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मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

श्रद्धा

मेरे पिताजी परमेश्वर के प्रति श्रद्धालु व्यवहार बनाए रखने के लिये बड़े कट्टर थे। उनके समक्ष यदि कोई परमेश्वर को हल्के में संबोधित करता तो वे क्रुद्ध हो जाते। उनका नियम था कि जब वे सबके सामने बाइबल पढ़ें तो उनके परिवार जन सीधे और सतर्क बैठें, जैसे वे किसी उच्च पदाधिकरी के समक्ष बैठे हों। वे जब परमेश्वर को संबोधित करते थे तो उनके हावभाव से उनकी श्रद्धा और आश्चर्य प्रगट होता था कि हम पापी मनुष्य भी परम पवित्र सृष्टिकर्ता से वार्तालाप कर सकते हैं।

हमारा सर्वसामर्थी परमेश्वर चाहता है कि हम उसे "अब्बा, पिता" करके संबोधित करें, और वह हमें बिना किसी घबराहट या हिचकिचाहट के अपने समक्ष आने का निमंत्रण भी देता है। परन्तु बाइबल के सैंकड़ों खण्ड हैं जहां यह बात स्पष्ट करी गई है कि हमें परमेश्वर के प्रति श्रद्धा और भय का आचरण कभी नज़रांदज़ नहीं करना है।

निर्गमन १९ अध्याय में परमेश्वर का अपने लोगों को अपने निकट आने का निमंत्रण और उसकी उपस्थिति से उत्पन्न पराक्रमी और भय पैदा करने वाली घटनाओं का अद्भुत समागम है, जिससे इस्त्राएली लोग उसके प्रति श्रद्धा और भय को समझ सकें। जब इस्त्राएली प्रजा पर्वत के नीचे परमेश्वर की बात सुनने को जमा हुई और परमेश्वर पर्वत की चोटी पर उतरा तब पर्वत की चोटी से बड़ी आग और धुआं उठा, भीष्ण गड़गड़ाहट की दिल दहला देने वाली ध्वनि हुई और तेज़ बिजली आकाश में कौन्धने लगी। पर्वत कांपने लगा और तुरही का ऊंचा शब्द हुआ और तब इस्त्राएली लोगों ने परमेश्वर को मूसा से बात करते सुना और वे आदर, भय और श्रद्धा से भर गए।

परमेश्वर कितना महान और पवित्र है, उसकी तुलना में हम कितने छोटे और कमज़ोर हैं और हमारी कोई सामर्थ या पवित्रता तो है ही नहीं। लेकिन फिर भी हमारे प्रति वह अपने प्रेम को प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट करता है और समस्त मानव जाति को, वे चाहे जो भी हों और जैसे भी हों, प्रभु यीशु में होकर अपने पास आने का खुला निमंत्रण देता है।

जब हम परमेश्वर के सन्मुख अपनी औकात का ध्यान रखते हैं तो हम भय के साथ उसकी सेवा और आनन्द के साथ उसकी संगति भी कर सकते हैं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


सच्ची उपासना परमेश्वर की सच्ची पहिचान से होती है।

डरते हुए यहोवा की उपासना करो, और कांपके हुए मगन हो। - भजन २:११


बाइबल पाठ: निर्गमन १९:१-१९

इस्त्राएलियों को मिस्र देश से निकले हुए जिस दिन तीन महीने बीत चुके, उसी दिन वे सीनै के जंगल में आए।
और जब वे रपीदीम से कूच करके सीनै के जंगल में आए, तब उन्होंने जंगल में डेरे खड़े किए; और वहीं पर्वत के आगे इस्त्राएलियों ने छावनी डाली।
तब मूसा पर्वत पर परमेश्वर के पास चढ़ गया, और यहोवा ने पर्वत पर से उसको पुकार कर कहा, याकूब के घराने से ऐसा कह, और इस्त्राएलियों को मेरा यह वचन सुना,
कि तुम ने देखा है कि मै ने मिस्रियों से क्या क्या किया, तुम को मानो उकाब पक्षी के पंखों पर चढ़ा कर अपने पास ले आया हूं।
इसलिये अब यदि तुम निश्चय मेरी मानोगे, और मेरी वाचा का पालन करोगे, तो सब लोगों में से तुम ही मेरा निज धन ठहरोगे, समस्त पृथ्वी तो मेरी है।
और तुम मेरी दृष्टि में याजकों का राज्य और पवित्र जाति ठहरोगे। जो बातें तुझे इस्त्राएलियों से कहनी हैं वे ये ही हैं।
तब मूसा ने आकर लोगों के पुरनियों को बुलवाया, और ये सब बातें, जिनके कहने की आज्ञा यहोवा ने उसे दी थी, उनको समझा दीं।
और सब लोग मिल कर बोल उठे, जो कुछ यहोवा ने कहा है वह सब हम नित करेंगे। लोगों की यह बातें मूसा ने यहोवा को सुनाईं।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, सुन, मैं बादल के अंधियारे में होकर तेरे पास आता हूं, इसलिये कि जब मैं तुझ से बातें करूं तब वे लोग सुनें, और सदा तेरी प्रतीति करें। और मूसा ने यहोवा से लोगों की बातों का वर्णन किया।
तब यहोवा ने मूसा से कहा, लोगों के पास जा और उन्हें आज और कल पवित्र करना, और वे अपने वस्त्र धो लें,
और वे तीसरे दिन तक तैयार हो रहें, क्योंकि तीसरे दिन यहोवा सब लोगों के देखते सीनै पर्वत पर उतर आएगा।
और तू लोगों के लिये चारों ओर बाड़ा बान्ध देना, और उन से कहना, कि तुम सचेत रहो कि पर्वत पर न चढ़ो और उसके सिवाने को भी न छूओ और जो कोई पहाड़ को छूए वह निश्चय मार डाला जाए।
उसको कोई हाथ से तो न छूए, परन्तु वह निश्चय पत्थरवाह किया जाए, वा तीर से छेदा जाए; चाहे पशु हो चाहे मनुष्य, वह जीवित न बचे। जब महाशब्द वाले नरसिंगे का शब्द देर तक सुनाई दे, तब लोग पर्वत के पास आएं।
तब मूसा ने पर्वत पर से उतर कर लोगों के पास आकर उनको पवित्र कराया और उन्होंने अपने वस्त्र धो लिए।
और उस ने लोगों से कहा, तीसरे दिन तक तैयार हो रहो, स्त्री के पास न जाना।
जब तीसरा दिन आया तब भोर होते बादल गरजने और बिजली चमकने लगी, और पर्वत पर काली घटा छा गई, फिर नरसिंगे का शब्द बड़ा भरी हुआ, और छावनी में जितने लोग थे सब कांप उठे।
तब मूसा लोगों को परमेश्वर से भेंट करने के लिये छावनी से निकाल ले गया, और वे पर्वत के नीचे खड़े हुए।
और यहोवा जो आग में होकर सीनै पर्वत पर उतरा था, इस कारण समस्त पर्वत धुएं से भर गया, और उसका धुआं भट्टे का सा उठ रहा था, और समस्त पर्वत बहुत कांप रहा था
फिर जब नरसिंगे का शब्द बढ़ता और बहुत भारी होता गया, तब मूसा बोला, और परमेश्वर ने वाणी सुना कर उसको उत्तर दिया।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती ४-६
  • मरकुस ४:१-२०

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

हमारा महान परमेश्वर

अमेरिका के जौर्जिया प्रांत में स्थित "स्टोन माऊंन्टेन" संसार का सबसे बड़ा उघाड़े हुए ग्रेनाईट चट्टान का पहाड़ है। उस १,७०० फुट चौड़े चट्टान के पटल पर दक्षिणी अमेरिका के तीन महान नेताओं के चेहरे तराशे गए हैं। यद्यपि यह पहाड़ और इसपर तराशी गई प्रतिमाएं विशाल हैं, फिर भी दूर से यह उतना आकर्षक नहीं लगता। इसकी महानता इसे देखने वाले को तभी अभिभूत करती है जब दर्शक इसके निकट आकर इसे निहारता है।

भजनकार एथन भजन ८९ में एक ऐसा ही सत्य परमेश्वर को जानने के संबंध में लिखता है। यह प्रेरणादायक भजन परमेश्वर की स्तुति से भरा है। भजनकार परमेश्वर की महानता, उसकी दया और विश्वासयोग्यता का वर्णन करता है। एथन यह सब कर सका क्योंकि वह अपने परमेश्वर को निकट से जानता था और उसके साथ एक निकट का व्यक्तिगत संबंध रखता था। भजन ८९ जैसे दर्शन उन्हीं को प्राप्त होते हैं जो परमेश्वर के निकट आते हैं और उसकी महानता से अभीभूत होते हैं।

हम जितना अपने परमेश्वर के निकट आते हैं उतना अधिक हम उसके प्रेम, सामर्थ और महानता का अनुभव करते हैं। एथन यहोवा के लिये गा सका "तेरी भुजा बलवन्त है; तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दहिना हाथ प्रबल है।" (भजन ८९:१३) और उसका उसके परमेश्वर के संबंध में यही ज्ञान उसके लिये आशीश बना। हम जितना अधिक उसके निकट आते जाएंगे, वह हमारे पक्ष में उतना अधिक महान होता जाएगा। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर किसी का भी स्थान ले सकता है लेकिन परमेश्वर का स्थान कोई नहीं ले सकता।

क्योंकि आकाशमण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी? - भजन ८९:६


बाइबल पाठ: भजन ८९:५-१७

हे यहोवा, स्वर्ग में तेरे अद्भुत काम की, और पवित्रों की सभा में तेरी सच्चाई की प्रशंसा होगी।
क्योंकि आकाशमण्डल में यहोवा के तुल्य कौन ठहरेगा? बलवन्तों के पुत्रों में से कौन है जिसके साथ यहोवा की उपमा दी जाएगी?
ईश्वर पवित्रों की गोष्ठी में अत्यन्त प्रतिष्ठा के योग्य, और अपने चारों ओर सब रहने वालों से अधिक भययोग्य है।
हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, हे याह, तेरे तुल्य कौन सामर्थी है? तेरी सच्चाई तो तेरे चारों ओर है!
समुद्र के गर्व को तू ही तोड़ता है, जब उसके तरंग उठते हैं, तब तू उनको शान्त कर देता है।
तू ने रहाब को घात किए हुए के समान कुचल डाला, और अपने शत्रुओं को अपने बाहुबल से तितर बितर किया है।
आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है, जगत और जो कुछ उस में है, उसे तू ही ने स्थिर किया है।
उत्तर और दक्खिन को तू ही ने सिरजा; ताबोर और हेर्मोन तेरे नाम का जयजयकार करते हैं।
तेरी भुजा बलवन्त है, तेरा हाथ शक्तिमान और तेरा दाहिना हाथ प्रबल है।
तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है; करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है।
क्या ही धन्य है वह समाज जो आनन्द के ललकार को पहिचानता है; हे यहोवा वे लोग तेरे मुख के प्रकाश में चलते हैं,
वे तेरे नाम के हेतु दिन भर मगन रहते हैं, और तेरे धर्म के कारण महान हो जाते हैं।
क्योंकि तू उनके बल की शोभा है, और अपनी प्रसन्नता से हमारे सींग को ऊंचा करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १-३
  • मरकुस ३

रविवार, 20 फ़रवरी 2011

भय और प्रेम

बच्चों की कहानी "The Mole and the Rat" में लेखक केनेथ ग्राहम ने प्रेम और भय के संबंध को रूपक द्वारा दर्शाया है। दो जानवर, छछुंदर और चूहा, एक और सामर्थी जीव "मित्र तथा सहायक" (- जो परमेश्वर को दर्शता है) से मिलते हैं। उसे देखकर छछुंदर थरथर कांपने लगता है और चूहे से फुसफुसा कर पूछता है "चूहे, क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा?" चूहा, जिसकी आंखें से बयान से बाहर प्रेम से छलक रहा था, "मित्र और सहायक" को निहारते हुए धीमी आवाज़ में उत्तर देता है "डर? इनसे? नहीं, नहीं, कभी नहीं! लेकिन फिर भी ओह छछुंदर, मुझे डर तो है।"

परमेश्वर का दर्शन देखकर दानियल नबी का भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ होगा। दानियेल का परमेश्वर के प्रति प्रेम असीम था, लेकिन जब उसने दर्शन में परमेश्वर को अपने समक्ष खड़ा पाया तो वह भय से गिर पड़ा (दानियेल ८:१५-२७)। परमेश्वर की पवित्रता की एक झलक ने उसे अभिभूत कर दिया।

प्रभु यीशु ने परमेश्वर से प्रेम रखने की आज्ञा दी (मत्ती २२:३७), जबकि पौलुस कहता है कि हमें परमेश्वर का भय रखना चाहिये (कुलुस्सियों ३:१८-२५)। लेकिन यदि हम परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तो क्या हमें डर से मुक्त नहीं हो जाना चाहिये? क्या सच्चा प्रेम डर को दूर नहीं कर देता?

मेरा अपना अनुभव इसे समझने में सहायता कर सकता है। मैं परमेश्वर से प्रेम करता हूँ, लेकिन जब उस दिन के बारे में सोचता हूँ जब मैं उसके समक्ष खड़ा होऊंगा तो डरता भी हूँ। मुझे यह डर नहीं है कि वह मुझे नरक भेज देगा, इसका निर्णय तो उसी क्षण हो चुका जब मैंने प्रभु यीशु पर विश्वास किया, उससे अपने पापों की क्षमा मांगी - क्योंकि मेरे पापों की कीमत चुका कर प्रभु यीशु ने मुझे नरक के दंड से बचा लिया है। लेकिन यह सोचकर कि मैं, हां मैं, मुझ जैसा मनुष्य, उस परम पवित्र परमेश्वर के सामने खड़ा होने पाएगा, मुझे परमेश्वर के प्रति श्रद्धा पूर्ण भय से भर देता है और मेरे प्राण-देह-आत्मा उसके आगे झुक जाते हैं। यही भय है जो मुझे परमेश्वर को प्रसन्न रखने को प्रेरित करता है, इसलिये नहीं कि मुझे उससे किसी सज़ा का डर है, वरन इसलिये कि उसकी इच्छा के अनुसार कार्य करके उसे प्रसन्न रखना उसके महान प्रेम के कारण उसके प्रति मेरा कर्तव्य है।

परमेश्वर से प्रेम तो करें, लेकिन श्रद्धा सहित उसका भय भी मानें। प्रेम और भय का यही समायोग पवित्रता का जीवन जी सकने की कुंजी है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


जो परमेश्वर से डरता है वह किसी और से नहीं डरेगा; जो परमेश्वर से नहीं डरता उसे अन्य सब का डर रहता है।

हे सेवको, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्‍तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। - कुलुस्सियों ३:२२


बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१८-२५

हे पत्‍नियो, जैसा प्रभु में उचित है, वैसा ही अपने अपने पति के आधीन रहो।
हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, और उन से कठोरता न करो।
हे बालको, सब बातों में अपने अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करो, क्‍योंकि प्रभु इस से प्रसन्न होता है।
हे बच्‍चे वालो, अपने बालकों को तंग न करो, न हो कि उन का साहस टूट जाए।
हे सेवको, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्‍तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से।
और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्‍तु प्रभु के लिये करते हो।
क्‍योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो।
क्‍योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २६-२७
  • मरकुस २

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

हर भय पर जयवंत भय

जौन हौपकिन्स विश्वविद्यालय के एक डॉकटर के अनुसार, हमारे मस्तिष्क, नाड़ीतंत्र, कोषिकाओं, आत्मा - प्रत्येक चीज़ की रचना ऐसी हुई है कि वह "विश्वास" की स्थिति में ही सबसे बेहतर कार्य करती है। दूसरे शब्दों में, परमेश्वर ने हमें ऐसा बनाया है कि हम तब ही अपनी सामर्थ की पराकाष्ठता तक पहुंच सकते हैं जब हम भय के विनाशकारी प्रभाव से मुक्त हों। परन्तु हम सब किसी न किसी भय से ग्रसित रहते हैं - दूसरों का भय, अपने आप का भय, भविष्य का भय, अतीत का भय, बेरोज़गारी का भय, लोगों की राय का भय - आदि, आदि कई तरह के भय हमें सताते रहते हैं।

बाइबल में कई तरह के भय मिलते हैं, और इन विभिन्न प्रकार के भय को वर्णित करने के लिये दो दर्जन से अधिक अलग अलग शब्द प्रयोग किये गए हैं। इन शब्दों द्वारा आतंक से लेकर कायरता तक हर प्रकर के भय की विवेचना करी गई है। लेकिन एक भय है जो स्वास्थवर्धक तथा सकारात्मक है - परमेश्वर का भय।

बाइबल इस भय के बारे में कहती है कि यह परमेश्वर का भय :
  • "बुद्धि का मूल है" (नीतिवचन १:७);
  • "पवित्र" है (भजन १९:९);
  • जो "दृढ़ भरोसा" देता है (नीतिवचन १४:२६);
  • जो "जीवन का सोता" है (नीतिवचन १४:२७)
  • और सबसे बढ़कर, यही एक ऐसा भय है जिसके आधीन हम अपने आप को स्वेच्छा से कर सकते हैं (नीतिवचन १:२९)।

परमेश्वर का भय परमेश्वर पर श्रद्धापूर्ण विश्वास करना है। मूसा ने यह भय दिखाया जब जलती झाड़ी से परमेश्वर ने उसे संबोधित किया, "तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर निहारने से डरता था अपना मुंह ढ़ाप लिया।" - निर्गमन ३:६

"यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है" (नीतिवचन ८:१३)। हम परमेश्वर के सम्मुख उसकी पवित्रता और महानता के भय में आएं, उसके वचन, उसकी प्रतिज्ञाओं और उसकी चेतावनियों का भय मानें और उन पर विश्वास करें।

परमेश्वर का भय मान कर ही हम परमेश्वर के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त कर सकते हैं। यही वह भय है जो हर भय पर जयवंत है। - डेनिस डी हॉन


केवल परमेश्वर का भय ही मनुष्यों के भय से मुक्ति दे सकता है।

तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर निहारने से डरता या अपना मुंह ढ़ाप लिया। - निर्गमन ३:६

बाइबल पाठ: नीतिवचन २३:१५-२२

हे मेरे पुत्र, यदि तू बुद्धिमान हो, तो विशेष करके मेरा ही मन आनन्दित होगा।
और जब तू सीधी बातें बोले, तब मेरा मन प्रसन्न होगा।
तू पापियों के विषय मन में डाह न करना, दिन भर यहोवा का भय मानते रहना।
क्योंकि अन्त में सुफल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी।
हे मेरे पुत्र, तू सुनकर बुद्धिमान हो, और अपना मन सुमार्ग में सीधा चला।
दाखमधु के पीने वालों में न होना, न मांस के अधिक खाने वालों की संगति करना;
क्योंकि पियक्कड़ और खाऊ अपना भाग खोते हैं, और पिनक वाले को चिथड़े पहिनने पड़ते हैं।
अपने जन्माने वाले की सुनना, और जब तेरी माता बुढिय़ा हो जाए, तब भी उसे तुच्छ न जानना।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २५
  • मरकुस १:२३-४५

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

यह मेरी ओर से है

एक छोटी लड़की का बड़ा भाई एक पहाड़ी के ऊपर चढ़कर खेल रहा था। उस लड़की ने भी अपने भाई के पास जाकर खेलना चाहा, लेकिन जब पहाड़ी पर चढ़ने के मार्ग को देखा तो निराश होकर पीछे हट गई। उसने विस्मय से कहा, "इस रास्ते में तो कोई भी सीधा और समतल मार्ग नहीं है, सारा मार्ग ढलवां और उबड़-खाबड़ और चट्टानों से भरा हुआ है।" उसके अनुभवी भाई ने उत्तर दिया, "हां, ऐसा ही है; अगर सारा मार्ग सपाट और समतल होता तो हम ऊपर कैसे पहुंचते? केवल इन चट्टानों के सहारे और उबड़-खाबड़ स्थानों में पांव जमाकर ही तो हम ऊपर की ओर चढ़ सकते हैं।" ऐसे ही परमेश्वर हमारे मार्गों में परेशनियां आ लेने देता है। जिन बातों को बहुतेरे लोग अवरोध कहते हैं वे वास्तव में परमेश्वर द्वारा बनाए गए ऊंचाई पर चढ़ने के साधन होते हैं, क्योंकि परमेश्वर हमें निरंतर आत्मिक ऊंचाईयों और आशीशों की ओर बढ़ता हुआ देखना चाहता है।

भजन ११९ के लेखक ने क्लेषों की पाठशाला में कुछ बहुमूल्य पाठ सीखे, और उन शिक्षाओं के सहारे वह इस भजन में परमेश्वर के कुशल मार्गदर्षक होने की गवाही रख सका। लेखक ने जाना कि उसके जीवन की कठिन परिस्थितियों के प्रगट कारण कुछ भी हों, हर बात परमेश्वर की ओर से और उसकी भलाई ही के लिये थी।

परमेश्वर जानता है कि वह क्या कर रहा है, और हम हर बात के लिये उसपर पूरा भरोसा कर सकते हैं। हमारे जीवन में आने या होने वाली हर बात या तो परमेश्वर की अनुमति द्वारा है या उसने भेजी है। उसने उस बात को हमारे अनुशसन और हमारे भले के लिये योजनाबद्ध किया है। हमारी कोई परिस्थिति उसके प्रेम की पहुंच के बाहर नहीं है।

इसलिये हम १ राजा १२:२४ में परमेश्वर के द्वारा कहे गए इन शब्दों से शांत और आश्वस्त रह सकते हैं : "...क्योंकि यह बात मेरी ही ओर से हुई है।" - बौश


क्लेषों द्वारा परमेश्वर हमें वे बातें सिखाता है जिन्हें हम किसी और रीति से नहीं सीख सकते।

हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपनी सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है। - भजन ११९:७५


बाइबल पाठ: भजन ११९:७३-८०

तेरे हाथों से मैं बनाया और रचा गया हूं, मुझे समझ दे कि मैं तेरी आज्ञाओं को सीखूं।
तेरे डरवैये मुझे देख कर आनन्दित होंगे, क्योंकि मैं ने तेरे वचन पर आशा लगाई है।
हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपनी सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है।
मुझे अपनी करूणा से शान्ति दे, क्योंकि तू ने अपने दास को ऐसा ही वचन दिया है।
तेरी दया मुझ पर हो, तब मैं जीवित रहूंगा; क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी हूं।
अभिमानियों की आशा टूटे, क्योंकि उन्होंने मुझे झूठ के द्वारा गिरा दिया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा।
जो तेरा भय मानते हैं, वह मेरी ओर फिरें, तब वे तेरी चितौनियों को समझ लेंगे।
मेरा मन तेरी विधियों के मानने में सिद्ध हो, ऐसा न हो कि मुझे लज्जित होना पड़े।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २३-२४
  • मरकुस १:१-२२

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

बुराई में से भलाई

हमें कितना धन्यवादी होना चाहिये कि हम एक ऐसे परमेश्वर की उपासना और सेवा करते हैं जो सर्वसामर्थी, सर्वज्ञानी, प्रेमी और सार्वभौमिक है। उसकी निगरानी से कुछ नहीं छिपता, उसे रोक पाने की सामर्थ किसी में नहीं है। वह हर एक बात को लेकर उससे अपने बच्चों के लिये अन्ततः भला ही उत्पन्न कर देता है। यह यथार्थ न केवल हमें बड़ा हियाव, आनन्द और शांति देता है, वरन हमें हर एक बात के लिये परमेश्वर को धन्यवाद देने को प्रेरित भी करता है - "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है।" - १ थिसुलिनिकियों ५:१८

अपनी पुस्तक "Vital Union With Christ" में ऐ. टी. पाएरसन ने लिखा : "परमेश्वर की योजना किसी बात को अन्देखा नहीं करती। सब बातें मिलकर भला ही उत्पन्न करती हैं - सब बातें, वे कठिनाईयां और परीक्षाएं भी जिनके लिये हम शिकायत करते हैं, कुड़कुड़ाते हैं। वे तूफान जो पेड़ों को झकझोर देते हैं वास्तव में उन्हें मिट्टी में और मज़बूती से जड़ पकड़ने में सहायक होते हैं। तपाए हुए लोहे पर पड़ने वाले घन की मार उसे टुकड़े टुकड़े नहीं करती वरन उसे और बेहतर और मज़बूत बना देती है। कला के आलोचक जौन रस्किन का कहना है कि जीवन में दुख और तकलीफ, बिमारी और निराशाओं के कारण आने वाली रुकावटें संगीत की लय में आने वाले पल भर के उस ठहराव की तरह हैं जो संगीत को और मधुर बना देता है। हमारा स्वर्गीय संगीतकार हमारे जीवन संगीत की लय का कोई सुर-ताल अधूरा या अकेला नहीं छोड़ता, वह एक से दूसरे को अद्भुत रीति से जोड़कर हमारे जीवन से विलक्षण संगीत उत्पन्न कर देता है।"

जब हम अपने प्रभु से प्रेम करते हैं, तो उसे हर बात के लिये धन्यवाद भी दें, उन बुरी लगने वाली बातों के लिये भी, जिन के द्वारा भी वह हमारी भलाई ही उत्पन्न कर रहा है। - रिचर्ड डी. हॉन


परमेश्वर हमें कई तंग गलियारों से निकलने देता है, क्योंकि वे सही मंज़िल की सही राह होते हैं।

हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है। - १ थिसुलिनिकियों ५:१८


बाइबल पाठ: १ थिसुलिनिकियों ५:१५-२४

सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्‍पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्‍टा करो।
सदा आनन्‍दित रहो।
निरन्‍तर प्रार्यना मे लगे रहो।
हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्‍छा है।
आत्मा को न बुझाओ।
भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो।
सब बातों को परखो: जो अच्‍छी हैं उसे पकड़े रहो।
सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।
शान्‍ति का परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी रीति से पवित्र करे और तुम्हारी आत्मा और प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक पूरे पूरे और निर्दोष सुरिक्षित रहें।
तुम्हारा बुलाने वाला सच्‍चा है, और वह ऐसा ही करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था २१-२२
  • मत्ती २८

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

केवल भलाई ही के लिये

चीन की एक कहानी है - एक मनुष्य अपने जीवनयापन के लिये घोड़े पालता था। एक दिन उसका एक कीमती और बहुत अच्छी नसल का घोड़ा भाग गया। उसके मित्र जन उसके इस नुकसान पर उसके पास शोक व्यक्त करने आए। जब वे अपना शोक व्यक्त कर चुके तो उस मनुष्य ने उनसे पूछा, "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" दो दिन के बाद उसका घोड़ा लौट आया और उसके साथ, उसके पीछे पीछे कई अन्य लावारिस घोड़े भी आ गए। अब फिर उसके मित्र आनन्द मनाने जमा हो गए। फिर उस मनुष्य ने वही प्रश्न किया, "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" उसी दोपहर को एक लावारिस घोड़े ने उस मनुष्य के बेटे को दुलत्ती मार कर उसकी टांग तोड़ दी। फिर मित्र शोक करने को जमा हुए, फिर वही सवाल उठा, "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" इसके कुछ दिन बाद युद्ध छिड़ गया और राजा ने सभी जवानों का फौज में भरती होने का आदेश निकलवा दिया। लेकिन टूटी टांग के कारण उसका पुत्र फौज और युद्ध में जाने से बच गया। फिर मित्र आए, फिर वही सवाल उठा.....

अपने सीमित मानवीय दृष्टिकोण के कारण हम जीवन की परिस्थितियों को सही रीति से नहीं आंक सकते। लेकिन मसीही विश्वासी के लिये बात बिलकुल भिन्न है - उसे परमेश्वर का आश्वासन है कि प्रत्येक बात और परिस्थिति के ज़रिये परमेश्वर उसकी भलाई ही का कार्य कर रहा है।

उस चीनी मनुष्य की तरह हमें हर बात के लिये प्रश्न करने कि आवश्यक्ता नहीं है कि "मैं कैसे जानूं कि यह मेरे नफे के लिये हुआ या नुकसान के लिये?" हमारे पास परमेश्वर का कभी न टलने कभी न बदलने वाला वायदा है "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।" (रोमियों ८:२८) - रिचर्ड डी हॉन


जिसे अविश्वासी "सौभाग्य" कहते हैं, मसीही विश्वासी उसे परमेश्वर से मिली परमेश्वर के प्रेम की सौगात जानते हैं।


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों ८:२८


बाइबल पाठ: रोमियों ८:१८-२८

क्‍योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं।
क्‍योंकि सृष्‍टि बड़ी आशाभरी दृष्‍टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।
क्‍योंकि सृष्‍टि अपनी इच्‍छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।
कि सृष्‍टि भी आप ही विनाश के दासत्‍व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्‍तानों की महिमा की स्‍वतंत्रता प्राप्‍त करेगी।
क्‍योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्‍टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं, और लेपालक होने की, अर्थत अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्‍तु जिस वस्‍तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही क्‍योकि जिस वस्‍तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्‍या करेगा?
परन्‍तु जिस वस्‍तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जाहते भी हैं।
इसी रीति से आत्मा भी हमारी र्दुबलता में सहायता करता है, क्‍योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए परन्‍तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्‍या है क्‍योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार बिनती करता है।
और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती है; अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।

एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १९-२०
  • मत्ती २७:५१-६६