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रविवार, 30 दिसंबर 2012

संतुलन


   महान भौतिक शास्त्री और नोबल पुरुस्कार विजेता एल्बर्ट आईन्सटाईन ने अपने पुत्र एड्युअर्ड को लिखे एक पत्र में उसे सलाह दी थी: "जीवन एक साईकिल चलाने के समान है। अपना संतुलन बनाए रखने के लिए आगे बढ़ते रहना अनिवार्य है।" यह सलाह बहुत बुद्धिमतापूर्ण और व्यावहरिक है।

   यही सलाह मसीही जीवन पर भी लागू होती है। ऐसे बहुत से मसीही विश्वासी हैं जो अपने विश्वास के सहारे कठिन और दुखदाई परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहते हैं, परन्तु यदि वे किसी व्यक्तिगत नैतिक पराजय में पड़ जाते हैं तो अपने जीवन का संतुलन खो कर निराशाओं में गिर जाते हैं। फिर उनके जीवन में पछताते हुए हाथ मलते रहना और अपने आप को परमेश्वर की क्षमा के अयोग्य समझना उन्हें उठने नहीं देते और वे अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम अनेक ऐसे पात्रों को पाते हैं जो अपने जीवनों में गंभीर पराजयों में पड़े: इब्राहिम ने फिरौन से अपनी पत्नि सारा के बारे में झूठ बोला (उत्पत्ति १२:११-१७); याकूब ने अपने भाई की आशीषें पाने के लिए अपने पिता को धोखा दिया (उत्पत्ति २७:१८-२९); मूसा ने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता करी और चट्टान से बोलने की बजाए उस पर लाठी से चोट करी (गिनती २०:७-१२)। इनकी असफलताओं के बावजूद इनके विषय में इब्रानियों ११:३९ में लिखा गया है: "...और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई...।" बाइबल के ये पात्र अन्ततः प्रशंसा के पात्र इसलिए बने क्योंकि अपने गिरने के बाद ये गिरे हुए नहीं पड़े रहे, वरन इन्होंने पुनः परमेश्वर की ओर दृष्टि करी और फिर से उसके पीछे चल निकले।

   क्या किसी पाप में पड़ने के कारण या कोई गलत निर्णय लेने के कारण आप अपना आत्मिक संतुलन खो बैठे हैं और अपने आप को गिरा हुआ अनुभव कर रहे हैं? अपनी गलती अथवा पाप के लिए पश्चाताप करें और अनुग्रह में पुनः अवसर देने वाले परमेश्वर प्रभु यीशु से क्षमा मांगें। वह आपको फिर से उठा कर खड़ा करेगा और आगे बढ़ने की सामर्थ देगा - यह उसका वायदा है: "" (१ यूहन्ना १:९)। - डेनिस फिशर


हमारा परमेश्वर पुनः अवसर देने वाला परमेश्वर है।

धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है। - भजन ३४:१९

बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:३२-४०
Heb 11:32  अब और क्या कहूँ क्योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
Heb 11:33 इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं प्राप्त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
Heb 11:34 आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
Heb 11:35 स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए; और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरुत्थान के भागी हों।
Heb 11:36 कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने; और कोड़े खाने; वरन बान्‍धे जाने; और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
Heb 11:37 पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
Heb 11:38  और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
Heb 11:39  संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्छी गवाही दी गई, तौभी उन्हें प्रतिज्ञा की हुई वस्तु न मिली।
Heb 11:40  क्योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।
एक साल में बाइबल: ज़कर्याह १३-१४ प्रकाशितवाक्य २१

शनिवार, 29 दिसंबर 2012

मानकस्तर


   इंटरनैट के आरंभिक दिनों में इंटरनैट के विकास करने वाले अपने अपने मानक और स्तर बनाते थे, जिसका परिणाम था गड़बड़। जो एक कंप्यूटर पर अच्छा दिखता था, वह किसी अन्य कंप्यूटर पर अस्त-व्यस्त होता था और पढ़ा नहीं जा सकता था। इसलिए लोगों ने इंटरनैट को अनियंत्रित और अस्त-व्यस्त जाल कहना आरंभ कर दिया। इस गड़बड़ी में से व्यस्थित स्वरूप को लाने के लिए विकास करने वालों ने एक दूसरे के साथ संपर्क कर के कुछ सामान्य मानकस्तर बनाए जो सबके लिए एक समान हों और सब जिनका पालन करें। इन समान रूप से लागू नियमों एवं स्तरों के अन्तर्गत कार्य करने से ही इंटरनैट पर व्याप्त गड़बड़ समाप्त हुई, अव्यवस्थित व्यवस्थित हो गया और इंटरनैट विकसित होकर सबके लिए लाभकारी बन गया।

   समाज के उत्थान और सुचारू रूप से कार्य करने तथा सब के लिए लाभकारी होने के लिए भी समान मानकस्तर आवश्यक हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम पाते हैं कि जब इस्त्राएल को परमेश्वर मिस्त्र की गुलामी से निकाल कर लाया तो उनके जीवन को व्यवस्थित रूप से व्यतीत करने के लिए कुछ नियम दिए जो सब के लिए एक समान लागू होने थे (व्यवस्थाविवरण ४:१)। यदि ये नियम ना होते तो गड़बड़ तथा अराजकता होती; परन्तु इन नियमों के कारण इस्त्राएली समाज इतना व्यवस्थित और सुचारू रूप से चलने वाला था कि यह बात वहां की अन्य जातियों में इस्त्राएल के परमेश्वर की महिमा का कारण ठहरी (व्यवस्थाविवरण ४:८)।

   आज पाप और स्वार्थ से भरे इस अव्यवस्थित संसार में जहाँ हर कोई अपनी ही चलाना चाहता है, दुसरों को नियंत्रित करके उन पर पर हावी रहना चाहता है, मसीही विश्वासी मसीह की व्यवस्था के आधीन रहते हैं (गलतियों ६:२) क्योंकि मसीह स्वयं परमेश्वर कि व्यवस्था की परिपूर्णता है (मत्ती ५:१७)। जब हम मसीह द्वारा स्थापित मानक स्तर के आधीन हो जाते हैं और जैसा परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया, वैसा ही प्रेम दूसरों के साथ भी करने लगते हैं तो ना केवल हम आपस में शांति तथा सामनजस्य से रहने लगते हैं वरन साथ ही संसार के सामने गवाही रखते हैं के हमारा उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर कितना महान और कैसा अतुल्य है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर तथा दूसरे लोगों के प्रति हमारे प्रेम के द्वारा ही लोग जानने पाएंगे कि हमारा परमेश्वर कितना महान है।

फिर कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसके पास ऐसी धर्ममय विधि और नियम हों, जैसी कि यह सारी व्यवस्था जिसे मैं आज तुम्हारे साम्हने रखता हूं? - व्यवस्थाविवरण ४:८

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ४:१-१०
Deut 4:1  अब, हे इस्राएल, जो जो विधि और नियम मैं तुम्हें सिखाना चाहता हूं उन्हें सुन लो, और उन पर चलो; जिस से तुम जीवित रहो, और जो देश तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ।
Deut 4:2  जो आज्ञा मैं तुम को सुनाता हूं उस में न तो कुछ बढ़ाना, और न कुछ घटाना; तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूं उन्हें तुम मानना।
Deut 4:3  तुम ने तो अपनी आंखों से देखा है कि बालपोर के कारण यहोवा ने क्या क्या किया; अर्थात जितने मनुष्य बालपोर के पीछे हो लिये थे उन सभों को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे बीच में से सत्यानाश कर डाला;
Deut 4:4  परन्तु तुम जो अपने परमेश्वर यहोवा के साथ लिपटे रहे हो सब के सब आज तक जीवित हो।
Deut 4:5  सुनो, मैं ने तो अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार तुम्हें विधि और नियम सिखाए हैं, कि जिस देश के अधिकारी होने जाते हो उस में तुम उनके अनुसार चलो।
Deut 4:6  सो तुम उन को धारण करना और मानना; क्योंकि और देशों के लोगों के साम्हने तुम्हारी बुद्धि और समझ इसी से प्रगट होगी, अर्थात वे इन सब विधियों को सुनकर कहेंगे, कि निश्चय यह बड़ी जाति बुद्धिमान और समझदार है।
Deut 4:7  देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं?
Deut 4:8  फिर कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसके पास ऐसी धर्ममय विधि और नियम हों, जैसी कि यह सारी व्यवस्था जिसे मैं आज तुम्हारे साम्हने रखता हूं?
Deut 4:9  यह अत्यन्त आवश्यक है कि तुम अपने विषय में सचेत रहो, और अपने मन की बड़ी चौकसी करो, कहीं ऐसा न हो कि जो जो बातें तुम ने अपनी आंखों से देखीं उन को भूल जाओ, और वह जीवन भर के लिये तुम्हारे मन से जाती रहे; किन्तु तुम उन्हें अपने बेटों पोतों को सिखाना।
Deut 4:10  विशेष कर के उस दिन की बातें जिस में तुम होरेब के पास अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने खड़े थे, जब यहोवा ने मुझ से कहा था, कि उन लोगों को मेरे पास इकट्ठा कर कि मैं उन्हें अपने वचन सुनाऊं, जिस से वे सीखें, ताकि जितने दिन वे पृथ्वी पर जीवित रहें उतने दिन मेरा भय मानते रहें, और अपने लड़के बालों को भी यही सिखाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह ९-१२ 
  • प्रकाशितवाक्य २०

शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

समीक्षा


   दिसंबर माह के अन्तिम सप्ताह में समाचार संपादक वर्ष की समीक्षा करते हैं और मुख्य घटनाओं का ब्यौरा बनाते हैं - प्रमुख व्यक्तियों की सफलताएं और असफलताएं, प्राकृतिक आपदाएं, आर्थिक चुनौतियाँ,  नेताओं, गण-मान्य तथा प्रतिभाशाली व्यक्तियों की मृत्यु इत्यादि सब उनकी समीक्षा का विषय होते हैं और सबसे अधिक आश्चर्यजनक या चौंका देने वाली बातें उनके द्वारा प्रस्तुत विवरण में प्राथमिकता पाती हैं।

   यदि आप अपने जीवन के बीते वर्ष की समीक्षा करें तो आपकी सूची में क्या आएगा? क्या अपने जीवन में घटी किसी अप्रत्याशित घटना के कारण आप ने परमेश्वर और उसके कार्यों पर कोई प्रश्नचिन्ह लगाया, या, वह घटना, आपके लिए उसकी भलाई को और भी गहरे रूप में अनुभव करने का माध्यम बनी?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन ७७ भजनकार के विलाप और अनुभव हैं। भजनकार को लगा जैसे परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया है, उसपर से अपना अनुग्रह हटा लिया है: "क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा? क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है? क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध कर के अपनी सब दया को रोक रखा है?" (भजन ७७:७-९)। परन्तु अपने दुख में भी भजनकार ने निश्चय किया कि, "मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा" (भजन ७७:११)। उसके इस निर्णय का परिणाम हुआ परमेश्वर में उसके विश्वास और आशा की पुनःस्थापना: "अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है" (भजन ७७:१४)।

   इस वर्ष की समीक्षा करते हुए अपने जीवन की मुख्य घटनाओं को लिख लें। अपनी इस समीक्षा के ब्यौरे में जीवन कि कठिनाईयों और निराशाओं को सम्मिलित करने से ना हिचकिचाएं; साथ ही उन बातों को भी स्मरण करें जिनमें आप ने परमेश्वर कि उपस्थिति अपने साथ बनी हुई अनुभव करी। आपकी समीक्षा आपको दिखाएगी कि हर कठिन परिस्थिति में परमेश्वर आपके प्रति विश्वासयोग्य और भला ही रहा है। - डेविड मैक्कैसलैंड



जीवन में आने वाली कठिनाईयाँ परमेश्वर की विश्वासयोग्यता अनुभव करने के अवसर होते हैं।

मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा। - भजन ७७:११

बाइबल पाठ: भजन ७७:१-१४
Ps 77:1  मैं परमेश्वर की दोहाई चिल्ला चिल्लाकर दूंगा, मैं परमेश्वर की दोहाई दूंगा, और वह मेरी ओर कान लगाएगा।
Ps 77:2  संकट के दिन मैं प्रभु की खोज में लगा रहा; रात को मेरा हाथ फैला रहा, और ढीला न हुआ, मुझ में शांति आई ही नहीं।
Ps 77:3  मैं परमेश्वर का स्मरण कर कर के करहाता हूं; मैं चिन्ता करते करते मूर्छित हो चला हूं। (सेला)
Ps 77:4  तू मुझे झपक्की लगने नहीं देता; मैं ऐसा घबराया हूं कि मेरे मुंह से बात नहीं निकलती।
Ps 77:5  मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है।
Ps 77:6  मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं:
Ps 77:7  क्या प्रभु युग युग के लिये छोड़ देगा; और फिर कभी प्रसन्न न होगा?
Ps 77:8  क्या उसकी करूणा सदा के लिये जाती रही? क्या उसका वचन पीढ़ी पीढ़ी के लिये निष्फल हो गया है?
Ps 77:9  क्या ईश्वर अनुग्रह करना भूल गया? क्या उसने क्रोध कर के अपनी सब दया को रोक रखा है? (सेला)
Ps 77:10  मैने कहा यह तो मेरी दुर्बलता ही है, परन्तु मैं परमप्रधान के दाहिने हाथ के वर्षों को विचारता हूं।
Ps 77:11  मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा।
Ps 77:12  मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।
Ps 77:13  हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है?
Ps 77:14  अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह ५-८ 
  • प्रकाशितवाक्य १९

गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

वास्तविक स्वामित्व


   एक चर्च के बाहर गाड़ियां खड़ी करने के लिए स्थान की कमी होने लगी। यह चर्च एक दुकान से सटा हुआ था और वह दुकान इतवार वाले दिन बन्द रहती थी। इसलिए चर्च के एक सदस्य ने जाकर दुकान के मालिक से अनुमति चाही कि वे इतवार को आराधना के समय उसकी दुकान के आगे गाड़ियाँ खड़ी कर सकें। दुकान का मालिक मान गया और बोला, "कोई समस्या नहीं; वर्ष के ५१ इतवार आप गाड़ियाँ दुकान के सामने खड़ी कर सकते हैं किंतु ५२वें इतवार को इसकी अनुमति नहीं होगी।" चर्च का वह सदस्य इस अनुमति के लिए दुकानदार का आभारी हुआ, किंतु उत्सुकतावश दुकान के मालिक से पूछा ५२वें इतवार को क्यों नहीं? दुकान मालिक ने मुसकुराते हुए उत्तर दिया, "जिससे आप लोगों को स्मरण रहे कि वह स्थान आपके चर्च का नहीं है।"

   परमेश्वर जो हमें शारीरिक और आत्मिक आशीर्वाद देता है, उन्हें अपना मान लेना या उनपर अपना अधिकार मान लेना हमारे लिए बहुत सरल होता है। इसीलिए हमें थोड़ा ठहरकर परमेश्वर के वचन बाइबल की बात को बार बार स्मरण करते रहना चाहिए कि हमारी प्रत्येक बात का वास्तविक स्वामी परमेश्वर ही है: "हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है" (१ इतिहास २९:११)। हमारे शरीर भी हमारे अपने नहीं हैं: "क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्‍दिर है जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो। क्योंकि दाम देकर मोल लिए गए हो, इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो" (१ कुरिन्थियों ६:१९-२०)।

   १ तीमुथियुस ६:१७ हमें स्मरण दिलाता है कि "इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्‍तु परमेश्वर पर; जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।" परमेश्वर ने भरपूरी से हमें अपनी भलाई और भली बातें दीं हैं; जो कुछ उसने हमें दिया है यदि उस सब के वास्तविक स्वामी के स्वामित्व को पहचानते हुए उसके द्वारा दी गई इन आशीषों का प्रयोग तथा उपयोग उसकी महिमा के लिए करेंगे, और वह हमें फिर और भी अधिक आशीषों की भरपूरी देगा। - सिंडी हैस कैसपर


परमेश्वर हमें आशीषें देता है जिससे हम उसे महिमा दे सकें।

क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुतांए, क्‍या प्रधानताएं, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं। - कुलुस्सियों १:१६

बाइबल पाठ: भजन ९५:१-७
Psa 95:1  आओ हम यहोवा के लिये ऊंचे स्वर से गाएं, अपने उद्धार की चट्टान का जयजयकार करें! 
Psa 95:2  हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएं, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें! 
Psa 95:3  क्योंकि यहोवा महान ईश्वर है, और सब देवताओं के ऊपर महान राजा है। 
Psa 95:4  पृथ्वी के गहिरे स्थान उसी के हाथ में हैं; और पहाड़ों की चोटियां भी उसी की हैं। 
Psa 95:5  समुद्र उसका है, और उसी ने उसको बनाया, और स्थल भी उसी के हाथ का रख है।
Psa 95:6  आओ हम झुककर दण्डवत् करें, और अपने कर्ता यहोवा के साम्हने घुटने टेकें! 
Psa 95:7  क्योंकि वही हमारा परमेश्वर है, और हम उसकी चराई की प्रजा, और उसके हाथ की भेड़ें हैं। भला होता, कि आज तुम उसकी बात सुनते!

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह १-४ 
  • प्रकाशितवाक्य १८

बुधवार, 26 दिसंबर 2012

प्रतिक्रिया


   मेरी पत्नि मुझे बता रही थी कि उसका दिन कैसा रहा; उसने दिन में घटित एक रोचक घटना भी बताई। हमारी दो वर्षीय पोती एलियाना हमारे पास आई हुई थी और खिलौनों से खेल रही थी। खेलते हुए जब एलियाना ने घर के एक अन्य भाग में जाना चाहा तो उसकी दादी अर्थात मेरी पत्नि ने उससे कहा, "एलियाना, पहले अपने खिलौने संभाल कर रख दो, फिर जाना।" बिना क्षण भर भी रुके या सोचे, तपाक से एलियाना का चौंका देने वाला उत्तर आया, "अभी मेरे पास समय नहीं है!" भला वह दो वर्ष की बच्ची किस बात में इतनी व्यस्त रही होगी कि उसके पास समय ना हो? वास्तविक बात समय का ना होना नहीं वरन आज्ञाकारिता की इच्छा ना होना थी जिसके लिए एलियाना ने समय को बहाना बना दिया।

   मैं सोचता हूँ कि ऐसे ही कई दफा परमेश्वर भी हमारी भलाई और सुरक्षा के लिए उसके द्वारा दी हुई आज्ञाओं के प्रति हमारी अनाज्ञाकारिता और फिर बहानेबाज़ी की प्रतिक्रीयाओं से ऐसे ही विस्मित होता होगा।

   उदहरणस्वरूप, विचार कीजिए, प्रभु यीशु कहता है: "हे सब बोझ से दबे और थके लोगों मेरे पास आओ, मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती ११:२८); और हम प्रत्युत्तर में कहते हैं, "मेरी समस्याएं अनेक और परिस्थितियाँ बहुत विषम हैं, मुझे स्वयं ही इनका समाधान खोज लेने दें!" परमेश्वर कहता है: "शांत हो जाओ और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ (भजन ४६:१०); और हमारी प्रतिक्रीया होती है, "मैं बहुत व्यस्त हूँ, अभी मैं शांत नहीं हो सकता; परमेश्वर के लिए समय नहीं दे सकता!" परमेश्वर कहता है: "पवित्र बनो क्योंकि तुम्हारा बुलाने वाला पवित्र है" (१ पतरस १:१६), और हम उत्तर देते हैं, "लेकिन संसार और संसार की बातों में तो इतना मज़ा है; थोड़ा आनन्द इनका भी ले लेना चाहिए!" इन सब और ऐसी ही अन्य बातों में परमेश्वर हमारी प्रतिक्रिया के बारे में क्या सोचता होगा?

   परमेश्वर ने कह दिया है; अब उसकी आज्ञाकारिता ही एकमात्र उचित प्रतिक्रिया है उसके प्रति अपने प्रेम और आदर को दिखाने की। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर की आज्ञाकारिता के लिए सर्वोत्तम प्रेर्णा परमेश्वर को प्रसन्न रखने की हमारी इच्छा है।

इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है... - व्यवस्थाविवरण ३०:२०

बाइबल पाठ: याकूब १:२१-२७
Jas 1:21   इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
Jas 1:22  परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
Jas 1:23  क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
Jas 1:24  इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
Jas 1:25  पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
Jas 1:26   यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 
Jas 1:27  हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों ओर विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल: 
  • हाग्गै १-२ 
  • प्रकाशितवाक्य १७

मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

विस्मयकारी


   परमेश्वर के वचन बाइबल के मत्ती तथा लूका रचित सुसमाचारों में लिखी गई प्रभु यीशु के जन्म की गाथा से हम इतने परिचित हो गए हैं कि उसकी वास्तविकता और महत्व हमारे लिए बहुत साधारण रह गया है। जो कुछ उस समय पर हुआ उस पर ज़रा विचार कीजिए: एक स्वर्गदूत एक कुँवारी कन्या, मरियम, से आकर कहता है कि वह पवित्र आत्मा की सामर्थ से गर्भवती होगी (लूका १:२६-३८); फिर वह स्वर्गदूत उस कन्या के मंगेतर, यूसुफ, से कहता है कि जाकर उसे ब्याह लाए और होने वाले बच्चे का नाम यीशु रखे क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा (मत्ती १:२१)। रात में अपनी भेड़ों की रखवाली कर रहे चरवाहों को स्वर्गदूतों का समूह दिखाई देता है और बेतलेहम में जगत के उद्धारकर्ता मसीह यीशु के जन्म का समाचार देता है (लूका २:११)। सैंकड़ों मील की दूरी तय करके ज्योतिषी आकर उस राजा होने वाले बालक का पता पूछते हैं कि उसे दण्डवत कर सकें (मत्ती २:२)। सब कुछ कितना विस्मयकारी है!

   लेकिन इस से भी अधिक विस्मयकारी वह प्रतिक्रीया है जो इन सभी पात्रों ने अपने तक पहुँचे परमेश्वर के सन्देश को दी। मरियम, यूसुफ, चरवाहों और ज्योतिषियों ने ठीक वही किया जैसा उन से कहा गया था। मरियम ने अपने आप को परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर दिया; यूसुफ उसे अपनी पत्नि बनाकर अपने घर ले आया; चरवाहे अपनी भेड़ों को छोड़कर शिशु यीशु को ढ़ूँढ़ने बेतलेहम चले गए और ज्योतिषी एक तारे के पीछे पीछे चल निकले। इनमें से किसी को भी पता नहीं था कि अब इसके बाद क्या होगा, इन सब ने केवल परमेश्वर में विश्वास के सहारे अपने कदम बढ़ा लिए कि उन से कहे गए को पूरा करें। अति विस्मयकारी!

   विश्वास में होकर परमेश्वर की आज्ञा मानने वाले इन लोगों के नाम २००० वर्ष से भी अधिक से लेकर आजतक संसार भर में आदर के साथ लिए जाते हैं, जो आदर और ख्याति इन्होंने विश्वास के एक कदम द्वारा इस पार्थिव संसार में प्राप्त करी है वह संसार के सब से वैभवशाली और पराक्रमी अधिपति भी अपने सारे सामर्थ और जीवन काल की मेहनत से कभी अर्जित नहीं कर पाए; लेकिन इससे भी बढ़कर बात तो यह है कि इनके नाम और काम परमेश्वर के अटल, अविनाशी और अमिट वचन में सदा के लिए आदर के साथ दर्ज हो गए हैं जहाँ वे आते काल और समयों में भी कीर्ति पाते रहेंगे।

   इस क्रिसमस के समय हमारे विश्वास की दशा कैसी है? क्या अनिश्चितता के समयों और अभिभूत कर देने वाली परिस्थितियों में मैं और आप भी परमेश्वर पर ऐसा ही विश्वास दिखाएंगे और उसके आज्ञाकारी होंगे? जब हम परमेश्वर के आज्ञाकारी बने रहते हैं, समयों और हालातों पर नहीं वरन अपनी नज़रें परमेश्वर पर लगाए रहते हैं तो परिणाम वास्तव में विस्मयकारी होते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


विश्वास यात्रा का लक्ष्य नहीं जानता किंतु यात्रा पर अगुवाई करने वाले को जानता है, उसे मानता है और उससे प्रेम रखता है। - चेम्बर्स

सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। - मत्ती १:२४

बाइबल पाठ: मत्ती १:१८-२५
Mat 1:18  अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। 
Mat 1:19  सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की। 
Mat 1:20  जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्‍वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्‍तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्‍योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। 
Mat 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्‍योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। 
Mat 1:22  यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था वह पूरा हो। 
Mat 1:23  कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है परमेश्वर हमारे साथ। 
Mat 1:24 सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। 
Mat 1:25  और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उस ने उसका नाम यीशु रखा।

एक साल में बाइबल: 
  • सपन्याह १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य १६

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

पृथ्वी पर शान्ति?


   मैं स्वर्गदूतों दोषी ठहराना नहीं चाहता और ना ही उनके साथ कोई बहस करना चाहता हूँ, किंतु यह भी सच है कि मैं अकसर सोचता रहता हूँ कि पृथ्वी पर जिस शान्ति का वायदा स्वर्गदूतों ने प्रभु यीशु के जन्म के समय चरवाहों से किया था उसका क्या हुआ? प्रभु यीशु के जन्म के पश्चात पिछले २००० वर्षों से शान्ति इस पृथ्वी पर एक दुर्लभ बात ही रही है। तब से अब तक अनेक युद्ध अनेक स्थान पर लड़े गए और अनगिनित निर्दोष लोग मारे गए; पारिवारिक कलह और अशान्ति सारे संसार में एक बढ़ता हुआ रोग है जो परिवारों को बरबाद कर रहा है तथा जीवनों में अशान्ति फैला रहा है। समाज में तलाक की संख्या बढ़ती  ही जा रही है, प्रभु की मण्डलियों में भी विभाजन बढ़ते जा रहे हैं और हमारे अशान्त मनों में शान्ति एक सपने की तरह लगती है।

   वह वायदा करी गई शान्ति आखिर है कहाँ? थोड़ा सा विचार और मनन करें तो समझ में आता है कि प्रभु यीशु अपने साथ पृथ्वी पर शान्ति के लिए प्रत्येक आवश्यक बात लेकर आए थे। उन्होंने अपने चेलों को आश्वस्त किया: "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (यूहन्ना १४:२७)। उन्होंने शान्ति के सिद्धांत सिखाए और बताए: लोग अपने पड़ौसियों से अपने समान प्रेम रखें; उन्होंने सिखाया कि हम अपने सताने वालों की ओर अपना दुसरा गाल भी फेर दें, उनके साथ अतिरिक्त मील तक जाएं, लालच से परे रहें, एक दूसरे की कमज़ोरियों को सह लें, और एक दूसरे की सेवा और एक दूसरे से वैसे ही प्रेम करें जैसे प्रभु यीशु ने हमसे किया है। यह सब करने की सामर्थ देने के लिए उन्होंने अपने प्रत्येक विश्वासी को अपना आत्मा प्रदान किया जो सदा उनके साथ रहता है।

   सच तो यह है कि इस शान्ति को लाना प्रभु ने हमारे ही हाथों में छोड़ा है। परमेश्वर के वचन बाइबल से भी हम यही सीखते हैं; प्रेरित पौलुस ने रोमियों के नाम अपनी पत्री में लिखा: "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों १२:१८)। पृथ्वी पर शान्ति की विधि प्रभु यीशु ने सिखाई है, उसके लिए आवश्यक सामर्थ भी प्रदान करी है, लेकिन उसे कार्यान्वित करना हमारे ही हाथों में है।

   इस क्रिसमस पर जब हम शान्ति के राजकुमार प्रभु यीशु के जन्म का उत्सव मनाते हैं तो पृथ्वी के लोगों को अपने जीवनों द्वारा व्यावाहरिक रूप से प्रभु यीशु की शान्ति की भेंट प्रदान करें। - जो स्टोवैल


जब हम परमेश्वर के साथ मेल और शान्ति को अपने जीवनों में स्थान देंगे तो उसे दूसरों के साथ भी बांटने पाएंगे।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना १४:२७

बाइबल पाठ: रोमियों १२:९-२१
Rom 12:9  प्रेम निष्‍कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। 
Rom 12:10  भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्‍पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। 
Rom 12:11  प्रयत्‍न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो। 
Rom 12:12  आशा में आनन्‍दित रहो; क्‍लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो। 
Rom 12:13   पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो। 
Rom 12:14   अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Rom 12:15  आनन्‍द करने वालों के साथ आनन्‍द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Rom 12:16  आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्‍तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्‍टि में बुद्धिमान न हो। 
Rom 12:17  बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्‍ता किया करो। 
Rom 12:18   जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Rom 12:19  हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्‍तु क्रोध को अवसर दो, क्‍योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Rom 12:20  परन्‍तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्‍योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Rom 12:21  बुराई से न हारो परन्‍तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • हबक्कुक १-३ 
  • प्रकाशितवाक्य १५