ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

आशावान


   मर्ले ट्रैविस द्वारा लिखित और टेनिसी अर्नी फोर्ड द्वारा रिकॉर्ड किया गया गीत "स्किस्टीन टन्स" १९५० के दशक के मध्य में अमेरिका में बहुत लोकप्रीय हुआ था, क्योंकि उस समय के लोगों ने इस गीत में अपनी दशा को देखा। यह गीत कोयले की खान में काम करने वाले मज़दूर का विलाप था जो परिस्थितियों में फंसा हुआ था और चाहे जितनी भी मेहनत करे, अपनी परिस्थितियों को बदलने में और कोयला कंपनी के चंगुल से निकल पाने में असमर्थ था। उन दिनों में कोयला खानों में काम करने वाले मज़दूर कोयला कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए गए घरों ही में रहते थे और कंपनी द्वारा चलाई जा रही दुकानों से ही अपनी आवश्यकता का सामान खरीद सकते थे क्योंकि उनका वेतन उन्हें कंपनी की पर्चीयों के रूप में दिया जाता था जो कंपनी की दुकानों पर ही वैध होती थीं। इस गीत में मज़दूर विलाप करते हुए कहता है कि यदि मुझे स्वर्ग से भी बुलावा आए तो मैं नहीं जा पाऊँगा क्योंकि मेरे प्राण की मालिक भी कंपनी ही है।

   इस गीत में लिखी गई घोर निराशा को समझने के द्वारा हम उन इस्त्राएलियों के मनों के भाव को समझ सकते हैं जो ४०० वर्ष से मिस्त्र की गुलामी झेल रहे थे। जब मूसा ने उन इस्त्राएलियों को बताया कि परमेश्वर उन्हें गुलामी से छुड़ाने पर है तो वे इस बात पर विश्वास नहीं कर सके क्योंकि उनके मन गुलामी के अत्याचारों के कारण बेचैन थे (निर्गमन ६:९)। लेकिन जो इसत्राएली अपने लिए कर पाने में असमर्थ थे, उअनके लिए वह परमेश्वर ने कर दिखाया, और चमत्कारिक रीति से उन्हें मिस्त्र की गुलामी से छुड़ा लिया। इस्त्राएल का परमेश्वर के सामर्थ से इस प्रकार दासत्व से छुड़ाया जाना प्रभु यीशु द्वारा मनुष्यों को पाप से मिलने वाले छुटकारे का प्रतिरूप था, एक ऐसा छुटकारा जो कोई भी मनुष्य अपने आप अपनी किसी भी सामर्थ अथवा प्रयास से कभी प्राप्त नहीं कर सकता: "क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?" (रोमियों ५:६, ९)

   जब जीवन अपने सब से निचले स्तर पर हो और संसार में कहीं कोई आशा नज़र नहीं आ रही हो, परिस्थितियों से पार पाने का कोई मार्ग सूझ नहीं पड़ता हो, मसीही विश्वासी तब भी आशावान रह सकते हैं क्योंकि हमारे परमेश्वर पिता का अद्भुत अनुग्रह हमारे साथ सदा बना रहता है और वह उन्हें हर परिस्थिति में सुरक्षित रखने और उससे पार निकाल लाने में सक्षम और विश्वासयोग्य है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


जिसकी आशा सच्चे और जीवते परमेश्वर पर है वह कभी आशारहित नहीं है।

इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा - निर्गमन ६:६

बाइबल पाठ: निर्गमन ६:१-१३
Exodus 6:1 तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन ने क्या करूंगा; जिस से वह उन को बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।।
Exodus 6:2 और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं।
Exodus 6:3 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ।
Exodus 6:4 और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी हो कर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं।
Exodus 6:5 और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है।
Exodus 6:6 इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा,
Exodus 6:7 और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया।
Exodus 6:8 और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचाकर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं।
Exodus 6:9 और ये बातें मूसा ने इस्राएलियों को सुनाईं; परन्तु उन्होंने मन की बेचैनी और दासत्व की क्रूरता के कारण उसकी न सुनी।।
Exodus 6:10 तब यहोवा ने मूसा से कहा,
Exodus 6:11 तू जा कर मिस्र के राजा फिरौन से कह, कि इस्राएलियों को अपने देश में से निकल जाने दे।
Exodus 6:12 और मूसा ने यहोवा से कहा, देख, इस्राएलियों ने मेरी नहीं सुनी; फिर फिरौन मुझ भद्दे बोलने वाले की क्योंकर सुनेगा?
Exodus 6:13 और यहोवा ने मूसा और हारून को इस्राएलियोंऔर मिस्र के राजा फिरौन के लिये आज्ञा इस अभिप्राय से दी कि वे इस्राएलियों को मिस्र देश से निकाल ले जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १५-१६ 
  • मरकुस ६:१-२९

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

अनन्त शांति या पीड़ा


   यह विचार कि वह दिन आएगा जब हम परमेश्वर की उपस्थिति में खड़े होंगे और अनन्त काल के लिए उसकी संगति का आनन्द लेंगे एक ऐसा आश्वासन है जो जीवन के वर्तमान समस्याओं पर विजयी होने में हमारी सहायता करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में कई भजन हैं जो इस बात को लेकर लिखे गए हैं, जैसे भजन १६, १७, ४९, ७१, ७३ आदि।

   भजन ७१ को पढ़ने से लगता है कि भजनकार को कई कठिन कष्ट उठाने पड़े थे (पद २०) लेकिन उसके मन में सदा ही यह बात बनी हुई थी कि परमेश्वर उसे फिर से "जिलाएगा"। मूल भाषा में "जिलाएगा" के लिए जो शब्द प्रयोग हुआ है उसका अर्थ है मृत्यु से पुनः जीवित करना। भजनकार आगे कहता है, "तू मेरी बड़ाई को बढ़ाएगा, और फिर कर मुझे शान्ति देगा" (पद २१)। भजनकार को विश्वास था कि उसके कष्टों का अन्त अवश्य ही होगा, यदि इस जीवन में नहीं तो मृत्योप्रांत।

   संभवतः परमेश्वर के अलावा और कोई उन कष्टों को नहीं जानता जिनमें से होकर आप निकले हैं; लेकिन आश्वस्त रहिए, यदि आप परमेश्वर कि सन्तान हैं तो एक समय वह आएगा जब आपका स्वर्गीय पिता आपकी ’बड़ाई को बढ़ाएगा’ अर्थात आपको महिमा के वस्त्र धारण करवाएगा, आपको ’शान्ति देगा’ - आप उसकी उपस्थिति में बने रहेंगे से और उसके प्रेम से तृप्त होते रहेंगे। रिचर्ड बैक्सटर ने इस संदर्भ में लिखा: "वह कैसा धन्य दिन होगा जब मैं तट पर खड़ा होकर उस प्रचण्ड उफनते समुद्र को देखुंगा जिसके पार मेरा स्वर्गीय पिता मुझे सुरक्षित उतार लाया है; जब मैं अपने सभी दुख, व्यथा, भय और आंसुओं पर पुनर्विचार करुंगा और उस बेबयान महिमा को पाऊँगा जो इन सब बातों का अन्तफल है।"

   लेकिन यह विश्वास और इस अद्भुत शांति का भरोसा उन्हीं को है जो प्रभु यीशु में स्वेच्छा से किए गए विश्वास और समर्पण के साथ अपने पापों से क्षमा प्राप्त कर के परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार प्राप्त कर चुके हैं। इस जीवन में जिनके पाप क्षमा नहीं हुए मृत्योप्रांत वे किसी शान्ति में नहीं वरन सदा काल के लिए अत्यन्त कष्ट में चले जाएंगे।

   अनन्त शान्ति या अनन्त पीड़ा, निर्णय आपका है - परमेश्वर आपको वही देगा जो इस जीवन में आप अपने लिए चुन लेंगे। - डेविड रोपर


जब परमेश्वर आँसुओं को पोंछेगा, तब कराहना अनन्त आराधना में बदल जाएगा।

तू ने तो हम को बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परन्तु अब तू फिर से हम को जिलाएगा; और पृथ्वी के गहिरे गड़हे में से उबार लेगा। - भजन ७१:२०

बाइबल पाठ: भजन ७१
Psalms 71:1 हे यहोवा मैं तेरा शरणागत हूं; मेरी आशा कभी टूटने न पाए!
Psalms 71:2 तू तो धर्मी है, मुझे छुड़ा और मेरा उद्धार कर; मेरी ओर कान लगा, और मेरा उद्धार कर!
Psalms 71:3 मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं; तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है।
Psalms 71:4 हे मेरे परमेश्वर दुष्ट के, और कुटिल और क्रूर मनुष्य के हाथ से मेरी रक्षा कर।
Psalms 71:5 क्योंकि हे प्रभु यहोवा, मैं तेरी ही बाट जोहता आया हूं; बचपन से मेरा आधार तू है।
Psalms 71:6 मैं गर्भ से निकलते ही, तुझ से सम्भाला गया; मुझे मां की कोख से तू ही ने निकाला; इसलिये मैं नित्य तेरी स्तुति करता रहूंगा।
Psalms 71:7 मैं बहुतों के लिये चमत्कार बना हूं; परन्तु तू मेरा दृढ़ शरण स्थान है।
Psalms 71:8 मेरे मुंह से तेरे गुणानुवाद, और दिन भर तेरी शोभा का वर्णन बहुत हुआ करे।
Psalms 71:9 बुढ़ापे के समय मेरा त्याग न कर; जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे।
Psalms 71:10 क्योंकि मेरे शत्रु मेरे विषय बातें करते हैं, और जो मेरे प्राण की ताक में हैं, वे आपस में यह सम्मति करते हैं, कि
Psalms 71:11 परमेश्वर ने उसको छोड़ दिया है; उसका पीछा कर के उसे पकड़ लो, क्योंकि उसका कोई छुड़ाने वाला नहीं।
Psalms 71:12 हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह; हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर!
Psalms 71:13 जो मेरे प्राण के विरोधी हैं, उनकी आशा टूटे और उनका अन्त हो जाए; जो मेरी हानि के अभिलाषी हैं, वे नामधराई और अनादर में गड़ जाएं।
Psalms 71:14 मैं तो निरन्तर आशा लगाए रहूंगा, और तेरी स्तुति अधिक अधिक करता जाऊंगा।
Psalms 71:15 मैं अपने मुंह से तेरे धर्म का, और तेरे किए हुए उद्धार का वर्णन दिन भर करता रहूंगा, परन्तु उनका पूरा ब्योरा जाना भी नहीं जाता।
Psalms 71:16 मैं प्रभु यहोवा के पराक्रम के कामों का वर्णन करता हुआ आऊंगा, मैं केवल तेरे ही धर्म की चर्चा किया करूंगा।
Psalms 71:17 हे परमेश्वर, तू तो मुझ को बचपन ही से सिखाता आया है, और अब तक मैं तेरे आश्चर्य कर्मों का प्रचार करता आया हूं।
Psalms 71:18 इसलिये हे परमेश्वर जब मैं बूढ़ा हो जाऊं और मेरे बाल पक जाएं, तब भी तू मुझे न छोड़, जब तक मैं आने वाली पीढ़ी के लोगों को तेरा बाहुबल और सब उत्पन्न होने वालों को तेरा पराक्रम सुनाऊं।
Psalms 71:19 और हे परमेश्वर, तेरा धर्म अति महान है। तू जिसने महाकार्य किए हैं, हे परमेश्वर तेरे तुल्य कौन है?
Psalms 71:20 तू ने तो हम को बहुत से कठिन कष्ट दिखाए हैं परन्तु अब तू फिर से हम को जिलाएगा; और पृथ्वी के गहिरे गड़हे में से उबार लेगा।
Psalms 71:21 तू मेरी बड़ाई को बढ़ाएगा, और फिर कर मुझे शान्ति देगा।
Psalms 71:22 हे मेरे परमेश्वर, मैं भी तेरी सच्चाई का धन्यवाद सारंगी बजाकर गाऊंगा; हे इस्राएल के पवित्र मैं वीणा बजा कर तेरा भजन गाऊंगा।
Psalms 71:23 जब मैं तेरा भजन गाऊंगा, तब अपने मुंह से और अपने प्राण से भी जो तू ने बचा लिया है, जयजयकार करूंगा।
Psalms 71:24 और मैं तेरे धर्म की चर्चा दिन भर करता रहूंगा; क्योंकि जो मेरी हानि के अभिलाषी थे, उनकी आशा टूट गई और मुंह काले हो गए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १२-१४ 
  • मरकुस ५:२१-४३

रविवार, 24 फ़रवरी 2013

वास्तविक महत्व


   कुछ वर्ष पहले मेरा एक मित्र जाने माने जलपोत टाईटैनिक के अवशेषों की प्रदर्शनी देखने गया। प्रदर्शनी देखने आए प्रत्येक दर्शक को टाईटैनिक के टिकिट की प्रतिलिपि दी गई और प्रत्येक टिकिट पर उस जलपोत पर यात्रा करने वाले वास्तविक यात्रियों अथवा कर्मचारियों में से एक का नाम लिखा था। दर्शक जब वहाँ टाईटैनिक से एकत्रित सभी विविध वस्तुओं को देख चुके तो अन्त में उन्हें एक सूची पटल के समक्ष ला कर खड़ा किया गया। उस सूची पटल पर टाईटैनिक में सवार प्रत्येक व्यक्ति - यात्री अथवा कर्मचारी, का नाम लिखा हुआ था साथ ही यह भी वह किस श्रेणी में यात्री था। दर्शक वहाँ से देख सकते थे कि वे किस के नाम का टिकिट ले कर प्रदर्शनी देख रहे थे। मेरे मित्र ने एक और बात पर भी ध्यान दिया कि उस सूची पटल पर उन नामों को विभाजित करने वाली एक लाल रेखा थी - रेखा के ऊपर उन के नाम लिखे थे जो ’बच’ गए और रेखा के नीचे उनके नाम जो ’जाते रहे’ अर्थात उस दुर्घटना में मर गए।

   इस बात की पृथ्वी पर के हमारे जीवन के साथ समानन्तर तुलना गहन है। जैसे टाईटैनिक जलपोत, जिसके लिए कहा जाता था कि वह डूब नहीं सकता, का एकाएक और अनेपक्षित अन्त हो गया, इस पृथ्वी और संसार के प्रत्येक जन का एकाएक और अनेपक्षित अन्त निर्धारित है। कोई नहीं जानता कि किसे कब और कैसे पृथ्वी से जाना होगा। महत्व इस बात का नहीं है कि इस जीवनकाल में हम किस श्रेणी के यात्री हैं, वास्तविक महत्व इस बात का है कि पार्थिव जीवन समाप्त होने पर हम कहाँ होंगे - बचे हुओं में या उनमें जो अनन्त विनाश में ’जाते रहे’!

   प्रभु यीशु ने कहा: "यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा?" (मत्ती १६:२६) - यह एक बहुत गंभीर तथा गहन विचारयोग्य प्रश्न है। संसार, संसार की वस्तुएं, संसार की उपलब्धियाँ, संसार का यश, दौलत और बातें - सब यहीं संसार में ही छूट जाएंगी, अगर कुछ साथ जाएगा तो वह है कि हमने पापों की क्षमा प्राप्त कर ली थी कि नहीं; और यही एक बात निर्धारित करेगी कि हम अनन्त काल कहाँ बिताएंगे - स्वर्ग में परमेश्वर के साथ अथवा परमेश्वर से सदा सदा के लिए पृथक होकर नर्क की भयंकर पीड़ा में।

   हो सकता है कि आपने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त कर लिया हो, पर आपके साथ के अन्य लोगों का क्या हाल है? इधर-उधर की और नाशमान संसार कि व्यर्थ बातों की बजाए क्या आपने उनसे उनके अन्तिम गन्तव्य के बारे में बात की? क्या वे संसार के सभी लोगों के लिए परमेश्वर की ओर से प्रभु यीशु में सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के बारे में जानते हैं? क्या आपने उन्हें इस बारे में बताया है?- जो स्टोवैल


अनन्त के संदर्भ में संसार की उपलब्धियाँ नहीं मसीह यीशु पर विश्वास महत्वपूर्ण है।

और उसने हमें आज्ञा दी, कि लोगों में प्रचार करो; और गवाही दो, कि यह वही है; जिसे परमेश्वर ने जीवतों और मरे हुओं का न्यायी ठहराया है। उस की सब भविष्यद्वक्ता गवाही देते हें, कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी। - प्रेरितों १०:४२-४३

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१-१६
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती ९-११ 
  • मरकुस ५:१-२०

शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

सृष्टि


   क्या आपने कभी सृष्टि की विविधता पर कुछ विचार किया है? परमेश्वर की यह अद्भुत सृष्टि अद्भुत परमेश्वर का बयान करती है: "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है" (भजन १९:१)। परमेश्वर के वचन बाइबल में एक धर्मी जन अय्युब की शैतान द्वारा परीक्षा और परमेश्वर का अय्युब को परीक्षा से निकालने का वृतांत है। अय्युब का विश्वास था कि सृष्टि सृष्टिकर्ता का बयान करती है: "पशुओं से तो पूछ और वे तुझे दिखाएंगे; और आकाश के पक्षियों से, और वे तुझे बता देंगे। पृथ्वी पर ध्यान दे, तब उस से तुझे शिक्षा मिलेगी; ओर समुद्र की मछलियां भी तुझ से वर्णन करेंगी। कौन इन बातों को नहीं जानता, कि यहोवा ही ने अपने हाथ से इस संसार को बनाया है। उसके हाथ में एक एक जीवधारी का प्राण, और एक एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है" (अय्युब १२:७-१०)। जब अय्युब के मन में शंकाएं उठती हैं और वह परमेश्वर से प्रश्न करता है तो परमेश्वर पुनः उसका ध्यान अपनी सृष्टि तथा सृष्टि की विविधता की ओर ले जाता है, और सृष्टि में विद्यमान विलक्षण बातों को उसके सामने रखता है। अय्युब ३९:१३-१८ में परमेश्वर अय्युब को शुतुर्मुर्ग के बारे में बताता है, और कहता है विचार कर कि यद्यपि वह अण्डे देती है किंतु सेती नहीं वरन रेत में गरम होने को छोड़ देती है जहाँ वे किसी के भी पाँव के नीचे आ सकते हैं; यद्यपि वह पक्षी है परन्तु उड़ नहीं सकती किंतु घोड़े से भी तेज़ भाग लेती है। इसी प्रकार परमेश्वर अय्युब के सामने अपने द्वारा बनाए अनेक जीव-जन्तुओं का उदाहरण रखता है कि उसका विश्वास सृष्टिकर्ता परमेश्वर पर पुनः स्थापित हो सके।

   जीव-विज्ञान भी हमें परमेश्वर कि इस विलक्षण सृष्टि की बातें बताता है - एक बहुत ही अद्भुत जीव है अफ्रीका का बॉम्बार्डियर बीटल। इस बीटल के शरीर के पिछले भाग में दो छोटी टंकियां होती हैं जिनमें वह दो अलग अलग रसायन बना कर जमा रखे रहता है - हाइड्रोजन पेरोक्साइड तथा हाइड्रोक्विनोन। ये दोनो रसायन जब तक अलग अलग हैं तो हानिरहित हैं किंतु मिश्रित होने पर विस्फोटक होते हैं। बीटल के पिछले भाग में एक विशेष नली भी है जहाँ ये दोनो रसायन मिलाए जाते हैं और अपने शत्रुओं से बचने के लिए यह बीटल उन दोनो रसायनों को उस नली में मिला कर फिर उन्हें बन्दूक के समान शत्रु की ओर दाग़ता है जिससे शत्रु अन्धा हो जाता है। बीटल अपनी इस ’बन्दूक’ से यह ’गोली’ चलाने का कार्य बहुत तेज़ी से कर सकता है और अपनी ’बन्दूक’ को किसी भी दिशा में मोड़ भी सकता है।

   यह कैसे संभव हुआ कि बुद्धिहीन शुतुर्मुर्ग जो अपने अण्डों की भी ठीक से देखभाल नहीं कर सकती, वह अभी भी पृथ्वी पर बनी हुई और इस छोटे से कीड़े को जीवित रहने के लिए इतनी जटिल रासायनिक क्रिया को संभालना और प्रयोग करना पड़ता है? यह इसलिए संभव है क्योंकि परमेश्वर की सृष्टिसामर्थ अपरिमित है, वह अद्भुत और विलक्षण सृष्टिकर्ता है। जैसे भजनकार का कथन है: "उसने आज्ञा दी और वे रचे गए" (भजन १४८:५); इसीलिए भजनकार इस भजन में समस्त सृष्टि को परमेश्वर की वास्तविकता को पहचानने और उसकी स्तुति करने को कहता है।

   मैं और आप भी उसी अद्भुत परमेश्वर की विलक्षण सृष्टि हैं और वह हम से बहुत प्रेम करता है, हमारी संगति का इच्छुक है और नहीं चाहता कि हम अपने पापों में नाश हो जाएं, वरन "वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें" (१ तिमुथियुस २:४)। इसीलिए उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार में भेजा जिससे वह सब मनुष्यों के पापों के बोझ को उठा ले और उन्हें उद्धार का मार्ग दे दे। अब परमेश्वर का सारी सृष्टि के सभी मनुष्यों के लिए खुला निमंत्रण है कि वे स्वेच्छा से आएं और प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार को पाएं।

   क्या आपने उसके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है? - डेव एगनर


समस्त सृष्टि एक सिद्ध सृष्टिकर्ता की ओर इशारा करती है।

क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है। - १ तिमुथियुस ४:१०

बाइबल पाठ: भजन १४८
Psalms 148:1 याह की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊंचे स्थानों में करो!
Psalms 148:2 हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर!
Psalms 148:3 हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिर्मय तारागण उसकी स्तुति करो!
Psalms 148:4 हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपर वाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो।
Psalms 148:5 वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।
Psalms 148:6 और उसने उन को सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है; और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं।
Psalms 148:7 पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर,
Psalms 148:8 हे अग्नि और ओलों, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन मानने वाली प्रचण्ड बयार!
Psalms 148:9 हे पहाड़ों और सब टीलों, हे फलदाई वृक्षों और सब देवदारों!
Psalms 148:10 हे वन-पशुओं और सब घरैलू पशुओं, हे रेंगने वाले जन्तुओं और हे पक्षियों!
Psalms 148:11 हे पृथ्वी के राजाओं, और राज्य राज्य के सब लोगों, हे हाकिमों और पृथ्वी के सब न्यायियों!
Psalms 148:12 हे जवानों और कुमारियों, हे पुरनियों और बालकों!
Psalms 148:13 यहोवा के नाम की स्तुति करो, क्योंकि केवल उसकी का नाम महान है; उसका ऐश्वर्य पृथ्वी और आकाश के ऊपर है।
Psalms 148:14 और उसने अपनी प्रजा के लिये एक सींग ऊंचा किया है; यह उसके सब भक्तों के लिये अर्थात इस्राएलियों के लिये और उसके समीप रहने वाली प्रजा के लिये स्तुति करने का विषय है। याह की स्तुति करो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती ७-८ 
  • मरकुस ४:२१-४१

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

अनुकम्पा


   अपनी पत्नि मार्लीन से मैं जब पहली बार मिला था तब हम दोनो ही कॉलेज में थे। मार्लीन बच्चों को शिक्षा देने का प्रशिक्षण ले रही थी और जब मैंने बच्चों के साथ काम करते हुए उसे पहली बार देखा तो मुझे तुरंत आभास हुआ कि यह उसके स्वभाव के कितना अनुकूल था। हमारे विवाह पश्चात जब हमारे अपने बच्चे हुए तो यह बात और भी अधिक स्पष्ट हो गई। बच्चों के साथ उसके व्यवहार को देखना निस्वार्थ प्रेम का एक पाठ सीखने के समान था। उसे बच्चों के साथ देखने से पता चलता था कि सारे संसार में बच्चों के प्रति माँ के कोमल प्रेम और अनुकम्पा के समान कोई अन्य बात है ही नहीं।

   इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह ४९:१५ इतना असाधारण लगता है और इस पद का मर्म इतना विशिष्ट। इस पद में परमेश्वर ने अपने लोगों को, जो अपने आप को त्यागा हुआ और भुलाया हुआ अनुभव कर रहे थे, आश्वासन दिया: "क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।"

   कभी कभी जीवन के संघर्ष और कठिनाईयों में हम यह सोचने लगते हैं कि परमेश्वर ने हमें भुला दिया है। संभवतः हम यह भी मानने लगते हैं कि परमेश्वर अब हमसे प्रेम नहीं रखता। परन्तु परमेश्वर के प्रेम की चौड़ाई क्रूस पर मसीह यीशु की फैली हुई बाहों के समान है। परमेश्वर का कोमल प्रेम और अनुकम्पा एक माँ के अपने दूधपिउवे बच्चे के प्रति प्रेम और अनुकम्पा से भी बढ़कर है। परमेश्वर का अपनी प्रत्येक सन्तान से वायदा है "...मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों १३:५)।

   यदि आपने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार द्वारा परमेश्वर कि सन्तान होने का गौरव प्राप्त किया है तो आप प्रत्येक परिस्थिति में आश्वस्त रह सकते हैं क्योंकि अपने बच्चों के प्रति परमेश्वर का प्रेम ना कभी घटता है और ना ही टलता है। हमारे परमेश्वर पिता का प्रेम बच्चे के प्रति माँ के प्रेम से भी बढ़कर और विश्वासयोग्य है; जिसका हाथ उसने एक दफा थाम लिया फिर उसे वह कभी नहीं छोड़ता, किसी परिस्थिति में नहीं। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के प्रेम का प्रमाण क्रूस पर लटके मसीह यीशु की फैली हुई बाहों हैं।

क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता। - यशायाह ४९:१५

बाइबल पाठ: यशायाह ४९:१३-१८
Isaiah 49:13 हे आकाश, जयजयकार कर, हे पृथ्वी, मगन हो; हे पहाड़ों, गला खोल कर जयजयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है और अपने दीन लोगों पर दया की है।
Isaiah 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है।
Isaiah 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।
Isaiah 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है।
Isaiah 49:17 तेरे लड़के फुर्ती से आ रहे हैं और खण्डहर बनाने वाले और उजाड़ने वाले तेरे बीच से निकले जा रहे हैं।
Isaiah 49:18 अपनी आंखें उठा कर चारों ओर देख, वे सब के सब इकट्ठे हो कर तेरे पास आ रहे हैं। यहोवा की यह वाणी है कि मेरे जीवन की शपथ, तू निश्चय उन सभों को गहने के समान पहिल लेगी, तू दुल्हिन की नाईं अपने शरीर में उन सब को बान्ध लेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती ४-६ 
  • मरकुस ४:१-२०

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

समाधान


   मई १८८४ की बात है, युवा माता-पिता जॉन और मार्था की जोड़ी अपने नवजात बेटे के नामकरण में मध्य नाम को लेकर असहमत थे। माँ मार्था अपने पारिवारिक नाम को लेकर उसका नाम सौलोमन रखना चाहती थी और पिता जॉन अपने पारिवारिक नाम को लेकर उसका नाम शिप्पे रखना माँगते थे। क्योंकि दोनो ही मध्य नाम को लेकर सहमत नहीं हुए इसलिए दोनो ने समस्या के समाधान के लिए केवल अंग्रेज़ी भाषा के S शब्द को, जो दोनो ही विवादाधीन नामों का प्रथम अक्षर था, प्रयोग करने का निर्णय लिया और बच्चे का नाम रखा गया हैरी एस. ट्रूमैन जो आगे चलकर अमेरिका के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति बने जिनका मध्य नाम केवल एक अक्षर ही था। इस बात को १२० वर्ष हो गए हैं, इतिहास उस विवाद को भी बताता है और उसके समाधान को भी।

    परमेश्वर के वचन बाइबल में हम एक और विवाद के बारे में पढ़ते हैं जो प्रभु यीशु के दो अनुयायियों के बीच एक तीसरे अनुयायी को लेकर हुआ। प्रेरितों के काम के १५ अध्याय में प्रेरित पौलुस एवं बरनाबास के इस विवाद का उल्लेख है। बरनाबास और पौलुस को सेवकाई और सुसमाचार प्रचार की यात्रा पर निकलना था। बरनाबास अपने साथ एक युवा विश्वासी मरकुस को भी ले जाना चाहता था, किंतु मरकुस को लेकर कुछ पिछले अनुभवों के आधार पर पौलुस ने इस बात का विरोध किया। बात यहाँ तक बढ़ गई कि पौलुस और बरनाबास ने अलग अलग अपने अपने रास्ते ले लिए। इस बात को दो हज़ार वर्ष के लगभग हो गए हैं, और यह परमेश्वर के वचन में सदा काल के लिए दर्ज भी है। किंतु बात यहीं समाप्त नहीं हुई; आगे चलकर पौलुस और मरकुस के बीच की दूरीयाँ मिट गईं, समस्या का समाधान निकल आया और मरकुस पौलुस का प्रीय बन गया। अपनी सेवकाई के अन्त में, मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा में कैदखाने में पड़े पौलुस ने अपनी अन्तिम पत्री में एक अन्य मसीही विश्वासी तिमुथियुस को लिखा: "...मरकुस को ले कर चला आ; क्योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है" (२ तिमुथियुस ४:११)।

   एक और विवाद मानव जाति के इतिहास के आरंभ में हुआ - पाप के कारण परमेश्वर और हमारे आदि-पूर्वज आदम और हव्वा के बीच दूरी आ गई और हमारे आदि माता-पिता परमेश्वर की संगति से दूर हो गए। तब से पाप मनुष्य में बना हुआ है और आदम हव्वा की सभी संतान इस पाप स्वभाव के साथ ही पैदा होती आई है तथा परमेश्वर से दूर है। परमेश्वर ने ही स्वयं आगे बढ़कर अपने बड़े प्रेम में होकर मानव के लिए पाप से बचने और पाप स्वभाव के चंगुल से निकलने का मार्ग दिया। उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार में भेजा, उसने संसार में एक निष्पाप और निषकलंक जीवन बिताया और समस्त मानव जाति का पाप अपने ऊपर लेकर उस पाप के दण्ड को सभी मनुष्यों के लिए सह लिया। उसने क्रूस पर अपने प्राण बलिदान किए, वह मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन मृतकों से जीवित होकर उसने अपने परमेश्वरत्व को प्रमाणित कर दिया। आज भी उसकी खाली कब्र उसके पुनरुत्थान और परमेश्वर होने की गवाह है।

   प्रभु यीशु के इस बलिदान और पुनरुत्थान के द्वारा पाप की समस्या का समाधान हो गया, सभी मनुष्यों के लिए पाप क्षमा और परमेश्वर से मेल-मिलाप का मार्ग खुल गया। अब जो कोई सच्चे मन से अपने पापों की क्षमा प्रभु यीशु से माँगता है तथा स्वेच्छा से अपना जीवन उसे समर्पित करता है उसे प्रभु यीशु से पापों की क्षमा, पाप स्वभाव से मुक्ति तथा परमेश्वर की सन्तान होने का आदर मिलता है और वह परमेश्वर के साथ संगति में आ जाता है। परमेश्वर का यह प्रयोजन सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है और सभी को परमेश्वर की ओर से इसका निमंत्रण है।

   क्या आपने अपने पापों और उनके कारण हुई परमेश्वर से दूरी का परमेश्वर द्वारा निर्धारित समाधान स्वीकार कर लिया है? यदि नहीं तो अभी अवसर है, कर लीजिए। इस समाधान का तिरस्कार बहुत महंगा, बहुत कष्टदायक और अनन्तकालीन है। - डेव ब्रैनन


पाप के कारण मनुष्य का परमेश्वर से हुआ मनमुटाव समय के साथ नहीं घटता नहीं है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों ५:८

बाइबल पाठ: रोमियों ५:६-१२; १७-१९
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे।
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ।
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १-३ 
  • मरकुस ३


बुधवार, 20 फ़रवरी 2013

आराधना


   एक समय था जब मुझे चर्च में आराधना का समय मनोरंजन लगता था। मेरे जैसे लोगों के लिए ही सॉरेन किर्केगार्ड ने कहा है: "हम चर्च को एक नाट्यशाला के समान देखते हैं। हम श्रोताओं के समान जाकर पीछे की पंक्तियों में बैठ जाते हैं और सामने हो रही आराधना का अवलोकन किसी नाटक को देखने के समान करते हैं और यदि प्रस्तुत कार्यक्रम अच्छा लगता है तो फिर प्रशंसास्वरूप ताली भी बजा देते हैं। लेकिन चर्च में नाट्यशाला से उलट व्यवहार होता है, वहां आराधना के लिए एकत्रित जन अभिनेता तथा परमेश्वर श्रोता होता है। जो सबसे महत्वपूर्ण है वह उपस्थित लोगों के हृदयों में होता है ना कि सामने किसी मंच पर। हमारे हृदय से निकलने वाली आराधना की परख परमेश्वर करता है। जब हम आराधना से बाहर आते हैं तो हमारे मनों में अपने प्रसन्न होने या न होने का नहीं वरन प्रश्न यह होना चाहिए कि क्या परमेश्वर मेरी आराधना से प्रसन्न हुआ? क्या मेरी आराधना सच्ची तथा उसे ग्रहणयोग्य थी?"

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम में इस्त्राएल के लिए परमेश्वर ने कई बलिदान और पर्व निर्धारित किए जो उनकी आराधना विधि का एक अंग थे। परन्तु फिर भी परमेश्वर ने कहा: "मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशालों से बकरे ले लूंगा। क्योंकि वन के सारे जीवजन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं" (भजन ५०:९-१०)। परमेश्वर उन लोगों से पशु नहीं आज्ञाकारिता तथा धन्यवाद चाहता था (पद २३)।

   जब हम आराधना की क्रीयाविधि और अन्य बाह्य बातों पर ध्यान केंद्रित रखते हैं तो हम आराधना का केंद्र बिंदु भूल जाते हैं - परमेश्वर के लिए सच्चे हृदय से निकलने वाला धन्यवाद और उसके प्रति वास्तविक समर्पण, जिस से वह प्रसन्न होता है, ना कि कोई औपचारिकता तथा बाह्य स्वरूप। आराधना का उद्देश्य परमेश्वर से भेंट एवं संगति करना तथा उसे प्रसन्न करना है ना कि अपने आप को। सच्ची आराधना किसी औपचारिकता को पूरा करना नहीं है, वरन सच्चे हृदय की गहराईयों से निकलने वाली परमेश्वर को अर्पित करी गई निर्मल भेंट है। - फिलिप यैन्सी


आराधना का हृदय अराधक के हृदय से निकलने वाली आराधना है।

धन्यवाद के बलिदान का चढ़ाने वाला मेरी महिमा करता है; और जो अपना चरित्र उत्तम रखता है उसको मैं परमेश्वर का किया हुआ उद्धार दिखाऊंगा! - भजन ५०:२३

बाइबल पाठ: भजन ५०:७-१५
Psalms 50:7 हे मेरी प्रजा, सुन, मैं बोलता हूं, और हे इस्राएल, मैं तेरे विषय साक्षी देता हूं। परमेश्वर तेरा परमेश्वर मैं ही हूं।
Psalms 50:8 मैं तुझ पर तेरे मेल बलियों के विषय दोष नहीं लगाता, तेरे होमबलि तो नित्य मेरे लिये चढ़ते हैं।
Psalms 50:9 मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशालों से बकरे ले लूंगा।
Psalms 50:10 क्योंकि वन के सारे जीवजन्तु और हजारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैं।
Psalms 50:11 पहाड़ों के सब पक्षियों को मैं जानता हूं, और मैदान पर चलने फिरने वाले जानवार मेरे ही हैं।
Psalms 50:12 यदि मैं भूखा होता तो तुझ से न कहता; क्योंकि जगत और जो कुछ उस में है वह मेरा है।
Psalms 50:13 क्या मैं बैल का मांस खाऊं, वा बकरों का लोहू पीऊं?
Psalms 50:14 परमेश्वर को धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा, और परमप्रधान के लिये अपनी मन्नतें पूरी कर;
Psalms 50:15 और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था २६-२७ 
  • मरकुस २