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शनिवार, 26 मार्च 2011

जीवन जल

एक छोटे शहर में हो रही सुसमाचार सभा में एक व्यक्ति को अपनी पापमय दशा और प्रभु यीशु को ग्रहण करने की आवश्यक्ता बड़े सशक्त रूप से महसूस हुई, लेकिन उसने अपनी भावनाएं छुपा लीं और अपनी पत्नि तक को नहीं बताया, यद्यपि वह मसीही विश्वासी थी। एक शाम को जब उसकी पत्नि कहीं बाहर गई हुई थी वह अपने पाप बोध को लेकर बहुत बेचैन हुआ और घर के अन्दर इधर से उधर चक्कर काटने लगा। उसकी बेटी ने अपने पिता की बेचैनी देखी तो पूछा कि "क्या हुआ?" पिता ने बात टालने के लिए कहा "कुछ नहीं" और पाप बोध की अपनी बेचैनी छिपाने की कोशिश करने लगा। उस बच्ची ने बड़े सहज भाव से पूछा, "पिताजी, यदि आप प्यासे हैं तो जाकर पानी क्यों नहीं पी लेते?" उसके इन शब्दों ने पिता को चौंका दिया, उसे उस सुसमाचार सभा में कही गई बात याद आ गई कि उद्धार का सुसमाचार मुक्त बहते हुए जल के सोते की तरह है जिससे प्रत्येक प्यासा अपनी प्यास बिना किसी रोक टोक के बुझा सकता है। उसने और संघर्ष नहीं किया, उसी रात उसने अपने पापों की क्षमा माँगकर प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता करके ग्रहण कर लिया।

इस संसार के सोते तो केवल प्यास बढ़ाते ही हैं, मनुष्य की आत्मिक प्यास केवल प्रभु यीशु ही बुझा सकता है। प्रभु यीशु ने बड़े सीधे और स्पष्ट शब्दों में सुसमाचार प्रस्तुत किया; उन्होंने हमारे प्रतिदिन के जीवन से जुड़ी बातों, जैसे भोजन, जल, स्वीकृति आदि द्वारा उद्धार के सुसमाचार को समझाया। यीशु ने कहा "परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।" (यूहन्ना ४:१४) - पौल वैन गोर्डर


सांसारिक उपलब्धियों के कुओं से जितना चाहे पी लो, प्यास बढ़ती ही है, कभी तृप्ति नहीं मिलती।

...यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। - यूहन्ना ७:३७

बाइबल पाठ: यूहन्ना ४:५-१५

Joh 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिस याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था।
Joh 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्‍टे के लगभग हुई।
Joh 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
Joh 4:8 क्‍योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
Joh 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्‍यों मांगता है? (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
Joh 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
Joh 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
Joh 4:12 क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया, और आप ही अपने सन्‍तान, और अपने ढारों समेत उस में से पीया?
Joh 4:13 यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर पियासा होगा।
Joh 4:14 परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍त काल तक पियासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
Joh 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू २२-२४
  • लूका ३

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

"उसे" जानना

एक पत्रिका "Youth's Living Ideals" में एक बुज़ुर्ग महिला की कहानी छपी। उस मसीह की विश्वासी महिला को बाइबल के बहुत से भाग कण्ठस्त थे, लेकिन जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ती गई, उसकी यादाश्त भी क्षीण होती गई, और फिर उसे केवल एक ही पद याद रहा - "...क्‍योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है।" (२ तिमुथियुस १:१२); और वह इसी पद को दोहरती रहती थी। और कुछ समय के बाद इस पद का भी केवल एक भाग ही उसे स्मरण रह सका "वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है" और वह इसी खंड को बोलती रहती थी। जब उसकी मत्यु का समय आया तो रिशतेदारों ने देखा कि उसके होंठ हिल रहे हैं, उन्होंने झुक कर सुनना चाहा कि वह कुछ माँग तो नहीं रही, लेकिन उसके मुँह से धीमी आवाज़ में अब एक ही शब्द निकल रहा था "वह, वह, वह..."। वह महिला सिवाय एक शब्द के सारी बाइबल को भूल चुकी थी, लेकिन उस एक शब्द में सारी बाइबल उसके पास थी।

मृत्यु की घड़ी तक परमेश्वर की उस संत ने उसे कभी नहीं खोया जिससे वह प्रेम करती थी। उसका उद्धार प्रभु यीशु मसीह के साथ एक जीवित संबंध पर आधारित था, और प्रभु मृत्यु के क्षण तक भी उसके हृदय को संतोष दे रहा था। उद्धार पाने का एकमात्र तरीका है उद्धारकर्ता को जानना।

हम अपने किन्हीं कर्मों द्वारा उद्धार नहीं पाते, यह केवल प्रभु यीशु मसीह में विश्वास द्वारा संभव है। अपने सिद्ध जीवन और कलवरी के क्रूस पर दिये बलिदान द्वारा ही उसने उद्धार का मार्ग सबके लिए तैयार किया है। - रिचर्ड डी हॉन


पवित्र शास्त्र को दिमागी तौर से जानना एक बात है लेकिन उद्धारकर्ता को व्यक्तिगत रीति से जानना कुछ और ही बात है।

और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूं, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूं। - फिलिप्पियों ३:१०


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ३:७-१४

Php 3:7 परन्‍तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।
Php 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्‍त करूं।
Php 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Php 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानू, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूं।
Php 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।
Php 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Php 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Php 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १९-२१
  • लूका २:२५-५२

गुरुवार, 24 मार्च 2011

स्वीकार तो आप ही को करना है

अमेरिका में ऐंड्रू जैक्सन के राष्ट्रपति काल में, अदालत ने एक आदमी को मृत्यु दण्ड की आज्ञा दी। जैक्सन ने उस कैदी को क्षमा दान देना चाहा, परन्तु उस कैदी ने क्षमा दान लेने से इन्कार कर दिया। जेल के अधिकारियों, वकीलों और कई लोगों ने बहुत प्रयास किया कि उस कैदी को मना सकें कि वह क्षमा दान स्वीकार कर ले, उसे यह भी समझाया गया कि क्षमा दान अस्वीकार करना राष्ट्रपति का अपमान होगा, लेकिन वह नहीं माना। अन्ततः सर्वोच न्यायालय को फैसला देने के लिए कहा गया। न्यायालय ने फैसला दिया कि क्षमा दान तब तक लागू नहीं माना जा सकता जब तक वह स्वीकार न किया जाए।

यही बात परमेश्वर के उद्धार के दान पर भी लागू होती है। यद्यपि प्रभु यीशु ने समस्त संसार के सभी लोगों के लिए छुटकारे का मार्ग दिया है, लेकिन केवल वो ही जो उसके इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, इसका लाभ उठा पाते हैं।

जब तक हम व्यक्तिगत रीति से यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार नहीं करते, हम पाप के लिए परमेश्वर के दण्ड से बच नहीं सकते, "जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्‍तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहरा चुका; इसलिये कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।" (यूहन्ना ३:१८)

उद्धार का मार्ग सबके लिए खुला है, लेकिन उसका लाभ उठाने और उसका अनुभव करने के लिए पहले उसे स्वीकार करना होगा - और यह आप ही को करना है! - रिचर्ड डी हॉन


उद्धार सेंतमेंत है, किंतु उसे स्वीकार तो करना होगा।

परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। - यूहन्ना १:१२



बाइबल पाठ: यूहन्ना ३:१४-२१

Joh 3:14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए।
Joh 3:15 ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्‍त जीवन पाए।
Joh 3:16 क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए।
Joh 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्‍तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
Joh 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्‍तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहरा चुका; इसलिये कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
Joh 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्‍धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्‍योंकि उन के काम बुरे थे।
Joh 3:20 क्‍योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
Joh 3:21 परन्‍तु जो सच्‍चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १६-१८
  • लूका २:१-२४

बुधवार, 23 मार्च 2011

मुफ्त परन्तु सस्ता नहीं

सुसमाचार के बताए और समझाए जाने के बाद अक्सर लोग प्रतिक्रीया करते हैं,"यानि कि आप कह रहे हैं कि मैं उद्धार पाने के योग्य होने के लिए कोई कार्य नहीं कर सकता? यह तो बहुत आसान और सस्ता होगा।" लोगों को विश्वास करना कठिन होता है कि परमेश्वर अयोग्य पापियों को भी अपना अनुग्रह सेंतमेंत दान में दे देता है।

बाइबल शिक्षक जे. कैम्प्बल मौर्गन ने एक कोयले की खान में काम करने वाले मज़दूर का किस्सा बताया, जो उनके पास इसी संदर्भ में आया था। उस खान के मज़दूर ने मौर्गन से कहा, "इस बात के लिए कि परमेश्वर मेरे पाप क्षमा कर दे, मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ, पर मैं यह हरगिज़ नहीं मान सकता कि वह उन्हें सिर्फ इसलिए क्षमा कर देगा क्योंकि मैंने उससे ऐसा करने का आग्रह किया है। यह मान लेना तो बहुत हल्का और सस्ता है।" मौर्गन ने उससे पूछा, "मित्र, क्या आप आज काम पर गए थे?" उसने उत्तर दिया, "जी हाँ, मैं आज खान के अन्दर गया था।" मौर्गन ने फिर पूछा, "तो उस खान की गहराई से आप बाहर कैसे निकले? क्या बाहर निकलने के लिए आप को कोई कीमत चुकानी पड़ी?" मज़दूर ने कहा, "कदापि नहीं; मैं केवल ऊपर आने वाली लिफ्ट में चढ़ा और मुझे ऊपर खींच लिया गया, और मैं बाहर आ गया।" मौर्गन ने पूछा, "क्या यह बहुत सस्ता नहीं था?" मज़दूर ने उत्तर दिया, "जी नहीं, बिल्कुल भी नहीं; मेरे लिए सस्ता हो सकता है लेकिन खान के मालिकों के लिए यह सुविधा प्रदान करना काफी खर्चीला होता है।" यह कहते कहते उद्धार से संबंधित सच्चाई का उसे एहसास हो गया। वह उद्धार, जो उसके लिए सेंतमेंत था, परमेश्वर को उसके लिए बहुत भारी कीमत वुकानी पड़ी थी। इस खान के मज़दूर ने कभी पाप में गिरी मानव जाति को उद्धार देने के लिए परमेश्वर द्वारा अपने पुत्र के प्राणों के बलिदान की कीमत के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन अब वह समझ सका कि पाप के गहरे गड्ढे से बाहर निकलने के लिए उसे केवल "विश्वास" नामक लिफ्ट में चढ़ने की आवश्यक्ता है और परमेश्वर उसे बाहर खींच लेगा।

परमेश्वर के अनुग्रह के कारण उद्धार सभी के लिए सेंतमेंत है, केवल प्रभु यीशु मसीह में साधारण विश्वास द्वारा है, लेकिन वह सस्ता कदापि नहीं है।

उद्धार पाने के लिए हमें उसकी कोई कीमत चुकाने के प्रयास नहीं करने चाहिएं, केवल मसीह यीशु द्वारा कलवरी के क्रूस पर किए गए कार्य पर विश्वास करना चाहिए। - पौल वैन गौर्डर


उद्धार हमारे लिए मुफ्त है, लेकिन परमेश्वर ने उसकी बहुत भारी कीमत चुकाई है।

क्‍योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। - इफिसियों २:८, ९


बाइबल पाठ: इफिसियों २:१-१०

Eph 2:1 और उस ने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।
Eph 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।
Eph 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्‍तान थे।
Eph 2:4 परन्‍तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया।
Eph 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)।
Eph 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।
Eph 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।
Eph 2:8 क्‍योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।
Eph 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे।
Eph 2:10 क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्‍हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १३-१५
  • लूका १:५७-८०

मंगलवार, 22 मार्च 2011

मार्गदर्शन या भावनाएं?

कई मसीही परमेश्वर के मार्गदर्शन को अपनी भावनाओं या भीतरी अनुभूतियों से जोड़ते हैं। किन्तु ये भावनाएं और अनुभूतियाँ परमेश्वर के मार्गदर्शन का प्रमाण नहीं हैं। प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के एक भूत्पूर्व अधिपति, जौन हिबेन ने एक अतिथिति श्रीमान ब्युकमन को अपने घर भोज पर बुलाया। यह अतिथिति परमेश्वर के मार्गदर्शन को लेकर कुछ अपनी ही धारणाएं रखता था। भोजन के लिए न सिर्फ वह देर से पहुंचा वरन अपने साथ तीन बिन बुलाए मेहमानों को भी भोज के लिए ले आया। उस ने श्रिमति हिबेन को सफाई देते हुए कहा, "परमेश्वर ने मुझे इन तीनों को भी भोज पर लाने के लिए कहा!" श्रीमति हिबेन ने उत्तर दिया, "जी नहीं; मुझे नहीं लगता कि परमेश्वर का इससे कोई संबंध है।" ब्युकमन ने तिलमिला कर पूछा, "आप यह कैसे कह सकतीं हैं?" श्रीमति हिबेन ने उत्तर दिया, "क्योंकि मैं जानती हूँ कि परमेश्वर संभ्रांत है।"

यह किस्सा परमेश्वर के मार्गदर्शन के बारे में एक महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत करता है। विभिन्न परिस्थितियों को लेकर हमारे अन्दर कई सशक्त भावनाएं आ सकती हैं, परन्तु हमें उन्हें परमेश्वर का मार्गदर्शन मानने से पहले सदा परमेश्वर की प्रगट इच्छा के सामने रखकर जाँचना चाहिए। परमेश्वर का मार्गदर्शन कभी उसके वचन के प्रतिकूल अथवा उससे भिन्न नहीं होगा। परमेश्वर के वचनों को उनके संदर्भ में अध्ययन करने से हमें सही पहचान की सूझबूझ मिलती है, और उनका मनन करने से हम अपनी भावनाओं को जाँच पाते हैं।

अपनी पुस्तक "Knowing God" में जे. आई. पैकर चेतावनी देते हैं, "यदि कोई भावना हमारे अहम को उभारती है, या हमें अपनी मनमर्ज़ी करने को उकसाती है, या अपनी ज़िम्मेदारी से बच कर निकलने को प्रोत्साहित करती है, या हमें अपने आप को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करने की ओर ले चलती है, तो तुरंत उसे पहचान कर निषक्रीय कर देना चाहिए, उसे परमेश्वर का मार्गदर्शन समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।"

यह एक अच्छी सलाह है, खासकर तब जब हमारे पास परमेश्वर का वचन है जो हमारे मार्ग का दीपक और राह का उजियला है। - डेनिस डी हॉन


भावनाएं तथ्यओं एवं विश्वास का स्थान कभी नहीं ले सकतीं।

उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। - नीतिवचन ३:६



बाइबल पाठ: नीतिवचन ३:१-१०

Pro 3:1 हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना, अपने ह्रृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना;
Pro 3:2 क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा।
Pro 3:3 कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएं वरन उनको अपने गले का हार बनाना, और अपनी हृदय रूपी पटिया पर लिखना।
Pro 3:4 और तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह पाएगा, तू अति बुद्धिमान होगा।
Pro 3:5 तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।
Pro 3:6 उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
Pro 3:7 अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना, यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना।
Pro 3:8 ऐसा करने से तेरा शरीर भला चंगा, और तेरी हड्डियां पुष्ट रहेंगी।
Pro 3:9 अपनी संपत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की पहिली उपज दे देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना;
Pro 3:10 इस प्रकार तेरे खत्ते भरे और पूरे रहेंगे, और तेरे रस कुण्डों से नया दाखमधु उमण्डता रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १०-१२
  • लूका १:३९-५६

सोमवार, 21 मार्च 2011

परमेश्वर का मार्गदर्शन

यदि कभी आप ने लालटेन की रौशनी में रात के अंधियारे में यात्रा करी है तो आप समझ सकते हैं कि लालटेन की रौशनी केवल अगला कदम देखकर रखने तक का ही प्रकाश देती है। लेकिन जब आप वह कदम उठा लेते हैं तो वही प्रकाश फिर उससे अगला कदम रखने का स्थान दिखा देता है। और इसी प्रकार जब आप आगे बढ़ते रहते हैं तो कदम-कदम करके आप का पूरा मार्ग रौशन होता जाता है।

अनेक मसीही विश्वासी, जो लम्बे समय से परमेश्वर के साथ चलते रहे हैं, अपने अनुभव से बताते हैं कि परमेश्वर भी इसी प्रकार कदम कदम करके उन्हें मार्ग दिखाता रहा है और चलाता रहा है, और वे इसी प्रकार अपनी मंजिल तक पहुंचने के पूर्ण्तः आश्वस्त भी हैं। लेकिन कुछ मसीही यात्री अपने सफर की अनिश्चितताओं के अन्धकार से परेशान हो जाते हैं। संभावित खतरों, मार्ग की बाधाओं और मार्ग में हो सकने वाले ठोकर के कारणों से विचिलित होकर वे प्रभु में अपनी सुरक्षा और शांति का आनन्द नहीं उठा पाते।

नीतिवचन के लेखक ने लिखा " तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वे तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।" (नीतिवचन ३:५,६) और दाऊद ने परमेश्वर की यह प्रतिज्ञा बताई "मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।" (भजन ३२:८)

जब हम आने वाले कल के लिए परेशान होने की बजाए अपने आज के लिए परमेश्वर पर भरोसा करना सीख लेते हैं तो अपने जीवन के हर कदम के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन और अनुग्रह को भी अनुभव करने लगते हैं। जितना परमेश्वर हमें दिखाता है, उससे आगे देखने की चिंता करने की हमें आवश्यक्ता नहीं है। जब हम उसके मार्गदर्शन में चलते हैं तो हर कदम के लिए हमारे पास उसकी ज्योति बनी रहती है।

परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलना एक अद्भुत अनुभव है। - रिचर्ड डी हॉन


परमेश्वर के सत्य की लालटेन को दृढ़ता से थामे रहें और वह आपका सही मार्ग रौशन करती रहेगी।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन ११९:१०५


बाइबल पाठ: भजन ११९:१०५-११२

Psa 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।
Psa 119:106 मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।
Psa 119:107 मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं, हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला।
Psa 119:108 हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा।
Psa 119:109 मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।
Psa 119:110 दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका।
Psa 119:111 मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण है।
Psa 119:112 मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू ७-९
  • लूका १:२१-३८

रविवार, 20 मार्च 2011

अनुभव के पाठ

एक मसीही जब घोर परेशानियों में पड़ा तो उसे बाइबल के वचनों से बहुत सांत्वना मिली। उसने कहा, मैं प्रसन्न हुआ यह जानकर कि बाइबल मुझे सिखाती है कि परमेश्वर प्रत्येक परेशानी में भी मेरे साथ है और मुझे उनसे पार निकालेगा। ज़िंदगी सदा परेशानी ही नहीं है। यदि ऐसा होता तो हम कब के सदा की निराशाओं में घिर कर हार मान चुके होते।

निर्गमन १५ अध्याय में हम पढ़ते हैं कि जब इस्त्राएलियों ने "मारा" नाम स्थान में पढ़ाव डाला तो वे तीन दिन से जल के अभाव में चल रहे थे, लेकिन वहां का जल खारा निकला और वे उसे पी न सके। तब परमेश्वर ने मूसा को उपाय बताया और वह खारा जल मीठा बन गया। फिर उसके बाद अगले पड़ाव के लिए परमेश्वर उन्हें "एलीम" नामक स्थान पर ले गया जहां उन्हें ठंडे मीठे जल के सोते और विश्राम के लिए खजूर के पेड़ों की छाया मिली। वे लोग जानते थे कि दोनो पड़ाव परमेश्वर की ओर से हैं। परमेश्वर का महिमा का बादल उनके ऊपर छाया किये रहता था और उन्हें मार्ग दिखाता था। जब और जहां बादल चलता था तब और वहां इस्त्राएली चलते थे; जब बादल रुकता था तो इस्त्राएली भी रुकते थे। वह बादल ही उन्हें मारा भी ले गया और एलीम भी। इस्त्राएलियों की यह यात्रा मसीही जीवन की यात्रा का रूपक भी है।

यदि परमेश्वर किसी मसीही विश्वासी को "मारा" यानि परेशानियों और मुशकिलों के स्थान तक लाया है, तो वहां वह उसका उपाय भी देगा और आगे फिर "एलीम" के सुखदायी विश्राम तक भी लेकर जाएगा। और जब हम एलीम के आनन्द में हों तो ध्यान रखें कि परमेशवर हमें आगे की यात्रा के लिये सामर्थ भी दे रहा है और तैयार भी कर रहा है।

परमेश्वर का आराम और सहायता सदा उसके बच्चों के साथ है - यहां भी और स्वर्ग में भी। - पौल वैन गोर्डर


क्लेश की प्रत्येक मरुभूमि में परमेश्वर की सांत्वना की हरियाली भी है।

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है। - भजन २३:२


बाइबल पाठ: निर्गमन १५:२२-२७

Exo 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए, और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला।
Exo 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा।
Exo 15:24 तब वे यह कह कर मूसा के विरूद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं?
Exo 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उस ने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उस ने यह कह कर उनकी परीक्षा की,
Exo 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजे हैं उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं।
Exo 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू ४-६
  • लूका १:१-२०