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शनिवार, 9 मार्च 2013

आशीषों की कुंजी


   यदि ऐसा कोई प्रश्न है जो सदियों से सारे विश्व में बना हुआ है तो संभवतः वह होगा: "क्या हम पहुँच गए?" अनेक पीढ़ीयों से बच्चों ने यह प्रश्न अपने अभिभावकों से किया है, फिर व्यस्क हो जाने पर अपने बच्चों को इस प्रश्न का उत्तर समझने में सहायता करी है। सभी उस समय की प्रतीक्षा में रहते हैं जब वे अपने लक्ष्य तक पहुँचेंगे - वह चाहे यात्रा हो, चाहे जीवन यात्रा, या फिर किसी कार्य का संपन्न होना।

   जब भी मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा की लिखी पुस्तकों को पढ़ता हूँ तो सोचता हूँ कि कितनी बार मूसा से इसत्राएलियों ने से इसी प्रश्न को पूछा होगा? उन्हें मिस्त्र के दासत्व से छुड़ाकर ले चलने से पहले मूसा ने इस्त्राएलियों को यह आश्वासन दिया था कि परमेश्वर की योजना है "कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊं, और उस देश से निकाल कर एक अच्छे और बड़े देश में जिस में दूध और मधु की धारा बहती हैं" ले जाए (निर्गमन 3:8)। परमेश्वर उन्हें मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर तो ले आया किंतु उस वाचा किए हुए देश में पहुँचने से पहले उन्हें 40 वर्ष तक बियाबान में भटकना पड़ा। यह कोई साधारण भटकना नहीं था, वे मार्ग नहीं भूले थे, वरन इस भटकने के पीछे एक उद्देश्य था। परमेश्वर उन्हें इस वाचा के देश के किनारे तक ले आया था किंतु अपने मन के भय और अपनी अनाज्ञाकारिता के कारण इस्त्राएल ने उस देश में प्रवेश नहीं किया, वरन परमेश्वर के विरुद्ध बोले और वापस मिस्त्र लौटने का प्रयास किया। वे परमेश्वर की आज्ञाकारिता के लिए तैयार नहीं थे। इसत्राएल को 400 वर्ष की मिस्त्र की ग़ुलामी के बाद अपने मन, व्यवहार और विचार परमेश्वर के अनुरूप करने थे। यह कार्य उस ४० वर्ष की यात्रा में हुआ (व्यवस्थाविवरण 8:2, 15-18)। साथ ही, इन 40 वर्षों में उस बलवाई और अनाज्ञाकारी पीढ़ी के लोग जाते रहे (गिनती 32:13)। इस यात्रा के बाद इस्त्राएली सहर्ष और सामर्थ के साथ वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने पाए और आज तक वहाँ बने हुए हैं।

   हमें अपने जीवन काल में कई बार लगता है कि हम ऐसे ही भटक रहे हैं, हमें अपना लक्ष्य सूझ नहीं पड़ता। कई बार हम भी परमेश्वर से पूछते हैं, "क्या हम पहुँच गए?"; "अभी और कितना समय लगेगा?" ऐसे में यह स्मरण रखना लाभकारी रहेगा कि परमेश्वर के उद्देश्यों के लिए केवल लक्ष्य ही नहीं यात्रा भी महत्वपूर्ण है। वह यात्रा के अनुभवों के द्वारा हमें नम्र करता है, हमें तैयार करता है, हमें परखता है और हमारे मनों की दशा हम पर प्रकट करता है। अन्ततः जब हम उस आशीष के लिए तैयार हो जाते हैं तब ही वह उसे हमारे जीवनों में आने देता है।

   परमेश्वर की आज्ञाकारिता में हो जाना और अपने मन, व्यवहार और विचार को परमेश्वर के वचन के अनुरूप करना ही आशीषों को पा लेने की कुंजी है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


केवल गन्तव्य ही नहीं यात्रा भी महत्वपूर्ण है।

और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं। - व्यवस्थाविवरण 8:2

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 8
Deuteronomy 8:1 जो जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं उन सभों पर चलने की चौकसी करना, इसलिये कि तुम जीवित रहो और बढ़ते रहो, और जिस देश के विषय में यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से शपथ खाई है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ।
Deuteronomy 8:2 और स्मरण रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा उन चालीस वर्षों में तुझे सारे जंगल के मार्ग में से इसलिये ले आया है, कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के यह जान ले कि तेरे मन में क्या क्या है, और कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा वा नहीं।
Deuteronomy 8:3 उसने तुझ को नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा ही जानते थे, वही तुझ को खिलाया; इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है।
Deuteronomy 8:4 इन चालीस वर्षों में तेरे वस्त्र पुराने न हुए, और तेरे तन से भी नहीं गिरे, और न तेरे पांव फूले।
Deuteronomy 8:5 फिर अपने मन में यह तो विचार कर, कि जैसा कोई अपने बेटे को ताड़ना देता है वैसे ही तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ को ताड़ना देता है।
Deuteronomy 8:6 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करते हुए उसके मार्गों पर चलना, और उसका भय मानते रहना।
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है।
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है।
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा।
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा।
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे;
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे,
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए,
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है,
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला,
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे।
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई।
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।
Deuteronomy 8:19 यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर दूसरे देवताओं के पीछे हो लेगा, और उसकी उपासना और उन को दण्डवत करेगा, तो मैं आज तुम को चिता देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे।
Deuteronomy 8:20 जिन जातियों को यहोवा तुम्हारे सम्मुख से नष्ट करने पर है, उन्ही की नाईं तुम भी अपने परमेश्वर यहोवा का वचन न मानने के कारण नष्ट हो जाओगे।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण 8-10 
  • मरकुस 11:19-33


शुक्रवार, 8 मार्च 2013

छोटी बात


   हज़ारों की भीड़ प्रभु यीशु के पास आई हुई थी। प्रभु उन्हें परमेश्वर के राज्य के बारे में भी बता रहे थे और उनके बीमारों को चंगा भी कर रहे थे। फिर प्रभु ने अपने चेलों से कहा कि उस भीड़ के लिए भोजन का प्रबन्ध करें। चेले अवाक रह गए - किसी भी गाँव या नगर से दूर इस एकांत स्थल पर एकदम से हज़ारों के लिए भोजन कहाँ से उपलब्ध हो सकेगा! लेकिन चेलों को यह आज्ञा देने में प्रभु का कुछ प्रयोजन था, वह उन्हें परख रहा था, और वह यह भी जानता था कि वह क्या करने जा रहा है (यूहन्ना 6:6)। एक चेले ने हिसाब लगाया कि थोड़े से भोजन का प्रबन्ध करने के लिए भी कितना खर्च आएगा, तो दूसरे ने कहा: "यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछिलयां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?" (यूहन्ना 6:7, 9)। लेकिन प्रभु यीशु के हाथों में वे पाँच रोटी और दो मछली हज़ारों की भीड़ को तृप्त करने और उसके बाद बच्चे हुए भोजन से बारह टोकरियां भरने के लिए पर्याप्त थीं।

   यदि आप सोचते हैं कि मेरे पास तो प्रभु को देने और उसके उपयोग के लायक कुछ भी नहीं है, तो थोड़ा विचार इस घटनाक्रम पर भी कीजिए: एडवर्ड किम्बल नामक एक सन्डे स्कूल शिक्षक के मन में आया कि वह अपनी सन्डे स्कूल कक्षा के एक युवक से मिले और निश्चित करे कि वह युवक मसीही विश्वास में है या नहीं। वह उससे जाकर मिला और उस दिन वह उस युवक को, जिसका नाम था डी. एल. मूडी, मसीही विश्वास में लाने पाया। मूडी आगे चलकर १९वीं सदी का सुप्रसिद्ध और अति प्रभावकारी मसीही प्रचारक बना। मूडी के जीवन और प्रचार से एक अन्य जाना माना मसीही प्रचारक विल्बर चैपमैन बहुत प्रभावित हुआ। चैपमैन ने अपनी सहायता के लिए बिली सण्डे को अपने साथ प्रचार में लगाया, और आगे चलकर बिली सण्डे भी एक विख्यात प्रचारक बन गया। बिली सण्डे के प्रचार के प्रभाव से एक शहर में मसीही सेवकाई की एक संस्था आरंभ हुई, और उस संस्था ने एक समय पर एक अन्य मसीही प्रचारक मोर्देकई हैम को प्रचार के लिए एक मसीही जागृति सभा में बुलाया। उस सभा में बिली ग्रैहम नामक एक व्यक्ति ने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया और वह आगे चलकर हमारे वर्तमान समय का सबसे विख्यात और श्रेष्ठ अन्तर्राष्ट्रीय मसीही प्रचारक बना जिसके प्रचार तथा लिखी पुस्तकों के द्वारा सारे विश्व में अनगिनित लोग मसीही विश्वास में आने पाए तथा आ रहे हैं।

   यदि आपको लगे कि आप कुछ विशेष करने में असमर्थ हैं तो उन पाँच रोटी और दो मछली तथा सन्डे स्कूल शिक्षक एडवर्ड किम्बल को स्मरण करें जिसने बस एक दोपहर का समय अपनी कक्षा के एक विद्यार्थी के साथ बिताया। किम्बल को ज़रा भी अन्देशा नहीं होगा कि 19वीं सदी की उस दोपहर का कार्य कुछ ही समय में परमेश्वर की सेवकाई के लिए कैसा प्रभाव लाने लगेगा, और उस प्रभाव से उत्पन्न लहरें २०वीं सदी में जाकर संसार भर में इस सेवकाई के लिए और कितना प्रभाव लाएंगी।

   प्रभु यीशु के हाथ में हर छोटी सी बात भी महान आश्चर्यकर्मों और अनेकों लोगों के जीवनों में सामर्थी कार्यों का माध्यम बन जाती है। हमारा परमेश्वर उसे समर्पित विश्वासयोग्यता के जीवन के छोटे छोटे बीजों से विशाल वृक्ष उगा देता है जो असंख्य लोगों के जीवनों को प्रभावित और आनन्दित कर देते हैं, अनन्तकाल के लिए सुखमय बना देते हैं। अपनी ओर ना देखें, वरन साधारण विश्वास के साथ निःसंकोच अपना हाथ उसके हाथ में दे दें; उसे आपकी योग्यता की नहीं आपके विश्वास की आवश्यकता है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर हमारी छोटी बातों को अपने बड़े उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग करता है।

क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन तुच्छ जाना है? - ज़कर्याह 4:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:1-14
John 6:1 इन बातों के बाद यीशु गलील की झील अर्थात तिबिरियास की झील के पास गया।
John 6:2 और एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली क्योंकि जो आश्चर्य कर्म वह बीमारों पर दिखाता था वे उन को देखते थे।
John 6:3 तब यीशु पहाड़ पर चढ़कर अपने चेलों के साथ वहां बैठा।
John 6:4 और यहूदियों के फसह के पर्व निकट था।
John 6:5 तब यीशु ने अपनी आंखे उठा कर एक बड़ी भीड़ को अपने पास आते देखा, और फिलेप्पुस से कहा, कि हम इन के भोजन के लिये कहां से रोटी मोल लाएं?
John 6:6 परन्तु उसने यह बात उसे परखने के लिये कही; क्योंकि वह आप जानता था कि मैं क्या करूंगा।
John 6:7 फिलेप्पुस ने उसको उत्तर दिया, कि दो सौ दीनार की रोटी उन के लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए।
John 6:8 उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उस से कहा।
John 6:9 यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछिलयां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?
John 6:10 यीशु ने कहा, कि लोगों को बैठा दो। उस जगह बहुत घास थी: तब वे लोग जो गिनती में लगभग पांच हजार के थे, बैठ गए:
John 6:11 तब यीशु ने रोटियां लीं, और धन्यवाद कर के बैठने वालों को बांट दी: और वैसे ही मछिलयों में से जितनी वे चाहते थे बांट दिया।
John 6:12 जब वे खाकर तृप्‍त हो गए तो उसने अपने चेलों से कहा, कि बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए।
John 6:13 सो उन्होंने बटोरा, और जव की पांच रोटियों के टुकड़े जो खाने वालों से बच रहे थे उन की बारह टोकिरयां भरीं।
John 6:14 तब जो आश्चर्य कर्म उसने कर दिखाया उसे वे लोग देखकर कहने लगे; कि वह भविष्यद्वक्ता जो जगत में आनेवाला था निश्‍चय यही है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7 
  • मरकुस 11:1-18


गुरुवार, 7 मार्च 2013

ध्यान


   मैं पिछली गर्मियों में निकट की एक छोटी नदी में मछली पकड़ रहा था, मेरा ध्यान पास में ही आई हुई मछली पर था। एक हलकी सी हलचल के कारण मैंने आस-पास देखा और पाया कि मेरा एक जानकार और राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मछलीमार प्रशिक्षक डेव टकर पास ही में खड़ा था। उसे देख कर मैं एकदम मछली पकड़ने के अपने प्रयास के प्रति सचेत हो गया और इसी हड़बड़ी में मछली पकड़ने की डोर ठीक से नहीं फेंक सका तथा मेरे पास आई वह मछली बच कर निकल गई। जब हम अपना ध्यान कार्य की बजाए अन्य बातों या अपने ही ऊपर लगाने लगते हैं तो वह कुछ नुकसान ही करता है।

   डब्ल्यु. एच. औडेन ने एक छोटी कविता लिखी है, उन लोगों के विषय में जो आपने अपने कार्य में खो जाते हैं - उस कविता में वे कहते हैं कि चाहे खाना पका रहा रसोइया हो या ऑपरेशन कर रहा सर्जन अथवा लदान का पर्चा बनाने वाला कोई क्लर्क, जब वे अपने कार्य में रत होते हैं तो सभी के चेहरे पर एक सा ही भाव होता है जो उनका उनके कार्य में खोए हुए होने को दिखाता है। यह ध्यान लगाना केवल कार्य के लिए ही नहीं वरन परस्पर संबंधों के लिए भी अति आवश्यक है। जब हम किसी मित्र से या रिश्तेदार से या अन्य किसी ऐसे जन से जो हमारी सहायता लेने आया हो संवाद में हों तो उसकी बात को ध्यान लगाकर सुनना अच्छे संबंधों के लिए अति आवश्यक है। उसके बोलते समय यदि हमारा ध्यान और कहीं होगा तो वह शीघ्र ही समझ जाएगा कि हमारी दिलचस्पी उसमें नहीं है और यह संबंधों में दूरी लाएगा।

   हमारा परमेश्वर भी हमें यही सिखाता है, क्योंकि वह ध्यान लगाकर हमारी हर बात सुनता है: "तब यहोवा का भय मानने वालों ने आपस में बातें की, और यहोवा ध्यान धर कर उनकी सुनता था; और जो यहोवा का भय मानते और उसके नाम का सम्मान करते थे, उनके स्मरण के निमित्त उसके साम्हने एक पुस्तक लिखी जाती थी" (मलाकी 3:16)। वह सारी सृष्टि का ध्यान रखता है और उसे हर पल संचालित करता रहता है, तौ भी उसका ध्यान हमारी ओर से कभी नहीं हटता। 

   कैसी अजीब बात है कि समस्त सृष्टि के संचालक के पास अपने प्रत्येक संतान की बात ध्यान से सुनने का समय है किंतु संसार और संसार की बातों में अपनी व्यस्तता की दुहाई देकर हमारे पास कितनी ही दफा उस महान प्रेमी सृष्टिकर्ता परमेश्वर की बात ध्यान से सुनने का समय नहीं होता। हम उसके वचन के अध्ययन के समय और उससे प्रार्थना में वार्तालाप करने के समय के महत्व को नहीं समझते और इन्हें एक औपचारिकता मात्र मानकर व्यर्थ कर देते हैं। जब प्रभु यीशु मार्था और मरियम के घर आया तो मरियम सब कुछ छोड़कर उसके चरणों पर बैठकर उससे सीखने लगी और प्रभु यीशु ने इस बात के लिए मरियम की सराहना करी: "परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:42)।

   ध्यान से सुनिए, मनुष्यों की भी और परमेश्वर की भी; यह आपके लिए सदैव हितकारी ही होगा।


ध्यान से सुनना प्रेम की अच्छी निशानी है।

...इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। - याकूब 1:19

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी।
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे।
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है।
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 3-4 
  • मरकुस 10:32-52

बुधवार, 6 मार्च 2013

चित्र-पटल


   जब मैं छोटा था तो हमारे बाइबल शिक्षक बाइबल की कहानियों को दर्शाने के लिए एक "फ्लैनेल बोर्ड" का प्रयोग करते थे। यह स्कूलों में प्रयोग होने वाले लकड़ी के बने श्यामपट के समान ही होता था, बस इस पटल पर फ्लैनल का कपड़ा चढ़ा होता था, जिस पर बाइबल पात्रों के गत्ते या काग़ज़ से बने चित्र, जिनके पीछे भी फ्लैनल लगा होता था, लगा दिए जाते थे। जहाँ लगाए जाते, वहाँ वे चित्र ’चिपके’ रहते और सरलता से हटाए भी जा सकते थे। इस माध्यम से हमारे शिक्षक हमारे लिए उन कहानियों को सजीव कर देते थे। इस आधुनिक और टैकनौलोजी के युग में भी कई शिक्षक अभी भी "फ्लैनेल बोर्ड" का प्रयोग करते हैं।

   केवल वे प्राचीन "फ्लैनेल बोर्ड" ही आज भी सजीव शिक्षा देने का माध्यम नहीं हैं। परमेश्वर ने आदि काल से अपने बारे में शिक्षा देने के लिए एक और माध्यम का प्रयोग किया है, जो अब तक उतना ही कारगर है - उसकी सृष्टि। सृष्टि की अद्भुत बातों द्वारा परमेश्वर अपने बारे में बताता आया है और बता रहा है। परमेश्वर की सृष्टि उसका चित्र-पटल है जिस पर वह अपने बारे में बताता आया है और आज भी बता रहा है।

   दाऊद ने भजन 19:1 में लिखा "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।" सृष्टि में परमेश्वर ने अपने आप को इतनी स्पष्टता से प्रगट किया है कि प्रेरित पौलुस ने लिखा: "इसलिये कि परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए। और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला" (रोमियों 1:19-23)।

   परमेश्वर की सृष्टि में हम उसके अविनाशी स्वरूप को, उसकी पवित्रता और उसके गुणों को, उसके व्यवस्थित और योजनाबद्ध रीति से कार्य करने को, उसकी सामर्थ और उसकी महिमा को, प्रत्येक बात पर उसके नियंत्रण आदि को देखते हैं। सृष्टि हमें परमेश्वर की उपासना के लिए प्रेरित करती है, और हम भजनकार के साथ कह सकते हैं: "हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है" (भजन 8:1)। - बिल क्राउडर


परमेश्वर ने अपनी सृष्टि में होकर अपने गुणों और चरित्र को प्रगट किया है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: भजन 19
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं;
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है;
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं।
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं।
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर।
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2 
  • मरकुस 10:1-31

मंगलवार, 5 मार्च 2013

निराश?


   महान प्रेरित यूहन्ना, वह जो प्रभु यीशु का प्रीय था, उदास था; उसकी आँखों में आँसू थे। पतमोस के टापू पर प्रभु यीशु पर अपने विश्वास के कारण कारावास की सज़ा झेल रहे यूहन्ना ने संसार के अन्त और स्वर्ग के दर्शन पाए थे। अपने एक दर्शन में युहन्ना ने अपने आप को परमेश्वर के सिंहासन कक्ष में पाया जहाँ भविष्य की घटनाओं से संबंधित स्वर्ग में हो रही बातों को देखा। वहाँ उसने देखा कि परमेश्वर ने एक मुहर लगा कर बन्द की हुई पुस्तक को अपने हाथ में लिया हुआ है, लेकिन वहाँ उपस्थित प्राणियों में से ऐसा योग्य कोई नहीं था जो उस पत्र को परमेश्वर के हाथ से लेकर उसकी मुहरें खोलता और संसार के इतिहास के समापन के विवरण को खोल देता। इस स्थिति से यूहन्ना निराश और उदास हुआ (प्रकाशितवाक्य 5:1-12)।

   प्रभु यीशु के साथ और फिर प्रभु यीशु के स्वर्गारोहण के बाद के समय में युहन्ना ने संसार में पाप के सामर्थ को देखा था। उसने प्रभु यीशु के जीवन, मृत्यु तथा पुनरुत्थान से पाप और मृत्यु को परास्त होते भी देखा था। लेकिन अब स्वर्ग में उस पुस्तक को खोलने में सब प्राणियों को असमर्थ तथा पाप के साम्राज्य के सदा काल के विनाश के अन्तिम अध्याय की जानकारी पाने की विवशता देख कर उसे निराशा हुई। तभी वहाँ उपस्थित प्राचीनों में से एक ने उसके पास आकर उसे सांत्वना देते हुए कहा, "मत रो" और संकेत करके एक ऐसे जन को दिखाया जिसे यूहन्ना जानता था: "तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है" (पद 5)। यूहन्ना ने देखा और प्रभु यीशु को पाया - वही एकमात्र ऐसा था जो उस पुस्तक को परमेश्वर के हाथ से लेने, उसकी मुहर को तोड़ने और संसार के इतिहास के अन्तिम अध्याय को प्रगट करने के लिए सामर्थी था। यूहन्ना की आँखों के आँसू सूख गए, और शीघ्र ही वहाँ लाखों स्वर्गदूत परमेश्वर के उस मेमने, प्रभु यीशु, की जयजयकार कर रहे थे, जो संसार के पापों के लिए बलिदान हुआ और समस्त संसार के हर एक जन के लिए सेंत-मेंत में पाप क्षमा और उद्धार का पाने मार्ग बना कर दे दिया।

   वह सर्वसामर्थी प्रभु है, उसके लिए कुछ असंभव नहीं है, वह सबकी सहायता और आत्मिक उत्थान के लिए सदैव तत्पर है। क्या आप किसी असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थिति से निराश हैं? प्रभु यीशु की ओर देखिए, उसकी शरण में आजाईये और अपनी समस्या उसे सौंप दीजिए, उसे आपके लिए आपके जीवन में कार्यकारी होने दीजिए, उसकी महिमा और उसके समाधान को अनुभव कीजिए और फिर उसका गुणगान करने वाले अनगिनित स्वर्ग और पृथ्वी के निवासियों में सम्मिलित हो जाईए। - डेव ब्रैनन


वह मेमना जो हमारे पापों के लिए बलिदान हुआ था आज हमारा मार्गदर्शन करने वाला अच्छा चरवाहा है।

और मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला। - प्रकाशितवाक्य 5:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 5:1-12
Revelation 5:1 और जो सिंहासन पर बैठा था, मैं ने उसके दाहिने हाथ में एक पुस्‍तक देखी, जो भीतर और बाहर लिखी हुई भी, और वह सात मुहर लगा कर बन्‍द की गई थी।
Revelation 5:2 फिर मैं ने एक बलवन्‍त स्वर्गदूत को देखा जो ऊंचे शब्द से यह प्रचार करता था कि इस पुस्‍तक के खोलने और उस की मुहरें तोड़ने के योग्य कौन है?
Revelation 5:3 और न स्वर्ग में, न पृथ्वी पर, न पृथ्वी के नीचे कोई उस पुस्‍तक को खोलने या उस पर दृष्टि डालने के योग्य निकला।
Revelation 5:4 और मैं फूट फूटकर रोने लगा, क्योंकि उस पुस्‍तक के खोलने, या उस पर दृष्टि करने के योग्य कोई न मिला।
Revelation 5:5 तब उन प्राचीनों में से एक ने मुझे से कहा, मत रो; देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह, जो दाऊद का मूल है, उस पुस्‍तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्‍त हुआ है।
Revelation 5:6 और मैं ने उस सिंहासन और चारों प्राणियों और उन प्राचीनों के बीच में, मानों एक वध किया हुआ मेम्ना खड़ा देखा: उसके सात सींग और सात आंखे थीं; ये परमेश्वर की सातों आत्माएं हैं, जो सारी पृथ्वी पर भेजी गई हैं।
Revelation 5:7 उसने आ कर उसके दाहिने हाथ से जो सिंहासन पर बैठा था, वह पुस्‍तक ले ली,
Revelation 5:8 और जब उसने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े; और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं।
Revelation 5:9 और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध हो कर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।
Revelation 5:10 और उन्हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।
Revelation 5:11 और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों के चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी।
Revelation 5:12 और वे ऊंचे शब्द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 34-36 
  • मरकुस 9:30-50

सोमवार, 4 मार्च 2013

संभवतः आज ही


   मार्च माह के आरंभ से मेरी एक सहेली ने उलटी गिनती गिननी आरंभ करी। उसने कार्यस्थल पर लगे अपने कैलण्डर पर बसन्त ऋतु आरंभ होने के अनुमानित दिन पर निशान लगा रखा था, जिसमें अभी २० दिन बाकी थे। फिर एक दिन जब प्रातः मेरी उससे भेंट हुई तो वह बोली, "केवल १२ दिन और"; कुछ दिन बाद कहा, "बस ६ दिन शेष"। उसका यह उत्साह मुझ पर भी प्रभाव डालने लगा और मैंने भी इसी प्रकार दिनों का हिसाब रखना आरंभ कर दिया। एक दिन जब उससे मुलाकात हुई तो मैं बोल उठी, "जैरी केवल दो दिन और" और उसने खिले चेहरे और मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "हैं ना"।

   मसीही विश्वासी होने के कारण लम्बी शरद ऋतु के बाद बसन्त ऋतु के आगमन, सब जगह खिलते हुए फूलों और खिली हुई धूप से भी बढ़कर एक और बात है जिसकी प्रतीक्षा हमें उत्साहित करती है। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में बहुत सी प्रतिज्ञाएं करीं हैं, और उसकी सभी प्रतिज्ञाएं या तो पूरी हुई हैं या हो रही हैं तथा आगे भी पूरी होंगी। अपने लोगों को अपने साथ स्वर्ग पर ले जाने की मसीह यीशु के दूसरे आगमन की प्रतिज्ञा संभवतः परमेश्वर की महानतम प्रतिज्ञाओं में से एक है: "क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे। तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे" (१ थिस्सलुनीकियों ४:१६-१७)

   यद्यपि प्रभु यीशु के इस दूसरे आगमन के दिन को कोई नहीं जानता, लेकिन हमारे पास परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि ऐसा अवश्य होगा (प्रेरितों १:७-११)। अभी हम बसन्त ऋतु के आगमन को मना रहे हैं और आने वाले ईस्टर त्यौहार की प्रतीक्षा में है, लेकिन साथ ही एक दूसरे को उत्साहित भी करते रहें कि प्रभु यीशु के दूसरे आगमन का दिन भी आ रहा है - संभवतः आज ही हो!

   क्या आप उसके आने के लिए तैयार हैं? क्या उसका यह पुनःआगमन आपके लिए भी अनन्त सुख और आशीष का आरंभ होगा? - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु का दूसरा आगमन अवश्यंभावी है - संभवतः यह आज ही हो!

और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना १४:३

बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों ४:१३-१८
1 Thessalonians 4:13 हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाईं शोक करो जिन्हें आशा नहीं।
1 Thessalonians 4:14 क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।
1 Thessalonians 4:15 क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।
1 Thessalonians 4:16 क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।
1 Thessalonians 4:17 तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
1 Thessalonians 4:18 सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती ३१-३३ 
  • मरकुस ९:१-२९

रविवार, 3 मार्च 2013

प्रवेश की कुंजी


   जब भी मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में से सुसमाचारों को पढ़ता हूँ तो प्रभु यीशु के चेलों के स्वभाव में अपने आप को देखता हूँ। मेरे ही समान वे भी प्रभु की बात समझने में मन्दबुद्धि थे। इसी कारण कितनी ही बार प्रभु को उन्हें कहना पड़ा, क्या तुम भी ऐसे ना समझ हो? क्या तुम नहीं समझते? (मरकुस ७:१८)। अन्ततः एक चेले, पतरस, को कुछ हद तक बात समझ आ गई और जब प्रभु यीशु ने पूछा, "परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?" (मत्ती १६:१५) तो पतरस ने उत्तर दिया "तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है" (मत्ती १६:१६)।

   पतरस यह तो समझ गया था कि प्रभु यीशु कौन है, किंतु प्रभु यीशु के उद्देश्य के बारे में वह अभी भी नासमझ था। जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों से अपने मारे जाने की बात कही तो पतरस उसे इस बात के लिए डाँटने लगा, लेकिन प्रभु यीशु ने पलटकर उसे ही डाँटा: "परन्तु उसने फिरकर, और अपने चेलों की ओर देखकर पतरस को झिड़क कर कहा; कि हे शैतान, मेरे साम्हने से दूर हो; क्योंकि तू परमेश्वर की बातों पर नहीं, परन्तु मनुष्य की बातों पर मन लगाता है" (मरकुस ८:३३)।

   पतरस अभी भी सांसारिक तरीकों से प्रभु का राज्य स्थापित होने के बारे में सोच रहा था, जहाँ एक शासक दूसरे को पराजित करके अपना शासन स्थापित करता था। वह सोचता था कि प्रभु यीशु भी ऐसा ही करेगा। लेकिन प्रभु यीशु का राज्य ना तो इस पृथ्वी का है, और ना ही इस पृथ्वी के तौर-तरीकों से स्थापित होता है "यीशु ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं" (यूहन्ना १८:३६)। प्रभु यीशु का राज्य ना तो किसी भू-भाग पर है और ना वह हिंसा से स्थापित होता है; प्रभु यीशु तो लोगों के मनों में राज्य करता है और उसने अपनी लोक-सेवा तथा संसार के सभी लोगों के पापों के लिये अपना जीवन बलिदान करने के द्वारा यह शासन-अधिकार पाया है।

   आज भी उसके अनुयायी प्रभु यीशु में विश्वास तथा समर्पण द्वारा मनुष्यों के हृदयों से पाप के स्थान पर परमेश्वर की पवित्रता और परमेश्वर के जीवन को स्थापित करने का सुसमाचार देते हैं। परमेश्वर के इस राज्य की स्थापना के लिए परमेश्वर की विधि भी नहीं बदली है। जब कि शैतान हमें सांसारिक शक्ति और अधिकार अर्जित करने को उकसाता है, प्रभु यीशु हमें बताता है कि "धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (मत्ती ५:५)।

   यदि परमेश्वर के राज्य में लोगों को लाना है तो यह परमेश्वर की विधि और प्रभु यीशु के उदाहरण के अनुसरण के द्वारा ही संभव है, जिसने स्वार्थी अभिलाषाओं, सांसारिक उपलब्धियों और पृथ्वी पर की समृद्धि तथा धन-दौलत पाने का नहीं वरन संसार के हर मनुष्य के प्रति प्रेम, करुणा, आदर, सेवा और सहायता का जीवन जीकर दिखाया और उनके पापों के बदले अपने प्राण बलिदान किये जिससे कि वे पापों की क्षमा और उद्धार पाएं। मसीही जीवन का उदाहरण तथा प्रभु यीशु में पश्चाताप के साथ पापों की क्षमा ही परमेश्वर के राज्य में प्रवेश की कुंजी है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रत्येक मसीही विश्वासी एक राजदूत है जो राजाओं के राजा के लिए बोलता है।

शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है। - मत्ती १६:१६

बाइबल पाठ: मरकुस ८:२७-३३
Mark 8:27 यीशु और उसके चेले कैसरिया फिलिप्पी के गावों में चले गए: और मार्ग में उसने अपने चेलों से पूछा कि लोग मुझे क्या कहते हैं?
Mark 8:28 उन्होंने उत्तर दिया, कि यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला; पर कोई कोई एलिय्याह; और कोई कोई भविष्यद्वक्ताओं में से एक भी कहते हैं।
Mark 8:29 उसने उन से पूछा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो पतरस ने उसको उत्तर दिया; तू मसीह है।
Mark 8:30 तब उसने उन्हें चिताकर कहा, कि मेरे विषय में यह किसी से न कहना।
Mark 8:31 और वह उन्हें सिखाने लगा, कि मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरिनए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्‍छ समझकर मार डालें और वह तीन दिन के बाद जी उठे।
Mark 8:32 उसने यह बात उन से साफ साफ कह दी: इस पर पतरस उसे अलग ले जा कर झिड़कने लगा।
Mark 8:33 परन्तु उसने फिरकर, और अपने चेलों की ओर देखकर पतरस को झिड़क कर कहा; कि हे शैतान, मेरे साम्हने से दूर हो; क्योंकि तू परमेश्वर की बातों पर नहीं, परन्तु मनुष्य की बातों पर मन लगाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २८-३० 
  • मरकुस ८:२२-३८