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बुधवार, 17 जुलाई 2013

फिट

   जब मैं अपने पहनने के लिए कपड़े खरीदने जाती हूँ तो कुछ बातें हैं जो वहाँ उपस्थित लोगों को सुनने को मिलती हैं - बहुत लंबा है; बहुत छोटा है; बहुत बड़ा है; बहुत तंग है; बहुत ढीला है आदि! सही रीति से ’फिट’ आने वाले वस्त्र ढूँढ पाना लगभग असंभव लगता है।

   बहुत से लोगों के लिए यही समस्या एक ऐसा चर्च ढूँढने में भी होती है जो उनके लिए बिलकुल ’फिट’ हो! उन्हें प्रत्येक चर्च में कुछ ना कुछ ऐसा दिखता ही है जो उनके अनुसार सही नहीं है। कहीं उन्हें लगता है कि उनके गुण और उपयोगिता का सही आँकलन और आदर नहीं होता, तो कहीं उनके मस्खरेपन का गलत अर्थ लगाया जाता है, तो किसी चर्च में उन्हें औरों के आचरण, विश्वास, कार्यक्रमों या उपस्थित लोगों से परेशानी रहती है। बस उन्हें यही लगता रहता है कि वे उस चर्च में ’फिट’ नहीं हो पा रहे हैं; उन्हें उस मण्डली के लोगों में उनका सही स्थान नहीं मिल पा रहा है।

   लेकिन हम मसीही विश्वासी यह भी जानते हैं कि यह परमेश्वर कि आज्ञा है कि हम आपस में मेल-मिलाप के साथ और एक-दूसरे की सहायतार्थ चर्च में रहें। प्रेरित पौलुस ने इफिसियों की मण्डली को लिखा कि "जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो" (इफिसियों 2:21-22)। अर्थात सभी मसीही विश्वासी मिलकर परमेश्वर का निवास स्थान बनते जा रहे हैं, जैसे मूसा के समय में मिलापवाला तम्बू (निर्गमन 26) और राजा सुलेमान के दिनों में वह भव्य मन्दिर (1 राजा 6:1-14) था। जैसे उस तम्बू और फिर उस मन्दिर में सभी भिन्न वस्तुएं मिलकर एक ऐसी इकाई बन गई थीं जो एक साथ मिलकर परमेश्वर के आदर, आरधना और निवास का स्थान हो गईं, वैसे ही आज हम मसीही विश्वासीयों को भी भिन्न होते हुए भी मिलजुल कर और एक मन होकर एक ऐसा समाज होना है जहाँ संसार परमेश्वर के आदर, आराधना और निवास को देख सके।

   हमें कभी भी कोई भी चर्च हमारे अपने आँकलन के अनुसार सिद्ध नहीं मिलेगा, लेकिन मसीही स्वभाव को लेकर यह हमारा प्रयास रहना चाहिए कि बजाए दूसरों को अपने प्रति ’फिट’ करने के, हम ही पहल करके उनके साथ ’फिट’ होने का प्रयास करें और हम सभी एक मन और एक उद्देश्य के लोग हों जो परमेश्वर की महिमा के लिए एक दूसरे के साथ ’फिट’ होकर रहें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु का प्रेम भिन्नता में भी एकता और प्रेम उत्पन्न कर सकता है।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19 
  • प्रेरितों 20:17-38


मंगलवार, 16 जुलाई 2013

खाली रखें

   "कितनी खराब बनावट है इसकी" मैं खिसियाकर बोली; मैं कूड़ेदान को खाली कर रही थी और सदा ही खाली करते समय कुछ कूड़ा बाहर कालीन पर गिर जाता था जो मेरी मेहनत और खिसियाहट को और बढ़ा देता था। एक दिन जब मैं फिर से कूड़ेदान को खाली करने लगी तो खाली करने के विषय में कुछ शंका उठी, क्योंकि कूड़ेदान अभी आधा ही भरा था। फिर मैंने सोचा चलो कर ही देती हूँ, और कूड़ेदान के मूँह पर पहले के समान ही प्लास्टिक की थैली लगाकर जैसे ही उसे उल्टा किया, तो आशा के विपरीत इस बार कूड़े का एक अंश भी बाहर कालीन पर नहीं गिरा। मुझे थोड़ा विस्मय हुआ, फिर थोड़ा विचार करने पर बात समझ में आ गई।

   जिस बात को लेकर मैं खिसियाती रहती थी, वह कूड़ेदान की बनावट का दोष नहीं था वरन मेरी ही गलती थी। मैं ही कूड़ेदान को खाली करने से पहले उसे ऊपर तक भर जाने देती थी, जिससे जैसे ही कूड़ेदान ज़रा सा टेढ़ा होता तो कूड़ा प्लास्टिक की थैली में जाने से पहले ही बाहर गिरने लग जाता। अब क्योंकि कूड़ा ऊपर तक नहीं भरा था इसलिए खाली करने को पलटने के समय वह बाहर नहीं गिर पाया, लगी हुई थैली में ही गिरा और कालीन गन्दा होने से बच गया तथा मैं खिसियाने से।

   यही हमारे जीवन में गलतियों और पापों के साथ भी होता है। यदि हम अपने मनों को गलतीयों और पापों से भर जाने देंगे, तो वे हमारे और हमारे आस-पास के लोगों के जीवन में कुछ ना कुछ दुष्प्रभाव अवश्य ही दिखाएंगे, क्योंकि "... बुरा मनुष्य अपने मन के बुरे भण्‍डार से बुरी बातें निकालता है; क्योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुंह पर आता है" (लूका 6:45)। लेकिन कितना भला हो यदि हम जैसे ही हमारे अन्दर कुछ अनुचित या बुरा आए उसे परमेश्वर के सामने मान लें और उसे सौंप दें - अपने मन को ’खाली’ कर लें; क्योंकि परमेश्वर का वायदा है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। ऐसा करने से हमारे मन की गन्दगी कहीं और प्रभाव डालने से पहले ही साफ हो जाएगी और हमारे जीवन भी स्वच्छ बने रहेंगे।

   कूड़ेदान तो गन्दगी जमा रखने के लिए ही बनाए गए हैं, लेकिन एक सीमा से अधिक गन्दगी उनमें एकत्रित होगी तो इधर उधर फैलेगी भी और दुष्प्रभाव भी लाएगी। लेकिन हमारे शरीर और मन तो गन्दगी के लिए नहीं बने हैं। इसलिए भला रहेगा यदि हम अपने जीवनों को हर प्रकार की मलिनता से खाली रखें क्योंकि "क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो" (1 कुरिन्थियों 6:19-20)।


भलाई इसी में है कि हम अपने पापों को मान लें - वैसे भी परमेश्वर से तो उन्हें छिपा नहीं सकते!

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:17-32
Ephesians 4:17 इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो।
Ephesians 4:18 क्योंकि उनकी बुद्धि अन्‍धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्वर के जीवन से अलग किए हुए हैं।
Ephesians 4:19 और वे सुन्न हो कर, लुचपन में लग गए हैं, कि सब प्रकार के गन्‍दे काम लालसा से किया करें।
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17 
  • प्रेरितों 20:1-16


सोमवार, 15 जुलाई 2013

सीमा

   गोल्फ के खेल मैदान में विशेष चिन्ह लगे होते हैं जो खेल मैदान की सीमा को दिखाते हैं। यदि गोल्फ की गेंद उन चिन्हों के बाहर जाती है तो खिलाड़ी को एक दण्ड चुकाकर ही उसे वापस सीमा के अन्दर लेने और फिर खेल में बने रहने का अवसर लेना होता है।

   जीवन यात्रा में भी परमेश्वर ने हम सभी के लिए कुछ सीमाएं निर्धारित करी हैं, जिन का उल्लंघन करने पर एक कीमत चुकानी ही पड़ती है। यर्मियाह भविष्यद्वक्ता ने इस्त्राएल के लोगों को उनके द्वारा बार बार परमेश्वर की सीमाओं के उल्लंघन के बारे में चिताया। अपनी चेतावनी में उस ने उन से कहा समुद्र भी अपनी सीमा जानता है (यर्मियाह 5:22) लेकिन परमेश्वर के नाम से जाने वाले इस्त्राएली लोग हठीले और बलवाई हो गए (पद 23), उन में उस परमेश्वर का भय ही नहीं रहा जो उन्हें उपज के लिए समयानुसार बरसात का पानी देता है (पद 24)। वे छल से भर गए और कंगालों को भी उनका हक नहीं देते (पद 26-28)।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में मनुष्यों के लिए कुछ नैतिक सीमाएं निर्धारित कर के दी हैं। इन सीमाओं का उद्देश्य हमें बांधे रखने और कुंठित करना नहीं है, वरन नुकसान से बचाए रखना और परमेश्वर की आशीषों से परिपूर्ण रखना है। भजनकार ने अपने अनुभव के आधार पर परमेश्वर के वचन में लिखा है: "हे यहोवा, मैं जान गया कि तेरे नियम धर्ममय हैं, और तू ने अपने सच्चाई के अनुसार मुझे दु:ख दिया है" (भजन 119:75)। परमेश्वर ने अपने वचन और नियम मूसा के द्वारा इस्त्राएल के लोगों को देने के बाद मूसा के द्वारा ही उन से कहा: "मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें" (व्यवस्थाविवरण 30:19)।

   हमारी भलाई इसी में है कि हम परमेश्वर द्वारा निर्धारित सीमाओं को जाने, उन्हें भली भांति पहचाने और उनके अन्दर ही जीवन व्यतीत करें। अन्यथा सीमा का उल्लंघन करने के बाद एक कीमत चुकाकर, कुछ कष्ट उठाकर ही जीवन दोबारा सही मार्ग पर लाया जा सकेगा। - सी० पी० हीया


परमेश्वर की आज्ञाकारिता में उठाया गया एक छोटा कदम उससे आशीष पाने का एक बड़ा माध्यम होता है।

मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा; क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है। - भजन 119:93

बाइबल पाठ: यर्मियाह 5:20-31
Jeremiah 5:20 याकूब के घराने में यह प्रचार करो, और यहूदा में यह सुनाओ:
Jeremiah 5:21 हे मूर्ख और निर्बुद्धि लोगो, तुम जो आंखें रहते हुए नहीं देखते, जो कान रहते हुए नहीं सुनते, यह सुनो।
Jeremiah 5:22 यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम लोग मेरा भय नहीं मानते? क्या तुम मेरे सम्मुख नहीं थरथराते? मैं ने बालू को समुद्र का सिवाना ठहराकर युग युग का ऐसा बान्ध ठहराया कि वह उसे लांघ न सके; और चाहे उसकी लहरें भी उठें, तौभी वे प्रबल न हो सकें, या जब वे गरजें तौभी उसको न लांघ सकें।
Jeremiah 5:23 पर इस प्रजा का हठीला और बलवा करने वाला मन है; इन्होंने बलवा किया और दूर हो गए हैं।
Jeremiah 5:24 वे मन में इतना भी नहीं सोचते कि हमारा परमेश्वर यहोवा तो बरसात के आरम्भ और अन्त दोनों समयों का जल समय पर बरसाता है, और कटनी के नियत सप्ताहों को हमारे लिये रखता है, इसलिये हम उसका भय मानें।
Jeremiah 5:25 परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ही के कारण वे रुक गए, और तुम्हारे पापों ही के कारण तुम्हारी भलाई नहीं होती।
Jeremiah 5:26 मेरी प्रजा में दुष्ट लोग पाए जाते हैं; जैसे चिड़ीमार ताक में रहते हैं, वैसे ही वे भी घात लगाए रहते हैं। वे फन्दा लगाकर मनुष्यों को अपने वश में कर लेते हैं।
Jeremiah 5:27 जैसा पिंजड़ा चिडिय़ों से भरा हो, वैसे ही उनके घर छल से भरे रहते हैं; इसी प्रकार वे बढ़ गए और धनी हो गए हैं।
Jeremiah 5:28 वे मोटे और चिकने हो गए हैं। बुरे कामों में वे सीमा को लांघ गए हैं; वे न्याय, विशेष कर के अनाथों का न्याय नहीं चुकाते; इस से उनका काम सफल नहीं होता: वे कंगालों का हक़ भी नहीं दिलाते।
Jeremiah 5:29 इसलिये, यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं इन बातों का दण्ड न दूं? क्या मैं ऐसी जाति से पलटा न लूं?
Jeremiah 5:30 देश में ऐसा काम होता है जिस से चकित और रोमांचित होना चाहिये।
Jeremiah 5:31 भचिष्यद्वक्ता झूठमूठ भविष्यद्वाणी करते हैं; और याजक उनके सहारे से प्रभुता करते हैं; मेरी प्रजा को यह भाता भी है, परन्तु अन्त के समय तुम क्या करोगे?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15 
  • प्रेरितों 19:21-41


रविवार, 14 जुलाई 2013

पूर्वधारणा

   घटना अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना प्रांत के ग्रीन्सबोरो शहर में 1 फरवरी 1960 की है, जहाँ चार काले विद्यार्थी जाकर एक ऐसे स्थान पर भोजन करने बैठ गए जो केवल गोरे लोगों के लिए निर्धारित करी हुई थी। उन चार छात्रों में से एक, फ्रांसिस मक्कैन ने देखा कि पास ही के स्थान पर बैठी एक वृद्ध श्वेत महिला उन्हें बड़े ध्यान से देख रही है। मक्कैन को निश्चित था कि उस महिला के विचार उनके और रंगभेद नीति के विरुद्ध उनके इस विरोधप्रदर्शन के प्रति अच्छे नहीं होंगे। थोड़ी ही देर में वह महिला उठी और उन की ओर बढ़ी, पास आकर उसने अपना हाथ उठाया और फिर उनकी पीठ थपथपाते हुए बोली, "लड़कों, मुझे तुम पर बहुत नाज़ है।"

   कई वर्षों के बाद एक राष्ट्रीय रेडियो प्रसारण पर इस घटना का उल्लेख करते हुए मक्कैन ने कहा कि इस घटना से मैंने सीखा कि किसी के बारे में ऐसे ही कोई पूर्वधारणा नहीं बनानी चाहिए; वरन उस व्यक्ति को अवसर देकर, उससे वार्तालाप और संपर्क करके तब ही उसके विषय में कोई आंकलन करना चाहिए।

   जैसा हम आज चर्च कि दशा को देखते हैं, प्रथम शताब्दी के चर्च में भी जाति, भाषा, संसकृति आदि के आधार पर लोगों में भेदभाव पाए जाते थे। इस प्रवृति को सही करने के लिए प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मण्डली को अपनी दूसरी पत्री में लिखा, कि वे बाहरी स्वरूप और व्यवहार पर नहीं लेकिन मन की बात के अनुसार लोगों को आंकें (2 कुरिन्थियों 5:12)। पौलुस ने उन्हें समझाया, क्योंकि प्रभु यीशु मसीह ने सब के पापों के बदले में और सबके उद्धार के लिए मृत्यु सही और फिर मृत्कों में से जी उठा, इसलिए "सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे..." (2 कुरिन्थियों 5:16)।

   हम सब मसीही विश्वासियों की यही सोच होनी चाहिए कि हम किसी के प्रति कभी कोई पूर्वधारणा नहीं रखें वरन प्रत्येक जन को सही समझ-बूझ के साथ और पूरा-पूरा अवसर देकर ही आंकें क्योंकि हम सब परमेश्वर ही के बनाए हुए हैं और उसने हमें अपने ही स्वरूप में रचा है; और फिर जिन्होंने प्रभु यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लिया है वे तो मसीह यीशु में एक नई सृष्टि हो ही गए हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो मायने रखती है वह व्यक्ति के अन्दर की बात है ना कि उसके बाहरी स्वरूप की।

सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। - 2 कुरिन्थियों 5:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:12-21
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं।
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे।
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12 
  • प्रेरितों 19:1-20


शनिवार, 13 जुलाई 2013

उपयोगी

   अपना 60वाँ जन्म दिन मनाने पर जीवन के प्रति मेरा दृष्टिकोण बहुत बदल गया, क्योंकि मैं सोचा करता था कि 60 वर्ष के लोग वास्तव में बहुत बुढ़े हो जाते हैं। अब मैं विचार करने और गिनने लगा कि मेरे जीवन में और कितने उपयोगी वर्ष बचे हैं, और मैंने अपने अन्दाज़े से 10 वर्ष और निर्धारित कर लिए। मैं इसी सीमा को ध्यान में रखे हुए कार्य करता रहा, जब तक कि मुझे ध्यान नहीं आया कि मेरा एक सहयोगी है जो अब 85 वर्ष का है और अपनी कार्य क्षमता के कारण अभी भी बहुत उपयोगी बना हुआ है। इसलिए मैं उसके पास गया और उससे पूछा कि उसके अनुभव के आधार पर 60 वर्ष की आयु के बाद जीवन कैसा होता है? उसने मुझे बताया कि पिछले 25 वर्षों में प्रभु ने उसे अद्भुत रीति से उपयोग किया है और सेवकाई के बहुत से अवसर दिए हैं; आयु बढ़ने से प्रभु के लिए उसकी उपयोगिता बिलकुल भी कम नहीं हुई है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस अपने लिए एक स्थान पर "बूढ़ा" शब्द प्रयोग करता है, जो मेरी विचारधारा के अनुरूप प्रतीत होता है: "तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं। मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं (फिलेमौन 1:9-10)। इस पत्री में पौलुस अपने मित्र फिलेमौन से आग्रह कर रहा था कि वह अपने भगोड़े दास ओनिसिमस को वापस स्वीकार कर ले, क्योंकि ओनिसेमस भी अब प्रभु यीशु का अनुयायी और पौलुस का सहयोगी हो गया था। बाइबल विशेषज्ञों का मानना है कि जब पौलुस ने यह पत्री लिखी थी तब संभवतः उसकी आयु 40-50 वर्ष के आस-पास की होगी; आज के मापदण्डों के हिसाब से वह एक प्रौढ़ नागरिक तो कतई नहीं माना जाता - लेकिन उन दिनों जीवन काल छोटे ही होते थे। अपनी उम्र का अंदाज़ा करते हुए भी पौलुस आगे भी कई वर्षों तक प्रभु की सेवा करता रहा और प्रभु यीशु के लिए उपयोगी बना रहा।

   हो सकता है कि हम शारीरिक परिस्थितियों या अन्य किसी गतिरोध का सामना कर रहे हों, लेकिन ये बातें हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए हमें उपयोगी होने से कभी रोक नहीं सकतीं; उन परिस्थितियों में भी हम से जो भी जैसा भी बन पड़ता है हम प्रभु के लिए करते रहें। संसार तो हमें एक आयु के बाद अपनी सेवा से हटा देता है - हमें ’सेवा-निवृत’ कर देता है, हमारे लिए आमदनी के द्वार बन्द कर देता है; लेकिन हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता हमें अपने लिए सदा उपयोगी बनाए रखता है और हमारे लिए उससे मिलने वाली आशीषों के द्वार कभी बन्द नहीं होते। इस पृथ्वी के जीवन से विदा लेकर हमारे उसके पास पहुँचने तक उसके लिए हमारी उपयोगिता और हमारे लिए उससे मिलने वाले आशीषें एकत्रित करने के अवसर सदा बने ही रहते हैं। - डेनिस फिशर


यदि आप राज़ी हैं तो परमेश्वर किसी भी उम्र में आपको अपने लिए उपयोगी बना सकता है।

तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं। मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं। - फिलेमौन 1:9-10

बाइबल पाठ: फिलेमौन 1:1-9
Philemon 1:1 पौलुस की ओर से जो मसीह यीशु का कैदी है, और भाई तिमुथियुस की ओर से हमारे प्रिय सहकर्मी फिलेमोन।
Philemon 1:2 और बहिन अफिफया, और हमारे साथी योद्धा अरखिप्‍पुस और फिलेमोन के घर की कलीसिया के नाम।
Philemon 1:3 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
Philemon 1:4 मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुन कर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है।
Philemon 1:5 सदा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं; और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्मरण करता हूं।
Philemon 1:6 कि तेरा विश्वास में सहभागी होना तुम्हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो।
Philemon 1:7 क्योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
Philemon 1:8 इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
Philemon 1:9 तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 7-9 
  • प्रेरितों 18


शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

समकालीन

   नई शताब्दी के इस आरंभिक समय में हम पहले से चले आ रहे और समय के साथ प्रमाणित मापदंडों के उपयोग के विषय में बहुत से लोगों को प्रश्न उठाते हुए देखते हैं। इस बात का एक सजीव उदाहरण है एक किशोर गायिका द्वारा, जो मसीह यीशु में विश्वास रखने का दावा करती है, दिया गया एक साक्षात्कार। इस साक्षात्कार में अपने द्वारा पहने जाने वाले बहुत छोटे और शरीर प्रदर्श्नात्मक वस्त्रों तथा शालीनता के मापदंडों के बारे में चर्चा करते हुए वह बोली "यह विचार बहुत पुरानी सोच का है।"

   इस युवती की यह बात सही भी है और गलत भी। सही इसलिए क्योंकि मसीही विश्वास से संबंध रखने वाले मापदंड वास्तव मे काफी प्राचीन हैं - वे आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे गए थे। गलत इसलिए क्योंकि उसका यह धारणा रखना कि क्योंकि बात पुरानी है इसलिए यों ही बेपरवाही से नज़रंदाज़ करी जा सकती हैं सही नहीं है। वास्तविकता यही है कि परमेश्वर के बाइबल के सिद्धांत "पुराने" नहीं समसामयिक हैं, क्योंकि परमेश्वर अटल और स्थिर है तथा उसके मापदंड और उसका वचन दोनो ही कभी बदलते नहीं हैं।

   जहाँ तक शालीनता का प्रश्न है, जब बाइबल महिलाओं के लिए कहती है कि "वैसे ही स्‍त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से" (1 तिमुथियुस 2:9 ) तो वह इसलिए कि सबके जीवन से परमेश्वर ही की महिमा हो और उसे ही आदर पहुँचे - और यह सिद्धांत केवल स्त्रियों पर ही नहीं वरन सभी पर लागू होता है, क्योंकि परमेश्वर के वचन में यह भी लिखा है कि "इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए" (रोमियों 12:2)। ये सिद्धांत, परमेश्वर के वचन के अन्य सिद्धांतों के समान आज भी एक भला और आदरणीय जीवन जीने के लिए हमारा वैसे ही मार्गदर्शन करते हैं जैसा तब करते थे जब पहली बार लिखे गए थे।

   इसलिए चाहे आप कोई पॉप-स्टार हों या सामान्य व्यक्ति, यदि आप परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार आचरण और जीवन व्यतीत कर रहें हैं तो "पुरानी सोच" का होने की चिंता ना करें - आप समकालीन ही हैं और सदा रहेंगे। - डेव ब्रैनन


जाँच कर देखिए - क्या आपके निर्णय और चुनाव परमेश्वर को महिमा एवं आदर देते हैं अथवा संसार और मनुष्यों को?

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों 12:1-2

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 2:8-10; 1 पतरस 3:3-5
1 Timothy 2:8 सो मैं चाहता हूं, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठा कर प्रार्थना किया करें।
1 Timothy 2:9 वैसे ही स्‍त्रियां भी संकोच और संयम के साथ सुहावने वस्‍त्रों से अपने आप को संवारे; न कि बाल गूंथने, और सोने, और मोतियों, और बहुमोल कपड़ों से, पर भले कामों से।
1 Timothy 2:10 क्योंकि परमेश्वर की भक्ति ग्रहण करने वाली स्‍त्रियों को यही उचित भी है।

1 Peter 3:3 और तुम्हारा सिंगार, दिखावटी न हो, अर्थात बाल गूंथने, और सोने के गहने, या भांति भांति के कपड़े पहिनना।
1 Peter 3:4 वरन तुम्हारा छिपा हुआ और गुप्‍त मनुष्यत्‍व, नम्रता और मन की दीनता की अविनाशी सजावट से सुसज्ज़ित रहे, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि में इसका मूल्य बड़ा है।
1 Peter 3:5 और पूर्वकाल में पवित्र स्‍त्रियां भी, जो परमेश्वर पर आशा रखती थीं, अपने आप को इसी रीति से संवारती और अपने अपने पति के आधीन रहती थीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 4-6 
  • प्रेरितों 17:16-34


गुरुवार, 11 जुलाई 2013

दृष्टिकोण

   मेरी जीविका शब्दों से है। चाहे मैं स्वयं लिखूँ अथवा किसी अन्य के लिखे को संपादित करूँ, मुझे शब्दों का सहारा लेना ही पड़ता है जिससे मैं पाठकों तक विचारों को सार्थक रूप में पहुँचा सकूँ। सामान्यतः मुझे किसी अन्य के द्वारा लिखे हुए में त्रुटियाँ देखने में कोई दिक्कत नहीं होती (लेकिन शायद मैं अपने लिखे में त्रुटियाँ उतनी ही सरलता से नहीं देख पाती), और मैं बिना किसी परेशानी के यह भी निर्णय कर लेती हूँ कि उन त्रुटियों को ठीक कैसे करा जाए। एक संपादक होने के नाते मुझे आलोचनात्मक रवैया रखने की ही पगार मिलती है और मेरा यही कार्य है कि मैं देखूँ कि शब्दों के प्रयोग में क्या घटी या त्रुटि रह गई है!

   लेकिन आलोचना कर पाने और उस त्रुटि को सुधार पाने की मेरी यही योग्यता मेरे लिए अयोग्यता बन जाएगी यदि मैं इसे व्यवसायिक से व्यक्तिगत जीवन में ले आऊँ और हर बात मे बस गलतियाँ ही ढूँढती रहूँ। हर समय और हर बात में गलतियों पर ही केंद्रित रहने से हम जीवन की बहुत सी भलाईयों को खो बैठते हैं।

   प्रेरित पौलुस के पास पर्याप्त कारण था कि वह उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करे जो उसका नुकसान चाह रहे थे। कुछ लोग थे जो प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार को निज स्वार्थ तथा पौलुस के क्लेषों को बढ़ाने के लिए कर रहे थे (फिलिप्पियों 1:16)। लेकिन पौलुस ने नकारात्मक की बजाए उनके प्रति एक सकारात्मक रवैया अपनाया, और खेदित होने की बजाए आनन्दित हुआ, क्योंकि कैसे भी और किसी भी उद्देश्य के साथ ही क्यों ना हो, मसीह यीशु में उद्धार प्राप्त होने का प्रचार तो हो ही रहा था (फिलिप्पियों 1:18)। इस बात के महत्व को हम और भी समझने पाते हैं जब यह देखते हैं कि इस घटना के समय पौलुस बन्दीगृह में पड़ा परेशानियाँ उठा रहा था।

   परमेश्वर हमसे यह अवश्य चाहता है कि हम समझ-बूझ के साथ कार्य करें और भले बुरे में अन्तर देखें, लेकिन वह यह नहीं चाहता कि हम बस बुरे पर ही केंद्रित रहें और आलोचना करते रहने और निराशा फैलाने में लगे रहें। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी क्यों ना हों - पौलुस ने जब फिलिप्पियों को यह पत्री लिखी तब वह किसी अनुकूल परिस्थिति में नहीं था, हम हर बात में कुछ ना कुछ भला देख ही लेंगे यदि यह मान कर चलेंगे कि इन परिस्थितियों और बातों में भी परमेश्वर अपना कार्य कर रहा है और उनके द्वारा कुछ अच्छा ही करने जा रहा है! - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि समस्याएं आपके दृष्टिकोण को धुंधला करने लगें तो अपनी नज़रें प्रभु यीशु पर केंद्रित कर लीजिए।

हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। - फिलिप्पियों 1:12 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-18
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं।
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से।
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं।
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें।
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3 
  • प्रेरितों 17:1-15