark 6:53 और वे पार उतरकर गन्नेसरत में पहुंचे, और नाव घाट पर लगाई।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56