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मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

हमारे लिए हमारे साथ

   फारस देश की एक छोटी कहानी है; एक बुद्धिमान और प्रजा की प्रिय शाह वहाँ पर राज्य करता था। शाह ने एक दिन अपना भेस बदला और नगर के सार्वजनिक स्नानागार के हाल देखने गया। स्नानागार में पानी, तहखाने में लगी आग की भट्टी द्वारा गरम कर के लोगों को दिया जाता था। शाह उस अन्धेरे, धुएं और घुटन भरे तहखाने में गया और भट्टी को प्रज्वलित रखने के कार्य में लगे व्यक्ति के पास जा कर बैठ गया और उससे बातें करने लगा। शाह ने उस अकेले स्थान पर कठिन परिस्थितियों काम पर लगे व्यक्ति से मित्रता करी और प्रतिदिन उसके पास आकर और उसके साथ बैठ कर बातें करने में समय बिताने लगा, और उसके भोजन में से भी उसके साथ संभागी होने लगा। भट्टी पर काम करने वाला मज़दूर अपने इस मित्र से बहुत प्रभावित हुआ क्योंकि वह वहाँ आता था जहाँ वह स्वयं था और वह शाह को बहुत प्रीय जानने लगा। एक दिन शाह ने उसे अपने महल बुलवाया और उसे अपना वास्तविक परिचय दिया। शाह सोच रहा था कि अब अपनी स्थिति सुधारने के लिए वह साधारण सा मज़दूर अब उस से बहुत धन और भेंट की आशा रखेगा, किंतु उस मज़दूर ने बड़े प्रेम, आदर और विस्मय से अपने शाह कि ओर देखा और कहा, "आपने अपने ऐश्वर्य, वैभव और महिमा को मेरे साथ उस अन्धेरे, धुंए और घुटन से भरे कमरे बैठने के लिए छोड़ा, मेरे साथ ज़मीन पर बैठ कर मेरा साधारण सा खाना खाया। अन्य लोगों को तो आप कीमती उपहार देते हैं, लेकिन मुझे तो आपने अपने आप को ही दे दिया। अब इससे अधिक और क्या होगा? मैं और क्या उम्मीद रख सकता हूँ? आपका यह प्रेम ही मेरे लिए सब कुछ है।"

   जो प्रभु यीशु ने हमारे लिए किया, जब हम उस के बारे में विचार करते हैं तो जैसे उस भट्टी देखने वाले मज़दूर की भावनाएं अपने शाह के लिए थीं, उसी के समान ही हमारी भी भावनाएं प्रभु यीशु के लिए हो जाती हैं। प्रभु यीशु ने हमें पापों से मुक्ति और अनन्त काल का उद्धार देने के लिए एक दास का स्वरूप ले लिया; वे स्वर्ग से उतर कर धरती पर आ गए; स्वर्गदूतों की आराधना छोड़ कर क्रूर मनुष्यों के उपहास और निन्दा को सुनने आ गए; स्वर्ग के आदर और महिमा को छोड़ कर अपमान और तिरिस्कार को लेने आ गए। प्रभु यीशु ने "मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली" (फिलिप्पियों २:८)।

   हमारा सृष्टीकर्ता हमारा उद्धारकर्ता बन गया। केवल वही हमारी आरधना और विनीत श्रद्धा का विष्य होने के योग्य है, क्योंकि वह आज भी हमारी हर परिस्थिति में हमारे लिए हमारे साथ है। - पौल वैन गोर्डर

परमेश्वर की सर्वोच्च भेंट, प्रभु यीशु को, हमारे हृदय की सर्वाधिक गहराई से निकली कृतज्ञता का पात्र सदैव रहना चाहिए।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - युहन्ना १:१४

बाइबल पाठ: युहन्ना १:१-१४
Joh 1:1  आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।
Joh 1:2  यही आदि में परमेश्वर के साथ था।
Joh 1:3  सब कुछ उसी के द्वारा उत्‍पन्न हुआ और जो कुछ उत्‍पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्‍तु उसके बिना उत्‍पन्न न हुई।
Joh 1:4  उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।
Joh 1:5  और ज्योति अन्‍धकार में चमकती है; और अन्‍धकार ने उसे ग्रहण न किया।
Joh 1:6  एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था।
Joh 1:7  यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।
Joh 1:8  वह आप तो वह ज्योति न था, परन्‍तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।
Joh 1:9  सच्‍ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आने वाली थी।
Joh 1:10  वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्‍पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
Joh 1:11  वह अपने घर में आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
Joh 1:12  परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
Joh 1:13  वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्‍छा से, न मनुष्य की इच्‍छा से, परन्‍तु परमेश्वर से उत्‍पन्न हुए हैं।
Joh 1:14  और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • मीका १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ११

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

वह सब जानता है

   अमेरिका में एक ३० वर्षीय महिला ३ वर्ष तक सप्ताह में एक बार बूढ़ी औरत का वेष धर कर घूमती रही, अपने व्यक्तिगत अनुभव द्वारा यह जानने के लिए कि अमेरिका में लोग अपने बुज़ुर्गों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। जो उसने सीखा वह बहुत दुखदायी था। उसे कई बार लूटे जाने, अपमानित किए जाने और धमकाए जाने का सामना करना पड़ा, और वह समझ पाई कि उसके वर्तमान समाज में बुज़ुर्गों के लिए जीना कठिन और दुखदायी है।

   कुछ लोग कभी कभी दूसरों के साथ सहानुभूति भी रखते हैं, उनके प्रति संवेदनशील तथा सहायक होते हैं; किंतु ऐसे लोगों की गिनती बहुत थोड़ी है। अधिकांशतः लोगों की प्रवृति है कि दूसरे की मजबूरी और परिस्थिति का भरपूर लाभ उठाया जाए, हम इस के उदाहरण अपने आस-पास अपने प्रतिदिन के अनुभवों से देखते रहते हैं।

   पापमय संसार में मनुष्य की दशा का व्यक्तिगत अनुभव जैसा प्रभु यीशु ने किया वह अनूठा एवं अनुपम है। जब वे मानव स्वरूप में पृथ्वी पर आए तो वे प्रलोभनों तथा परीक्षाओं में पड़ने, परखे जाने, नफरत का सामना करने और हर प्रकार का दुख उठाने के लिए तैयार थे। उन्होंने उन सभी परिस्थितियों का सामना किया जो एक साधारण मनुष्य इस संसार में करता है। संसार में आने से पूर्व भी वे मनुष्यों की कमज़ोरियों में उनके प्रति सहानुभूति रखते थे, परन्तु मनुष्य स्वरूप में हो कर उन्होंने पूरी तरह से हम मनुष्यों के साथ अपनी पहचान बनाई। उनका मानव अवतार लेना और हमारे समान हमारे जीवनों को कठिन बनाने वाले दुखों, कमज़ोरियों और परीक्षाओं को अनुभव करना दिखाता है कि हमें पापों से बचाने के लिए वे किस सीमा तक जाने को तैयार थे। उनके समान अपने परमेश्वरत्व के सर्वोच्च स्थान को छोड़ कर बहुत साधारण से नाशमान मनुष्य की समानता में आकर, मनुष्यों की परिस्थितियों को अनुभव करने का कार्य कभी भी किसी ने नहीं किया। प्रभु यीशु ने स्वर्ग की महिमा छोड़ी और हमारे समान हर रीति से परखे गए, किंतु कभी पाप नहीं किया। सर्वथा निष्पाप और निषकलंक होने पर भी उन्होंने समस्त मानव जाति के सारे पापों को अपने ऊपर ले लिया और क्रूस की मृत्यु सह कर पुनः जी भी उठे, ताकि उनमें किए गए साधारण विश्वास द्वारा, सेंतमेंत हमें पापों से मुक्ति तथा अपनी धार्मिकता दे सकें।

   प्रभु यीशु हमारा ऐसा सहायक है जो हमारी परवाह करता है। जब हम प्रलभनों और परीक्षाओं का सामना करते हैं, तो हम सहायता के लिए निश्चिंत हो कर उसके पास जा सकते हैं, क्योंकि वह सब जानता है। - मार्ट डी हॉन


पृथ्वी का कोई ऐसा दुख नहीं है जिसे स्वर्ग नहीं समझता।

इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्‍ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वासयोग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्‍चित्त करे। - इब्रानियों २:१७

बाइबल पाठ: इब्रानियों २:१४-१८; ४:१८-१६
Heb 2:14  इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे।
Heb 2:15  और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्‍हें छुड़ा ले।
Heb 2:16  क्‍योंकि वह तो स्‍वर्गदूतों को नहीं वरन इब्राहीम के वंश को संभालता है।
Heb 2:17  इस कारण उसको चाहिए था, कि सब बातों में अपने भाइयों के समान बने; जिस से वह उन बातों में जो परमेश्वर से सम्बन्‍ध रखती हैं, एक दयालु और विश्वासयोग्य महायाजक बने ताकि लोगों के पापों के लिये प्रायश्‍चित्त करे।
Heb 2:18  क्‍योंकि जब उस ने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है।
Heb 4:14  सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें।
Heb 4:15  क्‍योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला।
Heb 4:16  इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍ध कर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • योना 
  • प्रकाशितवाक्य १०

रविवार, 18 दिसंबर 2011

देहधारी वचन

   प्रसिद्ध अंग्रेज़ी लेखक जौर्ज इलियट ने कहा था, "कभी कभी वे (शब्द) सदेह हो जाते हैं; उनके साँस की गरमाहट को हम अनुभव कर सकते हैं; वे अपने नर्म संवेदनशील हाथों से हमें स्पर्श करते हैं; उन की गंभीर  उदास आँखें हमारी ओर देखती हैं; वे अनुनय-विनय के साथ हम से बोलते हैं - मानों वे कोई जीवित मानवीय आत्मा हों।"

   आध्यत्मशास्त्री बोरहैम ने मसीही जीवन के विषय में लिखा, "मसीही विश्वासी को मसीही सन्देश के अनुरूप होना चाहिए। परमेश्वर के वचन को उस के सही मानवीय परिपेक्ष में प्रस्तुत किया जाना चाहिए....इस से ही वह जो देहधारी हुआ वचन है वह ऐसे प्रभावी रूप में प्रस्तुत हो पाता है कि उस के प्रभाव को रोका नहीं जा सकता....मनुष्य द्वारा बोले गए शब्द जब सदेह प्रस्तुत किए जाते हैं तब वे अभूतपूर्व उद्वेग और सामर्थ से भर जाते हैं। इसी प्रकार परमेश्वर के विचार मनुष्यों के लिए प्रभावी हो जाते हैं, जब वे सदेह होते हैं।"

   प्रभु यीशु मानव रूप में परमेश्वर है। इस संसार में आकर उन्होंने हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता को हम पर सदेह प्रकट किया। जब युहन्ना ने कहा "वचन देहधारी हुआ" तो उस का यही अभिप्राय था। यदि आज समाज को परमेश्वर के देहधारी वचन को सुनना है, तो उसे वह वचन हमारे जीवनों में सदेह दिखना भी चाहिए। प्रभु यीशु ने कहा, "तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देख कर तुम्हारे पिता की, जो स्‍वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती ५:१६)।

   जब, जिस पर वे विश्वास करते हैं, उसे अपने जीवन में जी कर दिखाते हैं, तब मसीही विश्वासी वचन को देहधारी बना देते हैं। - रिचर्ड डी हॉन

हम अपने होंठों की अपेक्षा अपने जीवन से ज़्यादा बेहतर सिखाते हैं।

और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। - युहन्ना १:१४

बाइबल पाठ: युहन्ना १:१४-१८
Joh 1:14  और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्‍चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
Joh 1:15  यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकार कर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़ कर है क्‍योंकि वह मुझ से पहिले था।
Joh 1:16  क्‍योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्‍त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह।
Joh 1:17  इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्‍तु अनुग्रह, और सच्‍चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची।
Joh 1:18  परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • ओबाद्याह 
  • प्रकाशितवाक्य ९

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

हमारी समानता में

   एक दिन एक मसीही विश्वासी ने मार्ग पर गिरा हुआ गेहूँ की बालियों का पूला देखा। भूखी गौरयिओं के एक झुण्ड ने उस पुले को अपनी आकस्मिक दावत के लिए अपना लिया था तथा उसमें से मज़े से गेहूँ खा रहीं थीं। वह व्यक्ति रुका और उस पूले की ओर एक कदम बढ़ाया, वे गौरियाँ सचेत हो गईं; उस ने उन की ओर एक कदम और बढ़ाया, और सभी चिड़ियाँ विचलित दिखनी लगीं; उस के एक और कदम बढ़ाते ही वे सभी भय से वशीभूत हो अपनी मुफ्त की दावत ऐसे ही छोड़ कर उड़ गईं।

   वह व्यक्ति वहाँ खड़ा हो कर, जो हुआ था उस पर विचार करने लगा कि जबकि उस ने उन्हें डराने या धमकाने के लिए कुछ भी नहीं किया तो फिर वे चिड़ियाँ क्यों उड़ गईं? तभी उस के मन में उत्तर कौंधा, वे उस के आकार से डर कर उड़ गईं थीं, क्योंकि उन छोटे से पक्षियों के लिए उसका आकार बहुत विशाल था और इसलिए उन्हें उस से भय लगता था। उसने फिर सोचा, क्या कोई तरीका है कि वह उन तक, उन्हें बिना डराए जा सके? मन में उत्तर आया, यदि वह स्वयं उनकी समानता में आ कर, एक गौरैया बन कर उनके पास आए तो वे उस से नहीं डरेंगी और वह उन के निकट संपर्क में आ सकता है।

   उसी समय उस व्यक्ति को इस घटना और उस से संबंधित उसके विचारों का आत्मिक समानन्तर भी समझ में आया। परमेश्वर ने पहले भी मनुष्यों से संपर्क करा और बातें करीं थीं। परमेश्वर अब्राहम के पास भी आया था और मूसा के पास भी, लेकिन परमेश्वर जिन के पास भी आया, पहले पहल वे सभी उस से भयभीत हुए। किंतु जब परमेश्वर का स्वर्गदूत चरवाहों के पास आया और, "स्‍वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्‍योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्‍द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है" (लूका १२:१०, ११); तो वे चरवाहे तुरंत बैतलेहम को गए और उन्होंने उस नवजात बालक के दर्शन किए।

   यद्यपि संसार में वे मामूली से चरवाहे थे, किंतु अब सृष्टि के सृष्टिकर्ता की उपस्थिति में खड़े हो कर भी, जिसके सामने स्वर्गदूत भी आँखें उठा कर बात नहीं करते, उन्हें कोई भय नहीं लग रहा था। संसार को पापों से क्षमा और उद्धार का मार्ग देने वाले को देख कर वे आनन्दित थे और उन्होंने यह आनन्द का समाचार औरों को भी सहर्ष दिया।

   प्रभु यीशु में परमेश्वर हमारी समानता में आ गया ताकि हमें अपनी समानता में ला सके। - पौल वैन गोर्डर

मसीह यीशु में हो कर असीम परमेश्वर सीमित मनुष्य की पहुँच के भीतर आ गया।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत युक्ति करने वाला पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह ९:६

बाइबल पाठ: यशायाह ९:२-७
Isa 9:2  जो लोग अन्धियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी।
Isa 9:3  तू ने जाति को बढ़ाया, तू ने उस को बहुत आनन्द दिया; वे तेरे साम्हने कटनी के समय का सा आनन्द करते हैं, और ऐसे मगन हैं जैसे लोग लूट बांटने के समय मगन रहते हैं।
Isa 9:4  क्योंकि तू ने उस की गर्दन पर के भारी जूए और उस के बहंगे के बांस, उस पर अंधेर करने वाले की लाठी, इन सभों को ऐसा तोड़ दिया है जेसे मिद्यानियों के दिन में किया था।
Isa 9:5  क्योंकि युद्ध में लड़ने वाले सिपाहियों के जूते और लोहू में लथड़े हुए कपड़े सब आग का कौर हो जाएंगे।
Isa 9:6  क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत युक्ति करने वाला पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।
Isa 9:7  उसकी प्रभुता सर्वदा बढ़ती रहेगी, और उसकी शान्ति का अन्त न होगा, इसलिये वि उस को दाऊद की राजगद्दी पर इस समय से ले कर सर्वदा के लिये न्याय और धर्म के द्वारा स्थिर किए ओर संभाले रहेगा। सेनाओं के यहोवा की धुन के द्वारा यह हो जाएगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • अमोस ७-९ 
  • प्रकाशितवाक्य ८

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

कार्यकारी

   रोबर्ट मोफ्फट (१७९५-१८८३) अफ्रीका में मिशनरी कार्यों में संलग्न थे। एक बार जब वे इंगलैंड आए और अफ्रीका में अपने कार्य के बारे में बता रहे थे तब एक विद्यार्थी बड़ी दिलचस्पी से उन की बातें सुन रहा था। मोफट ने अकसर उन्हें अफ्रीका में दिखाई देने वाले एक दृश्य के बारे में बताया, उन्होंने कहा, "जहाँ मैं कार्य करता हूँ उसके उत्तर दिशा में एक बहुत विशाल मैदान है, जहाँ प्रातः के सूरज के साथ मैंने हज़ार गाँवों से उठता धुआँ देखा है, ऐसे गाँव जहाँ कभी कोई मिशनरी नहीं गया।"

  यह शब्द ’हज़ार गाँवों से उठता धुआँ’ उस विद्यार्थी के मन में घर कर गए और उस स्थान की कलपना ने उस के मन में उन स्थानों पर जहाँ कभी कोई नहीं गया जाने की प्रबल लालसा जगा दी। अपने इस दर्शन और लालसा से वशीभूत हो कर वह विद्यार्थी मोफट के पास आया, और बोला, "क्या मैं अफ्रीका में कार्यकारी हो सकता हूँ?" यह विद्यार्थी था आगे चल कर अफ्रीका में अपने कार्य के लिए विश्व भर में प्रसिद्धि तथा आदर पाने वाला विख्यात मिशनरी डेविड लिविंगस्टन।

   हम जो ऐसे देशों में रहते हैं जहाँ सुसमाचार निर्बाध रूप से प्रचार हो सकता है, इस बात को समझने में कठिनाई महसूस करते हैं कि संसार में ऐसे भी इलाके हैं जहाँ लोगों ने कभी सुसमाचार सुना ही नहीं है। जब हम उन करोड़ों लोगों के बारे में सुनते हैं जो मसीह और उसमें मिलने वाले उद्धार तथा पापों से क्षमा के बारे में जानते ही नहीं तो हमें भी मत्ती ९ में वर्णित हमारे प्रभु की तरह उन के लिए संवेदना से भर कर सुसमाचार उन तक पहुँचाने के लिए कार्यकारी होने को लालायित हो जाना चाहिए।

   प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा, "क्‍या तुम नहीं कहते, कि कटनी होने में अब भी चार महीने पड़े हैं देखो, मैं तुम से कहता हूं, अपनी आंखे उठा कर खेतों पर दृष्‍टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं" (यूहन्ना ४:३५)। प्रभु को आज भी उस के लिए ’खेतों’ में कार्य करने वाले मज़दूरों की आवश्यक्ता है। मोफट और लिविंगस्टन के जैसे हमें भी उन ’हज़ार गाँवों से उठता धुआँ’ देखने वाली आँखें और उन तक जाने की लालसा रखने वाला मन चाहिए। तब हम परमेश्वर से माँग सकते हैं कि उन इलाकों में जहाँ सुसमाचार कभी नहीं पहुँचा, वहाँ सुसमाचार पहुँचाने के लिए हम उस के लिए कैसे कार्यकारी हो सकते हैं? - रिचर्ड डी हॉन


परमेश्वर के आवश्यक वचन के साथ हमें आवश्यक्ता में पड़े संसार में जाने वाले बनना है।

जब उस ने भीड़ को देखा तो उस को लोगों पर तरस आया, क्‍योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। - मत्ती ९:३६

बाइबल पाठ: मत्ती ९:३२-३८
Mat 9:32  जब वे बाहर जा रहे थे, तो देखो, लोग एक गूंगे को जिस में दुष्‍टात्मा थी उस के पास लाए।
Mat 9:33  और जब दुष्‍टात्मा निकाल दी गई, तो गूंगा बोलने लगा; और भीड़ ने अचम्भा कर के कहा कि इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया।
Mat 9:34  परन्‍तु फरीसियों ने कहा, यह तो दुष्‍टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्‍टात्माओं को निकालता है।
Mat 9:35  और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और र्दुबलता को दूर करता रहा।
Mat 9:36  जब उस ने भीड़ को देखा तो उस को लोगों पर तरस आया, क्‍योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे।
Mat 9:37  तब उस ने अपने चेलों से कहा, पके खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं।
Mat 9:38  इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • अमोस ४-६ 
  • प्रकाशितवाक्य ७

गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

जंगल और बस्ती

   रिचर्ड वुड ने, Oriental Missionary Society द्वारा प्रकाशित पत्रिका Outreach में एक लेख में मिशनरी कार्यों को समर्थन और सहारा देने के विषय में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्हों ने कहा, सैलानी अकसर जब अति पिछड़े और गरीब देश हेयती हो कर आते हैं तो कहते हैं कि "हेयती में कार्य कर रहे मिशन संस्थानों और कार्यकर्ताओं के कार्य द्वारा परमेश्वर ने मेरा मन छू लिया।" लेकिन मैं यह सोचता हूँ कि उन लोगों का मन किस से छूआ गया - हेयती की शारीरिक गरीबी और बदहाली से या वहाँ के विवासियों में व्याप्त आत्मिक कँगाली से? इन सैलानियों के मन में प्रथामिक चिंता किस चीज़ को लेकर थी, वहाँ पेट भरने की रोटी की कमी के कारण या जीवन की रोटी - परमेश्वर के वचन की कमी के कारण?

   रिचर्ड वुड ने समझाया कि लोगों की शारीरिक कमीयों को देख कर चिंता करना, हमें जागृत करने के लिए परमेश्वर का एक उपाय हो सकता है; किंतु इन चिंता करने वालों में से ऐसे कितने होंगे जो बस्तीयों और शहरों में जा कर भी यही कहेंगे कि, "परमेश्वर ने शहर और बस्ती में मेरे मन को छू लिया।" क्या शहर में बने सुन्दर बाग़ीचों वाले कीमती घरों, और उन में रहने वाले अच्छे कपड़े पहने हुए और हर प्रकार के भोजन वस्तुओं से तृप्त लोगों को देख कर भी उन के मनों में ऐसी ही चिन्ता उठती है?

   सुसमाचार केवल झुग्गी-झोंपड़ी और छोटी बस्तियों में रहने वाले गरीब लोगों के लिए नहीं है, उद्धार का यह सुसमाचार अमीरों, शहर वासियों और कॉलनी में रहने वालों के लिए भी वैसे ही है। मिशन कार्य में लगने और सुसमाचार प्रचार करने का सही कारण और प्रेरणा हमारी भावनाएं और विचार नहीं - परमेश्वर का चरित्र और लोगों का आत्मिक अन्धकार हैं। इस से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह आत्मिक अन्धकार गरीब झोंपड़ी वाले के जीवन में है या आलीशान मकान में रहने वाले अमीर व्यक्ति के जीवन में, दोनो को ही सुसमाचार पर विश्वास द्वारा पापों से मुक्ति और नरक से बचने की समान आवश्यक्ता है।

   इसलिए हर एक मसीही विश्वासी का यह कर्तव्य है कि सुसमाचार - परमेश्वर द्वारा उपल्बध कराए गए मुक्ति के मार्ग को, वह सब प्रकार के लोगों तक पहुँचाए - चाहे वे जंगलों में रहते हों या बस्तियों में। - रिचर्ड डी हॉन

जो कोई मसीह यीशु में है वह सुसमाचार प्रचारक है, और जो मसीह यीशु में नहीं है वह सुसमाचार प्रचार के लिए कार्य स्थल है।

परन्‍तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। - प्रेरितों १:८

बाइबल पाठ: मत्ती २८:१८-२०; प्रेरितों १:७, ८
Mat 28:18  यीशु ने उन के पास आ कर कहा, कि स्‍वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है।
Mat 28:19  इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्‍हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो।
Mat 28:20  और उन्‍हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।
Act 1:7  उस ने उन से कहा; उन समयों या कालों को जानना, जिन को पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं।
Act 1:8  परन्‍तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।
एक साल में बाइबल: 
  • अमोस १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य ६

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

कार्य स्थल

   अपनी पुस्तक The Complete Disciple में पौल पोवेल लिखते हैं, "आज के समय के बहुत से चर्च मुझे ऐसे मज़दूरों की याद दिलाते हैं जो औज़ारों की कार्यशाला में बैठे-बैठे ही फसल को खेत से गोदाम में ले आने का प्रयास कर रहे हैं। वे प्रति इतवार अपनी कार्यशाला में जाते हैं, फसल उगाने और जमा करने के नए और बेहतर तरीके सीखते हैं, अपने औज़ारों को तेज़ और दुरुस्त करते तथा अपने ट्रैक्टरों में तेल और ग्रीस डालते हैं, फिर उठ कर अपने घर चले जाते हैं। रात को वे फिर वापस आकर यही प्रक्रिया दोहराते हैं और फिर घर चले जाते हैं। ऐसा वे हफ्तों, महीनों, सालों से करते आ रहे हैं, लेकिन फसल काटने उन में से कोई भी खेत में नहीं जाता; सब कार्य शाला में बैठे बैठे फसल उगाने और काटने के तरीके ही सीखते रहते हैं।"

   प्रभु यीशु का अपने चेलों को दिया गया अन्तिम निर्देश था के वे सारे संसार में जा कर लोगों को प्रभु में विश्वास द्वारा मिलने वाले उद्धार और पापों से मुक्ति के बारे में बताएं। प्रभु यीशु ने अपने स्वर्गारोहण से पहले, "...उन से कहा, तुम सारे जगत में जा कर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो" (मरकुस १६:१२५)। प्रभु यीशु की यह बड़ी आज्ञा आज भी उस के चेलों के लिए लागू है, तथा चेलों का कर्तव्य है। किंतु बहुतेरे चर्च सदस्य, चाहे वे वर्षों से मसीही विश्वासी हों और परमेश्वर के वचन बाइबल के बारे में अच्छी जानकारी रखते हों, तौ भी कभी सुसमाचार प्रचार के लिए कार्य करने नहीं जाते।

   इस विषय में मैं भी दोषी हूँ। मैं मिशन और मिशनरी कार्यों को नियमित रूप से प्रोत्साहित करता हूँ, उनके कार्यों में योगदान देता हूँ, लेकिन मैं आत्मिक अन्धकार में खोए हुए लोगों के बीच में वैसे नहीं जाता जैसे मुझे जाना चाहिए। प्रभु के आगमन से पहले, अब समय है कि हम मसीही विश्वासियों को अपनी यह कमी स्वीकार करनी चाहिए और प्रभु यीशु द्वारा नियुक्त कार्य और कार्य स्थल पर जाना चाहिए। - डेव एग्नर

सुसमाचार प्रचार के मिशन कार्यों में हम केवल एक कार्य नहीं कर सकते - सुसमाचार प्रचार को नज़रान्दाज़ करना।

स्‍वामी ने दास से कहा, सड़कों पर और बाड़ों की ओर जा कर लोगों को बरबस ले ही आ ताकि मेरा घर भर जाए। - लूका १४:२३

बाइबल पाठ: लूका १४:१५-२४
Luk 14:15  उसके साथ भोजन करने वालों में से एक ने ये बातें सुनकर उस से कहा, धन्य है वह, जो परमेश्वर के राज्य में रोटी खाएगा।
Luk 14:16  उस ने उस से कहा; किसी मनुष्य ने बड़ी जेवनार की और बहुतों को बुलाया।
Luk 14:17  जब भोजन तैयार हो गया, तो उस ने अपने दास के हाथ नेवतहारियों को कहला भेजा, कि आओ, अब भोजन तैयार है।
Luk 14:18  पर वे सब के सब क्षमा मांगने लगे, पहिले ने उस से कहा, मैं ने खेत मोल लिया है और अवश्य है कि उसे देखूं: मैं तुझ से बिनती करता हूं, मुझे क्षमा करा दे।
Luk 14:19  दूसरे ने कहा, मैं ने पांच जोड़े बैल मोल लिए हैं: और उन्‍हें परखने जाता हूं : मैं तुझ से बिनती करता हूं, मुझे क्षमा करा दे।
Luk 14:20  एक और ने कहा, मै ने ब्याह किया है, इसलिये मैं नहीं आ सकता।
Luk 14:21  उस दास ने आ कर अपने स्‍वामी को ये बातें कह सुनाईं, तब घर के स्‍वामी ने क्रोध में आ कर अपने दास से कहा, नगर के बाजारों और गलियों में तुरन्‍त जा कर कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को यहां ले आओ।
Luk 14:22  दास ने फिर कहा, हे स्‍वामी, जैसे तू ने कहा था, वैसे ही किया गया है; फिर भी जगह है।
Luk 14:23  स्‍वामी ने दास से कहा, सड़कों पर और बाड़ों की ओर जा कर लोगों को बरबस ले ही आ ताकि मेरा घर भर जाए।
Luk 14:24  क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि उन नेवते हुओं में से कोई मेरी जेवनार को न चखेगा।
एक साल में बाइबल: 
  • योएल 
  • प्रकाशितवाक्य ५