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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

घर

 

          जब हमारे बच्चे छोटे थे, उस समय की मेरी कुछ प्रिय स्मृतियाँ हैं। उत्सव के दिनों में हम परिवार के लोगों और मित्रों के साथ एकत्रित हुआ करते थे और हम वयस्क देर रात तक बातें करते रहते थे; हमारे बच्चे खेल से थक कर किसी सोफा या कुर्सी पर सिमट कर सो जाते थे। जब घर वापस जाने का समय होता था तो मैं बच्चों को गोदी में उठाकर उन्हें कार की पिछली सीट पर लेटा देता था, और घर पहुँचने पर कार की सीट से उठाकर उन्हें उनके बिस्तरों में लेटा देता था, और उन्हें चूम कर, शुभ रात्रि बोलकर बत्ती बुझा देता था। प्रातः वे उठकर देखते थे कि वे अपने घर में पहुँच गए हैं।

          यह मेरे लिए एक बहुत सार्थक रूपक बन गया है उस समय का जब, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में व्यक्त किया गया है, हम “प्रभु में सो जाएंगे” ( थिस्सलुनीकियों 4:14)। हमारी आँखें यहाँ इस पृथ्वी पर बन्द होंगी, और हम अपने अनन्तकाल के घर में जाग उठेंगे, जहाँ फिर कोई थकान, चिंता, दुःख, परेशानी इत्यादि नहीं होगी, जो हमारे पृथ्वी के समय पर रहती है।

          कुछ दिन पहले मेरे सामने पुराने नियम में से एक पद आया, जिसने मुझे चकित कर दिया। व्यवस्थाविवरण में मूसा के संबंध में एक अंतिम टिप्पणी के समान लिखा है,तब यहोवा के कहने के अनुसार उसका दास मूसा वहीं मोआब देश में मर गया” (34:5)। इस पद के मूल इब्रानी शब्दों का अनुवाद होता है, “मूसा की मृत्यु ... यहोवा के मुँह के साथ हुई”, जिसका अर्थ प्राचीन रब्बियों ने “परमेश्वर के चुम्बन के साथ” हुई बताया है।

          यह उसी प्रकार है जैसे मैं अपने बच्चों बिस्तर में लेटा कर चूमता था, और जब उनकी आँख खुलती थी तब वे अपने घर में होते थे। जॉन डन्न ने इसे बहुत अच्छे से व्यक्त किया है, “एक छोटी सी झपकी, और उसके बाद फिर हम अनंतकाल के लिए जाग उठेंगे” – हम अपने स्थाई, अनन्तकाल के घर में जाग उठेंगे। - डेविड एच. रोपर

 

हमारे लिए मृत्यु, समय से अनंतता में, एक करवट लेने के समान है। - विलियम पेन्न


क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:14

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 34:1-8

व्यवस्थाविवरण 34:1 फिर मूसा मोआब के अराबा से नबो पहाड़ पर, जो पिसगा की एक चोटी और यरीहो के सामने है, चढ़ गया; और यहोवा ने उसको दान तक का गिलाद नाम सारा देश,

व्यवस्थाविवरण 34:2 और नप्ताली का सारा देश, और एप्रैम और मनश्शे का देश, और पच्छिम के समुद्र तक का यहूदा का सारा देश,

व्यवस्थाविवरण 34:3 और दक्खिन देश, और सोअर तक की यरीहो नाम खजूर वाले नगर की तराई, यह सब दिखाया।

व्यवस्थाविवरण 34:4 तब यहोवा ने उस से कहा, जिस देश के विषय में मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाकर कहा था, कि मैं इसे तेरे वंश को दूंगा वह यही है। मैं ने इस को तुझे साक्षात दिखला दिया है, परन्तु तू पार हो कर वहां जाने न पाएगा।

व्यवस्थाविवरण 34:5 तब यहोवा के कहने के अनुसार उसका दास मूसा वहीं मोआब देश में मर गया,

व्यवस्थाविवरण 34:6 और उसने उसे मोआब के देश में बेतपोर के सामने एक तराई में मिट्टी दी; और आज के दिन तक कोई नहीं जानता कि उसकी कब्र कहां है।

व्यवस्थाविवरण 34:7 मूसा अपनी मृत्यु के समय एक सौ बीस वर्ष का था; परन्तु न तो उसकी आंखें धुंधली पड़ीं, और न उसका पौरुष घटा था।

व्यवस्थाविवरण 34:8 और इस्राएली मोआब के अराबा में मूसा के लिये तीस दिन तक रोते रहे; तब मूसा के लिये रोने और विलाप करने के दिन पूरे हुए।

 

एक साल में बाइबल: 

  • ओबद्याह
  • प्रकाशितवाक्य 9

गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

प्रार्थना

 

          साल का वह समय आ गया है जब परिवार एकत्रित होते हैं और उत्सव मनाते हैं। किन्तु हम में से कुछ लोग अपने उन “चिंतित” रिश्तेदारों से मिलने से संकोच करते हैं जो अटपटे और व्यक्तिगत प्रश्न पूछते हैं, जैसे कि अविवाहित होने या संतान न होने, या अन्य किसी व्यक्तिगत बात के विषय, और यह एहसास करवाते हैं कि हम में कुछ कमी है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इलीशिबा की स्थित की कल्पना करें, जो कई वर्ष से विवाहित थे, किन्तु निःसंतान थी। उस समय के समाज की परंपराओं के अनुसार, बाँझ होना परमेश्वर द्वारा उपेक्षित होने का चिह्न समझा जाता था (देखें 1 शमूएल 1:5-6), और लज्जाजनक बात समझी जाती थी। इसलिए यद्यपि इलीशिबा धार्मिकता का जीवन व्यतीत कर रही थी (लूका 1:6), किन्तु संभव है कि उसके पड़ौसी तथा संबंधी कुछ और ही विचार रखते हों।

          लेकिन इलीशिबा और उसका पति विश्वासयोग्यता से परमेश्वर की सेवा करते रहे। फिर, जब दोनों ही आयु में काफ़ी प्रौढ़ हो गए थे, तो एक आश्चर्यकर्म हुआ। परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना को सुना (पद 13)। उसे, अपने समय और योजना के अनुसार, हम पर अपनी कृपा दिखाना पसंद है (पद 25)। और यद्यपि हमें लग सकता है कि वह विलम्ब कर रहा है, किन्तु उसकी बुद्धिमत्ता सदैव सिद्ध होती है और उसका समय सदा सही होता है। इलीशिबा और उसके पति के लिए परमेश्वर के पास एक विशेष उपहार था – वह पुत्र जो जगत के उद्धारकर्ता का अग्रदूत और संसार को मसीहा का परिचय करवाने वाला बनेगा (यशायाह 40:3-5)।

          क्या आपको कभी अपने जीवन में किसी बात की कमी खलती है, और जिसके विषय आप प्रार्थनाएं भी करते रहे हैं – विश्वविद्यालय की कोई डिग्री, विवाह, बच्चा, नौकरी, घर, इत्यादि? परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य बने रहिए, और भरोसे के साथ उसके कार्य को करता रहिए; उसके समय और योजना की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करते रहिए, जैसा कि इलीशिबा ने किया।

          हमारी आवश्यकताएँ तथा परिस्थितियाँ चाहे जो भी हों, परमेश्वर हम में, हमारे द्वारा, और हमारे लिए कार्य कर रहा है। वह हमारे मन की दशा को जानता है। वह हमारी प्रार्थना सुनता है और उत्तर भी देता है। - पोह फैंग चिया

 

परमेश्वर के प्रति वफादारी से कार्य करते रहिए, जीवन व्यतीत करते रहिए।


इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: लूका 1:18-25

लूका 1:18 ज़कर्याह ने स्वर्गदूत से पूछा; यह मैं कैसे जानूं? क्योंकि मैं तो बूढ़ा हूं; और मेरी पत्नी भी बूढ़ी हो गई है।

लूका 1:19 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया, कि मैं जिब्राईल हूँ, जो परमेश्वर के सामने खड़ा रहता हूँ; और मैं तुझ से बातें करने और तुझे यह सुसमाचार सुनाने को भेजा गया हूँ।

लूका 1:20 और देख जिस दिन तक ये बातें पूरी न हो लें, उस दिन तक तू मौन रहेगा, और बोल न सकेगा, इसलिये कि तू ने मेरी बातों की जो अपने समय पर पूरी होंगी, प्रतीति न की।

लूका 1:21 और लोग ज़कर्याह की बाट देखते रहे और अचम्भा करने लगे कि उसे मन्दिर में ऐसी देर क्यों लगी?

लूका 1:22 जब वह बाहर आया, तो उन से बोल न सका: सो वे जान गए, कि उसने मन्दिर में कोई दर्शन पाया है; और वह उन से संकेत करता रहा, और गूंगा रह गया।

लूका 1:23 जब उस की सेवा के दिन पूरे हुए, तो वह अपने घर चला गया।

लूका 1:24 इन दिनों के बाद उस की पत्नी इलीशिबा गर्भवती हुई; और पांच महीने तक अपने आप को यह कह के छिपाए रखा।

लूका 1:25 कि मनुष्यों में मेरा अपमान दूर करने के लिये प्रभु ने इन दिनों में कृपा दृष्टि कर के मेरे लिये ऐसा किया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • आमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8

बुधवार, 16 दिसंबर 2020

दर्पण

 

          मैं जब अपने होटल से बाहर निकला, तो मुझे देखकर मेरी सहायिका, जो मुझे सेमिनार के स्थान को ले जाने के लिए आई थी, के चेहरे पर एक विचित्र सी मुस्कराहट आ गई। मैंने उस से पूछा, “हास्यास्पद क्या है?” तो वह हंस पड़ी और मुझ से पूछा, “क्या आप ने अपने बाल बनाए हैं?” अब हंसने की मेरी बारी थी, क्योंकि मैं वास्तव में बाल बनाना भूल गया था। मैंने होटल के दर्पण में अपने आप को देखा तो था, लेकिन फिर भी जो मुझे दिखाई दिया, न जाने क्यों मैंने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब अपनी पत्री में इसी दिखाई देने वाली बात पर ध्यान न देने का एक व्यावहारिक उदाहरण लिखता है। परमेश्वर का पवित्र शास्त्र एक दर्पण के समान है। हम तैयार होते समय अपने आप को दर्पण में देखते हैं, कि हमारे स्वरूप में कहीं कोई ऐसी बात तो नहीं है हमें जिसे ठीक कर लेना चाहिए? क्या हमारे बाल ठीक से बने हुए, चेहरा धुला हुआ, कमीज़ के बटन ठीक से लगे हुए, और कमीज़ ठीक से पैंट में की गई है कि नहीं? दर्पण के समान ही बाइबल भी हमें अपने चरित्र, रवैये, विचारों, और व्यवहार को जाँचने में सहायता करती है (याकूब 1:23-24)। ऐसा करने से हम परमेश्वर द्वारा दिए गए जीवन के सिद्धांतों के साथ अपने आप को अनुकूलित करने और उनके अनुसार जीवन जीने के लिए जाँच-परख सकते हैं। तब हम अपनी जीभ पर लगाम (पद 26), तथा विधवाओं और अनाथों की सुधि (पद 27) रख सकते हैं। तब हम अपने अन्दर निवास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा की बातों का पालन करेंगे, और अपने आप को संसार से दूषित होने (पद 27) से बचाए रखेंगे।

          जब हम परमेश्वर की सिद्ध व्यवस्था पर, जो हमें पाप के दासत्व से स्वतंत्र करती है, ध्यान देंगे, और उसे अपने जीवनों में लागू करेंगे, तो हम जो करेंगे उसमें आशीष पाएँगे (पद 25)। परमेश्वर के पवित्र शास्त्र में अपने आप का निरीक्षण करते रहने के द्वारा हम उस वचन को जो हमारे हृदयों में बोया गया है, नम्रता से ग्रहण भी कर सकेंगे (पद 21)। - लॉरेंस दर्मानी

 

दर्पण के समान बाइबल हमारे भीतरी मनुष्यत्व को प्रतिबिंबित करती है।


क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं! - भजन 119:1

बाइबल पाठ: याकूब 1:16-27

याकूब 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।

याकूब 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।

याकूब 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्टि की हुई वस्तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

याकूब 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयों, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।

याकूब 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।

याकूब 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।

याकूब 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।

याकूब 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।

याकूब 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।

याकूब 1:25 पर जो व्यक्ति स्वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।

याकूब 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।

याकूब 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्कलंक रखें।

 

एक साल में बाइबल: 

  • आमोस 4-6
  • प्रकाशितवाक्य 7

मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

स्तुति

 

          मैं इस्राएल के ऐइन करेम में स्थित चर्च ‘ऑफ़ द विज़िटेशन’ के आँगन में बैठी थी, और वहाँ सड़सठ भाषाओं में सड़सठ मोज़ाएक (पच्चीकारी) पट्टियों पर प्रदर्शित की गई लूका 1:46-55 की सुन्दरता को देख कर अभिभूत हो गई थी। परमेश्वर के वचन बाइबल के इस खण्ड को पारंपरिक रूप में उसके लातीनी भाषा के नाम ‘मैग्निफिकेट’ अर्थात स्तुतिगान से जाना जाता है। ये पद मरियम का आनंदमय प्रत्युत्तर हैं, स्वर्गदूत द्वारा उसे बताए जाने पर कि परमेश्वर ने उसे चुना है कि वह जगत के उद्धारकर्ता मसीहा की माँ बनेगी।

          वहाँ लगी प्रत्येक मोज़ाएक (पच्चीकारी) पट्टियों पर मरियम के स्तुतिगान के शब्द लिखे हुए थे, जिनमें “मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है। और मेरी आत्मा मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर से आनन्दित हुई।...क्योंकि उस शक्तिमान ने मेरे लिये बड़े बड़े काम किए हैं, और उसका नाम पवित्र है” (46-49) भी सम्मिलित हैं। उन टाइल्स में लिखे गए स्तुतिगान के वे शब्द मरियम द्वारा परमेश्वर की उसके प्रति तथा इस्राएल के प्रति विश्वासयोग्यता को स्मरण करते हैं और बयान करते हैं।

          मरियम परमेश्वर के अनुग्रह की कृतज्ञ पात्र थी, और अपने उद्धार में आनन्दित हुई (पद 47)। उसने बयान किया कि परमेश्वर का इस्राएल के प्रति अनुग्रह सदियों और पीढ़ियों से चलता चला आ रहा है (पद 50)। इस्राएलियों के प्रति परमेश्वर की देखभाल का ध्यान कर के मरियम परमेश्वर के द्वारा उनके लिए किए गए सामर्थी कार्यों के लिए उसकी स्तुति करती है (पद 51)। वह परमेश्वर का धन्यवाद और स्तुति उसकी दैनिक आवश्यकताओं के उपलब्ध करवाते रहने के लिए भी करती है (पद 53)।

          यहाँ से मरियम से हम सीखते हैं कि परमेश्वर द्वारा हमारे लिए किए गए महान कार्यों को स्मरण करने से हम आनन्दित होने और उसकी स्तुतिगान करने के लिए उभारे जा सकते हैं। इस क्रिसमस के समय में, इस वर्ष का  पुनःअवलोकन करते समय परमेश्वर की भलाइयों को स्मरण करें, और आप स्वतः ही अपने आप को परमेश्वर की स्तुति करते हुए पाएँगे। - लीसा सामरा

 

परमेश्वर की भलाइयों को स्मरण करें, उन्हें औरों को बताएँ, 

और उनके लिए उसकी स्तुति-आराधना करें।


और हन्ना ने प्रार्थना कर के कहा, “मेरा मन यहोवा के कारण मगन है; मेरा सींग यहोवा के कारण ऊंचा, हुआ है। मेरा मुंह मेरे शत्रुओं के विरुद्ध खुल गया, क्योंकि मैं तेरे किए हुए उद्धार से आनन्दित हूँ।” - 1 शमूएल 2:1

बाइबल पाठ: लूका 1:46-55

लूका 1:46 तब मरियम ने कहा, मेरा प्राण प्रभु की बड़ाई करता है।

लूका 1:47 और मेरी आत्मा मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर से आनन्दित हुई।

लूका 1:48 क्योंकि उसने अपनी दासी की दीनता पर दृष्टि की है, इसलिये देखो, अब से सब युग युग के लोग मुझे धन्य कहेंगे।

लूका 1:49 क्योंकि उस शक्तिमान ने मेरे लिये बड़े बड़े काम किए हैं, और उसका नाम पवित्र है।

लूका 1:50 और उस की दया उन पर, जो उस से डरते हैं, पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

लूका 1:51 उसने अपना भुजबल दिखाया, और जो अपने आप को बड़ा समझते थे, उन्हें तित्तर-बित्तर किया।

लूका 1:52 उसने बलवानों को सिंहासनों से गिरा दिया; और दीनों को ऊंचा किया।

लूका 1:53 उसने भूखों को अच्छी वस्तुओं से तृप्त किया, और धनवानों को छूछे हाथ निकाल दिया।

लूका 1:54 उसने अपने सेवक इस्राएल को सम्हाल लिया।

लूका 1:55 कि अपनी उस दया को स्मरण करे, जो इब्राहीम और उसके वंश पर सदा रहेगी, जैसा उसने हमारे बाप-दादों से कहा था।

 

एक साल में बाइबल: 

  • आमोस 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 6

सोमवार, 14 दिसंबर 2020

प्रेम गीत

 

          गीत लेखक बिली हिल ने 1936 में एक गाना प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था “The Glory of Love” (प्रेम की महिमा), जो शीघ्र ही सारे देश में बहुत लोकप्रिय हो गया। उस गाने का विषय था एक दूसरे के प्रति प्रेम के कारण छोटे छोटे कार्य भी एक दूसरे के लिए करते रहना। इसके पचास वर्ष बाद, एक अन्य गीत लेखक, पीटर कैटेरा, ने उसी शीर्षक का एक और प्रेम गीत लिखा, जिसमें उसने हमेशा साथ जीते रहने वाले दो लोगों की कल्पना की, जो यह जानते हैं कि उन्होंने एक दूसरे के प्रति अपने प्रेम के कारण सब कुछ किया है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल की अंतिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य में, एक नए प्रेम गीत के बारे में बताया गया है जो किसी दिन स्वर्ग और पृथ्वी पर उपस्थित प्रत्येक जन के स्वर में उठाया जाएगा (प्रकाशितवाक्य 5:9, 13)। किन्तु इस संगीत का आरंभ शोक के छोटे सुर के साथ होता है, क्योंकि हमें वर्णन लिखने वाले यूहन्ना को संसार के साथ जो कुछ भी बुरा हुआ है, उसका कोई उत्तर मिलता दिखाई नहीं देता है (पद 3-4)। परन्तु उसका मन प्रसन्न हो जाता है और संगीत अपने उत्कर्ष पर पहुँचता है (पद 12-13) जब यूहन्ना प्रेम की वास्तविक महिमा और कहानी को जानने पाता है। शीघ्र ही वह समस्त सृष्टि को यहूदा के सर्व-सामर्थी सिंह-राजा की जयजयकार करते सुनता है (पद 5), जिसने अपने आप को अपने लोगों के प्रति उसके प्रेम के कारण एक मेमने के समान बलिदान कर देने के द्वारा अपनी प्रजा के हृदय को जीत लिया है (पद 13)।

          हम इस सर्वाधिक मार्मिक गीत के गए जाने में दयालुता के साथ किए गए छोटे से छोटे सामान्य कार्यों को भी संगीत में ऊँचे उठते हुए देखते हैं। जिस महिमा के बारे में हम गाते हैं, वह परमेश्वर के हृदय को प्रतिबिंबित करती है। हम उसके बारे में प्रेम गीत इसलिए गाते हैं क्योंकि उसने ही हमें यह गीत प्रदान किया है। - मार्ट डी हान

 

सामान्य और छोटे दयालुता के कार्यों के द्वारा भी आप परमेश्वर का धन्यवाद कर सकते हैं।


हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। - 1 यूहन्ना 4:19

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 5:1-13

प्रकाशितवाक्य 5:1 और जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई भी, और वह सात मुहर लगा कर बन्द की गई थी।

प्रकाशितवाक्य 5:2 फिर मैं ने एक बलवन्‍त स्वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्द से यह प्रचार करता था कि इस पुस्तक के खोलने और उस की मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?

प्रकाशितवाक्य 5:3 और न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला।

प्रकाशितवाक्य 5:4 और मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला।

प्रकाशितवाक्य 5:5 तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है।

प्रकाशितवाक्य 5:6 और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानो एक वध किया हुआ मेमना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आँखें थीं; ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं।

प्रकाशितवाक्य 5:7 उसने आ कर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्तक ले ली,

प्रकाशितवाक्य 5:8 और जब उसने पुस्तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेमने के सामने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं।

प्रकाशितवाक्य 5:9 और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध हो कर अपने लहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।

प्रकाशितवाक्य 5:10 और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।

प्रकाशितवाक्य 5:11 और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी।

प्रकाशितवाक्य 5:12 और वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेमना ही सामर्थ्य, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।

प्रकाशितवाक्य 5:13 फिर मैं ने स्वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेमने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • योएल 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 5

रविवार, 13 दिसंबर 2020

विश्वासयोग्य

 

          मैंने अपने क्रिसमस ट्री को रंग-बिरंगी चमकने वाली बत्तियों से लपेटा और उसकी टहनियों पर गुलाबी और नीले रिबन लगाए, और उसका नाम “बच्चे की आशा” क्रिसमस ट्री रख दिया। मैं और मेरे पति पिछले चार वर्ष से बच्चे को गोद लेने की प्रतीक्षा कर रहे थे; और मेरी इच्छा थी कि क्रिसमस तक हमारी यह इच्छा निश्चय ही पूरी हो जाए।

          हर प्रातः मैं उस पेड़ के पास रुकती, प्रार्थना करती, अपने आप को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का ध्यान दिलाती थी। फिर हमें 21 दिसंबर को समाचार मिला – इस वर्ष भी हमें बच्चा नहीं मिल पाएगा। मैं बहुत टूटा हुआ और हताश होकर उस क्रिसमस ट्री के पास रुकी, जो मेरे लिए परमेश्वर के प्रावधानों का प्रतीक बन गया था। क्या परमेश्वर अभी भी विश्वासयोग्य था? क्या मैं कुछ गलत कर रही थी?

          कभी कभी परमेश्वर अपने प्रेम में हमें अनुशासित करने के लिए प्रार्थनाओं के उत्तर रोक कर रखता है; और कुछ अन्य समयों पर, हमारे विश्वास को बढ़ाने के लिए, उत्तरों को देने में विलम्ब करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत में हम यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता द्वारा वर्णित इस्राएल के परमेश्वर द्वारा सुधारे जाने को पढ़ते हैं। परमेश्वर की उस ताड़ना को देखने से यिर्मयाह को होने वाली पीड़ा प्रगट है; यिर्मयाह कहता है, उसने अपनी तीरों से मेरे हृदय को बेध दिया है” (3:13)। लेकिन उस सब में भी यिर्मयाह परमेश्वर की विश्वासयोग्यता में अपने पूर्ण अडिग भरोसे को लिखता है, हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है” (पद 22, 23)।

          मैंने अपने उस क्रिसमस ट्री को क्रिसमस के बाद भी वैसे ही बने रहने दिया, और रोज़ सुबह वहाँ प्रार्थना करना ज़ारी रखा। आखिरकार, ईस्टर के सप्ताहांत पर, हमें हमारी बेटी मिली। परमेश्वर सदा विश्वासयोग्य है, चाहे वह हमारे समय के अनुसार, और हमेशा हमारी इच्छा के अनुसार कार्य न भी करे।

          मेरे बच्चे अब तीस वर्ष से अधिक की आयु के हैं, परन्तु प्रति वर्ष मैं उस क्रिसमस ट्री का एक छोटा रूप लगाती और सजाती हूँ – अपने आप को तथा औरों को स्मरण दिलाने के लिए कि हमारा प्रभु परमेश्वर सदा विश्वासयोग्य है। - एलिसा मॉर्गन

 

हमारी आशा का सर्वोत्तम कारण परमेश्वर की विश्वासयोग्यता है।


क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। - हबक्कूक 3:17-18

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:1-3, 13-24

विलापगीत 3:1 उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगने वाला पुरुष मैं ही हूं;

विलापगीत 3:2 वह मुझे ले जा कर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है;

विलापगीत 3:3 उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरुद्ध उठता रहता है।

विलापगीत 3:13 उसने अपनी तीरों से मेरे हृदय को बेध दिया है;

विलापगीत 3:14 सब लोग मुझ पर हंसते हैं और दिन भर मुझ पर ढालकर गीत गाते हैं,

विलापगीत 3:15 उसने मुझे कठिन दु:ख से भर दिया, और नागदौना पिलाकर तृप्त किया है।

विलापगीत 3:16 उसने मेरे दांतों को कंकरी से तोड़ डाला, और मुझे राख से ढांप दिया है;

विलापगीत 3:17 और मुझ को मन से उतार कर कुशल से रहित किया है; मैं कल्याण भूल गया हूँ;

विलापगीत 3:18 इसलिए मैं ने कहा, मेरा बल नाश हुआ, और मेरी आशा जो यहोवा पर थी, वह टूट गई है।

विलापगीत 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर!

विलापगीत 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है।

विलापगीत 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आशा है:

विलापगीत 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है।

विलापगीत 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है।

विलापगीत 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • होशे 12-14
  • प्रकाशितवाक्य 4

शनिवार, 12 दिसंबर 2020

उत्तर

 

          मेरे एक सहकर्मी ने मुझ से कहा कि उसे नहीं लगता था कि वह यीशु का अनुयायी होने के योग्य है। वह अपने आरामदेह, आत्मकेंद्रित जीवन का वर्णन कर रहा था, और मैं सुन रहा था। उसने स्वीकार किया कि वह अपने जीवन से संतुष्ट नहीं है, और कहा, “समस्या यह है कि मैं बहुत प्रयास करता हूँ कि अच्छा बनूँ, औरों की देखभाल भी किया करूं, परन्तु मेरे यह प्रयास कुछ कार्य नहीं कर रहे हैं। मुझे लगता है कि जो मैं करना चाहता हूँ वह तो नहीं करने पाता हूँ, परन्तु जो नहीं करना चाहता हूँ, वही करता रहता हूँ।”

          फिर उसने बड़े भरोसे तथा आशा के साथ मुझ से पूछा, “तुम्हारे जीवन का क्या रहस्य है?” मैंने भी बड़ी सच्चाई और गंभीरता से उत्तर दिया, “मेरा रहस्य यह है कि मेरा कोई रहस्य नहीं है! मैं भी परमेश्वर की धार्मिकता के स्तर के अनुसार जीवन जीने में उतना ही अयोग्य और अक्षम हूँ, जितने कि तुम हो, और इसी लिए हमें प्रभु यीशु की आवश्यकता है।”

          फिर मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल में से उसे रोमियों 7:15 दिखाया, जहाँ पर पौलुस ठीक वही बात कहता है जो उसने अपने बारे में मुझ से कही थी। प्रेरित पौलुस द्वारा कहे गए ये हताशा के शब्द उन सभी के मनों को छूते हैं जो परमेश्वर के पास आने के लिए पर्याप्त ‘मात्रा’ में भला तो होना चाहते हैं, परन्तु हो नहीं पाते हैं; वे चाहे मसीही विश्वासी हों अथवा नहीं। संभव है कि ये शब्द आपके भी हृदय को छूते हैं। यदि ऐसा है तो पौलुस का यह कथन कि हमारे उद्धार तथा परिणामस्वरूप जीवन में आने वाले परिवर्तनों का कर्ता प्रभु यीशु है (7:25-8:2) आपको अवश्य ही रोमांचित करेगा। प्रभु यीशु ने हमारे लिए पहले ही वह सब कर के दे दिया है जो हमें उन बातों से मुक्त होने के लिए चाहिए, जिनके कारण हम अपने आप से परेशान रहते हैं।

          परमेश्वर तथा हमारे मध्य की दीवार, अर्थात, पाप की दीवार, हमारे द्वारा कुछ भी किए जाने के बिना ही, हमारे लिए प्रभु यीशु मसीह ने हटा दी है। परमेश्वर हम सभी का उद्धार, और पवित्र आत्मा के द्वारा हम में परिवर्तन और हमारी उन्नति चाहता है। वह हमारी आत्मा के द्वार पर खटखटाता है। उसके इस खटखटाने का उत्तर दीजिए, क्योंकि जीवन की हर बात के लिए वह ही उत्तर है। - रैंडी किलगोर

 

प्रभु यीशु के बिना, उद्धार और आत्मिक उन्नति, हमारी पहुँच के बाहर हैं।


वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहचान लें। क्योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है। - 1 तीमुथियुस 2:4-5

बाइबल पाठ: रोमियों 7:14-25

रोमियों 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शारीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।

रोमियों 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।

रोमियों 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।

रोमियों 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।

रोमियों 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।

रोमियों 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।

रोमियों 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।

रोमियों 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।

रोमियों 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।

रोमियों 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगों में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।

रोमियों 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?

रोमियों 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूँ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • होशे 9-11
  • प्रकाशितवाक्य 3