ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 23 मार्च 2013

धन्यवाद


   जब हम मैक्सिको देश गए तो मेरी इच्छा थी कि मैं भी स्पैनिश भाषा बोल पाती। मुझे स्पैनिश के बस तीन शब्द ही आते थे - ग्रासियास (धन्यवाद), मुए बिन (बहुत अच्छा) और होला (हैलो)। कुछ ही समय में मैं अपने मिलने वाले लोगों से या यदि कोई मेरी सहायातार्थ कुछ करता उससे बस "ग्रासियास" कहते कहते उबा गई। लेकिन एक है जिसे हम चाहे जितना भी धन्यवाद दें वह उसके द्वारा हम मसीही विश्वासियों के जीवन में किए गए और हो रहे कार्यों के लिए कम ही रहेगा - परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह।

   राजा दाऊद इस बात को और परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होने के महत्व को भली-भांति समझता था। इस्त्राएल का राजा होने के बाद उसने परमेश्वर की वाचा के सन्दूक, जहाँ परमेश्वर की उपस्थिति इस्त्राएलियों के मध्य रहती थी, और आराधना स्थल के लिए तम्बू बनवाया। दाऊद की इच्छा तो मन्दिर बनवाने कि थी परन्तु परमेश्वर ने उसे यह कहकर मना किया कि मन्दिर उसका पुत्र सुलेमान बनवाएगा। दाऊद ने कुछ लेवियों को नियुक्त किया कि वे "इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की चर्चा और उसका धन्यवाद और स्तुति किया करें" (1 इतिहास 16:4) और अन्य लोगों को नियुक्त किया कि "प्रतिदिन के प्रयोजन के अनुसार वे सन्दूक के साम्हने नित्य सेवा टहल किया करें" (1 इतिहास 16:37-38)।

   दाऊद ने परमेश्वर की स्तुति गाने वाले आसाप और उसके भाईयों को धन्यवाद का भजन भी लिख कर दिया जिसमें उसने परमेश्वर के कार्यों, चम्तकारों, न्याय के कार्यों, उद्धार और परमेश्वर के भला, करुणामय और पवित्र होने के गुणों का वर्णन किया।

   दाऊद के समान ही आज हमें भी परमेश्वर को सदा धन्यवादी रहना चाहिए, उस सब के लिए जो वह है और जो उसने किया है। अपने धन्यवाद की भेंट उसे अर्पित करने के लिए प्रतिदिन समय अवश्य निकालें। - ऐनी सेटास


परमेश्वर की प्रशंसा और धन्यवाद से भरा हृदय परमेश्वर को प्रसन्नता और जीवन में आशीष देता रहेगा।

यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो। - 1 इतिहास 16:8

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 16:7-10, 23-29
1 Chronicles 16:7 तब उसी दिन दाऊद ने यहोवा का धन्यवाद करने का काम आसाप और उसके भाइयों को सौंप दिया।
1 Chronicles 16:8 यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो।
1 Chronicles 16:9 उसका गीत गाओ, उसका भजन करो, उसके सब आश्चर्य-कर्मों का ध्यान करो।
1 Chronicles 16:10 उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो।
1 Chronicles 16:23 हे समस्त पृथ्वी के लोगो यहोवा का गीत गाओ। प्रतिदिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो।
1 Chronicles 16:24 अन्यजातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्य-कर्मों का वर्णन करो।
1 Chronicles 16:25 क्योंकि यहोवा महान और स्तुति के अति योग्य है, वह तो सब देवताओं से अधिक भययोग्य है।
1 Chronicles 16:26 क्योंकि देश देश के सब देवता मूतिर्यां ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है।
1 Chronicles 16:27 उसके चारों ओर वैभव और ऐश्वर्य है; उसके स्थान में सामर्थ और आनन्द है।
1 Chronicles 16:28 हे देश देश के कुलो, यहोवा का गुणानुवाद करो, ।
1 Chronicles 16:29 यहोवा की महिमा और सामर्थ को मानो। यहोवा के नाम की महिमा ऐसी मानो जो उसके नाम के योग्य है। भेंट ले कर उसके सम्मुख आाओ, पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 13-15 
  • लूका 1:57-80

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

फलवंत और आनन्दित


   मैं और मेरा परिवार एक बहुमंज़िली इमारत में रहते हैं इसलिए हमारा बग़ीचा गमलों में लगे फूलों के पौधों तक ही सीमित है। बहुत समय तक हमारे पौधों में फूल नहीं आ रहे थे, जबकि हम नियमित रूप से उन्हें पानी और खाद देते थे। फिर हमें मालूम हुआ कि गमले की मिट्टी की गुड़ाई करना और उसे उलट-पुलट करना भी आवश्यक है। हमने यह भी करना आरंभ कर दिया और अब हमारे घर में फूलों की छट्टा देखते ही बनती है।

   कभी कभी हमारे जीवनों में भी यह आवश्यक होता है कि जीवन कुछ उलट-पुलट हो। परेशानीयों से होकर निकल रहे अपने समय के मसीही विश्वासीयों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पतरस ने उन्हें समझाया: "हे प्रियों, जो दुख रूपी अग्‍नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इस से यह समझ कर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है। पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो" (1 पतरस 4:12-13)।

   हमारे गमलों के पौधों की मिट्टी के समान, इन मसीही विश्वासीयों के जीवन भी "उलट-पुलट" किए जा रहे थे। उनके जीवनों में परेशानीयों का यह समय आने देने के द्वारा परमेश्वर का उद्देश्य उनके जीवनों को और कारगर बनाना था जो परमेश्वर की महिमा और प्रशंसा को प्रगट करता (1 पतरस 1:7)।

   परमेश्वर हमारे जीवनों को घोट कर रखने और हमें उसके लिए फलवंत होने से रोकने वाली बातों से हमें निकालने के लिए हमारे जीवनों में उथल-पुथल आने देता है। यह उथल-पुथल अपने साथ परीक्षा और दुख भी लाती है, लेकिन हमारे लिए अन्ततः इससे भलाई ही उत्पन्न होती है। मसीही विश्वासी होने पर भी यदि आप जीवन के ऐसे दौर से गुज़र रहें हैं तो निराश नहीं वरन आनन्दित हों, परमेश्वर आपको अपनी महिमा के लिए तैयार कर रहा है और उपयोग भी करेगा। उसके हाथों में अपने आप को छोड़ दीजिए और कुछ ही समय में आप अपनी कलपना से भी अधिक फलवंत और आनन्दित होंगे। - सी. पी. हिया


जो अपने क्लेषों में भी परमेश्वर को धन्य कहते हैं वे परमेश्वर द्वारा क्लेषों में भी धन्य बन जाते हैं।

पर जैसे जैसे मसीह के दुखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो, जिस से उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्‍दित और मगन हो। - 1 पतरस 4:13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:1-9
1 Peter 1:1 पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बिथुनिया में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं।
1 Peter 1:2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये।
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है।
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो।
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है।
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 10-12 
  • लूका 1:39-56

गुरुवार, 21 मार्च 2013

उत्साहवर्धक


   आर्थिक संकट और निराशाजनक समाचारों के समय में पर्डयू विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने निर्णय लिया कि वे विश्वविद्यालय के प्रांगण में प्रोत्साहन के शब्दों से लोगों का उत्साहवर्धन करेंगे। प्रत्येक बुधवार की दोपहर को वे दोनो छात्र, कैमरून ब्राउन और ब्रेट वैस्टकौट, एक व्यस्त मार्ग पर खड़े हो जाते, उनके हाथ में एक सूचना-पट्ट होता जिस पर लिखा रहता "निःशुल्क प्रशंसा" और उनके पास से होकर निकलने वाले हर जन से वे कुछ ना कुछ प्रशंसा की कोई भली बात कहते जैसे, "मुझे तुम्हारा लाल कोट बहुत पसन्द आया", "बहुत अच्छे जूते", "बहुत अच्छी मुस्कान" इत्यादि। कुछ छात्रों ने कहा कि वे जानबूझकर हर बुधवार उस मार्ग से जाते जहाँ वे दोनो खड़े हों जिससे अपने बारे में कुछ उत्साहवर्धक सुन सकें।

   उन दोनो के इस नज़रिए से मैं बहुत प्रभावित हुआ, कि कैसे उस कठिन समय में वे दोनो नकारात्मक रवैये को अपना कर आलोचना करने या गलती निकलने की मनसा से ग्रसित होने की बजाए एक सकारात्मक रवैया अपना सके और लोगों को प्रोत्साहित कर सके। उनके इस व्यवहार ने मुझे सोचने पर भी मजबूर किया कि एक मसीही विश्वासी होने के नाते मेरा दूसरे लोगों के प्रति रवैया कैसा है?

   दूसरों की बुराईयों पर केन्द्रित रहने वाले और अपने वचनों से आग लगाने वाले (नीतिवचन 16:27) व्यक्ति होने की बजाए हम मसीही विश्वासियों को दूसरों के लिए शांति, आशा और सांत्वना देने वाले बनना है। क्योंकि जो हमारे मनों में होता है वही हमारे मुंह पर भी आता है, इसलिए हमारे शब्द हमारे विश्वास को बता देंगे: "बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।  मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं (नीतिवचन 16:23-24)।

   नम्र और भले शब्द चाहे निःशुल्क हों, लेकिन उन से मिलने वाला उत्साहवर्धन बहुमूल्य होता है। आईए क्यों ना आज हम किसी के लिए उत्साहवर्धक बनें। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रशंसा के कोमल शब्द हल्के से होते हैं किंतु उनका प्रभावी वज़न बहुत होता है।

मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। - नीतिवचन 16:24

बाइबल पाठ: नीतिवचन 16:20-30
Proverbs 16:20 जो वचन पर मन लगाता, वह कल्याण पाता है, और जो यहोवा पर भरोसा रखता, वह धन्य होता है।
Proverbs 16:21 जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है।
Proverbs 16:22 जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है।
Proverbs 16:23 बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है।
Proverbs 16:24 मन भावने वचन मधु भरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं।
Proverbs 16:25 ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है।
Proverbs 16:26 परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है।
Proverbs 16:27 अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लग जाती है।
Proverbs 16:28 टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है।
Proverbs 16:29 उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसला कर कुमार्ग पर चलाता है।
Proverbs 16:30 आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है।

एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू 7-9 
  • लूका 1:21-38


बुधवार, 20 मार्च 2013

यादगार


   कुछ समय पहले हमारे एक मित्र दंपति ने, जो स्वयं अच्छे संगीतज्ञ हैं, कुछ ऐसे मित्रों को अपने घर आमंत्रित किया जो संगीत में रुचि रखते हैं। निमंत्रण के साथ ही उनका एक निवेदन भी था - प्रत्येक मेहमान अपने साथ एक पत्थर भी लेकर आएगा, जिस पर उनका नाम और वह तिथि अथवा घटना लिखी हो जब वे उनके मित्र बने थे। ये सभी पत्थर उनके आंगन में एक यादगार के लिए उस तंदूर के पास रखे जाने थे जहाँ वे अकसर अपनी संगीत सभाएं आयोजित किया करते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम पाते हैं कि परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को कुछ महत्वपुर्ण घटनाओं की यादगार बना कर रखने के लिए कहा था। जब इस्त्राएली मिस्त्र के दासत्व से निकल कर आए थे और परमेश्वर की सहायता से लाल समुद्र के पार हुए थे और उनका पीछा कर रही मिस्त्री सेना उस समुद्र में डूब मरी थी तब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को इस घटना की यादगार पत्थरों द्वारा बनाने को कहा (निर्गमन 14:21-31), जिससे जब आने वाले समय में उनके बच्चे उन पत्थरों के बारे में उनसे पूछें तो वे उन्हें परमेश्वर के महान कार्य के बारे में बता सकें (यहोशू 4:23-24)| इसी प्रकार वाचा किए हुए कनान देश में इस्त्राएलियों के प्रवेश करने के समय यर्दन नदी उफान पर थी परन्तु परमेश्वर ने उसके प्रवाह को रोक कर इस्त्राएलियों को पार उतर जाने का मार्ग दिया जिसकी यादगार भी उन्होंने परमेश्वर के कहने पर पत्थरों द्वारा बनाई (यहोशू 3:13-17)।

   जैसे परमेश्वर लगातार इस्त्राएलियों की सहायता करता रहा है, वैसे ही वह आज हमारी भी सहायता करता रहता है। वह हमारी आवश्यकताओं को पूरा करता है, हमें सुरक्षित रखता है, हमारा मार्गदर्शन करता है। क्या आपने अपने जीवन में हो रहे परमेश्वर के बड़े कामों की कोई यादगार बना रखी है, जिसके द्वारा आप अपने बच्चों और नाती-पोतों को उसके महान कामों के बारे में बता सकें; या स्वयं उन्हें स्मरण कर सकें। - सिंडी हैस कैस्पर


परमेश्वर के कार्यों को स्मरण करना शक करने का अच्छा प्रतिरोधक है।

तब उसने इस्राएलियों से कहा, आगे को जब तुम्हारे लड़के-बाले अपने अपने पिता से यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है? तब तुम यह कहकर उन को बताना, कि इस्राएली यरदन के पार स्थल ही स्थल चले आए थे। - यहोशू 4:21-22

बाइबल पाठ: यहोशू 4
Joshua 4:1 जब उस सारी जाति के लोग यरदन के पार उतर चुके, तब यहोवा ने यहोशू से कहा,
Joshua 4:2 प्रजा में से बारह पुरूष, अर्थात गोत्र पीछे एक एक पुरूष को चुनकर यह आज्ञा दे,
Joshua 4:3 कि तुम यरदन के बीच में, जहां याजकों ने पांव धरे थे वहां से बारह पत्थर उठा कर अपने साथ पार ले चलो, और जहां आज की रात पड़ाव होगा वहीं उन को रख देना।
Joshua 4:4 तब यहोशू ने उन बारह पुरूषों को, जिन्हें उसने इस्राएलियों के प्रत्येक गोत्र में से छांटकर ठहरा रखा था,
Joshua 4:5 बुलवाकर कहा, तुम अपने परमेश्वर यहोवा के सन्दूक के आगे यरदन के बीच में जा कर इस्राएलियों के गोत्रों की गिनती के अनुसार एक एक पत्थर उठा कर अपने अपने कन्धे पर रखो,
Joshua 4:6 जिस से यह तुम लोगों के बीच चिन्हानी ठहरे, और आगे को जब तुम्हारे बेटे यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है?
Joshua 4:7 तब तुम उन्हें उत्तर दो, कि यरदन का जल यहोवा की वाचा के सन्दूक के साम्हने से दो भाग हो गया था; क्योंकि जब वह यरदन पार आ रहा था, तब यरदन का जल दो भाग हो गया। सो वे पत्थर इस्राएल को सदा के लिये स्मरण दिलाने वाले ठहरेंगे।
Joshua 4:8 यहोशू की इस आज्ञा के अनुसार इस्राएलियों ने किया, जैसा यहोवा ने यहोशू से कहा था वैसा ही उन्होंने इस्राएलियों ने किया, जैसा यहोवा ने यहोशू से कहा था वैसा ही उन्होंने इस्राएली गोत्रों की गिनती के अनुसार बारह पत्थर यरदन के बीच में से उठा लिये; और उन को अपने साथ ले जा कर पड़ाव में रख दिया।
Joshua 4:9 और यरदन के बीच जहां याजक वाचा के सन्दूक को उठाए हुए अपने पांव धरे थे वहां यहोशू ने बारह पत्थर खड़े कराए; वे आज तक वहीं पाए जाते हैं।
Joshua 4:10 और याजक सन्दूक उठाए हुए उस समय तक यरदन के बीच खड़े रहे जब तक वे सब बातें पूरी न हो चुकीं, जिन्हें यहोवा ने यहोशू को लोगों से कहने की आज्ञा दी थी। तब सब लोग फुर्ती से पार उतर गए;
Joshua 4:11 और जब सब लोग पार उतर चुके, तब याजक और यहोवा का सन्दूक भी उनके देखते पार हुए।
Joshua 4:12 और रूबेनी, गादी, और मनश्शे के आधे गोत्र के लोग मूसा के कहने के अनुसार इस्राएलियों के आगे पांति बान्धे हुए पार गए;
Joshua 4:13 अर्थात कोई चालीस हजार पुरूष युद्ध के हथियार बान्धे हुए संग्राम करने के लिये यहोवा के साम्हने पार उतरकर यरीहो के पास के अराबा में पहुंचे।
Joshua 4:14 उस दिन यहोवा ने सब इस्राएलियों के साम्हने यहोशू की महिमा बढ़ाई; और जैसे वे मूसा का भय मानते थे वैसे ही यहोशू का भी भय उसके जीवन भर मानते रहे।।
Joshua 4:15 और यहोवा ने यहोशू से कहा,
Joshua 4:16 कि साक्षी का सन्दूक उठाने वाले याजकों को आज्ञा दे कि यरदन में से निकल आएं।
Joshua 4:17 तो यहोशू ने याजकों को आज्ञा दी, कि यरदन में से निकल आओ।
Joshua 4:18 और ज्योंही यहोवा की वाचा का सन्दूक उठाने वाले याजक यरदन के बीच में से निकल आए, और उनके पांव स्थल पर पड़े, त्योंही यरदन का जल अपने स्थान पर आया, और पहिले की नाईं कड़ारो के ऊपर फिर बहने लगा।
Joshua 4:19 पहिले महिने के दसवें दिन को प्रजा के लोगों ने यरदन में से निकलकर यरीहो के पूर्वी सिवाने पर गिलगाल में अपने डेरे डाले।
Joshua 4:20 और जो बारह पत्थर यरदन में से निकाले गए थे, उन को यहोशू ने गिलगाल में खड़े किए।
Joshua 4:21 तब उसने इस्राएलियों से कहा, आगे को जब तुम्हारे लड़के-बाले अपने अपने पिता से यह पूछें, कि इन पत्थरों का क्या मतलब है?
Joshua 4:22 तब तुम यह कहकर उन को बताना, कि इस्राएली यरदन के पार स्थल ही स्थल चले आए थे।
Joshua 4:23 क्योंकि जैसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने लाल समुद्र को हमारे पार हो जाने तक हमारे साम्हने से हटाकर सुखा रखा था, वैसे ही उसने यरदन का भी जल तुम्हारे पार हो जाने तक तुम्हारे साम्हने से हटाकर सुखा रखा;
Joshua 4:24 इसलिये कि पृथ्वी के सब देशों के लोग जान लें कि यहोवा का हाथ बलवन्त है; और तुम सर्वदा अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानते रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 4-6 
  • लूका 1:1-20

मंगलवार, 19 मार्च 2013

पहन लो


   जब बचपन में मैंने अमेरिकन फुटबॉल खेलना आरंभ किया था तो एक बात जिसके आदी होने में कुछ समय लगा वह थी उस खेल से संबंधित वेश-भूषा। सिर पर हेल्मेट, कंधों और छाती पर मोटी गद्दीयाँ और अन्य सुरक्षात्मक वस्तुएं पहन कर खेल के मैदान में दौड़ना अटपटा लगता था किंतु कुछ समय बीतने पर यह सब एक अच्छे मित्र के समान लगने लगा जो मेरी सुरक्षा के लिए साथ रहता हो। जब इस खेल का खिलाड़ी यह सब वस्तुएं पहनता है तो वह जानता है कि यह खतरनाक प्रतिद्वन्दीयों से उसकी रक्षा के लिए और उसकी अपनी भलाई के लिए हैं।

   मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण हमारा भी एक बहुत खतरनाक प्रतिद्वन्दी है - शैतान, जो सदा हमें गिराने और हानि पहूँचाने के प्रयासों में लगा रहता है। इसीलिए प्रभु यीशु ने हमारी सुरक्षा के लिए कुछ वस्तुएं दीं हैं जिन्हें हमें पहने रहना है, जिससे उस आत्मिक युद्ध में जिसमें हर मसीही विश्वासी रहता है, हम सुरक्षित रहें: "इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको" (इफीसियों 6:13)।

   परमेश्वर ने हमारी सुरक्षा के लिए हमें टोप, झिलम, ढाल, तलवार, कमरबन्द और जूते सभी दीए हैं। लेकिन ये सब हमारी सुरक्षा तभी कर सकेंगे जब हम इन्हें पहने कर रखेंगे - चाहे यह हमें आरामदायक ना भी लगें, तौभी इन सभी को पहने रहना हमारी सुरक्षा के लिए आवश्यक है। हमारा परमेश्वर के वचन के अध्ययन में विश्वासयोग्य, प्रार्थना में संलग्न, मसीही जीवन की गवाही में तत्पर होना ही हमारे इस सुरक्षा कवच को हमारा अभिन्न अंग बनाएगा।

   परमेश्वर के लिए कार्यकारी होना है तो परमेश्वर के हथियार और कवच को पहन लो। - बिल क्राउडर


परमेश्वर के हथियार और कवच आपके लिए ही बनाए गए हैं, लेकिन उन्हें पहिने रहना आपका दायित्व है।

निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्‍त बनो। - इफिसीयों 6:10

बाइबल पाठ: इफिसीयों 6:11-19
Ephesians 6:11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको।
Ephesians 6:12 क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्‍टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।
Ephesians 6:13 इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्‍ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा कर के स्थिर रह सको।
Ephesians 6:14 सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मीकता की झिलम पहिन कर।
Ephesians 6:15 और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर।
Ephesians 6:16 और उन सब के साथ विश्वास की ढाल ले कर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्‍ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको।
Ephesians 6:17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो।
Ephesians 6:18 और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।
Ephesians 6:19 और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूं जिस के लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 1-3 
  • मरकुस 16

सोमवार, 18 मार्च 2013

रोष


   मेरा एक मित्र है जिसने अपने परिचय कार्ड पर विख्यात मूर्तीकार रोडिन द्वारा बनाई मूर्ति The Thinker (विचारक) का चित्र बनवा रखा है और उसके नीचे लिखवाया है "जीवन निष्पक्ष नहीं है"।

   यह सच है, जीवन सचमुच में निष्पक्ष नहीं है, और यदि कोई सिद्धांत जीवन के निष्पक्ष होने पर अड़ा रहता है तो वह सिद्धांत भ्रामिक है, असत्य है।

   जीवन के निष्पक्ष ना होने के कारण जो अति-महत्वपुर्ण बात सामने आती है, वह है जीवन की बातों और उतार-चढ़ाव के प्रति हमारा रवैया और प्रतिक्रीया। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद ने भजन 37 में कहा कि वह बदला नहीं लेगा वरन धैर्य से परमेश्वर के न्याय और समय की प्रतीक्षा करेगा "क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (भजन 37:9)।

   हमारा प्रतिशोध तो बदले की भावना और चोट पहुँचाने के उद्देश्य से प्रेरित हो सकता है, लेकिन परमेश्वर का क्रोध उसकी करुणा की सीमाओं के अन्दर और किसी बदले की भावना से बाहर होता है। उसके क्रोध का उद्देश्य भलाई होता है, तथा माध्यम और विधि विरोधियों को पश्चाताप और विश्वास में लाने के लिए होते हैं। इसीलिए हमें अपना पलटा आप नहीं लेना है: "हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:19, 21)।

   इस बात को जीवन में सार्थक होने के लिए यह भाव हृदय में होना चाहिए, जहाँ से जीवन की बातों का उद्गम है: "सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है" (नीतिवचन 4:23)। यह हमारा कर्तव्य है कि हम रोष से बचें, क्रोध ना करें और धैर्य के साथ परमेश्वर के न्याय की प्रतीक्षा करें। - डेविड रोपर


बदला ना लेना विजयी होना है।

अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। - भजन 37:5

बाइबल पाठ: भजन 37:7-11
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।
Psalms 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Psalms 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा।
Psalms 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34 
  • मरकुस 15:26-47

रविवार, 17 मार्च 2013

उपलब्ध


   "क्या आप मेरी बहन के लिए प्रार्थना करेंगे?" उस हृष्ट-पुष्ट और कद्दावर कर्मी ने हिचकिचाते हुए मुझसे प्रश्न किया, और मैंने बड़े ग़ौर से उसकी ओर शक भरी नज़रों से देखा।

   कुछ महीने पहले की बात है, जिस फैकट्री में मैं कार्य करता हूँ, वहाँ कर्मीयों द्वारा हड़ताल की संभावना बढ़ती जा रही थी। गर्मी के मौसम की परेशानियों ने लोगों के स्वभाव को चिड़-चिड़ा बना रखा था। फैकट्री के प्रबन्धक कार्य तथा उत्पादन को तेज़ी से बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे थे तो मज़दूर संघ के नेता इसका विरोध कर रहे थे। काम के समय के अवकाशों में उन नेताओं द्वारा हमें कहा जाता कि उत्पादन को कम ही रखें। मैं अपने मसीही विश्वास तथा आदर्शवादिता में होकर अधिक से अधिक परिश्रम करना परमेश्वर की ओर से अपना दायित्व समझता था, और मैंने यह बात अपने सहकर्मीयों और मज़दुर संघ के नेताओं को समझाने का व्यर्थ प्रयत्न भी किया। मेरी इस विचारधारा और प्रयास के कारण मुझे अपने सहकर्मियों से घोर विरोध एवं परेशानियों का सामना करना पड़ा; और यह कर्मी जो अब मेरे पास प्रार्थना की विनती लेकर आया था, उन तंग करने वालों में प्रमुख हुआ करता था।

   इसलिए उसकी इस प्रार्थना की विनती पर मुझे एकाएक विश्वास नहीं हुआ, मुझे लगा जैसे मेरे उपहास के लिए यह उसका कोई नया प्रयास है। मैंने उस से पूछा, "मैं क्यों?" उसके उत्तर ने मुझे झकझोर दिया, उसने रुंधे गले से कहा "क्योंकि उसे कैंसर है और मुझे कोई ऐसा व्यक्ति प्रार्थना के लिए चाहिए जिसकी परमेश्वर सुनता हो।" हमारे बीच की कड़ुवाहट जाती रही, और मैंने उसकी बहन के लिए प्रार्थना करी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के लूका ७ अध्याय में एक सूबेदार का उल्लेख है जिसने प्रभु यीशु के पास सहायता के लिए कुछ प्रमुख लोगों को भेजा। जब लोग परेशानी में होते हैं तो ना वे अपना समय और ना ही अपने शब्द व्यर्थ करते हैं; वे निवारण के लिए तुरंत उस व्यक्ति के पास जाते हैं जिसके विश्वास को उन्होंने सार्थक और खरा पाया हो।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा "तुम पृथ्वी के नमक हो"; "तुम जगत की ज्योति हो" (मत्ती 5:13, 14) - थोडा सा नमक भोजन का स्वाद बढ़ा देता है; ज्योति चाहे हल्की ही हो किंतु अन्धकार में सांत्वना देती है, मनों को शांत रखती है। पाप से बिगड़े हुए और अन्धकार में पड़े संसार में हम मसीही विश्वासी प्रभु यीशु की ओर से ठहराए हुए वे लोग हैं जो बिगड़ों को संवारने और परेशानों को शांति तथा सांत्वना देने वाले हों, उनकी सहायता के लिए तत्पर और उपलब्ध हों। हमारे विश्वास और मसीही जीवन को देखकर वे प्रभु यीशु की ओर आकर्षित हों।

   क्या आप के आस-पास के लोग आपको ऐसे मसीही विश्वासी के रूप में जानते हैं जो उनकी परेशानियों में उनकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं? क्या आप अपने स्थान पर संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु द्वारा दी गई ’नमक’ और ’ज्योति’ होने की ज़िम्मेदारी को निभा रहे हैं? - रैंडी किलगोर


जब कोई प्रीय जन जोखिम में हो तो कठोर मन वाले को भी सहायता चाहिए होती है।

उसने यीशु की चर्चा सुनकर यहूदियों के कई पुरनियों को उस से यह बिनती करने को उसके पास भेजा, कि आकर मेरे दास को चंगा कर। - लूका 7:3

बाइबल पाठ: लूका 7:1-10
Luke 7:1 जब वह लोगों को अपनी सारी बातें सुना चुका, तो कफरनहूम में आया।
Luke 7:2 और किसी सूबेदार का एक दास जो उसका प्रिय था, बीमारी से मरने पर था।
Luke 7:3 उसने यीशु की चर्चा सुनकर यहूदियों के कई पुरनियों को उस से यह बिनती करने को उसके पास भेजा, कि आकर मेरे दास को चंगा कर।
Luke 7:4 वे यीशु के पास आकर उस से बड़ी बिनती कर के कहने लगे, कि वह इस योग्य है, कि तू उसके लिये यह करे।
Luke 7:5 क्योंकि वह हमारी जाति से प्रेम रखता है, और उसी ने हमारे आराधनालय को बनाया है।
Luke 7:6 यीशु उन के साथ साथ चला, पर जब वह घर से दूर न था, तो सूबेदार ने उसके पास कई मित्रों के द्वारा कहला भेजा, कि हे प्रभु दुख न उठा, क्योंकि मैं इस योग्य नहीं, कि तू मेरी छत के तले आए।
Luke 7:7 इसी कारण मैं ने अपने आप को इस योग्य भी न समझा, कि तेरे पास आऊं, पर वचन ही कह दे तो मेरा सेवक चंगा हो जाएगा।
Luke 7:8 मैं भी पराधीन मनुष्य हूं; और सिपाही मेरे हाथ में हैं, और जब एक को कहता हूं, जा, तो वह जाता है, और दूसरे से कहता हूं कि आ, तो आता है; और अपने किसी दास को कि यह कर, तो वह उसे करता है।
Luke 7:9 यह सुनकर यीशु ने अचम्भा किया, और उसने मुंह फेरकर उस भीड़ से जो उसके पीछे आ रही थी कहा, मैं तुम से कहता हूं, कि मैं ने इस्राएल में भी ऐसा विश्वास नहीं पाया।
Luke 7:10 और भेजे हुए लोगों ने घर लौटकर, उस दास को चंगा पाया।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 30-31 
  • मरकुस 15:1-25