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रविवार, 18 जुलाई 2010

छल

सी. अस. लूईस द्वारा लिखित नारनिया की कहानियों की आन्तिम पुस्तक "दि लास्ट बैटल" (अन्तिम यद्ध) में एक कुटिल वनमानुष एक बूढ़े मरे हुए शेर की खाल देखता है और एक भोले-भाले गधे को उसे पहन लेने के लिये मजबूर करता है। वनमानुष फिर यह दावा करता है कि वह भेष बदला हुआ गधा ही नारनिया का असली राजा शेर असलन है और वे नारनिया के दुश्मनों के साथ संधि करके नारनिया की प्रजा को दास बनाने और उनपर नियंत्रण करना आरंभ कर देते हैं। किंतु जवान राजा टिरियन इस बात पर विश्वास नहीं कर पाता कि राजा असलन वास्तव में इतना क्रूर व्यवहार करेगा। वह असली असलन की सहायता से वनमानुष और उसके नकली शेर से युद्ध करता है और उन्हें पराजित करता है।

बाइबल हमें बताती है कि शैतान परमेश्वर की नकल करने में चतुर है। उसका उद्देश्य है कि वह परमेश्वर के तुल्य हो जाये (यशायाह १४:१२-१५)। छल के द्वारा शैतान यीशु मसीह की जगह नकली मसीह लोगों के सामने स्थापित करना चाहता है। प्रभु यीशु ने स्वयं हमें इन आने वाले झूठे भविष्यद्वक्ताओं और झूठे मसीहों के बारे में चिताया - "यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। क्‍योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे" (मत्ती २४:४, ५)।

हम कैसे असली और नकली मसीह में भेद कर सकते हैं? असली मसीह वही है जिसका वर्णन बाइबल में दिया गया है। यदि कोई भी इस वर्णन से भिन्न किसी को मसीह करके प्रस्तुत कर है, तो वह "सिंह के भेष में गधे" को प्रस्तुत कर रहा है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर का वचन हमें समझ-बूझ देता है कि हम सत्य-अस्त्य को पहिचान सकें।


बाइबाल पाठ: मत्ती ७:१५-२३

"झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्‍तु अन्दर में फाड़ने वाले भेड़िए हैं।
उन के फलों से तुम उन्‍हें पहचान लोगे। क्‍या लोग झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?
इसी प्रकार हर एक अच्‍छा पेड़ अच्‍छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।
अच्‍छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्मा पेड़ अच्‍छा फल ला सकता है।
जो जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है।
सो उन के फलों से तुम उन्‍हें पहचान लोगे।
जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्‍वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्‍तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्‍छा पर चलता है।
उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे, हे प्रभु, हे प्रभु, क्‍या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए?
तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ।"


एक साल में बाइबल:
  • भजन २०-२२
  • प्रेरितों के काम २१:१-१७

शनिवार, 17 जुलाई 2010

जब भूमि हिले

सैन फ्रैन्सिस्को में आये एक विनाशकारी भूकंप के कई दिन बाद वहां एक स्कूल के खेल के मैदान में एक बच्चा हिलता और कंपकंपाता देखा गया। उसके प्रधानाध्यापक ने उससे पूछा कि क्या तुम ठीक हो तो तो बच्चे ने हां में सिर हिलाया और कहा "मैं भूमि की तरह हिल और कांप रहा हूं जिससे यदि भूकंप फिर से आये तो मैं उससे डर महसूस न कर सकूं।" वह अपने आप को एक और भूकंप के लिये तैयार कर रहा था।

कभी कभी किसी हादसे के बाद हम अपने आप को किसी अन्य संभावित दुर्घटना के लिये तैयार कर लेते हैं। यदि फोन द्वारा हमें कोई बुरा समाचार मिलता है तो जब भी फोन बजता है तो हम डर कर सोचते हैं कि "न जाने अब क्या हो गया?"

भजनकार दाऊद के लिये जैसे "भूमि हिल रही थी" जब राजा शाऊल ने उसे मारने का प्रयास किया (१ शमूएल १९:१०)। वह भागकर छिप गया, उसे लगा कि अब अगले कदम पर मृत्यु है। उसने अपने मित्र योनातान को कहा "...नि:सन्देह, मेरे और मृत्यु के बीच डग ही भर का अन्तर है" (१ शमूएल २०:३)। दाऊद ने लिखा "मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया" (भजन १८:४)।

अपने दुख के समय दाऊद परमेश्वर के आगे गिड़गिड़ाया (भजन १८:६) और पाया कि परमेश्वर स्थिर करने वाला है, उसपर वह सदा विश्वास रख सकता है कि वह उसके साथ बना रहेगा। दाऊद ने कहा "यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ानेवाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का गढ़ है"(भजन १८:२)।

यदि कभी हमारे पांव तले की भूमि हिले, तो हमारे लिये भी परमेश्वर ऐसे ही स्थिरता का स्त्रोत होगा। - ऐनी सेटास


जीवन की आंधियों में सुरक्षित रहने के लिये युगों की स्थिर चट्टान - मसीह यीशु पर जीवन का लंगर डाले रहें।


बाइबल पाठ: भजन १८:१-६
"हे परमेश्वर, हे मेरे बल, मैं तुझ से प्रेम करता हूं।
यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ानेवाला है, मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का गढ़ है।
मैं यहोवा को जो स्तुति के योग्य है पुकारूंगा, इस प्रकार मैं अपने शत्रुओं से बचाया जाऊंगा।
मृत्यु की रस्सियों से मैं चारो ओर से घिर गया हूं, और अधर्म की बाढ़ ने मुझ को भयभीत कर दिया;
पाताल की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं, और मृत्यु के फन्दे मुझ पर आए थे।
अपने संकट में मैं ने यहोवा परमेश्वर को पुकारा, मैं ने अपने परमेश्वर को दोहाई दी। और उस ने अपने मन्दिर में से मेरी बातें सुनी। और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी।"


एक साल में बाइबल:
  • भजन १८, १९
  • प्रेरितों के काम २०:१७-३८

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

कौन देखता है?

जहां हम काम कर रहे थे वहां बहुत गर्मी, गंदगी और बदबू थी। हम हज़ारों मील की दूरी तय करके कुछ तय कार्य करने आये थे, और आज हम बहरे बच्चों के स्कूल की एक कक्षा के पिछले भाग कीर पुताई कर रहे थे। उस स्कूल यह एक ऐसा भाग था जहां कोई नहीं आता-जाता था। केवल वहां का घास काटने वाला मज़दूर या मल की टंकी साफ करने वाला ही हमारे आज के काम को शायद कभी देखने पाते।

फिर भी हमारे जवान साथी इस कार्य में पूरे मन से लगे हुए थे। उनमें से एक युवती मेलिस्सा ने हम सब की इस मेहनत को सही संदर्भ में रखते हुए कहा, "चाहे यहां आकर कोई भी इसे नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर देखता है। इसलिये इसे भली-भांति करें कि उसे अच्छा लगे।" और हमने मिलकर ऐसा ही किया।

कभी कभी हम अपनी मेज़ पर बैठे सोचते हैं कि कोई हमारे काम को नहीं देखता। या हम कोई कारखाने में किसी चीज़ को जोड़कर बनाने की पंक्ति में लगे लगतार एक ही तरह का काम करते ही जाते हैं। हो सकता है कि हमें चर्च की शिशुशाला में रोते हुए बच्चों की देखभाल करने और उन्हें बहलने की ज़िम्मेदारी दी जाती हो। यह भी हो सकता है कि हम एक उत्तम मसीही जीवन जीते हैं किंतु कोई हमारी ओर ध्यान नहीं देता।

कई बार हमारा कार्य, उन पुताई करने वालों के काम की तरह, "भवन के पिछवाड़े" में होता है। किंतु यदि परमेश्वर ने हमें यही करने की ज़िम्मेदारी दी है, तो इस ज़िम्मेदारी को हमें पूरे मन से निभाना है। हमारी मसीही बुलाहट में हमें, परमेश्वर कि सामर्थ द्वारा, दूसरों से गहराई से प्रेम करना है, दुसरों की सेवा-सत्कार करनी है और परमेश्वर द्वारा हमें दिये गए गुणों को दूसरों की सेवा में लगाना है (१ पतरस ४:८-१०), जिससे हमारी नहीं वरन परमेश्वर की महीमा और स्तुति हो।

ज़रूरी यह है कि परमेश्वर जो हमें देखता रहता है, उसे हमारा कार्य पसन्द आना चाहिये। - डेव ब्रैनन


मसीह के लिये करी गई किसी सेवा को वह कभी अन्देखा नहीं करता।


बाइबल पाठ: १ पतरस ४:८-११


सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्‍योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्र्म प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - १ कुरिन्थियों १५:५८


एक साल में बाइबल:
  • भजन १६, १७
  • प्रेरितों के काम २०:१-१६

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

एक ही लालसा

नेचायेव, १९वीं सदी में कार्ल मार्क्स का अनुयायी था, और रूस के ज़ार एलेक्ज़ैन्डर द्वितीय की हत्या में उसकी भूमिका थी। नेचायेव ने लिखा "एक क्रांतिकारी की...कोई व्यक्तिगत इच्छाएं नहीं होतीं, कोई व्यापारिक कार्य नहीं, कोई भावनाएं नहीं, कोई संपत्ति या नाम नहीं और न ही किसी से कोई चाह या स्नेह। उसके अन्दर का सब कुछ केवल क्रांति के ही विचार और लालसा में लगा रहता है।" यद्यपि उसके उद्देश्य और लक्ष्य गलत थे, नेचायेव का यह कथन क्रांति के प्रति समर्पित उसकी कटिबद्धता को दिखाता है।

यीशु अपने चेलों से सच्चा समर्पण चाहता है। लूका १४ में हम पढ़ते हैं कि जब वह यरुशलेम की ओर जा रहा था तो एक बड़ी भीड़ उसके साथ थी। संभ्वतः इस भीड़ के लोगों ने अपने आप को यीशु के चेले समझ लिया होगा। परन्तु यीशु ने सिखाया कि चेला होने का तात्पर्य उसके बारे में जानकारी रखने से कहीं बढ़कर है; जो वास्तव में चेला होना चाहता है, उसे इस की कीमत चुकानी होती है। यीशु के प्रति वफादारी से बढ़कर चेले के लिये कोई अन्य बात नहीं होती - न माता-पिता के प्रति प्रेम और न अपना जीवन। उसके चेलों को, तब और अब, यह मानकर चलना था कि उनके जीवन में परमेश्वर ही सर्वोपरि और प्रथम होगा, सांसारिक संपत्ति और सामाजिक संबंध आदि सब कुछ का स्थान उसके बाद होगा।

यीशु अपने चेलों से चाहता है कि उनके जीवन में केवल एक ही लगन और लालसा हो - यीशु की। - मार्विन विलियम्स


यीशु के प्रति प्रेम ही हमारे आत्मिक लालसा की कुंजी है।


बाइबल पाठ: लूका १४:२५-३५


यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्‍नी और लड़के-बालों और भाइयों और बहिनों बरन अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता। - लूका १४:२६


एक साल में बाइबल:
  • भजन १३-१५
  • प्रेरितों के काम १९:२१-४१

बुधवार, 14 जुलाई 2010

प्रेम की परिभाषा


यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।



और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्‍तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।


और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।


प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।


वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।


कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्‍तु सत्य से आनन्‍दित होता है।


वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।


प्रेम कभी टलता नहीं, भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी, ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।


क्‍योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।


पर अब विश्वास, आशा, ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

- १ कुरिन्थियों १३:१-९,१३

हारे हुओं के लिये प्रेम

किसी व्यक्ति के बारे में उसकी टी-शर्ट पर लिखी बातों से काफी कुछ अनुमान लगाया जा सकता है। हॉल ही में बाज़ार में एक युवती की चटकीली लाल टी-शर्ट पर लिखे वाक्य ने मेरा ध्यान आकर्षित किया और मुझे विचार-मग्न कर दिया। उसकी टी-शर्ट पर लिखा था "प्रेम हारने वालों के लिये है।" संभवतः यह उसे चतुराई दिखाने या उकसाने या विनोद करने का एक साधन लगा हो। या हो सकता है कि वह किसी संबंध के द्वारा दुखी हुई हो और यह लोगों को अपने से दूर रखने का उसका प्रयास हो।

बात कोई भी रही हो, लेकिन मुझे उसने सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या प्रेम वास्तव में हारे हुए लोगों के लिये है? यह सच है कि जब हम प्रेम करते हैं तो हम जोखिम उठाते हैं। लोग हमें दुखी कर सकते हैं, निराश कर सकते हैं या हमें छोड़ भी सकते हैं। प्रेम हमें नुकसान में भी ले जा सकता है।

बाइबल हमारे सामने प्रेम के ऊंचे स्तर की चुनौती रखती है। १ कुरिन्थियों १३ में पौलुस बताता है कि परमेश्वर के अनुसार प्रेम करना किसे कहते हैं; और जो व्यक्ति ऐसा प्रेम करता है वह अपने किसी व्यक्तिगत लाभ के लिये नहीं, वरन इसलिये प्रेम करता है क्योंकि ऐसा प्रेम "सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है" (१ कुरिन्थियों १३:७)। क्यों? क्योंकि परमेश्वरीय प्रेम जीवन की दुखदायी परिस्थितियों में भी दृढ़ और स्थिर रहता है और हमें लगातार परमेश्वर पिता की कभी न कम होने वाली देख-रेख की ओर खींचता रहता है।

इसीलिये शायद प्रेम हारने वालों के लिये ही है - क्योंकि नुकसान और निराशा की परिस्थितियों में ही हमें परमेश्वर की सबसे अधिक आवश्यक्ता होती है; और हम यह भी जानते हैं कि हमारे जीवन के संघर्षों में हमारे परमेश्वर पिता का प्रेम कभी नहीं हार सकता। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का प्रेम कभी साथ नहीं छोड़ता।


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १३


पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। - १ कुरिन्थियों १३:१३


एक साल में बाइबल:
  • भजन १०-१२
  • प्रेरितों के काम १९:१-२०

मंगलवार, 13 जुलाई 2010

ज्योति का स्थान

प्रेरित यूहन्ना ने प्रभु यीशु का महिमामय दर्शन पाया जिसमें यूहन्ना ने यीशु को सोने के बने सात दीवटों के मध्य खड़ा देखा। प्रकाशितवाक्य के आरंभ में वर्णित इस दर्शन के महत्व को हम अक्सर समझ नहीं पाते हैं। वे सात दीवट साधारण सजावट के दीवट नहीं थे, वे प्रकाश देने के महत्वपूर्ण स्त्रोत थे। प्रत्येक दीवट एक मण्डली को दर्शाता है, और हर मण्डली को पाप के अन्धकार से भरे संसार में यीशु की ज्योति फैलाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

उनमें से एक मण्डली थी इफसुस की मण्डली। यूहन्ना को मिले दर्शन में इस मण्डली के कई कार्यों की सराहना की गई है, किंतु फिर भी उस में एक ऐसी कमी थी जिसके कारण प्रभु यीशु उन्हें गंभीर चेतावनी देता है। वह कमी थी कि उन्होंने प्रभु के लिये अपना पहला सा प्रेम छोड़ दिया था (प्रकाशितवाक्य २:४)। उनके जीवन में प्राथमिकता प्रभु की नहीं वरन उन बहुत से "अच्छे कार्यों" की हो गई थी जिन्हें वे "प्रभु के नाम" से कर रहे थे। हम पाप के अंधकार से भरे जिस संसार में रहते हैं, उसकी सर्वप्रथम आवश्यक्ता है प्रभु यीशु की ज्योति - जो संसार हमारे जीवन में देख सके। कहीं हम भी इफिसियों की मण्डली की गलती को न दोहराने लगें और संसार हमारे जीवनों में प्रभु की ज्योति को नहीं वरन केवल "भले कार्यों" को ही देखने पाये।

हमें पता भी नहीं चलता और अनायास ही कई बातें हमारे जीवन में यीशु की प्राथमिक्ता का स्थान ले लेती हैं, और हम सिर्फ "मण्डली के कार्य" करने वाले होकर रह जाते हैं। इसका परिणाम होता है कि हम संसार के समक्ष यीशु का और अपनी मसीही गवाही का प्रभाव नहीं रख पाते। यीशु ने चेतावनी दी "सो चेत कर, कि तू कहां से गिरा है, और मन फिरा और पहिले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मै तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्थान से हटा दूंगा" (प्रकाशितवाक्य २:५)। हम यह नहीं होने दे सकते।

यीशु को अपने जीवन में प्रथम रखिये तब ही उसकी ज्योति आपके जीवन में होकर इस अन्धेरे संसार में चमकेगी। - जो स्टोवैल


संसार के अंधकार में वे कार्य ही सबसे अधिक प्रकाशमान होते हैं जो प्रभु यीशु के प्रेम में होकर किये जाएं।


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य १:१०-२५


मन फिरा और पहिले के समान काम कर; और यदि तू मन न फिराएगा, तो मै तेरे पास आकर तेरी दीवट को उस स्थान से हटा दूंगा। - प्रकाशितवाक्य २:५


एक साल में बाइबल:
  • भजन ७-९
  • प्रेरितों के काम १८